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  • मध्य प्रदेश में 150 पशु चिकित्सा अधिकारियों ने ट्रांसफर नीति पर उठाए सवाल, जांच के बाद निर्णय का आश्वासन

    मध्य प्रदेश में 150 पशु चिकित्सा अधिकारियों ने ट्रांसफर नीति पर उठाए सवाल, जांच के बाद निर्णय का आश्वासन

    मध्य प्रदेश में करीब 150 पशु चिकित्सा सहायक शल्यज्ञ और सहायक पशु चिकित्सा क्षेत्र अधिकारियों के तबादलों को लेकर विवाद सामने आया है। पशु चिकित्सकों ने ट्रांसफर नीति में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए पशुपालन एवं डेयरी विभाग के प्रमुख सचिव को अभ्यावेदन सौंपा है। अधिकारियों की ओर से उन्हें अभ्यावेदनों की जांच के बाद उचित निर्णय लेने का आश्वासन दिया गया है।

    पशु चिकित्सकों का कहना है कि तबादलों के बाद कई अधिकारियों ने अभी नई पदस्थापना पर ज्वाइनिंग नहीं की है। इसका असर कई जिलों में पशु चिकित्सा सेवाओं की व्यवस्था पर पड़ रहा है। कुछ स्थानों पर चिकित्सकों की संख्या कम होने से पशुओं के इलाज और विभागीय कामकाज में परेशानी आने की बात कही गई है।

    तबादलों को लेकर सबसे बड़ा आरोप सार्थक ऐप में दर्ज जानकारी और उसके आधार पर तैयार सूची को लेकर है। चिकित्सकों का दावा है कि ऑनलाइन रिकॉर्ड में कुछ छुट्टियों को अनुपस्थिति के तौर पर दर्ज किया गया, जिससे सेवा संबंधी जानकारी प्रभावित हुई। उनका आरोप है कि इसी तरह की विसंगतियों के आधार पर कुछ अधिकारियों की पदस्थापना तय की गई।

    पशु चिकित्सकों ने यह भी आरोप लगाया कि स्थानांतरण प्रक्रिया में निर्धारित नियमों और मानवीय आधारों का पर्याप्त ध्यान नहीं रखा गया। उनका कहना है कि कुछ अधिकारियों को 700 से 1300 किलोमीटर तक दूर भेज दिया गया, जबकि कुछ लोगों को कथित तौर पर तबादला सूची से बाहर रखा गया। इस कारण विभाग के भीतर समान अवसर और पारदर्शिता को लेकर सवाल उठे हैं।

    महिला और पारिवारिक परिस्थितियों से जुड़े मामलों को लेकर भी चिकित्सकों ने अपनी आपत्तियां दर्ज कराई हैं। सीहोर में पदस्थ रहीं पशु चिकित्सक रश्मि देवी चंद्राकर ने बताया कि उन्होंने अनूपपुर के आदिवासी क्षेत्र में करीब 11 वर्ष सेवाएं दी हैं। उनका दावा है कि नीति में तलाकशुदा महिलाओं के लिए यथासंभव अनुकूल स्थान पर पदस्थापना का प्रावधान होने के बावजूद उनका तबादला सिंगरौली किया जा रहा है।

    इसी तरह कुछ अन्य पशु चिकित्सकों ने बच्चों की पढ़ाई और पारिवारिक जिम्मेदारियों का हवाला देते हुए तबादलों से होने वाली कठिनाइयों की जानकारी दी है। डॉ. राखी सिंह और डॉ. कमल सिंह का कहना है कि उनके बच्चों की पढ़ाई भोपाल में चल रही है और स्कूल तथा कोचिंग के बीच अचानक दूसरे स्थान पर जाना परिवार के लिए मुश्किल होगा।

    पशु चिकित्सक उदय सिंह माहेश्वरी ने भी अपने तबादले को नियमों के विपरीत बताया है। उनका कहना है कि वे सीहोर जिला पशु चिकित्सक संघ के अध्यक्ष हैं और उनके बच्चों की शिक्षा संबंधी जिम्मेदारियां भी उन पर हैं। करीब 700 किलोमीटर दूर तबादला होने से उनके सामने व्यावहारिक कठिनाइयां पैदा हो गई हैं।

    चिकित्सकों ने यह आरोप भी लगाया कि कुछ तबादले प्रक्रिया के अंतिम समय में किए गए और नई जगह ज्वाइन करने के लिए पर्याप्त समय नहीं दिया गया। उनके अनुसार, इतनी कम अवधि में दूरस्थ जिलों में पहुंचना कई अधिकारियों के लिए मुश्किल है। कुछ मामलों में ऑनलाइन उपस्थिति और सेवा रिकॉर्ड से संबंधित जानकारी के भौतिक सत्यापन को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।

    तबादलों के कारण कई जिलों में पद खाली होने की स्थिति बनने का दावा भी किया गया है। चिकित्सकों के अनुसार, कुछ स्थानों पर पहले से सीमित संख्या में अधिकारी तैनात थे और स्थानांतरण के बाद वहां पशु चिकित्सा सेवाओं पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।

