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  • CBSE का बड़ा कदम, कक्षा 8 से 12 तक के विद्यार्थियों के लिए AI, Python और Cyber Security समेत 19 मुफ्त ऑनलाइन कोर्स शुरू

    CBSE का बड़ा कदम, कक्षा 8 से 12 तक के विद्यार्थियों के लिए AI, Python और Cyber Security समेत 19 मुफ्त ऑनलाइन कोर्स शुरू

    नई दिल्ली । केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए कक्षा 8 से 12 तक के छात्रों के लिए 19 निःशुल्क ऑनलाइन पाठ्यक्रम शुरू किए हैं। इन पाठ्यक्रमों का उद्देश्य स्कूली स्तर पर ही विद्यार्थियों को डिजिटल तकनीकों, प्रोग्रामिंग और उभरते तकनीकी क्षेत्रों की शुरुआती जानकारी उपलब्ध कराना है, ताकि वे भविष्य की शिक्षा और रोजगार की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप स्वयं को बेहतर ढंग से तैयार कर सकें।

    इन सभी ऑनलाइन पाठ्यक्रमों को एनआईईएलआईटी डिजिटल यूनिवर्सिटी (NDU) के ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराया गया है। छात्र अपनी रुचि और सुविधा के अनुसार इनमें पंजीकरण कर सकते हैं तथा अपनी गति से पढ़ाई पूरी कर सकते हैं। बोर्ड का मानना है कि डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने वाली यह पहल विद्यार्थियों में तकनीकी समझ, नवाचार की सोच और व्यावहारिक कौशल विकसित करने में मदद करेगी।

    इन पाठ्यक्रमों की अवधि विषय के अनुसार अलग-अलग निर्धारित की गई है। कुछ कोर्स लगभग डेढ़ घंटे में पूरे किए जा सकते हैं, जबकि कई पाठ्यक्रमों की अवधि 20 घंटे या उससे अधिक है। इस लचीली व्यवस्था के कारण विद्यार्थी अपनी नियमित स्कूली पढ़ाई के साथ-साथ अतिरिक्त तकनीकी ज्ञान भी आसानी से प्राप्त कर सकेंगे।

    पाठ्यक्रमों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, जेनरेटिव एआई, पाइथन प्रोग्रामिंग, डेटा साइंस, इंटरनेट ऑफ थिंग्स, क्लाउड कंप्यूटिंग, साइबर सिक्योरिटी, वेब डिजाइनिंग एवं पब्लिशिंग, कंप्यूटर कॉन्सेप्ट्स, सेमीकंडक्टर डिजाइन, वीएलएसआई डिजाइन फ्लो, चिप डिजाइन, थ्री-डी प्रिंटिंग, एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग तथा AWS DevSecOps जैसे आधुनिक और रोजगारोन्मुख विषय शामिल किए गए हैं। इन विषयों के माध्यम से विद्यार्थियों को नई तकनीकों की बुनियादी समझ विकसित करने का अवसर मिलेगा।

    सीबीएसई का मानना है कि आने वाले वर्षों में डिजिटल और तकनीकी कौशल का महत्व लगातार बढ़ेगा। इसी उद्देश्य से विद्यार्थियों को प्रारंभिक स्तर पर ही नई तकनीकों से परिचित कराया जा रहा है। इससे उनमें प्रोग्रामिंग क्षमता, तार्किक सोच, समस्या समाधान की योग्यता और तकनीकी नवाचार के प्रति रुचि विकसित होगी। यह पहल केवल परीक्षा आधारित शिक्षा तक सीमित न रहकर विद्यार्थियों को व्यावहारिक ज्ञान भी प्रदान करेगी।

    इन पाठ्यक्रमों का लाभ उठाने के इच्छुक विद्यार्थी एनआईईएलआईटी डिजिटल यूनिवर्सिटी के ऑनलाइन पोर्टल पर जाकर पंजीकरण कर सकते हैं। पंजीकरण के बाद वे अपनी पसंद का कोर्स चुनकर तुरंत ऑनलाइन अध्ययन शुरू कर सकते हैं। इस प्रक्रिया को सरल और सुविधाजनक बनाया गया है ताकि अधिक से अधिक विद्यार्थी इसका लाभ उठा सकें।

    शिक्षा क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि स्कूल स्तर पर तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने से विद्यार्थियों का आत्मविश्वास बढ़ेगा और वे भविष्य की प्रतिस्पर्धी दुनिया के लिए बेहतर तरीके से तैयार हो सकेंगे। डिजिटल अर्थव्यवस्था के विस्तार के दौर में ऐसी पहलें विद्यार्थियों को नई संभावनाओं से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। आधुनिक तकनीकों की प्रारंभिक समझ उन्हें उच्च शिक्षा, नवाचार और करियर के विभिन्न क्षेत्रों में आगे बढ़ने के लिए मजबूत आधार प्रदान करेगी।

