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  • उज्जैन में शाही मस्जिद पर कार्रवाई से पहले पथराव, पुलिस ने आंसू गैस छोड़ी, महिला थाना प्रभारी घायल हुईं

    उज्जैन में शाही मस्जिद पर कार्रवाई से पहले पथराव, पुलिस ने आंसू गैस छोड़ी, महिला थाना प्रभारी घायल हुईं


    मध्यप्रदेश: 
    के उज्जैन में सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के तहत सड़क चौड़ीकरण को लेकर सोमवार को तनाव की स्थिति बन गई। शाही मस्जिद के प्रभावित हिस्से को हटाने के लिए प्रशासन की टीम कार्रवाई के लिए पहुंची थी। इसी दौरान विरोध कर रही भीड़ और पुलिस के बीच स्थिति बिगड़ गई। कुछ लोगों की ओर से पथराव किए जाने के बाद पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े।

    शाही मस्जिद का हिस्सा सड़क चौड़ीकरण की योजना की जद में आ रहा है। सिंहस्थ 2028 को देखते हुए उज्जैन में सड़क और यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए अलग-अलग क्षेत्रों में चौड़ीकरण का काम चल रहा है। इसी क्रम में प्रशासन की टीम शाही मस्जिद के प्रभावित हिस्से को हटाने की कार्रवाई के लिए मौके पर पहुंची थी।

    कार्रवाई की जानकारी मिलने के बाद बड़ी संख्या में लोग मौके पर जुट गए। विरोध के दौरान टंकी चौराहे के आसपास स्थिति तनावपूर्ण हो गई। करीब 100 लोगों की भीड़ की ओर से मस्जिद परिसर में जाने की कोशिश किए जाने की बात सामने आई। पुलिस ने लोगों को रोकने का प्रयास किया, जिसके बाद विवाद बढ़ गया।

    स्थिति बिगड़ने पर पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े। इसके बावजूद कुछ लोगों की ओर से पथराव जारी रहने की जानकारी सामने आई। इस दौरान पुलिस और प्रशासन की टीम को मौके पर स्थिति संभालने में मशक्कत करनी पड़ी।

    पथराव की घटना में क्राइम ब्रांच की थाना प्रभारी पुष्पा पांचाल घायल हो गईं। घटना के बाद इलाके में सुरक्षा व्यवस्था और बढ़ा दी गई। बड़ी संख्या में पुलिस बल को मौके पर तैनात किया गया है, ताकि किसी भी तरह की स्थिति को आगे बढ़ने से रोका जा सके।

    शाही मस्जिद को लेकर पिछले कुछ समय से विरोध की स्थिति बनी हुई थी। सड़क चौड़ीकरण की कार्रवाई के तहत मस्जिद के प्रभावित हिस्से को हटाने का विरोध मुस्लिम समुदाय की ओर से किया जा रहा था। सोमवार को प्रशासनिक कार्रवाई के दौरान यह विरोध पथराव तक पहुंच गया।

    स्थिति को देखते हुए पुलिस लगातार लोगों से शांति बनाए रखने की अपील कर रही है। पुलिस की ओर से कहा गया है कि लोगों को घबराने या डरने की जरूरत नहीं है। किसी भी विपरीत परिस्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त पुलिस बल मौके पर मौजूद है।

    प्रशासन और पुलिस की टीम ने इलाके में सुरक्षा व्यवस्था संभाल रखी है। अधिकारियों की प्राथमिकता स्थिति को नियंत्रित रखना और किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोकना है। पुलिस ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान नहीं देने और माहौल खराब करने वाली गतिविधियों से दूर रहने की अपील की है।

    सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के बीच उज्जैन में सड़क चौड़ीकरण का काम प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसी प्रक्रिया में शाही मस्जिद का प्रभावित हिस्सा हटाने को लेकर विरोध सामने आया है। सोमवार को कार्रवाई के दौरान हुए पथराव और उसके बाद आंसू गैस के इस्तेमाल से इलाके में तनाव बढ़ गया। फिलहाल मौके पर पुलिस बल तैनात है और स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए निगरानी की जा रही है।

  • उज्जैन में सड़क चौड़ीकरण के लिए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अपने पैतृक घर पर खुद गेती चलाकर शुरुआत की

    उज्जैन में सड़क चौड़ीकरण के लिए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अपने पैतृक घर पर खुद गेती चलाकर शुरुआत की

    उज्जैन: में सिंहस्थ की तैयारियों के बीच सड़क चौड़ीकरण की कार्रवाई अब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के पैतृक मकान तक पहुंच गई है। रविवार को मुख्यमंत्री ने अपने पैतृक घर के प्रभावित हिस्से पर खुद गेती चलाकर सड़क चौड़ीकरण के काम की शुरुआत की। इस दौरान उनके बचपन से जुड़ा यह मकान भी विकास योजना के दायरे में आया।

