Tag: SIR Controversy
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SIR और चुनाव आयोग के मुद्दे पर कांग्रेस का दिल्ली मार्च, जीतू पटवारी-उमंग सिंघार पहुंचे दिल्ली, एमपी में नेताओं पर कार्रवाई से बढ़ा विवाद
नई दिल्ली । राहुल गांधी के नेतृत्व में सोमवार को दिल्ली में प्रस्तावित कांग्रेस मार्च से पहले मध्य प्रदेश में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। मार्च में शामिल होने के लिए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार सहित कई वरिष्ठ नेता और विधायक दिल्ली पहुंच चुके हैं। इसी बीच दिल्ली रवाना होने की तैयारी कर रहे मुरैना ग्रामीण जिला कांग्रेस अध्यक्ष मधुराज सिंह तोमर और भिंड शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष धर्मेंद्र भदौरिया को रविवार रात पुलिस ने हिरासत में ले लिया। इसके अलावा श्योपुर से कांग्रेस विधायक बाबू जंडेल के घर भी पुलिस पहुंची। इन घटनाओं के बाद कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि पार्टी नेताओं को दिल्ली मार्च में शामिल होने से रोकने की कोशिश की जा रही है।मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मुरैना ग्रामीण जिला कांग्रेस अध्यक्ष मधुराज सिंह तोमर और भिंड शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष धर्मेंद्र भदौरिया दिल्ली जाने के लिए मुरैना में एक ही स्थान पर ठहरे हुए थे। इसी दौरान पुलिस ने दोनों को हिरासत में लिया। कांग्रेस नेताओं ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इसे मार्च में शामिल होने की तैयारी से जोड़कर देखा है। हालांकि पुलिस की ओर से हिरासत में लिए जाने के कारण और कार्रवाई की अवधि को लेकर आधिकारिक पक्ष की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। ऐसे में इस मामले में पुलिस का पक्ष सामने आने के बाद ही कार्रवाई की पूरी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।इसी घटनाक्रम के बीच श्योपुर से कांग्रेस विधायक बाबू जंडेल के घर पुलिस पहुंचने की जानकारी सामने आई है। बताया गया है कि विधायक के घर पहुंची पुलिस से जुड़ा सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है। कांग्रेस की ओर से इस कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि पुलिस विधायक को हिरासत में लेने में सफल हुई या नहीं इस बारे में स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है। इस वजह से पूरे घटनाक्रम पर नजर बनी हुई है।दूसरी ओर मध्य प्रदेश कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता दिल्ली में प्रस्तावित मार्च में शामिल होने के लिए पहुंच चुके हैं। इनमें प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के अलावा पूर्व मंत्री डॉ. विजयलक्ष्मी साधौ विधायक आरिफ मसूद झूमा सोलंकी सेना पटेल फुंदेलाल मार्को और केशव देसाई सहित कई नेता और पूर्व विधायक शामिल हैं। दिल्ली स्थित मध्य प्रदेश भवन में भी कांग्रेस के विधायक और नेता मौजूद हैं। पार्टी की ओर से इस मार्च के जरिए अपनी मांगों को आगे रखने की तैयारी की गई है।कांग्रेस का यह मार्च मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़े मुद्दों पर केंद्रित है। पार्टी निर्वाचन प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाती रही है। कांग्रेस की योजना मार्च के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचकर अपनी मांगें रखने की है। इस मुद्दे को लेकर पार्टी पहले भी अपनी आपत्तियां सामने रख चुकी है।मध्य प्रदेश में कांग्रेस नेताओं को हिरासत में लिए जाने और विधायक के घर पुलिस पहुंचने की घटनाओं ने दिल्ली मार्च से पहले राजनीतिक विवाद को बढ़ा दिया है। कांग्रेस इसे अपने नेताओं को रोकने की कोशिश बता रही है जबकि पुलिस की कार्रवाई के आधार पर आधिकारिक जानकारी सामने आना बाकी है। ऐसे में मार्च के दौरान पार्टी की गतिविधियों और इस पूरे घटनाक्रम पर आगे होने वाले घटनाक्रम पर नजर रहेगी। -

