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  • अमित शाह ने सीमा सुरक्षा पर जवानों से की चर्चा, बंगाल में BSF के लिए जमीन उपलब्ध कराने का दावा किया

    अमित शाह ने सीमा सुरक्षा पर जवानों से की चर्चा, बंगाल में BSF के लिए जमीन उपलब्ध कराने का दावा किया


    नई दिल्ली । 
    केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह शुक्रवार को पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी पहुंचे, जहां उन्होंने दो दिवसीय दौरे के दौरान सीमा सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर सुरक्षा बलों के अधिकारियों और जवानों से चर्चा की। बागडोगरा एयरपोर्ट पहुंचने के बाद उनका स्वागत राज्य के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने किया। इसके बाद अमित शाह एसएसबी कैंप पहुंचे और जवानों से मुलाकात की।

    एसएसबी कैंप में गृह मंत्री ने सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था, ऑपरेशनल तैयारियों और बॉर्डर मैनेजमेंट से संबंधित विभिन्न विषयों की जानकारी ली। उन्होंने सीमा क्षेत्रों में तैनात जवानों की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि देश की सीमाओं की सुरक्षा में सुरक्षा बलों का योगदान महत्वपूर्ण है। उन्होंने जवानों के साथ संवाद करते हुए सीमा पर आने वाली चुनौतियों और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने की जरूरत पर जोर दिया।

    इसी दौरान अमित शाह ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर भी राजनीतिक निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जब वह पहले गृह मंत्री के तौर पर जिम्मेदारी संभाल रहे थे, तब ममता बनर्जी को सशस्त्र सीमा बल के कार्यक्रमों में आमंत्रित किया जाता था, लेकिन वह इन कार्यक्रमों में शामिल नहीं हुईं। शाह ने सुरक्षा बलों के साथ राज्य सरकार के समन्वय को महत्वपूर्ण बताते हुए अपनी बात रखी।

    अमित शाह ने पश्चिम बंगाल में सीमा सुरक्षा के लिए जमीन उपलब्ध कराने के मुद्दे को भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने दावा किया कि राज्य में सीमा सुरक्षा बल के लिए 1,129 एकड़ जमीन उपलब्ध कराई गई है। उनके मुताबिक, सीमा सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए 29 एकड़ अतिरिक्त जमीन भी जल्द उपलब्ध कराई जाएगी।

    गृह मंत्री ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार अंतरराष्ट्रीय सीमा के संवेदनशील हिस्सों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और बाड़ लगाने की दिशा में लगातार काम करना चाहती थी, लेकिन राज्य स्तर पर जमीन उपलब्ध नहीं होने के कारण कुछ स्थानों पर काम प्रभावित हुआ। उन्होंने मौजूदा सरकार द्वारा जमीन उपलब्ध कराने को सीमा सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण कदम बताया।

    अमित शाह के सिलीगुड़ी दौरे का राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर महत्व माना जा रहा है। उत्तर बंगाल का यह क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय सीमाओं और रणनीतिक दृष्टि से संवेदनशील इलाकों के नजदीक है। ऐसे में गृह मंत्री के दौरे के दौरान सीमा प्रबंधन, घुसपैठ और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े विषयों पर चर्चा होना महत्वपूर्ण रहा।

    दौरे के दौरान अमित शाह सिलीगुड़ी के कावाखाली मैदान में आयोजित कार्यक्रम में भी शामिल होंगे। यहां वह आपराधिक प्रक्रिया से संबंधित प्रदर्शनी का उद्घाटन करेंगे। इसके बाद उनकी पार्टी की बैठक में शामिल होने की भी योजना है। शुक्रवार रात उनके सुकना स्थित एक होटल में ठहरने का कार्यक्रम है।

    शनिवार को गृह मंत्री पहाड़ी जिलों से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर बैठक करेंगे। इसके बाद उनका दिल्ली लौटने का कार्यक्रम है। उनके दौरे में सुरक्षा व्यवस्था के साथ उत्तर बंगाल के पहाड़ी क्षेत्रों से जुड़े विषयों को भी प्रमुखता मिलने की संभावना है।

    पश्चिम बंगाल में सीमा सुरक्षा और घुसपैठ लंबे समय से राजनीतिक बहस के प्रमुख मुद्दे रहे हैं। अमित शाह के ताजा दौरे में इन विषयों के साथ राज्य सरकार और केंद्र के बीच समन्वय का मुद्दा भी सामने आया। सिलीगुड़ी में उनकी गतिविधियों के बाद आने वाले समय में सीमा सुरक्षा और उत्तर बंगाल से जुड़े राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा और तेज होने की संभावना है।