    जिस घर में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का बचपन बीता, उसी मकान का हिस्सा अब प्रस्तावित सड़क की चौड़ाई बढ़ाने के लिए हटाया जा रहा है। यह घर उनके परिवार की पुरानी स्मृतियों से जुड़ा रहा है। ऐसे में मकान के प्रभावित हिस्से को खुद हटाने की शुरुआत करना इस पूरी कार्रवाई का एक महत्वपूर्ण पहलू रहा।

    सिंहस्थ की तैयारियों को देखते हुए उज्जैन में सड़क और यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए मार्गों के चौड़ीकरण का काम किया जा रहा है। इसी क्रम में खजूर वाली मस्जिद से अब्दालपुरा, जीवाजीगंज थाना होते हुए गणेश चौक तक जाने वाले मार्ग को चौड़ा किया जाना है।

    करीब 730 मीटर लंबे इस मार्ग की प्रस्तावित चौड़ाई 15 मीटर रखी गई है। सड़क चौड़ीकरण और इससे जुड़े विकास कार्य पर लगभग 9.80 करोड़ रुपये खर्च किए जाने हैं। इस मार्ग को चौड़ा करने की कार्रवाई सिंहस्थ के दौरान यातायात और श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए की जा रही है।

    प्रस्तावित चौड़ीकरण की जद में कई भवन आए हैं। इनमें मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का पैतृक मकान भी शामिल है। रविवार को मुख्यमंत्री ने स्वयं अपने मकान के प्रभावित हिस्से पर गेती चलाकर इस काम की शुरुआत की। इस दौरान घर और उससे जुड़ी पुरानी स्मृतियों का भावनात्मक पक्ष भी सामने आया।

    पैतृक घर किसी भी व्यक्ति के लिए सिर्फ एक इमारत नहीं होता। उसमें परिवार के साथ बिताया समय, बचपन की यादें और जीवन के शुरुआती दौर से जुड़ी कई स्मृतियां होती हैं। मुख्यमंत्री के मामले में भी यह मकान उनके बचपन से जुड़ा रहा है। ऐसे में सड़क चौड़ीकरण के लिए इसके हिस्से को हटाने की प्रक्रिया सामान्य निर्माण कार्य से अलग भावनात्मक संदर्भ रखती है।

    हालांकि सड़क चौड़ीकरण का काम सार्वजनिक सुविधा और आगामी सिंहस्थ की तैयारियों से जुड़ा है। इसी योजना के तहत खजूर वाली मस्जिद से गणेश चौक तक मार्ग को निर्धारित चौड़ाई में विकसित किया जा रहा है। इसके लिए प्रभावित भवनों के हिस्सों को हटाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।

    रविवार की कार्रवाई में मुख्यमंत्री का अपने ही पैतृक मकान पर गेती चलाना इस बात को भी रेखांकित करता है कि प्रस्तावित सड़क परियोजना का असर उनके परिवार की संपत्ति पर भी पड़ा है। जिस घर से उनका बचपन जुड़ा रहा, उसी के हिस्से को उन्होंने स्वयं हटाने की शुरुआत की।

    उज्जैन में सिंहस्थ की तैयारियों के तहत सड़क चौड़ीकरण का यह काम शहर की यातायात व्यवस्था से जुड़ा है। 730 मीटर लंबे मार्ग को 15 मीटर चौड़ा करने की योजना पर लगभग 9.80 करोड़ रुपये खर्च होंगे। मुख्यमंत्री के पैतृक मकान पर रविवार को गेती चलने के साथ इस हिस्से में चौड़ीकरण की कार्रवाई ने एक अलग मानवीय पहलू भी सामने रखा।

  • उज्जैन में विकास कार्यों का सीएम मोहन यादव ने लिया जायजा, अधिकारियों को समय पर गुणवत्तापूर्ण निर्माण पूरा करने के निर्देश

    उज्जैन में विकास कार्यों का सीएम मोहन यादव ने लिया जायजा, अधिकारियों को समय पर गुणवत्तापूर्ण निर्माण पूरा करने के निर्देश

    मध्य प्रदेश: के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रविवार को उज्जैन में चल रहे विभिन्न निर्माण और विकास कार्यों का निरीक्षण किया। उन्होंने नीलगंगा रोड क्षेत्र में पहुंचकर निर्माण कार्यों की प्रगति का जायजा लिया और मौके पर मौजूद अधिकारियों से परियोजनाओं से जुड़ी जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को सभी कार्य निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरा करने के साथ निर्माण की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए।

    उज्जैन में आगामी सिंहस्थ को देखते हुए शहर के बुनियादी ढांचे और यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए कई निर्माण कार्य चल रहे हैं। इन परियोजनाओं का उद्देश्य प्रमुख मार्गों पर आवागमन को सुगम बनाना और श्रद्धालुओं के लिए आवश्यक सुविधाओं को मजबूत करना है। मुख्यमंत्री ने निरीक्षण के दौरान इन कार्यों की प्रगति और उनकी गुणवत्ता से जुड़े पहलुओं को देखा।