मोहन यादव ने नरसिंहपुर से कांग्रेस पर साधा निशाना, बोले- चुनाव आयोग पर सवाल उठाने से पहले अपना इतिहास देखे पार्टी
नई दिल्ली । मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने चुनाव आयोग की SIR प्रक्रिया और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन पर निशाना साधा है। नरसिंहपुर में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टीएन शेषन का उदाहरण देते हुए कहा कि कांग्रेस ने उन्हें भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी के खिलाफ चुनाव मैदान में उतारा था। मुख्यमंत्री ने इस पुराने राजनीतिक घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए कांग्रेस को अपने इतिहास पर नजर डालने की नसीहत दी। उनके बयान के बाद SIR प्रक्रिया और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर राजनीतिक बहस फिर तेज हो गई है।मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि कांग्रेस जब चुनाव में सफलता हासिल करती है तो उसे चुनावी प्रक्रिया में कोई खामी नजर नहीं आती लेकिन जब परिणाम उसके पक्ष में नहीं आते तो वह चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाने लगती है। उन्होंने केरल और हिमाचल प्रदेश का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस अलग-अलग परिस्थितियों में अलग रुख अपनाती है। मुख्यमंत्री के मुताबिक चुनावी प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाने से पहले राजनीतिक दलों को अपने पुराने फैसलों और व्यवहार पर भी विचार करना चाहिए। उन्होंने चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था के खिलाफ लगाए जाने वाले गंभीर आरोपों के लिए ठोस तथ्यों और प्रमाणों की जरूरत पर भी जोर दिया।अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने टीएन शेषन और लालकृष्ण आडवाणी के बीच हुए चुनाव का जिक्र किया। दरअसल पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टीएन शेषन ने 1999 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर गुजरात की गांधीनगर सीट से चुनाव लड़ा था। इस सीट पर उनका मुकाबला भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी से हुआ था। मुख्यमंत्री ने इसी घटनाक्रम को आधार बनाकर कांग्रेस के मौजूदा रुख पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करने वाली पार्टी को अपने पुराने राजनीतिक निर्णयों को भी याद रखना चाहिए।मोहन यादव ने अपने भाषण में पूर्व आईपीएस अधिकारी केपीएस गिल का भी उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने अपने राजनीतिक हितों के लिए अधिकारियों और संवैधानिक पदों से जुड़े लोगों को राजनीति में अवसर दिए। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने नेहरू-गांधी परिवार पर परिवारवाद को लेकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद देश की करीब 600 रियासतों ने अपने अधिकार सौंपे थे लेकिन उनके मुताबिक कांग्रेस ने राजनीतिक नेतृत्व को एक परिवार तक सीमित रखने की प्रवृत्ति को बढ़ावा दिया। ये आरोप मुख्यमंत्री ने अपने राजनीतिक संबोधन के दौरान लगाए।गौरतलब है कि कांग्रेस SIR प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल उठा रही है और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन भी कर रही है। इसी मुद्दे पर भाजपा और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कांग्रेस के विरोध को उसके राजनीतिक रुख से जोड़ते हुए सवाल उठाए हैं। दूसरी ओर SIR को लेकर कांग्रेस की आपत्तियां चुनावी मतदाता सूची की प्रक्रिया और उसकी पारदर्शिता से संबंधित हैं।नरसिंहपुर में मुख्यमंत्री का कार्यक्रम केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं रहा। इस दौरान उन्होंने संदीपनी एक्सीलेंस स्कूल के नए भवन का उद्घाटन किया और विद्यार्थियों के लिए बस सेवा को हरी झंडी दिखाई। कार्यक्रम में सामाजिक सुरक्षा पेंशन के लाभार्थियों के खातों में राशि हस्तांतरित करने और विकास परियोजनाओं से जुड़े कार्यक्रम भी शामिल रहे। इस तरह शिक्षा और विकास कार्यों के बीच मुख्यमंत्री ने SIR विवाद को लेकर कांग्रेस पर हमला बोला और चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर चल रही बहस में पार्टी के पुराने राजनीतिक इतिहास का हवाला दिया। -

