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  • कंगना रनौत ने राखी सावंत के बयान पर किया पलटवार, बोलीं- सफल महिलाओं के चरित्र पर सवाल उठाना बंद करें

    कंगना रनौत ने राखी सावंत के बयान पर किया पलटवार, बोलीं- सफल महिलाओं के चरित्र पर सवाल उठाना बंद करें

    नई दिल्ली ।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कंगना रनौत और स्मृति ईरानी को लेकर राखी सावंत की विवादित टिप्पणी के बाद मामला चर्चा में आ गया है। राखी की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए कंगना रनौत ने सोशल मीडिया के जरिए पलटवार किया और सफल महिलाओं के चरित्र पर सवाल उठाने की प्रवृत्ति पर निशाना साधा।

    यह पूरा विवाद एक पॉडकास्ट में हुई बातचीत के बाद शुरू हुआ। बातचीत के दौरान राखी सावंत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कई महिला नेताओं को लेकर टिप्पणी की। उन्होंने प्रधानमंत्री से सवाल करते हुए कंगना रनौत और स्मृति ईरानी का जिक्र किया और पूछा कि उन्हें मंत्री बनाने के लिए इन महिलाओं ने क्या दिया है।

    राखी ने अपनी टिप्पणी में कहा कि अगर इन महिलाओं ने प्रधानमंत्री को कुछ दिया है तो वह भी ऐसा कर सकती हैं। उनके इस बयान के बाद विवाद बढ़ गया और सोशल मीडिया पर उनकी आलोचना होने लगी। इसी विवाद के बीच कंगना रनौत ने अपनी प्रतिक्रिया सामने रखी।

    कंगना ने सोशल मीडिया स्टोरी के जरिए राखी के बयान का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि केवल राखी ही नहीं, बल्कि कई असफल और कड़वाहट से भरे लोग सफल महिलाओं के चरित्र पर सवाल उठाकर अपनी जलन, ईर्ष्या, असफलता और अहंकार को सही साबित करने की कोशिश करते हैं।

    कंगना ने आगे कहा कि अब समय आ गया है कि लोग लगातार और जानबूझकर किए जाने वाले ऐसे हमलों के सामने कमजोर पड़ना बंद करें। उन्होंने लोगों से ऐसी बातों के कारण खुद को अपमानित या आहत महसूस करना बंद करने और हर बात पर सफाई देने की जरूरत नहीं समझने की बात कही।

    इसके बाद कंगना ने राखी सावंत पर सीधे तौर पर निशाना साधते हुए सफलता और प्रतिभा को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि केवल किसी को खुश करने या किसी तरह का फायदा पहुंचाने की कोशिश से सफलता हासिल नहीं की जा सकती।

    कंगना ने अपनी पोस्ट में राखी को संबोधित करते हुए कहा कि सफलता के लिए कोई भी कुछ करने को तैयार हो सकता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि सामने वाले को उसकी जरूरत होगी। उन्होंने यह भी कहा कि केवल किसी को दिए गए फेवर किसी व्यक्ति को नौकरी तक नहीं दिला सकते, क्योंकि उसके लिए भी गुणवत्ता और प्रतिभा जरूरी होती है।

    कंगना ने अपनी प्रतिक्रिया में यह भी कहा कि राखी चाहे फेवर करें या न करें, इससे उनके लिए कोई बदलाव नहीं होने वाला। उन्होंने राखी को अपनी रील्स देखने और रोते रहने की बात भी कही।

    इस पूरे विवाद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कंगना रनौत और स्मृति ईरानी का नाम राखी सावंत की टिप्पणी के कारण सामने आया। इसके बाद कंगना ने अपने जवाब में सफल महिलाओं के खिलाफ होने वाली व्यक्तिगत टिप्पणियों और चरित्र पर सवाल उठाने की प्रवृत्ति को मुद्दा बनाया।

    राखी की टिप्पणी और कंगना की प्रतिक्रिया के बाद दोनों के बीच बयानबाजी चर्चा में है। कंगना ने अपने जवाब में जहां महिलाओं की सफलता और प्रतिभा का मुद्दा उठाया, वहीं राखी की टिप्पणी पर सीधे तौर पर अपनी नाराजगी भी जाहिर की।

