Tag: society

  • यूसीसी महिलाओं और बेटियों को समाज में सुरक्षा और बराबरी का अधिकार दिलाएगा ; हेमंत खण्डेलवाल

    यूसीसी महिलाओं और बेटियों को समाज में सुरक्षा और बराबरी का अधिकार दिलाएगा ; हेमंत खण्डेलवाल


    भोपाल। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष व विधायक हेमंत खण्डेलवाल ने मध्यप्रदेश विधानसभा में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक पारित होने पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को बधाई देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश ने यूसीसी लागू कर इतिहास रचा दिया है। भाजपा सरकार का यह निर्णय मध्यप्रदेश के इतिहास में सामाजिक न्याय, समानता और संवैधानिक मूल्यों को सशक्त बनाने वाला ऐतिहासिक अध्याय है। यूसीसी महिलाओं और बेटियों को समाज में सुरक्षा और बराबरी का अधिकार दिलाएगा। इस कानून से सामाजिक समरसता, महिला सशक्तिरण के साथ संवैधानिक मूल्यों को नई मजबूती मिलेगी।

    मध्यप्रदेश ने समान न्याय, समान अधिकारों की भावना को साकार किया
    भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष व विधायक श्री हेमंत खण्डेलवाल ने कहा कि विधानसभा द्वारा यूसीसी विधेयक पारित कर मध्यप्रदेश ने समान न्याय, समान अधिकारों की भावना को साकार किया है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के समान न्याय और समान अधिकारों की भावना को साकार करने की दिशा में मध्यप्रदेश ने महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। लिव-इन रिलेशनशिप का 1 महीने में रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होगा। नियमों का उल्लंघन करना दण्डनीय अपराध है। हमारी सरकार ने जनजातीय समाज को यूसीसी कानून के दायरे से पूरी तरह बाहर रखा है। जनजातीय समुदाय की संस्कृति से कोई छेड़छाड़ नहीं की गई है। मध्यप्रदेश में अब एक ही कानून चलेगा। उन्होंने कहा कि महिलाओं के अधिकारों की रक्षा, सामाजिक समरसता तथा पारदर्शी कानूनी व्यवस्था स्थापित करने की दिशा में यह एक दूरगामी और प्रभावी निर्णय सिद्ध होगा।

    विधानसभा की स्वीकृति से संविधान की मूल भावना को मिली मजबूती
    भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष व विधायक श्री हेमंत खण्डेलवाल ने कहा कि समान नागरिक संहिता विधेयक का विधानसभा से पारित होना संविधान के नीति-निर्देशक तत्वों में निहित उस भावना को साकार करने वाला कदम है, जिसमें सभी नागरिकों के लिए समान नागरिक कानून की परिकल्पना की गई है। समान नागरिक संहिता समाज के सभी वर्गों के लिए समान कानूनी व्यवस्था सुनिश्चित करेगी, जिससे नागरिकों के अधिकार एवं कर्तव्य किसी पंथ अथवा व्यक्तिगत परंपराओं के आधार पर अलग-अलग न होकर संविधान की भावना के अनुरूप समान रूप से लागू होंगे। यह निर्णय न्यायिक समानता, सामाजिक समरसता और सुशासन को नई मजबूती प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि लंबे समय से विभिन्न व्यक्तिगत कानूनों के कारण विशेषकर महिलाओं को न्याय प्राप्त करने में अनेक व्यावहारिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। समान नागरिक संहिता इन चुनौतियों का समाधान प्रस्तुत करते हुए महिलाओं को अधिक अधिकार-संपन्न बनाने तथा उनके हितों की प्रभावी सुरक्षा सुनिश्चित करने का मार्ग प्रशस्त करेगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि समान नागरिक संहिता मध्यप्रदेश को अधिक समरस, न्यायपूर्ण और प्रगतिशील राज्य बनाने में मील का पत्थर सिद्ध होगी।
  • मोहन भागवत ने कहाआरएसएस को भाजपा के नजरिए से देखना गलतमुस्लिम विरोधी होने के आरोपों को खारिज किया

    मोहन भागवत ने कहाआरएसएस को भाजपा के नजरिए से देखना गलतमुस्लिम विरोधी होने के आरोपों को खारिज किया