थलपति विजय की TVK ने CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग से बनाई दूरी, SIR के विरोध पर कायम पार्टी
नई दिल्ली । तमिलनाडु की सत्ताधारी तमिळगा वेत्री कड़गम यानी TVK ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग से खुद को अलग कर लिया है। कांग्रेस समेत कई विपक्षी दल इस मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठा रहे हैं। हालांकि थलपति विजय की पार्टी ने इस मांग का समर्थन नहीं किया है।TVK की ओर से कहा गया है कि किसी एक व्यक्ति को पद से हटाने से समस्या का समाधान नहीं होगा। पार्टी ने इसे मुद्दे से ध्यान भटकाने वाली रणनीति बताया है। हालांकि इसके साथ ही TVK ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR का विरोध जारी रखने की बात भी स्पष्ट की है।
यह विवाद चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और SIR प्रक्रिया को लेकर सामने आई आपत्तियों के बाद तेज हुआ। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, चुनाव आयुक्त विवेक जोशी और सुखबीर सिंह संधू ने पिछले 10 महीनों में SIR की प्रक्रिया को लेकर कम से कम 14 बार आपत्ति दर्ज कराई थी। इसके बाद विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर सवाल उठाए और उनके खिलाफ इस्तीफे के साथ कानूनी कार्रवाई की मांग भी सामने आई।
TVK के वरिष्ठ नेता और तमिलनाडु के स्कूली शिक्षा मंत्री ए राजमोहन ने पार्टी का रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि CEC को पद से हटाना किसी समस्या का समाधान नहीं है। उनके मुताबिक, किसी एक व्यक्ति को हटाने से व्यवस्था में बदलाव नहीं आएगा और पार्टी किसी भटकाने वाली रणनीति का हिस्सा नहीं बनेगी।
हालांकि राजमोहन ने यह भी कहा कि TVK SIR का विरोध करती रहेगी। उन्होंने बताया कि पार्टी अध्यक्ष विजय ने सत्ता में आने से पहले ही SIR प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग की थी। राजमोहन के मुताबिक, SIR के दौरान चुनिंदा मतदाताओं के नाम हटाए गए और अगर ऐसा नहीं हुआ होता तो विधानसभा चुनाव में पार्टी की जीत और बड़ी होती।
विजय और कांग्रेस के बीच पहले भी मतभेद सामने आ चुके हैं। इससे पहले TVK के नेताओं और मंत्रियों की ओर से वर्ष 2029 के लिए विजय को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बताए जाने के बाद विवाद पैदा हुआ था। उस समय कांग्रेस के मंत्रियों की ओर से कैबिनेट से इस्तीफा देने की धमकी तक सामने आई थी।
फिलहाल तमिलनाडु में कांग्रेस के पांच विधायक हैं, जिनके समर्थन से TVK ने सरकार बनाई थी। इनमें से दो विधायकों को विजय ने मंत्री भी बनाया है। ऐसे में CEC के इस्तीफे के मुद्दे पर TVK का कांग्रेस से अलग रुख गठबंधन के भीतर मतभेदों को सामने लाता है।
दूसरी ओर, डीएमके प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री एम के स्टालिन ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग का समर्थन किया है। डीएमके ने कहा है कि वह इंडिया गठबंधन का हिस्सा नहीं है, लेकिन संसद में ज्ञानेश कुमार को हटाने का प्रस्ताव आता है तो पार्टी उसका समर्थन करेगी।
डीएमके प्रवक्ता टी के एस एलंगोवन ने कहा कि जब भी विपक्षी दल किसी मुद्दे पर बीजेपी का विरोध करेंगे, उनकी पार्टी उनके साथ खड़ी रहेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि डीएमके इंडिया गठबंधन का हिस्सा नहीं है, लेकिन संसद में ज्ञानेश कुमार के खिलाफ हटाने का प्रस्ताव लाया जाता है तो पार्टी उसका समर्थन करेगी।
