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  • वैश्विक बाजार का असर, सोना-चांदी की कीमतों में तेज बढ़ोतरी..

    वैश्विक बाजार का असर, सोना-चांदी की कीमतों में तेज बढ़ोतरी..

    नई दिल्ली।
    वैश्विक वित्तीय बाजार में बुधवार को एक अहम बदलाव देखने को मिला, जिसका सीधा असर कीमती धातुओं पर पड़ा। डॉलर इंडेक्स में आई कमजोरी के बाद सोने और चांदी की कीमतों में तेज बढ़त दर्ज की गई, जिससे निवेशकों की गतिविधियों में भी तेजी आ गई है। शुरुआती कारोबार से ही दोनों धातुएं मजबूत रुख के साथ आगे बढ़ती नजर आईं और दिन चढ़ने के साथ इनमें लगातार तेजी बनी रही।

    बाजार में सोने की कीमतों ने मजबूत शुरुआत की और कुछ ही समय में इसमें उल्लेखनीय उछाल देखने को मिला। कारोबारी सत्र के दौरान सोने ने अपने पिछले स्तर को पार करते हुए नया उच्च स्तर भी छुआ। कीमतों में यह बढ़त निवेशकों की बढ़ती खरीदारी और वैश्विक संकेतों में बदलाव का परिणाम मानी जा रही है।

    इसी तरह चांदी के बाजार में भी तेजी का रुख देखा गया। चांदी ने भी शुरुआती कारोबार में मजबूती दिखाई और कुछ ही समय में इसमें तेज उछाल दर्ज हुआ। कारोबार के दौरान चांदी ने अपने पिछले रिकॉर्ड के करीब पहुंचकर मजबूत स्थिति बनाई, जिससे यह स्पष्ट संकेत मिला कि बाजार में इसकी मांग बढ़ रही है।

    अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सोना और चांदी दोनों में तेजी देखने को मिली, जिससे घरेलू बाजार पर इसका सीधा प्रभाव पड़ा। वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों में अनिश्चितता और मुद्रा बाजार में बदलाव के चलते निवेशक सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं, जिसका सबसे बड़ा लाभ कीमती धातुओं को मिल रहा है।

    इस पूरी स्थिति के पीछे मुख्य कारण डॉलर इंडेक्स में आई गिरावट को माना जा रहा है। डॉलर इंडेक्स में कमजोरी आने पर आमतौर पर कमोडिटी बाजार में सोना और चांदी जैसी धातुओं की मांग बढ़ जाती है। इसका कारण यह है कि निवेशक डॉलर से हटकर उन संपत्तियों में निवेश करना पसंद करते हैं, जो आर्थिक अनिश्चितता के समय सुरक्षित मानी जाती हैं।

    घरेलू बाजार में भी इसका असर साफ तौर पर देखा गया है, जहां सोना और चांदी दोनों की कीमतों में तेजी दर्ज की गई। कारोबार के दौरान कीमतों में उतार-चढ़ाव जरूर रहा, लेकिन कुल मिलाकर रुझान मजबूती की ओर ही बना रहा।

    विशेषज्ञों के अनुसार, जब तक डॉलर इंडेक्स पर दबाव बना रहेगा, तब तक सोने और चांदी में मजबूती का माहौल बना रह सकता है। हालांकि बाजार की प्रकृति को देखते हुए इसमें अचानक बदलाव की संभावना भी बनी रहती है, इसलिए निवेशकों को सावधानी के साथ कदम उठाने की सलाह दी जा रही है।

    फिलहाल बाजार का रुख यह संकेत दे रहा है कि वैश्विक आर्थिक संकेतों का असर आने वाले दिनों में भी कीमती धातुओं की कीमतों को प्रभावित कर सकता है, और सोना-चांदी में तेजी या मंदी पूरी तरह अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों पर निर्भर रहेगी।

  • मजबूत वैश्विक संकेतों से शेयर बाजार में तेजी, मेटल और डिफेंस शेयरों में खरीदारी

