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  • आईआईटी बीएचयू से पढ़े अनिल चक्रवर्ती बने एडोबी के नए सीईओ, शांतनु नारायण संभालेंगे एग्जीक्यूटिव चेयरमैन की जिम्मेदारी

    आईआईटी बीएचयू से पढ़े अनिल चक्रवर्ती बने एडोबी के नए सीईओ, शांतनु नारायण संभालेंगे एग्जीक्यूटिव चेयरमैन की जिम्मेदारी


    नई दिल्ली ।
    सिलिकॉन वैली की दिग्गज टेक कंपनी एडोबी ने नेतृत्व में बड़ा बदलाव करते हुए अनिल चक्रवर्ती को अपना नया मुख्य कार्यकारी अधिकारी नियुक्त किया है। वह करीब 18 वर्षों तक कंपनी का नेतृत्व करने वाले शांतनु नारायण की जगह लेंगे। नेतृत्व परिवर्तन ऐसे समय हुआ है जब एडोबी को जनरेटिव एआई के तेजी से बढ़ते प्रभाव और बाजार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच अपने कारोबार को आगे बढ़ाने की चुनौती है।

    शांतनु नारायण अब एडोबी के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन की भूमिका निभाएंगे। उनके कार्यकाल में कंपनी ने अपने पारंपरिक सॉफ्टवेयर कारोबार को बड़े स्तर पर बदला और फोटोशॉप जैसे प्रमुख उत्पादों को सब्सक्रिप्शन आधारित क्रिएटिव क्लाउड मॉडल की दिशा में आगे बढ़ाया। यह बदलाव शुरुआती दौर में विवाद और विरोध के बावजूद कंपनी के लिए महत्वपूर्ण साबित हुआ।

    अनिल चक्रवर्ती के लिए एडोबी की कमान संभालना उनके लंबे तकनीकी और प्रबंधन अनुभव का अगला बड़ा पड़ाव है। उन्होंने आईआईटी बीएचयू वाराणसी से कंप्यूटर साइंस में बीटेक की पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से एमएस और पीएचडी की डिग्री हासिल की।

    एडोबी में आने से पहले चक्रवर्ती इनफॉर्मेटिका के सीईओ रह चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने मैकिन्से, सिमेंटेक और वेरीसाइन जैसी कंपनियों में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। जनवरी 2020 में एडोबी से जुड़ने के बाद उन्होंने कंपनी के डिजिटल एक्सपीरियंस कारोबार की जिम्मेदारी संभाली और एआई आधारित पहलों को आगे बढ़ाने में भूमिका निभाई।

    नई जिम्मेदारी संभालने के बाद चक्रवर्ती के सामने सबसे बड़ी चुनौती जनरेटिव एआई से बदलता क्रिएटिव सॉफ्टवेयर बाजार होगा। मिडजर्नी और ओपनएआई जैसे एआई आधारित टूल्स ने डिजाइन, तस्वीर और वीडियो निर्माण को पहले की तुलना में आसान बनाया है। ऐसे में एडोबी को अपने प्रमुख उत्पादों को एआई के साथ और प्रभावी ढंग से जोड़ना होगा।

    कंपनी को कैनवा और फिग्मा जैसे ब्राउजर आधारित डिजाइन प्लेटफॉर्म से भी कड़ी प्रतिस्पर्धा मिल रही है। इन प्लेटफॉर्म्स ने खासकर नए डिजाइनरों और छोटे कारोबारों के बीच आसान और सहयोगात्मक डिजाइनिंग को लोकप्रिय बनाया है। ऐसे में एडोबी के लिए अपने मौजूदा पेशेवर ग्राहकों को बनाए रखने के साथ नए उपयोगकर्ताओं तक पहुंच बढ़ाना महत्वपूर्ण होगा।

    निवेशकों का भरोसा भी नई नेतृत्व टीम के लिए चुनौती रहेगा। उपलब्ध जानकारी के अनुसार कंपनी के शेयर 2025 में करीब 21 प्रतिशत गिरे थे और 2026 में भी अब तक लगभग 18 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। वित्तीय नेतृत्व में बदलाव के बीच कंपनी को बाजार की चिंताओं का जवाब भी देना होगा।

    चक्रवर्ती ने नई जिम्मेदारी को सम्मान बताते हुए कहा है कि कंपनी अब क्रिएटिविटी और प्रोडक्टिविटी के लिए एजेंटिक सॉफ्टवेयर के अगले दौर में प्रवेश कर रही है। उनके नेतृत्व में एडोबी की रणनीति इस बात पर काफी हद तक निर्भर करेगी कि कंपनी एआई को अपने मौजूदा उत्पादों की ताकत के साथ कितनी प्रभावी तरीके से जोड़ पाती है।

    इस बदलाव के साथ एडोबी में एक युग का अंत और नए दौर की शुरुआत हुई है। भारतीय मूल के चक्रवर्ती के सामने कंपनी की मजबूत विरासत को बनाए रखते हुए तेजी से बदलती एआई अर्थव्यवस्था में विकास की नई दिशा तय करने की जिम्मेदारी होगी।

