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  • भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता में गतिरोध, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण बोलीं- आगे बढ़ना दोनों पक्षों के लिए मुश्किल

    भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता में गतिरोध, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण बोलीं- आगे बढ़ना दोनों पक्षों के लिए मुश्किल

    नई दिल्ली ।भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर बातचीत जारी है, लेकिन दोनों देश फिलहाल ऐसे पड़ाव पर पहुंच गए हैं, जहां आगे बढ़ना मुश्किल दिखाई दे रहा है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को कहा कि समझौते पर बेहद कठिन और गहन बातचीत हुई है। उन्होंने यह भी कहा कि फिलहाल दोनों देशों के बीच व्यापार संतुलन भारत के पक्ष में है, जबकि अमेरिका अपने व्यापार घाटे को कम करना चाहता है।

    राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित म्यूनिख लीडर्स मीटिंग 2026 में बोलते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच वार्ता अभी खत्म नहीं हुई है। दोनों पक्ष यह देखने की कोशिश कर सकते हैं कि क्या आगे बातचीत की कोई गुंजाइश बाकी है। हालांकि, उन्होंने संकेत दिया कि मौजूदा स्थिति में दोनों देशों के लिए कुछ और देना या लेना आसान नहीं होगा। प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर बातचीत काफी कठिन और व्यापक स्तर पर हुई है।

    सीतारमण ने कहा कि व्यापार संतुलन इस समय भारत के पक्ष में है और अमेरिका की प्रमुख चिंता अपने व्यापार घाटे को कम करना है। उनके अनुसार, अमेरिका की यह चिंता कई वर्षों से भारत के साथ होने वाले व्यापार में उसके नुकसान से जुड़ी हुई है। दोनों देशों के बीच चल रही बातचीत फरवरी 2026 में घोषित अंतरिम व्यापार समझौते के लिए तय रूपरेखा के तहत हो रही है। भारत और अमेरिका ने उस समय व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बातचीत जारी रखते हुए अंतरिम समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में काम करने की बात कही थी।

    वित्त मंत्री ने इस दौरान भारत और यूरोपीय संघ के बीच हुए व्यापार समझौते का भी उल्लेख किया। उन्होंने इसे व्यापार समझौतों को लेकर भारत के दृष्टिकोण के उदाहरण के रूप में पेश किया। सीतारमण के अनुसार, यह समझौता करीब दो अरब लोगों और वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद के लगभग एक-चौथाई हिस्से का प्रतिनिधित्व करने वाली अर्थव्यवस्थाओं को कवर करेगा। उन्होंने यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन के इस्तेमाल किए गए वाक्यांश का उल्लेख करते हुए इसे “सभी समझौतों की मां” कहना उचित बताया।

    सीतारमण ने बताया कि भारत-यूरोपीय संघ समझौते के तहत भारत ने अपनी 92.5 प्रतिशत टैरिफ लाइनों और व्यापार मूल्य के करीब 97 प्रतिशत हिस्से को खोल दिया है। वहीं, यूरोपीय संघ ने व्यापार मूल्य के करीब 99 प्रतिशत और लगभग 97 प्रतिशत टैरिफ लाइनों को खोला है। उन्होंने कहा कि बाजार पहुंच से जुड़ी प्रतिबद्धताओं का चयन दोनों अर्थव्यवस्थाओं की पूरकता को ध्यान में रखकर किया गया। साथ ही यह सुनिश्चित करने की कोशिश की गई कि इन प्रतिबद्धताओं का भारत की प्रतिस्पर्धात्मकता पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। अमेरिका के साथ बातचीत में भी आगे की संभावनाओं को लेकर दोनों पक्षों के बीच चर्चा जारी है।

  • वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कनाडाई निवेशकों से बैंकिंग, बीमा, फिनटेक और उभरते क्षेत्रों में भारत के अवसरों का लाभ उठाने को कहा

    वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कनाडाई निवेशकों से बैंकिंग, बीमा, फिनटेक और उभरते क्षेत्रों में भारत के अवसरों का लाभ उठाने को कहा


