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  • सोना-चांदी में आग! एक दिन में ₹3000 उछला गोल्ड, ₹2.46 लाख पहुंची चांदी, क्या अभी खरीदना सही या खतरा?

    सोना-चांदी में आग! एक दिन में ₹3000 उछला गोल्ड, ₹2.46 लाख पहुंची चांदी, क्या अभी खरीदना सही या खतरा?



    नई दिल्ली। 6 मई को सर्राफा बाजार में फिर तेज उछाल देखने को मिला और सोना-चांदी के दाम नई ऊंचाई की ओर बढ़ गए। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक 24 कैरेट सोना 10 ग्राम पर ₹3000 की जोरदार बढ़त के साथ ₹1.51 लाख तक पहुंच गया। इससे पहले यह ₹1.48 लाख पर कारोबार कर रहा था। वहीं चांदी ने भी बड़ी छलांग लगाते हुए ₹6000 की तेजी के साथ ₹2.46 लाख प्रति किलो का स्तर छू लिया, जो निवेशकों और खरीदारों दोनों के लिए बड़ा संकेत माना जा रहा है।

    अगर पूरे साल के ट्रेंड पर नजर डालें तो 2026 में सोना अब तक ₹18 हजार महंगा हो चुका है। साल की शुरुआत में 31 दिसंबर 2025 को जहां सोना ₹1.33 लाख प्रति 10 ग्राम था, वहीं अब यह ₹1.51 लाख तक पहुंच चुका है। इसी तरह चांदी ने भी निवेशकों को चौंकाते हुए ₹16 हजार की बढ़त दर्ज की है। साल की शुरुआत में ₹2.30 लाख प्रति किलो रही चांदी अब ₹2.46 लाख के स्तर पर कारोबार कर रही है। हालांकि, इससे पहले जनवरी में सोना ₹1.76 लाख और चांदी ₹3.86 लाख का ऑलटाइम हाई भी छू चुकी है, जो बाजार की जबरदस्त अस्थिरता को दर्शाता है।

    विशेषज्ञों के मुताबिक सोने-चांदी में यह तेजी वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, महंगाई और सुरक्षित निवेश की बढ़ती मांग की वजह से आ रही है। ऐसे में निवेशकों के लिए यह समझना जरूरी है कि बाजार में तेजी जितनी तेज होती है, जोखिम भी उतना ही बढ़ जाता है।

    अगर आप इस समय सोना खरीदने की सोच रहे हैं तो कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना बेहद अहम है। सबसे पहले, हमेशा BIS हॉलमार्क वाला सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें, जिससे उसकी शुद्धता की गारंटी मिलती है। इसके अलावा खरीदारी से पहले सोने की कीमत को अलग-अलग स्रोतों से जरूर जांच लें, क्योंकि 24, 22 और 18 कैरेट के हिसाब से कीमतें अलग होती हैं।

    वहीं चांदी खरीदते समय भी सावधानी जरूरी है। असली चांदी की पहचान के लिए मैग्नेट टेस्ट, आइस टेस्ट, स्मेल टेस्ट और क्लॉथ टेस्ट जैसे आसान तरीकों का इस्तेमाल किया जा सकता है। असली चांदी चुंबक से नहीं चिपकती और उस पर बर्फ जल्दी पिघलती है।

    कुल मिलाकर, सोना-चांदी की कीमतों में आई यह तेजी जहां निवेशकों के लिए अवसर लेकर आई है, वहीं आम खरीदारों के लिए चिंता भी बढ़ा रही है। ऐसे में बाजार की चाल समझकर ही निवेश या खरीदारी करना समझदारी होगी।

