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  • राम जन्मभूमि ट्रस्ट की अहम बैठक आज, चंपत राय के इस्तीफे से लेकर सुरक्षा और प्रशासनिक सुधार तक कई बड़े मुद्दों पर होगी चर्चा

    राम जन्मभूमि ट्रस्ट की अहम बैठक आज, चंपत राय के इस्तीफे से लेकर सुरक्षा और प्रशासनिक सुधार तक कई बड़े मुद्दों पर होगी चर्चा

    नई दिल्ली। अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की महत्वपूर्ण बैठक सोमवार को आयोजित होने जा रही है। हाल के दिनों में मंदिर के चढ़ावे से जुड़े विवाद और प्रशासनिक मुद्दों के बीच बुलाई गई इस बैठक को बेहद अहम माना जा रहा है। ट्रस्ट की कार्यप्रणाली, सुरक्षा व्यवस्था और भविष्य की प्रशासनिक योजनाओं को लेकर कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर विचार होने की संभावना है। बैठक को देखते हुए राम जन्मभूमि परिसर और आसपास के क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था पहले से अधिक सख्त कर दी गई है।

    जानकारी के अनुसार बैठक दोपहर बाद आयोजित होगी। सुरक्षा कारणों को ध्यान में रखते हुए इस बार बैठक का स्थान बदला गया है और इसे राम जन्मभूमि परिसर स्थित गेस्ट हाउस में आयोजित किया जाएगा। बैठक की अध्यक्षता ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास करेंगे। ट्रस्ट के अधिकांश सदस्य प्रत्यक्ष रूप से मौजूद रहेंगे, जबकि कुछ सदस्य ऑनलाइन माध्यम से बैठक में शामिल होंगे।

    बैठक के एजेंडे में कई महत्वपूर्ण विषय शामिल किए गए हैं। इनमें ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा के इस्तीफों से जुड़े मामलों पर चर्चा प्रमुख मानी जा रही है। इसके अलावा मंदिर के दानपात्र से कथित चढ़ावे की चोरी के मामले में गठित विशेष जांच दल की प्रारंभिक रिपोर्ट पर भी विचार किया जाएगा। ट्रस्ट इस रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई और प्रशासनिक सुधारों से जुड़े निर्णय ले सकता है।

    बैठक में मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने के उपायों पर भी चर्चा होगी। हाल के वर्षों में राम मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ी है, जिसके चलते भीड़ प्रबंधन, दर्शन व्यवस्था और सुरक्षा तंत्र को और प्रभावी बनाने की आवश्यकता महसूस की जा रही है। ट्रस्ट भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए नई व्यवस्थाओं और संसाधनों पर भी विचार करेगा।

    इसके अलावा वित्तीय वर्ष 2025-26 के आय-व्यय, लेखा-जोखा और विभिन्न विकास कार्यों की प्रगति की समीक्षा भी बैठक का हिस्सा होगी। ट्रस्ट प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ाने, वित्तीय प्रबंधन को और मजबूत बनाने तथा मंदिर संचालन से जुड़े विभिन्न प्रस्तावों को मंजूरी दे सकता है। इन फैसलों का असर आने वाले समय में मंदिर की व्यवस्थाओं और ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर दिखाई दे सकता है।

    बैठक के मद्देनजर अयोध्या में सुरक्षा एजेंसियों ने व्यापक इंतजाम किए हैं। राम जन्मभूमि परिसर के आसपास अतिरिक्त पुलिस बल और सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की गई है। सभी प्रवेश मार्गों पर सघन जांच अभियान चलाया जा रहा है, जबकि संवेदनशील स्थानों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। कई स्थानों पर बैरिकेडिंग कर सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाया गया है ताकि बैठक के दौरान किसी भी तरह की अव्यवस्था की संभावना न रहे।

    धार्मिक और प्रशासनिक दृष्टि से इस बैठक को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। माना जा रहा है कि इसमें लिए जाने वाले फैसले ट्रस्ट की कार्यप्रणाली, पारदर्शिता, सुरक्षा व्यवस्था और राम मंदिर के भविष्य के संचालन की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। बैठक समाप्त होने के बाद ट्रस्ट की ओर से लिए गए निर्णयों की आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक किए जाने की संभावना है।

  • राम मंदिर दान विवाद पर कांग्रेस का केंद्र और यूपी सरकार पर तीखा प्रहार, SIT रिपोर्ट सार्वजनिक करने समेत कई सवालों पर मांगा जवाब

    राम मंदिर दान विवाद पर कांग्रेस का केंद्र और यूपी सरकार पर तीखा प्रहार, SIT रिपोर्ट सार्वजनिक करने समेत कई सवालों पर मांगा जवाब