    डॉ. मोहन यादव ने कहा कि उज्जैन शहर के मध्य स्थित बाबा महाकाल के मुख्य मार्ग का चौड़ीकरण शहर के विकास और सौंदर्यीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इस मार्ग के चौड़ीकरण से स्थानीय यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के साथ आने वाले समय में श्रद्धालुओं के आवागमन को भी सुविधा मिलने की उम्मीद है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि सिंहस्थ के दौरान देश और विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु उज्जैन पहुंचेंगे। ऐसे में प्रमुख मार्गों का विकास और उनका बेहतर प्रबंधन आवश्यक है। चौड़े और व्यवस्थित मार्ग श्रद्धालुओं के आवागमन को आसान बनाने में मदद करेंगे और उज्जैन आने वाले लोगों के अनुभव को बेहतर बनाने में भी भूमिका निभाएंगे।

    निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने निर्माण कार्यों से संबंधित अधिकारियों से प्रगति की जानकारी ली। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि काम केवल समय पर पूरा करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि निर्माण की गुणवत्ता भी निर्धारित मानकों के अनुरूप होनी चाहिए। परियोजनाओं को तय समयसीमा में पूरा करने के लिए लगातार निगरानी रखने पर भी जोर दिया गया।

    उज्जैन में सिंहस्थ की तैयारियों के तहत सड़क चौड़ीकरण और अन्य अधोसंरचना से जुड़े कार्यों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। शहर के प्रमुख मार्गों को बेहतर बनाने की दिशा में कई परियोजनाएं आगे बढ़ रही हैं। इनका उद्देश्य आयोजन के दौरान बढ़ने वाले यातायात और श्रद्धालुओं की आवाजाही को व्यवस्थित करना है।

    मुख्यमंत्री ने मार्ग चौड़ीकरण के लिए प्रशासन के साथ स्वेच्छा से सहयोग करने वाले स्थानीय नागरिकों का भी आभार व्यक्त किया। उन्होंने सहयोग करने वाले लोगों का हृदय से अभिनंदन करते हुए कहा कि विकास कार्यों में स्थानीय नागरिकों की सहभागिता महत्वपूर्ण है। शहर के विकास से जुड़े कार्यों को आगे बढ़ाने में नागरिक सहयोग की भूमिका को उन्होंने सराहा।

    निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्माण कार्यों में किसी तरह की लापरवाही नहीं बरतने के निर्देश दिए। उन्होंने परियोजनाओं की प्रगति पर नियमित नजर रखने और निर्धारित गुणवत्ता के अनुसार काम पूरा कराने पर जोर दिया। साथ ही यह सुनिश्चित करने को कहा कि निर्माण कार्यों के कारण आम लोगों को अनावश्यक परेशानी न हो।

    सिंहस्थ के मद्देनजर उज्जैन में अधोसंरचना विकास पर लगातार जोर दिया जा रहा है। सड़क, मार्ग चौड़ीकरण और अन्य सुविधाओं से जुड़े कार्यों को समय पर पूरा करना प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण है। मुख्यमंत्री के निरीक्षण का उद्देश्य भी चल रहे कार्यों की स्थिति जानना और उन्हें तय मानकों के अनुसार आगे बढ़ाना रहा।

    मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद संबंधित अधिकारियों के सामने निर्माण कार्यों को समयसीमा और गुणवत्ता के साथ पूरा करने की जिम्मेदारी और महत्वपूर्ण हो गई है। उज्जैन में जारी विकास कार्यों से आने वाले समय में शहर की यातायात व्यवस्था और श्रद्धालुओं के आवागमन को बेहतर बनाने की दिशा में मदद मिलने की उम्मीद है।

  • मध्य प्रदेश में सिंहस्थ परियोजनाओं की लेटलतीफी पर शिकायतें तेज, MPIDC की कार्यप्रणाली को लेकर उठे गंभीर सवाल

    मध्य प्रदेश में सिंहस्थ परियोजनाओं की लेटलतीफी पर शिकायतें तेज, MPIDC की कार्यप्रणाली को लेकर उठे गंभीर सवाल

    मध्य प्रदेश: में वर्ष 2028 में होने वाले सिंहस्थ की तैयारियों के बीच उज्जैन और आसपास के क्षेत्रों से जुड़ी विकास परियोजनाओं में कथित प्रशासनिक देरी का मामला सामने आया है। आरोप है कि मध्य प्रदेश औद्योगिक विकास निगम से जुड़ी कुछ परियोजनाओं में टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद तकनीकी स्वीकृति, सीमांकन और भुगतान जैसी प्रक्रियाएं लंबे समय तक अटकी रहीं। इस देरी को लेकर निर्माण एजेंसियों ने उच्च स्तर पर शिकायत की है।

    बताया गया है कि नीमच के चीताखेड़ा औद्योगिक पार्क और मंदसौर के बसई औद्योगिक पार्क से संबंधित परियोजनाओं में टेंडर आवंटन के बाद भी काम आगे बढ़ाने की जरूरी प्रक्रियाओं में देरी हुई। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि कई मामलों में छह महीने से एक वर्ष तक सीमांकन और अन्य स्वीकृतियां लंबित रहीं। इसके चलते निर्माण एजेंसियों के काम की गति प्रभावित हुई और साइट पर गतिविधियां रुकने की स्थिति बनी।

