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  • राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर ओवैसी के बयान से सियासी घमासान, एनडीए नेताओं का पलटवार; बोले- जांच को सांप्रदायिक रंग देना अनुचित

    राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर ओवैसी के बयान से सियासी घमासान, एनडीए नेताओं का पलटवार; बोले- जांच को सांप्रदायिक रंग देना अनुचित

    नई दिल्ली । राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच के बीच ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के बयान को लेकर राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। ओवैसी की टिप्पणी के बाद भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि मामले को धार्मिक दृष्टिकोण से देखने के बजाय कानून और जांच की प्रक्रिया के आधार पर परखा जाना चाहिए। नेताओं ने स्पष्ट किया कि जांच एजेंसियां अपना काम कर रही हैं और दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होगी।

    ओवैसी ने अपने बयान में दावा किया था कि यदि ट्रस्ट में किसी मुस्लिम की भूमिका होती तो उसके साथ अलग तरह का व्यवहार किया जाता। इस टिप्पणी के सामने आने के बाद कई भाजपा नेताओं ने इसे अनावश्यक और समाज में विभाजन पैदा करने वाला बयान बताया। उनका कहना है कि जांच पूरी तरह तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़ रही है तथा इसमें किसी भी प्रकार के धार्मिक भेदभाव का प्रश्न नहीं उठता।

    भाजपा सांसद सुजीत कुमार ने कहा कि पूरे मामले को हिंदू-मुस्लिम के नजरिए से जोड़ना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि चढ़ावे और श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े मामले में किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। उनके अनुसार विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित किया जा चुका है और जांच एजेंसियां पूरे घटनाक्रम की गहराई से पड़ताल कर रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि धार्मिक आस्था से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता है।

    भाजपा विधायक सुरेंद्र मैथानी ने भी ओवैसी के बयान की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि इस प्रकार की टिप्पणियां राजनीतिक उद्देश्य से की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी मामले में जांच पूरी होने से पहले उसे सांप्रदायिक रंग देना उचित नहीं है। साथ ही उन्होंने धार्मिक संस्थानों में वित्तीय पारदर्शिता और जवाबदेही को सभी समुदायों के लिए समान रूप से आवश्यक बताया।

    उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री संजय निषाद ने भी कहा कि चढ़ावा चोरी का मामला पूरी तरह कानूनी जांच का विषय है और इसे धार्मिक पहचान से जोड़ना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि किसी भी संस्था में वित्तीय अनियमितता सामने आती है तो कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। उनके अनुसार जांच एजेंसियों को निष्पक्ष रूप से अपना कार्य करने दिया जाना चाहिए।

    इस बीच चढ़ावा चोरी मामले की जांच भी लगातार आगे बढ़ रही है। जांच एजेंसियों ने आरोपियों की वित्तीय गतिविधियों, बैंक खातों और संपत्तियों की विस्तृत पड़ताल शुरू कर दी है। कई बैंक खातों का रिकॉर्ड, केवाईसी दस्तावेज और लेनदेन का विवरण एकत्र किया जा रहा है ताकि कथित वित्तीय अनियमितताओं की पूरी श्रृंखला को समझा जा सके। जांच के दौरान कुछ अन्य व्यक्तियों और बैंकिंग प्रक्रिया से जुड़े पहलुओं की भी समीक्षा की जा रही है।

    मामले में पहले ही कई आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जा चुकी है और कुछ लोगों की गिरफ्तारी भी हो चुकी है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि कथित गबन और वित्तीय अनियमितता किस स्तर पर हुई, इसमें कितनी धनराशि प्रभावित हुई तथा किन-किन लोगों की भूमिका रही। वहीं राजनीतिक दलों के बीच इस मुद्दे पर आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है, जबकि प्रशासन का कहना है कि जांच निष्पक्ष ढंग से पूरी कर दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

  • राम मंदिर चढ़ावा विवाद में नया मोड़, उच्च न्यायिक आयोग की मांग से बढ़ी हलचल

    राम मंदिर चढ़ावा विवाद में नया मोड़, उच्च न्यायिक आयोग की मांग से बढ़ी हलचल


    नई दिल्ली । अयोध्या स्थित श्रीराम मंदिर से जुड़े चढ़ावे और दान सामग्री के कथित गबन को लेकर मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। इस पूरे विवाद ने अब कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर नया मोड़ ले लिया है, जहां जांच एजेंसियों की कार्रवाई के बीच न्यायिक हस्तक्षेप की मांग तेज होती जा रही है।

