Tag: Singing

  • दलेर मेहंदी पर शराब पीकर स्टेज पर आने के आरोप से भड़के मीका सिंह, बोले- सबूत मिला तो छोड़ दूंगा सिंगिंग

    दलेर मेहंदी पर शराब पीकर स्टेज पर आने के आरोप से भड़के मीका सिंह, बोले- सबूत मिला तो छोड़ दूंगा सिंगिंग

    नई दिल्ली । मशहूर गायक मीका सिंह अपने बड़े भाई और लोकप्रिय सिंगर दलेर मेहंदी के समर्थन में सामने आए हैं। उत्तराखंड में एक सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान दलेर मेहंदी पर शराब पीकर मंच पर आने के आरोप लगाए गए थे। इन आरोपों पर नाराजगी जताते हुए मीका सिंह ने कहा कि यदि कोई यह साबित कर दे कि उनके भाई शराब पीते हैं, तो वह गायकी छोड़ देंगे। उन्होंने मीडिया में प्रकाशित खबरों पर सवाल उठाते हुए तथ्यों की पुष्टि के बाद ही समाचार प्रसारित करने की अपील की है।

    मीका सिंह ने सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक वीडियो में दलेर मेहंदी को लेकर सामने आई खबरों पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि उनके भाई पिछले करीब 30 वर्षों से सुपरस्टार हैं। मीका ने सवाल उठाया कि जब किसी ने उन्हें शराब पीते हुए नहीं देखा, तो उनके मंच पर नशे की हालत में होने का दावा किस आधार पर किया गया। उन्होंने कहा कि बिना प्रमाण किसी कलाकार के बारे में इस तरह की बात फैलाना उचित नहीं है।

    मीका ने कलाकारों की व्यावसायिक जिम्मेदारियों का जिक्र करते हुए कहा कि कई बार तबीयत खराब होने के बावजूद कलाकार अपने कार्यक्रम का वादा निभाने के लिए मंच पर पहुंचते हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि किसी कलाकार को 104 डिग्री बुखार हो और दो दिन बाद उसका कार्यक्रम निर्धारित हो, तब भी वह अपनी प्रतिबद्धता पूरी करने का प्रयास करता है। उनके मुताबिक, कार्यक्रम का बजट छोटा हो या बड़ा, कलाकार अपनी जिम्मेदारी निभाने की कोशिश करते हैं। मीका का मानना है कि दलेर मेहंदी ने भी अपनी पेशेवर प्रतिबद्धता के कारण कार्यक्रम में प्रस्तुति दी होगी।

    उन्होंने मीडिया से आग्रह किया कि किसी भी खबर को प्रकाशित करने से पहले उससे जुड़े तथ्यों की जांच की जाए। मीका ने कहा कि बिना सबूत लगाए गए आरोपों पर आंख बंद करके भरोसा नहीं करना चाहिए और न ही उन्हें सत्यता की पुष्टि किए बिना आगे बढ़ाना चाहिए। उन्होंने दशहरा की शुभकामनाएं देते हुए जिम्मेदार और निष्पक्ष पत्रकारिता पर जोर दिया।

    मीका ने कार्यक्रम के दौरान दलेर मेहंदी के साथ हुए व्यवहार पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने सवाल किया कि यदि किसी सम्मानित मंत्री की मौजूदगी में किसी कलाकार पर सार्वजनिक रूप से शराब पीने का आरोप लगाया जाता है, तो खबर प्रकाशित करने से पहले उसकी पुष्टि करना और संबंधित कलाकार को अपना पक्ष रखने का अवसर देना जरूरी नहीं है क्या। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय बैंड कोल्डप्ले का उदाहरण देते हुए पूछा कि क्या किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय कलाकार के साथ भी मंच पर ऐसा व्यवहार किया जाएगा।

