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  • पैसा Nifty में लगाएं या Sensex में निवेशकों की उलझन होगी दूर जानिए लंबी अवधि के लिए कौन सा विकल्प हो सकता है बेहतर

    पैसा Nifty में लगाएं या Sensex में निवेशकों की उलझन होगी दूर जानिए लंबी अवधि के लिए कौन सा विकल्प हो सकता है बेहतर


    नई दिल्ली। शेयर बाजार में निवेश करने वाले लोगों के सामने अक्सर यह सवाल रहता है कि पैसा Nifty 50 में लगाया जाए या Sensex में। दोनों ही भारतीय शेयर बाजार के प्रमुख इंडेक्स हैं और देश की बड़ी कंपनियों के प्रदर्शन को दर्शाते हैं। हालांकि निवेश करने से पहले यह समझना जरूरी है कि Nifty और Sensex में सीधे पैसा नहीं लगाया जाता बल्कि इनके आधार पर बने Index Fund या ETF के जरिए निवेश किया जा सकता है। यही वजह है कि नए निवेशकों के लिए दोनों के अंतर को समझना काफी महत्वपूर्ण हो जाता है।

    Nifty 50 में 50 बड़ी और प्रमुख कंपनियां शामिल हैं। NSE के अनुसार यह 13 अलग अलग सेक्टरों को कवर करने वाला diversified index है और इसका इस्तेमाल Index Fund तथा ETF सहित कई निवेश उत्पादों के benchmark के रूप में किया जाता है। दूसरी तरफ Sensex में 30 बड़ी कंपनियों का प्रदर्शन शामिल होता है। इस लिहाज से दोनों इंडेक्स large cap कंपनियों में निवेश का रास्ता देते हैं लेकिन Nifty 50 में कंपनियों की संख्या अधिक होने के कारण diversification थोड़ा ज्यादा मिलता है।

    अगर कोई निवेशक लंबी अवधि के लिए पैसा लगाना चाहता है तो Nifty 50 Index Fund को एक सरल विकल्प के तौर पर देखा जा सकता है। इसमें निवेशक को अलग अलग कंपनियों के शेयर खुद चुनने की जरूरत नहीं होती। Index Fund इंडेक्स के प्रदर्शन को ट्रैक करने की कोशिश करता है। SIP के जरिए हर महीने एक तय राशि निवेश करने से बाजार के उतार चढ़ाव के दौरान अलग अलग स्तरों पर निवेश होता रहता है।

    Sensex आधारित Index Fund भी इसी तरह निवेश का विकल्प देता है। इसमें 30 बड़ी कंपनियों का exposure मिलता है। इसलिए ऐसा नहीं है कि Sensex में निवेश करना गलत है। अगर किसी निवेशक के पास पहले से Sensex आधारित फंड है तो केवल Nifty में अधिक कंपनियां होने की वजह से उसे बदलना जरूरी नहीं है। दोनों ही विकल्पों में असली महत्व निवेश की अवधि लागत और निवेशक की जोखिम क्षमता का होता है।

    मौजूदा समय में बाजार में उतार चढ़ाव भी बना हुआ है। 11 सितंबर 2026 को Nifty 50 करीब 23398 के स्तर पर बंद हुआ जबकि Sensex करीब 74782 पर रहा। दोनों प्रमुख इंडेक्स लगातार पांचवें सप्ताह गिरावट के साथ बंद हुए। मध्य पूर्व में तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने बाजार की चिंता बढ़ाई है।

    ऐसे माहौल में निवेशकों के लिए एक साथ पूरी रकम बाजार में लगाने के बजाय चरणबद्ध निवेश या SIP का रास्ता उपयोगी हो सकता है। अगस्त 2026 में भारतीय म्यूचुअल फंड में SIP के जरिए निवेश रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचा था जो बताता है कि बड़ी संख्या में खुदरा निवेशक नियमित निवेश की रणनीति अपना रहे हैं।

