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  • सामाजिक और आर्थिक बदलाव की राह पर भारत…. देश के 2.8 करोड़ बच्चे बने पहली शिक्षित पीढ़ी

    सामाजिक और आर्थिक बदलाव की राह पर भारत…. देश के 2.8 करोड़ बच्चे बने पहली शिक्षित पीढ़ी


    नई दिल्ली।
    भारत (India) में करीब 2.8 करोड़ बच्चे ऐसे हैं, जिन्होंने अपने परिवार में छह साल की स्कूली शिक्षा (School Education) पूरी करने वाली पहली पीढ़ी बनकर पीढ़ियों से चले आ रहे अभाव के बीच बदलाव की नई शुरुआत की है। यह आंकड़ा बताता है कि शिक्षा अब केवल बच्चों के भविष्य को बदलने का माध्यम नहीं, बल्कि परिवारों में सामाजिक और आर्थिक बदलाव (Social and Economic changes) की राह भी बना रही है। हालांकि, वैश्विक आंकड़े यह भी बताते हैं कि शिक्षा की इस प्रगति को टिकाऊ बनाने के लिए बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य और घर की बुनियादी सुविधाओं पर भी समान ध्यान देना होगा।

    ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के ऑक्सफोर्ड पॉवर्टी एंड ह्यूमन डेवलपमेंट इनिशिएटिव (ओपीएचआई) के अध्ययन में विकासशील देशों में बच्चों की गरीबी, कुपोषण और शिक्षा की स्थिति का विश्लेषण किया गया है। अध्ययन में संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम और ओपीएचआई के वैश्विक बहुआयामी गरीबी सूचकांक के आंकड़ों का इस्तेमाल किया गया है। इसमें गरीबी को केवल परिवार की आय से नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर से जुड़े कई अभावों के आधार पर देखा गया है।

    रिपोर्ट के अनुसार भारत में शिक्षा की पहली पीढ़ी बनने वाले 2.8 करोड़ बच्चों का आंकड़ा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि एक बच्चे का स्कूल पहुंचना केवल उसके व्यक्तिगत जीवन में बदलाव नहीं लाता। जब किसी परिवार में पहली बार कोई बच्चा छह साल की स्कूली शिक्षा पूरी करता है, तो वह अगली पीढ़ी के लिए शिक्षा को सामान्य और जरूरी बनाने की दिशा में भी कदम बढ़ाता है।

    अध्ययन के अनुसार दुनिया के 108 देशों में 10 से 17 वर्ष की उम्र के करीब 7.1 करोड़ बच्चे ऐसे हैं, जिन्होंने अपने परिवार में कम से कम छह साल की स्कूली शिक्षा पूरी करने वाली पहली पीढ़ी का दर्जा हासिल किया है। इनमें करीब आधे बच्चे दक्षिण एशिया में हैं। भारत इस बदलाव में सबसे बड़ी हिस्सेदारी वाले देशों में शामिल है।

    दक्षिण एशिया में भारत के अलावा बांग्लादेश में 30 लाख से अधिक, पाकिस्तान में करीब 20 लाख, नेपाल में 8.37 लाख और अफगानिस्तान में करीब 5.08 लाख बच्चे इस श्रेणी में हैं। भारत, भूटान और बांग्लादेश में इस तरह अपने परिवार की पहली शिक्षित पीढ़ी बनने वाली बच्चियों की हिस्सेदारी लड़कों की तुलना में अधिक पाई गई है। बच्चों के जीवन में शिक्षा और पोषण की चुनौतियां एक-दूसरे से अलग नहीं हैं। अध्ययन में विकासशील देशों के पांच साल से कम उम्र के 51.8 करोड़ बच्चों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। इनमें 25.2 करोड़ बच्चे कुपोषण, बहुआयामी गरीबी या दोनों से प्रभावित पाए गए।


    महिलाओं की शिक्षा से भी जुड़ी बच्चों की स्थिति

    बहुआयामी गरीबी में रहने वाले दो-तिहाई से अधिक बच्चे ऐसे परिवारों से हैं, जहां किसी महिला ने छह साल की स्कूली शिक्षा पूरी नहीं की है। स्कूल से बाहर रहने वाले गरीब बच्चों में यह अनुपात करीब 82 फीसदी है।


    शिक्षा की राह खुली, मंजिल दूर

    अध्ययन की तस्वीर में भारत के लिए एक तरफ 2.8 करोड़ बच्चों की उपलब्धि उम्मीद पैदा करती है तो दूसरी तरफ यह भी स्पष्ट करती है कि शिक्षा को गरीबी से स्थायी मुक्ति का माध्यम बनाने के लिए कई मोर्चों पर एक साथ काम करना होगा। पोषण, स्वास्थ्य, स्वच्छ पानी, स्वच्छता, आवास और सामाजिक सुरक्षा जैसी सुविधाओं के बिना केवल स्कूल तक पहुंच सुनिश्चित करना पर्याप्त नहीं होगा।