  • तीस्ता परियोजना पर बांग्लादेश ने चीन के साथ बढ़ाई साझेदारी, भारत के पुराने प्रस्ताव के बीच नए समझौते से क्षेत्रीय रणनीति पर चर्चा तेज

    तीस्ता परियोजना पर बांग्लादेश ने चीन के साथ बढ़ाई साझेदारी, भारत के पुराने प्रस्ताव के बीच नए समझौते से क्षेत्रीय रणनीति पर चर्चा तेज

    नई दिल्ली । बांग्लादेश द्वारा तीस्ता नदी परियोजना के लिए चीन की सरकारी कंपनी के साथ समझौता किए जाने की खबरों ने दक्षिण एशिया की क्षेत्रीय राजनीति और सुरक्षा पर नई चर्चा शुरू कर दी है। यह परियोजना लंबे समय से बांग्लादेश की प्राथमिक जल संसाधन योजनाओं में शामिल रही है और भारत भी पूर्व में इसमें सहयोग की इच्छा जता चुका था। अब चीन के साथ आगे बढ़ती इस साझेदारी को दोनों देशों के बदलते रणनीतिक समीकरणों के रूप में देखा जा रहा है।

    रिपोर्टों के अनुसार बांग्लादेश ने तीस्ता परियोजना के लिए चीन की सरकारी कंपनी पावर चाइना के साथ सरकार-से-सरकार समझौता किया है। इसके तहत परियोजना के लिए दीर्घकालिक रियायती ऋण व्यवस्था की गई है, जिसकी पुनर्भुगतान अवधि लगभग 50 वर्ष बताई जा रही है। समझौते के बाद चीन के इंजीनियरों और तकनीकी विशेषज्ञों का एक दल परियोजना क्षेत्र में प्रारंभिक सर्वेक्षण के लिए पहुंचा है।

    बताया जा रहा है कि मानसून के दौरान तीस्ता नदी के प्रवाह, तलछट और कैचमेंट क्षेत्र का अध्ययन किया जाएगा ताकि बांध, तट संरक्षण, जल प्रबंधन और अन्य बुनियादी ढांचे की विस्तृत योजना तैयार की जा सके। बांग्लादेश की प्राथमिकता नदी के अतिरिक्त बहाव के बेहतर उपयोग और कृषि के लिए जल उपलब्धता बढ़ाने पर केंद्रित बताई जा रही है।

    तीस्ता नदी भारत और बांग्लादेश दोनों के लिए महत्वपूर्ण जल संसाधन है। नदी का उद्गम भारत के सिक्किम में है और यह पश्चिम बंगाल से होकर बांग्लादेश में प्रवेश करती है। इसी कारण इससे जुड़ी किसी भी बड़ी परियोजना का प्रभाव केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं माना जाता, बल्कि इसे द्विपक्षीय जल सहयोग और क्षेत्रीय रणनीति के व्यापक संदर्भ में भी देखा जाता है।

    सुरक्षा विशेषज्ञों की चिंता मुख्य रूप से परियोजना क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति को लेकर है। यह इलाका भारतीय सीमा और सिलीगुड़ी कॉरिडोर के अपेक्षाकृत निकट माना जाता है। सिलीगुड़ी कॉरिडोर भारत की मुख्य भूमि को पूर्वोत्तर राज्यों से जोड़ने वाला अत्यंत महत्वपूर्ण भू-भाग है, इसलिए वहां किसी बाहरी देश की दीर्घकालिक तकनीकी और अवसंरचनात्मक मौजूदगी पर स्वाभाविक रूप से रणनीतिक चर्चा होती है।

    पावर चाइना चीन की प्रमुख सरकारी अवसंरचना कंपनियों में से एक है और एशिया तथा अफ्रीका में कई बड़े ऊर्जा और जल प्रबंधन परियोजनाओं में सक्रिय रही है। हालांकि कंपनी को लेकर लगाए जा रहे सैन्य संबंधी दावों की स्वतंत्र पुष्टि सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है। फिर भी भारत में कुछ रणनीतिक विश्लेषक चीन की बढ़ती आर्थिक और तकनीकी मौजूदगी को व्यापक भू-राजनीतिक दृष्टिकोण से देख रहे हैं।

    इसी बीच बांग्लादेश और चीन के बीच रक्षा सहयोग बढ़ने की अटकलों ने भी चर्चा को और तेज कर दिया है। हालांकि संभावित लड़ाकू विमानों की आपूर्ति या अन्य सैन्य समझौतों को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में अंतिम निष्कर्ष निकालने से पहले दोनों देशों के आधिकारिक बयानों और औपचारिक समझौतों का इंतजार करना जरूरी होगा।

