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  • सेंसेक्स-निफ्टी मामूली गिरावट के साथ बंद, स्मॉलकैप शेयरों में जोरदार तेजी से बाजार में लौटी रौनक

    सेंसेक्स-निफ्टी मामूली गिरावट के साथ बंद, स्मॉलकैप शेयरों में जोरदार तेजी से बाजार में लौटी रौनक

    नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026 को कारोबार के अंत में सेंसेक्स और निफ्टी लगभग सपाट बंद हुए। प्रमुख सूचकांकों में मामूली गिरावट के बावजूद मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में जोरदार खरीदारी देखने को मिली। निफ्टी स्मॉलकैप 100 में 2.69 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप 50 में 2.67 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। सेक्टरों में मीडिया इंडेक्स सबसे आगे रहा, जबकि बैंकिंग शेयरों पर दबाव बना रहा। अक्टूबर सीरीज के वायदा एवं विकल्प कारोबार की मासिक एक्सपायरी के दिन बाजार में अलग-अलग क्षेत्रों का प्रदर्शन मिला-जुला रहा।

    सेंसेक्स मंगलवार को 8.08 अंक यानी 0.01 प्रतिशत की गिरावट के साथ 73,598.67 पर बंद हुआ। दिन के कारोबार में इसने 73,762.98 का ऊपरी और 73,179.41 का निचला स्तर छुआ। दूसरी ओर, निफ्टी 3.45 अंक यानी 0.02 प्रतिशत फिसलकर 22,749.75 पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान निफ्टी 22,636.85 से 22,829.75 के दायरे में रहा। दोनों प्रमुख सूचकांकों में सीमित उतार-चढ़ाव के बीच निवेशकों की दिलचस्पी छोटे और मझोले शेयरों में अधिक दिखाई दी।

    स्मॉलकैप और मिडकैप शेयरों में खरीदारी बाजार की प्रमुख विशेषता रही। निफ्टी स्मॉलकैप 100 में 2.69 प्रतिशत, निफ्टी स्मॉलकैप 50 में 2.67 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप 250 में 2.19 प्रतिशत की तेजी आई। निफ्टी नेक्स्ट 50 में 1.30 प्रतिशत और निफ्टी 500 में 0.58 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। निफ्टी मिडकैप 100 भी 1.01 प्रतिशत चढ़ा, जबकि निफ्टी मिडकैप 50 में 0.90 प्रतिशत की तेजी रही। इससे संकेत मिला कि सेंसेक्स और निफ्टी की सुस्ती के बावजूद व्यापक बाजार में खरीदारी का रुझान मजबूत रहा।

    शेयर बाजार की मजबूती का असर कारोबार की व्यापकता में भी नजर आया। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज पर कारोबार करने वाले 3,665 शेयरों में से 2,455 बढ़त के साथ बंद हुए, जबकि 1,103 शेयरों में गिरावट रही। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज पर कुल 4,547 शेयरों में कारोबार हुआ। इनमें 2,936 शेयर चढ़े और 1,383 शेयर गिरावट के साथ बंद हुए। इस आंकड़े से पता चलता है कि प्रमुख सूचकांकों के लगभग स्थिर रहने के बावजूद बाजार में बढ़त वाले शेयरों की संख्या अधिक रही।

    सेक्टरवार प्रदर्शन में निफ्टी मीडिया इंडेक्स 3.52 प्रतिशत उछलकर सबसे आगे रहा। निफ्टी मिडस्मॉल हेल्थकेयर में 2.78 प्रतिशत, निफ्टी रियल्टी में 1.91 प्रतिशत, निफ्टी फार्मा में 1.89 प्रतिशत और निफ्टी हेल्थकेयर इंडेक्स में 1.65 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। निफ्टी ऑटो 1.48 प्रतिशत, निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स 1.20 प्रतिशत और निफ्टी एफएमसीजी 0.74 प्रतिशत बढ़कर बंद हुए। निफ्टी मेटल में भी 0.63 प्रतिशत की बढ़त रही।

    इसके विपरीत, बैंकिंग और कुछ अन्य क्षेत्रों में बिकवाली देखने को मिली। निफ्टी प्राइवेट बैंक 0.73 प्रतिशत और निफ्टी बैंक 0.72 प्रतिशत गिर गया। निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज में 0.62 प्रतिशत और निफ्टी आईटी में 0.26 प्रतिशत की कमजोरी रही। निफ्टी सीमेंट 1.80 प्रतिशत टूटकर कमजोर प्रदर्शन करने वाले क्षेत्रों में शामिल रहा।

    बाजार में उतार-चढ़ाव का संकेत देने वाला इंडिया वीआईएक्स 4.74 प्रतिशत गिरकर 16.35 पर आ गया। वहीं, अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स का भाव उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 115.90 डॉलर प्रति बैरल रहा। कुल मिलाकर, मंगलवार को प्रमुख सूचकांकों में खास तेजी नहीं दिखी, लेकिन स्मॉलकैप, मिडकैप और मीडिया शेयरों की बढ़त ने बाजार के व्यापक रुझान को मजबूती दी।

  • शेयर बाजार में लगातार चौथे दिन गिरावट, सेंसेक्स 125 अंक टूटा, मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भारी बिकवाली

    शेयर बाजार में लगातार चौथे दिन गिरावट, सेंसेक्स 125 अंक टूटा, मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भारी बिकवाली

    नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 को लगातार चौथे कारोबारी दिन गिरावट दर्ज की गई। कारोबार समाप्त होने पर सेंसेक्स 125.56 अंक यानी 0.17 प्रतिशत टूटकर 73,123.83 पर बंद हुआ। वहीं, निफ्टी 87.65 अंक यानी 0.39 प्रतिशत गिरकर 22,600.00 के स्तर पर आ गया। प्रमुख सूचकांकों में गिरावट के साथ बाजार में व्यापक बिकवाली भी देखने को मिली। खास तौर पर मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में दबाव अधिक रहा, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ी।

    शुक्रवार के कारोबार में छोटे और मध्यम आकार की कंपनियों के शेयर प्रमुख सूचकांकों की तुलना में अधिक कमजोर रहे। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 1,263.30 अंक यानी 2.21 प्रतिशत गिरकर 55,800.65 पर बंद हुआ। इसी तरह निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में 536.45 अंक यानी 2.94 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 17,739.45 पर बंद हुआ। इन आंकड़ों से स्पष्ट हुआ कि बाजार में कमजोरी केवल चुनिंदा बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसका असर व्यापक स्तर पर दिखाई दिया।

    अधिकांश क्षेत्रीय सूचकांक भी लाल निशान में बंद हुए। निफ्टी मेटल में 2.71 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जबकि कंज्यूमर ड्यूरेबल्स इंडेक्स 2.63 प्रतिशत और इंडिया डिफेंस इंडेक्स 2.60 प्रतिशत नीचे आया। रियल्टी इंडेक्स में 2.38 प्रतिशत तथा सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों से जुड़े निफ्टी पीएसयू बैंक इंडेक्स में 2.26 प्रतिशत की कमजोरी रही। निफ्टी एनर्जी 1.66 प्रतिशत, निफ्टी पीएसई 1.64 प्रतिशत और निफ्टी इंडिया मैन्युफैक्चरिंग 1.57 प्रतिशत गिरकर बंद हुए।

    इसके अलावा निफ्टी कमोडिटीज में 1.41 प्रतिशत, निफ्टी मीडिया में 1.33 प्रतिशत और निफ्टी फार्मा में 1.04 प्रतिशत की गिरावट आई। अलग-अलग क्षेत्रों में एक साथ आई कमजोरी ने बाजार की व्यापक स्थिति को प्रभावित किया। इससे संकेत मिला कि बिकवाली का दबाव कई उद्योगों तक फैला हुआ था।

    सेंसेक्स में शामिल कुछ कंपनियों के शेयरों ने गिरते बाजार के बीच बढ़त दर्ज की। इटरनल, एलएंडटी, टीसीएस, अल्ट्राटेक सीमेंट, एशियन पेंट्स, मारुति सुजुकी, एक्सिस बैंक, इन्फोसिस और आईसीआईसीआई बैंक बढ़त के साथ बंद हुए। दूसरी ओर टाटा स्टील, ट्रेंट, टेक महिंद्रा, बीईएल, इंटरग्लोब एविएशन, बजाज फिनसर्व, कोटक महिंद्रा बैंक, टाइटन और बजाज फाइनेंस समेत कई शेयरों में गिरावट रही। एनटीपीसी, एसबीआई, एचयूएल, सन फार्मा, भारती एयरटेल, आईटीसी और एमएंडएम के शेयर भी नुकसान में बंद हुए।

    बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, मौजूदा दौर में सबसे बड़ी चिंता मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में प्रमुख सूचकांकों के मुकाबले ज्यादा गिरावट है। ऊंचे मूल्यांकन को लेकर चिंता, कर्ज लेकर किए गए निवेश वाली पोजीशन में कमी, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और कमजोर वैश्विक संकेत बाजार पर दबाव डाल रहे हैं। इंडिया वीआईएक्स में बढ़ोतरी को भी निकट भविष्य में उतार-चढ़ाव की आशंका से जोड़कर देखा जा रहा है।

    मध्य पूर्व में जारी तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बने रहने की आशंका भी निवेशकों के लिए चिंता का विषय है। इसके साथ ही कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई से जुड़े घटनाक्रमों के बीच वैश्विक शेयर बाजारों में बिकवाली का असर जोखिम लेने की निवेशकों की क्षमता पर पड़ रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक, आगे बाजार की दिशा महंगाई के आंकड़ों और प्रमुख केंद्रीय बैंकों के फैसलों से प्रभावित हो सकती है। ऐसे माहौल में कंपनियों की कमाई की स्पष्टता और शेयरों का उचित मूल्यांकन निवेश संबंधी फैसलों में अहम भूमिका निभा सकते हैं।