    हालांकि किसी भी इंडेक्स में निवेश से मुनाफे की गारंटी नहीं होती। बाजार में गिरावट आने पर Index Fund की वैल्यू भी घट सकती है। इसलिए निवेश का फैसला अपनी आर्थिक स्थिति निवेश की अवधि और जोखिम सहने की क्षमता देखकर लेना चाहिए। सामान्य तौर पर अगर कोई व्यक्ति लंबी अवधि के लिए सरल और diversified equity investment चाहता है तो Nifty 50 आधारित Index Fund एक मजबूत विकल्प हो सकता है। वहीं Sensex आधारित फंड भी समान उद्देश्य के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। निवेश से पहले फंड का expense ratio tracking error और निवेश की शर्तों को जरूर देखना चाहिए।

  • शेयर मार्केट में कमाई के लिए कहां लगाएं पैसा जोखिम और रिटर्न समझकर चुनें ये निवेश विकल्प नए निवेशकों के लिए जरूरी जानकारी

    शेयर मार्केट में कमाई के लिए कहां लगाएं पैसा जोखिम और रिटर्न समझकर चुनें ये निवेश विकल्प नए निवेशकों के लिए जरूरी जानकारी


    नई दिल्ली ।
    शेयर मार्केट में निवेश करके पैसा बढ़ाने की इच्छा रखने वाले लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है। खासकर युवा निवेशक अब बैंक एफडी और पारंपरिक बचत विकल्पों के साथ शेयर बाजार को भी अपने निवेश पोर्टफोलियो का हिस्सा बना रहे हैं। हालांकि शेयर मार्केट में निवेश करने से पहले यह समझना बेहद जरूरी है कि हर शेयर और हर निवेश विकल्प का जोखिम एक जैसा नहीं होता। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही रहता है कि आखिर शेयर मार्केट में पैसा कहां लगाया जाए और किस तरह का निवेश बेहतर हो सकता है।

    शेयर बाजार में निवेश का सबसे सीधा तरीका कंपनियों के शेयर खरीदना है। जब किसी कंपनी के शेयर खरीदे जाते हैं तो निवेशक उस कंपनी में हिस्सेदारी लेता है। कंपनी के प्रदर्शन और बाजार की स्थिति के आधार पर शेयर की कीमत ऊपर या नीचे जा सकती है। अच्छे कारोबार वाली मजबूत कंपनियों के शेयर लंबे समय में बेहतर रिटर्न देने की क्षमता रखते हैं लेकिन शेयर बाजार में रिटर्न की कोई गारंटी नहीं होती। इसलिए केवल किसी के कहने पर शेयर खरीदने के बजाय कंपनी के कारोबार वित्तीय प्रदर्शन कर्ज और भविष्य की संभावनाओं को समझना जरूरी है।

    नए निवेशकों के लिए Large Cap कंपनियां अपेक्षाकृत स्थिर विकल्प मानी जाती हैं क्योंकि इनमें आमतौर पर बड़ी और स्थापित कंपनियां शामिल होती हैं। वहीं Mid Cap और Small Cap कंपनियों में तेजी से बढ़ने की संभावना हो सकती है लेकिन इनके साथ उतार चढ़ाव और जोखिम भी ज्यादा हो सकता है। इसलिए निवेशक को अपनी जोखिम क्षमता और निवेश की अवधि के हिसाब से ही इन श्रेणियों में पैसा लगाने का फैसला करना चाहिए।

    अगर किसी निवेशक को अलग अलग कंपनियों के शेयर चुनने में परेशानी होती है तो म्यूचुअल फंड एक विकल्प हो सकता है। म्यूचुअल फंड में निवेशकों का पैसा अलग अलग सिक्योरिटीज में लगाया जाता है और इसका प्रबंधन फंड मैनेजर करते हैं। इक्विटी म्यूचुअल फंड में शेयर बाजार से जुड़ा जोखिम रहता है लेकिन अलग अलग कंपनियों में निवेश होने के कारण पोर्टफोलियो में विविधता मिल सकती है। लंबी अवधि के लिए निवेश करने वाले लोग Systematic Investment Plan यानी SIP के जरिए नियमित रकम निवेश करने पर भी विचार कर सकते हैं।