    विभागीय स्तर पर प्राप्त अभ्यावेदनों की जांच की जा रही है। जांच में स्थानांतरण प्रक्रिया, उपलब्ध रिकॉर्ड और चिकित्सकों की आपत्तियों का परीक्षण किया जाएगा। इसके बाद नियमों और तथ्यों के आधार पर आगे का निर्णय लिया जाना है। फिलहाल पशु चिकित्सकों की नजर जांच के परिणाम और संभावित संशोधन पर बनी हुई है।

  • नासिक में फिर डोली धरती, 3 दिन में चौथी बार भूकंप के झटके; सिंगरौली में भी कांपी जमीन

    नासिक में फिर डोली धरती, 3 दिन में चौथी बार भूकंप के झटके; सिंगरौली में भी कांपी जमीन


    नासिक।
    महाराष्ट्र के नासिक में शनिवार रात एक बार फिर भूकंप के झटके महसूस किए गए। लगातार तीसरे दिन धरती हिलने से इलाके में दहशत का माहौल है। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (NCS) के मुताबिक, शनिवार रात करीब 10 बजे आए भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 4.3 दर्ज की गई। भूकंप का केंद्र जमीन के करीब 5 किलोमीटर नीचे बताया गया है।

    अचानक धरती हिलने के बाद कई लोग घबराकर अपने घरों से बाहर निकल आए। हालांकि, राहत की बात यह है कि अभी तक भूकंप के कारण किसी तरह के जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं है। स्थानीय प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है।

    तीन दिन में चौथी बार हिली नासिक की धरती

    नासिक में पिछले कुछ दिनों से लगातार भूकंप के झटके महसूस किए जा रहे हैं। शनिवार का भूकंप तीन दिनों के भीतर चौथा झटका था।

    इससे पहले 6 अगस्त को नासिक में तीन बार भूकंप आया था। उस दिन दर्ज किए गए झटकों की तीव्रता क्रमशः 2.8, 3.6 और 2.5 थी। लगातार हो रही हलचल के कारण स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ गई है।

    रिसर्चर्स के मुताबिक, किसी इलाके में लगातार छोटे भूकंपीय झटके आने के पीछे जमीन के भीतर टेक्टोनिक प्लेटों की हलचल एक वजह हो सकती है। हालांकि, इन झटकों से भविष्य में किसी बड़े भूकंप की संभावना का सीधा अनुमान नहीं लगाया जा सकता।

    सिंगरौली में भी आया भूकंप

    शनिवार को मध्य प्रदेश के सिंगरौली में भी धरती कांपी। दोपहर 2 बजकर 6 मिनट पर आए भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 3.7 दर्ज की गई।

    नासिक की तरह सिंगरौली में भी अभी तक किसी नुकसान की सूचना नहीं है। एक ही दिन में महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में भूकंप के झटके महसूस होने के बाद दोनों घटनाओं को लेकर लोगों में चर्चा है। हालांकि, दोनों भूकंपों के बीच कोई सीधा संबंध है या नहीं, यह वैज्ञानिक जांच का विषय है।

    जापान में 7.1 तीव्रता के भूकंप ने मचाई तबाही

    भूकंप के झटकों से सिर्फ भारत ही नहीं, जापान भी प्रभावित हुआ है। 28 जुलाई को जापान के कुमामोटो प्रांत में 7.1 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया था। इसके बाद वहां बड़े पैमाने पर नुकसान की खबर सामने आई।

    रिपोर्ट के मुताबिक, इस आपदा में मृतकों की संख्या बढ़कर 39 हो गई है, जबकि 6,500 से ज्यादा लोग अभी भी राहत शिविरों में रह रहे हैं। करीब 205 लोग घायल हुए हैं, जिनमें से 23 की हालत गंभीर बताई गई है।

    भारत में नासिक और सिंगरौली में आए भूकंप अपेक्षाकृत कम तीव्रता के रहे और फिलहाल किसी बड़े नुकसान की जानकारी नहीं है। फिर भी नासिक में कम समय के भीतर बार-बार आ रहे झटकों ने स्थानीय लोगों की चिंता जरूर बढ़ा दी है।

  • सिंगरौली में 2 हजार रुपये की रिश्वत लेते वन विभाग का बीट गार्ड रंगे हाथ गिरफ्तार, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज

    सिंगरौली में 2 हजार रुपये की रिश्वत लेते वन विभाग का बीट गार्ड रंगे हाथ गिरफ्तार, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज

    मध्य प्रदेश। सिंगरौली जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ लोकायुक्त पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए वन विभाग के एक बीट गार्ड को दो हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई बरगवां रेंज के ओबरी जंगल चौकी क्षेत्र में की गई। शिकायत के सत्यापन के बाद लोकायुक्त टीम ने योजनाबद्ध तरीके से ट्रैप कार्रवाई को अंजाम दिया और आरोपी कर्मचारी को रिश्वत की रकम स्वीकार करते समय मौके पर ही पकड़ लिया। घटना के बाद वन विभाग के स्थानीय कार्यालयों में हलचल का माहौल बन गया।