    मीका ने यह भी कहा कि वह अपने भाई को अच्छी तरह जानते हैं और उनके अनुसार दलेर मेहंदी शराब नहीं पीते। उन्होंने बताया कि उनके भाई पिछले दो वर्षों से बीमार हैं और अभी भी स्वास्थ्य लाभ कर रहे हैं। इसके बावजूद वह अपने बैंड के साथ प्रस्तुतियां दे रहे हैं। मीका ने यह मुद्दा भी उठाया कि आजकल कई गायक बैकिंग ट्रैक का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन उनके काम को लेकर उसी तरह के सवाल नहीं उठाए जाते। उन्होंने कहा कि दलेर मेहंदी देश के बड़े गायकों में शामिल हैं और उनकी लोकप्रियता के कारण उन्हें निशाना बनाया जा सकता है। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि बिना पुष्टि प्रकाशित की गई खबर किसी व्यक्ति की छवि को नुकसान पहुंचा सकती है।

    यह विवाद 18 अक्टूबर को उत्तराखंड के टिहरी जिले में आयोजित कुंजापुरी मेले के दौरान सामने आया था। नवरात्र के समय आयोजित होने वाले इस सांस्कृतिक कार्यक्रम में दलेर मेहंदी प्रस्तुति दे रहे थे। इसी दौरान उत्तराखंड सरकार में कैबिनेट मंत्री और स्थानीय विधायक सुबोध उनियाल मंच पर पहुंचे। आरोप है कि उन्होंने दलेर मेहंदी की प्रस्तुति रुकवा दी और दर्शकों के सामने उन्हें फटकार लगाई। मंत्री ने आरोप लगाया कि दलेर मेहंदी देवी दुर्गा के सम्मान में आयोजित कार्यक्रम में शराब पीकर मंच पर आए थे। इसके बाद मामला चर्चा में आ गया और मीका सिंह ने अपने भाई के समर्थन में सार्वजनिक प्रतिक्रिया दी।

  • अरिजीत सिंह से तुलना पर अभिजीत सावंत ने खोला पुराना राज, बोले- एक समय मैं बहुत पॉपुलर था लेकिन…

    अरिजीत सिंह से तुलना पर अभिजीत सावंत ने खोला पुराना राज, बोले- एक समय मैं बहुत पॉपुलर था लेकिन…


    नई दिल्ली । अभिजीत सावंत और अरिजीत सिंह ने साल 2005 के आसपास अपने संगीत करियर की शुरुआत की, लेकिन दोनों का सफर आगे चलकर बिल्कुल अलग दिशा में गया। एक ओर अभिजीत सावंत रियलिटी शो जीतने के बाद अचानक घर-घर में पहचान बनाने वाले गायक बन गए, वहीं अरिजीत सिंह ने लंबे समय तक पर्दे के पीछे रहकर संगीतकारों और कंपोजर्स के साथ काम किया। अब अभिजीत ने दोनों के शुरुआती दौर की तुलना करते हुए अपने अनुभव साझा किए हैं।

    अभिजीत सावंत ने बताया कि रियलिटी शो जीतने के बाद उन्हें बहुत कम समय में बड़ी लोकप्रियता मिल गई थी। उस दौर में वह लगातार लोगों की नजरों में थे और उनके करियर को लेकर उम्मीदें भी काफी बढ़ गई थीं। दूसरी तरफ अरिजीत उस समय लाइमलाइट से काफी दूर थे। वह स्टूडियो में जाकर संगीत से जुड़े अलग-अलग काम कर रहे थे और अपनी पहचान बनाने के लिए लगातार मेहनत कर रहे थे।

    अभिजीत के मुताबिक, शुरुआती वर्षों में अरिजीत को बतौर गायक वह पहचान नहीं मिली थी, जो बाद में उन्हें हासिल हुई। उन्होंने बताया कि अरिजीत ने करीब एक दशक तक म्यूजिक इंडस्ट्री में अलग-अलग भूमिकाओं में काम करते हुए अनुभव हासिल किया। इस दौरान उन्होंने कई संगीतकारों और म्यूजिशियंस के साथ काम किया और धीरे-धीरे अपनी क्षमता को मजबूत किया।

