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  • सिंगापुर के पर्यटन मंच पर छाया मध्यप्रदेश, टाइगर स्टेट से मोगली लैंड और लजीज व्यंजनों तक दुनिया को न्योता

    सिंगापुर के पर्यटन मंच पर छाया मध्यप्रदेश, टाइगर स्टेट से मोगली लैंड और लजीज व्यंजनों तक दुनिया को न्योता

    नई दिल्ली । मध्यप्रदेश ने सिंगापुर में आयोजित अंतरराष्ट्रीय पर्यटन व्यापार प्रदर्शनी आईटीबी एशिया में अपनी प्राकृतिक सुंदरता, वन्यजीव संपदा, सांस्कृतिक विविधता, ऐतिहासिक धरोहरों और पारंपरिक व्यंजनों को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत किया। सैंड्स एक्सपो एंड कन्वेंशन सेंटर में आयोजित राष्ट्रीय पर्यटन संगठनों के विशेष सत्र में मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड के प्रबंध संचालक डॉ. इलैयाराजा टी ने अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों और टूर ऑपरेटरों को राज्य की यात्रा करने के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने कहा कि जो पर्यटक स्थापित और भीड़भाड़ वाले पर्यटन स्थलों से अलग हटकर वास्तविक, प्राकृतिक और स्थानीय जीवन से जुड़े अनुभव चाहते हैं, उनके लिए मध्यप्रदेश एक आकर्षक विकल्प है।

    डॉ. इलैयाराजा टी ने मध्यप्रदेश को भारत का दिल बताते हुए कहा कि राज्य की पहचान केवल उसकी भौगोलिक स्थिति तक सीमित नहीं है। यहां की सांस्कृतिक विविधता, स्थानीय परंपराएं और लोगों का आत्मीय व्यवहार पर्यटकों को अलग अनुभव प्रदान करते हैं। उनके अनुसार, बदलते वैश्विक पर्यटन परिदृश्य में यात्रियों की रुचि नए स्थानों और स्थानीय जीवनशैली को करीब से जानने में बढ़ रही है। ऐसे में मध्यप्रदेश अपनी विविध पर्यटन संभावनाओं के जरिए अंतरराष्ट्रीय यात्रियों को आकर्षित कर सकता है।

    उन्होंने अत्यधिक पर्यटन दबाव की समस्या का उल्लेख करते हुए कहा कि दुनिया के कई प्रमुख पर्यटन स्थलों पर सीमित स्थानों और खास समय के दौरान पर्यटकों की भीड़ बढ़ जाती है। इस समस्या का दीर्घकालिक समाधान पर्यटन गतिविधियों को नए क्षेत्रों तक पहुंचाना और कम चर्चित स्थलों की खोज को प्रोत्साहित करना है। उनके मुताबिक, नए गंतव्यों को पर्यटन मानचित्र पर लाने से यात्रियों को अलग अनुभव मिल सकते हैं और लोकप्रिय स्थानों पर भीड़ का दबाव कम करने में मदद मिल सकती है।

    मध्यप्रदेश की प्राकृतिक संपदा को प्रस्तुत करते हुए उन्होंने बताया कि राज्य के 25 प्रतिशत से अधिक क्षेत्र में जंगल हैं। वन्यजीवों के मामले में मध्यप्रदेश को टाइगर स्टेट के रूप में विशेष पहचान मिली हुई है। इसके अलावा राज्य चीता, तेंदुआ, गिद्ध और घड़ियाल जैसे वन्यजीवों के लिए भी जाना जाता है। यहां के राष्ट्रीय उद्यान, वन क्षेत्र और प्राकृतिक रास्ते वन्यजीव प्रेमियों तथा प्रकृति के बीच समय बिताने के इच्छुक पर्यटकों के लिए खास आकर्षण हैं।