    नई दिल्ली । 
    केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट मामलों की मंत्री निर्मला सीतारमण ने कनाडाई निवेशकों को भारत की विकास यात्रा में सक्रिय भागीदारी के लिए आमंत्रित किया है। टोरंटो में भारतीय प्रवासी कारोबारी समुदाय के लिए आयोजित एक स्वागत समारोह में उन्होंने भारत में निवेश के बढ़ते अवसरों और विभिन्न उभरते क्षेत्रों की संभावनाओं पर विस्तार से बात की।

    वित्त मंत्री ने कहा कि भारत का वित्तीय क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण अवसर उपलब्ध करा रहा है। उन्होंने विशेष रूप से बैंकिंग और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों के क्षेत्र में बढ़ती गतिविधियों का उल्लेख करते हुए कहा कि देश के अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक मजबूत स्थिति में हैं और बैंकिंग क्षेत्र में महत्वपूर्ण निवेश हो रहा है।

    उन्होंने कनाडाई निवेशकों से भारत के साथ व्यापक आर्थिक और कारोबारी जुड़ाव स्थापित करने का आग्रह किया। उनके अनुसार, भारत की बड़ी आबादी, बढ़ती क्रय शक्ति, मजबूत घरेलू खपत और लगातार विकसित होती मांग देश को दीर्घकालिक निवेश के लिए आकर्षक बाजार बनाती है।

    सीतारमण ने इंटरनेशनल फाइनेंशियल सर्विसेज सेंटर यानी आईएफएससी गिफ्ट सिटी को भी अंतरराष्ट्रीय पूंजी के लिए महत्वपूर्ण मंच बताया। उन्होंने कहा कि गिफ्ट सिटी पहले ही कई विदेशी बैंकों को आकर्षित कर चुकी है और आने वाले समय में अधिक अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों के लिए यहां कारोबार स्थापित करने की पर्याप्त संभावनाएं मौजूद हैं।

    वित्त मंत्री के मुताबिक, गिफ्ट सिटी का नियामकीय और कर ढांचा सीमा-पार वित्तीय गतिविधियों को सुविधाजनक बनाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इससे अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों को भारत के साथ जुड़ने और व्यापक क्षेत्रीय गतिविधियों के लिए देश को आधार बनाने का अवसर मिल सकता है।

    बीमा क्षेत्र को लेकर भी उन्होंने निवेश की संभावनाओं को रेखांकित किया। अब भारत में बीमा क्षेत्र में 100 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की अनुमति है। सरकार की इस व्यवस्था से विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय बीमा बाजार में भागीदारी का दायरा बढ़ा है।

    फिनटेक क्षेत्र को सीतारमण ने भारत की प्रमुख ताकतों में शामिल किया। उन्होंने कहा कि बड़े पैमाने पर विकसित हो रहा भारतीय फिनटेक क्षेत्र वैश्विक पूंजी के लिए महत्वपूर्ण अवसर पैदा कर रहा है। डिजिटल वित्तीय सेवाओं के विस्तार और तकनीक आधारित वित्तीय समाधानों ने इस क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय निवेश के लिहाज से महत्वपूर्ण बनाया है।

    इसके साथ ही सेमीकंडक्टर, मैग्नेट और दुर्लभ पृथ्वी तत्वों जैसे उभरते क्षेत्रों को भी कनाडाई निवेशकों के लिए संभावनाओं वाला क्षेत्र बताया गया। इन क्षेत्रों को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं और रणनीतिक विनिर्माण के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    सीतारमण ने कहा कि भारत वैश्विक बाजारों के लिए भरोसेमंद और लागत प्रभावी आपूर्ति श्रृंखला के विकल्प उपलब्ध करा सकता है। इससे भारत में निवेश करने वाली कंपनियों को घरेलू बाजार के साथ-साथ व्यापक क्षेत्रीय और वैश्विक कारोबारी गतिविधियों से जुड़ने का अवसर मिल सकता है।