इससे पहले 23 सितंबर को स्टालिन ने बयान जारी कर कहा था कि मुख्य चुनाव आयुक्त को पद पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं है। इस तरह ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे को लेकर कांग्रेस और डीएमके की मांग के बीच TVK ने अलग रुख अपनाया है। पार्टी ने SIR के विरोध को बरकरार रखते हुए CEC को हटाने की मांग को व्यवस्था में बदलाव का समाधान मानने से इनकार किया है।
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भोपाल के बाद पूरे MP में कांग्रेस का आंदोलन, जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन और कलेक्टर कार्यालय घेराव
भोपाल । मध्यप्रदेश में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कांग्रेस का आंदोलन बुधवार को जिला स्तर तक पहुंचने जा रहा है। प्रदेश कांग्रेस के आह्वान पर सभी जिला मुख्यालयों में कांग्रेस कार्यकर्ता प्रदर्शन करेंगे और कलेक्टर कार्यालयों का घेराव करने की तैयारी है। पार्टी की ओर से यह आंदोलन मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर उठाए जा रहे सवालों और चुनाव आयोग से जुड़े विवाद के बीच किया जा रहा है। कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग भी उठाई है। देश के दूसरे हिस्सों में भी कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर प्रदर्शन कर रही है और उनके इस्तीफे की मांग सामने रख रही है।मध्यप्रदेश में इस आंदोलन की शुरुआत भोपाल से हो चुकी है। 28 सितंबर को प्रदेश कांग्रेस ने भोपाल स्थित मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय का घेराव किया था। प्रदर्शन का नेतृत्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने किया था। इसमें प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के अलावा विधायक पूर्व विधायक पार्टी पदाधिकारी और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शामिल हुए थे। उस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच धक्का मुक्की की स्थिति भी बनी थी और कुछ कार्यकर्ता बैरिकेड्स पर चढ़ गए थे। अब कांग्रेस ने इसी आंदोलन को प्रदेश के अलग अलग जिलों तक ले जाने की रणनीति बनाई है। भोपाल के प्रदर्शन की रिपोर्ट भी सामने आई है जिसमें SIR को लेकर कांग्रेस की आपत्तियों और CEC के इस्तीफे की मांग का उल्लेख है।
कांग्रेस का कहना है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान मतदाता सूची में हुए बदलावों को लेकर गंभीर सवाल हैं। पार्टी इन्हीं मुद्दों को आधार बनाकर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रही है और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रही है। बुधवार को जिला मुख्यालयों पर होने वाले प्रदर्शनों में यही मुद्दे प्रमुख रूप से उठाए जाने हैं। कांग्रेस कार्यकर्ता अपने अपने जिलों में एकत्र होकर कलेक्टर कार्यालयों की ओर मार्च करेंगे और वहां प्रदर्शन करेंगे।
इस बीच चुनाव आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर SIR 2026 से जुड़ी मतदाता सेवाएं उपलब्ध हैं। आयोग की वेबसाइट पर अंतिम SIR मतदाता सूची में नाम खोजने की सुविधा दी गई है। आयोग के अनुसार मतदाता अपने EPIC नंबर या मतदाता संबंधी विवरण के माध्यम से जानकारी देख सकते हैं।
CEC ज्ञानेश कुमार फिलहाल भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त हैं। चुनाव आयोग की आधिकारिक जानकारी के मुताबिक उन्होंने 19 फरवरी 2025 को 26वें मुख्य चुनाव आयुक्त के रूप में कार्यभार संभाला था।
