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  • वर्दी से वायरल स्टार तक का सफर, सोशल मीडिया कमाई और विभागीय कार्रवाई के बीच क्यों दिया हेड कॉन्स्टेबल ने इस्तीफा

    वर्दी से वायरल स्टार तक का सफर, सोशल मीडिया कमाई और विभागीय कार्रवाई के बीच क्यों दिया हेड कॉन्स्टेबल ने इस्तीफा


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश पुलिस के सबसे चर्चित सोशल मीडिया चेहरों में शामिल शहडोल के निलंबित हेड कॉन्स्टेबल विवेकानंद तिवारी इन दिनों फिर सुर्खियों में हैं। करोड़ों फॉलोअर्स और सोशल मीडिया पर जबरदस्त लोकप्रियता हासिल करने वाले तिवारी ने पुलिस सेवा से इस्तीफा देकर सबको चौंका दिया। हालांकि उनका इस्तीफा अभी विभाग ने स्वीकार नहीं किया है और पूरे मामले की विभागीय जांच जारी है। इस घटनाक्रम ने सरकारी सेवा और सोशल मीडिया से होने वाली कमाई के बीच संतुलन को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

    विवेकानंद तिवारी फेसबुक यूट्यूब और इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म पर बेहद लोकप्रिय हैं। उनके सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म मिलाकर करीब एक करोड़ अठासी लाख फॉलोअर्स बताए जाते हैं। पुलिस विभाग ने तीन जून को उन्हें निलंबित किया था। आरोप था कि वे कई बार बिना अनुमति ड्यूटी से अनुपस्थित रहे और इसी दौरान वर्दी में वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर अपलोड करते रहे। इसके करीब दो सप्ताह बाद उन्होंने पुलिस सेवा से इस्तीफा दे दिया।

    विभागीय जांच में सबसे बड़ा सवाल उनकी सोशल मीडिया से होने वाली आय को लेकर उठा है। विभिन्न ऑनलाइन एनालिटिक्स वेबसाइटों के अनुमानों के आधार पर दावा किया जा रहा है कि उनके डिजिटल प्लेटफॉर्म से लाखों रुपये मासिक और करोड़ों रुपये सालाना की संभावित कमाई हो सकती है। हालांकि इन आंकड़ों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। विवेकानंद तिवारी ने इन दावों को बढ़ा चढ़ाकर पेश किया गया बताया है। उनका कहना है कि वास्तविक आय इससे काफी कम है और सभी सोशल मीडिया अकाउंट उनकी पत्नी के नाम पर संचालित होते हैं। उन्होंने जांच एजेंसियों को अपने और पत्नी के बैंक खातों का पूरा रिकॉर्ड भी उपलब्ध कराने की बात कही है।

    पुलिस विभाग का दूसरा आरोप यह है कि तिवारी कई बार निर्धारित समय पर ड्यूटी पर नहीं पहुंचे और बिना अनुमति अनुपस्थित रहे। विभाग के अनुसार जिन दिनों उनकी गैरहाजिरी दर्ज हुई उन्हीं दिनों उनके सोशल मीडिया अकाउंट पर नए वीडियो अपलोड किए गए। वहीं तिवारी का कहना है कि वे मेडिकल अवकाश पर थे और इसकी जानकारी विभाग के आधिकारिक व्हाट्सएप ग्रुप में पहले ही साझा कर दी गई थी। उनके अनुसार अवकाश की प्रक्रिया पूरी नहीं होने के कारण गलतफहमी पैदा हुई और उन्हें अनुपस्थित मान लिया गया।

    विवाद का एक बड़ा कारण वर्दी में वीडियो बनाना भी बना। पुलिस मुख्यालय पहले ही स्पष्ट निर्देश जारी कर चुका है कि कोई भी पुलिसकर्मी वर्दी में ऐसे वीडियो या रील नहीं बनाएगा जिससे विभाग की गरिमा प्रभावित हो। विभाग का आरोप है कि विवेकानंद तिवारी निजी वीडियोग्राफरों और कर्मचारियों की मदद से व्यावसायिक उद्देश्य से कंटेंट तैयार करते थे। हालांकि तिवारी का कहना है कि उन्होंने कभी ड्यूटी के दौरान वीडियो नहीं बनाए और अधिकतर वीडियो पहले से रिकॉर्ड किए गए थे जिन्हें उनकी पत्नी बाद में अपलोड करती थीं।

