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  • यूपी में योगी सरकार का बड़ा संदेश: बिना सिफारिश मिल रही नौकरी, 9 लाख से ज्यादा नियुक्तियों का दावा

    यूपी में योगी सरकार का बड़ा संदेश: बिना सिफारिश मिल रही नौकरी, 9 लाख से ज्यादा नियुक्तियों का दावा



    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक बार फिर राज्य की भर्ती प्रक्रिया और युवाओं को मिलने वाले रोजगार को लेकर सरकार की उपलब्धियों को रेखांकित किया। लखनऊ स्थित लोकभवन में आयोजित एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र वितरित किए, जिनमें 202 प्रोफेसर, रीडर, चिकित्सा अधिकारी, स्टाफ नर्स (आयुष विभाग), 272 अनुदेशक (व्यावसायिक शिक्षा विभाग) और दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के 7 कर्मचारी शामिल रहे। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में चयनित अभ्यर्थियों की मौजूदगी रही।

    मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि अब उत्तर प्रदेश में नौकरी पाने के लिए किसी सिफारिश या अनैतिक दबाव की जरूरत नहीं पड़ती है और पूरी भर्ती प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से डिजिटल प्रणाली के माध्यम से की जा रही है। उन्होंने कहा कि पहले की सरकारों में भर्ती प्रक्रिया में भ्रष्टाचार और पक्षपात के आरोप लगते थे, लेकिन वर्तमान सरकार ने चयन आयोगों को जवाबदेही के साथ काम करने की व्यवस्था दी है, जिससे निष्पक्ष भर्ती सुनिश्चित हो रही है।

    सीएम योगी ने कहा कि पिछले नौ वर्षों में राज्य में 9 लाख से अधिक युवाओं को पारदर्शी तरीके से सरकारी नौकरी दी गई है। उन्होंने बताया कि हाल के दिनों में लगातार नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं और यह चौथा बड़ा कार्यक्रम है, जिसमें हजारों युवाओं को अवसर मिला है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य है कि योग्य और प्रतिभाशाली युवाओं को बिना किसी भेदभाव के अवसर मिले, जिससे प्रदेश की विकास गति और तेज हो।

    अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि उत्तर प्रदेश अब पिछड़े राज्य की छवि से बाहर निकलकर एक मजबूत अर्थव्यवस्था और निवेश का केंद्र बन चुका है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में बड़े पैमाने पर निवेश आ रहा है, उद्योगों की संख्या बढ़ी है और प्रति व्यक्ति आय में भी वृद्धि हुई है। सीएम योगी ने कहा कि अब यूपी को कोई बीमारू राज्य नहीं कहता, बल्कि यह देश की अर्थव्यवस्था का इंजन बन रहा है।

    कौशल विकास एवं उद्यमशीलता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल ने भी इस मौके पर सरकार की नीतियों की सराहना की। उन्होंने कहा कि पहले की सरकारों में भर्ती प्रक्रिया पर सवाल उठते थे, लेकिन अब पूरी व्यवस्था पारदर्शी हो चुकी है। उन्होंने बताया कि पिछले नौ वर्षों में 14 लाख से अधिक युवाओं को प्रशिक्षण दिया गया और 7.5 लाख से अधिक को रोजगार उपलब्ध कराया गया है। उन्होंने स्किल डेवलपमेंट योजनाओं और नए तकनीकी ट्रेड्स के विस्तार का भी उल्लेख किया।

    कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चयनित अभ्यर्थियों से ईमानदारी और समर्पण के साथ कार्य करने की अपील की और कहा कि उनकी मेहनत ही प्रदेश के विकास की असली ताकत बनेगी।

  • गौतम अदाणी ने विकास रणनीति में स्थानीय लोगों को दी प्राथमिकता..

    गौतम अदाणी ने विकास रणनीति में स्थानीय लोगों को दी प्राथमिकता..