    मामले में विभागीय अधिकारियों की कार्यशैली को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। शिकायत में कार्यकारी निदेशक राजेश राठौर समेत संबंधित अधिकारियों की भूमिका पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। आरोपों में यह भी कहा गया है कि कथित अवैध राशि या कमीशन की मांग पूरी नहीं होने के कारण कुछ फाइलों को आगे बढ़ाने में देरी की गई। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी जांच के स्तर पर होना बाकी है।

    निर्माण एजेंसियों की ओर से यह मामला मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव कार्यालय तक पहुंचाया गया है। शिकायत में टेंडर आवंटन के बाद काम से जुड़ी प्रशासनिक प्रक्रियाओं को रोके जाने और रनिंग बिलों के भुगतान में देरी का मुद्दा भी उठाया गया है। एजेंसियों का कहना है कि भुगतान अटकने से उनकी कार्यशील पूंजी प्रभावित हुई और परियोजनाओं की प्रगति पर सीधा असर पड़ा।

    मामला सामने आने के बाद MPIDC के प्रबंध निदेशक चंद्रमौली शुक्ला की ओर से दो अटकी परियोजनाओं को आगे बढ़ाने के निर्देश दिए जाने की जानकारी सामने आई है। इससे परियोजनाओं को गति मिलने की उम्मीद है, लेकिन पहले हो चुकी देरी के कारण निर्धारित समयसीमा पर सवाल बने हुए हैं।

    सिंहस्थ 2028 के लिए उज्जैन में बड़े स्तर पर बुनियादी ढांचे और औद्योगिक विकास से जुड़े काम किए जा रहे हैं। ऐसे में किसी भी परियोजना में लंबे समय तक देरी होने का असर आगे की समयसीमा पर पड़ सकता है। निर्माण कार्यों में देरी के कारण लागत बढ़ने की आशंका भी रहती है, जिसका प्रभाव अंततः परियोजना के बजट पर पड़ सकता है।

    शिकायत में पर्यावरण से जुड़े पहलुओं का भी उल्लेख किया गया है। निर्माण और पौधरोपण जैसे कार्यों के लिए उपयुक्त मौसम निकल जाने की स्थिति में संबंधित गतिविधियों की समयसीमा प्रभावित हो सकती है। मानसून के दौरान किए जाने वाले कार्यों में देरी होने पर आगे की योजना और संसाधन प्रबंधन पर भी दबाव बढ़ सकता है।

    अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल शिकायतों में लगाए गए आरोपों की जांच को लेकर है। यदि जांच में प्रशासनिक स्तर पर जानबूझकर देरी, नियमों की अनदेखी या किसी प्रकार की अनियमितता प्रमाणित होती है तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई का रास्ता खुल सकता है। दूसरी ओर, यदि देरी प्रक्रिया संबंधी कारणों से हुई है तो विभाग को उसका स्पष्ट कारण सामने रखना होगा।

    सिंहस्थ 2028 मध्य प्रदेश के लिए धार्मिक और प्रशासनिक दोनों दृष्टि से बड़ा आयोजन है। इसलिए इससे जुड़ी परियोजनाओं में पारदर्शिता, समयबद्धता और जवाबदेही महत्वपूर्ण है। फिलहाल शिकायतों के बाद अटकी परियोजनाओं को गति देने के प्रयास शुरू हुए हैं और आगे की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि जांच में आरोपों को लेकर क्या तथ्य सामने आते हैं।

  • उज्जैन सिंहस्थ की तैयारियों में तेजी के संकेत, भाजपा नेता जगदीश अग्रवाल को मेला प्राधिकरण की अध्यक्षता की जिम्मेदारी मिली

    उज्जैन सिंहस्थ की तैयारियों में तेजी के संकेत, भाजपा नेता जगदीश अग्रवाल को मेला प्राधिकरण की अध्यक्षता की जिम्मेदारी मिली

    मध्य प्रदेश: के उज्जैन में वर्ष 2028 में होने वाले सिंहस्थ महापर्व की तैयारियों को लेकर राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण नियुक्ति की है। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और उज्जैन विकास प्राधिकरण के पूर्व अध्यक्ष जगदीश अग्रवाल को सिंहस्थ मेला प्राधिकरण का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। शासन की ओर से देर शाम नियुक्ति संबंधी आदेश जारी किया गया।

    जगदीश अग्रवाल लंबे समय से उज्जैन की राजनीति और संगठनात्मक गतिविधियों से जुड़े रहे हैं। वह भारतीय जनता पार्टी के पूर्व नगर अध्यक्ष के साथ प्रदेश कार्यसमिति के सदस्य भी रह चुके हैं। इसके अलावा वह उज्जैन विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक और विकास संबंधी कार्यों से उनके जुड़ाव को देखते हुए सिंहस्थ से संबंधित जिम्मेदारी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