    जानकारी के अनुसार, ओबरी बीट में पदस्थ बीट गार्ड अखिलेश शुक्ला पर क्षेत्र के निवासी रामलोचन प्रजापति से एक शासकीय कार्य के बदले रिश्वत मांगने का आरोप लगा था। शिकायतकर्ता ने कथित रूप से बार-बार रिश्वत की मांग से परेशान होकर लोकायुक्त पुलिस से संपर्क किया और पूरे मामले की लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत मिलने के बाद लोकायुक्त अधिकारियों ने प्रारंभिक जांच और तथ्यों का सत्यापन किया, जिसमें शिकायत प्रथम दृष्टया सही पाई गई।

    सत्यापन के बाद लोकायुक्त टीम ने आरोपी को रंगे हाथ पकड़ने के लिए विशेष योजना बनाई। निर्धारित समय पर शिकायतकर्ता को रासायनिक पदार्थ लगे दो हजार रुपये के नोट दिए गए और उसे आरोपी के पास भेजा गया। जैसे ही बीट गार्ड ने शिकायतकर्ता से रिश्वत की राशि स्वीकार की, पहले से निगरानी कर रही लोकायुक्त टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए उसे मौके पर ही पकड़ लिया।

    कार्रवाई के दौरान निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आरोपी के हाथ धुलवाए गए। परीक्षण में हाथों का रंग गुलाबी होने से रासायनिक पदार्थ के संपर्क की पुष्टि हुई, जिसे ट्रैप कार्रवाई का महत्वपूर्ण साक्ष्य माना जाता है। इसके बाद टीम ने रिश्वत की राशि बरामद कर आवश्यक दस्तावेजी कार्रवाई शुरू की।

    लोकायुक्त अधिकारियों ने बताया कि शिकायतकर्ता की सूचना और उसके सत्यापन के आधार पर यह कार्रवाई की गई है। आरोपी कर्मचारी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। साथ ही मामले से जुड़े अन्य आवश्यक साक्ष्य एकत्र किए जा रहे हैं ताकि आगे की वैधानिक प्रक्रिया नियमानुसार पूरी की जा सके।

    कार्रवाई के बाद आरोपी बीट गार्ड को बरगवां स्थित सर्किट हाउस ले जाया गया, जहां पूछताछ, दस्तावेजी औपचारिकताओं और अन्य कानूनी प्रक्रियाओं को पूरा किया गया। अधिकारियों ने बताया कि जांच के दौरान प्राप्त तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। मामले में यदि अतिरिक्त साक्ष्य सामने आते हैं तो उन्हें भी जांच का हिस्सा बनाया जाएगा।

    इस कार्रवाई के बाद वन विभाग के कर्मचारियों और अधिकारियों के बीच चर्चा का माहौल है। लोकायुक्त की इस ट्रैप कार्रवाई को सरकारी कार्यालयों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि भ्रष्टाचार संबंधी शिकायतों पर नियमानुसार जांच की जाती है और शिकायत सही पाए जाने पर कानून के तहत सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाती है। ऐसे मामलों में नागरिकों से भी अपील की जाती है कि यदि किसी सरकारी कार्य के बदले अवैध धनराशि की मांग की जाए तो उसकी सूचना संबंधित जांच एजेंसियों को दें, ताकि निष्पक्ष कार्रवाई की जा सके।

  • पीएम आवास और बिजली सुविधा वाली जमीन पर चला बुलडोजर, ग्रामीणों ने वन विभाग पर लगाए गंभीर आरोप, जांच शुरू

    पीएम आवास और बिजली सुविधा वाली जमीन पर चला बुलडोजर, ग्रामीणों ने वन विभाग पर लगाए गंभीर आरोप, जांच शुरू

    मध्य प्रदेश:के सिंगरौली जिले के चितरंगी तहसील अंतर्गत ग्राम भुईधरवा में वन विभाग की कार्रवाई के बाद भूमि अधिकार और बेदखली को लेकर नया विवाद सामने आया है। वन विभाग द्वारा कथित अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान कई परिवारों के आशियाने प्रभावित हुए, जिसके बाद ग्रामीणों ने प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग करते हुए न्याय की गुहार लगाई है। प्रभावित परिवारों का कहना है कि वे कई दशकों से संबंधित भूमि पर निवास और खेती करते आ रहे हैं तथा अब अचानक की गई कार्रवाई से उनके सामने आवास और आजीविका का संकट खड़ा हो गया है।

    ग्रामीणों का दावा है कि उनके परिवार वर्ष 1969 से इस भूमि पर रह रहे हैं और पीढ़ियों से खेती-बाड़ी कर जीवनयापन कर रहे हैं। उनका कहना है कि जिस जमीन को अब वन विभाग अतिक्रमित बता रहा है, उसी क्षेत्र में सरकारी योजनाओं के तहत प्रधानमंत्री आवास बनाए गए, हैंडपंप स्थापित किए गए और बिजली जैसी मूलभूत सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गईं। ग्रामीणों के अनुसार इन परिस्थितियों ने उन्हें यह विश्वास दिलाया कि उनका निवास और खेती वैध प्रक्रिया के दायरे में है।

    मामले ने उस समय और गंभीर रूप ले लिया जब कुछ ग्रामीणों ने वन विभाग के एक बीट गार्ड पर पट्टा दिलाने के नाम पर रिश्वत लेने का आरोप लगाया। आरोप है कि एक ग्रामीण से नकद राशि और एक बकरा कथित रूप से लिए गए, लेकिन इसके बावजूद भूमि का पट्टा नहीं मिला। इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, हालांकि ग्रामीणों ने इसकी निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। विभाग की ओर से आरोपों पर विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