    नई दिल्ली। अदाणी समूह ने अपनी विकास रणनीति को लेकर एक नया दृष्टिकोण सामने रखा है, जिसमें स्थानीय रोजगार सृजन, कर्मचारियों के सम्मानजनक जीवन और कौशल विकास को केंद्रीय भूमिका दी गई है। समूह के चेयरमैन ने यह स्पष्ट किया है कि संगठन की प्रगति अब केवल आर्थिक विस्तार या बड़ी परियोजनाओं के निर्माण तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसका मूल्यांकन इस आधार पर किया जाएगा कि वह कितने लोगों के जीवन को बेहतर बना पा रहा है।

    कर्मचारियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति जो किसी भी परियोजना से जुड़ा है, वह केवल एक श्रमिक नहीं बल्कि राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया का सक्रिय हिस्सा है। उनके अनुसार जब कोई परियोजना पूरी होती है तो वह सिर्फ एक संरचना नहीं होती, बल्कि देश के भविष्य को आकार देने वाली एक महत्वपूर्ण उपलब्धि होती है।

    उन्होंने यह भी बताया कि समूह की प्राथमिकता अब स्थानीय भर्ती को बढ़ावा देना है। किसी भी परियोजना में सबसे पहले आसपास के क्षेत्रों के लोगों को अवसर दिया जाएगा, उसके बाद राज्य स्तर पर और आवश्यकता पड़ने पर अन्य क्षेत्रों के उम्मीदवारों पर विचार किया जाएगा। इस नीति का उद्देश्य स्थानीय समुदायों को सीधे विकास प्रक्रिया से जोड़ना और उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है।

    कर्मचारियों के कल्याण को लेकर भी समूह ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। दूरस्थ और बड़े प्रोजेक्ट स्थलों पर कार्यरत लोगों के लिए बेहतर आवास और सुविधाओं की व्यवस्था की जा रही है ताकि वे गरिमापूर्ण और सुरक्षित जीवन जी सकें। इसके साथ ही पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने के लिए बड़े स्तर पर व्यवस्था विकसित की जा रही है, जिससे काम करने वालों के जीवन स्तर में सुधार हो सके।

    उन्होंने यह भी कहा कि प्रत्येक कर्मचारी को सम्मानजनक जीवन और बेहतर कार्य परिस्थितियां मिलना केवल सुविधा नहीं बल्कि एक मूलभूत आवश्यकता है। इसी सोच के साथ संगठन अपने सभी प्रोजेक्ट्स में मानव केंद्रित विकास को प्राथमिकता दे रहा है।

    संगठनात्मक ढांचे में भी बदलाव किए जा रहे हैं ताकि निर्णय लेने की प्रक्रिया अधिक तेज और प्रभावी हो सके। नई प्रणाली के तहत साइट स्तर पर निर्णय लेने की क्षमता बढ़ाई जा रही है, जिससे परियोजनाओं के क्रियान्वयन में देरी कम होगी और गति में सुधार आएगा। यह कदम बड़े पैमाने पर चल रही परियोजनाओं को समय पर पूरा करने में सहायक होगा।

    इसके अलावा साझेदारी के मॉडल में भी बदलाव किया गया है, जिसमें सीमित लेकिन अधिक सक्षम और विश्वसनीय भागीदारों के साथ काम करने की रणनीति अपनाई जा रही है। इसका उद्देश्य बेहतर समन्वय, गुणवत्ता नियंत्रण और तेज निष्पादन सुनिश्चित करना है। यह मॉडल दीर्घकालिक सहयोग और स्थिर विकास को बढ़ावा देने पर केंद्रित है।

    कौशल विकास को लेकर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। कर्मचारियों के लिए प्रशिक्षण और उन्नति के अवसर बढ़ाए जा रहे हैं ताकि वे अपने करियर में आगे बढ़ सकें और अधिक जिम्मेदार भूमिकाएं निभा सकें। इस पहल का उद्देश्य केवल रोजगार देना नहीं, बल्कि लोगों को सक्षम और आत्मनिर्भर बनाना है।

    बड़ी परियोजनाओं को राष्ट्रीय विकास से जोड़ते हुए यह भी कहा गया कि ये केवल निर्माण कार्य नहीं हैं, बल्कि देश की आर्थिक और बुनियादी ढांचे की मजबूती का आधार हैं। इनके माध्यम से देश की ऊर्जा, परिवहन और लॉजिस्टिक्स क्षमता को नया आकार दिया जा रहा है।