    सिंहस्थ 2028 उज्जैन के लिए बड़े धार्मिक और प्रशासनिक आयोजनों में शामिल है। इस आयोजन में देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना रहती है। ऐसे में मेला क्षेत्र का विकास, यातायात व्यवस्था, मूलभूत सुविधाएं, सुरक्षा, स्वच्छता और श्रद्धालुओं के लिए आवश्यक व्यवस्थाओं को समय रहते तैयार करना प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती होगी।

    अब तक सिंहस्थ की पूर्व तैयारियों और प्रशासनिक समन्वय से जुड़े कामों की कमान संभागायुक्त एवं सिंहस्थ मेला अधिकारी आशीष सिंह तथा स्थानीय प्रशासन के स्तर पर चल रही थी। विभिन्न विभागों के बीच समन्वय, निर्माण कार्यों की प्रगति और प्रस्तावित योजनाओं को लेकर लगातार बैठकें की जा रही हैं।

    मेला प्राधिकरण के अध्यक्ष की नियुक्ति के बाद सिंहस्थ से जुड़े कार्यों में शासन और प्रशासन के बीच समन्वय को नई दिशा मिलने की उम्मीद है। अध्यक्ष के स्तर पर मेला आयोजन से संबंधित विभिन्न विषयों को लेकर विभागों और स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय की जिम्मेदारी महत्वपूर्ण होगी।

    सिंहस्थ की तैयारियों में उज्जैन शहर के साथ आसपास के क्षेत्रों में भी बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने पर जोर दिया जाता है। श्रद्धालुओं के आवागमन को सुगम बनाने के लिए सड़क, परिवहन और पार्किंग व्यवस्था के साथ पेयजल, बिजली, स्वच्छता और स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर करना भी प्राथमिकताओं में शामिल रहेगा।

    जगदीश अग्रवाल को उज्जैन विकास प्राधिकरण के पूर्व अध्यक्ष के रूप में शहर के विकास से जुड़े विषयों का अनुभव रहा है। इसी वजह से सिंहस्थ जैसे बड़े आयोजन में उनकी भूमिका को स्थानीय स्तर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि आगामी तैयारियों में विभिन्न विभागों और प्रशासनिक एजेंसियों के साथ सामूहिक समन्वय सबसे अहम रहेगा।

    सिंहस्थ 2028 को लेकर राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन की ओर से कई स्तरों पर तैयारियां पहले से जारी हैं। मेला क्षेत्र के विकास से लेकर श्रद्धालुओं की सुविधा तक विभिन्न प्रस्तावों पर काम किया जा रहा है। आने वाले समय में इन योजनाओं के क्रियान्वयन और समयसीमा तय करने की प्रक्रिया में तेजी आने की संभावना है।

    अध्यक्ष की नियुक्ति ऐसे समय हुई है जब सिंहस्थ की तैयारियों को लेकर आधारभूत व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देने की दिशा में काम आगे बढ़ाया जा रहा है। मेला प्राधिकरण के स्तर पर होने वाले निर्णयों और विभागीय समन्वय से आगामी महीनों में तैयारियों की गति और स्वरूप स्पष्ट होगा।

    उज्जैन में होने वाला सिंहस्थ धार्मिक आस्था के साथ शहर की अर्थव्यवस्था, पर्यटन और बुनियादी ढांचे के लिए भी महत्वपूर्ण अवसर होता है। इसलिए आयोजन की तैयारियों में प्रशासनिक व्यवस्था के साथ स्थायी विकास कार्यों पर भी ध्यान देना जरूरी होगा। जगदीश अग्रवाल की नियुक्ति के बाद अब सिंहस्थ 2028 की तैयारियों से जुड़े कामों को संस्थागत स्तर पर आगे बढ़ाने की प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद है।

  • मप्र के उज्जैन में सिंहस्थ से पहले दो धड़ों में बंटे अखाड़े, अध्यक्ष पद को लेकर विवाद

    मप्र के उज्जैन में सिंहस्थ से पहले दो धड़ों में बंटे अखाड़े, अध्यक्ष पद को लेकर विवाद


    उज्जैन।
    मध्य प्रदेश के उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ 2028 (महाकुंभ) से पहले अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष पद को लेकर विवाद सामने आया है। इस पद पर दो दावे किए जा रहे हैं। 13 अखाड़े दो गुट में बंटे नजर आ रहे हैं। एक धड़ा निरंजनी अखाड़े के रविंद्र पुरी को अध्यक्ष मानता है, जबकि दूसरा महानिर्वाणी अखाड़े के सचिव रविंद्र पुरी को अध्यक्ष बता रहा है। एक जैसा नाम होने से असमंसज की स्थिति बनी है।