    मामले के दौरान पुलिस विभाग ने उन्हें दो विकल्प भी दिए थे। पहला यह कि वे पुलिस के सोशल मीडिया सेल में रहकर जनजागरूकता से जुड़े आधिकारिक वीडियो बनाएं। दूसरा यह कि वे पुलिस मुख्यालय की सोशल मीडिया शाखा में सेवाएं दें। लेकिन इससे पहले ही उन्होंने इस्तीफा सौंप दिया।

    विवेकानंद तिवारी का कहना है कि निलंबन के बाद लगातार मानसिक दबाव और अपमान की भावना के कारण उन्होंने नौकरी छोड़ने का निर्णय लिया। दूसरी ओर विभाग से जुड़े सूत्रों का मानना है कि सोशल मीडिया से संभावित अधिक आय भी इस फैसले का एक कारण हो सकती है। फिलहाल विभागीय जांच जारी है और अंतिम निष्कर्ष उसी के बाद सामने आएगा।

  • सोशल मीडिया की ताकत रंग लाई: यूट्यूबर लीला साहू की वर्षों पुरानी मांग पूरी, गांव में शुरू हुआ सड़क निर्माण

    सोशल मीडिया की ताकत रंग लाई: यूट्यूबर लीला साहू की वर्षों पुरानी मांग पूरी, गांव में शुरू हुआ सड़क निर्माण


    सीधी । सोशल मीडिया के दौर में अगर आवाज बुलंद हो और इरादे मजबूत हों तो बदलाव मुमकिन हैयह साबित कर दिखाया है सीधी जिले की यूट्यूबर और सोशल मीडिया इन्फ्लूएंसर लीला साहू ने। वर्षों से खराब सड़क को लेकर संघर्ष कर रहीं लीला की मांग अब पूरी हो गई है। सड़क निर्माण का काम शुरू होते ही गांव में खुशी और उत्साह का माहौल है।

    जिला मुख्यालय से लगभग 40 किलोमीटर दूर ग्राम खड्डी से बैगहा टोला तक करीब 10 किलोमीटर का यह सड़क मार्ग वर्षों से बदहाल स्थिति में था। खासकर बरसात के मौसम में हालात इतने खराब हो जाते थे कि गांव तक पहुंचना किसी चुनौती से कम नहीं था। गर्भवती महिलाओं बुजुर्गों और मरीजों को अस्पताल ले जाना मानो टेढ़ी खीर बन गया था। इसी दुर्दशा को लेकर लीला साहू ने सोशल मीडिया को हथियार बनाया और सड़क की सच्चाई देश-दुनिया के सामने रखी।

    लीला साहू ने सड़क की बदहाली को लेकर कई वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किए जो देखते ही देखते वायरल हो गए। उन्होंने प्रधानमंत्री से लेकर केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री तक गुहार लगाई वहीं स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सांसदों पर भी नाराजगी जाहिर की थी। उनके वीडियो ने न सिर्फ प्रशासन का ध्यान खींचा बल्कि यह मुद्दा प्रदेशभर में चर्चा का विषय बन गया।

    अब जब सड़क निर्माण कार्य शुरू हो गया है तो लीला साहू ने गांव वालों के साथ खुशी जाहिर करते हुए एक बार फिर सोशल मीडिया पर वीडियो साझा किया है। इस वीडियो में उन्होंने प्रदेश के मुखिया स्थानीय सांसद और मीडिया का धन्यवाद किया है। उनका कहना है कि यह जीत अकेले उनकी नहीं बल्कि पूरे गांव की है जिसने वर्षों तक कठिनाइयों का सामना किया।

    ग्रामीणों का कहना है कि पक्की सड़क बनने से अब उन्हें शिक्षा स्वास्थ्य और रोजगार के बेहतर अवसर मिल सकेंगे। बच्चों को स्कूल पहुंचने में आसानी होगी और आपात स्थिति में अस्पताल तक पहुंचना सरल होगा। गांव में विकास की नई उम्मीद जगी है।

    लीला साहू की यह सफलता इस बात का उदाहरण है कि जब आम नागरिक अपनी बात मजबूती से और सही मंच पर रखता है तो सिस्टम को भी सुनना पड़ता है। सोशल मीडिया की ताकत और जनआवाज ने एक बार फिर साबित कर दिया कि बदलाव संभव है।

  • सूर्यकुमार यादव विवाद मामले में खुशी मुखर्जी पर 100 करोड़ का मानहानि केस, सोशल मीडिया बयान बना कानूनी संकट