    अपने उस दौर को याद करते हुए अभिजीत ने कहा कि अगर उस समय दोनों की लोकप्रियता की तुलना की जाए, तो वह खुद काफी ज्यादा लोकप्रिय थे, जबकि अरिजीत को बहुत कम लोग जानते थे। हालांकि, दोनों के सामने मौजूद चुनौतियां अलग थीं। अभिजीत पर अचानक मिली लोकप्रियता को बनाए रखने का दबाव था, जबकि अरिजीत को लंबे समय तक अपनी पहचान बनाने के लिए इंतजार और मेहनत करनी पड़ी।

    अभिजीत ने यह भी बताया कि अरिजीत ने उन वर्षों का इस्तेमाल अपने संगीत अनुभव को मजबूत करने में किया। उन्होंने संगीतकारों के साथ लगातार काम किया और इसी प्रक्रिया में अपनी प्रतिभा को निखारा। इसके बाद उन्हें बतौर प्लेबैक सिंगर बड़े अवसर मिलने लगे और उनकी आवाज ने अलग पहचान बनानी शुरू की।

    अरिजीत सिंह के करियर में फिल्म ‘आशिकी 2’ का गाना ‘तुम ही हो’ बेहद महत्वपूर्ण मोड़ माना जाता है। हालांकि इससे पहले भी वह फिल्मों के लिए गाने रिकॉर्ड कर चुके थे, लेकिन इस गीत ने उन्हें देशभर में बड़ी पहचान दिलाई। अभिजीत ने भी माना कि ‘तुम ही हो’ अरिजीत के करियर में ऐसा गाना साबित हुआ, जिसने उनकी पहचान को पूरी तरह बदल दिया।

    अभिजीत ने अरिजीत की सफलता को केवल मेहनत से जोड़ने के बजाय किस्मत के पहलू का भी जिक्र किया। उनका कहना था कि किसी खास गाने का किसी कलाकार की आवाज तक पहुंचना कई परिस्थितियों पर निर्भर करता है। उनके अनुसार, हर कलाकार का अपना समय और अपना सफर होता है।

    अभिजीत ने यह भी कहा कि दर्शकों को केवल सफल व्यक्ति की उपलब्धियों को देखकर दूसरे लोगों की कमियां नहीं निकालनी चाहिए। उनके मुताबिक, हर कलाकार अपनी जिंदगी और करियर में आगे बढ़ने के लिए प्रयास करता है और हर किसी की परिस्थितियां अलग होती हैं। इसलिए लोगों को अलग-अलग कलाकारों के सफर को समझने की कोशिश करनी चाहिए।

  • मोहम्मद रफी की आवाज का ऐसा जादू, बिना इंटरनेट के 26 भाषाओं में गूंजे गीत और बनी विश्व पहचान

    मोहम्मद रफी की आवाज का ऐसा जादू, बिना इंटरनेट के 26 भाषाओं में गूंजे गीत और बनी विश्व पहचान

    नई दिल्ली । भारतीय संगीत जगत के महानतम पार्श्वगायकों में शामिल मोहम्मद रफी की आवाज का जादू आज भी करोड़ों लोगों के दिलों में कायम है। जिस दौर में न इंटरनेट था, न सोशल मीडिया और न ही डिजिटल प्लेटफॉर्म, उस समय रफी साहब की आवाज सीमाओं को पार करते हुए दुनिया के कई हिस्सों तक पहुंच चुकी थी। 1940 के दशक में अपने गायन सफर की शुरुआत करने वाले मोहम्मद रफी ने कई दशकों तक भारतीय सिनेमा को अपनी सुरीली आवाज से समृद्ध किया और हर तरह के गीतों को अपनी गायकी से यादगार बना दिया।

    मोहम्मद रफी की खासियत यह थी कि वह हर भावना को अपनी आवाज में पूरी गहराई के साथ उतार देते थे। रोमांटिक गीतों से लेकर दर्द भरे नगमों, भजनों, कव्वालियों और देशभक्ति गीतों तक उन्होंने अपनी गायकी की अलग पहचान बनाई। उनकी आवाज में ऐसी मिठास और भावनात्मक प्रभाव था कि हर उम्र के श्रोता उनसे जुड़ जाते थे। यही वजह है कि कई दशक गुजर जाने के बाद भी उनके गीतों की लोकप्रियता कम नहीं हुई है।