  • राखी सावंत के पीएम मोदी पर बयान से भड़कीं कंगना रनौत, बोलीं- सफल महिलाओं का चरित्र हनन करना बंद करें

    राखी सावंत के पीएम मोदी पर बयान से भड़कीं कंगना रनौत, बोलीं- सफल महिलाओं का चरित्र हनन करना बंद करें

    नई दिल्ली ।एक्ट्रेस और बीजेपी सांसद कंगना रनौत ने राखी सावंत की एक पॉडकास्ट में की गई टिप्पणी पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। राखी ने बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कंगना रनौत और स्मृति ईरानी का नाम लेते हुए ऐसी टिप्पणी की थी, जिसके बाद विवाद खड़ा हो गया। अब कंगना ने सोशल मीडिया पर पोस्ट साझा कर राखी को जवाब दिया है।

    कंगना ने अपनी पोस्ट में कहा कि अक्सर असफल और निराश लोग अपनी नाकामी का जिम्मेदार सफल महिलाओं को ठहराते हैं। उन्होंने लिखा कि जलन और अहंकार के कारण कई बार सफल महिलाओं को निशाना बनाया जाता है। कंगना के मुताबिक, महिलाओं को इस तरह की टिप्पणियों से शर्मिंदा होने या बार-बार खुद को सही साबित करने की जरूरत नहीं है।

    कंगना ने कहा कि महिलाओं को ऐसे हमलों में उलझने के बजाय अपने काम पर ध्यान देना चाहिए। हालांकि, इसके बाद उन्होंने राखी सावंत पर सीधे तौर पर तीखा तंज भी किया। कंगना ने राखी की सफलता पाने की कोशिशों को लेकर टिप्पणी करते हुए कहा कि वह भी सफलता हासिल करने के लिए सब कुछ करने को तैयार हैं, लेकिन दुर्भाग्य से अब किसी को उनसे कुछ चाहिए ही नहीं।

    कंगना ने अपनी पोस्ट में आगे राखी को लेकर बेहद तीखी भाषा का इस्तेमाल किया। उन्होंने तंज करते हुए कहा कि राखी की तमाम कोशिशें मिलकर भी उन्हें स्वीपर की नौकरी नहीं दिला सकीं। कंगना ने यह भी कहा कि ऐसी नौकरी के लिए भी गुणवत्ता और प्रतिभा की जरूरत होती है। अपनी पोस्ट के अंत में उन्होंने राखी से कहा कि वह उनकी रील्स देखती रहें और रोती रहें।

    विवाद की शुरुआत राखी सावंत के हालिया पॉडकास्ट से हुई थी। बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कंगना रनौत और स्मृति ईरानी का जिक्र हुआ। राखी ने सवाल किया कि आखिर प्रधानमंत्री मोदी को कंगना और दूसरी महिलाओं से ऐसा क्या मिला कि उन्हें मंत्री बनाया गया।

    इसके बाद पॉडकास्ट के होस्ट ने राखी से पूछा कि वह किस चीज की बात कर रही हैं। इस पर राखी ने जवाब देते हुए कहा कि वह प्यार और सम्मान की बात कर रही हैं। उन्होंने कहा कि अगर कंगना और स्मृति ईरानी ने प्रधानमंत्री मोदी को सम्मान दिया है, तो वह भी उन्हें सम्मान दे सकती हैं।

    राखी की इस टिप्पणी के बाद कंगना ने सोशल मीडिया के जरिए अपनी प्रतिक्रिया जाहिर की। उन्होंने अपने जवाब में एक तरफ सफल महिलाओं को निशाना बनाए जाने की बात कही, वहीं दूसरी तरफ राखी की टिप्पणी पर व्यक्तिगत और तीखा पलटवार किया।

    इस पूरे विवाद में कंगना की प्रतिक्रिया सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है। कंगना ने अपनी पोस्ट में महिलाओं को लेकर होने वाली टिप्पणियों पर आपत्ति जताई और कहा कि उन्हें अपने काम पर ध्यान देना चाहिए। साथ ही उन्होंने राखी सावंत की टिप्पणी के जवाब में उनकी सफलता और करियर को लेकर भी कटाक्ष किया।

