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  • 21 अक्टूबर को खत्म हुआ तुलसी का सफर, वीरानी परिवार ने दुश्मनों से लिया बदला, फिनाले में लौट आईं पहले सीजन की यादें

    21 अक्टूबर को खत्म हुआ तुलसी का सफर, वीरानी परिवार ने दुश्मनों से लिया बदला, फिनाले में लौट आईं पहले सीजन की यादें


    नई दिल्ली। टीवी के चर्चित धारावाहिक क्योंकि सास भी कभी बहू थी के दूसरे सीजन का सफर 21 अक्टूबर 2026 को खत्म हो गया। एकता कपूर के इस लोकप्रिय शो के आखिरी एपिसोड में दर्शकों को जबरदस्त ड्रामा देखने को मिला। इसके साथ ही कहानी को ऐसा अंत दिया गया जिसमें पुराने रिश्तों की यादें भी थीं और नए घटनाक्रम का रोमांच भी। तुलसी और मिहिर की जोड़ी एक बार फिर साथ आई और वीरानी परिवार ने अपने दुश्मनों को सबक सिखाकर कहानी को खूबसूरत मोड़ पर समाप्त किया।

    क्योंकि सास भी कभी बहू थी 2 की शुरुआत 29 जुलाई 2025 को हुई थी। दूसरे सीजन की वापसी को लेकर दर्शकों में काफी उत्साह था। इसकी सबसे बड़ी वजह स्मृति ईरानी का तुलसी के रूप में दोबारा टीवी पर नजर आना था। तुलसी का किरदार आज भी दर्शकों के दिलों में खास जगह रखता है। हालांकि दूसरे सीजन को पहले सीजन जैसी लोकप्रियता नहीं मिल सकी लेकिन इसके किरदारों और कहानी को लेकर दर्शकों की दिलचस्पी बनी रही।

    सीजन 2 के आखिरी एपिसोड में कहानी का सबसे अहम मोड़ मिहिर की वापसी और तुलसी के साथ उसके दोबारा आने से जुड़ा रहा। अमर उपाध्याय के निभाए मिहिर के किरदार को कुछ समय के लिए कहानी से दूर रखा गया था लेकिन बाद के एपिसोड में उसकी वापसी ने घटनाओं को नया मोड़ दिया। मिहिर के साथ ही पहले सीजन की चर्चित विलेन मंदिरा भी फिर से सामने आई। उसकी वापसी ने दर्शकों को पुराने सीजन की याद दिलाई और कहानी में तनाव बढ़ा दिया।

    करीब एक घंटे के फिनाले में दिखाया गया कि मिहिर परिवार से अलग होने का केवल नाटक कर रहा था। उसका मकसद अपने परिवार के साथ मिलकर दुश्मनों की साजिश का पर्दाफाश करना था। तुलसी और मिहिर साथ आते हैं और तृप्ति तथा मंदिरा की चालों को सबके सामने उजागर करते हैं। इसके बाद कहानी में ऐसा घटनाक्रम आता है जो दर्शकों को चौंका देता है। मंदिरा को उसका अपना भाई अनुपम गोली मार देता है। मंदिरा और तृप्ति के रास्ते से हटने के बाद वीरानी परिवार एक बार फिर साथ आता है और खुशियां मनाता है।

    शो के निर्माताओं ने इसके अंत को सिर्फ ड्रामे तक सीमित नहीं रखा बल्कि पुरानी यादों को भी इसमें खास जगह दी। फिनाले के आखिरी हिस्से में पहले सीजन की तस्वीरें और वीडियो दिखाए गए। दर्शकों को पुराने तुलसी और मिहिर की झलक देखने को मिली। इसके अलावा बा और मिहिर की मां सहित कई पुराने किरदारों की यादें भी ताजा की गईं। इस तरह कहानी को भावनात्मक अंदाज में विदाई दी गई।

    क्योंकि सास भी कभी बहू थी का पहला सीजन साल 2000 से 2008 तक प्रसारित हुआ था। यह उस दौर के सबसे लोकप्रिय टीवी धारावाहिकों में शामिल रहा। इसके किरदार घर-घर में पहचाने जाते थे। मिहिर की मौत और फिर उसकी वापसी वाले घटनाक्रम ने उस समय दर्शकों के बीच जबरदस्त भावनात्मक प्रतिक्रिया पैदा की थी। यही वजह है कि इस शो की पुरानी यादें आज भी लोगों के लिए खास हैं।