    मामले की जांच पहले ही एसआईटी द्वारा की जा चुकी है और टीम अपनी रिपोर्ट तैयार कर आगे की प्रक्रिया के लिए उच्च अधिकारियों को सौंपने की तैयारी में है। बताया जा रहा है कि जांच टीम लखनऊ के लिए रवाना हो चुकी है और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को रिपोर्ट सौंपे जाने की संभावना है। इसी बीच इस प्रकरण को लेकर एक नई जनहित याचिका लखनऊ स्थित उच्च न्यायालय की पीठ में दाखिल की गई है।

    अधिवक्ता मोतीलाल यादव द्वारा दाखिल इस याचिका में मांग की गई है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए एक उच्चस्तरीय न्यायिक आयोग का गठन किया जाए। याचिका में राज्य सरकार, पुलिस महानिदेशक, अयोध्या के जिलाधिकारी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक और मंदिर ट्रस्ट के सचिव को पक्षकार बनाया गया है। संभावना जताई जा रही है कि इस मामले की सुनवाई अगले सप्ताह हो सकती है।

    इसी बीच आरोपों की श्रृंखला और भी गंभीर होती जा रही है। सराफा व्यापार से जुड़े एक संगठन के नॉर्थ इंडिया हेड द्वारा यह दावा किया गया है कि लगभग 60 किलो चांदी, जो देशभर के दानदाताओं द्वारा मंदिर के लिए भेजी गई थी, उसका उचित उपयोग या सार्वजनिक विवरण सामने नहीं आया है। आरोपों के अनुसार, यह चांदी गलाकर धार्मिक उपयोग के लिए ईंटों और अन्य सामग्री में बदली गई थी, लेकिन बाद में इन वस्तुओं का हिसाब स्पष्ट रूप से सामने नहीं आया।

    इसके अलावा कुछ दानदाताओं का यह भी कहना है कि उन्होंने व्यक्तिगत रूप से चांदी के दीपक, कटोरे और अन्य धार्मिक वस्तुएं मंदिर को दान की थीं, लेकिन मंदिर निर्माण के बाद वे वस्तुएं दिखाई नहीं दीं। दानदाताओं ने इस पूरे मामले में पारदर्शिता की मांग करते हुए दान सामग्री का पूरा रिकॉर्ड सार्वजनिक करने की अपील की है।

    इस विवाद के चलते मंदिर प्रबंधन पर सवाल उठने लगे हैं और श्रद्धालुओं के बीच भी असमंजस की स्थिति देखी जा रही है। कुछ रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया है कि लगातार उठ रहे विवादों का असर मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं और दान की मात्रा पर भी पड़ा है। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

    फिलहाल यह मामला जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बीच आगे बढ़ रहा है। एक ओर एसआईटी अपनी रिपोर्ट तैयार कर रही है, वहीं दूसरी ओर न्यायिक आयोग की मांग ने इस विवाद को और गंभीर बना दिया है। आने वाले दिनों में अदालत की सुनवाई और जांच रिपोर्ट इस पूरे मामले की दिशा तय कर सकती है।

  • टीसीएस कांड में जबरन मजहब परिवर्तन की गहरी साजिश: व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए महिला कर्मचारियों को निशाना बनाने वाली आरोपी निदा खान के बढ़े संकट

    टीसीएस कांड में जबरन मजहब परिवर्तन की गहरी साजिश: व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए महिला कर्मचारियों को निशाना बनाने वाली आरोपी निदा खान के बढ़े संकट

    नई दिल्ली । महाराष्ट्र के नासिक में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) परिसर से सामने आए यौन उत्पीड़न और जबरन धर्मांतरण के बहुचर्चित मामले में विशेष जांच दल (SIT) की चार्जशीट से कई सनसनीखेज और गंभीर खुलासे हुए हैं। मामले की 23 वर्षीय मुख्य शिकायतकर्ता ने जांच अधिकारियों के समक्ष दिए अपने विस्तृत बयान में उस संगठित प्रशासनिक और मानसिक दबाव का पर्दाफाश किया है, जो उस पर धर्म परिवर्तन कराने के उद्देश्य से लगातार बनाया जा रहा था। चार्जशीट के अनुसार, इस पूरी साजिश का ताना-बाना बेहद पेशेवर और रणनीतिक तरीके से बुना गया था।