    13.6 करोड़ बच्चे स्कूल से बाहर

    108 देशों में स्कूल जाने की उम्र के करीब 104 करोड़ बच्चों के आंकड़ों में 13.6 करोड़ बच्चे स्कूल से बाहर पाए गए। इनमें 11 करोड़ यानी 80 फीसदी से अधिक बच्चे बहुआयामी गरीबी में भी हैं। अध्ययन के अनुसार, स्कूल से बाहर रहने वाले गरीब बच्चों को औसतन पांच अन्य प्रकार के अभावों का भी सामना करना पड़ता है।

  • 'अंधभक्त' कहे जाने पर ईशा कोपिकर और कंगना रनौत का पलटवार, राष्ट्रप्रेम और देशहित को बताया सर्वोपरि

    'अंधभक्त' कहे जाने पर ईशा कोपिकर और कंगना रनौत का पलटवार, राष्ट्रप्रेम और देशहित को बताया सर्वोपरि

    नई दिल्ली । सोशल मीडिया पर अक्सर अभिनेत्रियों और सार्वजनिक हस्तियों को अपनी बेबाक राय के कारण आलोचनाओं और ट्रोलिंग का सामना करना पड़ता है। हाल ही में अभिनेत्री ईशा कोपिकर को इंटरनेट पर ‘अंधभक्त’ कहकर निशाना बनाया गया, जिसके बाद उन्होंने बेहद कड़े शब्दों में अपनी बात रखी। इस पूरे विवाद के सामने आने के बाद भारतीय जनता पार्टी की सांसद और अभिनेत्री कंगना रनौत भी ईशा कोपिकर के समर्थन में आगे आई हैं और उन्होंने इस विषय पर अपनी सहमति व्यक्त की है।

    यह विवाद तब शुरू हुआ था जब ईशा कोपिकर ने देश में चल रहे छात्र आंदोलनों के दौरान प्रधानमंत्री के प्रति आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग करने वाले लोगों का विरोध किया था। उन्होंने ऐसे कृत्य को देशहित के खिलाफ बताते हुए अपनी असहमति दर्ज कराई थी। इसके बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर उन्हें ट्रोल किया जाने लगा। इसके जवाब में ईशा ने एक वीडियो संदेश जारी कर स्पष्ट किया कि यदि देश की भलाई सोचना और उसके प्रति निष्ठा रखना भक्ति है, तो वे इस शब्द को स्वीकार करने में संकोच नहीं करेंगी।

    ईशा कोपिकर के इस रुख की सराहना करते हुए कंगना रनौत ने उनके वीडियो को अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर साझा किया। कंगना ने लिखा कि ईशा ने इस मुद्दे को बहुत ही स्पष्ट और तार्किक तरीके से जनता के सामने रखा है। उन्होंने अपने जीवन के अनुभवों का संदर्भ देते हुए कहा कि अपने अधिकारों, न्याय और राष्ट्र के प्रति आवाज उठाना हमेशा से उनके स्वभाव का हिस्सा रहा है। उन्होंने छात्र जीवन से लेकर अपने पेशेवर करियर तक में अनुचित बातों के खिलाफ हमेशा स्टैंड लिया है।

    कंगना रनौत ने आगे कहा कि अपने परिवार, समाज और देश के प्रति सम्मान और प्रेम रखना किसी भी नागरिक का स्वाभाविक गुण होना चाहिए। वे जिन भी लोगों और विचारों से प्रभावित होती हैं, उनके प्रति आदर भाव रखती हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि देश और देशवासियों के प्रति निष्ठा को किसी नकारात्मक टैग से जोड़कर देखना अनुचित है। जब भी समाज में कुछ गलत होगा, तो उसके खिलाफ बोलना और जब कुछ अच्छा होगा, तो उसकी सराहना करना एक जिम्मेदार नागरिक का कर्तव्य है।

    ईशा कोपिकर ने भी अपने संदेश में यह साफ कर दिया था कि वे किसी राजनीतिक एजेंडे से प्रभावित होकर नहीं, बल्कि एक नागरिक के रूप में अपनी राय रखती हैं। वे गलत नीतियों का विरोध और सही कार्यों की प्रशंसा बिना किसी हिचकिचाहट के करती रहेंगी। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे देशहित में सोचने वालों के प्रति अपनी मानसिकता में बदलाव लाएं और रचनात्मक चर्चा को बढ़ावा दें।