  • जूट बैग, सिलाई और हस्तशिल्प से महिलाओं का आत्मनिर्भर सफर, प्रधानमंत्री योजना कारगर

    जूट बैग, सिलाई और हस्तशिल्प से महिलाओं का आत्मनिर्भर सफर, प्रधानमंत्री योजना कारगर

    उत्तराखंड के पर्वतीय जनपद चमोली में महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक सकारात्मक पहल देखने को मिल रही है। भारत सरकार की ‘प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना’ के तहत महिलाओं को रोजगारपरक प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिससे वे आत्मनिर्भर बन रही हैं और अपना व्यवसाय चला रही हैं। सरकार का उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक रूप से सक्षम बनाना और उन्हें समाज में आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ाना है।

    चमोली में इस योजना के माध्यम से अब तक 200 से अधिक महिलाओं को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं को जूट बैग निर्माण, सिलाई-कढ़ाई, हस्तशिल्प और अन्य उपयोगी उत्पाद बनाने की विधिवत जानकारी दी जा रही है। प्रशिक्षण पूर्ण होने के बाद महिलाएं स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से या व्यक्तिगत स्तर पर अपने व्यवसाय शुरू कर रही हैं। इससे न सिर्फ उनकी आय में वृद्धि हुई है, बल्कि उनके आत्मविश्वास में भी इजाफा हुआ है।

    महिलाओं का कहना है कि इस योजना ने उन्हें अपने पैरों पर खड़े होने का अवसर दिया है। अब वे अपने परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी में सक्रिय योगदान दे रही हैं। प्रशिक्षण से महिलाएं छोटे-छोटे व्यवसाय शुरू कर रही हैं और नियमित आमदनी प्राप्त कर रही हैं। इसके साथ ही उन्हें उत्पाद की गुणवत्ता, पैकेजिंग और विपणन से संबंधित जानकारी भी दी जा रही है, ताकि उनका उत्पाद व्यापक बाजार में पहुंच सके।

    लाभार्थी सीमा नेगी ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में बताया कि उन्होंने प्रशिक्षण के दौरान मुफ्त सिलाई सीखी और अब सिलाई मशीन से जूट बैग बना रही हैं। इसके अलावा वे महिलाओं के सूट और ब्लाउज सिलने का काम भी कर रही हैं। उन्होंने कहा कि ग्रामीण इलाकों में सरकार की यह पहल बहुत महत्वपूर्ण है। प्रशिक्षण लेने के बाद महिलाएं आत्मनिर्भर हो रही हैं और किसी पर निर्भर होने की जरूरत नहीं है।

    चमोली में इस योजना के तहत प्रशिक्षण प्राप्त महिलाओं ने अपनी मेहनत और लगन से छोटे व्यवसाय स्थापित कर लिए हैं। जूट बैग और हस्तशिल्प उत्पादों की बाजार में अच्छी मांग है, जिससे उन्हें नियमित आय मिल रही है। इससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है और परिवार में उनका आत्मविश्वास बढ़ा है। महिलाएं अब अपने व्यवसाय को विकसित कर रही हैं और समाज में सकारात्मक बदलाव ला रही हैं।

    प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना का यह कदम महिलाओं के जीवन में नई उम्मीद और उत्साह लेकर आया है। इससे न केवल उनकी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हुई है, बल्कि समाज में उनके स्थान और सम्मान में भी वृद्धि हुई है। प्रशिक्षण से प्राप्त कौशल ने महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने का मार्ग दिखाया है और उन्होंने इसे पूरी लगन से अपनाया है।

    चमोली में महिलाओं की इस पहल से यह स्पष्ट होता है कि प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना ग्रामीण और पर्वतीय क्षेत्रों में महिलाओं के सशक्तिकरण का एक प्रभावी माध्यम बन रही है। यह योजना न सिर्फ रोजगार सृजन कर रही है, बल्कि ग्रामीण समाज में महिलाओं की भूमिका को मजबूत कर रही है और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।