SIR को लेकर राजनीतिक विवाद के बीच कांग्रेस की ओर से विरोध प्रदर्शन का सिलसिला लगातार जारी है। दूसरी ओर इस मुद्दे पर चुनाव आयोग और विपक्ष के बीच अलग अलग दावे सामने आ रहे हैं। ऐसे में मध्यप्रदेश में बुधवार को होने वाले जिला स्तरीय प्रदर्शनों पर राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर नजर रहेगी। कांग्रेस का आंदोलन कितना व्यापक रहता है और जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन के दौरान क्या स्थिति बनती है यह दिनभर की प्रमुख राजनीतिक गतिविधियों में शामिल रहेगा।
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SIR विवाद में राहुल गांधी पर राजीव चंद्रशेखर का पलटवार बोले पीएम से माफी मांगें तो फ्रॉड कहना छोड़ दूंगा
नई दिल्ली । केरल में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर चल रही राजनीतिक बहस के बीच बीजेपी और कांग्रेस के बीच जुबानी टकराव और तेज हो गया है। केरल बीजेपी अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने राहुल गांधी को लेकर अपनी टिप्पणी का बचाव करते हुए मुख्यमंत्री वी डी सतीशन पर पलटवार किया है। चंद्रशेखर ने कहा कि अगर राहुल गांधी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चुनाव आयोग को लेकर की गई अपनी टिप्पणियों के लिए माफी मांगते हैं तो वह उन्हें फ्रॉड कहना छोड़ देंगे। यह बयान सतीशन की उस आलोचना के बाद आया जिसमें उन्होंने राहुल गांधी के खिलाफ व्यक्तिगत और अपमानजनक टिप्पणियों को राजनीतिक आलोचना मानने से इनकार किया था।विवाद की शुरुआत तब हुई जब राजीव चंद्रशेखर ने SIR और चुनावी राजनीति के मुद्दे पर राहुल गांधी की आलोचना की। चंद्रशेखर ने कांग्रेस की राजनीति पर कई आरोप लगाए और कहा कि चुनावों में पार्टी को मिली हार के लिए उसे अपनी राजनीतिक रणनीति पर विचार करना चाहिए। उन्होंने SIR का समर्थन करते हुए कहा कि मतदाता सूची से फर्जी या अवैध नामों को हटाना जरूरी है। उनके मुताबिक चुनावी प्रक्रिया की शुचिता बनाए रखना लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
इसके बाद मुख्यमंत्री वी डी सतीशन ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर चंद्रशेखर की टिप्पणियों पर आपत्ति जताई। सतीशन ने कहा कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के खिलाफ व्यक्तिगत और अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल राजनीतिक आलोचना नहीं माना जा सकता। उन्होंने SIR को लेकर चुनाव आयोग के भीतर सामने आए मतभेदों पर चंद्रशेखर के रुख की भी आलोचना की।
सतीशन के बयान के जवाब में चंद्रशेखर ने कहा कि वह आमतौर पर राजनीतिक विरोधियों पर व्यक्तिगत टिप्पणी नहीं करते लेकिन राहुल गांधी के मामले में उन्हें ऐसा करने के लिए मजबूर होना पड़ा। उन्होंने राहुल गांधी की राजनीति पर गंभीर आरोप लगाए और कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा चुनाव आयोग को लेकर राहुल गांधी की टिप्पणियों की निंदा होनी चाहिए। ये चंद्रशेखर के राजनीतिक आरोप और उनके द्वारा व्यक्त किया गया नजरिया है जिसे स्वतंत्र तथ्य के रूप में नहीं माना जा सकता।
चंद्रशेखर ने अपने जवाब में सतीशन के सामने एक शर्त भी रखी। उन्होंने कहा कि अगर मुख्यमंत्री राहुल गांधी से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर की गई टिप्पणी के लिए माफी मांगने को कहते हैं और चुनाव आयोग के संबंध में लगाए गए आरोपों पर भी माफी मांगने को कहते हैं तो वह राहुल गांधी को फ्रॉड कहना बंद कर देंगे। उन्होंने यह भी कहा कि अगर उनकी यह मांग स्वीकार नहीं की जाती और विपक्ष अपनी राजनीतिक रणनीति में झूठ भ्रष्टाचार तथा तुष्टीकरण जैसे मुद्दों को शामिल रखता है तो वह अपनी टिप्पणी दोहराते रहेंगे।