    दरअसल, उज्जैन में वर्ष 2028 में सिंहस्थ महाकुंभ आयोजित होने वाला है। सिंहस्थ को लेकर जहां एक और सरकार और प्रशासन बड़े स्तर पर तैयारी कर रहा है। निरंजनी अखाड़े के रविंद्र पुरी पिछले छह महीनों से अध्यक्ष के रूप में उज्जैन आते-जाते रहे हैं। इस दौरान प्रशासन ने उन्हें शिप्रा नदी प्रोजेक्ट सहित मेले की तैयारियों की जानकारी भी दी, लेकिन अब साधु संतों में दो फाड़ दिखाई दे रही है। देश के 13 अखाड़े में से आठ अखाड़ों का समर्थन महानिर्वाणी अखाड़े के रविंद्र पूरी महाराज को मिला है।

    रविवार को उज्जैन में मंगलनाथ मार्ग स्थित निर्वाणी अणि अखाड़ा में संतों का समागम हुआ। इसमें बड़ी संख्या में संत मौजूद रहे। संतों के इस समागम में 13 में से आठ अखाड़ों के साधु संत शामिल हुए। खास बात यह रही कि यहां हरिद्वार से पहली बार आए महानिर्वाणी अखाड़े के सचिव संत रविंद्र पुरी महाराज स्वागत सम्मान हुआ। ढोल-नगाड़ों के बीच संतों में उत्साह नजर आया। कार्यक्रम में महंत सत्यानंद महाराज (बड़ा उदासीन), महंत मंगलदास जी (नया अखाड़ा), महंत विनीत गिरी (महानिर्वाणी), महंत रामेश्वर दास, भगवान दास और दिग्विजय दास सहित विभिन्न अखाड़ों के संत-महंत शामिल हुए।

    कार्यक्रम के बाद रविंद्र पुरी महाराज ने मीडिया से कहा कि वे खुद वर्तमान में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष हैं। उनके साथ में निर्मोही अणि अखाड़े के राजेंद्र दास सचिव हैं। उन्हें लिखित और चयनित दोनों रूपों में 13 में से आठ अखाड़े का समर्थन प्राप्त है। उन्होंने बताया कि अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद चार संप्रदाय से मिलकर बनी है। इसमें संन्यासी, उदासीन, वैष्णव और निर्मल शामिल है। इन चारों संप्रदाय के अखाड़े उनके नेतृत्व वाली अखाड़ा परिषद में शामिल हैं। इसीलिए वे खुद अखाड़ा परिषद के चुने गए अध्यक्ष हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2028 मे सिंहस्थ महाकुंभ आयोजित होने वाला है। सिंहस्थ को लेकर सरकार और प्रशासन बड़े स्तर पर तैयारी कर रहा है। सिंहस्थ कुंभ के आयोजन को लेकर हमारी समय समय पर अधिकारियों से सूक्ष्म चर्चा होती रहती है। हम लगातार अधिकारियों के संपर्क में रहेंगे।


    इन अखाड़ों का समर्थन बताया

    देश के 13 अखाड़े में से 8 अखाड़ों का समर्थन महानिर्वाणी अखाड़े के रविंद्र पूरी महाराज को मिला है। इन अखाड़ों में 1- महानिर्वाणी अखाड़ा, 2- अटल अखाड़ा, 3-निर्मल अखाड़ा, 4- नया उदासी अखाड़ा, 5- बड़ा उदासीन अखाड़ा, 6-निर्वाणी अणि अखाड़ा, 7- दिगंबर अणि अखाड़ा और 8-निर्मोही अणि अखाड़ा शामिल है। इस प्रकार बहुमत के आधार पर अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष महानिर्वाणी अखाड़े के रविंद्र पुरी महाराज ही होंगे।

    इधर निरंजनी अखाड़े से जुड़े रविंद्र पूरी महाराज ने कहा कि कुम्भ आ रहा है, ऐसे कई संत अपने आप को अध्यक्ष बताएंगे। सर्वसम्मति से मुझे अध्यक्ष बनाया गया था। जब मैंने इस्तीफा दिया नहीं तो महानिर्वाणी वाले रविंद्र पूरी कैसे अध्यक्ष बन सकते है।

  • उज्जैनः सिंहस्थ के दौरान करोड़ों श्रद्धालु मोक्षदायिनी शिप्रा में लगाएंगे आस्था की डुबकी, विश्व की रहेगी निगाह

    उज्जैनः सिंहस्थ के दौरान करोड़ों श्रद्धालु मोक्षदायिनी शिप्रा में लगाएंगे आस्था की डुबकी, विश्व की रहेगी निगाह


