Tag: Sindh

  • सिंध के बंटवारे के प्रस्ताव पर भड़के बिलावल भुट्टो, मोहसिन नकवी को संसद में मुद्दा उठाने की दी चुनौती

    सिंध के बंटवारे के प्रस्ताव पर भड़के बिलावल भुट्टो, मोहसिन नकवी को संसद में मुद्दा उठाने की दी चुनौती


    नई दिल्ली ।
    पाकिस्तान में मौजूदा प्रांतों के विभाजन को लेकर राजनीतिक विवाद बढ़ता जा रहा है। इस मुद्दे पर सबसे तीखी प्रतिक्रिया सिंध से सामने आई है, जहां पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी की सरकार है। पीपीपी के चेयरमैन बिलावल भुट्टो जरदारी ने प्रांतों के बंटवारे की पैरवी कर रहे पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी पर निशाना साधते हुए उन्हें संसद में आकर इस मुद्दे पर बात रखने की चुनौती दी है।

    बिलावल भुट्टो जरदारी ने कहा कि मोहसिन नकवी को प्रांतों के विभाजन जैसे महत्वपूर्ण विषय पर किसी बिजनेस फोरम में चर्चा करने के बजाय देश की संसद में अपनी बात रखनी चाहिए। उनका कहना है कि इस मुद्दे पर संसद में चर्चा होनी चाहिए। बिलावल ने नकवी को सलाह देते हुए स्पष्ट किया कि यदि सरकार प्रांतों के पुनर्गठन का प्रस्ताव आगे बढ़ाना चाहती है, तो उसे संसद के सामने रखना चाहिए।

    बिलावल अपने पिता और पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के साथ लंदन पहुंचे हैं। इसी दौरान उन्होंने प्रांतों के विभाजन को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी। मोहसिन नकवी अलग-अलग मंचों पर प्रांतों के बंटवारे के विचार के समर्थन में सहमति बनाने की कोशिश कर रहे हैं। इस प्रस्ताव को लेकर पाकिस्तान की राजनीति में अलग-अलग दलों के बीच मतभेद सामने आ रहे हैं।

    पाकिस्तान में मौजूदा चार प्रांतों को विभाजित करके 12 से 15 नए छोटे प्रांत बनाए जाने का प्रस्ताव चर्चा में है। इस योजना के तहत पंजाब, सिंध, बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा जैसे चार बड़े प्रांतों को छोटे हिस्सों में बांटने का विचार है। प्रस्ताव के अनुसार प्रत्येक बड़े प्रांत को तीन छोटे हिस्सों में विभाजित किया जा सकता है, जिससे देश में कुल 12 से 15 नए प्रांत बनाए जाने की संभावना पर चर्चा हो रही है।

    इसी प्रस्ताव को लेकर शहबाज शरीफ सरकार के कई मंत्री देश के अलग-अलग हिस्सों में जाकर समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहे हैं। सरकार और पाकिस्तानी सेना की ओर से इसके पीछे यह तर्क दिया जा रहा है कि मौजूदा प्रांत बहुत बड़े और केंद्रीयकृत हो गए हैं। उनका कहना है कि बड़े प्रांतों के कारण स्वास्थ्य, शिक्षा और प्रशासनिक सेवाओं का वितरण प्रभावी तरीके से नहीं हो पा रहा है।

    प्रस्ताव के समर्थकों के अनुसार छोटे प्रांत बनने से प्रशासन को बेहतर तरीके से संचालित करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, इस विचार का राजनीतिक विरोध भी हो रहा है। पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी और जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम जैसी पार्टियां प्रांतों के विभाजन के प्रस्ताव के खिलाफ हैं।

    पीपीपी के विरोध के पीछे सिंध में उसके राजनीतिक आधार को लेकर चिंता भी बताई जा रही है। पार्टी को आशंका है कि सिंध के विभाजन से वहां उसका राजनीतिक आधार कमजोर हो सकता है। इसी वजह से बिलावल भुट्टो जरदारी ने इस प्रस्ताव पर खुलकर आपत्ति जताई है और इसे संसद में चर्चा के लिए लाने की बात कही है। सिंध के विभाजन को लेकर उनका रुख पाकिस्तान में चल रही प्रांतों के पुनर्गठन की बहस में महत्वपूर्ण राजनीतिक प्रतिक्रिया के तौर पर सामने आया है।

