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  • सेवा के नाम रहा विश्वास सारंग का जन्मदिन, वर्चुअल आयोजन के साथ गरीबों को कंबल-भोजन और स्वास्थ्य सुविधाएं

    सेवा के नाम रहा विश्वास सारंग का जन्मदिन, वर्चुअल आयोजन के साथ गरीबों को कंबल-भोजन और स्वास्थ्य सुविधाएं


    भोपाल। मध्य प्रदेश के सहकारिता खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास सारंग ने इस वर्ष अपने जन्मदिन को पारंपरिक समारोहों से अलग हटकर सेवा और सामाजिक सरोकारों के साथ मनाया। उन्होंने व्यक्तिगत मिलन या भव्य आयोजन से दूरी बनाते हुए जन्मदिन को वर्चुअल माध्यम से मनाने का निर्णय लिया जिससे अधिक से अधिक लोग सेवा कार्यों से जुड़ सकें।मंत्री के इस आह्वान पर प्रदेशभर में उनके समर्थक कार्यकर्ता और शुभचिंतक सामाजिक सेवा गतिविधियों में सक्रिय नजर आए। विभिन्न जिलों और बस्तियों में गरीब बेसहारा और जरूरतमंद लोगों को कंबल गर्म कपड़े और भोजन वितरित किया गया। ठंड के मौसम को देखते हुए यह पहल खास तौर पर जरूरतमंदों के लिए राहत लेकर आई।

    सेवा कार्य केवल भोजन और वस्त्र वितरण तक सीमित नहीं रहा। कई स्थानों पर निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर रक्तदान कार्यक्रम और जागरूकता अभियान भी आयोजित किए गए जिससे आम लोगों को प्रत्यक्ष लाभ मिला। इसके साथ ही पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए बड़ी संख्या में पौधारोपण किया गया।शिक्षा के क्षेत्र में भी योगदान देते हुए नरेला विधानसभा क्षेत्र सहित अन्य इलाकों में विद्यार्थियों को किताबें और स्टेशनरी वितरित की गईं। आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों के लिए शैक्षणिक सामग्री उपलब्ध कराकर शिक्षा को प्रोत्साहित किया गया।

    जन्मदिन के अवसर पर मंत्री विश्वास सारंग ने मथुरा में संतजनों को भोजन कराया और गिरिराज धाम में दर्शन-पूजन कर प्रदेशवासियों के सुख-समृद्धि की कामना की। इस दौरान उन्होंने सामाजिक एकता सेवा और संवेदनशीलता को जीवन का महत्वपूर्ण मूल्य बताया।सोशल मीडिया पर भी इस अनूठे जन्मदिन की झलक देखने को मिली। ट्विटर एक्स पर HBDVishvasSarang हैशटैग लंबे समय तक ट्रेंड करता रहा। मंत्री ने जनता के प्रति आभार जताते हुए कहा कि जनता का विश्वास और आशीर्वाद ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने यह भी कहा कि जन्मदिन जैसे व्यक्तिगत अवसरों को समाज सेवा से जोड़ना हर सार्वजनिक प्रतिनिधि का दायित्व होना चाहिए।

    सामाजिक कार्यकर्ताओं और विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के प्रयास समाज में सकारात्मक संदेश देते हैं और नेतृत्व की सही परिभाषा प्रस्तुत करते हैं। वर्चुअल माध्यम से जन्मदिन मनाने का यह प्रयोग दिखाता है कि व्यक्तिगत उत्सव से अधिक समाज के प्रति जिम्मेदारी अहम है।कुल मिलाकर विश्वास सारंग का जन्मदिन केवल एक व्यक्तिगत अवसर न होकर सेवा सहयोग और सामाजिक चेतना का प्रतीक बनकर सामने आया जिसने जनसेवा के नए मानक स्थापित किए।

  • पुंडरीक गोस्वामी यूपी पुलिस ने गार्ड ऑफ ऑनर देकर उठाया विवाद कौन हैं ये युवा कथावाचक

    पुंडरीक गोस्वामी यूपी पुलिस ने गार्ड ऑफ ऑनर देकर उठाया विवाद कौन हैं ये युवा कथावाचक