  • 4,400 से 1.4 लाख तक: 25 साल में सोने ने दिया निवेशकों को सबसे शानदार रिटर्न

    4,400 से 1.4 लाख तक: 25 साल में सोने ने दिया निवेशकों को सबसे शानदार रिटर्न


    नई दिल्ली।पिछले 25 वर्षों में अगर किसी निवेश ने लगातार और मजबूत रिटर्न दिया है, तो वह सोना रहा है। वर्ष 1999 के अंत में सोने की कीमत लगभग ₹4,400 प्रति 10 ग्राम थी। दिसंबर 2025 तक यह बढ़कर ₹1.4 लाख प्रति 10 ग्राम के स्तर को पार कर चुकी है। इस दौरान सोने ने औसतन 14.3% सालाना रिटर्न दिया, जो भारतीय शेयर बाजार और अन्य पारंपरिक निवेश विकल्पों से कहीं अधिक है।विशेषज्ञों के अनुसार, सोने की कीमतों में यह तेजी कई कारणों से आई। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिका में ब्याज दरों में कटौती ने सोने की मांग को बढ़ाया। ब्याज दरों में कमी से डॉलर कमजोर हुआ, जिससे डॉलर में कारोबार होने वाली कीमती धातुएँ अन्य मुद्राओं के लिए सस्ती पड़ीं। इसका सीधा असर सोने की कीमतों और मांग पर पड़ा।

    वर्ष 2025 सोने और चांदी दोनों के लिए ऐतिहासिक साबित हुआ। इस साल सोने की कीमतों में 70% से अधिक की तेजी आई, जबकि चांदी ने 160% तक का उछाल दिखाया। यह प्रदर्शन 1979 के बाद सबसे मजबूत सालाना बढ़त माना जा रहा है। न केवल भारत, बल्कि वैश्विक बाजारों में भी कीमती धातुओं ने निवेशकों को आकर्षित किया।इसी अवधि में भारतीय शेयर बाजार का प्रदर्शन अपेक्षाकृत कमजोर रहा। पिछले 25 वर्षों में सेंसेक्स और निफ्टी ने क्रमशः लगभग 11.5% और 11.7% का औसत सालाना रिटर्न दिया। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सेंसेक्स को चांदी के बराबर रिटर्न देना होता, तो आज इसका स्तर लगभग 1.6 लाख अंक के आसपास होता, जबकि वास्तविकता में यह करीब 85,000 के स्तर पर है।

    चांदी की तेजी के पीछे भी विशेष कारण हैं। सिर्फ निवेश ही नहीं, बल्कि सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक व्हीकल EV और सेमीकंडक्टर जैसे तेजी से बढ़ते उद्योगों में इसकी बढ़ती मांग ने कीमतों को समर्थन दिया। द सिल्वर इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक अनिश्चितता और औद्योगिक मांग के बीच चांदी की सप्लाई अपेक्षाकृत धीमी रही, जिससे कीमतों में और तेजी आई।भारत में सोना सिर्फ निवेश का साधन नहीं, बल्कि संस्कृति और बचत का महत्वपूर्ण हिस्सा भी है। निप्पॉन इंडिया म्यूचुअल फंड से जुड़े विशेषज्ञ विक्रम धवन का कहना है कि सोने को पोर्टफोलियो में शामिल करना संतुलन बनाए रखने में मदद करता है। गोल्ड ETF के जरिए निवेश करना आज एक सुरक्षित और आसान विकल्प बन चुका है।

    हालांकि विशेषज्ञ यह भी चेतावनी देते हैं कि अल्पकाल में सोने और चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव संभव है। फिर भी मौजूदा वैश्विक और घरेलू परिस्थितियों में ये दोनों धातुएँ निवेशकों के लिए मजबूत और भरोसेमंद विकल्प बनी हुई हैं।निवेशक इस तथ्य को भी ध्यान में रखें कि सोना और चांदी लंबे समय में पूंजी सुरक्षा और स्थिर रिटर्न का बेहतर माध्यम साबित हुए हैं। साथ ही, डिजिटल और म्यूचुअल फंड जैसे आधुनिक निवेश विकल्प ने इसे और भी सुलभ बना दिया है।