    सूर्यकुमार यादव विवाद मामले में खुशी मुखर्जी पर 100 करोड़ का मानहानि केस, सोशल मीडिया बयान बना कानूनी संकट




    नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट टीम के टी20 कप्तान सूर्यकुमार यादव को लेकर अभिनेत्री खुशी मुखर्जी का दिया गया बयान अब बड़े कानूनी विवाद में बदल गया है। खुशी मुखर्जी ने हाल ही में एक इंटरव्यू में दावा किया था कि सूर्यकुमार यादव उन्हें बार-बार मैसेज किया करते थे। यह बयान सामने आते ही सोशल मीडिया पर हंगामा मच गया और क्रिकेट फैंस ने इसे लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी।
    मुंबई के सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर फैजान अंसारी ने खुशी मुखर्जी के खिलाफ 100 करोड़ रुपये का मानहानि दावा दायर कर दिया है। फैजान अंसारी का कहना है कि खुशी मुखर्जी के आरोप बेबुनियाद हैं और इससे एक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर की प्रतिष्ठा को गंभीर नुकसान पहुंचा है। उनके अनुसार इस तरह के बयान केवल सुर्ख़ियों में आने और पब्लिसिटी पाने के लिए दिए गए हैं।

    फैजान अंसारी ने खुद गाजीपुर पुलिस स्टेशन जाकर लिखित शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने मीडिया से कहा कि इस मामले में कड़ी कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए और दोषियों को सजा मिलनी चाहिए।

    अंसारी का यह भी कहना है कि यह मामला केवल सूर्यकुमार यादव की नहीं, बल्कि पूरे देश के एक सम्मानित खिलाड़ी की प्रतिष्ठा का सवाल है।

    उन्होंने साफ किया कि खुशी मुखर्जी के खिलाफ 100 करोड़ रुपये का मानहानि मुकदमा दायर कर दिया गया है। यदि अभिनेत्री अपने आरोप सबूतों के साथ साबित कर देती हैं, तो वह सार्वजनिक रूप से माफी मांगने के लिए तैयार हैं, लेकिन तब तक वह पीछे हटने वाले नहीं हैं।

    खुशी मुखर्जी ने अपने इंटरव्यू में यह स्पष्ट किया था कि उनके और सूर्यकुमार यादव के बीच कभी कोई निजी या रोमांटिक रिश्ता नहीं रहा, लेकिन उनके मैसेज वाले बयान ने ही विवाद को जन्म दिया। अब यह मामला कानूनी लड़ाई तक पहुंच गया है, और अगले कदमों पर सभी की नजर है।

  • सनातन धर्म की मुखर आवाज हर्षा रिछारिया का बड़ा फैसला, प्रचार कार्य से लिया पूर्ण विराम

    सनातन धर्म की मुखर आवाज हर्षा रिछारिया का बड़ा फैसला, प्रचार कार्य से लिया पूर्ण विराम


    ग्वालियर। अपनी ओजस्वी वाणी और प्रखर तर्कों के माध्यम से सोशल मीडिया पर सनातन धर्म का पक्ष रखने वाली चर्चित व्यक्तित्व हर्षा रिछारिया ने एक चौंकाने वाला फैसला लिया है। हर्षा ने घोषणा की है कि वह अब सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार के कार्यों से विराम ले रही हैं। लंबे समय से हिंदुत्व और भारतीय संस्कृति के मूल्यों को युवाओं तक पहुँचाने में सक्रिय रहीं हर्षा के इस निर्णय ने उनके लाखों प्रशंसकों को स्तब्ध कर दिया है।

    अचानक लिए गए निर्णय के पीछे के संकेत हर्षा रिछारिया ने अपने आधिकारिक माध्यमों से जानकारी साझा करते हुए बताया कि वह अब इस क्षेत्र से दूरी बना रही हैं। हालांकि उन्होंने इस फैसले के पीछे किसी एक विशिष्ट कारण का उल्लेख नहीं किया है लेकिन उनके इस कदम को उनके निजी जीवन और आत्ममंथन से जोड़कर देखा जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे अपनी इच्छा से यह विराम ले रही हैं और भविष्य में उनकी क्या योजनाएं हैं इस पर अभी सस्पेंस बना हुआ है।

    सोशल मीडिया पर रहा है गहरा प्रभाव गौरतलब है कि हर्षा रिछारिया ने बहुत कम समय में डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाई थी। उनके वीडियो और वक्तव्य अक्सर सोशल मीडिया पर वायरल होते थे जिनमें वे सनातन परंपराओं शास्त्रों और समसामयिक मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखती थीं। उनके तर्कपूर्ण वीडियो के कारण ही वे युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय हुईं। उनके इस विराम से उन लोगों में निराशा है जो उन्हें धर्म के एक सशक्त पक्षकार के रूप में देखते थे।