  • राज्यसभा नहीं मिलने पर स्मृति ईरानी का जवाब, अमेठी चुनाव हार और भाजपा में संगठनात्मक भूमिका पर खुलकर बोलीं

    राज्यसभा नहीं मिलने पर स्मृति ईरानी का जवाब, अमेठी चुनाव हार और भाजपा में संगठनात्मक भूमिका पर खुलकर बोलीं

    नई दिल्ली । पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने भाजपा की केंद्रीय टीम में वापसी के बाद कई मुद्दों पर बात की है। एक पॉडकास्ट के दौरान उन्होंने 2024 लोकसभा चुनाव में अमेठी से मिली हार के बाद राज्यसभा न भेजे जाने को लेकर कहा कि भारतीय जनता पार्टी के संगठन में पद कोई पहचान नहीं होती है, वह एक मौका होता है। उन्होंने कहा, “अगर राजनीतिक ताकत महत्वपूर्ण होती, तो मैं कभी भी अमेठी नहीं जाती। क्योंकि अमेठी ऐतिहासिक रूप से भाजपा के लिए एक ‘लूजिंग सीट’ रही है।” बता दें स्मृति ईरानी 2011 से 2019 तक राज्यसभा सांसद रही थीं। इस दौरान ही उन्होंने 2019 के चुनाव में अमेठी से राहुल गांधी के खिलाफ ऐतिहासिक जीत हासिल की थी। बाद में 2024 लोकसभा चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।

    टाइम्स नाऊ से बात करते हुए स्मृति ईरानी ने 2024 लोकसभा चुनाव के बाद पार्टी द्वारा वापस राज्यसभा न भेजे जाने के सवाल पर भी विस्तार से जवाब दिया। उन्होंने कहा कि वह जहां से आई हैं, वहां पर कभी नहीं सोचा था कि वह इस मुकाम पर पहुंचेंगी।

    मैं और देवेंद्र फडणवीस मिलकर, पुराने दिनों को याद करके हंसते हैं- स्मृति ईरानी

    इंटरव्यू के दौरान स्मृति ईरानी ने भारतीय जनता पार्टी के युवा मोर्चा में काम करने वाले दिनों को याद किया। उन्होंने कहा, “मैं पहली बार 2003 में युवा मोर्चा महाराष्ट्र में पदाधिकारी बनी थी। मेरे साथ जो उपाध्यक्ष थे, व देवेंद्र फडणवीस थे। उस समय हम लोगों ने कभी नहीं सोचा था कि यहां तक पहुंचेंगे। मैं और देवेंद्र फडणवीस जब की मिलते हैं, तो इस बात पर हंसते हैं। उस समय हम लोग प्रमोद महाजन, गोपीनाथ मुंडे को देखा करते थे। मैंने जीवन में कभी नहीं सोचा था कि हम यहां तक पहुंचेंगे।” उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की तरफ से सार्वजनिक रूप से की गई तारीफ उनके लिए एक उपलब्धि है।

    ‘घर से पेट्रोल, पानी के पैसे मांगते थे’

    भाजपा नेता स्मृति ईरानी युवा मोर्चा के दिनों को याद करते हुए कहा कि वह एक पक्की भाजपा कार्यकर्ता हैं। युवा मोर्चा के दिनों में वह अपने साथी लोगों की मदद करने के लिए घर से पेट्रोल पानी के पैसे तक लेती थी। इस पर उनके घर वाले भी कई बार टोका करते थे। उन्होंने कहा, “उस समय हम लोग ऐसे ही घूमा करते थे। घर से पेट्रोल पानी के पैसे भी लिया करते थे। घरवाले कहते थे कि अरे तुम युवा मोर्चा में हो और अभी पैसे लेते हो। तब हम कहते थे कि ‘हां, ताकि हम अपने साथियों की मदद कर सकें।’ उस वक्त हमारे जो संगठन मंत्री थे वह वी. सतीश जी थे। वह आज संसद में हैं। वह बैठकर हमें बताते थे कि जो गरीब कार्यकर्ता है उसकी मदद कैसे करनी है। उसको भी अपने साथ लेकर चलना है।” उन्होंने कहा कि जब संगठन में इस तरीके की मजबूती के साथ तैयारी की जाती है और ऐसे बैकग्राउंड से आप आते हैं, तो आपके लिए पद कोई ज्यादा मायने नहीं रखता।