    शेयर मार्केट में निवेश करते समय पूरा पैसा एक ही शेयर या एक ही सेक्टर में लगाना जोखिम बढ़ा सकता है। अलग अलग कंपनियों और सेक्टर में निवेश करके पोर्टफोलियो को संतुलित रखने की कोशिश की जा सकती है। इसके साथ ही निवेश की अवधि भी महत्वपूर्ण है। अगर पैसा जल्द ही चाहिए तो बाजार के उतार चढ़ाव के कारण परेशानी हो सकती है। लंबी अवधि के निवेश में बाजार की छोटी अवधि की हलचल का असर कम करने का मौका मिल सकता है हालांकि इसमें भी जोखिम पूरी तरह खत्म नहीं होता।

    निवेश करने से पहले अपनी आय बचत और वित्तीय लक्ष्य को समझना जरूरी है। आपातकालीन जरूरतों के लिए अलग से पर्याप्त रकम रखने के बाद ही बाजार में निवेश करना बेहतर माना जाता है। किसी शेयर के पुराने रिटर्न को देखकर भविष्य में भी उसी तरह का रिटर्न मिलने की उम्मीद करना सही रणनीति नहीं है। निवेश से पहले कंपनी और निवेश उत्पाद की जानकारी समझें और जरूरत पड़ने पर SEBI पंजीकृत निवेश सलाहकार से सलाह लें। सबसे जरूरी बात यह है कि शेयर बाजार में तेजी से पैसा कमाने के बजाय अनुशासित तरीके से लंबी अवधि के वित्तीय लक्ष्य को ध्यान में रखकर निवेश की रणनीति बनानी चाहिए।

  • पैसा कहां लगाएं और कितना जोखिम लें? शेयर बाजार में निवेश का सही रास्ता जानें

    पैसा कहां लगाएं और कितना जोखिम लें? शेयर बाजार में निवेश का सही रास्ता जानें


    नई दिल्ली । शेयर बाजार में निवेश आज के समय में लोगों के लिए धन बढ़ाने का एक बड़ा माध्यम बन चुका है। हालांकि बाजार में तेजी देखकर बिना तैयारी के पैसा लगाना कई बार नुकसान का कारण बन सकता है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर शेयर बाजार में कहां निवेश करें ताकि जोखिम को समझते हुए लंबे समय में बेहतर रिटर्न पाने की संभावना बढ़ाई जा सके। इसका जवाब किसी एक शेयर या एक सेक्टर में नहीं छिपा है बल्कि सही योजना लक्ष्य और जोखिम क्षमता के आधार पर निवेश करने में है।

    निवेश की शुरुआत करने से पहले सबसे पहले अपना लक्ष्य तय करना जरूरी है। यदि आपका उद्देश्य पांच दस या उससे अधिक वर्षों में बड़ा फंड तैयार करना है तो निवेश का तरीका अलग हो सकता है। वहीं अगर आपको कुछ ही समय में पैसे की जरूरत पड़ सकती है तो पूरा पैसा शेयर बाजार में लगाना जोखिम भरा हो सकता है। शेयर बाजार में उतार चढ़ाव सामान्य है और यहां कम समय में तेजी के साथ गिरावट भी देखने को मिल सकती है। इसलिए निवेश की अवधि जितनी लंबी होगी उतना ही बेहतर तरीके से बाजार के उतार चढ़ाव को संभालने का अवसर मिल सकता है।