    देवलाली कैंप पुलिस स्टेशन में दर्ज की गई इस प्राथमिकी और उसके बाद दाखिल की गई चार्जशीट के अनुसार, मुख्य आरोपी दानिश शेख ने शादी का झांसा देकर न केवल पीड़िता का शारीरिक और यौन शोषण किया, बल्कि उसकी धार्मिक आस्था को भी चोट पहुंचाने की पूरी कोशिश की। दानिश ने पीड़िता को पूरी तरह से उसकी हिंदू मान्यताओं से दूर करने के लिए कूटनीतिक रूप से प्रभावित करना शुरू किया था। उसने पीड़िता को मंदिर जाने और भगवान के भजन सुनने से स्पष्ट रूप से मना कर दिया था।

    जांच में यह बात भी सामने आई है कि आरोपी दानिश शेख ने पीड़िता को ढाढस बंधाने के बहाने कहा था कि उसे डरने की कोई आवश्यकता नहीं है क्योंकि अल्लाह उनके साथ है। उसने पीड़िता को मानसिक तनाव कम करने का झांसा देकर सनातन पद्धतियों को छोड़ने और इस्लामिक रीति-रिवाजों के अनुसार इबादत करने तथा ‘तस्बीह’ पढ़ने के लिए मजबूर किया। इस प्रशासनिक और आर्थिक नियंत्रण के तहत आरोपी के पास पीड़िता के बैंक खातों और गोपनीय यूपीआई पिन की भी पूरी जानकारी उपलब्ध थी।

    एसआईटी की जांच के अनुसार, दानिश ने इस साजिश को अमलीजामा पहनाने के लिए अपने दो अन्य सहयोगियों- तौसीफ अत्तार और निदा खान को विशेष जिम्मेदारी सौंप रखी थी। तौसीफ अत्तार ने पीड़िता का पूरी तरह से ब्रेनवॉश करने के लिए उसे इंटरनेट और यूट्यूब पर विवादित प्रचारक जाकिर नाइक, पाकिस्तानी मौलवी तारिक जमील और पाकिस्तानी इस्लामिक विद्वान डॉ. इसरार अहमद के कट्टरपंथी भाषणों और वीडियो को बार-बार देखने का निर्देश दिया था।

    पीड़िता को लगातार जन्नत, जहन्नुम और अन्य धार्मिक अवधारणाओं के बारे में बताकर यह विश्वास दिलाया गया कि यदि वह अपना मूल धर्म छोड़ देती है, तो उसका सारा मानसिक तनाव और परेशानियां हमेशा के लिए समाप्त हो जाएंगी। इसके अलावा, मामले की अन्य प्रमुख आरोपी निदा खान पर एक संगठित व्हाट्सएप ग्रुप संचालित करने का आरोप है। इस ग्रुप के माध्यम से कंपनी की अन्य महिला कर्मचारियों को भी लक्षित किया जाता था और उन पर नमाज पढ़ने, विशिष्ट पहनावा अपनाने और जीवनशैली बदलने का अनैतिक दबाव बनाया जाता था।

    इस मामले की गंभीरता को देखते हुए एसआईटी ने अब तक 106 गवाहों के बयान दर्ज किए हैं, जिनमें टीसीएस के कर्मचारी और कंपनी की आंतरिक ‘पॉश’ (POSH) कमेटी के सदस्य भी शामिल हैं। मामले में कुल नौ कर्मचारियों ने शिकायत दर्ज कराई है, जिसके बाद आरोपियों- दानिश शेख, तौसीफ अत्तार, निदा खान सहित कुल आठ लोगों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। इस मामले में एआईएमआईएम के एक स्थानीय नगरसेवक मतीन पटेल का नाम भी शामिल है, जिन पर फरार रहने के दौरान आरोपियों को पनाह देने का आरोप है।