    मजबूत वैश्विक संकेतों से शेयर बाजार में तेजी, मेटल और डिफेंस शेयरों में खरीदारी


    नई दिल्ली। वैश्विक बाजार में अनिश्चितता के बीच सोना और चांदी एक बार फिर चमकने लगे हैं। फेडरल रिजर्व की अहम बैठक से पहले निवेशक सुरक्षित निवेश योग्य की ओर रुख कर रहे हैं, जिसका सीधा असर कीमती धातुओं की कीमतों पर दिख रहा है। मंगलवार को घरेलू वायदा बाजार मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज ऑफ इंडिया (MCX) पर सोने और चांदी दोनों में बढ़ोतरी दर्ज की गई।

    सोने में सीमित दायरे में तेजी से

    MCX पर 2 अप्रैल 2026 के बैठकों में सोना 1,061 रुपये (0.68%) की बढ़त के साथ करीब 1,56,797 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार करता दिखा। व्यापार के दौरान सोने ने 1,56,649 रुपये का निचला स्तर और 1,56,996 रुपये का सर्वोच्च स्तर जारी किया। इससे साफ है कि बाजार में तेजी से तो है, लेकिन यह अभी सीमित दायरे में बनी हुई है। विश्लेषक के अनुसार, निवेशक बचे हुए बड़े दांव लगाने से बच रहे हैं और फेड के फैसले का इंतजार कर रहे हैं।

    चांदी में ज्यादा तेज उछाल

    सोने के मुकाबले चांदी में ज्यादा तेजी से देखने को मिली। 5 मई 2026 के बैठकों में चांदी 3,353 रुपये (1.31%) बढ़कर 2,59,885 रुपये पर पहुंच गई। चांदी ने कारोबार के दौरान 2,58,338 रुपये का निचला स्तर और 2,61,457 रुपये का उच्चतम स्तर जारी किया। यह खुलता है कि औद्योगिक मांग और निवेश दोनों के कारण चांदी में बढ़ोतरी बनी हुई है।

    कीमतें क्यों बढ़ रही हैं?

    सोने और चांदी में यह तेजी से मुख्य रूप से फेडरल रिजर्व की दो दिवसीय बैठक (17-18 मार्च) से पहले देखने को मिल रही है। इस बैठक में ब्याज दरों को लेकर बड़ा फैसला लिया जा सकता है। आम तौर पर जब ब्याज अनुमानित कम होती हैं, तो सोने और चांदी जैसे सुरक्षित निवेश योग्य की मांग बढ़ जाती है। इसी उम्मीद में निवेशक पहले से ही इन कीमतों में पोजीशन ले रहे हैं।

    युद्ध और कच्चे तेल ने बढ़ाई चिंता

    वैश्विक तनाव, खासकर ईरान, संयुक्त राज्य अमेरिका और इज़राइल के बीच बढ़ते टकराव ने भी बाजार में स्थिरता बढ़ा दी है। पिछले एक महीने में कच्चे तेल की कीमतों में 50% से ज़्यादा की तेज़ी से दर्ज की गई है, जिससे महंगाई बढ़ने की आशंका है। यही वजह है कि फेड की यह बैठक भारतीयों के लिए बेहद अहम मानी जा रही है।

    आगे क्या रहेगा असर?

    अगर फेड ब्याज दरों को स्थिर रखता है या महंगाई को लेकर सख्त रुख अपनाता है, तो सोने और चांदी की कीमतों पर दबाव आ सकता है। वहीं, अगर दरों में कटौती के संकेत मिलते हैं, तो उनकी कीमतों में और तेज़ी से देखने को मिल सकती है। अगर निवेशक सतर्क हैं और बाजार की नजर पूरी तरह फेडरल रिजर्व के फैसले पर टिकी हुई है।

  • रिकॉर्ड ऊंचाई के बाद सोने की चमक पड़ी फीकी, चांदी ने ज़ोरदार वापसी कर पकड़ी रफ्तार

    रिकॉर्ड ऊंचाई के बाद सोने की चमक पड़ी फीकी, चांदी ने ज़ोरदार वापसी कर पकड़ी रफ्तार

