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  • भोपाल को मिली आधुनिक AC ई-बसों की सौगात, तीन रूटों पर शुरू हुई सेवा, सिर्फ ₹7 से करें आरामदायक सफर

    भोपाल को मिली आधुनिक AC ई-बसों की सौगात, तीन रूटों पर शुरू हुई सेवा, सिर्फ ₹7 से करें आरामदायक सफर


    भोपाल । राजधानी भोपाल की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था अब एक नए दौर में प्रवेश कर चुकी है। शहर की सड़कों पर पहली बार वातानुकूलित इलेक्ट्रिक बसों का संचालन शुरू हो गया है। टिकटिंग सॉफ्टवेयर की सफल टेस्टिंग और खाली बसों के ट्रायल रन के बाद गुरुवार सुबह से इन बसों में आम यात्रियों का सफर भी शुरू हो गया। शुरुआती चरण में तीन प्रमुख रूटों पर 10 एसी ई बसें चलाई जा रही हैं। सबसे खास बात यह है कि यात्रियों को एयर कंडीशनर सुविधा का लाभ लेने के लिए कोई अतिरिक्त किराया नहीं देना होगा। न्यूनतम किराया 7 रुपए और अधिकतम 40 रुपए निर्धारित किया गया है जो पहले से संचालित लाल सिटी बसों के बराबर ही है।

    नई इलेक्ट्रिक बसों का संचालन चिरायु हॉस्पिटल से डीबी मॉल मेट्रो स्टेशन होते हुए बैरागढ़ और चिचली तक तथा चिरायु हॉस्पिटल से डीबी मॉल मेट्रो स्टेशन होकर कोच फैक्ट्री तक किया जा रहा है। इसके अलावा कोलार से एमपी नगर के बीच भी तीन बसें चलाई जा रही हैं जिससे शहर के हजारों यात्रियों को राहत मिलने की उम्मीद है।

    ई बसों की शुरुआत से उन यात्रियों को सबसे ज्यादा फायदा मिलेगा जो रोजाना सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करते हैं। कोलार निवासी ममता जोशी ने बताया कि उन्होंने नयापुरा से एमपी नगर तक एसी बस में सफर किया और केवल 17 रुपए किराया लगा। उनके अनुसार सफर पहले की तुलना में कहीं ज्यादा आरामदायक और सुविधाजनक रहा।

    इन इलेक्ट्रिक बसों में आधुनिक सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा गया है। पहली बार दिव्यांग यात्रियों के लिए हाइड्रोलिक डोर की व्यवस्था की गई है जिससे व्हीलचेयर या ट्राइसाइकिल के साथ आसानी से बस में चढ़ा और उतरा जा सकेगा। बस के भीतर इतनी जगह भी उपलब्ध कराई गई है कि दो व्हीलचेयर एक साथ खड़ी रह सकें। इसके अलावा प्रत्येक बस में छह सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं जिनकी निगरानी कंट्रोल रूम से की जाएगी ताकि यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

    भोपाल की ट्रैफिक व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए इन बसों का आकार भी विशेष रूप से तैयार किया गया है। नई इलेक्ट्रिक बसों की लंबाई करीब 9 मीटर है जबकि पुरानी सिटी बसें लगभग 12 मीटर लंबी थीं। कम लंबाई होने के कारण ये बसें संकरी सड़कों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में आसानी से संचालित हो सकेंगी और ट्रैफिक जाम की समस्या भी कम होगी।

    फिलहाल शहर में 30 इलेक्ट्रिक बसें पहुंच चुकी हैं जिनमें से पहले चरण में 10 बसों का संचालन शुरू किया गया है। दूसरे चरण में 10 और बसें सड़कों पर उतरेंगी जबकि 15 अगस्त को प्रदेश स्तरीय लोकार्पण कार्यक्रम के बाद सभी 30 बसें नियमित रूप से यात्रियों के लिए उपलब्ध होंगी। इसके साथ ही अगले 10 से 12 दिनों में 20 और नई इलेक्ट्रिक बसें भोपाल पहुंचने की संभावना है जिससे शहर का इलेक्ट्रिक बस बेड़ा और मजबूत होगा।

    इन बसों के संचालन के लिए बैरागढ़ डिपो में आधुनिक चार्जिंग स्टेशन तैयार किए गए हैं जहां 11 चार्जिंग पॉइंट स्थापित किए गए हैं। इससे नियमित संचालन के दौरान बसों की चार्जिंग में किसी प्रकार की परेशानी नहीं होगी। नगर निगम का मानना है कि इलेक्ट्रिक बसों के बढ़ते उपयोग से प्रदूषण में कमी आएगी और शहर के लोगों को सुरक्षित आरामदायक तथा पर्यावरण अनुकूल सार्वजनिक परिवहन की सुविधा मिलेगी।

  • मास्टर प्लान को लेकर दिशा बैठक में गरमाई राजनीति विधायक और जनपद अध्यक्ष में तीखी बहस सांसद बोले जल्द हो लागू