    नए निवेशकों के लिए सीधे किसी एक शेयर में बड़ी रकम लगाने के बजाय विविधता वाले विकल्पों पर ध्यान देना बेहतर माना जाता है। इंडेक्स फंड के जरिए निवेशक एक साथ कई बड़ी कंपनियों में हिस्सा ले सकता है। Nifty 50 जैसे व्यापक इंडेक्स को ट्रैक करने वाले फंड बाजार की बड़ी कंपनियों में एक्सपोजर देते हैं और इनमें नियमित निवेश यानी SIP का विकल्प भी उपलब्ध होता है। SIP के जरिए हर महीने एक निश्चित रकम निवेश करने से निवेश में अनुशासन बना रहता है और बाजार के अलग अलग स्तरों पर निवेश का मौका मिलता है। लंबे समय के लिए नियमित निवेश और धैर्य को महत्वपूर्ण माना जाता है।

    जो निवेशक थोड़ा अधिक जोखिम लेने की क्षमता रखते हैं वे अपने पोर्टफोलियो में Flexi Cap या अन्य विविध इक्विटी विकल्पों पर भी विचार कर सकते हैं। वहीं Mid Cap और Small Cap कंपनियों में विकास की संभावनाएं अधिक हो सकती हैं लेकिन इनमें उतार चढ़ाव और जोखिम भी ज्यादा होता है। इसलिए केवल पिछले कुछ वर्षों का शानदार रिटर्न देखकर किसी फंड या शेयर में पैसा लगाना सही रणनीति नहीं है। निवेश से पहले अपने लक्ष्य निवेश की अवधि और जोखिम सहने की क्षमता को प्राथमिकता देनी चाहिए।

    अगर कोई व्यक्ति सीधे शेयर खरीदना चाहता है तो उसे कंपनी के कारोबार मुनाफे कर्ज प्रबंधन और भविष्य की संभावनाओं को समझना चाहिए। सिर्फ सोशल मीडिया टिप्स या तेजी से बढ़ते शेयरों के पीछे भागना नुकसानदायक हो सकता है। एक ही कंपनी या एक ही सेक्टर में पूरी पूंजी लगाने के बजाय अलग अलग क्षेत्रों में निवेश करने से जोखिम को कुछ हद तक संतुलित किया जा सकता है।

    निवेश की एक बड़ी गलती यह भी होती है कि लोग बाजार गिरते ही घबरा जाते हैं और बिना योजना के निवेश बेच देते हैं। दूसरी ओर तेजी के दौरान जरूरत से ज्यादा पैसा लगा देते हैं। बेहतर रणनीति यह है कि निवेश को लक्ष्य के अनुसार नियमित रूप से मॉनिटर किया जाए और समय समय पर पोर्टफोलियो की समीक्षा की जाए। SIP शुरू करना अच्छी आदत हो सकती है लेकिन केवल SIP करने से पूरी वित्तीय सुरक्षा सुनिश्चित नहीं होती। आपातकालीन फंड बीमा और कर्ज प्रबंधन भी मजबूत वित्तीय योजना के जरूरी हिस्से हैं।

    कुल मिलाकर शेयर बाजार में निवेश के लिए कोई एक जादुई विकल्प नहीं है। नए निवेशकों के लिए सरल और विविध पोर्टफोलियो से शुरुआत करना समझदारी हो सकती है जबकि अनुभवी निवेशक अपनी रिसर्च और जोखिम क्षमता के अनुसार अलग रणनीति अपना सकते हैं। याद रखें शेयर बाजार में रिटर्न की कोई गारंटी नहीं होती और पिछले रिटर्न भविष्य के नतीजों को तय नहीं करते। निवेश करने से पहले अपनी वित्तीय स्थिति समझें और जरूरत पड़ने पर पंजीकृत वित्तीय सलाहकार की मदद लें।

  • बाजार की अस्थिरता के बीच निवेशकों ने दिखाई समझदारी, अप्रैल में शेयर बाजार में आया भारी निवेश

    बाजार की अस्थिरता के बीच निवेशकों ने दिखाई समझदारी, अप्रैल में शेयर बाजार में आया भारी निवेश

    नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार में अप्रैल महीने के दौरान निवेशकों का भरोसा एक बार फिर मजबूत होता दिखाई दिया। हाल ही में जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल में बाजार में निवेश का स्तर मार्च की तुलना में काफी बेहतर रहा। खास बात यह रही कि निवेशकों ने इस दौरान एसआईपी के जरिए सबसे अधिक भरोसा लार्ज कैप कंपनियों पर जताया। बाजार में जारी उतार-चढ़ाव और वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद निवेशकों ने अनुशासित निवेश रणनीति अपनाते हुए बड़े और मजबूत शेयरों की ओर रुख किया।

    रिपोर्ट के मुताबिक अप्रैल महीने में भारतीय शेयर बाजार में कुल 73,639 करोड़ रुपए का निवेश दर्ज किया गया। यह आंकड़ा मार्च के मुकाबले काफी अधिक माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशकों का झुकाव अब जोखिम कम करने और स्थिर रिटर्न पाने की दिशा में बढ़ रहा है। यही वजह है कि लार्ज कैप कंपनियों में निवेश लगातार बना हुआ है। हालांकि इन फंड्स के प्रदर्शन में गिरावट देखी गई, लेकिन फिर भी निवेशकों का भरोसा इन पर कायम रहा।

    निवेशकों ने इस दौरान खासतौर पर पीएसयू और बीएफएसआई सेक्टर के वैल्यू स्टॉक्स में दिलचस्पी दिखाई। बैंकिंग, फाइनेंस और सरकारी कंपनियों से जुड़े शेयरों में निवेश बढ़ने से यह साफ संकेत मिला कि निवेशक अब सुरक्षित और स्थिर सेक्टरों को प्राथमिकता दे रहे हैं। दूसरी ओर टेक्नोलॉजी सेक्टर के शेयरों से निवेशकों ने दूरी बनाए रखी। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि टेक शेयरों में उतार-चढ़ाव और वैश्विक दबाव के कारण निवेशकों ने फिलहाल सावधानी बरतना बेहतर समझा।

    रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि भारतीय निवेशकों की एसआईपी संस्कृति पहले से अधिक परिपक्व होती जा रही है। बाजार में कमजोरी और गिरावट के बावजूद निवेशकों ने नियमित निवेश जारी रखा। यह संकेत देता है कि अब लोग अल्पकालिक उतार-चढ़ाव से घबराने के बजाय लंबी अवधि की रणनीति पर अधिक भरोसा कर रहे हैं। यही कारण है कि कमजोर प्रदर्शन वाले फंड्स में भी एसआईपी निवेश जारी रहा।

    अप्रैल महीने में इक्विटी निवेश रणनीतियों में भी बड़ा बदलाव देखने को मिला। जहां पहले भारी निकासी हो रही थी, वहीं अब निवेश दोबारा तेजी से लौटता दिखाई दिया। विशेष रूप से आर्बिट्राज फंड्स में निवेश का स्तर काफी बढ़ा। माना जा रहा है कि संस्थागत निवेशकों ने अपनी रणनीति में बदलाव करते हुए इन फंड्स में अधिक रुचि दिखाई।

    इसके अलावा फैक्टर आधारित निवेश श्रेणियों में ‘ग्रोथ’ कैटेगरी ने सबसे बेहतर प्रदर्शन किया। इस श्रेणी में सकारात्मक रिटर्न दर्ज किए गए और नए निवेशकों की भागीदारी भी बढ़ी। वहीं फोकस्ड फंड्स में निवेशकों की रुचि घटती नजर आई और इस श्रेणी में निकासी दर्ज की गई।

    विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक व्यापक बाजार पूरी तरह मजबूत स्थिति में नहीं लौटता, तब तक निवेशक आक्रामक निवेश की बजाय संतुलित और अनुशासित रणनीति अपनाते रहेंगे। अप्रैल के आंकड़े यह संकेत देते हैं कि भारतीय निवेशक अब पहले की तुलना में ज्यादा जागरूक और धैर्यवान हो चुके हैं। यही परिपक्वता आने वाले समय में भारतीय शेयर बाजार को और अधिक स्थिरता प्रदान कर सकती है।

