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  • टाटा की लुटिया डुबो रहे नए कारोबार… ग्रुप का घाटा बढ़कर ₹29,000 करोड़ तक पहुंचने की संभावना

    टाटा की लुटिया डुबो रहे नए कारोबार… ग्रुप का घाटा बढ़कर ₹29,000 करोड़ तक पहुंचने की संभावना


    नई दिल्ली।
    टाटा संस (Tata Sons) के नए कारोबारों (New Businesses) में बढ़ते घाटे (Growing losses) ने ग्रुप के अंदर चिंता बढ़ा दी है। आंतरिक अनुमानों के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 में इन बजनेसों का कुल घाटा करीब ₹29,000 करोड़ तक पहुंच सकता है, जो पहले के अनुमान ₹5,700 करोड़ से बहुत ज्यादा है। यह बढ़ता नुकसान अब समूह की रणनीति और निवेश फैसलों पर सवाल खड़े कर रहा है।


    9 महीनों में ही ₹21,700 करोड़ पार

    एक खबर के मुताबिक वित्त वर्ष 2026 के पहले नौ महीनों में ही कुल घाटा ₹21,700 करोड़ तक पहुंच चुका है, जबकि पूरे वित्त वर्ष 2025 में यह ₹16,550 करोड़ था। इससे साफ है कि नुकसान का ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है। इस बढ़ते घाटे में सबसे बड़ा हाथ एयर इंडिया, टाटा डिजिटल, टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और तेजस नेटवर्क जैसे नए बिजनेस से आ रहा है।


    नोएल टाटा की चिंता, बोर्ड स्तर पर बढ़ा दबाव

    नोएल टाटा (Noel Tata) ने इन नए प्रोजेक्ट्स के बढ़ते घाटे को लेकर गंभीर चिंता जताई है। यही कारण रहा कि फरवरी में हुई बोर्ड बैठक में चेयरमैन एन चंद्रशेखरन के तीसरे कार्यकाल को मंजूरी देने का फैसला टाल दिया गया। अब उम्मीद है कि जून की बैठक में घाटा कम करने की ठोस रणनीति पेश की जाएगी।


    टाटा डिजिटल बना सबसे बड़ी चिंता

    टाटा ग्रुप का डिजिटल कारोबार, जिसमें बिग बॉस्केट, Tata 1mg, क्रोमा और टाटा क्लिक जैसे प्लेटफॉर्म शामिल हैं, अभी तक फायदे में नहीं आ पाया है। FY26 में इस यूनिट का घाटा ₹5,000 करोड़ से ज्यादा रहने का अनुमान है, जबकि 9 महीनों में ही ₹3,750 करोड़ से अधिक का नुकसान हो चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि कमजोर ग्रोथ, लीडरशिप में बदलाव और प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले धीमी रणनीति इसके पीछे मुख्य कारण हैं।


    एयर इंडिया पर सबसे बड़ा बोझ

    घाटे का सबसे बड़ा हिस्सा एयर इंडिया से आ रहा है। वित्त वर्ष 2026 में इसका नुकसान ₹20,000 करोड़ तक पहुंच सकता है, जो पहले के अनुमान से कई गुना अधिक है। तेल की ऊंची कीमतें, पाकिस्तान एयरस्पेस का बंद होना और ग्लोबल टेंशन जैसे बाहरी कारणों ने कंपनी की लागत बढ़ा दी है। हालांकि, विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि सेवा सुधार की गति अभी भी अपेक्षा से धीमी है।


    अन्य बिजनेस भी दबाव में

    टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स के सेमीकंडक्टर कारोबार में FY26 में करीब ₹3,000 करोड़ के घाटे का अनुमान है। वहीं तेजस नेटवर्क्स, जो FY25 में मुनाफे में थी, अब FY26 में ₹1,000 करोड़ के नुकसान में जा सकती है। यह दिखाता है कि समूह के कई नए निवेश अभी शुरुआती चरण में हैं और उन्हें स्थिर होने में समय लगेगा।


    क्या है आगे की चुनौती?