    इस पूरे गंभीर विवाद और कानूनी कार्रवाई पर टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) के प्रबंधन ने भी अपना कड़ा रुख स्पष्ट कर दिया है। कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) के. कृतिवासन ने आधिकारिक बयान जारी कर कहा है कि संस्थान में किसी भी प्रकार के दुर्व्यवहार या अनैतिक दबाव के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति लागू है। प्रबंधन ने इस मामले के सभी दागी आरोपियों को तत्काल प्रभाव से नौकरी से निलंबित कर दिया है और कानून प्रवर्तन एजेंसियों को जांच में पूरा प्रशासनिक सहयोग प्रदान कर रहा है।

  • राजधानी को दहलाने वाला 'थार रेप केस': आरोपी माज और ओसाफ की मोबाइल लोकेशन ने खोली पोल, सीडीआर से पुख्ता हुई गुनाह की साजिश

    राजधानी को दहलाने वाला 'थार रेप केस': आरोपी माज और ओसाफ की मोबाइल लोकेशन ने खोली पोल, सीडीआर से पुख्ता हुई गुनाह की साजिश


    भोपाल के खानूगांव में 11वीं कक्षा की एक नाबालिग हिंदू छात्रा के साथ हुई दरिंदगी के मामले में हर दिन चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। इस सनसनीखेज कांड के मुख्य किरदारों मोहम्मद माज खान और ओसाफ अली खान की घेराबंदी अब एसआईटी SIT ने तेज कर दी है। जांच में तकनीकी साक्ष्यों विशेषकर सीडीआर Call Detail Record से यह पुख्ता हो गया है कि घटना के वक्त दोनों आरोपी एक ही स्थान पर मौजूद थे। पुलिस की तफ्तीश में यह बात सामने आई है कि जब ओसाफ अली खान लग्जरी थार कार के भीतर नाबालिग से दुष्कर्म कर रहा था तब माज खान बाहर पहरा दे रहा था। इतना ही नहीं माज ने न केवल बाहर से इस कृत्य का वीडियो बनाया बल्कि छात्रा को अश्लील मैसेज भेजकर छेड़छाड़ भी की।

    आरोपी माज खान जो खुद को एक प्रतिष्ठित जिम का संचालक और बिल्डर बताता है ने पूछताछ में कबूला है कि उसने पूरी घटना की प्लानिंग पहले ही कर ली थी। उसने चोरी-छिपे बनाए गए वीडियो के जरिए छात्रा को ब्लैकमेल किया और उसकी इज्जत नीलाम करने की धमकी देकर उससे 40 हजार रुपए भी वसूले। पुलिस ने उस थार कार को सीहोर के एक गांव से बरामद कर लिया है जिसका इस्तेमाल इस जघन्य अपराध में किया गया था। इसके अलावा तीन अन्य लग्जरी कारें भी जब्त की गई हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि आरोपी ने साक्ष्य मिटाने के लिए उस आईफोन को राजस्थान के जंगलों में तोड़कर फेंकने का दावा किया है जिससे वीडियो शूट किया गया था।

    इस मामले के तार पुलिस विभाग के भीतर फैले भ्रष्टाचार से भी जुड़े नजर आ रहे हैं। कोहेफिजा थाने के प्रधान आरक्षक ज्ञानेंद्र दिवेदी को इस मामले में सस्पेंड कर दिया गया है। आरोप है कि उसने महज 50 हजार रुपए की रिश्वत लेकर आरोपी माज को गोपनीय सूचनाएं लीक कीं और उसके साथ होटल में लंच किया जिसकी वजह से उसकी गिरफ्तारी में देरी हुई। अब ज्ञानेंद्र के खिलाफ विभागीय जांच शुरू हो चुकी है।

    मामले की गंभीरता को देखते हुए एसीपी अंकिता खातरकर के नेतृत्व में चार सदस्यीय एसआईटी का गठन किया गया है। टीम अब इस बात की तहकीकात कर रही है कि क्या इन आरोपियों ने अन्य लड़कियों को भी अपना शिकार बनाया है। साथ ही माज और उसके भाई मोनिस के पास महज 8-10 वर्षों में आई करोड़ों की संपत्ति भी जांच के दायरे में है। मोनिस पहले से ही एमडी ड्रग की तस्करी के मामले में जमानत पर है। पुलिस अब धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम पॉस्को और आर्म्स एक्ट की धाराओं के तहत आरोपियों के खिलाफ शिकंजा कस रही है ताकि इस संगठित अपराध के सिंडिकेट को जड़ से खत्म किया जा सके।