  • स्मार्ट इन्वेस्टमेंट का फॉर्मूला: SIP से कैसे करें आसान और सुरक्षित निवेश

    स्मार्ट इन्वेस्टमेंट का फॉर्मूला: SIP से कैसे करें आसान और सुरक्षित निवेश


    नई दिल्ली। आज के दौर में समझदारी से निवेश करना बहुत जरूरी हो गया है और ऐसे में सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) आम युवाओं के लिए एक भरोसेमंद विकल्प बनता है। SIP के जरिए आप म्यूचुअल फंड में एक तय रकम रेगुलर अंतराल-जैसे हर महीने-निवेश कर सकते हैं। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि आप सिर्फ 500 रुपये से भी शुरुआत कर सकते हैं और समय के साथ ‘कंपाउंडिंग’ यानी चक्रवृद्धि का फायदा बढ़कर बड़ा फंड बना सकते हैं। यह तरीका खासकर उन लोगों के लिए फायदेमंद है जो एकमुश्त बड़ी रकम निवेश नहीं कर सकते, लेकिन धीरे-धीरे संपत्ति बनाना चाहते हैं।

    कैसे काम करता है SIP: छोटे निवेश से बड़ा फायदा

    SIP की ताकत ‘रुपये कॉस्ट एवरेजिंग’ में छिपी है। जब बाजार गिरता है तो आपको ज्यादा यूनिट्स मिलती हैं और जब बाजार ऊपर होता है तो कम यूनिट्स—इससे आपकी औसत लागत संतुलित रहती है। साथ ही, इसमें प्रोफेशनल फंड मैनेजर आपके पैसे को रिसर्च और मार्केट एनालिसिस के आधार पर निवेश करते हैं, जिससे रिस्क कंट्रोल्ड रहता है। SIP निवेश में अनुशासन भी लाता है, क्योंकि इसमें तय समय पर निवेश करना होता है, जिससे ‘मार्केट टाइमिंग’ का दबाव कम हो जाता है।

    SIP की खासियतें: फीस और कंट्रोल दोनों

    SIP का एक बड़ा फायदा इसका लचीला होना है। आप फीस तो निवेश राशि बढ़ा सकते हैं, घटा सकते हैं या कुछ समय के लिए रोक भी सकते हैं। इसमें कोई ऊपरी सीमा नहीं होती, यानी आपकी आय बढ़ाना, निवेश भी उतना बढ़ाया जा सकता है। यही कारण है कि यह नौकरीपेशा और छोटे निवेशक दोनों के लिए उपयुक्त माना जाता है।

    जल्दी शुरू करने का फायदा: कंपाउंडिंग का जादू

    SIP में सबसे बड़ा फायदा समय का होता है। छोड़कर जल्दी आप निवेश शुरू करेंगे, उतना ज्यादा फायदा मिलेगा। उदाहरण के तौर पर, अगर कोई व्यक्ति 30 साल की उम्र से हर महीने 10,000 रुपये निवेश करता है, तो 60 साल तक वह करीब 3 करोड़ रुपये का फंड बना सकता है। वहीं, अगर वही निवेश 40 साल की उम्र से शुरू किया जाए, तो यह रकम लगभग 90 लाख रुपये ही रह जाती है। यानी देरी करना आपके रिटर्न को काफी कम कर सकता है।

