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  • पूजा के बाद स्कूटी के पास पहुंची युवती तो दिखी सांप की पूंछ: इंजन में जा छिपा था सांप एक घंटे चला रेस्क्यू ऑपरेशन

    पूजा के बाद स्कूटी के पास पहुंची युवती तो दिखी सांप की पूंछ: इंजन में जा छिपा था सांप एक घंटे चला रेस्क्यू ऑपरेशन


    देवास । देवास में एक मंदिर में पूजा करने पहुंची युवती उस समय घबरा गई जब अपनी स्कूटी के पास लौटने पर उसे वाहन के अंदर सांप दिखाई दिया। सांप की पूंछ नजर आते ही युवती ने तुरंत आसपास मौजूद लोगों को इसकी जानकारी दी। कुछ ही देर में मौके पर लोगों की भीड़ जमा हो गई। लोगों ने स्कूटी को ध्यान से देखा तो पता चला कि सांप वाहन के अंदर काफी गहराई तक जा चुका था। इसके बाद सर्प मित्र को सूचना दी गई और सांप को सुरक्षित बाहर निकालने की कवायद शुरू हुई।

    मामला देवास के उज्जैन रोड स्थित शिव मंदिर का बताया जा रहा है। युवती मंदिर में पूजा करने के लिए पहुंची थी। उसने अपनी स्कूटी मंदिर के पास खड़ी की थी। पूजा पूरी करने के बाद जब वह वापस स्कूटी के पास आई तो उसकी नजर वाहन के अंदर मौजूद सांप की पूंछ पर पड़ी। सांप को देखते ही वह घबरा गई और उसने आसपास के लोगों को बुलाया। कुछ ही समय में वहां बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए।

    सूचना मिलने पर सर्प मित्र शाहिद अली अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे। उस समय तक सांप स्कूटी के अंदर इंजन के आसपास के हिस्से में जाकर छिप चुका था। सांप को बाहर निकालने के लिए टीम ने पहले वाहन के अलग अलग हिस्सों की जांच की। काफी कोशिश के बाद भी सांप आसानी से बाहर नहीं आया। इसके बाद स्कूटी की डिक्की और दूसरे जरूरी पार्ट्स को खोलकर अंदर छिपे सांप की तलाश की गई।

    सर्प मित्र और उनकी टीम करीब एक घंटे तक स्कूटी में सांप की तलाश करती रही। सांप इंजन के पास जाकर इस तरह छिपा हुआ था कि उसे सीधे बाहर निकालना आसान नहीं था। टीम ने बेहद सावधानी के साथ स्कूटी के हिस्से खोले और सांप तक पहुंचने की कोशिश की। काफी मशक्कत के बाद आखिरकार सांप को सुरक्षित तरीके से बाहर निकाल लिया गया।

    सर्प मित्र शाहिद अली ने बताया कि सांप स्कूटी के अंदर काफी गहराई तक चला गया था। इसी वजह से उसे बाहर निकालने के लिए वाहन के कई हिस्सों को खोलना पड़ा। राहत की बात यह रही कि सांप जहरीला नहीं था। इसके बावजूद टीम ने पूरी सावधानी के साथ उसका रेस्क्यू किया ताकि सांप या आसपास मौजूद किसी व्यक्ति को नुकसान न पहुंचे।

    सांप के बाहर निकलने के बाद मौके पर मौजूद लोगों ने राहत की सांस ली। जिस स्कूटी में कुछ देर पहले तक सांप छिपा हुआ था उसे देखने के लिए भी लोगों की भीड़ लगी रही। रेस्क्यू के बाद सांप को किसी तरह की चोट नहीं आई और उसे सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया। बाद में उसे जंगल में छोड़ दिया गया।

    इस घटना ने एक बार फिर यह दिखाया कि बारिश और बदलते मौसम के दौरान सांप सुरक्षित और गर्म जगह की तलाश में वाहनों के अंदर भी पहुंच सकते हैं। ऐसे में वाहन खड़ा करने के बाद उसे चलाने से पहले आसपास और खासकर खुले हिस्सों की जांच करना जरूरी है। अगर किसी वाहन में सांप दिखाई दे तो खुद उसे पकड़ने या निकालने की कोशिश करने के बजाय प्रशिक्षित सर्प मित्र या विशेषज्ञ की मदद लेना ज्यादा सुरक्षित रहता है।

  • बारिश में रोज 2 से 4 सांपों का रेस्क्यू, 12 फीट के सांप से आधे घंटे चला मुकाबला; नाग पंचमी पर इंदौर में कड़ी निगरानी

    बारिश में रोज 2 से 4 सांपों का रेस्क्यू, 12 फीट के सांप से आधे घंटे चला मुकाबला; नाग पंचमी पर इंदौर में कड़ी निगरानी


    इंदौर । इंदौर में बारिश का मौसम शुरू होते ही सांपों के घरों और रिहायशी इलाकों में निकलने की घटनाएं बढ़ जाती हैं। कभी घर के कमरे में सांप दिखाई देता है तो कभी कार ऑफिस गार्डन या किसी खाली जगह पर उसके निकलने की सूचना मिलती है। ऐसे में जब भी किसी के घर या आसपास सांप दिखाई देता है तो लोगों के बीच घबराहट फैल जाती है। लेकिन 65 वर्षीय कैलाशनाथ ऐसे लोगों के लिए मदद का भरोसा बन चुके हैं। पिछले 53 वर्षों से सांपों का रेस्क्यू कर रहे कैलाशनाथ आज भी फोन आते ही अपना सामान उठाकर मौके की ओर निकल पड़ते हैं। समय दिन का हो या रात के 2 या 3 बजे का उनका प्रयास रहता है कि जरूरतमंद तक जल्द पहुंचा जा सके।