इस पूरे विवाद की पृष्ठभूमि में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर देशभर में चल रही राजनीतिक बहस भी है। बीजेपी जहां इसे मतदाता सूची को व्यवस्थित और साफ करने की प्रक्रिया के तौर पर पेश कर रही है वहीं विपक्षी दल इसके तौर तरीकों और संभावित प्रभावों को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। केरल में भी यह मुद्दा बीजेपी और कांग्रेस के बीच राजनीतिक टकराव का विषय बना हुआ है। चंद्रशेखर पहले भी SIR के मुद्दे पर राहुल गांधी की आलोचना कर चुके हैं।
इस बयानबाजी से साफ है कि केरल की राजनीति में SIR को लेकर विवाद केवल चुनाव आयोग की प्रक्रिया तक सीमित नहीं रहा बल्कि अब बीजेपी और कांग्रेस के शीर्ष राज्य नेताओं के बीच तीखी राजनीतिक बहस का रूप ले चुका है। फिलहाल दोनों पक्ष अपने अपने रुख पर कायम हैं और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी और बढ़ सकती है।
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ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे पर अड़ी कॉकरोच जनता पार्टी, शनिवार की डेडलाइन के बाद तय होगा आंदोलन का अगला कदम
नई दिल्ली। SIR प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर उठ रहे सवालों के बीच कॉकरोच जनता पार्टी ने एक बार फिर अपना अल्टिमेटम दोहरा दिया है। पार्टी ने कहा है कि अगर शनिवार तक मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार अपने पद से इस्तीफा नहीं देते हैं तो 2 अक्टूबर से देशव्यापी आंदोलन शुरू किया जाएगा। पार्टी की ओर से यह चेतावनी ऐसे समय में दी गई है जब चुनाव आयोग के भीतर ही मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों के बीच मतभेद की खबर सामने आने के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।कॉकरोच जनता पार्टी लंबे समय से SIR यानी विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल उठा रही है। पार्टी का आरोप है कि इस प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम प्रारूप मतदाता सूचियों से बाहर किए गए हैं। संगठन ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त के तत्काल इस्तीफे की मांग के साथ SIR से जुड़े फैसलों की स्वतंत्र जांच कराने की भी मांग रखी है। पार्टी के मुताबिक अगर शनिवार तक उनकी मांग पूरी नहीं होती है तो 2 अक्टूबर यानी गांधी जयंती के दिन से आंदोलन को देशव्यापी स्तर पर शुरू किया जाएगा।
पार्टी ने सोशल मीडिया पर जंतर मंतर पर जुट रहे युवाओं का वीडियो साझा करते हुए अपने समर्थकों से आंदोलन की तैयारी करने को कहा है। इससे पहले संगठन ने CEC ज्ञानेश कुमार को 48 घंटे का अल्टिमेटम दिया था लेकिन बाद में आंदोलन की तारीख बदलकर 2 अक्टूबर कर दी गई। पार्टी के संयोजक अभिजीत दीपके और सह संयोजक सौरव दास तथा आशुतोष रांका ने इलेक्शन कमीशन ठीक करो अभियान के तहत अपनी मांगें सामने रखी हैं।
पार्टी का दावा है कि SIR प्रक्रिया के कारण 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की प्रारूप मतदाता सूचियों से 13 करोड़ से अधिक वैध नाम बाहर हो गए हैं। संगठन ने चुनाव आयोग से मांग की है कि वह यह स्पष्ट करे कि मतदाता सूची से हटाए गए प्रत्येक नाम के संबंध में कानूनी और पारदर्शी प्रक्रिया का पालन किया गया है या नहीं। साथ ही पार्टी ने नाम हटाने की प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने और सत्यापन पूरा होने तक जनवरी 2025 की मतदाता सूची बहाल करने की मांग की है।
कॉकरोच जनता पार्टी ने यह भी मांग रखी है कि SIR से संबंधित सभी रिकॉर्ड सुप्रीम कोर्ट या किसी स्वतंत्र न्यायिक समिति को सौंपे जाएं ताकि पूरी प्रक्रिया की स्वतंत्र समीक्षा हो सके। इसके अलावा पार्टी मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े 2023 के कानून को निरस्त कर अधिक पारदर्शी नियुक्ति व्यवस्था बनाने की मांग कर रही है।