    पीएम के इग्नोर करने वाले वीडियो पर भी दिया स्मृति ईरानी का जवाब

    इंटरव्यू के दौरान जब स्मृति ईरानी से बंगाल में एक कार्यक्रम के दौरान वायरल हुए वीडियो पर भी सवाल पूछा गया। विपक्ष की तरफ से आरोप लगाया जाता है कि पीएम मोदी ने इस कार्यक्रम में स्मृति ईरानी को इग्नोर किया था। इसका जवाव देते हुए ईरानी ने कहा, “हां, उस समय मैं और दादा (मिथुन) एक साथ ही बैठे हुए थे। वीडियो में पीएम मोदी की पीठ दिखाई दे रही है। किसको पता है कौन किसको हाथ जोड़ रहा है। वह पल बेहद भावुक करने वाला था। वहां जितने भी लोग मंच पर थे, सबकी अपनी कहानी थी। बंगाल में कार्यकर्ताओं ने काफी कुछ झेला है।”

    उन्होंने जोर देकर कहा कि उस समय मंच पर पुराने से पुराना कार्यकर्ता मौजूद था। प्रधानमंत्री मोदी उन लोगों का अभिवादन कर रहे थे। हमने पीएम के लिए बंगाल में गालियां सुनी हैं। ऐसे में यह सारी चीजें मायने नहीं रखतीं। मायने रखती है, तो केवल जीत और वह सुखद थी। मायने रखता है, तो बंगाल का कार्यकर्ता और उसे मिलने वाला न्याय।

  • बीजेपी ने नई राष्ट्रीय टीम के साथ संगठन मजबूत किया, जानिए राष्ट्रीय अध्यक्ष से बूथ स्तर तक कैसे चलता है पार्टी का ढांचा

    बीजेपी ने नई राष्ट्रीय टीम के साथ संगठन मजबूत किया, जानिए राष्ट्रीय अध्यक्ष से बूथ स्तर तक कैसे चलता है पार्टी का ढांचा


    नई दिल्ली : 
    भारतीय जनता पार्टी ने 17 अगस्त 2026 को अपनी नई राष्ट्रीय टीम का ऐलान किया है। राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के नेतृत्व में तैयार की गई इस टीम में स्मृति ईरानी को राष्ट्रीय महासचिव और वसुंधरा राजे को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है। बीएल संतोष संगठन महामंत्री के पद पर बने हुए हैं। नई टीम में 13 राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और आठ महासचिव शामिल किए गए हैं।

    नई टीम का गठन ऐसे समय हुआ है जब उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियां धीरे धीरे तेज हो रही हैं। संगठन में उत्तर प्रदेश के आठ पदाधिकारियों को जगह मिली है। इसके अलावा दिल्ली से 10, महाराष्ट्र से पांच, राजस्थान और उत्तराखंड से चार चार तथा पंजाब और बिहार से दो दो चेहरों को स्थान मिला है। इससे राज्यों के प्रतिनिधित्व और चुनावी प्राथमिकताओं का संकेत मिलता है।

    बीजेपी की सबसे बड़ी संगठनात्मक विशेषता उसका बहुस्तरीय ढांचा है। पार्टी की संरचना राष्ट्रीय स्तर से शुरू होकर राज्य, जिला, मंडल और बूथ तक जाती है। इस व्यवस्था का उद्देश्य केंद्रीय स्तर पर तय रणनीति को स्थानीय स्तर तक पहुंचाना और बूथ स्तर से मिलने वाले फीडबैक को ऊपर तक ले जाना है।

    संगठन के शीर्ष स्तर पर मार्गदर्शक मंडल की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है। इसके बाद पार्टी के प्रमुख निर्णय लेने वाले निकाय और राष्ट्रीय अध्यक्ष का स्थान आता है। राष्ट्रीय अध्यक्ष संगठन का सर्वोच्च पद होता है। पार्टी संविधान के अनुसार अध्यक्ष के चुनाव के लिए निर्धारित प्रक्रिया और योग्यता तय है तथा कार्यकाल तीन वर्ष का होता है।

    राष्ट्रीय अध्यक्ष के साथ राष्ट्रीय कार्यकारिणी पार्टी की रणनीति और संगठनात्मक दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाती है। इसमें राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, महासचिव, सचिव और कोषाध्यक्ष जैसे पद शामिल होते हैं। राष्ट्रीय महासचिवों में संगठन महामंत्री का पद विशेष महत्व रखता है, क्योंकि संगठन के नियमित संचालन और विभिन्न स्तरों के बीच समन्वय की जिम्मेदारी इससे जुड़ी होती है।

    राष्ट्रीय स्तर के बाद राज्य संगठन पार्टी की रणनीति को जमीन पर लागू करता है। राज्य परिषद और राज्य कार्यकारिणी इसके प्रमुख अंग हैं। राज्य परिषद प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, जबकि राज्य कार्यकारिणी संगठन की राजनीतिक और प्रशासनिक गतिविधियों को आगे बढ़ाती है।

    प्रदेश अध्यक्ष अपनी टीम में उपाध्यक्ष, महासचिव, सचिव और कोषाध्यक्ष जैसे पदों पर नियुक्तियां करता है। राज्य स्तर पर संगठन महामंत्री की भूमिका भी महत्वपूर्ण होती है और उसकी नियुक्ति के लिए राष्ट्रीय स्तर की सहमति आवश्यक होती है। इससे राष्ट्रीय और राज्य इकाइयों के बीच तालमेल बनाए रखने की व्यवस्था मजबूत होती है।

    राज्य के नीचे जिला और मंडल स्तर का संगठन आता है। इसके बाद सबसे महत्वपूर्ण इकाई बूथ है। बीजेपी की चुनावी रणनीति में बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत रखना लंबे समय से प्राथमिकता रहा है। बूथ अध्यक्ष स्थानीय स्तर पर पार्टी की गतिविधियों का संचालन करता है, जबकि पन्ना प्रमुख मतदाता सूची के एक हिस्से की जिम्मेदारी संभालते हुए मतदाताओं से सीधे संपर्क करता है।

    संगठनात्मक चुनावों के हालिया आंकड़ों के अनुसार, देश के 1,036 जिलों में से 978 में जिला अध्यक्षों का चुनाव पूरा हो चुका है। इसी तरह 17,743 मंडलों में से 16,469 मंडल अध्यक्ष चुने जा चुके हैं, जबकि 10,70,462 बूथों में से 7,88,197 बूथ अध्यक्षों का चुनाव पूरा हुआ है।

    बीजेपी में संगठन निर्माण की प्रक्रिया को संगठन पर्व कहा जाता है। इसमें बूथ से मंडल, जिला और प्रदेश स्तर होते हुए राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव तक क्रम आगे बढ़ता है। पार्टी के विभिन्न मोर्चे भी इसी ढांचे का हिस्सा हैं। युवा, महिला, किसान, ओबीसी, एससी, एसटी और अल्पसंख्यक मोर्चों के जरिए अलग अलग सामाजिक समूहों तक संगठन की पहुंच बनाने की कोशिश की जाती है। यही बहुस्तरीय व्यवस्था बीजेपी के चुनावी संगठन की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में शामिल है।

  • बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन ने नई राष्ट्रीय टीम का किया ऐलान, स्मृति ईरानी महासचिव और 13 नेताओं को उपाध्यक्ष बनाया

    बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन ने नई राष्ट्रीय टीम का किया ऐलान, स्मृति ईरानी महासचिव और 13 नेताओं को उपाध्यक्ष बनाया