    प्रभावित परिवारों का कहना है कि खेती ही उनकी आय का मुख्य साधन है और बेदखली की कार्रवाई के बाद उनके सामने रोजगार और आवास दोनों का संकट उत्पन्न हो गया है। उन्होंने प्रशासन को ज्ञापन सौंपते हुए चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समय तक समस्या का समाधान नहीं हुआ तो वे चितरंगी तहसील कार्यालय के सामने धरना-प्रदर्शन शुरू करेंगे। ग्रामीणों का कहना है कि उनकी मांग केवल स्थायी समाधान और भूमि अधिकार से जुड़े मामलों के निष्पक्ष निपटारे की है।

    विवाद बढ़ने के बाद जिला प्रशासन सक्रिय हुआ है। अधिकारियों ने बताया कि मामले की जांच के लिए राजस्व और वन विभाग की संयुक्त टीम गठित की गई है। जांच पूरी होने तक संबंधित कार्रवाई पर फिलहाल रोक लगाने का निर्णय लिया गया है ताकि सभी तथ्यों का निष्पक्ष परीक्षण किया जा सके। प्रशासन का कहना है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    प्रशासन ने यह भी आश्वासन दिया है कि यदि जांच में कोई व्यक्ति वास्तव में भूमिहीन पाया जाता है और पात्रता की शर्तें पूरी करता है तो नियमानुसार उसे भूमि से संबंधित लाभ दिलाने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। जिन परिवारों के मकान कार्रवाई के दौरान क्षतिग्रस्त हुए हैं, उनके पुनर्वास और वैकल्पिक आवास की व्यवस्था पर भी विचार किया जा रहा है। साथ ही बरसात के मौसम को देखते हुए प्रभावित परिवारों के लिए अस्थायी रहने और भोजन की व्यवस्था स्थानीय स्तर पर कराने के निर्देश दिए गए हैं।

    यह मामला अब केवल भूमि विवाद तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि सरकारी योजनाओं के लाभ, वन भूमि पर निवास, प्रशासनिक कार्रवाई और कथित भ्रष्टाचार जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दों से जुड़ गया है। स्थानीय प्रशासन का कहना है कि सभी पक्षों के दावों और उपलब्ध अभिलेखों की जांच के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा, ताकि किसी भी पात्र व्यक्ति के अधिकार प्रभावित न हों और कानून के अनुरूप उचित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

  • महिला कर्मचारियों वाले विभागीय ग्रुप में कथित अशोभनीय चैट से मचा विवाद, स्वास्थ्य विभाग के सुपरवाइजर को कारण बताओ नोटिस, जांच के बाद होगी कार्रवाई

    महिला कर्मचारियों वाले विभागीय ग्रुप में कथित अशोभनीय चैट से मचा विवाद, स्वास्थ्य विभाग के सुपरवाइजर को कारण बताओ नोटिस, जांच के बाद होगी कार्रवाई

    मध्य प्रदेश: के सिंगरौली जिले के चितरंगी स्वास्थ्य विभाग में विभागीय व्हाट्सएप ग्रुप में कथित अशोभनीय चैट भेजे जाने के आरोपों ने प्रशासनिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है। महिला कर्मचारियों की शिकायत के बाद स्वास्थ्य विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित सुपरवाइजर के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है। प्रारंभिक स्तर पर कारण बताओ नोटिस जारी करने का निर्णय लिया गया है, जिसके बाद प्राप्त जवाब और जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    मामला चितरंगी विकासखंड के सेक्टर लमसरई से जुड़ा है, जहां सुपरवाइजर का दायित्व संभाल रहे दुर्गा वैश्य पर विभागीय ग्रुप में कथित रूप से अशोभनीय संदेश साझा करने का आरोप लगाया गया है। बताया गया है कि जिस ग्रुप में यह संदेश भेजे गए, उसमें विभाग के अधिकारी, कर्मचारी तथा बड़ी संख्या में महिला कर्मचारी भी शामिल हैं। आरोप सामने आने के बाद विभागीय माहौल प्रभावित हुआ और कर्मचारियों के बीच इस मुद्दे को लेकर असंतोष बढ़ गया।

    महिला कर्मचारियों का कहना है कि विभागीय संचार के लिए बनाए गए ग्रुप का उपयोग केवल प्रशासनिक कार्यों और आधिकारिक सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए होना चाहिए। ऐसे मंच पर कथित आपत्तिजनक संदेश साझा किए जाने से न केवल उन्हें असहज स्थिति का सामना करना पड़ा, बल्कि कार्यस्थल का वातावरण भी प्रभावित हुआ। कर्मचारियों का मानना है कि इस प्रकार की घटनाएं सरकारी कार्यालयों की गरिमा और अनुशासन पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालती हैं।