इसी बीच चुनाव आयोग को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हुई है। एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि पिछले 10 महीनों के दौरान दो चुनाव आयुक्तों ने मुख्य चुनाव आयुक्त के कुछ फैसलों पर आपत्ति जताई थी। दूसरी ओर चिराग पासवान ने भी कहा कि यदि चुनाव आयोग पर आरोप लगाए जा रहे हैं तो मुख्य चुनाव आयुक्त को सामने आकर अपना पक्ष रखना चाहिए। कांग्रेस ने भी इस मुद्दे को लेकर कई शहरों में प्रदर्शन किया है। ऐसे में शनिवार की समयसीमा और 2 अक्टूबर को प्रस्तावित आंदोलन के कारण SIR विवाद आने वाले दिनों में और चर्चा में रह सकता है।
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SIR विवाद के बीच ममता बनर्जी का भड़काऊ बयान विपक्ष ने साधा निशाना
नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल में SIR प्रक्रिया को लेकर सियासी घमासान बढ़ता ही जा रहा है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का हालिया बयान इस विवाद में नया मोड़ लेकर आया है। ममता ने महिलाओं से अपील की कि वे वोटर लिस्ट की समीक्षा के दौरान यदि किसी का नाम हटाने की कोशिश की जाए तो रसोई के सामान के साथ तैयार रहें। उनका कहना था कि यदि दिल्ली से पुलिस भेजकर महिलाओं को डराने की कोशिश की गई तो वे किचन को हथियार बना सकती हैं। इस बयान ने सियासी हलकों में हलचल पैदा कर दी है और SIR विवाद को और हवा दी है।ममता का बयान: महिलाओं को रसोई से चेतावनी
कृष्णानगर में आयोजित एक जनसभा में ममता बनर्जी ने वोटर लिस्ट की समीक्षा के मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने महिलाओं से कहा कि अगर चुनाव के दौरान दिल्ली से पुलिस भेजकर उन्हें डराने की कोशिश की गई तो महिलाएं रसोई के सामानों के साथ तैयार रहें क्योंकि आवश्यकता पड़ने पर किचन भी हथियार बन सकता है। ममता का यह बयान सीधे तौर पर बीजेपी की कथित दबावकारी राजनीति पर हमला माना जा रहा है।
उनका कहना था कि महिलाएं इस लड़ाई में नेतृत्व करेंगी और पुरुष उनका समर्थन करेंगे। यह बयान उन आरोपों के संदर्भ में आया है जिसमें बीजेपी पर वोटर लिस्ट में गड़बड़ी और असहमति रखने वाले लोगों को डराने-धमकाने का आरोप लगाया जा रहा है। ममता बनर्जी का यह बयान बंगाल की राजनीतिक परिस्थितियों को और गर्म कर गया है जिससे राज्य में सियासी हलचल तेज हो गई है।बीजेपी और ममता के बीच तकरार
ममता ने बीजेपी पर आरोप लगाया कि वह चुनावों में पैसे और बाहरी लोगों के सहारे समाज को बांटने की कोशिश करती है जो बंगाल की संस्कृति के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि बंगाल सदियों से सौहार्द और भाईचारे का प्रतीक रहा है और यहां दुर्गा पूजा से लेकर रमजान तक दोनों त्योहार मिल-जुलकर मनाए जाते हैं। ममता ने बीजेपी पर सांप्रदायिक राजनीति फैलाने का आरोप भी लगाया और सवाल किया कि क्या वे सच में भगवान कृष्ण की शिक्षाओं का पालन करते हैं जो शांति और मानवता की बात करते हैं न कि हिंसा और भेदभाव की।
केंद्र पर बड़ा आरोप: बंगालियों को बांग्लादेशी बताने की साजिश
ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार और केंद्रीय गृह मंत्री पर भी तीखे आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि SIR प्रक्रिया के तहत बंगालियों को बांग्लादेशी घोषित किया जा रहा है और उन्हें डिटेंशन सेंटर भेजने की साजिश की जा रही है। ममता ने चेतावनी दी कि अगर किसी बंगाली को जबरन राज्य से बाहर किया गया तो उनकी सरकार उसे वापस लाने का तरीका जानती है।
इस बयान ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया है और ममता के आरोपों ने केंद्र सरकार को बैकफुट पर ला दिया है।ममता ने यह भी सवाल उठाया कि क्या अब उन्हें भी अपनी नागरिकता साबित करनी पड़ेगी जो राज्य में राजनीतिक तनाव को और गहरा करता है। उनके इस बयान ने SIR प्रक्रिया पर चल रही बहस को और तीव्र कर दिया है।SIR विवाद पर सियासी घमासान