    उन्होंने कनाडाई संस्थागत निवेशकों के लिए भारत को केवल एक बड़े बाजार के रूप में नहीं, बल्कि व्यापक क्षेत्रीय और वैश्विक वित्तीय गतिविधियों के संभावित मंच के रूप में देखने पर जोर दिया। वित्त मंत्री का यह आह्वान भारत और कनाडा के कारोबारी समुदायों के बीच निवेश संबंधों को और व्यापक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    भारत सरकार की ओर से बैंकिंग, बीमा, फिनटेक, सेमीकंडक्टर और महत्वपूर्ण खनिजों जैसे क्षेत्रों में निवेश अवसरों को सामने रखना इस बात को दर्शाता है कि देश वैश्विक पूंजी को अपनी विकास प्रक्रिया से जोड़ने पर जोर दे रहा है। कनाडाई निवेशकों के लिए इन क्षेत्रों में मौजूद अवसर भारत की आर्थिक क्षमता और बदलती वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं के बीच नए कारोबारी विकल्प उपलब्ध करा सकते हैं।

  • निर्मला सीतारमण आज जयपुर में BRICS वित्त मंत्रियों की बैठक में शामिल होंगी, वैश्विक आर्थिक चुनौतियों पर होगा मंथन

    निर्मला सीतारमण आज जयपुर में BRICS वित्त मंत्रियों की बैठक में शामिल होंगी, वैश्विक आर्थिक चुनौतियों पर होगा मंथन

    नई दिल्ली ।केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण बुधवार को जयपुर में आयोजित BRICS देशों के वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक गवर्नरों की दो दिवसीय बैठक में शामिल होंगी। भारत की BRICS अध्यक्षता के तहत हो रही यह बैठक वैश्विक आर्थिक और वित्तीय चुनौतियों पर सहयोग बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। बैठक में समूह के सभी 11 सदस्य देशों के वित्त मंत्री और केंद्रीय बैंक के गवर्नर हिस्सा लेंगे।

    जयपुर के रामबाग पैलेस में आयोजित होने वाली बैठक का उद्घाटन सत्र बुधवार सुबह 11:15 बजे शुरू होगा। इसमें वैश्विक अर्थव्यवस्था से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श किया जाएगा। आर्थिक विकास, वित्तीय उदारीकरण, जोखिम प्रबंधन और वैश्विक वित्तीय स्थिरता जैसे मुद्दे चर्चा के प्रमुख केंद्र में रहेंगे।

    भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा भी बैठक में हिस्सा लेने के लिए जयपुर पहुंच चुके हैं। उद्घाटन सत्र के दौरान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और आरबीआई गवर्नर सदस्य देशों की अर्थव्यवस्थाओं तथा केंद्रीय बैंकिंग से जुड़े मुद्दों पर अपने विचार साझा करेंगे।

    बैठक में प्रतिनिधि वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों में सामने आ रही चुनौतियों और उभरती अर्थव्यवस्थाओं के सामने मौजूद अवसरों पर भी चर्चा करेंगे। निवेश बढ़ाने, वित्तीय सहयोग मजबूत करने और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय व्यवस्था को अधिक स्थिर बनाने से जुड़े विषयों पर सदस्य देशों के बीच विचारों का आदान-प्रदान होगा।

    जयपुर पहुंचने पर वित्त मंत्री का स्वागत राजस्थान की उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी, मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने किया। बैठक के आयोजन को देखते हुए जयपुर में विदेशी प्रतिनिधियों के लिए विशेष कार्यक्रम भी तैयार किए गए हैं।

    दो दिवसीय बैठक गुरुवार दोपहर 12:30 बजे तक चलेगी। इस दौरान BRICS सदस्य देशों के प्रतिनिधि आर्थिक और वित्तीय क्षेत्र में आपसी सहयोग के संभावित रास्तों पर चर्चा करेंगे। बदलते वैश्विक आर्थिक माहौल में निवेश, वित्तीय जोखिम और आर्थिक स्थिरता जैसे विषयों का महत्व लगातार बढ़ा है, ऐसे में बैठक को महत्वपूर्ण मंच के रूप में देखा जा रहा है।