    साल 2025 में दूसरे सीजन की घोषणा के साथ एक बार फिर दर्शकों को तुलसी और मिहिर की कहानी से जुड़ने का मौका मिला। अब 21 अक्टूबर 2026 को इसका समापन हो गया है। तुलसी और मिहिर के मिलन तथा पहले सीजन की झलकियों के साथ खत्म हुआ यह सफर पुराने प्रशंसकों के लिए यादगार विदाई बन गया।

  • महिला आरक्षण और परिसीमन विवाद पर भाजपा का कांग्रेस पर तीखा प्रहार, स्मृति ईरानी और रवि शंकर प्रसाद ने लगाए गंभीर आरोप

    महिला आरक्षण और परिसीमन विवाद पर भाजपा का कांग्रेस पर तीखा प्रहार, स्मृति ईरानी और रवि शंकर प्रसाद ने लगाए गंभीर आरोप


    नई दिल्ली:
    महिला आरक्षण संशोधन विधेयक को लेकर संसद में जारी राजनीतिक बहस अब और अधिक तेज हो गई है। इस मुद्दे पर भाजपा के वरिष्ठ नेताओं स्मृति ईरानी और रवि शंकर प्रसाद ने प्रेस वार्ता कर कांग्रेस और विपक्षी दलों पर गंभीर आरोप लगाए। दोनों नेताओं ने कहा कि विपक्ष ने महिला आरक्षण जैसे ऐतिहासिक मुद्दे पर असंगत और विरोधाभासी रुख अपनाया है, जिससे महिलाओं के अधिकारों को लेकर राजनीतिक भ्रम की स्थिति बनी है।

    स्मृति ईरानी ने कहा कि देश की महिलाओं के अधिकारों को लेकर जो चर्चा की जा रही है, उसमें विपक्ष का रवैया जमीनी वास्तविकताओं से अलग दिखाई देता है। उन्होंने आरोप लगाया कि लंबे समय तक सत्ता में रहने के बावजूद कांग्रेस महिलाओं के राजनीतिक और सामाजिक सशक्तिकरण के लिए अपेक्षित कार्य नहीं कर पाई। उनके अनुसार वर्तमान सरकार ने महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए कई स्तरों पर ठोस कदम उठाए हैं।

    उन्होंने यह भी कहा कि महिला आरक्षण केवल एक राजनीतिक घोषणा नहीं है बल्कि यह महिलाओं को निर्णय प्रक्रिया में वास्तविक भागीदारी दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है। उनके अनुसार सरकार का उद्देश्य महिलाओं को केवल प्रतीकात्मक नहीं बल्कि वास्तविक अधिकार देना है, जिससे वे देश की नीति निर्माण प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभा सकें।

    स्मृति ईरानी ने कांग्रेस पर यह भी आरोप लगाया कि उसने इस मुद्दे को राजनीतिक दृष्टि से देखा है, जबकि यह सामाजिक सुधार से जुड़ा विषय है। उनके अनुसार महिलाओं के सशक्तिकरण को लेकर केवल भाषण देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि नीतियों को जमीन पर लागू करना अधिक महत्वपूर्ण है।

    दूसरी ओर रवि शंकर प्रसाद ने भी कांग्रेस पर तीखा हमला करते हुए कहा कि विपक्ष महिला आरक्षण और परिसीमन जैसे मुद्दों पर स्पष्ट रुख नहीं रखता। उनके अनुसार संवैधानिक प्रक्रिया के अनुसार लोकसभा और विधानसभा सीटों का पुनर्वितरण परिसीमन के माध्यम से ही संभव है और यह जनसंख्या के आधार पर तय होता है।

    उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण लागू करने के लिए परिसीमन एक आवश्यक प्रक्रिया है और इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उनके अनुसार यह दोनों प्रक्रियाएं एक दूसरे से जुड़ी हुई हैं और इन्हें अलग करके देखना व्यावहारिक नहीं होगा।

    रवि शंकर प्रसाद ने यह भी कहा कि विपक्ष कुछ मामलों में समर्थन की बात करता है लेकिन जब संवैधानिक प्रक्रिया की बात आती है तो विरोधाभासी रुख अपनाता है। उनके अनुसार यह स्थिति देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था में स्पष्टता की कमी पैदा करती है।

    उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक दल क्षेत्रीय संतुलन और प्रतिनिधित्व के मुद्दे को लेकर भ्रम पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे राष्ट्रीय स्तर पर नीति निर्माण की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।

    कुल मिलाकर महिला आरक्षण और परिसीमन को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव और गहरा गया है। दोनों पक्ष अपने अपने तर्कों के साथ इस मुद्दे पर आमने सामने हैं और यह बहस संसद से लेकर राजनीतिक मंचों तक लगातार तेज होती जा रही है।