    इस घटनाक्रम के बाद मनोरंजन जगत और राजनीतिक क्षेत्रों में अभिव्यक्ति की आजादी और ऑनलाइन ट्रोलिंग को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है। मध्य प्रदेश सहित देश के विभिन्न राज्यों में भी सोशल मीडिया यूजर्स इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। कई लोगों का मानना है कि राष्ट्रप्रेम और व्यक्तिगत विचारों की अभिव्यक्ति को राजनीतिक चश्मे से देखने के बजाय एक स्वतंत्र सोच के रूप में देखा जाना चाहिए।

  • अभिनेता ऋतिक रोशन और सबा आजाद के रिश्ते को लेकर सोशल मीडिया पर तेज हुईं कई तरह की अटकलें

    अभिनेता ऋतिक रोशन और सबा आजाद के रिश्ते को लेकर सोशल मीडिया पर तेज हुईं कई तरह की अटकलें

    नई दिल्ली । बॉलीवुड अभिनेता ऋतिक रोशन और अभिनेत्री व संगीतकार सबा आजाद के व्यक्तिगत संबंधों को लेकर सोशल मीडिया पर विभिन्न प्रकार की चर्चाएं और अटकलें तेजी से फैल रही हैं। पिछले कुछ समय से दोनों कलाकारों के रिश्ते में बदलाव को लेकर इंटरनेट पर कई तरह के दावे किए जा रहे हैं। इन चर्चाओं की मुख्य वजह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सामने आई कुछ कथित तस्वीरें और प्रोफाइल बताई जा रही हैं, जिन्हें लेकर नेटिजन्स तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं व्यक्त कर रहे हैं।

    सोशल मीडिया पर एक नेटवर्किंग ऐप से जुड़े प्रोफाइल की तस्वीरें प्रसारित हो रही हैं, जिसमें अभिनेता ऋतिक रोशन की तस्वीर और उनके पेशे का विवरण दर्ज है। इन वायरल तस्वीरों के आधार पर कई लोग यह अनुमान लगा रहे हैं कि अभिनेता और सबा आजाद के बीच सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। हालांकि, प्रसारित की जा रही इन जानकारियों और तस्वीरों की सत्यता तथा प्रामाणिकता की स्वतंत्र रूप से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है।

    ऑनलाइन मंचों पर इन खबरों के सामने आने के बाद प्रशंसकों और इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की ओर से मिला-जुला रुख देखने को मिल रहा है। जहां कुछ लोग इन अफवाहों के आधार पर तरह-तरह के कयास लगा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर अभिनेता के कई प्रशंसकों ने उनका बचाव किया है। प्रशंसकों का कहना है कि किसी भी वायरल सामग्री के आधार पर निष्कर्ष निकालना अनुचित है और संभव है कि यह किसी फर्जी प्रोफाइल या पुरानी जानकारी का परिणाम हो।

    गौरतलब है कि ऋतिक रोशन और सबा आजाद के बीच संबंधों की खबरें पहली बार वर्ष 2021 के अंत में सामने आई थीं। इसके बाद वर्ष 2022 की शुरुआत में दोनों को कई सार्वजनिक स्थलों और कार्यक्रमों में एक साथ देखा गया, जिसके बाद उनके रिश्ते को लेकर आधिकारिक रूप से बातें सामने आईं। दोनों कलाकारों को अक्सर विभिन्न फिल्म समारोहों, पारिवारिक आयोजनों और सार्वजनिक कार्यक्रमों में साथ देखा जाता रहा है, जहां उनकी बॉन्डिंग की काफी सराहना भी की जाती थी।

    ऋतिक रोशन के व्यक्तिगत जीवन की बात करें तो उन्होंने वर्ष 2000 में सुजैन खान से विवाह किया था। हालांकि, वर्ष 2014 में दोनों ने आपसी सहमति से एक-दूसरे से अलग होने का निर्णय लिया था। इसके बाद से ही ऋतिक रोशन अपनी व्यक्तिगत और व्यावसायिक जिंदगी को लेकर अक्सर चर्चा में बने रहते हैं। वहीं दूसरी तरफ सबा आजाद भी फिल्म उद्योग का एक जाना-माना नाम हैं, जो अभिनय के साथ-साथ संगीत और रंगमंच के क्षेत्र में भी सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं।

    वर्तमान में प्रसारित हो रही इन तमाम अटकलों और सोशल मीडिया दावों पर ऋतिक रोशन या सबा आजाद की ओर से कोई आधिकारिक टिप्पणी या स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। दोनों ही कलाकारों ने इस पूरे विषय पर चुप्पी साध रखी है। फिल्म उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि सेलिब्रिटीज के व्यक्तिगत जीवन को लेकर अक्सर इस तरह की निराधार अफवाहें उड़ती रहती हैं और जब तक संबंधित पक्षों की ओर से कोई बयान नहीं आता, तब तक इन खबरों को महज एक अटकलबाजी ही माना जाना चाहिए।