    पेंच राष्ट्रीय उद्यान को मोगली और जंगल बुक की कहानियों से जोड़कर प्रस्तुत किया गया। यहां की प्रकृति भ्रमण गतिविधियां पर्यटकों को जंगल और वन्यजीवों के वातावरण को करीब से समझने का अवसर देती हैं। ऐतिहासिक ओरछा में बेतवा नदी पर रिवर राफ्टिंग भी पर्यटन के प्रमुख आकर्षणों में शामिल है। राज्य की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत में सांची स्तूप, खजुराहो के मंदिर और भीमबेटका के शैलचित्रों का विशेष स्थान है। प्रस्तुति में मध्यप्रदेश के 22 यूनेस्को धरोहर स्थलों का भी उल्लेख किया गया।

    राज्य की पहचान उसके पारंपरिक हस्तशिल्प और जनजातीय संस्कृति से भी जुड़ी है। मध्यप्रदेश में सात प्रमुख जनजातियों और 45 उप-जनजातियों की सांस्कृतिक परंपराएं मौजूद हैं। चंदेरी और महेश्वरी वस्त्र, गोंड चित्रकला तथा भोपाल की जरी-जरदोजी कला स्थानीय शिल्प की विशिष्ट पहचान हैं। इन परंपराओं के माध्यम से पर्यटक राज्य की सांस्कृतिक विरासत और कारीगरों के कौशल को समझ सकते हैं।

    पर्यटन के नए अवसर विकसित करने के लिए राज्य में हेली पर्यटन सेवा का विस्तार किया जा रहा है, ताकि कम पहुंच वाले पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान हो सके। मध्यप्रदेश ने स्पेनिश फिल्म आयोग के साथ समझौता कर अंतरराष्ट्रीय फिल्म पर्यटन को बढ़ावा देने की पहल भी की है। महिला सफारी चालकों और महिलाओं द्वारा संचालित होटलों को सुरक्षित तथा जिम्मेदार पर्यटन के प्रयासों के रूप में प्रस्तुत किया गया।

    डॉ. इलैयाराजा टी ने ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने पर जोर देते हुए कहा कि किसी स्थान की असली सुंदरता केवल उसकी इमारतों और ऐतिहासिक स्थलों में नहीं, बल्कि वहां के लोगों के व्यवहार और आतिथ्य में भी दिखाई देती है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों को स्थानीय जीवन, संस्कृति और परंपराओं का अनुभव लेने के लिए आमंत्रित किया।

    मध्यप्रदेश के खानपान को भी प्रस्तुति का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया। मालवा का पोहा-जलेबी, रतलामी सेव, पारंपरिक दाल-बाफला, मुरैना और ग्वालियर की गजक तथा नवाबी और बुंदेली शैली की मटन करी का उल्लेख किया गया। उन्होंने विश्वास जताया कि हेलीकॉप्टर संपर्क, सालभर आयोजित होने वाले सांस्कृतिक उत्सव और सुरक्षित पर्यटन वातावरण राज्य की यात्रा को यादगार बनाने में मदद करेंगे।

  • सिंगापुर दौरे पर सीएम नायब सिंह सैनी ने हरियाणा में निवेश, उद्योग और इनोवेशन बढ़ाने की प्राथमिकताएं सामने रखीं

    सिंगापुर दौरे पर सीएम नायब सिंह सैनी ने हरियाणा में निवेश, उद्योग और इनोवेशन बढ़ाने की प्राथमिकताएं सामने रखीं

    नई दिल्ली ।हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सिंगापुर दौरे के दूसरे दिन सिंगापुर इंडिया नेटवर्क फॉर ग्रोथ फोरम के तहत आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इस कार्यक्रम में सिंगापुर के प्रमुख उद्योगपति, विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधि और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय भी मौजूद रहे। कार्यक्रम का उद्देश्य हरियाणा में भविष्य के इंफ्रास्ट्रक्चर और औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के साथ-साथ हरियाणा और सिंगापुर के बीच आपसी सहयोग के नए अवसर तलाशना रहा।

    मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने अपने संबोधन में कहा कि सरकार का लक्ष्य हरियाणा को केवल एक औद्योगिक शक्ति तक सीमित नहीं रखना, बल्कि इसे भारत की इनोवेशन कैपिटल के रूप में स्थापित करना है। उन्होंने कहा कि इस आयोजन के जरिए दोनों अर्थव्यवस्थाओं के बीच सहयोग और साझेदारी को नई दिशा देने के अवसर मिल रहे हैं। सैनी ने उन्हें अपने विचार रखने का अवसर देने के लिए सिंगापुर बिजनेस फेडरेशन का आभार भी व्यक्त किया।

    सैनी ने कहा कि यह मंच दो ऐसी अर्थव्यवस्थाओं के बीच संवाद का अवसर उपलब्ध कराता है, जिनके बीच विश्वास, मित्रता और सहयोग का संबंध लगातार मजबूत हुआ है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2017 में हरियाणा ने सिंगापुर की कंपनियों और संस्थाओं के साथ पांच बड़े समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए थे। मुख्यमंत्री ने हरियाणा की भौगोलिक और आर्थिक स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य उत्तर भारत के बड़े उपभोक्ता और विनिर्माण बाजार के बीच स्थित है।

    मुख्यमंत्री के मुताबिक, हरियाणा में प्रमुख आर्थिक कॉरिडोर, एक्सप्रेसवे और बेहतर फ्रेट कनेक्टिविटी उपलब्ध है। उनके अनुसार, ये सुविधाएं राज्य में उद्योगों और निवेश के लिए अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराती हैं। उन्होंने कहा कि गुरुग्राम और उसके आसपास इंटीग्रेटेड टाउनशिप, कमर्शियल डेवलपमेंट और आधुनिक शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में सिंगापुर की कंपनियों के साथ साझेदारी की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं। उन्होंने सिंगापुर की कंपनियों से हरियाणा में अपने टेक्नोलॉजी और प्रोफेशनल कैपेबिलिटी सेंटर स्थापित करने का भी आह्वान किया।

    सैनी ने बताया कि हाल ही में हरियाणा ने सिंगापुर स्थित एक ग्लोबल स्कूल ग्रुप के साथ साझेदारी की है। इसके तहत राज्य में विश्वस्तरीय के-12 शिक्षा का बुनियादी ढांचा विकसित करने की योजना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा सरकार ऐसा मजबूत इकोसिस्टम तैयार करना चाहती है, जिसमें कारोबार तेजी से आगे बढ़े और उसके साथ रोजगार, निवेश तथा इनोवेशन के नए अवसर भी पैदा हों। उन्होंने कहा कि सिंगापुर के साथ सहयोग हरियाणा के औद्योगिक और आर्थिक विकास को नई गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

  • सिंगापुर में भारतीय समुदाय के खिलाफ ऑनलाइन नस्लीय टिप्पणियों पर पीएम लॉरेंस वोंग ने कार्रवाई की चेतावनी दी

    सिंगापुर में भारतीय समुदाय के खिलाफ ऑनलाइन नस्लीय टिप्पणियों पर पीएम लॉरेंस वोंग ने कार्रवाई की चेतावनी दी

    नई दिल्ली ।सिंगापुर में भारतीय समुदाय के खिलाफ ऑनलाइन की जा रही नस्लीय और आपत्तिजनक टिप्पणियों को लेकर सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। प्रधानमंत्री लॉरेंस वोंग ने कहा है कि किसी भी समुदाय के प्रति पूर्वाग्रह को स्वीकार्य या सामान्य बनने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसी टिप्पणियों को केवल सामान्य ऑनलाइन बातचीत मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

    प्रधानमंत्री वोंग ने रविवार, 6 सितंबर को यह टिप्पणी नेपाल में 26 अगस्त को आई अचानक बाढ़ के बाद सोशल मीडिया पर भारतीयों के खिलाफ सामने आईं नफरत भरी टिप्पणियों के संदर्भ में की। इस बाढ़ के बाद ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर भारतीय समुदाय को निशाना बनाने वाली टिप्पणियों की लहर देखने को मिली थी। नेपाल में आई इस बाढ़ में नौ सिंगापुरी नागरिक लापता हुए थे।