    बहराइच । उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में हाल ही में एक घटना ने विवाद को जन्म दिया जब पुलिस ने एक निजी कार्यक्रम के दौरान युवा कथावाचक पुंडरीक गोस्वामी को गार्ड ऑफ ऑनर दिया। यह घटना सोशल मीडिया पर वायरल हो गई और कई लोग इसे लेकर सवाल उठाने लगे कि क्या एक निजी आयोजन में पुलिस का इस प्रकार का सम्मान देना उचित था। पुलिस की इस अति भक्ति पर राज्य के डीजीपी ने बहराइच के एसपी से स्पष्टीकरण मांगा है और विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।

    कौन हैं पुंडरीक गोस्वामी

    पुंडरीक गोस्वामी एक प्रसिद्ध युवा कथावाचक हैं जो वृंदावन से ताल्लुक रखते हैं। उनका जन्म 20 जुलाई 1988 को हुआ था और उन्होंने मात्र सात साल की उम्र से कथा सुनानी शुरू कर दी थी। वे उच्च शिक्षा के लिए ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी गए थे और वहां से अपनी शिक्षा पूरी की। पुंडरीक गोस्वामी श्रीभूति कृष्ण गोस्वामी जी महाराज के पुत्र और प्रसिद्ध संत अतुल कृष्ण गोस्वामी जी महाराज के पौत्र हैं। पुंडरीक गोस्वामी विश्व भर में गौड़ीय वैष्णव परंपरा का प्रचार कर रहे हैं। वे श्री कृष्ण श्रीमद्भागवतम भगवद गीता चैतन्य चरितामृत और राम कथा पर प्रवचन देते हैं। इसके अलावा वे समाज सेवा में भी सक्रिय हैं और वंचितों के लिए निशुल्क चिकित्सा शिविरों का आयोजन करते हैं। साथ ही वे गरीब बच्चों को शिक्षा भी प्रदान करते हैं।

    युवाओं के प्रेरणास्त्रोत

    पुंडरीक गोस्वामी ने गोपाल क्लब और निमाई पाठशाला जैसे कार्यक्रमों की शुरुआत की है जिनके माध्यम से वे युवाओं को भारतीय संस्कृति और भक्ति परंपरा से जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं। उनके परिवार में 38 पीढ़ियों से भागवत कथा की परंपरा चली आ रही है जो उनके आध्यात्मिक मार्ग पर चलने का कारण बनती है। ऑक्सफोर्ड से शिक्षा प्राप्त करने के बाद उन्होंने अपनी आध्यात्मिक यात्रा जारी रखी और अब वे श्रीमद माधव-गौडेश्वर पीठम के 38वें आचार्य के रूप में कार्यरत हैं।

    विवाद का केंद्र: गार्ड ऑफ ऑनर

    यह घटना उस समय सामने आई जब पुलिस ने पुंडरीक गोस्वामी को बहराइच में एक निजी कार्यक्रम के दौरान गार्ड ऑफ ऑनर दिया। इस कार्यक्रम का वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो गईं जिससे यह मामला विवाद का विषय बन गया। पुलिस की इस कार्रवाई ने कई सवाल उठाए जिनमें यह प्रमुख था कि क्या एक निजी व्यक्ति को पुलिस द्वारा इस तरह का सम्मान देना उचित था।

    यह घटना राज्य की पुलिस और स्थानीय प्रशासन के बीच कुछ असहमति का कारण बन गई और डीजीपी ने बहराइच के एसपी से स्पष्टीकरण मांगा। सोशल मीडिया पर लोग इसे पुलिस की अति भक्ति और अनुशासनहीनता का उदाहरण मान रहे हैं। कई लोगों ने इस सवाल को उठाया कि क्या धार्मिक या सामाजिक व्यक्तित्वों को इस प्रकार का सरकारी सम्मान देना सही है।

    समाज में पुंडरीक गोस्वामी का योगदान

    पुंडरीक गोस्वामी का समाज में योगदान और धार्मिक क्षेत्र में उनकी सक्रियता सराहनीय है। उन्होंने हमेशा भारतीय संस्कृति भक्ति परंपरा और समाज सेवा में अपनी भूमिका निभाई है। उनका प्रयास युवाओं को धार्मिक और सांस्कृतिक ज्ञान से जोड़ने का है जो समाज की भलाई के लिए महत्वपूर्ण है।  हालांकि पुलिस द्वारा उन्हें सम्मानित करने का तरीका विवादास्पद हो सकता है लेकिन पुंडरीक गोस्वामी की व्यक्तिगत भूमिका और उनके योगदान को नकारा नहीं जा सकता। वे आज की युवा पीढ़ी के लिए एक प्रेरणास्त्रोत बने हुए हैं जो धार्मिक कार्यों में गहरी रुचि रखते हैं।