पश्चिम बंगाल में SIR प्रक्रिया को लेकर सियासी बयानबाजी तेज होती जा रही है। ममता बनर्जी इसे बंगालियों की पहचान और नागरिकता पर हमला मान रही हैं जबकि बीजेपी का कहना है कि यह केवल चुनावी पारदर्शिता और मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है। ममता बनर्जी का यह बयान केंद्र सरकार और बीजेपी के खिलाफ तीखा पलटवार है जो इसे चुनावी प्रक्रिया में सुधार मानते हैं।
सियासी विश्लेषकों का मानना है कि ममता के बयान ने SIR विवाद को और गहरा कर दिया है और अब यह मुद्दा केवल चुनावी पारदर्शिता तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि राज्य में सांस्कृतिक और नागरिकता के सवालों से भी जुड़ जाएगा। ममता बनर्जी का यह बयान राजनीति में नई खींचतान का कारण बन सकता है और आने वाले दिनों में इस विवाद के और बढ़ने की संभावना है।
SIR विवाद ने पश्चिम बंगाल की राजनीति को और उबाल दिया है और ममता बनर्जी के हालिया भड़काऊ बयान ने राजनीतिक तनाव को और बढ़ा दिया है। बीजेपी और ममता के बीच का यह टकराव अब एक नई दिशा की ओर बढ़ रहा है जिससे राज्य की राजनीति में और भी उतार चढ़ाव आ सकते हैं। ममता का बयान न केवल SIR प्रक्रिया के संदर्भ में है बल्कि यह बंगाल की सांस्कृतिक पहचान और नागरिकता से जुड़े बड़े मुद्दों को भी छेड़ता है। अब देखना यह होगा कि यह विवाद किस दिशा में जाता है और राज्य की राजनीति में क्या नया मोड़ आता है।
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SIR पर ममता बनर्जी का तीखा हमला: अगर नाम हटाएँ, तो किचन में रखे सामानों के साथ तैयार रहें
नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में स्टैंडर्डाइज्ड इलेक्टोरल रजिस्टर (SIR) को लेकर राजनीतिक तापमान लगातार बढ़ रहा है। इसी बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कृष्णानगर में एक रैली के दौरान बेहद तीखा और विवादित बयान देते हुए महिलाओं से आह्वान किया कि यदि वोटर लिस्ट की समीक्षा में उनके नाम हटाए जाएँ, तो वे किचन में मौजूद सामानों के साथ तैयार रहें।अगर नाम काटे जाएँ… महिलाएँ आगे बढ़ें, पुरुष पीछे खड़े रहें
कृष्णानगर की सभा में ममता बनर्जी ने कहा,
अगर चुनाव के दौरान दिल्ली से पुलिस बुलाकर माताओं-बहनों को डराया जाएगा और आपके नाम वोटर लिस्ट से हटाए जाएँगे, तो इसे सहन मत करो। आपके किचन में हथियार हैं… महिलाएँ आगे बढ़ेंगी और पुरुष उनके पीछे खड़े होंगे।उनके इस बयान को भाजपा ने भड़काऊ करार दिया है, जबकि तृणमूल समर्थक इसे जन अधिकार की लड़ाई बता रहे हैं।
बीजेपी पर सांप्रदायिक राजनीति का आरोप
सभा में ममता ने भाजपा पर तीखे शब्दों में हमला बोला। उन्होंने कहा,
बीजेपी हर चुनाव में पैसे और बाहरी लोगों का इस्तेमाल कर जनता को बांटती है। मैं धर्मनिरपेक्षता में विश्वास करती हूं। धर्म का मतलब पवित्रता, मानवता और शांति है-हिंसा या भेदभाव नहीं।उन्होंने धार्मिक आयोजनों पर भी टिप्पणी की और कहा कि लोग जब घर में गीता का पाठ करते हैं या दिल में अल्लाह से दुआ करते हैं, तब इसका दिखावा करने की जरूरत नहीं होती।
क्या मुझे दंगाइयों की पार्टी को अपनी नागरिकता साबित करनी होगी?
NRC और SIR को लेकर केंद्र पर हमला बोलते हुए ममता बोलीं,
क्या अब मुझे दंगाइयों की पार्टी (बीजेपी) को अपनी नागरिकता साबित करनी पड़ेगी?उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्रीय गृह मंत्री बंगालियों को बांग्लादेशी बताकर डिटेंशन सेंटर भेजने की कोशिश कर सकते हैं।
किसी को बंगाल से बाहर नहीं जाने देंगे
उन्होंने जोर देकर कहा,
हम किसी को पश्चिम बंगाल से बाहर नहीं निकालने देंगे। अगर किसी को जबरन निकाला गया, तो उसे वापस लाने का तरीका हम जानते हैं।राजनीतिक माहौल गरम, SIR पर टकराव बढ़ा
SIR को लेकर पहले से ही विवाद चल रहा है। तृणमूल कांग्रेस कहती है कि यह बंगालियों को वोटर लिस्ट से हटाने की साजिश है, जबकि बीजेपी इसे पारदर्शिता और फर्जी वोटिंग खत्म करने की प्रक्रिया बताती है।
ममता का यह बयान आग में घी डालने जैसा माना जा रहा है।