  • नए एफटीए से भारत को मिलेगी नई आर्थिक रफ्तार, मैन्युफैक्चरिंग, इनोवेशन और युवाओं के लिए खुलेंगे वैश्विक अवसर

    नए एफटीए से भारत को मिलेगी नई आर्थिक रफ्तार, मैन्युफैक्चरिंग, इनोवेशन और युवाओं के लिए खुलेंगे वैश्विक अवसर

    नई दिल्ली । भारत के नए मुक्त व्यापार समझौते देश की अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने के साथ-साथ मैन्युफैक्चरिंग, नवाचार और रोजगार के नए अवसर पैदा करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। सरकार का मानना है कि वैश्विक बाजारों तक बढ़ती पहुंच भारतीय उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को मजबूत करेगी और युवाओं के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर करियर के नए रास्ते खोलेगी। इसी उद्देश्य के तहत छात्रों को तकनीकी दक्षता, व्यावहारिक अनुभव और आधुनिक शिक्षा से जोड़ने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

    एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री ने कहा कि भारत तेजी से बदलती वैश्विक अर्थव्यवस्था में अपनी मजबूत पहचान बना रहा है। नए मुक्त व्यापार समझौतों के माध्यम से देश के उद्योगों को नए बाजार मिल रहे हैं, जिससे उत्पादन क्षमता बढ़ने के साथ-साथ इनोवेशन को भी प्रोत्साहन मिल रहा है। उन्होंने कहा कि यह बदलाव केवल उद्योगों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आने वाले वर्षों में युवाओं के लिए रोजगार, उद्यमिता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के अवसर भी बढ़ाएगा।

    उन्होंने छात्रों से पारंपरिक शिक्षा के साथ-साथ व्यावहारिक कौशल विकसित करने का आग्रह किया। उनका कहना था कि केवल सैद्धांतिक ज्ञान आज के प्रतिस्पर्धी दौर में पर्याप्त नहीं है। उद्योगों की बदलती जरूरतों के अनुरूप तकनीकी दक्षता, समस्या समाधान की क्षमता और व्यावहारिक अनुभव ही भविष्य की सफलता का आधार बनेंगे।

    डिजिटल शिक्षा की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि देश में इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की बड़ी संख्या उच्च शिक्षा को अधिक सुलभ और समावेशी बनाने का अवसर प्रदान करती है। आधुनिक तकनीक के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा अब देश के दूरदराज क्षेत्रों तक भी पहुंचाई जा सकती है, जिससे भौगोलिक और आर्थिक असमानताओं को कम करने में मदद मिलेगी।

    उन्होंने ऑनलाइन द्विभाषी प्रबंधन शिक्षा कार्यक्रम को शिक्षा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल बताया। उनके अनुसार, इस प्रकार के कार्यक्रम ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के विद्यार्थियों के बीच मौजूद अवसरों की खाई को कम करेंगे। अब छोटे शहरों और दूरस्थ इलाकों के छात्र भी घर बैठे उच्च गुणवत्ता वाली प्रबंधन शिक्षा प्राप्त कर सकेंगे और राष्ट्रीय स्तर के शैक्षणिक संसाधनों का लाभ उठा पाएंगे।

    उन्होंने यह भी कहा कि हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में उपलब्ध पाठ्यक्रम देश के विभिन्न वर्गों के विद्यार्थियों को समान अवसर प्रदान करेंगे। इससे भाषा संबंधी बाधाएं कम होंगी और अधिक संख्या में छात्र उच्च शिक्षा से जुड़ सकेंगे। डिजिटल माध्यमों के जरिए पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों के लिए पारदर्शी और विश्वसनीय मूल्यांकन प्रणाली सुनिश्चित करने हेतु परीक्षाएं ऑफलाइन आयोजित किए जाने की व्यवस्था भी प्रभावी मानी जा रही है।

    कार्यक्रम के दौरान हाइब्रिड शिक्षा मॉडल को और मजबूत बनाने की आवश्यकता पर भी बल दिया गया। उनका कहना था कि ऑनलाइन अध्ययन के साथ समय-समय पर शिक्षकों और विद्यार्थियों के बीच प्रत्यक्ष संवाद भी आवश्यक है। इससे छात्रों को टीमवर्क, नेतृत्व क्षमता, विचारों के आदान-प्रदान और नेटवर्किंग जैसे महत्वपूर्ण प्रबंधन कौशल विकसित करने का अवसर मिलेगा।

    सरकार का मानना है कि मुक्त व्यापार समझौतों, डिजिटल शिक्षा और कौशल विकास की संयुक्त रणनीति भारत को वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में अधिक प्रतिस्पर्धी बनाएगी। उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार होने से देश की उत्पादन क्षमता, नवाचार और आर्थिक विकास को भी दीर्घकालिक मजबूती मिलने की उम्मीद है।