  • सिंधु जल संधि पर भारत की सख्ती का असर, पाकिस्तान के एक तिहाई हिस्से में गहराया जल संकट, सिंध-बलूचिस्तान की अर्थव्यवस्था पर बढ़ा खतरा

    सिंधु जल संधि पर भारत की सख्ती का असर, पाकिस्तान के एक तिहाई हिस्से में गहराया जल संकट, सिंध-बलूचिस्तान की अर्थव्यवस्था पर बढ़ा खतरा

    नई दिल्ली । भारत द्वारा सिंधु जल संधि पर रोक लगाए जाने के बाद पाकिस्तान के कई हिस्सों में जल संकट गहराता दिखाई दे रहा है। विशेष रूप से सिंध और बलूचिस्तान प्रांतों में पानी की उपलब्धता लगातार घटने से कृषि गतिविधियों, स्थानीय अर्थव्यवस्था और जल प्रबंधन व्यवस्था पर दबाव बढ़ गया है। हालात ऐसे बन रहे हैं कि देश की बड़ी आबादी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इस संकट के प्रभाव को महसूस कर रही है।

    पिछले एक वर्ष के दौरान पानी की आपूर्ति में आई कमी ने पाकिस्तान के उन क्षेत्रों की चिंताएं बढ़ा दी हैं जो लंबे समय से सिंधु नदी प्रणाली पर निर्भर रहे हैं। सिंध प्रांत, जिसे पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था के महत्वपूर्ण केंद्रों में गिना जाता है, इस संकट से सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में शामिल है। कराची सहित कई प्रमुख इलाकों में जल उपलब्धता को लेकर चिंता लगातार बढ़ रही है और विशेषज्ञ भविष्य में स्थिति और गंभीर होने की आशंका जता रहे हैं।

    जल संकट का सबसे बड़ा असर खेती-किसानी पर दिखाई दे रहा है। सिंध और बलूचिस्तान के विशाल कृषि क्षेत्र सिंचाई के लिए नहरों और बैराजों से मिलने वाले पानी पर निर्भर हैं। पानी की कमी के कारण फसलों की उत्पादकता प्रभावित होने का खतरा बढ़ गया है। किसानों के सामने सिंचाई व्यवस्था बनाए रखना चुनौती बनती जा रही है, जिससे कृषि आधारित आय और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

    सिंधु नदी पर स्थित सुक्कुर बैराज के आसपास की स्थिति विशेष रूप से चिंता का विषय बनी हुई है। यह बैराज लाखों एकड़ कृषि भूमि तक पानी पहुंचाने वाली प्रमुख नहर प्रणाली का आधार माना जाता है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार कई प्रमुख नहरों में जल प्रवाह सामान्य स्तर से काफी नीचे पहुंच गया है। इससे खेतों तक पानी पहुंचाने की क्षमता प्रभावित हुई है और कई इलाकों में सिंचाई कार्यक्रमों को पुनर्गठित करना पड़ रहा है।

    जल संकट के बीच पाकिस्तान के भीतर प्रांतों के बीच पानी के बंटवारे को लेकर विवाद भी तेज हो गया है। सिंध प्रशासन ने आरोप लगाया है कि पंजाब अपने निर्धारित हिस्से से अधिक पानी का उपयोग कर रहा है। इस मुद्दे ने पहले से मौजूद राजनीतिक और प्रशासनिक तनाव को और बढ़ा दिया है। जल वितरण को लेकर उठ रहे सवालों ने संघीय स्तर पर संसाधनों के प्रबंधन की चुनौती को भी सामने ला दिया है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पानी की उपलब्धता में जल्द सुधार नहीं हुआ तो कृषि उत्पादन, खाद्य सुरक्षा और स्थानीय रोजगार पर व्यापक असर पड़ सकता है। सिंध और बलूचिस्तान जैसे क्षेत्रों में बड़ी आबादी की आजीविका सीधे कृषि और उससे जुड़े व्यवसायों पर आधारित है। ऐसे में जल संकट केवल प्राकृतिक संसाधन का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि आर्थिक और सामाजिक स्थिरता से जुड़ा विषय बन चुका है।

    इस बीच भारत की ओर से यह संकेत मिले हैं कि आतंकवाद और सीमा सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर उसके रुख में कोई बदलाव नहीं है। ऐसे में पाकिस्तान के लिए जल प्रबंधन, संसाधनों के बेहतर उपयोग और आंतरिक वितरण व्यवस्था को प्रभावी बनाना आने वाले समय की सबसे बड़ी चुनौतियों में शामिल माना जा रहा है।