    टाटा ग्रुप के लिए सबसे बड़ी चुनौती अब इन नए व्यवसायों को मुनाफे की राह पर लाना है। लगातार बढ़ता घाटा निवेशकों और बोर्ड दोनों के लिए चिंता का विषय बनता जा रहा है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर जल्द ही रणनीतिक बदलाव नहीं किए गए, तो यह घाटा आने वाले वर्षों में और बढ़ सकता है।

  • IRIS Dena के डूबने से पूर्व भारत ने दूसरे ईरानी जहाज को दी शरण… कोच्चि में 183 क्रू मेंबर्स के ठहरने की व्यवस्था की

    IRIS Dena के डूबने से पूर्व भारत ने दूसरे ईरानी जहाज को दी शरण… कोच्चि में 183 क्रू मेंबर्स के ठहरने की व्यवस्था की


    कोच्चि।
    हिंद महासागर (Indian Ocean) में बढ़ते तनाव के बीच एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है. श्रीलंका के पास एक ईरानी जंगी जहाज (Iranian Warship) के डूबने से कुछ दिन पहले ईरान ने भारत से अपने दूसरे नौसेना के जहाज (Naval Ships) को कोच्चि में तुरंत डॉकिंग (Immediate Docking ) की अनुमति देने का अनुरोध किया था. सूत्रों के अनुसार भारत ने इस अनुरोध को मंजूरी दे दी और जहाज के 183 क्रू मेंबर्स के ठहरने की व्यवस्था भी की है।

    सरकारी सूत्रों के मुताबिक, ईरानी जहाज IRIS लवन में गंभीर तकनीकी दिक्कतें आ गई थीं. ईरान की ओर से किए गए अनुरोध के बाद 1 मार्च को उसे इमरजेंसी डॉकिंग की अनुमति दे दी गई. बताया जाता है कि ईरानी युद्धपोत IRIS डेना को श्रीलंका के तट के पास एक अमेरिकी सबमरीन द्वारा टॉरपीडो से डुबोए जाने से कुछ दिन पहले ही ईरान ने भारत से संपर्क किया था।

    IRIS डेना भारत द्वारा आयोजित मिलान मल्टीलेटरल नेवल एक्सरसाइज में हिस्सा लेने के बाद अपने देश लौट रहा था. इस हमले में कम से कम 87 ईरानी नाविकों के मारे जाने की सूचना है. फिलहाल दक्षिण भारत के कोच्चि में नौसेना की सुविधाओं में ईरानी नौसेना के क्रू मेंबर्स ठहराए गए हैं. उनके जहाज की तकनीकी जांच की जा रही है. जहाज को समय रहते सुरक्षित ठिकाना मिल गया।

    हालांकि, उसका सिस्टर शिप इतनी किस्मत वाला नहीं रहा. IRIS डेना हिंद महासागर में अमेरिकी सबमरीन द्वारा दागे गए टॉरपीडो की चपेट में आकर डूब गया. इस घटना ने क्षेत्र में पहले से बढ़े तनाव को और तेज कर दिया है. यह टकराव ऐसे समय में हुआ है जब ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच तनाव लगातार गहराता जा रहा है और दोनों पक्षों की ओर से हमले जारी हैं.

    सूत्रों के मुताबिक, यह घटना 4 मार्च को श्रीलंका के गाले बंदरगाह के दक्षिण में करीब 40 नॉटिकल मील दूर अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में हुई. बताया गया कि जंगी जहाज ने सुबह एक डिस्ट्रेस कॉल जारी कर धमाके की सूचना दी थी. हालांकि, जब तक श्रीलंका के बचाव दल मौके पर पहुंचे, तब तक ईरान का जंगी जहाज समुद्र में डूब चुका था और कई क्रू मेंबर्स की मौत हो चुकी थी।

    हिंद महासागर में हुई इस घटना ने क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं. एक तरफ ईरान का एक जंगी जहाज भारत के बंदरगाह में तकनीकी वजहों से शरण लिए हुए है, तो दूसरी ओर उसका सिस्टर शिप समुद्र की गहराइयों में समा चुका है. यह घटनाक्रम इस बात का संकेत है कि पश्चिम एशिया में चल रहा तनाव अब हिंद महासागर क्षेत्र तक असर दिखाने लगा है।