    कुल मिलाकर तीस्ता परियोजना केवल एक जल संसाधन योजना नहीं रह गई है, बल्कि यह दक्षिण एशिया में बदलते आर्थिक, रणनीतिक और कूटनीतिक समीकरणों का संकेतक बनती दिखाई दे रही है। आने वाले महीनों में परियोजना के सर्वेक्षण, वित्तीय शर्तों और निर्माण प्रक्रिया से जुड़े आधिकारिक विवरण सामने आने के बाद इसके वास्तविक प्रभाव का अधिक स्पष्ट आकलन संभव हो सकेगा।

  • राष्ट्रपति मुर्मू का सिलीगुड़ी कार्यक्रम विवाद: बंगाल सरकार पर गृह मंत्रालय ने रिपोर्ट तलब की, आदिवासी समुदाय की उपेक्षा का आरोप

    राष्ट्रपति मुर्मू का सिलीगुड़ी कार्यक्रम विवाद: बंगाल सरकार पर गृह मंत्रालय ने रिपोर्ट तलब की, आदिवासी समुदाय की उपेक्षा का आरोप


    नई दिल्ली । राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के कार्यक्रम स्थल परिवर्तन को लेकर पश्चिम बंगाल में विवाद तेज हो गया है। केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने बंगाल के मुख्य सचिव से इस घटना की रिपोर्ट तलब की है और निर्देश दिए हैं कि इसे आज शाम 5 बजे तक गृह मंत्रालय को भेजा जाए। 7 मार्च को होने वाले 9वें अंतरराष्ट्रीय संथाल कॉन्फ्रेंस में राष्ट्रपति को आमंत्रित किया गया था।
    मूल रूप से यह कार्यक्रम सिलीगुड़ी के बिधाननगर में होना तय था, लेकिन सुरक्षा और लॉजिस्टिक कारणों का हवाला देते हुए इसे बागडोगरा एयरपोर्ट के पास गोपालपुर में शिफ्ट कर दिया गया। राष्ट्रपति मुर्मू ने इस बदलाव पर नाराजगी जताई और कहा कि उन्हें लगता है कि बंगाल सरकार आदिवासियों का भला नहीं चाहती। नॉर्थ बंगाल दौरे के दौरान न तो मुख्यमंत्री और न ही कोई मंत्री उनका स्वागत करने आए।

    राष्ट्रपति ने कहा, ममता बनर्जी मेरी छोटी बहन जैसी हैं।

    मैं भी बंगाल की बेटी हूं। अगर कार्यक्रम बिधाननगर में होता तो बेहतर होता। वहां अधिक जगह थी और ज्यादा लोग कार्यक्रम में शामिल हो सकते थे।” उन्होंने बताया कि गोशाईपुर में जगह छोटी होने के कारण कई लोग कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सके। कार्यक्रम स्थल पर पहुँचने पर केवल सिलीगुड़ी के मेयर गौतम देब ही उनका स्वागत करने मौजूद थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस विवाद पर कहा कि राष्ट्रपति का पद पॉलिटिक्स से ऊपर है और इसकी गरिमा हमेशा बनी रहनी चाहिए। वहीं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि पश्चिम बंगाल पर टिप्पणी करने से पहले राष्ट्रपति को BJP शासित राज्यों की स्थिति भी देखनी चाहिए।
    राष्ट्रपति ने अपने भाषण में संथाल युवाओं से भाषा, परंपरा और शिक्षा को बचाने की अपील की और स्वतंत्रता संग्राम में संथाल समुदाय के योगदान को याद दिलाया। उन्होंने पंडित रघुनाथ मुर्मू द्वारा 1925 में बनाई गई ओल चिकी लिपि का स्मरण किया और आदिवासी युवाओं को शिक्षा, कौशल विकास और सांस्कृतिक संरक्षण पर ध्यान देने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि संथाल समुदाय ने सदियों से लोक संगीत, नृत्य और परंपराओं को सुरक्षित रखा है और आने वाली पीढ़ियों को शिक्षा और संस्कृति के संतुलन पर ध्यान देना चाहिए।

    राष्ट्रपति कार्यक्रम स्थल विवाद ने प्रशासन और राजनीतिक स्तर पर हलचल मचा दी है। गृह मंत्रालय ने बंगाल सरकार से रिपोर्ट तलब कर जांच शुरू कर दी है, वहीं आदिवासी समुदाय और देशभर में लोग इस मुद्दे पर संवेदनशील प्रतिक्रिया दे रहे हैं।