    शिकायत मिलने के बाद संबंधित अधिकारियों ने पूरे मामले की प्रारंभिक जानकारी एकत्र करना शुरू कर दिया है। विभाग का कहना है कि आरोपों की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर नियमानुसार निर्णय लिया जाएगा। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि किसी भी कर्मचारी के खिलाफ अंतिम कार्रवाई जांच पूरी होने और उसका पक्ष सुनने के बाद ही की जाएगी।

    खंड चिकित्सा अधिकारी हरिशंकर वैश्य ने बताया कि शिकायत को गंभीरता से लिया गया है। उन्होंने कहा कि संबंधित सुपरवाइजर को कारण बताओ नोटिस जारी किया जा रहा है। नोटिस का जवाब प्राप्त होने के बाद विभागीय नियमों के अनुरूप आगे की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। यदि जांच में आरोप प्रमाणित पाए जाते हैं तो सेवा नियमों के तहत आवश्यक अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

    इस घटना के सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग में कार्यस्थल पर आचरण और डिजिटल माध्यमों के जिम्मेदार उपयोग को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। विभागीय अधिकारियों का मानना है कि आधिकारिक संचार मंचों का उपयोग केवल कार्यालयीन कार्यों तक सीमित रहना चाहिए और किसी भी प्रकार की अनुचित गतिविधि को स्वीकार नहीं किया जा सकता। फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है और विभाग अब संबंधित पक्षों के बयान तथा उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई करेगा।

  • लोकायुक्त FIR के साए में मिली नई जिम्मेदारी, करोड़ों की कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े पूर्व प्रभारी DEO की तैनाती पर उठे गंभीर सवाल

    लोकायुक्त FIR के साए में मिली नई जिम्मेदारी, करोड़ों की कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े पूर्व प्रभारी DEO की तैनाती पर उठे गंभीर सवाल

    मध्य प्रदेश: के सिंगरौली जिले से जुड़े बहुचर्चित शिक्षा विभाग वित्तीय अनियमितता प्रकरण ने एक बार फिर प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज कर दी है। करोड़ों रुपये की कथित वित्तीय गड़बड़ियों और भ्रष्टाचार संबंधी आरोपों के चलते जांच के दायरे में आए पूर्व प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी एस.बी. सिंह को शहडोल संभाग में सहायक संचालक का प्रभार सौंपे जाने के बाद कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं। यह फैसला ऐसे समय सामने आया है जब संबंधित मामले में लोकायुक्त स्तर पर कार्रवाई हो चुकी है और जांच की प्रक्रिया अभी भी चर्चा का विषय बनी हुई है।

    सिंगरौली का यह मामला पिछले कुछ वर्षों में शिक्षा विभाग से जुड़े सबसे चर्चित प्रकरणों में शामिल रहा है। आरोपों के अनुसार विभागीय योजनाओं के संचालन, सामग्री खरीदी, प्रशासनिक स्वीकृतियों और वित्तीय लेन-देन से जुड़े विभिन्न मामलों में बड़े स्तर पर अनियमितताओं की शिकायतें सामने आई थीं। इन शिकायतों के आधार पर प्रारंभिक जांच शुरू हुई और बाद में मामला इतना गंभीर माना गया कि लोकायुक्त संगठन को हस्तक्षेप करना पड़ा।

    जांच के दौरान सामने आए तथ्यों और शिकायतों के आधार पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज किए जाने की कार्रवाई भी हुई। उस समय यह मामला प्रदेशभर में चर्चा का केंद्र बना था और प्रशासनिक व्यवस्था की पारदर्शिता को लेकर कई प्रश्न उठाए गए थे। इसी वजह से माना जा रहा था कि जांच पूरी होने तक इस प्रकरण से जुड़े अधिकारियों की भूमिका सीमित रखी जा सकती है, ताकि जांच प्रक्रिया पर किसी प्रकार का प्रभाव न पड़े।

    हालांकि हालिया प्रशासनिक आदेश ने इस धारणा को चुनौती दी है। पूर्व प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी को शहडोल संभाग में सहायक संचालक जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपे जाने के बाद शिक्षा विभाग के भीतर और बाहर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। आलोचकों का मानना है कि भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों से घिरे अधिकारी को महत्वपूर्ण पद पर नियुक्त करना शासन की सख्ती को लेकर मिश्रित संदेश दे सकता है। वहीं कुछ प्रशासनिक जानकार इसे नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा मान रहे हैं।

    इस नियुक्ति के बाद सबसे अधिक चर्चा पारदर्शिता और जवाबदेही के मुद्दे को लेकर हो रही है। कई लोगों का तर्क है कि जब किसी मामले में जांच एजेंसियां सक्रिय हों और आरोपों की गंभीरता व्यापक हो, तब ऐसे अधिकारियों की नई पदस्थापना पर अतिरिक्त सावधानी बरती जानी चाहिए। उनका कहना है कि इससे जनता के बीच प्रशासनिक निर्णयों की निष्पक्षता को लेकर सवाल पैदा हो सकते हैं।

    दूसरी ओर कानूनी दृष्टिकोण अलग तस्वीर प्रस्तुत करता है। भारतीय न्याय व्यवस्था का मूल सिद्धांत है कि किसी भी व्यक्ति को तब तक दोषी नहीं माना जा सकता जब तक आरोप न्यायिक प्रक्रिया में सिद्ध न हो जाएं। केवल FIR दर्ज होना किसी अधिकारी या व्यक्ति के दोषी होने का प्रमाण नहीं माना जाता। ऐसे में संबंधित अधिकारी के खिलाफ अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे।