    कैलाशनाथ ने महज 12 साल की उम्र में हाथ में छड़ी लेकर सांप पकड़ना शुरू किया था। उन्होंने अपने माता पिता को सांप पकड़ते हुए देखा और धीरे धीरे इसी काम को सीखते चले गए। समय के साथ उन्होंने सांपों की अलग अलग प्रजातियों को पहचानने और उन्हें बिना नुकसान पहुंचाए सुरक्षित तरीके से पकड़ने का अनुभव हासिल किया। आज उम्र 65 वर्ष हो चुकी है लेकिन सांपों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने का उनका सिलसिला जारी है। बारिश के दिनों में उन्हें रोजाना करीब 2 से 4 सांपों के रेस्क्यू के लिए फोन आ रहे हैं।

    कैलाशनाथ के अनुसार इंदौर में बारिश के दौरान रोजाना करीब 40 सांपों के निकलने की सूचनाएं सामने आ सकती हैं। इनमें ज्यादातर सांप जहरीले नहीं होते। उनके और उनके समुदाय के अन्य लोगों का काम सांपों को पकड़कर सुरक्षित स्थान पर छोड़ना है। उनका कहना है कि सांप को देखकर घबराने के बजाय लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए क्योंकि ज्यादातर घटनाओं में सांप खुद इंसान पर हमला नहीं करता बल्कि खतरा महसूस होने पर प्रतिक्रिया करता है।

    कैलाशनाथ के रेस्क्यू करियर में कई ऐसे मामले भी आए हैं जिन्हें वे आज तक नहीं भूल पाए हैं। किला मैदान में एक बार करीब 12 फीट लंबा सांप मिला था। आकार बड़ा होने के कारण वह आसानी से काबू में नहीं आ रहा था। उसे सुरक्षित पकड़ने में करीब 30 मिनट तक प्रयास करना पड़ा। कैलाशनाथ बताते हैं कि लगातार कोशिश के दौरान उनकी सांस तक फूल गई थी लेकिन आखिरकार सांप को सुरक्षित तरीके से काबू में कर लिया गया और बाद में उसे सुरक्षित स्थान पर छोड़ दिया गया।

    कैलाशनाथ कहते हैं कि सांप देखकर ज्यादातर लोग डर जाते हैं और ऐसे समय में उन्हें किसी अनुभवी व्यक्ति की जरूरत होती है। उनका कहना है कि लोगों की परेशानी उनके लिए सबसे पहले है इसलिए रात के 2 या 3 बजे भी फोन आए तो वे मौके पर पहुंचने की कोशिश करते हैं। उनके लिए समय देखकर काम करना संभव नहीं है। उनका सबसे बड़ा संदेश यही है कि सांप दिखने पर उसे छेड़ने या मारने की कोशिश न करें बल्कि प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम या वन विभाग को सूचना दें।

    सांप को पकड़ने के लिए कैलाशनाथ परिस्थिति के अनुसार अलग अलग उपकरणों का इस्तेमाल करते हैं। यदि सांप एक जगह बैठा हो या धीरे धीरे आगे बढ़ रहा हो तो छड़ी की मदद से उसके शरीर को नियंत्रित किया जाता है। इसके बाद उसे सावधानी से पकड़कर सुरक्षित थैली में रखा जाता है। अगर सांप तेजी से भाग रहा हो तो कैचर का इस्तेमाल किया जाता है। वहीं यदि सांप किसी छेद बिल या सामान के पीछे छिपा हो तो आसपास की चीजों को धीरे धीरे हटाकर उसे बाहर आने दिया जाता है और फिर सुरक्षित तरीके से रेस्क्यू किया जाता है। उनके मुताबिक सबसे ज्यादा खतरा तब पैदा होता है जब लोग खुद सांप को पकड़ने या डंडे से दबाने की कोशिश करते हैं।

    सांप के काटने की स्थिति में भी लोगों को झाड़ फूंक और घरेलू नुस्खों से बचने की जरूरत है। काटे गए स्थान पर रस्सी या कपड़ा कसकर बांधना घातक हो सकता है। घाव को काटना या जहर चूसने की कोशिश भी नहीं करनी चाहिए। ऐसी स्थिति में व्यक्ति को शांत रखते हुए बिना देरी किए नजदीकी अस्पताल ले जाना जरूरी है।

    इधर नाग पंचमी को देखते हुए इंदौर वन विभाग ने भी निगरानी बढ़ा दी है। सांपों के प्रदर्शन और उन्हें लेकर घूमने वालों के खिलाफ कार्रवाई के लिए तीन दल बनाए गए हैं। नवलखा भंवरकुआं रिंग रोड और आसपास के इलाकों की जिम्मेदारी कोमल पालीवाल को दी गई है। राजबाड़ा विजय नगर और शहरी क्षेत्र की निगरानी आशीष यादव संभालेंगे। वहीं अन्नपूर्णा लाबरिया भेरू और आसपास के क्षेत्रों की जिम्मेदारी महेश सोनगरा को दी गई है। वन विभाग की टीमें शहर के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी निगरानी करेंगी। ऐसे में नाग पंचमी के दौरान सांपों के साथ किसी भी तरह का प्रदर्शन या उन्हें लेकर घूमने की गतिविधि सामने आने पर कार्रवाई की जाएगी।