    नई दिल्ली ।भारतीय जनता पार्टी ने राष्ट्रीय संगठन में लंबे इंतजार के बाद नई टीम का ऐलान कर दिया है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के नेतृत्व में गठित नई टीम में युवा और अनुभवी नेताओं के बीच संतुलन बनाने पर जोर दिया गया है। संगठन में कई प्रमुख चेहरों को नई जिम्मेदारियां दी गई हैं, जबकि महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने का भी प्रयास किया गया है।

    नई राष्ट्रीय टीम में 13 राष्ट्रीय उपाध्यक्षों की नियुक्ति की गई है। इसके अलावा पार्टी संगठन में करीब 33 प्रतिशत महिला पदाधिकारियों को जिम्मेदारी दिए जाने की बात सामने आई है। नई नियुक्तियों में सबसे अधिक चर्चा पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी की वापसी को लेकर है। उन्हें राष्ट्रीय महासचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

    स्मृति ईरानी बीजेपी की प्रमुख महिला नेताओं में रही हैं। केंद्रीय मंत्री के तौर पर उनकी भूमिका के अलावा पार्टी के संगठनात्मक और राजनीतिक अभियानों में भी उनकी सक्रियता रही है। राष्ट्रीय महासचिव के रूप में नई जिम्मेदारी मिलने के बाद संगठन में उनकी भूमिका एक बार फिर महत्वपूर्ण हो गई है।

    नई टीम में राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और राम माधव को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया है। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत को भी राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है। ओडिशा के प्रमुख नेता बैजयंत जय पांडा को भी राष्ट्रीय उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है।

    इन नियुक्तियों के जरिए पार्टी ने अलग-अलग राज्यों और क्षेत्रों के अनुभवी नेताओं को राष्ट्रीय संगठन में जगह दी है। इससे संगठन में क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को मजबूत करने के साथ आगामी राजनीतिक चुनौतियों के लिए नेतृत्व की नई व्यवस्था तैयार करने का संकेत मिलता है।

    बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन ने नई राष्ट्रीय टीम के सभी नवनियुक्त पदाधिकारियों को बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा कि अनुभव और ऊर्जा से समृद्ध यह टीम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में संगठन को नई गति प्रदान करेगी। उन्होंने नवनियुक्त पदाधिकारियों से कार्यकर्ता भावना के साथ संगठन को और मजबूत करने की अपेक्षा जताई।

    नितिन नवीन ने यह भी कहा कि नई टीम विकसित भारत के संकल्प और राष्ट्रसेवा के लक्ष्य को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। पार्टी अध्यक्ष के बयान से स्पष्ट है कि नई टीम से संगठनात्मक विस्तार और राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाने की अपेक्षा की जा रही है।

    नितिन नवीन के बीजेपी अध्यक्ष बनने के करीब सात महीने बाद राष्ट्रीय टीम का गठन किया गया है। अध्यक्ष के रूप में उनकी नियुक्ति के बाद से ही नई टीम के ऐलान का इंतजार किया जा रहा था। अब संगठन में नई नियुक्तियों के साथ पार्टी ने राष्ट्रीय स्तर पर जिम्मेदारियों का पुनर्गठन पूरा कर लिया है।

    नई टीम का गठन ऐसे समय हुआ है जब बीजेपी के सामने आने वाले चुनावों और संगठनात्मक विस्तार की बड़ी चुनौतियां हैं। विशेष रूप से उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए राष्ट्रीय संगठन में किए गए बदलावों को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उत्तर प्रदेश देश का सबसे अधिक राजनीतिक महत्व वाला राज्य है और वहां चुनावी सफलता राष्ट्रीय राजनीति पर भी व्यापक प्रभाव डालती है।

    नई जिम्मेदारियों के साथ पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की सक्रियता बढ़ने की संभावना है। महिलाओं को संगठन में पर्याप्त प्रतिनिधित्व देने और अनुभवी नेताओं के साथ नई ऊर्जा को जोड़ने की रणनीति के जरिए बीजेपी ने राष्ट्रीय संगठन को नया स्वरूप देने का प्रयास किया है। अब नई टीम की वास्तविक भूमिका आगामी चुनावी और संगठनात्मक गतिविधियों में दिखाई देगी।