    फिर भी यह तथ्य महत्वपूर्ण बना हुआ है कि सिंगरौली का शिक्षा विभाग प्रकरण लंबे समय तक सार्वजनिक और प्रशासनिक बहस का केंद्र रहा है। लोकायुक्त कार्रवाई के बाद यह मामला प्रदेश की चर्चित जांचों में शामिल हो गया था। अब उसी प्रकरण से जुड़े अधिकारी को नई जिम्मेदारी मिलने के बाद एक बार फिर इस पूरे मामले पर ध्यान केंद्रित हो गया है।

    वर्तमान परिस्थितियों में सभी की नजर जांच से जुड़े आगामी घटनाक्रमों पर टिकी हुई है। आने वाले समय में जांच एजेंसियों की कार्रवाई, आरोपों की पुष्टि अथवा खंडन और शासन के संभावित निर्णय इस मामले की दिशा तय करेंगे। फिलहाल यह नियुक्ति प्रशासनिक जवाबदेही, पारदर्शिता और संस्थागत विश्वसनीयता को लेकर नई बहस को जन्म देती नजर आ रही है।

  • मध्य प्रदेश में सड़क हादसों का काला दिन: मैहर, रायसेन, सिंगरौली और दमोह में मौतों का तांडव, कई परिवारों पर टूटा दुखों का पहाड़

    मध्य प्रदेश में सड़क हादसों का काला दिन: मैहर, रायसेन, सिंगरौली और दमोह में मौतों का तांडव, कई परिवारों पर टूटा दुखों का पहाड़


     मध्य प्रदेश: में सड़क दुर्घटनाओं का सिलसिला लगातार चिंता बढ़ा रहा है। मंगलवार को प्रदेश के अलग-अलग जिलों में हुए कई दर्दनाक हादसों में छह लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। मैहर, रायसेन, सिंगरौली और दमोह में हुई इन घटनाओं ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा और लापरवाही से जुड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस ने सभी मामलों में जांच शुरू कर दी है और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया जारी है।

    मैहर जिले में एक दर्दनाक हादसे ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया। यहां सड़क किनारे काटे जा रहे एक सीसम के पेड़ के अचानक गिर जाने से बाइक उसकी चपेट में आ गई। हादसे के समय बाइक पर चार युवक-युवतियां सवार थे, जो मां शारदा के दर्शन के लिए जा रहे थे। बताया गया कि रास्ता भटकने के कारण वे दूसरे मार्ग पर पहुंच गए थे। इसी दौरान ट्रैक्टर की मदद से खींचा जा रहा पेड़ अचानक सड़क पर गिर पड़ा और बाइक को अपनी चपेट में ले लिया। दुर्घटना में दो युवाओं की मौत हो गई, जबकि दो युवतियां गंभीर रूप से घायल हो गईं। घायलों का उपचार जारी है और पुलिस पेड़ कटाई के दौरान बरती गई कथित लापरवाही की जांच कर रही है।

    रायसेन में एक और गंभीर सड़क हादसा सामने आया। शहर के बायपास क्षेत्र में बिजली के पोल लेकर जा रहे ट्रैक्टर के पीछे चल रही कार अचानक पोलों से टकरा गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि लंबे पोल कार के अगले हिस्से को चीरते हुए पीछे तक निकल गए। हादसे में कार सवार पति-पत्नी और एक बच्चा गंभीर रूप से घायल हो गए। स्थानीय लोगों की मदद से घायलों को बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया। प्रारंभिक उपचार के बाद एक घायल को बेहतर इलाज के लिए रेफर किया गया। दुर्घटना के बाद ट्रैक्टर चालक मौके से फरार हो गया, जिसकी तलाश की जा रही है।

    सिंगरौली जिले में भी दो अलग-अलग घटनाओं में दो लोगों की जान चली गई। बरगवा क्षेत्र में एक तेज रफ्तार बस ने सड़क किनारे मौजूद बच्चे को कुचल दिया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद स्थानीय लोगों और परिजनों में भारी आक्रोश फैल गया। लोगों ने राष्ट्रीय राजमार्ग पर जाम लगाकर विरोध प्रदर्शन किया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस बल को मौके पर तैनात करना पड़ा।

    इसी जिले के जियावन क्षेत्र में एक अन्य सड़क हादसे में तेज रफ्तार हाईवा ने बाइक सवारों को टक्कर मार दी। दुर्घटना में एक युवक की मौके पर मौत हो गई, जबकि दूसरा गंभीर रूप से घायल हो गया। घायल को अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उसका इलाज जारी है। हादसे के बाद हाईवा चालक वाहन छोड़कर फरार हो गया।

    उधर दमोह जिले के तेंदूखेड़ा क्षेत्र में दो मोटरसाइकिलों की आमने-सामने भिड़ंत में दो युवकों की मौत हो गई। दुर्घटना इतनी गंभीर थी कि दोनों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। हादसे में तीन अन्य लोग घायल हुए हैं, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण कर मामले की जांच शुरू कर दी है।