    नई दिल्ली । राम मंदिर में कथित दान चोरी के मामले को लेकर राजनीतिक माहौल एक बार फिर गर्म हो गया है। कांग्रेस ने इस मुद्दे पर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार और उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार को घेरते हुए मामले में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग की है। पार्टी का कहना है कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस प्रकरण में अब तक कई महत्वपूर्ण सवालों के जवाब सामने नहीं आए हैं। कांग्रेस ने विशेष जांच दल (SIT) की रिपोर्ट सार्वजनिक करने के साथ पूरे मामले की निष्पक्ष और व्यापक जांच कराने की मांग दोहराई है।

    कांग्रेस का कहना है कि यदि इस मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल का गठन किया गया था, तो उसकी रिपोर्ट अब तक सार्वजनिक क्यों नहीं की गई। पार्टी के अनुसार, जब मामला देशभर के श्रद्धालुओं के विश्वास और दान से जुड़ा है, तब जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक करने में किसी प्रकार की गोपनीयता नहीं बरती जानी चाहिए। कांग्रेस का दावा है कि पारदर्शिता बनाए रखने के लिए जांच के निष्कर्ष देश के सामने लाए जाने आवश्यक हैं।

    पार्टी ने आरोप लगाया कि पिछले कुछ समय के दौरान राम मंदिर परिसर में चोरी की कई घटनाएं सामने आई हैं। कांग्रेस का कहना है कि यदि हाल के दिनों में बड़ी संख्या में चोरी के मामले सामने आए हैं, तो यह जानना भी जरूरी है कि पिछले वर्षों में कुल कितनी घटनाएं हुईं, कितना सामान गायब हुआ और दान में प्राप्त संपत्तियों की सुरक्षा के लिए क्या व्यवस्था की गई थी। पार्टी ने मांग की कि पूरे रिकॉर्ड का स्वतंत्र ऑडिट कराया जाए ताकि किसी भी तरह की आशंका समाप्त हो सके।

    जांच प्रक्रिया को लेकर भी कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं। पार्टी का आरोप है कि कार्रवाई केवल सीमित स्तर तक की गई है, जबकि यदि किसी बड़े स्तर पर लापरवाही या अनियमितता हुई है तो उसकी भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। कांग्रेस का कहना है कि जांच का दायरा व्यापक होना चाहिए और किसी भी जिम्मेदार व्यक्ति को केवल पद या प्रभाव के आधार पर जांच से बाहर नहीं रखा जाना चाहिए।

    सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी कांग्रेस ने सरकार को घेरा है। पार्टी का कहना है कि जब मंदिर परिसर की सुरक्षा के लिए विभिन्न एजेंसियां और सुरक्षा कर्मी तैनात हैं, तब लगातार चोरी की घटनाओं के आरोप गंभीर चिंता का विषय हैं। कांग्रेस ने निजी सुरक्षा व्यवस्था की भूमिका और उसकी जवाबदेही तय करने की भी मांग की है। पार्टी का कहना है कि यदि सुरक्षा व्यवस्था में कहीं चूक हुई है तो उसकी स्पष्ट जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।

    कांग्रेस ने यह भी मांग की है कि दान में प्राप्त आभूषणों, नकदी और अन्य मूल्यवान वस्तुओं का पूरा विवरण सार्वजनिक किया जाए। पार्टी का कहना है कि श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित प्रत्येक वस्तु का व्यवस्थित रिकॉर्ड उपलब्ध होना चाहिए ताकि किसी प्रकार का संदेह उत्पन्न न हो। इसके साथ ही पूरे चढ़ावे का स्वतंत्र वित्तीय ऑडिट कराने की मांग भी दोहराई गई है।

    पार्टी ने राज्य सरकार से SIT रिपोर्ट सार्वजनिक करने, पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और आवश्यक होने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। कांग्रेस का यह भी कहना है कि यदि सुरक्षा व्यवस्था या प्रशासनिक स्तर पर किसी प्रकार की लापरवाही हुई है तो उसकी जवाबदेही तय की जानी चाहिए। पार्टी ने आरोप लगाया कि सरकार अब तक इस पूरे विवाद पर स्पष्ट स्थिति रखने से बच रही है।

    राम मंदिर को करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र बताते हुए कांग्रेस ने कहा कि इस तरह के किसी भी विवाद का समाधान केवल पारदर्शी जांच, जवाबदेही और तथ्यों को सार्वजनिक करने से ही संभव है। पार्टी का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच होने और सभी संबंधित तथ्यों के सामने आने से ही श्रद्धालुओं का विश्वास और संस्थागत पारदर्शिता मजबूत हो सकेगी।