  • भारत के कौशल विकास को नई उड़ान: पुणे में पीएम-सेतु उद्योग परामर्श आयोजित

    भारत के कौशल विकास को नई उड़ान: पुणे में पीएम-सेतु उद्योग परामर्श आयोजित


    नई दिल्ली । भारत के कौशल विकास और उद्यमिता के भविष्य को आकार देने के लिए पुणे में 19 जनवरी 2026 को पीएम-सेतु उद्योग परामर्श का आयोजन किया गया। यह परामर्श कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय  एमएसडीई महाराष्ट्र सरकार और यशवंतराव चव्हाण विकास प्रशासन अकादमी यशादा के सहयोग से आयोजित किया गया। पीएम-सेतुप्रधानमंत्री की दृष्टि के अनुरूप एक महत्वाकांक्षी योजना हैजिसका उद्देश्य देश में भविष्य के लिए तैयारवैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी कार्यबल का निर्माण करना है। कार्यशाला में निर्माणवस्त्रऑटोमोटिवएफएमसीजीइलेक्ट्रॉनिक्सतेल और गैसनवीकरणीय ऊर्जा समेत 50 से अधिक प्रमुख कंपनियों ने भाग लिया। मंत्रालय की सचिव देबाश्री मुखर्जी और महाराष्ट्र सरकार की अपर मुख्य सचिव मनीषा वर्मा ने परामर्श की अध्यक्षता की और क्षेत्र के आईटीआई और उद्योगों का दौरा भी किया।

    पीएम-सेतु योजना का केंद्र बिंदु हब-एंड-स्पोक दृष्टिकोण है। इसके तहत 1,000 सरकारी आईटीआई को आधुनिकीकरण के तहत विकसित किया जाएगा। 200 हब आईटीआई में उन्नत बुनियादी ढांचा और आधुनिक प्रशिक्षण सुविधाओं का विकास किया जाएगाजबकि 800 स्पोक आईटीआई स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षण का विस्तार करेंगे। योजना के तहत आईटीआई का स्वामित्व सरकार का होगालेकिन उद्योग इसका प्रबंधन करेंगे। इस तरह मांग-आधारित प्रशिक्षणशिक्षुता और उद्योगों के साथ क्लस्टर-आधारित साझेदारी को बढ़ावा मिलेगा। अधिकारियों ने बताया कि पीएम-सेतु उद्योग के लिए कौशल विकास प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी का अवसर प्रदान करता है। उद्योग क्लस्टर मॉडल के जरिए वे प्रशिक्षणपाठ्यक्रम सुधारसंकाय प्रशिक्षणशिक्षुता और नियोजन प्रक्रियाओं में योगदान देंगे। इससे भर्ती लागत कम होगीउत्पादकता बढ़ेगी और उद्योग मानकों के अनुरूप कुशल प्रतिभाएं तैयार होंगी।

    योजना के प्रारंभिक कार्य पहले ही 29 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में शुरू हो चुके हैं। 25 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों ने अपनी राज्य संचालन समितियों को अधिसूचित किया है। परामर्श के दौरान व्यावसायिक प्रशिक्षण और रोजगार क्षमता को सुदृढ़ करने हेतु औपचारिक समझौता ज्ञापनों का आदान-प्रदान भी हुआ। इनमें महाराष्ट्र के व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण निदेशालय और फिएट इंडियाश्नाइडर इलेक्ट्रिक इंडिया तथा अनुदीप फाउंडेशन के बीच साझेदारियां शामिल हैं। पीएम-सेतु योजना भारत में कौशल विकास की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी। यह योजना उच्च गुणवत्ता वाले व्यावसायिक संस्थानों का निर्माण करेगीपाठ्यक्रम को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप ढालेगी और उभरते क्षेत्रों में मजबूत प्रतिभा आपूर्ति श्रृंखला तैयार करेगी। उद्योग और सरकार के सहयोग से युवाओं को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने का यह प्रयास भारत के कौशल विकास की यात्रा को नई दिशा देगा।