    प्रदेश में एक ही दिन में सामने आए इन हादसों ने सड़क सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासन और पुलिस विभाग लोगों से यातायात नियमों का पालन करने तथा निर्माण और कटाई जैसे कार्यों के दौरान सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन करने की अपील कर रहे हैं। सभी मामलों में जांच जारी है और दुर्घटनाओं के वास्तविक कारणों का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है।

  • सिंगरौली में ब्लास्टिंग का कहर पहाड़ों से गिर रहे पत्थर ग्रामीणों ने दी आंदोलन की चेतावनी

    सिंगरौली में ब्लास्टिंग का कहर पहाड़ों से गिर रहे पत्थर ग्रामीणों ने दी आंदोलन की चेतावनी


    सिंगरौली । मध्यप्रदेश के सिंगरौली जिले के चितरंगी क्षेत्र में इन दिनों ब्लास्टिंग को लेकर हालात बेहद चिंताजनक बन गए हैं जहां विकास कार्यों के नाम पर हो रही गतिविधियां अब ग्रामीणों के लिए खतरे का कारण बनती जा रही हैं। मिसिरगवा आयरन ब्लॉक में टेस्टिंग के नाम पर लगातार की जा रही ब्लास्टिंग से आसपास के गांवों में दहशत का माहौल है और लोग अपनी सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठा रहे हैं।

    जानकारी के अनुसार चितरंगी के केकराव चितावल शिवपुरवा और मिसिरगवा गांवों में इन दिनों तेज धमाकों के साथ ब्लास्टिंग की जा रही है। इन धमाकों के कारण पहाड़ियों से बड़े बड़े पत्थर टूटकर नीचे गिर रहे हैं जिससे न सिर्फ ग्रामीणों के मकानों को नुकसान पहुंच रहा है बल्कि राहगीरों की जान भी हर समय खतरे में बनी हुई है। कई घरों में दरारें पड़ चुकी हैं और कुछ मकान आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हो गए हैं।

    स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि चितरंगी लमसरई मुख्य मार्ग पर भी पत्थर गिरने की घटनाएं सामने आ रही हैं जिससे आवागमन करने वाले लोगों में डर का माहौल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर समय रहते इस पर रोक नहीं लगाई गई तो बड़ा हादसा हो सकता है।

    इसी मुद्दे को लेकर ग्रामीणों का गुस्सा अब खुलकर सामने आ गया है। युवा नेता लक्ष्मण सिंह बैस के नेतृत्व में सैकड़ों ग्रामीण सड़कों पर उतर आए और प्रशासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने तहसीलदार को ज्ञापन सौंपते हुए साफ शब्दों में कहा कि या तो ब्लास्टिंग के दौरान पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाए या फिर इस काम को तत्काल बंद किया जाए।

    ग्रामीणों की प्रमुख मांगों में क्षतिग्रस्त मकानों का तुरंत मुआवजा सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन कंपनी और प्रशासन के बीच खुली बैठक और लोगों की जान जोखिम में डालने वाले कार्यों पर रोक शामिल है। उनका कहना है कि विकास के नाम पर उनकी जिंदगी से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

    हालांकि तहसीलदार ने मामले में कार्रवाई का आश्वासन दिया है लेकिन अब भी बड़ा सवाल यही है कि अब तक ठोस कदम क्यों नहीं उठाए गए। लगातार हो रही घटनाओं के बावजूद प्रशासन की धीमी कार्रवाई पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

    ग्रामीणों ने दो टूक चेतावनी दी है कि अगर एक सप्ताह के भीतर ठोस कार्रवाई नहीं की गई तो वे उग्र आंदोलन करेंगे और प्रशासनिक कार्यालयों का घेराव किया जाएगा। ऐसे में अब सबकी नजर प्रशासन पर टिकी है कि वह समय रहते कदम उठाता है या किसी बड़े हादसे के बाद ही कार्रवाई होती है।

  • मामूली झगड़ा बना खौफनाक वारदात चितरंगी में बिजली विवाद पर हत्या आरोपी गिरफ्तार

    मामूली झगड़ा बना खौफनाक वारदात चितरंगी में बिजली विवाद पर हत्या आरोपी गिरफ्तार


    सिंगरौली । मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले के चितरंगी क्षेत्र से एक सनसनीखेज हत्या का मामला सामने आया है जहां एक मामूली विवाद ने हिंसक रूप ले लिया और एक व्यक्ति की जान चली गई। पुलिस ने इस मामले में तेजी दिखाते हुए महज 24 घंटे के भीतर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है जिससे इलाके में कानून व्यवस्था को लेकर भरोसा भी मजबूत हुआ है।

    घटना चितरंगी थाना क्षेत्र के ग्राम सूदा की है जहां 24 अप्रैल को भुनेश्वर उर्फ छंदू कोल का शव संदिग्ध हालत में मिला था। जैसे ही इसकी सूचना पुलिस को मिली तत्काल टीम मौके पर पहुंची और मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी गई। शुरुआती जांच में मामला संदिग्ध प्रतीत हुआ जिसके बाद पुलिस ने हर एंगल से जांच को आगे बढ़ाया।