    विदेशी प्रतिनिधियों को राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराने के लिए भी विशेष कार्यक्रम रखा गया है। बुधवार शाम पांच बजे सभी प्रतिनिधि जयपुर सिटी पैलेस का दौरा करेंगे। इस दौरान राजस्थान की संस्कृति, परंपराओं और विरासत को प्रदर्शित करने वाला सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।

    BRICS वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक गवर्नरों की वार्षिक बैठक की शुरुआत करीब 18 वर्ष पहले वैश्विक वित्तीय संकट के दौर में हुई थी। समय के साथ यह बैठक वैश्विक आर्थिक और वित्तीय मामलों पर सदस्य देशों के बीच संवाद और सहयोग का महत्वपूर्ण मंच बन गई है।

    जयपुर दूसरी बार इस बैठक की मेजबानी कर रहा है। इससे पहले वर्ष 2021 में कोविड-19 महामारी के दौरान भी जयपुर में इस बैठक का आयोजन हुआ था। उस समय आर्थिक पुनरुद्धार, टीकाकरण, डिजिटल स्वास्थ्य, सामाजिक अवसंरचना और वित्तीय समावेशन जैसे मुद्दे प्रमुख चर्चा में रहे थे।

    2021 की बैठक में यूरोपीय संघ के कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म से जुड़े विषय पर भी विचार-विमर्श हुआ था। इस बार बदलती वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों के बीच वित्तीय स्थिरता, निवेश और सहयोग से जुड़े मुद्दों पर सदस्य देशों की प्राथमिकताएं चर्चा के केंद्र में रहने की उम्मीद है।

    भारत की अध्यक्षता में हो रही यह बैठक ऐसे समय आयोजित हो रही है जब वैश्विक अर्थव्यवस्था कई तरह की अनिश्चितताओं से गुजर रही है। ऐसे में BRICS देशों के वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक गवर्नरों के बीच समन्वय बढ़ाने की कोशिशों पर बैठक का विशेष ध्यान रहेगा।

  • एलआईसी, यूनियन बैंक और न्यू इंडिया एश्योरेंस ने सरकार को दिया डिविडेंड, सार्वजनिक बैंकों के मजबूत प्रदर्शन की तस्वीर आई सामने

    एलआईसी, यूनियन बैंक और न्यू इंडिया एश्योरेंस ने सरकार को दिया डिविडेंड, सार्वजनिक बैंकों के मजबूत प्रदर्शन की तस्वीर आई सामने


    नई दिल्ली । 
    देश की सबसे बड़ी जीवन बीमा कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए सरकार को 12,207 करोड़ रुपये का डिविडेंड सौंपा है। बुधवार को आयोजित एक कार्यक्रम में एलआईसी के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी आर. दोराईस्वामी ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को डिविडेंड का चेक सौंपा। यह भुगतान सरकार को सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों से मिलने वाले लाभांश का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है और सरकारी राजस्व को मजबूत करने में इसकी अहम भूमिका रहती है।

    एलआईसी के अलावा सार्वजनिक क्षेत्र के अन्य वित्तीय संस्थानों ने भी सरकार को डिविडेंड प्रदान किया। यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 2,853 करोड़ रुपये का डिविडेंड दिया। बैंक के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी आशीष पांडे ने वित्त मंत्री को यह चेक सौंपा। इसी अवसर पर सार्वजनिक क्षेत्र की बीमा कंपनी न्यू इंडिया एश्योरेंस ने भी 211 करोड़ रुपये का डिविडेंड सरकार को प्रदान किया। कंपनी की अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक गिरिजा सुब्रमणियन ने वित्त मंत्री को इसका चेक सौंपा।

    इस अवसर पर सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के वित्तीय प्रदर्शन से जुड़े महत्वपूर्ण आंकड़े भी सामने आए। उपलब्ध जानकारी के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की परिसंपत्ति गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया। सकल गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (ग्रॉस एनपीए) का स्तर घटकर रिकॉर्ड निचले स्तर के करीब पहुंच गया, जबकि बैंकों का शुद्ध लाभ बढ़कर अब तक के सर्वोच्च स्तर पर पहुंच गया। यह लगातार चौथा वित्त वर्ष रहा जब सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक सामूहिक रूप से लाभ में रहे।

    आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का शुद्ध लाभ 11.1 प्रतिशत बढ़कर लगभग 1.98 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया। वहीं 31 मार्च 2026 तक इन बैंकों का कुल कारोबार बढ़कर 283.3 लाख करोड़ रुपये हो गया, जो पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 12.8 प्रतिशत अधिक है। ऋण वितरण में वृद्धि, आय में सुधार और परिसंपत्ति गुणवत्ता बेहतर होने से बैंकों की वित्तीय स्थिति पहले की तुलना में अधिक मजबूत हुई है।

    बैंकों की बैलेंस शीट में सुधार के साथ जोखिम प्रबंधन और परिचालन क्षमता में भी सकारात्मक बदलाव देखने को मिला है। वित्तीय वर्ष के अंत तक सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का सकल एनपीए अनुपात घटकर लगभग 1.93 प्रतिशत और शुद्ध एनपीए अनुपात 0.39 प्रतिशत पर आ गया। यह स्तर तनावग्रस्त परिसंपत्तियों में उल्लेखनीय कमी का संकेत देता है और बैंकिंग प्रणाली की मजबूती को दर्शाता है।

    इसके साथ ही सभी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने 90 प्रतिशत से अधिक का प्रोविजनिंग कवरेज रेशियो बनाए रखा। विशेषज्ञों के अनुसार यह बेहतर जोखिम प्रबंधन, सावधानीपूर्ण ऋण वितरण और मजबूत पूंजी स्थिति का संकेत माना जाता है। लगातार बढ़ती लाभप्रदता, बेहतर परिसंपत्ति गुणवत्ता और मजबूत वित्तीय आधार के चलते सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक और सरकारी वित्तीय संस्थान देश की आर्थिक गतिविधियों को समर्थन देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। सरकार को प्राप्त डिविडेंड भी इसी मजबूत वित्तीय प्रदर्शन का प्रत्यक्ष परिणाम माना जा रहा है।

  • 'कर वसूली ही नहीं, नागरिक सुविधा भी प्राथमिकता बने', आयकर विभाग को निर्मला सीतारमण का स्पष्ट संदेश

    'कर वसूली ही नहीं, नागरिक सुविधा भी प्राथमिकता बने', आयकर विभाग को निर्मला सीतारमण का स्पष्ट संदेश


    नई दिल्ली ।
    वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आयकर विभाग को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि उसकी जिम्मेदारी केवल कर संग्रह तक सीमित नहीं है, बल्कि आम नागरिकों को बिना अनावश्यक परेशानी के समय पर और प्रभावी सेवाएं उपलब्ध कराना भी उतना ही महत्वपूर्ण दायित्व है। उन्होंने कहा कि सरकारी व्यवस्था का उद्देश्य लोगों के काम को आसान बनाना होना चाहिए, ताकि उन्हें अपने वैध अधिकारों के लिए बार-बार कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें।

    मुंबई के नरीमन पॉइंट स्थित आयकर विभाग की नई 13 मंजिला इमारत ‘आयकर सिंधु’ के उद्घाटन के अवसर पर वित्त मंत्री ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली में सुधार की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि सरकारी विभागों को नागरिकों की समस्याओं को संवेदनशीलता के साथ समझना चाहिए और ऐसी व्यवस्था विकसित करनी चाहिए, जिसमें सेवाएं समय पर और पारदर्शी तरीके से उपलब्ध हों। उनके अनुसार, प्रभावी प्रशासन वही है जो नियमों का पालन करते हुए लोगों की कठिनाइयों को कम करे।