  • छोटे स्टार्टअप को बनाया टेक दिग्गज, भारतीय मूल की जयश्री अमेरिका की शीर्ष सेल्फ-मेड महिलाओं में शामिल

    छोटे स्टार्टअप को बनाया टेक दिग्गज, भारतीय मूल की जयश्री अमेरिका की शीर्ष सेल्फ-मेड महिलाओं में शामिल

    नई दिल्ली । भारतीय मूल की कारोबारी नेता जयश्री उल्लाल ने वैश्विक तकनीकी जगत में एक ऐसी सफलता की कहानी लिखी है, जो दूरदर्शिता, नेतृत्व क्षमता और निरंतर मेहनत का प्रेरणादायक उदाहरण बन चुकी है। एक समय बेहद छोटे स्तर पर काम करने वाली कंपनी की कमान संभालने वाली जयश्री आज अमेरिका की सबसे सफल सेल्फ-मेड महिलाओं में शामिल हैं। उनकी उपलब्धि न केवल भारतीय समुदाय के लिए गर्व का विषय है, बल्कि दुनिया भर की महिला उद्यमियों और पेशेवरों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनी हुई है।

    जयश्री उल्लाल का शुरुआती जीवन भारत से गहराई से जुड़ा रहा। तकनीक और इंजीनियरिंग के प्रति उनकी रुचि ने उन्हें उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका पहुंचाया, जहां उन्होंने इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग और इंजीनियरिंग मैनेजमेंट की पढ़ाई पूरी की। तकनीकी क्षेत्र में मजबूत शैक्षणिक आधार ने उनके करियर की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

    अपने पेशेवर जीवन की शुरुआत उन्होंने सेमीकंडक्टर और तकनीकी कंपनियों में विभिन्न जिम्मेदारियों के साथ की। इसके बाद नेटवर्किंग उद्योग की अग्रणी कंपनियों में काम करते हुए उन्होंने तकनीकी नवाचार, उत्पाद विकास और वैश्विक व्यवसाय संचालन की गहरी समझ विकसित की। यही अनुभव आगे चलकर उनके लिए नेतृत्व की मजबूत नींव साबित हुआ।

    करियर का सबसे महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब उन्होंने एक उभरती हुई नेटवर्किंग कंपनी की कमान संभाली। उस समय कंपनी सीमित संसाधनों और बेहद कम बाजार हिस्सेदारी के साथ संघर्ष कर रही थी। अधिकांश विशेषज्ञों को उसके भविष्य पर संदेह था, लेकिन जयश्री ने बदलती तकनीकी दुनिया में नए अवसरों को समय रहते पहचान लिया। उन्होंने अनुमान लगाया कि क्लाउड कंप्यूटिंग और बड़े डेटा सेंटर आने वाले वर्षों में पूरी डिजिटल अर्थव्यवस्था की दिशा बदल देंगे।

    इस सोच के आधार पर कंपनी ने अपने उत्पादों और सेवाओं को आधुनिक क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरतों के अनुरूप विकसित करना शुरू किया। जैसे-जैसे दुनिया डिजिटल प्लेटफॉर्म, क्लाउड सेवाओं और बाद में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की ओर बढ़ी, कंपनी के समाधान तेजी से लोकप्रिय होते गए। परिणामस्वरूप कंपनी ने वैश्विक तकनीकी बाजार में मजबूत पहचान बनाई और निवेशकों का भरोसा भी हासिल किया।

    जयश्री के नेतृत्व में कंपनी ने न केवल कारोबार का विस्तार किया बल्कि नवाचार और गुणवत्ता के क्षेत्र में भी अपनी अलग पहचान स्थापित की। आज उसके उत्पाद दुनिया भर के बड़े डेटा सेंटरों, क्लाउड सेवा प्रदाताओं और तकनीकी संस्थानों में उपयोग किए जाते हैं। कंपनी की यह सफलता सीधे तौर पर जयश्री की रणनीतिक सोच और नेतृत्व क्षमता से जुड़ी मानी जाती है।

    जयश्री उल्लाल की उपलब्धि का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि उन्होंने यह मुकाम किसी पारिवारिक कारोबारी विरासत के सहारे नहीं बल्कि अपनी योग्यता, तकनीकी समझ और पेशेवर अनुभव के दम पर हासिल किया है। उनकी सफलता इस बात का उदाहरण है कि सही दृष्टिकोण, जोखिम उठाने का साहस और लगातार सीखते रहने की क्षमता किसी भी व्यक्ति को वैश्विक स्तर पर पहचान दिला सकती है।

    वैश्विक मंच पर भारतीय मूल की कई महिलाएं आज तकनीक, वित्त, स्वास्थ्य सेवा, मनोरंजन और कॉरपोरेट नेतृत्व के क्षेत्र में प्रभावशाली भूमिका निभा रही हैं। जयश्री उल्लाल की कहानी इसी नई पीढ़ी की सफलता का प्रतीक है, जिसने अपनी प्रतिभा और नेतृत्व के बल पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की प्रतिष्ठा को और मजबूत किया है।