    नई दिल्ली। सोमवार को ऐतिहासिक ऊंचाई छूने के बाद हफ्ते के दूसरे कारोबारी दिन मंगलवार को कीमती धातुओं के बाजार में उतार-चढ़ाव देखने को मिला। शुरुआती कारोबार में निवेशकों की मुनाफावसूली के चलते सोने की कीमतों में हल्की गिरावट दर्ज की गई, जबकि चांदी ने गिरावट से उबरते हुए मजबूती दिखाई।

    एमसीएक्स पर सोना कमजोर, चांदी में उछाल

    एमसीएक्स पर फरवरी डिलीवरी वाला सोना 0.32 प्रतिशत टूटकर 1,41,577 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया। वहीं मार्च डिलीवरी वाली चांदी 0.50 प्रतिशत यानी 1,352 रुपये की तेजी के साथ 2,70,322 रुपये प्रति किलोग्राम पर कारोबार करती दिखी। इससे साफ है कि रिकॉर्ड स्तर के बाद सोने में जहां दबाव बना, वहीं चांदी में खरीदारी लौटी।

    घरेलू बाजार में भी हल्की नरमी

    इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार 24 कैरेट सोने के 10 ग्राम का भाव घटकर 1,40,482 रुपये रह गया, जो पिछले कारोबारी दिन 1,40,499 रुपये था। यह गिरावट भले ही मामूली हो, लेकिन यह संकेत देती है कि ऊंचे दामों पर निवेशक फिलहाल सतर्क हो गए हैं।

    अंतरराष्ट्रीय बाजार से मिला संकेत

    अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना पहली बार 4,600 डॉलर प्रति औंस के पार पहुंचा था। इसी रिकॉर्ड स्तर के बाद वैश्विक निवेशकों ने मुनाफावसूली शुरू की, जिसका असर घरेलू बाजारों पर भी पड़ा। हालांकि भू-राजनीतिक तनावों के कारण सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की मांग बनी हुई है।

    भू-राजनीति और फेड पर टिकी नजर

    सोने में हालिया तेजी के पीछे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का ईरान से व्यापार करने वाले देशों पर 25 प्रतिशत टैक्स लगाने का ऐलान और सैन्य कार्रवाई की चेतावनी बड़ा कारण रही। इसके अलावा अमेरिकी फेडरल रिजर्व के प्रमुख जेरोम पॉवेल से जुड़ी जांच की खबरों ने भी बाजार में अनिश्चितता बढ़ाई। मेहता इक्विटीज लिमिटेड के कमोडिटी उपाध्यक्ष राहुल कलंत्री के मुताबिक, निवेशकों की नजर अब अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों और ब्याज दर नीति पर टिकी है।

    ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद

    हालिया अमेरिकी रोजगार रिपोर्ट में उम्मीद से कम नौकरियां बढ़ने से यह भरोसा मजबूत हुआ है कि इस साल के अंत तक फेड ब्याज दरों में दो बार कटौती कर सकता है। यही उम्मीद कीमती धातुओं को मध्यम अवधि में सहारा दे रही है।

    तकनीकी स्तर और आगे का रुख

    विश्लेषकों के अनुसार सोने को 1,39,550 से 1,37,310 रुपये के दायरे में मजबूत सपोर्ट मिल रहा है, जबकि ऊपर की ओर 1,44,350 से 1,46,670 रुपये पर रेजिस्टेंस है। चांदी के लिए 2,60,810 से 2,54,170 रुपये सपोर्ट जोन है और 2,71,810 से 2,74,470 रुपये रेजिस्टेंस।

    चांदी की लंबी अवधि में चमक

    एक्सपर्ट्स का मानना है कि उद्योगों और हरित ऊर्जा क्षेत्रों में बढ़ती मांग और सीमित आपूर्ति के कारण चांदी की दीर्घकालिक मांग मजबूत बनी रहेगी। ऐसे में आने वाले समय में चांदी की कीमतें सोने से बेहतर प्रदर्शन कर सकती हैं।