    वित्त मंत्री ने सरकारी भूमि और संपत्तियों के संरक्षण के विषय पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने बताया कि जिस भूमि पर नई इमारत का निर्माण हुआ है, वह कई दशक पहले विभाग को आवंटित की गई थी, लेकिन लंबे समय तक उपयोग नहीं होने के कारण वहां अवैध कब्जे की स्थिति उत्पन्न हो गई। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि सार्वजनिक संपत्तियों की सुरक्षा और उनका समय पर उपयोग सुनिश्चित करना उनकी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है, ताकि राष्ट्रीय संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सके।

    अपने संबोधन में उन्होंने भवन निर्माण से जुड़ी प्रशासनिक और मंजूरी संबंधी प्रक्रियाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यदि एक बड़े सरकारी विभाग को विभिन्न अनुमतियां प्राप्त करने में लंबा समय और कई स्तरों की जटिलताओं का सामना करना पड़ता है, तो आम नागरिकों को होने वाली परेशानियों का सहज अनुमान लगाया जा सकता है। इसलिए विभागों को प्रक्रियाओं को अधिक सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाने की दिशा में लगातार प्रयास करना चाहिए।

    सीतारमण ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य नियमों में ढील देने का नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि नियमों का पालन करते हुए भी लोगों के कार्य अनावश्यक रूप से लंबित न रहें। उन्होंने कहा कि किसी भी नागरिक को अपने वैध अधिकार या सरकारी सेवा प्राप्त करने के लिए अत्यधिक प्रयास करने की स्थिति नहीं आनी चाहिए। प्रशासन की कार्यशैली ऐसी होनी चाहिए, जिसमें जवाबदेही और दक्षता दोनों दिखाई दें।

    उन्होंने आयकर विभाग के अधिकारियों के आवास से जुड़ी समस्याओं का भी उल्लेख किया। वित्त मंत्री ने कहा कि मुंबई और नवी मुंबई क्षेत्र में अनेक अधिकारियों को सरकारी आवास उपलब्ध नहीं हो पाता, जिसके कारण उन्हें लंबी दूरी तय करके कार्यालय पहुंचना पड़ता है। इससे उनके कार्य और व्यक्तिगत जीवन दोनों पर प्रभाव पड़ता है। उन्होंने इस समस्या के समाधान के लिए आवश्यक सरकारी भूमि के हस्तांतरण को प्राथमिकता देने का आश्वासन दिया।

    वित्त मंत्री ने कहा कि भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया को गति देने के लिए केंद्र स्तर पर आवश्यक सहयोग दिया जाएगा। इसके बाद भवन निर्माण, स्वीकृतियां, निविदाएं और अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं को संबंधित विभागों द्वारा समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाना चाहिए। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि बेहतर बुनियादी ढांचे, पारदर्शी कार्यप्रणाली और नागरिक-केंद्रित सोच के साथ आयकर विभाग अधिक प्रभावी सेवाएं प्रदान कर सकेगा और प्रशासनिक व्यवस्था पर लोगों का विश्वास भी और मजबूत होगा।

  • भारत की विकास यात्रा मजबूत लेकिन चुनौतियां बरकरार, निर्मला सीतारमण बोलीं- सतत प्रगति के लिए सुधार, नवाचार और तैयारी जरूरी

    भारत की विकास यात्रा मजबूत लेकिन चुनौतियां बरकरार, निर्मला सीतारमण बोलीं- सतत प्रगति के लिए सुधार, नवाचार और तैयारी जरूरी

    नई दिल्ली । भारत की अर्थव्यवस्था वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच मजबूती के साथ आगे बढ़ रही है, लेकिन दीर्घकालिक और सतत विकास सुनिश्चित करने के लिए निरंतर प्रयासों की आवश्यकता बनी हुई है। केंद्रीय वित्त एवं कॉर्पोरेट मामलों की मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को कहा कि देश ने आर्थिक मोर्चे पर उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं, फिर भी विकास की इस गति को स्थायी बनाए रखने के लिए आत्मसंतोष की बजाय निरंतर सुधार, नवाचार और संस्थागत मजबूती पर ध्यान देना होगा।

    एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि किसी भी बड़ी और जटिल अर्थव्यवस्था के लिए केवल विकास दर हासिल करना पर्याप्त नहीं होता। वास्तविक सफलता तब मानी जाती है जब आर्थिक प्रगति का लाभ समाज के सभी वर्गों तक पहुंचे और विकास समावेशी तथा टिकाऊ स्वरूप ग्रहण करे। उन्होंने कहा कि मजबूत संस्थानों, प्रभावी नीतियों और सक्षम प्रशासनिक व्यवस्थाओं के बिना दीर्घकालिक आर्थिक विकास को बनाए रखना कठिन हो सकता है।

    सीतारमण ने कहा कि भारत वर्तमान में कई आर्थिक संकेतकों पर बेहतर प्रदर्शन कर रहा है, लेकिन यह स्थिति स्थायी रूप से सुनिश्चित नहीं मानी जा सकती। उनके अनुसार समय-समय पर नीतियों का मूल्यांकन करना और उन क्षेत्रों की पहचान करना आवश्यक है जहां सुधार की गुंजाइश अभी भी मौजूद है। उन्होंने कहा कि बदलती घरेलू और वैश्विक परिस्थितियों के अनुरूप नीतिगत ढांचे को लगातार अद्यतन करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

    वित्त मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि विकास को गति देने के लिए देश की उत्पादन क्षमता, कार्यकुशलता और प्रतिस्पर्धात्मकता को मजबूत करना होगा। उन्होंने कहा कि कई क्षेत्रों ने उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है, लेकिन कुछ सेक्टर ऐसे भी हैं जिन्हें अतिरिक्त नीति समर्थन और संरचनात्मक सुधारों की आवश्यकता है। विशेष रूप से जटिल विनिर्माण, मध्यवर्ती उत्पादों और विशिष्ट सेवाओं से जुड़े क्षेत्रों में नई रणनीतियों की जरूरत महसूस की जा रही है।

    उन्होंने कहा कि लंबे समय से जिन चुनौतियों पर चर्चा होती रही है, अब उनके व्यावहारिक समाधान तलाशने का समय है। इसके लिए बेहतर क्रियान्वयन, संस्थागत क्षमता निर्माण और आवश्यकतानुसार नई नीतियों का निर्माण महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। सरकार लगातार इस दिशा में काम कर रही है ताकि भविष्य की आर्थिक चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना किया जा सके।

    वैश्विक आर्थिक परिदृश्य का उल्लेख करते हुए सीतारमण ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां तेजी से बदल रही हैं। ऐसे में भारत को भी अपनी नीतियों को लचीला और परिस्थितियों के अनुरूप बनाए रखना होगा। उन्होंने कहा कि विकास की प्रक्रिया स्वतः संचालित नहीं होती, बल्कि इसके लिए निरंतर निगरानी, सुधार और दूरदर्शी योजना की आवश्यकता होती है।

    कोविड-19 महामारी के प्रभावों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि महामारी से जुड़े कुछ असर अब भी आर्थिक योजना और अपेक्षाओं को प्रभावित करते हैं। हालांकि वर्तमान समय में किसी बड़े व्यवधान की आशंका नहीं है, फिर भी सरकार संभावित जोखिमों पर नजर बनाए हुए है और आवश्यक तैयारियां कर रही है।

    वित्त मंत्री ने मौसम संबंधी चुनौतियों पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि एल नीनो प्रभाव के कारण सामान्य से कमजोर मानसून की संभावना को ध्यान में रखते हुए सरकार पहले से तैयारी कर रही है। कुछ क्षेत्रों में सूखे जैसी स्थिति और कुछ इलाकों में अत्यधिक वर्षा की आशंका को देखते हुए संबंधित विभागों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।

    उन्होंने विश्वास जताया कि उचित नीतियों, मजबूत संस्थागत ढांचे और निरंतर सुधारों के माध्यम से भारत अपनी दीर्घकालिक विकास संभावनाओं को और अधिक सशक्त बना सकेगा तथा वैश्विक अर्थव्यवस्था में अपनी स्थिति को और मजबूत करेगा।