    सिंगापुर के प्रधानमंत्री ने कहा कि इस तरह के विचार पूरे देश का प्रतिनिधित्व नहीं करते हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि नस्लीय पूर्वाग्रह से जुड़ी टिप्पणियों को नजरअंदाज करना उचित नहीं होगा। उनका कहना है कि ऐसी बयानबाजी को बिना रोक-टोक जारी रहने देने से नस्लीय पूर्वाग्रह धीरे-धीरे सामान्य व्यवहार का हिस्सा बन सकता है।

    गृह मामलों के मंत्री के. षणमुगम ने भी मामले को गंभीरता से लिया है। उन्होंने पुलिस को भारतीय समुदाय के खिलाफ की जा रही टिप्पणियों की जांच करने के निर्देश दिए हैं। षणमुगम के अनुसार, हाल के दिनों में सिंगापुर में भारतीय समुदाय के खिलाफ नस्लीय टिप्पणियों में बढ़ोतरी देखी गई है।

    भारतीय मूल के गृह मंत्री ने इन टिप्पणियों को शर्मनाक, घटिया और पूरी तरह अस्वीकार्य बताया है। उन्होंने कहा कि पुलिस नस्लीय और विदेशी-विरोधी टिप्पणियों की जांच कर रही है। सरकार का रुख है कि ऐसी बयानबाजी को बिना कार्रवाई के आगे बढ़ने देना समाज में नस्लीय पूर्वाग्रह को बढ़ावा दे सकता है।

    प्रधानमंत्री वोंग ने कहा कि सिंगापुर में अलग-अलग मुद्दों पर मजबूत बहस हो सकती है और लोगों को अपने विचार रखने की स्वतंत्रता है। लेकिन किसी समुदाय के खिलाफ पूर्वाग्रह या विदेशियों के प्रति दुश्मनी फैलाने के लिए वैध तर्कों की आड़ नहीं ली जानी चाहिए।

    सिंगापुर एक बहुसांस्कृतिक देश है और ऐसे माहौल में सरकार ने नस्लीय सद्भाव को लेकर चिंता जताई है। भारतीय समुदाय के खिलाफ सोशल मीडिया पर सामने आई टिप्पणियों ने इस मुद्दे को फिर चर्चा में ला दिया है। सरकार की ओर से पुलिस जांच के निर्देश दिए जाने के बाद ऑनलाइन की जा रही आपत्तिजनक और नस्लीय टिप्पणियों पर निगरानी बढ़ने की बात सामने आई है।

    मामले को लेकर प्रधानमंत्री और गृह मंत्री दोनों ने इस बात पर जोर दिया है कि किसी भी समुदाय के खिलाफ नफरत या पूर्वाग्रह को सामान्य व्यवहार के रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता। प्रधानमंत्री वोंग ने यह भी कहा कि सिंगापुर में होने वाली बहस और असहमति को किसी समुदाय के खिलाफ भेदभावपूर्ण या विदेशियों के प्रति शत्रुतापूर्ण बयानबाजी का माध्यम नहीं बनाया जाना चाहिए।

    उपलब्ध जानकारी के अनुसार, भारतीय समुदाय के खिलाफ ऑनलाइन टिप्पणियों की जांच पुलिस कर रही है। सरकार की ओर से यह संदेश दिया गया है कि नस्लीय और विदेशी-विरोधी बयानबाजी को लेकर गंभीरता से कार्रवाई की जाएगी। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर सामने आए इस विवाद ने सिंगापुर में नस्लीय पूर्वाग्रह और सामाजिक सद्भाव से जुड़े सवालों को फिर सामने ला दिया है।

  • सिंगापुर में भारतीयों पर घटिया और नस्ली टिप्पणियां….. सरकार ने दिए जांच के आदेश