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव (Chief Minister Dr. Mohan Yadav) ने कहा कि सिंहस्थ महापर्व (Simhastha Mahaparva) का आयोजन विश्व के लिए अद्वितीय है। सिंहस्थ महापर्व के दौरान करोड़ों श्रद्धालु मोक्षदायिनी शिप्रा में आस्था की डुबकी लगाएंगे। इस महापर्व पर विश्व की निगाह रहेगी। सिंहस्थ-2028 मध्य प्रदेश के लिए एक महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजन है। हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए कि प्रत्येक श्रद्धालु बिना किसी असुविधा के पवित्र अनुष्ठानों में शामिल हो सके।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार देर शाम उज्जैन में सिंहस्थ 2028 अंतर्गत मंत्री मंडलीय समिति से अनुशंसित अधोसरंचना के प्रगतिरत विकास कार्यों की समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने बैठक में अलग-अलग विभागों के माध्यम से सिंहस्थ-2028 के लिए किए जा रहे विकास कार्यों की प्रगति की जानकारी लेकर समीक्षा की। उन्होंने उज्जैनवासियों से सेवाभाव की तरह कार्य करने का आहवान किया। उन्होंने कहा कि सभी अधिकारी अपनी जिम्मेदारी को समझते हुए कार्यों को समय-सीमा में पूर्ण कराएं।


    मुख्यमंत्री ने की किसानों की फसल की चिंता

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सिंहस्थ 2028 के प्रगतिरत कार्यों की समीक्षा के दौरान गेहूं की फसल की सिंचाई के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए कि शिप्रा नदी पर घाट निर्माण के दौरान किसानों को पानी की उपलब्धता बनी रहनी चाहिए। इसके लिए नर्मदा जल की आपूर्ति की जाए। वतर्मान में गेहूं की फसल को सिंचाई के लिए एक पानी की और जरुरत होगी। इसके लिए शिप्रा नदी में जल प्रवाह सुनिश्चित बनाए रखे।

    उन्होंने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिये कि सभी अधिकारी गंभीरता के साथ काम करें। मुख्यमंत्री ने अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा और संजय दुबे को निर्देश दिए है कि उज्जैन में सिंहस्थ 2028 के काम में किसी भी तरह की रुकावट न आए। इसके लिए मुख्यमंत्री निवास पर भी सिंहस्थ सेल गठित कर मॉनीटरिंग सुनिश्चित की जाये और जिन विभागों में अधिकारियों की कमी है, वहाँ पदस्थापना तत्काल की जाए।

    मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि अनुभवी अधिकारियों के लिए यदि सेवानिवृत्त अधिकारी-कर्मचारिेयों को रखना है तो उसके लिए भी नियमानुसार कार्यवाही कर तत्काल रुप से उन्हें रखा जाए। सिंहस्थ-2028 के लिए अब रिवर्स कैलेंडर बनाकर निर्माण कार्य तीव्र गति से पूर्ण करें। वर्तमान समय से लेकर सिंहस्थ-2028 तक दो वर्षाकाल का समय आने वाला है। इसलिए समय-सीमा में काम गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूरा किया जाना अनिवार्य है।

    उन्होंने विभिन्न निर्माण एजेसिंयों द्वारा किए जा रहे कार्यो की समीक्षा की, साथ ही निर्देश दिए कि जो निर्माण एजेंसियां काम कर रही है उनके संसाधनों की भी लगातार मॉनीटरिंग हो। वर्तमान समय माइक्रों मैनेजमेंट से नैनो मैनेजमेंट की ओर जाने का है। युद्ध स्तर की तैयारियां शुरु करना है। सभी अधिकारी 24 घंटे-07 दिन सक्रिय रहें। सिंहस्थ 2028 को बेहतर प्रबंधन के साथ करने के लिए उज्जैन जिले के सभी नागरिकों को जिम्मेदारी के भाव के साथ काम करने के लिए प्रेरित करें, उनको यह लगना चाहिए कि यह हमारा व्यक्तिगत काम है। इसके लिए सभी नागरिकों में जिम्मेदारी के साथ समर्पण का भाव भी पैदा करने के लिए समन्वय बनाकर कार्य करें।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सिंहस्थ-2028 के अंतर्गत प्रचलित निर्माण कार्यों की समय-समय पर मॉनीटरिंग हो। उन्होंने सिंहस्थ के संदर्भ में विभागों को समन्वयपूर्वक कार्य करने और आवश्यक सुविधाओं के विकास के लिए समय-सीमा में कार्यों को पूर्ण करने के निर्देश दिए।