    रफी साहब की गायकी केवल हिंदी फिल्मों तक सीमित नहीं रही। उन्होंने अपने करियर में करीब 26 भाषाओं में गीत रिकॉर्ड किए। इनमें हिंदी, उर्दू, पंजाबी, बंगाली, मराठी, गुजराती, भोजपुरी, तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम और ओड़िया जैसी भारतीय भाषाओं के अलावा अंग्रेजी, फारसी, स्पेनिश, डच और क्रियोल जैसी विदेशी भाषाएं भी शामिल थीं। यह उपलब्धि उस समय और भी बड़ी मानी जाती है, जब तकनीक और संचार के साधन आज की तरह विकसित नहीं थे।

    उनकी विदेशी भाषाओं में रिकॉर्ड की गई कुछ प्रस्तुतियां हिंदी फिल्मों के लोकप्रिय गीतों की धुनों पर आधारित थीं। फिल्म ‘गुमनाम’ के चर्चित गीत ‘हम काले हैं तो क्या हुआ दिलवाले हैं’ की धुन पर उन्होंने अंग्रेजी गीत भी रिकॉर्ड किया था। इसी तरह फिल्म ‘सूरज’ के सदाबहार गीत ‘बहारों फूल बरसाओ’ की धुन पर भी उन्होंने अंग्रेजी में गीत गाया था। यह दिखाता है कि उनकी आवाज की पहुंच केवल भारतीय श्रोताओं तक नहीं थी।

    मोहम्मद रफी से जुड़ा एक दिलचस्प तथ्य यह भी है कि उन्होंने फिल्मों के अलावा विज्ञापनों के लिए भी अपनी आवाज दी थी। 1950 के दशक में उन्होंने बर्मा शेल ऑयल कंपनी के लिए एक जिंगल रिकॉर्ड किया था, जिसका इस्तेमाल रेडियो विज्ञापन के रूप में किया जाता था। उस समय रेडियो ही लोगों तक पहुंचने का सबसे बड़ा माध्यम था और रफी साहब की आवाज ने उस विज्ञापन को भी खास बना दिया था।

    इसके अलावा उन्होंने कुछ सरकारी अभियानों और अन्य विशेष परियोजनाओं के लिए भी अपनी आवाज का योगदान दिया। हालांकि, उनकी सबसे बड़ी पहचान हमेशा भारतीय फिल्मों के उन हजारों गीतों से रही, जो आज भी संगीत प्रेमियों के बीच लोकप्रिय हैं।

    मोहम्मद रफी केवल एक गायक नहीं थे, बल्कि भारतीय संगीत की ऐसी विरासत हैं, जिसने भाषा और भौगोलिक सीमाओं को पार किया। उनकी आवाज में मौजूद भावनाओं और सुरों की गहराई ने उन्हें दुनिया भर में सम्मान दिलाया। आज भी उनकी गायकी नई पीढ़ी को प्रेरित करती है और उनके गीत भारतीय संगीत इतिहास की अमूल्य धरोहर बने हुए हैं।

  • निजी रिश्तों के तनाव से जब थम गई थी सुरीली जुगलबंदी, किशोर कुमार ने मिथुन के लिए गाना बंद करने के बाद उन्हीं के लिए रिकॉर्ड किया था अपना आखिरी गीत

    निजी रिश्तों के तनाव से जब थम गई थी सुरीली जुगलबंदी, किशोर कुमार ने मिथुन के लिए गाना बंद करने के बाद उन्हीं के लिए रिकॉर्ड किया था अपना आखिरी गीत

    नई दिल्ली ।  भारतीय सिनेमा जगत के इतिहास में अपनी जादुई आवाज से करोड़ों दिलों पर राज करने वाले महान गायक किशोर कुमार और डिस्को डांसर के नाम से मशहूर अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती से जुड़ा एक बेहद दिलचस्प और अनसुना किस्सा सामने आया है। अपने दौर में हर बड़े अभिनेता की आवाज बनने वाले किशोर कुमार ने एक समय पर मिथुन चक्रवर्ती के लिए फिल्मों में पाश्र्वगायन (प्लेबैक सिंगिंग) करने से पूरी तरह इनकार कर दिया था। इस फैसले के पीछे कोई व्यावसायिक या पेशेवर विवाद नहीं था, बल्कि इसके पीछे पूरी तरह से उनके निजी जीवन से जुड़ी एक भावुक वजह थी, जिसने दोनों दिग्गजों के बीच सालों तक दूरियां बनाए रखीं।