    SIP के प्रकार: ज़रूरत के हिसाब से सही विकल्प चुनें

    SIP के कई प्रकार होते हैं, जिन्हें आप अपनी ज़रूरत के अनुसार चुन सकते हैं-

    फिक्स्ड SIP: हर महीने तय राशि का निवेश

    फ्लेक्सिबल SIP: आय के अनुसार राशि बदलने की सुविधा

    स्टेप-अप SIP: हर साल निवेश बढ़ाने का विकल्प

    परपेचुअल SIP: बिना समय सीमा के निवेश

    ट्रिगर SIP: बाजार के स्तर के अनुसार निवेश

    वैल्यू एवरेजिंग प्लान (VIP): लक्ष्य आधारित निवेश रणनीति

    निवेश से पहले क्या ध्यान रखें

    SIP शुरू करने से पहले अपना फाइनेंशियल लक्ष्य तय करना जरूरी है-जैसे घर खरीदना, बच्चों की पढ़ाई या रिटायरमेंट। साथ ही अपनी जोखिम उठाने की क्षमता को समझें और उसी के अनुसार फंड चुनें। निवेश की अवधि लंबी रखें, ताकि बाजार के उतार-चढ़ाव का असर कम हो और कंपाउंडिंग का पूरा फायदा मिले। SIP शुरू करना भी बहुत आसान है-सही म्यूचुअल फंड चुनें, KYC पूरा करें, निवेश राशि और अवधि तय करें, और आप ऑनलाइन या ऑफलाइन आसानी से शुरुआत कर सकते हैं।

  • SIP में हर महीने ₹5,000 जमा करें तो 20 साल में कितना फंड होगा तैयार, देखें कैलकुलेशन

    SIP में हर महीने ₹5,000 जमा करें तो 20 साल में कितना फंड होगा तैयार, देखें कैलकुलेशन


    नई दिल्ली । घरेलू शेयर बाजार में उठा-पटक जारी है। हफ्ते के दूसरे दिन मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट देखने को मिल रही है। दोपहर 02.30 बजे तक सेंसेक्स 1000 अंकों से ज्यादा और निफ्टी 300 अंकों से ज्यादा की गिरावट के साथ कारोबार कर रहे थे। शेयर बाजार में होने वाले उतार-चढ़ाव का सीधा असर म्यूचुअल फंड्स के प्रदर्शन पर भी पड़ता है। लेकिन भारतीय निवेशक इस भारी उतार-चढ़ाव के बावजूद घरेलू बाजार में जमकर पैसा लगा रहे हैं। म्यूचुअल फंड्स एसआईपी में भी घरेलू निवेशक जमकर निवेश कर रहे हैं। यहां हम जानेंगे कि एसआईपी में हर महीने 5 000 रुपये का निवेश करें तो 20 साल में कितना फंड तैयार हो सकता है?

    5 000 रुपये की SIP से 20 साल में कितना फंड होगा तैयार

    अगर आपको हर साल 12 प्रतिशत का अनुमानित रिटर्न मिलता है तो 5 000 रुपये की एसआईपी से 20 साल में लगभग 46 लाख रुपये का फंड तैयार हो सकता है जिसमें आपके निवेश के 12 लाख रुपये और रिटर्न के लगभग 34 लाख रुपये शामिल हैं। ऐसे ही अगर आपको हर साल 15 प्रतिशत का अनुमानित रिटर्न मिलता है तो 5 000 रुपये की एसआईपी से 20 साल में लगभग 66.35 लाख रुपये का फंड तैयार हो सकता है जिसमें आपके निवेश के 12 लाख रुपये और लगभग 54.35 लाख रुपये का अनुमानित रिटर्न शामिल है।

    एसआईपी में निवेश करने से पहले इन बातों का रखें खास ध्यान

    म्यूचुअल फंड एसआईपी में निवेश शुरू करने से पहले आपको कुछ बेहद जरूरी बातों का खास ध्यान रखना चाहिए। एसआईपी में कभी भी एक जैसा रिटर्न नहीं मिलता है। एसआईपी से आपको कितना रिटर्न मिलेगा ये पूरी तरह से शेयर बाजार के प्रदर्शन पर निर्भर करता है। अगर बाजार में तेजी बनी रहती है तो आपको बेहतर रिटर्न मिलेगा। इसी तरह अगर बाजार में गिरावट चलती है तो आपको नुकसान भी उठाना पड़ सकता है। लेकिन लॉन्ग टर्म में नुकसान का जोखिम काफी कम हो जाता है। एसआईपी से आपको जो रिटर्न मिलता है उस पर आपको कैपिटल गेन्स टैक्स भी चुकाना होता है।