    जांच के दौरान पुलिस को मुखबिर से महत्वपूर्ण जानकारी मिली और घटनास्थल से जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर मुन्नालाल पनिका को हिरासत में लिया गया। पूछताछ के दौरान आरोपी ने जो खुलासा किया वह चौंकाने वाला था। उसने बताया कि मृतक बार बार उसका बिजली कनेक्शन काट देता था जिससे वह बेहद परेशान और नाराज था।

    आरोपी के मुताबिक 23 अप्रैल की रात दोनों के बीच इसी बात को लेकर विवाद हुआ जो धीरे धीरे हिंसक झगड़े में बदल गया। गुस्से में आकर उसने लाठी उठाई और भुनेश्वर उर्फ छंदू कोल पर ताबड़तोड़ हमला कर दिया जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद आरोपी मौके से फरार हो गया था।

    पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए टीम गठित की और लगातार दबिश देकर आरोपी को पकड़ लिया। पूछताछ में उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया और पुलिस ने हत्या में इस्तेमाल की गई लाठी भी बरामद कर ली है। आरोपी को न्यायालय में पेश कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है।

    इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि एक मामूली बिजली कनेक्शन को लेकर शुरू हुआ विवाद इतना बढ़ गया कि उसने एक व्यक्ति की जान ले ली। यह घटना समाज में बढ़ती असहिष्णुता और गुस्से के खतरनाक परिणामों की ओर इशारा करती है।

    पुलिस की त्वरित कार्रवाई की स्थानीय लोगों द्वारा सराहना की जा रही है क्योंकि इतने कम समय में मामले को सुलझाना एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। वहीं प्रशासन ने भी लोगों से अपील की है कि किसी भी विवाद को आपसी बातचीत से सुलझाने की कोशिश करें और कानून को अपने हाथ में न लें। यह घटना एक गंभीर चेतावनी है कि छोटी छोटी बातों पर बढ़ता गुस्सा किस तरह बड़े अपराध में बदल सकता है और एक पल का आवेश किसी की जिंदगी खत्म कर सकता है।

  • मुख्य सचिव अनुराग जैन का कलेक्टरों को कड़ा संदेश: “समझो कि सब कुछ पता चल जाता है, करप्शन से दूर रहो”

    मुख्य सचिव अनुराग जैन का कलेक्टरों को कड़ा संदेश: “समझो कि सब कुछ पता चल जाता है, करप्शन से दूर रहो”



    नई दिल्ली। मुख्य सचिव अनुराग जैन ने कई जिलों में कलेक्टरों के खिलाफ मिल रही शिकायतों पर नाराजगी जताई है और स्पष्ट किया है कि अधिकारियों को यह नहीं समझना चाहिए कि उनकी गतिविधियां छुपी रहती हैं। उन्होंने कहा कि “किसके यहां क्या पक रहा है, सब मालूम है”, इसलिए सभी अधिकारियों को करप्शन से दूर रहकर सरकार की प्राथमिकताओं और जनता के हितों के अनुरूप काम करना चाहिए।
    सीएस जैन ने यह भी कहा कि कुछ जिलों की शिकायतें उनके और मुख्यमंत्री के पास भी पहुंची हैं, इसलिए बेहतर यही होगा कि अधिकारी जल्द ही अपनी कार्यशैली सुधारें।

    यह चेतावनी उन्होंने सात और आठ अक्टूबर को हुई दो दिवसीय कलेक्टर-कमिश्नर कॉन्फ्रेंस की दूसरी समीक्षा बैठक में दी। इस बैठक में सीएस जैन ने कॉन्फ्रेंस के 85 बिंदुओं की जिलावार समीक्षा की और टॉप थ्री तथा बॉटम थ्री जिलों की जानकारी साझा करते हुए कमजोर प्रदर्शन वाले जिलों को सुधारने का निर्देश दिया। बैठक में पुलिस और अन्य विभागों के साथ मिलकर महिला सुरक्षा के प्रति जागरूकता के लिए किए गए कार्यों की भी समीक्षा की गई।

    साथ ही नाबालिग बालिकाओं के गुम होने पर उनकी तलाश के लिए चलाए जा रहे मुस्कान अभियान की प्रगति भी ली गई, जिसमें बताया गया कि अब तक 1900 से अधिक बालिकाओं को बरामद किया गया है। जन जागरूकता अभियान में टीकमगढ़, धार और सिंगरौली टॉप थ्री जिलों में शामिल रहे, जबकि पन्ना, मुरैना और भिंड बॉटम थ्री जिलों में रहे।

    कलेक्टर-कमिश्नर कॉन्फ्रेंस की तारीखों को लेकर भी चर्चा हुई, क्योंकि इसे आयोजित करने के लिए कई बार तारीख बदलती रही। सीएस अनुराग जैन ने पिछले माह 31 दिसंबर को बैठक की तारीख तय की थी, फिर इसे 5 जनवरी कर दिया गया। फिर भी कॉन्फ्रेंस समय पर नहीं हो सकी और 15 जनवरी को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से बैठक करने का निर्णय लिया गया, लेकिन प्रशासनिक कारणों से यह भी संभव नहीं हो पाया। अंततः यह बैठक चौथी बार तय तारीख पर ही हो सकी।