    मुख्यमंत्री डॉ. यादव के अधिकारियों को निर्देश

    1. सिंहस्थ-2028 के लिए होम स्टे, धर्मशाला, स्कूल, कॉलेज आदि में व्यवस्थाओं केलिए आधारभूत संरचना तैयार करने के लिए कार्य योजना बनाई जाए।
    2. उज्जैन शहर से जोड़ने वाले आसपास के गांव में होम स्टे की व्यवस्था के लिए लोगों को प्रशिक्षण भी दिया जाए। सिंहस्थ-2028 मेला क्षेत्र में आंतरिक और बाहरी व्यवस्थाओं की अलग-अलग रूपरेखा बनाएं। सिंहस्थ मेले की बाहर की व्यवस्थाओं को चाक-चौबंद बनाने के लिए जरूरी है कि उसकी समस्त जगहों की मैपिंग की जाए।
    3. उज्जैन सिंहस्थ-2028 की तैयारी में बेहतर प्रबंधन के लिए उज्जैन में महाशिवरात्रि, श्रावण, नागपंचमी एवं अन्य त्योहारों पर व्यवस्थाओं को प्रायोगिक रूप से बनाए और उसके अनुभवों का लाभ लेते हुए सिंहस्थ के भीड प्रबंधन कार्य योजना बने।
    4. उज्जैन शहर से जुड़ने वाले दूसरे जिलों के वैकल्पिक मार्गों का चयन कर लें और इन मार्गों को गुगल मैपिंग के साथ उन्नयन भी कराया जाए, जिससे भीड़ प्रबंधन में इन मार्गों का उपयोग हो सके। साथ ही उज्जैन शहर के महाकाल मंदिर पहुंचने के लिए वैकल्पिक मार्गों का भी चयन करें, जिससे भीड़ प्रबंधन आसानी से हो सके।
    5. श्री मंगलनाथ, श्री भूखीमाता रामघाट के आसपास घाटों को जोड़ने वाले मार्गों को चिन्हित कर उन्नयन करें। सिंहस्थ मेला क्षेत्र के बाहर सामाजिक सामुदायिक भवन, स्कूल, कॉलेज धर्मशाला बनाने वाली संस्थाओं को प्रोत्साहित करें।
    6. सिंहस्थ 2028 के लिए काम कर रही निर्माण एजेंसी जो समय पर काम पूरा करें उनको प्रोत्साहन स्वरूप व्यवस्था भी बना कर दें।

    समीक्षा बैठक में प्रभारी मंत्री गौतम टेटवाल, महापौर मुकेश टटवाल, विधायक अनिल जैन कालूहेडा, सतीश मालवीय, जितेन्द्र पंड्या, नगर निगम अध्यक्ष कलावती यादव, सिंहस्थ मेला अधिकारी सह संभागायुक्त आशीष सिंह, एडीजी राकेश गुप्ता, कलेक्टर रौशन कुमार सिंह एवं अन्य विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

  • लैंड पूलिंग का विरोध: BJP MLA अनिल जैन कालूहेड़ा ने अपनी ही सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा; CM मोहन यादव को पत्र

    लैंड पूलिंग का विरोध: BJP MLA अनिल जैन कालूहेड़ा ने अपनी ही सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा; CM मोहन यादव को पत्र


    उज्जैन।विधायक ने सरकार पर साधा निशाना उज्जैन उत्तर विधानसभा क्षेत्र जिसका हिस्सा सिंहस्थ कुंभ क्षेत्र भी है के विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा ने राज्य सरकार की लैंड पूलिंग योजना को लेकर सार्वजनिक रूप से अपनी ही पार्टी और सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। विधायक ने इसे किसानों के हितों के खिलाफ बताते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव को एक आधिकारिक पत्र लिखा है।

    सीएम को लिखे पत्र की मुख्य बातें

    विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में एक पुरानी बैठक का हवाला दिया है। उन्होंने बताया कि17 नवंबर को भोपाल में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खण्डेलवाल और किसान संघ के साथ आपकी सीएम की मौजूदगी में एक बैठक हुई थी। इस बैठक में यह निर्णय लिया गया था कि लैंड पूलिंग एक्ट वापस लिया जाएगा। इस निर्णय के बाद किसान संघ ने उज्जैन में एक उत्सव रैली भी की थी जिसमें विधायक कालूहेड़ा स्वयं शामिल हुए थे।

    किसानों के समर्थन में आंदोलन की चेतावनी

    विधायक ने आगे आरोप लगाया कि बाद में उन्हें प्रशासन प्रेस और किसान संघ से पता चला कि पूर्व में लिए गए निर्णय के विपरीत लैंड पूलिंग योजना यथावत है। इस कारण किसान संघ ने योजना के विरोध में 26 दिसंबर को आंदोलन करने का निर्णय लिया है। विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा ने मुख्यमंत्री को स्पष्ट करते हुए कहा है मैं भी किसानों के सम्मान में इस आंदोलन में शामिल रहूंगा। आप से आग्रह है कि किसानों के हित में उचित निर्णय करें।

    अन्य प्रमुख माँगे

    लैंड पूलिंग योजना को वापस लेने के साथ ही विधायक कालूहेड़ा ने मुख्यमंत्री से कुछ अन्य महत्वपूर्ण माँगे भी की हैं आवासीय लाभ सिंहस्थ की जमीन पर जो लोग अब तक बस चुके हैं उन्हें आवासीय प्रयोजन का लाभ दिया जाए। जमीन मुक्त कराना उक्त जमीन को सिंहस्थ प्रयोजन से मुक्त कराया जाए। सड़क चौड़ीकरण पिपलिनाका क्षेत्र की 3 सड़कों के चौड़ीकरण की योजना पर पुन विचार किया जाए। विधायक कालूहेड़ा का यह कदम दर्शाता है कि वह लैंड पूलिंग के मुद्दे पर अपने क्षेत्र के किसानों के साथ मजबूती से खड़े हैं और अपनी ही सरकार पर दबाव बनाने के लिए आंदोलन का रास्ता अपनाने को भी तैयार हैं।