    इस कड़वाहट की मुख्य वजह अभिनेत्री योगिता बाली थीं। महान अभिनेत्री मधुबाला के दुखद निधन के बाद किशोर कुमार ने योगिता बाली से तीसरी शादी की थी, लेकिन उनका यह वैवाहिक रिश्ता ज्यादा समय तक टिक नहीं सका और जल्द ही दोनों अलग हो गए। इसी दौरान फिल्म ‘ख्वाब’ की शूटिंग के समय योगिता बाली और मिथुन चक्रवर्ती एक-दूसरे के करीब आए और दोनों में प्यार हो गया। इसके बाद योगिता बाली और मिथुन चक्रवर्ती ने शादी कर ली। इस शादी से किशोर कुमार काफी आहत हुए थे और उनका दिल टूट गया था, जिसके बाद उन्होंने गुस्से और दुख में मिथुन चक्रवर्ती के लिए कभी भी अपनी आवाज न देने का सख्त फैसला कर लिया।

    सालों तक मिथुन चक्रवर्ती की फिल्मों के लिए गाना न गाने के बाद, समय के साथ दोनों के बीच के व्यक्तिगत घाव धीरे-धीरे भरने लगे। वक्त बीतने के साथ किशोर कुमार की नाराजगी कम हुई और उन्होंने अपने काम को निजी जिंदगी से अलग रखते हुए मिथुन चक्रवर्ती के लिए दोबारा स्टूडियो में कदम रखा। दोनों के बीच की आपसी खटास खत्म होने के बाद किशोर कुमार ने ‘सुरक्षा’ और ‘वक्त की आवाज’ जैसी कई सुपरहिट फिल्मों में मिथुन चक्रवर्ती के लिए एक से बढ़कर एक बेहतरीन और यादगार गानों को अपनी सुरीली आवाज से सजाया, जिन्हें दर्शकों ने बेहद पसंद किया।

    इस पूरे घटनाक्रम में सबसे अनोखा और भावुक मोड़ तब आया जब किशोर कुमार ने अपने जीवन का सबसे अंतिम गाना भी मिथुन चक्रवर्ती के लिए ही रिकॉर्ड किया। किशोर कुमार को इस बात का जरा भी अंदाजा नहीं था कि वे जिस अभिनेता से कभी नाराज थे, उसी के लिए उनका आखिरी गाना इतिहास में दर्ज होने जा रहा है। उन्होंने फिल्म ‘वक्त की आवाज’ के लिए ‘गुरु-गुरु’ गाना रिकॉर्ड किया था, जो बाद में पर्दे पर मिथुन चक्रवर्ती पर ही फिल्माया गया। इस गाने की रिकॉर्डिंग के कुछ समय बाद ही संगीत की दुनिया का यह चमकता सितारा हमेशा के लिए इस दुनिया को अलविदा कह गया।

    हालांकि इस पूरे विवाद और व्यक्तिगत मतभेदों को लेकर न तो कभी किशोर कुमार ने अपने जीवन में खुलकर कोई बयान दिया और न ही मिथुन चक्रवर्ती ने कभी मीडिया के सामने इस पर चर्चा की। दोनों ही कलाकारों ने हमेशा एक-दूसरे के प्रति गहरा पेशेवर सम्मान बनाए रखा। किशोर कुमार सिर्फ एक महान गायक ही नहीं, बल्कि एक बेहद प्रतिभाशाली अभिनेता और कुशल निर्देशक भी थे, जिन्हें उनके शानदार करियर के दौरान रिकॉर्ड 8 फिल्मफेयर पुरस्कारों से नवाजा गया था और साथ ही मध्य प्रदेश सरकार द्वारा प्रतिष्ठित लता मंगेशकर पुरस्कार भी प्रदान किया गया था।