    नई दिल्ली । राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ आरएसएस के सरसंघचालक मोहन भागवत ने रविवार को कोलकाता में आरएसएस 100 व्याख्यान माला कार्यक्रम के दौरान संघ के बारे में अहम बयान दिया। भागवत ने कहा कि आरएसएस का कोई राजनीतिक एजेंडा नहीं है और इसे भारतीय जनता पार्टी भा,ज,पा, के नजरिए से देखना गलत है। उन्होंने साफ किया कि संघ और भाजपा अलग-अलग संगठन हैंजिनकी भूमिकाएं भी अलग हैंभले ही भाजपा के कई नेता संघ से जुड़े हुए हों।

    भागवत ने कहायदि आप संघ को समझना चाहते हैंतो इसका अनुभव करना पड़ेगा। अगर आप इसे सिर्फ एक और सेवा संगठन मानते हैंतो आप गलत हैं। उन्होंने यह भी कहा कि संघ का काम कभी भी संकीर्ण दृष्टिकोण से नहीं समझा जाना चाहिए। बहुत से लोग संघ को भाजपा से जोड़कर देखते हैंलेकिन यह एक बड़ी गलती है। संघ को राजनीति से परे और समाज की भलाईसुरक्षा और एकता के लिए काम करने वाला संगठन माना जाना चाहिए।

    संघ प्रमुख ने मुस्लिम विरोधी होने के आरोपों को भी पूरी तरह से नकारा किया। भागवत ने कहाऐसी धारणा पूरी तरह से तथ्यों के बजाय कथाओं पर आधारित है। हमारा काम पारदर्शी है और जो लोग हमारे काम को समझते हैंउन्होंने यह निष्कर्ष निकाला है कि हम कट्टर राष्ट्रवादी हैंजो हिंदुओं की सुरक्षा के लिए काम करते हैंलेकिन हम मुस्लिम विरोधी नहीं हैं। उन्होंने आलोचकों से आग्रह किया कि वे संघ का दौरा करें और इसे सीधे समझें। भागवत ने संघ के मुख्य उद्देश्य को भी स्पष्ट कियाजिसमें नैतिक रूप से ईमानदार और गुणी व्यक्तियों का निर्माण करना हैजो सेवामूल्यों और राष्ट्रीय गौरव से प्रेरित हों और देश के विकास में योगदान करें। उन्होंने कहासंघ का उद्देश्य किसी से दुश्मनी रखना नहीं हैबल्कि समाज में एकता और सहयोग को बढ़ावा देना है।

    इसके अलावाभागवत ने भारतीय समाज को एकजुट करने की आवश्यकता पर बल दिया और हिंदू समुदाय को अपनी सांस्कृतिक और सामाजिक जड़ों की ओर लौटने की अपील की। बंगाल की ऐतिहासिक विरासत का उल्लेख करते हुए उन्होंने स्वामी विवेकानंदराजा राम मोहन रॉय और नेताजी सुभाष चंद्र बोस जैसी महान हस्तियों को याद कियाजिनकी सामाजिक सुधार में अहम भूमिका थी। उन्होंने खास तौर पर राजा राम मोहन रॉय की तारीफ कीजो सामाजिक बदलाव की दिशा में अग्रणी थेऔर कहा कि आरएसएस उसी सुधारात्मक विरासत को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।

    भागवत ने कहा कि आरएसएस का उद्देश्य भारत को एक बार फिर विश्वगुरु बनाना है और इसके लिए समाज को तैयार करना संघ का कर्तव्य है। इसके तहतसंघ ने अपनी शताब्दी समारोह के अवसर पर कोलकातादिल्लीमुंबई और बेंगलुरु जैसे प्रमुख शहरों में लेक्चर और सेशन आयोजित करने की योजना बनाई हैताकि जनता को संघ के काम और उद्देश्य को समझने का मौका मिल सके। इस दौरानभागवत ने लोगों से अपील की कि वे संघ के बारे में राय बनाने से पहले तथ्यों का अध्ययन करेंऔर अन्य स्रोतों की बजाय खुद संघ के काम को देखें।