    क्या यह स्थाई विदाई है? हर्षा के इस फैसले के बाद इंटरनेट पर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। कुछ लोग इसे उनकी निजी पसंद मान रहे हैं तो कुछ का मानना है कि वे किसी नए स्वरूप में वापसी कर सकती हैं। फिलहाल उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि वे अभी किसी भी प्रकार के सार्वजनिक प्रचार कार्य का हिस्सा नहीं रहेंगी। उनके समर्थकों ने उनके इस निर्णय का सम्मान करते हुए उनके सुखद भविष्य की कामना की है।

  • सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर ज्योति अधिकारी कौन हैं? देवी-देवताओं पर विवादित टिप्पणी के बाद हुईं गिरफ्तार

    सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर ज्योति अधिकारी कौन हैं? देवी-देवताओं पर विवादित टिप्पणी के बाद हुईं गिरफ्तार

    उत्तराखंड ।  उत्तराखंड के हल्द्वानी में सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर ज्योति अधिकारी के खिलाफ पुलिस ने सख्त कार्रवाई करते हुए उन्हें गिरफ्तार कर लिया है. बुधवार को मुखानी थाने में दिनभर चली पूछताछ के बाद देर रात ज्योति अधिकारी को सामाजिक और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के आरोप में हिरासत में लिया गया.

    पुलिस ने उन्हें रात करीब 11 बजे रिमांड मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया, जहां से अदालत ने उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया.

    धार्मिक भावनाएं आहत करने और आर्म्स एक्ट में हुआ मुकदमा दर्ज
    पुलिस के अनुसार, ज्योति अधिकारी पर आरोप है कि उन्होंने हाल ही में अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान आपत्तिजनक बयान दिए थे. बताया जा रहा है कि प्रदर्शन के दौरान उन्होंने हाथ में दरांती लहराई और कुमाऊं व पहाड़ी क्षेत्र की महिलाओं को लेकर अभद्र टिप्पणी की. इसके अलावा उन्होंने कुमाऊं के लोक देवताओं के अस्तित्व और परंपराओं पर भी सवाल खड़े किए, जिसे धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला माना गया.

    इन बयानों के सामने आने के बाद स्थानीय लोगों और विभिन्न संगठनों में नाराजगी फैल गई. जिसके बाद शिकायत के आधार पर पुलिस ने ज्योति अधिकारी के खिलाफ धार्मिक भावनाएं आहत करने, सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने और आर्म्स एक्ट से जुड़े प्रावधानों में मुकदमा दर्ज किया. इसके बाद उन्हें पूछताछ के लिए थाने भी बुलाया गया.

    साल 2021 से फेसबुक और यूट्यूब पर बनाती थी वीडियो
    पूछताछ के दौरान थाने के बाहर ज्योति अधिकारी के समर्थक भी जमा हो गए और हंगामा करते रहे, जिसके बाद पुलिस को दिनभर स्थिति संभालनी पड़ी. शाम होते-होते पुलिस ने ज्योति अधिकारी की गिरफ्तारी की पुष्टि की. पुलिस का कहना है कि सार्वजनिक मंच पर हथियार लहराना और उत्तेजक बयान देना कानून व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है. ज्योति अधिकारी सोशल मीडिया पर एक चर्चित चेहरा रही हैं. उन्होंने साल 2021 में फेसबुक और यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म पर सक्रिय रूप से वीडियो बनाना शुरू किया था.

    वह मुख्य रूप से डांस वीडियो अपलोड करती थीं, लेकिन समय-समय पर सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर भी टिप्पणी करती नजर आती थीं. बीते कुछ समय से अंकिता भंडारी मामले को लेकर बनाए गए उनके एक वीडियो खास विवादों में रहा. पुलिस सूत्रों का कहना है कि ज्योति अधिकारी पहले भी अपने विवादित बयानों के कारण चर्चा में रह चुकी हैं. इस बार सार्वजनिक सभा में दरांती लहराना और समुदाय विशेष, महिलाओं तथा धार्मिक मान्यताओं पर की गई टिप्पणी उनके लिए भारी पड़ गई. पुलिस ने साफ किया है कि मामले की जांच जारी है और कानून के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी.