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  • संसद परिसर में NDA और विपक्ष आमने-सामने, जमकर हुई नारेबाजी, दोनों सदनों की कार्यवाही कल तक स्थगित

    संसद परिसर में NDA और विपक्ष आमने-सामने, जमकर हुई नारेबाजी, दोनों सदनों की कार्यवाही कल तक स्थगित


    नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र के चौथे दिन गुरुवार को संसद भवन परिसर के बाहर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव खुलकर सामने आया। एक ओर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव सहित इंडिया ब्लॉक के नेताओं ने केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया, तो दूसरी ओर एनडीए सांसद भी विरोध दर्ज कराने के लिए मैदान में उतर आए। दोनों पक्षों के बीच जमकर नारेबाजी हुई और माहौल काफी देर तक गर्म रहा।

    एनडीए सांसद 21 जुलाई को प्रधानमंत्री आवास के बाहर राहुल गांधी द्वारा दिए गए धरने का विरोध कर रहे थे, जबकि इंडिया ब्लॉक के सांसद NEET पेपर लीक मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे।

    प्रदर्शन के दौरान प्रियंका गांधी वाड्रा नारे लगाते हुए एनडीए सांसदों के काफी करीब पहुंच गईं। स्थिति को देखते हुए सुरक्षाकर्मियों ने तत्काल बीच में आकर उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया, जिससे किसी तरह की टकराव की स्थिति नहीं बनने पाई।

    संसद के भीतर भी दोनों सदनों में विपक्ष के हंगामे के कारण कार्यवाही सुचारु रूप से नहीं चल सकी। लगातार शोर-शराबे के चलते पहले लोकसभा की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक स्थगित की गई। दोपहर बाद सदन की बैठक शुरू होते ही फिर से हंगामा शुरू हो गया, जिसके बाद लोकसभा की कार्यवाही शुक्रवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।

    उधर, राज्यसभा की कार्यवाही भी पहले दोपहर 3 बजे तक रोकी गई थी। दोबारा बैठक शुरू होने पर विपक्षी सांसदों ने फिर विरोध प्रदर्शन किया, जिसके चलते सभापति ने राज्यसभा की कार्यवाही भी शुक्रवार, 24 जुलाई तक के लिए स्थगित कर दी।

  • ग्वालियर में भाजपा ने राहुल गांधी का पुतला फूंका, कांग्रेसियों ने किया विरोध प्रदर्शन

    ग्वालियर में भाजपा ने राहुल गांधी का पुतला फूंका, कांग्रेसियों ने किया विरोध प्रदर्शन


    ग्वालियर। दिल्ली में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट के दौरान कांग्रेस युवा इकाई द्वारा किए गए हंगामे के विरोध में शनिवार को भारतीय जनता युवा मोर्चा (भा.ज.यु.मो.) ने ग्वालियर में जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान भाजपा कार्यकर्ताओं ने राहुल गांधी का पुतला दहन किया। वहीं, कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन का विरोध करते हुए पार्टी कार्यालय के बाहर नारेबाजी की।

    नदी गेट से कांग्रेस कार्यालय तक रैली:
    भा.ज.यु.मो. ने संभाग स्तर पर प्रदर्शन का ऐलान किया था। रैली नदी गेट चौराहे से शिंदे की छावनी स्थित कांग्रेस कार्यालय तक निकाली गई। प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने बैरिकेडिंग की थी, लेकिन कुछ कार्यकर्ता बैरिकेड तोड़ने की कोशिश करते नजर आए। दूसरी ओर, कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भी कांग्रेस कार्यालय के बाहर झंडे लहराते हुए नारेबाजी की।

    दो घंटे तक तनावपूर्ण माहौल:
    करीब दो घंटे तक ग्वालियर में तनावपूर्ण स्थिति बनी रही। इसके बाद भा.ज.यु.मो. के जिला अध्यक्ष जयप्रकाश राजौरिया और युवा मोर्चा जिला अध्यक्ष प्रतीक तिवारी ने राहुल गांधी का पुतला दहन किया। वहीं कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भी प्रधानमंत्री का पुतला दहन करने की कोशिश की, लेकिन पुलिस बल के हस्तक्षेप से वे ऐसा नहीं कर सके। पुलिस ने मौके पर तैनाती बढ़ाई और पुतला ले जाते हुए कार्यकर्ताओं को रोका।

    कांग्रेस का पलटवार:
    कांग्रेस के पूर्व प्रदेश महासचिव सुनील शर्मा ने भाजपा के प्रदर्शन को हताशा करार दिया। उन्होंने कहा, “जनता के मुद्दों पर बात करने की बजाय विपक्ष के नेताओं के खिलाफ अमर्यादित टिप्पणियां करना अनुचित है।” सुनील शर्मा ने इस घटना की निंदा की और भाजपा को जवाबी हमला किया।

    पुलिस की स्थिति:
    सीएसपी मनीष यादव ने बताया कि भाजपा द्वारा आयोजित कार्यक्रम में पुलिस की मौजूदगी में सभी गतिविधियां शांतिपूर्वक संपन्न हुईं और किसी भी बड़े विवाद की स्थिति नहीं बनी। एहतियात के तौर पर कांग्रेस कार्यालय के बाहर पुलिस बल तैनात किया गया था।

  • जबलपुर में बाबरी मस्जिद के खिलाफ प्रदर्शन: शौचालय के बाहर बाबर के नाम के लगाए गए पोस्टर

    जबलपुर में बाबरी मस्जिद के खिलाफ प्रदर्शन: शौचालय के बाहर बाबर के नाम के लगाए गए पोस्टर


    जबलपुर । जबलपुर में हिंदूवादी संगठन के कार्यकर्ताओं ने बुधवार को भंवरताल कल्चलर स्ट्रीट पर एक प्रदर्शन आयोजित किया। इस प्रदर्शन में संगठन के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने बाबरी मस्जिद के पुनर्निर्माण के विरोध में नारेबाजी की और कुछ विवादास्पद पोस्टर भी लगाए। ये पोस्टर सुलभ शौचालय के बाहर लगाए गए थेजिनमें बाबर के नाम की तस्वीरें और आपत्तिजनक संदेश लिखे गए थे।

    सूचना मिलते ही ओमती थाने की पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को संभालने की कोशिश की। पुलिस अधिकारियों के अनुसारइस तरह के प्रदर्शन और पोस्टर का उद्देश्य धार्मिक भावनाओं को भड़काना और सामाजिक सौहार्द्र को बिगाड़ना हो सकता है। हालांकिपुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू कर दी है और संबंधित कार्यकर्ताओं के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की बात भी कही है।

    हिंदूवादी संगठन के पदाधिकारी विकास खरे ने इस प्रदर्शन को बाबरी मस्जिद के पुनर्निर्माण के खिलाफ एक विरोध के रूप में प्रस्तुत किया। खरे ने कहा कि “पश्चिम बंगाल में बाबरी मस्जिद का निर्माण किया जा रहा हैजो निंदनीय है। यह हमारे देश की सांस्कृतिक और धार्मिक धरोहर के खिलाफ हैऔर हम इसका विरोध करते हैं।” उनके मुताबिकइस प्रदर्शन के माध्यम से उन्होंने देशभर में बाबरी मस्जिद के पुनर्निर्माण के खिलाफ लोगों को जागरूक करने की कोशिश की है।

    इसके अलावाप्रदर्शनकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ लोग जानबूझकर बाबरी मस्जिद के निर्माण को लेकर गलत संदेश फैला रहे हैं और इससे देश के हिंदू समुदाय की धार्मिक भावनाओं को आहत किया जा रहा है। उनका कहना था कि बाबरी मस्जिद का निर्माण भारत की धार्मिक एकता को कमजोर करेगाऔर इस पर बडे़ पैमाने पर विरोध होना चाहिए।

    वहींइस प्रदर्शन के बाद कई सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय नागरिकों ने इसका विरोध किया है। उनका मानना है कि इस प्रकार के विरोध प्रदर्शन समाज में तनाव पैदा करते हैं और धार्मिक घृणा को बढ़ावा देते हैं। कुछ लोगों ने इसे संवेदनशील मुद्दा बताया और कहा कि इस तरह के प्रदर्शन से केवल सामाजिक सौहार्द्र को नुकसान पहुंचता है।

    किसी भी प्रकार के धार्मिक या सांप्रदायिक विवाद को बढ़ावा देने वाली गतिविधियां भारत के संवेदनशील समाज के लिए खतरे का संकेत हो सकती हैं। भारत में धार्मिक और सांप्रदायिक एकता को बनाए रखने के लिए सभी समुदायों को एक दूसरे के विश्वास और भावनाओं का सम्मान करना चाहिए।

    पुलिस प्रशासन ने इस मामले को गंभीरता से लिया है और ऐसे प्रदर्शनों को रोकने के लिए सक्रिय कदम उठाए हैं। अधिकारियों का कहना है कि इस तरह के विवादास्पद प्रदर्शन और पोस्टर लगाने से किसी भी समुदाय की धार्मिक भावनाओं को आहत किया जा सकता हैजो कि कानूनन गलत है।

    अंततःयह घटनाएं यह दर्शाती हैं कि आज भी हमारे समाज में सांप्रदायिक मुद्दे अत्यधिक संवेदनशील हैंऔर इन्हें समझदारी और संयम से हल किया जाना चाहिए। हमें यह समझना होगा कि हमारी एकता और अखंडता ही हमें मजबूत बनाती हैऔर हर किसी को अपने विश्वास और विचारों का सम्मान करते हुए एक साथ जीने की कोशिश करनी चाहिए।