Tag: Social Media Regulation

  • सोशल मीडिया नियंत्रण को लेकर बढ़ा राजनीतिक विवाद, केजरीवाल ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

    सोशल मीडिया नियंत्रण को लेकर बढ़ा राजनीतिक विवाद, केजरीवाल ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप


    नई दिल्ली। देश में सोशल मीडिया के संभावित नियमन को लेकर एक नई राजनीतिक बहस शुरू हो गई है, जिसमें आम आदमी पार्टी के प्रमुख Arvind Kejriwal ने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री Narendra Modi पर गंभीर आरोप लगाए हैं। यह विवाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X के कम्युनिटी नोट्स फीचर को लेकर प्रस्तावित बदलावों के संदर्भ में सामने आया है।

    अरविंद केजरीवाल ने आरोप लगाया है कि सरकार सोशल मीडिया पर नियंत्रण स्थापित करने की दिशा में कदम बढ़ा रही है, जिससे आम जनता विशेषकर युवाओं की आवाज को दबाया जा सके। उनका कहना है कि देश में बढ़ती असंतुष्टि और आलोचना से निपटने के बजाय सरकार नियमों के जरिए अभिव्यक्ति को सीमित करने का प्रयास कर रही है।

    उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में सोशल मीडिया एक ऐसा मंच बन गया है जहां युवा अपनी राय खुलकर व्यक्त करते हैं और सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हैं। ऐसे में यदि इस मंच पर नियंत्रण की कोशिश की जाती है तो यह लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए चिंताजनक संकेत हो सकता है।

    इस पूरे विवाद की पृष्ठभूमि में सूचना प्रौद्योगिकी से जुड़े नियमों में संभावित संशोधन बताए जा रहे हैं। चर्चा है कि कम्युनिटी नोट्स जैसे यूजर आधारित तथ्य जांच तंत्र को सरकारी दायरे में लाने पर विचार किया जा रहा है। यदि ऐसा होता है तो उन टिप्पणियों या नोट्स को हटाने का अधिकार सरकार के पास हो सकता है जो आधिकारिक दावों या सूचनाओं को चुनौती देते हैं।

    विपक्षी दलों का आरोप है कि इस प्रकार के बदलाव अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रत्यक्ष प्रभाव डाल सकते हैं। उनका मानना है कि इससे स्वतंत्र रूप से तथ्य प्रस्तुत करने और सरकारी नीतियों की आलोचना करने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। वहीं सत्ता पक्ष की ओर से इस विषय पर औपचारिक स्थिति स्पष्ट किए जाने की प्रतीक्षा की जा रही है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि डिजिटल युग में सोशल मीडिया केवल संवाद का माध्यम नहीं रह गया है, बल्कि यह जनमत निर्माण का एक शक्तिशाली उपकरण बन चुका है। ऐसे में इसके नियमन और स्वतंत्रता के बीच संतुलन बनाना किसी भी सरकार के लिए चुनौतीपूर्ण कार्य होता है।

    इस मुद्दे ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि सोशल मीडिया पर नियंत्रण की सीमाएं क्या होनी चाहिए और किस हद तक सरकार को हस्तक्षेप का अधिकार होना चाहिए। एक ओर जहां गलत सूचनाओं पर रोक लगाने की जरूरत बताई जाती है, वहीं दूसरी ओर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को सुरक्षित रखने की मांग भी उतनी ही मजबूत है।

     इस विषय पर राजनीतिक बयानबाजी तेज है और आने वाले समय में इस पर व्यापक चर्चा और स्पष्ट नीतिगत दिशा सामने आने की संभावना है, जिससे यह तय होगा कि देश में डिजिटल अभिव्यक्ति का भविष्य किस दिशा में आगे बढ़ेगा।

  • गाजियाबाद ट्रिपल सुसाइड मामला संसद में गूंजा, कांग्रेस ने की सोशल मीडिया को लेकर ठोस नीति बनाने की मांग

    गाजियाबाद ट्रिपल सुसाइड मामला संसद में गूंजा, कांग्रेस ने की सोशल मीडिया को लेकर ठोस नीति बनाने की मांग


    नई दिल्ली। कांग्रेस ने शुक्रवार को राज्यसभा में सोशल मीडिया के दुरुपयोग को लेकर चिंता जताई और केंद्र सरकार से इसके लिए ठोस और पारदर्शी नीति बनाने का आग्रह किया। सांसदों ने ऑनलाइन झूठ, अफवाह और धमकियों के फैलाव पर सवाल उठाए और इस पर जिम्मेदारों की जवाबदेही तय करने की मांग की।

    कांग्रेस सांसद राजीव शुक्ला ने गाजियाबाद में हाल ही में तीन युवतियों की मौत का हवाला देते हुए कहा कि सोशल मीडिया आज सबसे प्रभावशाली माध्यम बन चुका है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में कोई भी बिना रोक-टोक सामग्री साझा कर सकता है, जिससे किसी की प्रतिष्ठा को गंभीर नुकसान पहुँच सकता है।

    राजीव शुक्ला ने कहा, “एक बार पोस्ट वायरल हो जाए, तो झूठी जानकारी हटाना लगभग असंभव हो जाता है। न प्लेटफॉर्म जिम्मेदारी लेता है और न लेखक सामने आता है।” उन्होंने जोर देकर कहा कि गाजियाबाद की तीन लड़कियों की मानसिक स्थिति पर सोशल मीडिया की अफवाहों और कंटेंट का नकारात्मक असर पड़ा।

    सोशल मीडिया पर जवाबदेही की आवश्यकता:
    सांसद ने कहा कि जहां हथियार और जहर नियंत्रित करने वाले कड़े कानून हैं, वहीं सोशल मीडिया पर झूठ फैलाने वालों के लिए कोई स्पष्ट जवाबदेही नहीं है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि एक पारदर्शी सोशल मीडिया पॉलिसी बनाई जाए, जो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा करे और गलत जानकारी फैलाने वालों को जिम्मेदार ठहराए।

    गाजियाबाद ट्रिपल सुसाइड:
    इस हफ्ते गाजियाबाद में तीन सगी बहनों ने 9वीं मंजिल से कूदकर आत्महत्या कर ली। पुलिस की प्रारंभिक जांच में पता चला कि वे कोरियन गेम्स और डिजिटल कंटेंट की आदत में थीं। इस घटना ने बच्चों और किशोरों के सोशल मीडिया उपयोग को लेकर चिंता बढ़ा दी।

    सरकार के मौजूदा नियम:
    हाल के वर्षों में सरकार ने ऑनलाइन कंटेंट नियंत्रित करने के लिए कई नियम बनाए हैं, जैसे सूचना प्रौद्योगिकी (इंटरमीडियरी गाइडलाइंस और डिजिटल मीडिया एथिक्स कोड) नियम, 2021। ये प्लेटफॉर्म्स के लिए शिकायत निवारण, ट्रेसबिलिटी अनुरोध, लोकल नोडल अधिकारियों की नियुक्ति और समय सीमा में कंटेंट हटाने जैसी जिम्मेदारियों को स्पष्ट करते हैं।

    फिर भी, पूरे ऑनलाइन स्पेस को रेगुलेट करने वाली व्यापक सोशल मीडिया पॉलिसी नहीं है। कांग्रेस ने इसे आवश्यक बताते हुए कहा कि झूठ, अफवाह और ऑनलाइन धमकियों के फैलाव को रोकने के लिए तुरंत ठोस नीति बनाना जरूरी है।