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  • नींद में बोलना सिर्फ सपना नहीं हो सकता बार बार बड़बड़ाने की आदत के पीछे छिपी हो सकती है ये वजह

    नींद में बोलना सिर्फ सपना नहीं हो सकता बार बार बड़बड़ाने की आदत के पीछे छिपी हो सकती है ये वजह


    नई दिल्ली। रात में सोते समय अचानक बोलना या बड़बड़ाना कई लोगों के साथ होता है। अक्सर परिवार के दूसरे सदस्य इस आदत को नोटिस करते हैं जबकि बोलने वाले व्यक्ति को सुबह उठने के बाद इसकी जानकारी भी नहीं होती। आमतौर पर नींद में बोलना किसी गंभीर बीमारी का संकेत नहीं होता और कई मामलों में यह अपने आप होने वाली सामान्य नींद संबंधी प्रक्रिया है। फिर भी अगर यह समस्या लगातार होने लगे या इसके साथ नींद में अन्य असामान्य गतिविधियां दिखाई दें तो इसके पीछे छिपे कारण को समझना जरूरी हो जाता है।

    नींद में बोलने या बड़बड़ाने की स्थिति को सोमनीलोक्वी कहा जाता है। इसे पैरासोमनिया यानी नींद के दौरान होने वाले असामान्य व्यवहारों की श्रेणी में रखा जाता है। इस दौरान व्यक्ति नींद में शब्द बोल सकता है या कभी कभी पूरे वाक्य भी कह सकता है। कई लोगों को सुबह उठने पर यह याद नहीं रहता कि उन्होंने रात में कुछ कहा था। कुछ स्थितियों में नींद में बोलने के साथ हाथ पैर हिलाना या अचानक करवट बदलना जैसी गतिविधियां भी देखी जा सकती हैं।

    नींद में बड़बड़ाने के पीछे कई कारण हो सकते हैं। सपने इसका एक सामान्य कारण माने जाते हैं। जब व्यक्ति सपने देख रहा होता है तो दिमाग अलग अलग भावनाओं और घटनाओं को संसाधित करता रहता है। इसी दौरान कभी कभी नींद में आवाज निकल सकती है। दिनभर की घटनाओं का मानसिक दबाव भी नींद के दौरान व्यक्ति के व्यवहार को प्रभावित कर सकता है। खासकर तनाव और चिंता की स्थिति में नींद प्रभावित हो सकती है और नींद में बोलने की संभावना बढ़ सकती है।

    बुरे सपने भी नींद में बोलने का एक कारण हो सकते हैं। डर या तनाव से जुड़े सपने के दौरान कुछ लोग नींद में बोलते हैं। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि हर व्यक्ति जो नींद में बोलता है वह किसी मानसिक या शारीरिक बीमारी से परेशान है। कई स्वस्थ लोगों में भी कभी कभी ऐसा देखा जा सकता है।

    नींद की कमी और अनियमित सोने का समय भी इस समस्या को बढ़ा सकता है। अगर व्यक्ति लगातार देर रात तक जागता है या पर्याप्त नींद नहीं लेता है तो नींद का सामान्य चक्र प्रभावित हो सकता है। इसी वजह से सोने और जागने का समय नियमित रखना जरूरी है। इसके साथ ही सोने से पहले चाय कॉफी जैसे कैफीन वाले पेय पदार्थों का अधिक सेवन करने से बचना चाहिए क्योंकि ये कुछ लोगों में नींद को प्रभावित कर सकते हैं। शराब का सेवन भी नींद की गुणवत्ता पर असर डाल सकता है।

    बेहतर नींद के लिए सोने से पहले मोबाइल और दूसरे स्क्रीन टाइम को कम करना भी मददगार हो सकता है। कमरे का वातावरण शांत और आरामदायक रखना चाहिए। किताब पढ़ना हल्का संगीत सुनना या कुछ देर शांत होकर बैठना दिमाग को आराम देने वाली दिनचर्या का हिस्सा बनाया जा सकता है।

    अगर नींद में बोलना कभी कभी होता है और इससे व्यक्ति की नींद या रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित नहीं हो रही है तो आमतौर पर घबराने की जरूरत नहीं होती। लेकिन अगर यह समस्या बहुत अधिक बढ़ जाए या इसके साथ नींद में हिंसक हरकतें तेज चीखना चलना बार बार बुरे सपने आना या दिन में अत्यधिक नींद जैसी परेशानी हो तो डॉक्टर या स्लीप विशेषज्ञ से सलाह लेना उचित हो सकता है। सही कारण की पहचान के बाद ही यह तय किया जा सकता है कि समस्या सामान्य है या किसी अन्य स्लीप डिसऑर्डर से जुड़ी हुई है।

  • खर्राटे लेने वालों के लिए जरूरी खबर सांस रुकने से लेकर हाई बीपी तक इन संकेतों को बिल्कुल न करें नजरअंदाज

    खर्राटे लेने वालों के लिए जरूरी खबर सांस रुकने से लेकर हाई बीपी तक इन संकेतों को बिल्कुल न करें नजरअंदाज

    नई दिल्ली । खर्राटे लेना आम समस्या है और बहुत से लोगों को सोते समय इसकी परेशानी होती है लेकिन हर बार खर्राटों को सामान्य मानकर नजरअंदाज करना सही नहीं है। कई बार खर्राटे केवल सोने के दौरान गले और मुंह के आसपास मौजूद ऊतकों में कंपन के कारण आते हैं लेकिन कुछ परिस्थितियों में यही खर्राटे शरीर में चल रही गंभीर समस्या का संकेत भी हो सकते हैं। खासतौर पर अगर खर्राटों के साथ सोते समय सांस रुकने लगे हांफते हुए नींद खुले रात में बार बार आंख खुले या सुबह उठने के बाद भी अत्यधिक थकान महसूस हो तो इसे गंभीरता से लेना चाहिए।

    दरअसल जब व्यक्ति सोता है तो गले जीभ और मुंह के आसपास के कुछ ऊतक ढीले पड़ जाते हैं। इससे सांस लेने का रास्ता कुछ संकरा हो सकता है। जब हवा इस संकरे रास्ते से गुजरती है तो आसपास के ऊतकों में कंपन पैदा होता है और इसी कंपन की आवाज खर्राटे के रूप में सुनाई देती है। अधिक वजन धूम्रपान शराब का सेवन और सोने की कुछ स्थितियां खर्राटों की समस्या को बढ़ा सकती हैं। हालांकि लगातार और बहुत तेज खर्राटे हमेशा सामान्य कारणों से ही हों यह जरूरी नहीं है।

    सबसे बड़ा खतरा तब माना जाता है जब सोते समय कुछ सेकंड के लिए सांस रुकती है और इसके बाद व्यक्ति अचानक जोर से सांस लेने लगता है। परिवार के किसी सदस्य को अगर ऐसा बार बार दिखाई देता है तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। यह स्लीप एपनिया का संकेत हो सकता है। इस स्थिति में नींद के दौरान सांस की ऊपरी नली बार बार संकरी या बंद हो सकती है जिससे शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा प्रभावित होती है और नींद बार बार बाधित होती रहती है। इसका असर यह होता है कि व्यक्ति पर्याप्त समय सोने के बावजूद सुबह उठकर तरोताजा महसूस नहीं करता।

    खर्राटों के साथ हाई ब्लड प्रेशर की समस्या भी है तो विशेष सावधानी जरूरी है। लंबे समय से तेज खर्राटे आने और ब्लड प्रेशर नियंत्रित न रहने की स्थिति में डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर होता है क्योंकि नींद में सांस रुकने की समस्या का संबंध हाई ब्लड प्रेशर और हृदय तथा रक्त वाहिकाओं से जुड़ी परेशानियों से हो सकता है। इसलिए केवल खर्राटे कम करने के उपाय करने के बजाय उनके पीछे छिपे कारण को समझना जरूरी है।

    अगर दिन के समय लगातार नींद आती है काम करते समय थकान महसूस होती है एकाग्रता प्रभावित होती है या रात में घुटन और हांफने के कारण बार बार नींद खुलती है तो जांच में देरी नहीं करनी चाहिए। समय रहते समस्या की पहचान होने पर उचित उपचार और जीवनशैली में बदलाव से राहत मिल सकती है।

    खर्राटों की समस्या में वजन को नियंत्रित रखना करवट लेकर सोना धूम्रपान से बचना और शराब का सेवन सीमित करना मददगार हो सकता है। लेकिन अगर खर्राटों के साथ सांस रुकने जैसे संकेत दिखाई दे रहे हैं तो घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लेना ज्यादा जरूरी है। शरीर रात में जिन संकेतों के जरिए अपनी परेशानी बता रहा हो उन्हें नजरअंदाज करने के बजाय समय रहते समझना ही बेहतर स्वास्थ्य की दिशा में पहला कदम है।