    मास्टर प्लान को लेकर दिशा बैठक में गरमाई राजनीति विधायक और जनपद अध्यक्ष में तीखी बहस सांसद बोले जल्द हो लागू


    भोपाल । भोपाल के बहुप्रतीक्षित मास्टर प्लान को लेकर जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति दिशा की बैठक शुक्रवार को राजनीतिक टकराव का अखाड़ा बन गई। मास्टर प्लान के लंबे समय से लागू नहीं होने के मुद्दे पर कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद और आतिफ अकील ने बैठक में तीखा विरोध दर्ज कराया। उन्होंने सवाल उठाया कि जब राजधानी के विकास का सबसे अहम दस्तावेज ही लागू नहीं हो पा रहा है तो विकास समीक्षा बैठकों का क्या औचित्य रह जाता है। इसी मुद्दे पर चर्चा के दौरान फंदा जनपद पंचायत अध्यक्ष प्रमोद सिंह राजपूत के हस्तक्षेप से माहौल और अधिक गरमा गया और बैठक में तीखी नोकझोंक शुरू हो गई।

    विवाद के दौरान कांग्रेस विधायकों ने आपत्ति जताते हुए कहा कि उनकी बात सांसद से हो रही थी ऐसे में बीच में हस्तक्षेप करने का अधिकार किसे है। दोनों पक्षों के बीच बहस इतनी बढ़ गई कि कुछ समय तक बैठक का माहौल पूरी तरह तनावपूर्ण बना रहा। कांग्रेस विधायकों ने आरोप लगाया कि उनकी बातों को गंभीरता से नहीं सुना जा रहा है और नाराज होकर बैठक से बाहर निकल गए। बैठक की अध्यक्षता कर रहे सांसद आलोक शर्मा ने दोनों नेताओं को रोकने और समझाने का प्रयास किया लेकिन वे वापस नहीं लौटे।

    बैठक के बाद सांसद आलोक शर्मा ने भी स्वीकार किया कि भोपाल के सुनियोजित विकास के लिए मास्टर प्लान का जल्द लागू होना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में मुख्यमंत्री से जल्द मुलाकात कर मास्टर प्लान को शीघ्र लागू कराने का आग्रह किया जाएगा। उनका मानना है कि राजधानी के भविष्य के विकास और बुनियादी ढांचे को व्यवस्थित बनाने के लिए मास्टर प्लान सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज है।

    बैठक के दौरान केवल मास्टर प्लान ही नहीं बल्कि स्मार्ट सिटी परियोजना भी जनप्रतिनिधियों के निशाने पर रही। भाजपा विधायक भगवानदास सबनानी ने परियोजना की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि स्मार्ट सिटी के नाम पर बड़े निर्माण तो हुए लेकिन नागरिक सुविधाओं की अनदेखी की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि कई इमारतों में मूलभूत सुविधाओं का अभाव है और दशहरा मैदान जैसी महत्वपूर्ण जगहों का भी नुकसान हुआ है। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि स्मार्ट सिटी के बड़े व्यावसायिक प्लॉट छोटे किए जाएं ताकि उनकी बिक्री आसान हो और परियोजना की आय बढ़ सके।

    महापौर मालती राय ने भी स्मार्ट सिटी की व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि स्ट्रीट लाइट जैसी सामान्य समस्याओं का समाधान भी समय पर नहीं हो पाता जिससे आम नागरिकों को परेशानी झेलनी पड़ती है। इस पर कलेक्टर एवं स्मार्ट सिटी बोर्ड के अध्यक्ष प्रियंक मिश्रा ने भरोसा दिलाया कि अलग बैठक कर सभी समस्याओं की समीक्षा की जाएगी और समाधान सुनिश्चित किया जाएगा।

    सांसद आलोक शर्मा ने कहा कि स्मार्ट सिटी परियोजना में विभिन्न विभागों के बीच समन्वय की कमी दिखाई देती है। उन्होंने पूरे प्रोजेक्ट के लिए एक नोडल एजेंसी बनाने का सुझाव दिया ताकि सभी विभाग मिलकर बेहतर तरीके से काम कर सकें। इस दौरान कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने भी भाजपा विधायक भगवानदास सबनानी द्वारा उठाए गए मुद्दों का समर्थन करते हुए कहा कि यदि वरिष्ठ जनप्रतिनिधि समस्याओं की ओर ध्यान दिला रहे हैं तो अधिकारियों को उन्हें गंभीरता से लेकर जल्द समाधान करना चाहिए।

    बैठक में एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव भोजपाल वेटलैंड प्राधिकरण के गठन को लेकर भी पारित किया गया। प्रस्ताव के अनुसार संभागायुक्त को प्राधिकरण का अध्यक्ष बनाया जाए जबकि भोपाल और सीहोर के कलेक्टर जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी तथा जनप्रतिनिधियों को इसमें शामिल किया जाए। इस प्रस्ताव को मुख्यमंत्री के पास भेजने का निर्णय लिया गया। साथ ही भोपाल को आधिकारिक रूप से वेटलैंड सिटी घोषित करने की मांग भी बैठक में प्रमुखता से उठाई गई।