    इस विवाद के बावजूद पुंडरीक गोस्वामी का योगदान समाज और धर्म के क्षेत्र में अत्यधिक महत्वपूर्ण है। हालांकि पुलिस द्वारा उन्हें सम्मानित करने के तरीके पर सवाल उठाए गए हैं यह स्पष्ट है कि उन्होंने अपनी आध्यात्मिक यात्रा और समाज सेवा के माध्यम से बहुत से लोगों की मदद की है। अब देखने वाली बात यह होगी कि इस मामले में प्रशासन क्या कदम उठाता है और पुलिस की इस कार्रवाई को लेकर क्या निर्णय लिया जाता है।

  • मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने श्रद्धेय भगवत शरण माथुर जी का किया पुण्य स्मरण, बताया प्रेरणापुंज

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने श्रद्धेय भगवत शरण माथुर जी का किया पुण्य स्मरण, बताया प्रेरणापुंज


    भोपाल । रविवार, 14 दिसम्बर 2025 को मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ और अत्यंत श्रद्धेय प्रचारक भगवत शरण माथुर जी को उनकी पुण्यतिथि के अवसर पर श्रद्धापूर्वक नमन किया। मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में माथुर जी के बहुमूल्य योगदान और निस्वार्थ सेवाभाव को याद किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि श्रद्धेय भगवत शरण माथुर जी का जीवन वास्तव में सेवा समर्पण और संगठनात्मक निष्ठा का एक उत्कृष्ट उदाहरण रहा है। उन्होंने अपने सार्वजनिक जीवन के हर पल को पूरी तन्मयता निष्ठा और लगन से समाज एवं संगठन की सेवा में समर्पित कर दिया।

    संगठन और समाज के लिए समर्पण

    डॉ. यादव ने आगे कहा कि माथुर जी ने न केवल राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सिद्धांतों को आत्मसात किया, बल्कि उसे अपने जीवन में उतारकर एक आदर्श प्रस्तुत किया। उनका कार्यक्षेत्र व्यापक रहा और उन्होंने जहाँ भी कार्य किया वहाँ अपनी गहरी छाप छोड़ी। संघ के एक वरिष्ठ प्रचारक के रूप में उन्होंने लाखों कार्यकर्ताओं को राष्ट्र और समाज के उत्थान के लिए प्रेरित किया। उनके मार्गदर्शन में असंख्य युवाओं ने देश सेवा के मार्ग पर चलना सीखा। मुख्यमंत्री ने इस बात पर ज़ोर दिया कि जिस तरह माथुर जी ने विपरीत परिस्थितियों में भी अपनी निष्ठा को अडिग रखा वह वर्तमान और भावी पीढ़ियों के लिए एक महान सीख है। उनका जीवन हमें यह प्रेरणा देता है कि किसी भी कार्य को सफल बनाने के लिए केवल लगन ही नहीं, बल्कि उस उद्देश्य के प्रति पूर्ण समर्पण भी आवश्यक है।

    प्रेरणापुंज बने रहेंगे श्रद्धेय माथुर जी
    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने माथुर जी को याद करते हुए कहा श्रद्धेय भगवत शरण माथुर जी का जीवन हम सभी के लिए एक प्रेरणापुंज है। उनके द्वारा स्थापित सेवा के उच्च मानदंड हमें निरंतर स्मरण दिलाते रहेंगे कि राजनीतिक और सामाजिक जीवन का अंतिम उद्देश्य जन कल्याण और राष्ट्र का उत्थान होना चाहिए।उन्होंने कहा कि ऐसे समर्पित और निस्वार्थ व्यक्तित्वों के कारण ही देश और समाज संगठनात्मक रूप से मजबूत होता है।
    डॉ. यादव ने माथुर जी के दिखाए गए मार्ग पर चलने और उनके मूल्यों को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।इस पुण्य स्मरण के अवसर पर, राज्य के कई अन्य गणमान्य व्यक्तियों और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ताओं ने भी श्रद्धेय भगवत शरण माथुर जी को श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके अतुलनीय योगदान को याद किया। उनका स्मरण केवल एक औपचारिकता नहीं है बल्कि देश के प्रति निःस्वार्थ सेवा के उनके आदर्शों को पुनर्जीवित करने का एक अवसर है।