    सिंगापुर में भारतीयों पर घटिया और नस्ली टिप्पणियां….. सरकार ने दिए जांच के आदेश


    सिंगापुर।
    सिंगापुर (Singapore ) के गृह मंत्री के. शनमुगम (Home Minister K. Shanmugam) ने भारतीयों (Indians) को लेकर इंटरनेट पर की जा रही नस्ली और आपत्तिजनक टिप्पणियों पर कड़ी नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि चीन-नेपाल (China-Nepal) में आई भीषण बाढ़ और एयर इंडिया (Air India) में सिंगापुर एयरलाइंस (Singapore Airlines- SIA) के निवेश से जुड़े मामलों को लेकर कुछ लोगों ने बेहद घटिया और नस्ली टिप्पणियां की हैं। शनमुगम ने कहा कि उन्होंने पुलिस से इन टिप्पणियों की जांच करने को कहा है। उनका कहना था कि ऐसे लोगों को इंटरनेट की गुमनामी के पीछे छिपने की इजाजत नहीं दी जानी चाहिए, बल्कि उनकी पहचान कर कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने इन टिप्पणियों को शर्मनाक, घटिया और पूरी तरह अस्वीकार्य बताया।

    शनमुगम ने कहा कि नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद जब कई सिंगापुरवासी लापता हैं, तब भी सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ नस्ली टिप्पणियां की गईं। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि कुछ लोगों ने लापता सिंगापुरवासियों को लेकर भी बेहद आपत्तिजनक बातें लिखीं। उन्होंने कहा कि यह स्थिति तब और गंभीर हो जाती है, जब 1000 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है और कई लोग अब भी लापता हैं। शनमुगम ने कहा कि ज्यादातर सिंगापुरवासी ऐसी सोच नहीं रखते। उन्होंने बताया कि सिंगापुर रेड क्रॉस ने नेपाल में राहत कार्यों के लिए 30 लाख सिंगापुर डॉलर से ज्यादा जुटाए हैं। सिंगापुर के लोग अलग-अलग समुदायों से होने के बावजूद जरूरत के समय एक-दूसरे और दूसरे देशों के लोगों की मदद करते हैं।


    एयर इंडिया से जुड़ा क्या है मामला

    एयर इंडिया में सिंगापुर एयरलाइंस के निवेश को लेकर भी सोशल मीडिया पर भारतीयों के खिलाफ नस्ली टिप्पणियों की नई लहर देखने को मिली। शनमुगम ने कहा कि कुछ लोगों ने भारतीयों को लेकर सांप, करी, पराठा और काले जादू जैसी टिप्पणियां कीं। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर टेमासेक के सीईओ और सीनियर अधिकारियों को भी उनकी जातीय पहचान के आधार पर निशाना बनाया। यह कहना कि किसी अधिकारी की भारतीय मूल की वजह से वह एयर इंडिया के पक्ष में फैसला करेगा, गलत और बदनाम करने वाली बात है।

    के. शनमुगम ने जोर देकर कहा कि संबंधित अधिकारी सिंगापुर में पैदा हुए, वहीं पढ़े और पूरी तरह सिंगापुरवासी हैं। किसी व्यक्ति को उसकी जातीय पहचान के आधार पर निशाना बनाना स्वीकार नहीं किया जा सकता। एयर इंडिया की ओर से अपने शेयरधारकों से करीब 1.5 अरब डॉलर की अतिरिक्त पूंजी मांगे जाने की खबरों के बीच सिंगापुर एयरलाइंस को निवेश पर फैसला करना है। शनमुगम ने साफ कहा कि एयर इंडिया में निवेश जारी रखना है या नहीं, इसका फैसला सिंगापुर एयरलाइंस के निदेशक मंडल और मैनेजमेंट को करना चाहिए।

  • सिंगापुर ने भारतीयों के खिलाफ नस्लीय नफरत फैलाने वाली 14 सोशल मीडिया पोस्ट पर रोक लगाई

    सिंगापुर ने भारतीयों के खिलाफ नस्लीय नफरत फैलाने वाली 14 सोशल मीडिया पोस्ट पर रोक लगाई

    नई दिल्ली। सिंगापुर सरकार ने भारतीयों के खिलाफ नस्लीय नफरत फैलाने वाली 14 सोशल मीडिया पोस्ट को ब्लॉक कर दिया है। यह कार्रवाई ‘ऑनलाइन क्रिमिनल हार्म्स एक्ट 2023’ (OCHA) के तहत की गई। अधिकारियों ने कहा कि ये पोस्ट जानबूझकर भारतीय समुदाय को निशाना बनाकर भड़काऊ सामग्री फैलाने के लिए बनाई गई थीं।

    सिंगापुर के गृह मंत्रालय (MHA) ने YouTube, Facebook और X को निर्देश दिए कि वे इन पोस्टों तक स्थानीय उपयोगकर्ताओं की पहुंच रोकें। सरकार ने इसे विदेशी कनेक्शन वाले गलत जानकारी फैलाने के अभियान के खिलाफ अब तक की सबसे सख्त कार्रवाई बताया। इस कदम का उद्देश्य सिंगापुर जैसे बहुसांस्कृतिक शहर-राज्य में सामाजिक सद्भाव बनाए रखना और नस्लीय तनाव को रोकना है।

    पोस्टों में क्या था कंटेंट
    अधिकारियों ने बताया कि आपत्तिजनक सामग्री पिछले महीने चीन के ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म पर शुरू हुई थी। शुरुआत में यह सिंगापुर की सांस्कृतिक पहचान और जातीय राजनीति पर केंद्रित थी। बाद में पोस्ट और अधिक भड़काऊ हो गई, जिसमें दावा किया गया कि भारतीयों की बढ़ती आबादी सिंगापुर के लिए खतरा है और देश के कई संस्कृतियों वाले ढांचे को कमजोर कर रही है।

    कुछ पोस्टों में कहा गया कि सिंगापुर की सामाजिक स्थिरता उसके बहुसांस्कृतिक ढांचे की वजह से नहीं, बल्कि चीनी बहुल आबादी की वजह से बनी हुई है। इसके साथ ही कुछ पोस्टों ने भारतवंशी नेताओं के प्रभाव को लेकर आलोचना की और भारतीय प्रवासियों के बढ़ते प्रभाव को देश के हितों के लिए हानिकारक बताया।

    कंटेंट को विश्वसनीय दिखाने के लिए ‘लिटिल इंडिया’ की व्यस्त सड़कों और पगोडा स्ट्रीट पर भारतीय त्योहारों के वीडियो का इस्तेमाल किया गया। पोस्ट में अपमानजनक भाषा का भी इस्तेमाल हुआ, जैसे भारतीय आबादी की तुलना “करी (curry) के जमावड़े” से करना।

    कानूनी आधार और जांच
    MHA ने कहा कि ये पोस्ट सिंगापुर के दंड संहिता (Penal Code) की धारा 298A के तहत अपराध की श्रेणी में आ सकते हैं। यह धारा उन गतिविधियों को अपराध मानती है जो जानबूझकर नस्लीय या धार्मिक समूहों के बीच दुश्मनी, नफरत या दुर्भावना को बढ़ावा देती हैं।

    जांच में पता चला कि यह सामग्री संभवतः चीन स्थित प्लेटफ़ॉर्म से शुरू हुई और फिर अन्य सोशल मीडिया चैनलों पर फैल गई। अधिकारियों ने यह भी कहा कि सामग्री फैलाने के प्रयास सुनियोजित और जानबूझकर किए गए थे।

    सिंगापुर पुलिस ने प्लेटफ़ॉर्मों को निर्देश दिए कि वे सभी ज़रूरी कदम उठाएं ताकि स्थानीय उपयोगकर्ताओं को इन भड़काऊ पोस्टों तक पहुंच न मिले। अधिकारियों ने कहा कि यह कार्रवाई बहुसांस्कृतिक समाज में सद्भाव बनाए रखने और नस्लीय नफरत फैलाने वाली सामग्री से सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जरूरी थी।

    इस कदम से सिंगापुर ने दिखा दिया कि वह नस्लीय और धार्मिक सद्भाव बनाए रखने में कड़ा रुख अपनाने के लिए तत्पर है, और विदेशों से आई किसी भी भड़काऊ सामग्री को रोकने के लिए कानूनी और तकनीकी माध्यमों का प्रयोग कर रहा है।

  • असम की जीत पर अंतरराष्ट्रीय समर्थन: सिंगापुर ने सरमा को दी शुभकामनाएं, सहयोग बढ़ाने पर जोर

    असम की जीत पर अंतरराष्ट्रीय समर्थन: सिंगापुर ने सरमा को दी शुभकामनाएं, सहयोग बढ़ाने पर जोर


    नई दिल्ली । असम में हाल ही में हुए राजनीतिक घटनाक्रम के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। राज्य में लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी संभालने जा रहे हिमंता बिस्वा सरमा को सिंगापुर की ओर से बधाई संदेश प्राप्त हुआ है। इस संदेश में न केवल उनकी जीत की सराहना की गई, बल्कि असम के विकास में सहयोग को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता भी दोहराई गई है। यह घटनाक्रम भारत और सिंगापुर के बीच बढ़ते रणनीतिक और आर्थिक संबंधों को भी उजागर करता है।

    सिंगापुर के प्रतिनिधि ने अपने संदेश में कहा कि असम के नए कार्यकाल की शुरुआत राज्य के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर है, जिसमें विकास और प्रगति की गति को और तेज किया जा सकता है। उन्होंने सरमा को शुभकामनाएं देते हुए उम्मीद जताई कि आने वाले वर्षों में असम नई ऊंचाइयों को छुएगा और क्षेत्रीय विकास का एक मजबूत केंद्र बनेगा।

    यह समर्थन केवल औपचारिक बधाई तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें दीर्घकालिक साझेदारी का स्पष्ट संकेत भी शामिल था। सिंगापुर ने असम को एक भरोसेमंद सहयोगी बताते हुए कहा कि दोनों पक्षों के बीच पहले से जारी सहयोग को और अधिक विस्तार दिया जाएगा। खासकर औद्योगिक निवेश, तकनीकी विकास, बुनियादी ढांचे और कौशल विकास जैसे क्षेत्रों में साझेदारी को मजबूत करने पर जोर दिया गया है।

    पिछले कुछ वर्षों में असम और सिंगापुर के बीच संबंधों में उल्लेखनीय प्रगति देखी गई है। राज्य में निवेश आकर्षित करने और आधुनिक उद्योगों को विकसित करने के लिए कई पहल की गई हैं, जिनमें सेमीकंडक्टर निर्माण, हरित ऊर्जा और शहरी विकास जैसे क्षेत्र प्रमुख हैं। इन प्रयासों ने असम को एक उभरते हुए निवेश गंतव्य के रूप में स्थापित करने में मदद की है।

    विशेष रूप से इलेक्ट्रॉनिक्स और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में दोनों पक्षों के बीच सहयोग को रणनीतिक माना जा रहा है। असम में विकसित हो रहे औद्योगिक क्षेत्रों और टेक्नोलॉजी आधारित परियोजनाओं में विदेशी भागीदारी को बढ़ावा देने की दिशा में भी लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसके साथ ही स्वास्थ्य और कौशल विकास के क्षेत्रों में भी संयुक्त कार्यक्रमों पर काम आगे बढ़ रहा है।

    इस पूरे घटनाक्रम को केवल एक कूटनीतिक संदेश के रूप में नहीं देखा जा रहा, बल्कि इसे असम की बढ़ती वैश्विक पहचान का संकेत भी माना जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय सहयोग और निवेश की यह दिशा राज्य की आर्थिक संरचना को नई मजबूती देने में सहायक हो सकती है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हिमंता बिस्वा सरमा के नेतृत्व में असम अब क्षेत्रीय विकास से आगे बढ़कर वैश्विक साझेदारियों की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहा है। इस प्रकार के समर्थन संदेश यह दर्शाते हैं कि राज्य अब अंतरराष्ट्रीय निवेश और सहयोग के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में उभर रहा है।

    आने वाले समय में असम और सिंगापुर के बीच सहयोग के और गहरे होने की संभावना जताई जा रही है, जिससे न केवल आर्थिक विकास को गति मिलेगी बल्कि रोजगार और तकनीकी उन्नति के नए अवसर भी पैदा होंगे।