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  • Surya Grahan 2026 Timing: रात 9:04 बजे से शुरू होगा सूर्य ग्रहण, भारत में नहीं दिखेगा; जानें क्या होंगे नियम

    Surya Grahan 2026 Timing: रात 9:04 बजे से शुरू होगा सूर्य ग्रहण, भारत में नहीं दिखेगा; जानें क्या होंगे नियम


    नई दिल्ली। साल 2026 का दूसरा और आखिरी सूर्य ग्रहण 12 अगस्त की रात को लगने जा रहा है। यह खगोलीय घटना भारतीय समय के अनुसार रात 9 बजकर 4 मिनट से शुरू होगी और 13 अगस्त की मध्य रात्रि के बाद समाप्त होगी। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक ग्रहण का मध्य समय रात करीब 11 बजकर 16 मिनट रहेगा और इसकी कुल अवधि लगभग 4 घंटे 24 मिनट बताई जा रही है। हालांकि इस पूरे घटनाक्रम का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। ऐसे में भारत में रहने वाले लोगों को इसे लेकर सूतक काल और धार्मिक नियमों का पालन करने की आवश्यकता नहीं होगी।

    सूर्य ग्रहण एक प्राकृतिक खगोलीय घटना है। जब सूर्य चंद्रमा और पृथ्वी लगभग एक सीध में आ जाते हैं और चंद्रमा सूर्य तथा पृथ्वी के बीच आ जाता है तब सूर्य की रोशनी का कुछ हिस्सा पृथ्वी तक पहुंचने से रुक जाता है। इसी दौरान पृथ्वी के कुछ हिस्सों से सूर्य ग्रहण दिखाई देता है। इस बार ग्रहण दक्षिण अफ्रीका जिम्बाब्वे जाम्बिया तंजानिया मॉरीशस अंटार्कटिका तथा दक्षिण अमेरिका के कुछ हिस्सों में देखा जा सकेगा। अर्जेंटीना और चिली के कुछ क्षेत्रों में भी इसकी दृश्यता बताई गई है।

    भारत में ग्रहण दिखाई नहीं देने के कारण धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यहां इसका सूतक काल भी मान्य नहीं होगा। इसका मतलब है कि मंदिरों के कपाट बंद करने भोजन को लेकर विशेष प्रतिबंध लगाने या सामान्य दिनचर्या रोकने की जरूरत नहीं होगी। गर्भवती महिलाओं के लिए भी केवल ग्रहण के नाम पर किसी विशेष तरह की पाबंदी वैज्ञानिक रूप से जरूरी नहीं मानी जाती। स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए बच्चे बुजुर्ग और मरीज अपनी जरूरत के अनुसार भोजन और पानी लेते रह सकते हैं।

    ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इस सूर्य ग्रहण को कर्क राशि और शतभिषा नक्षत्र से जोड़ा जा रहा है। ज्योतिष में सूर्य को आत्मबल नेतृत्व प्रतिष्ठा प्रशासन और ऊर्जा का कारक माना जाता है। इसलिए ग्रहण को लेकर राजनीतिक प्रशासनिक और सार्वजनिक जीवन से जुड़े क्षेत्रों पर प्रभाव की चर्चाएं भी की जा रही हैं। हालांकि प्राकृतिक आपदाओं राजनीतिक बदलाव या दुर्घटनाओं जैसी घटनाओं की निश्चित भविष्यवाणी केवल ग्रहण के आधार पर वैज्ञानिक रूप से नहीं की जा सकती।

    ग्रहण के दौरान धार्मिक आस्था रखने वाले लोग ध्यान मंत्र जाप और अपने इष्ट देव का स्मरण कर सकते हैं। ऊं घृणि सूर्याय नमः ऊं सूर्याय नमः या गायत्री मंत्र का जाप करने की परंपरा बताई जाती है। जरूरतमंदों को भोजन वस्त्र या आवश्यक सामग्री का दान भी धार्मिक दृष्टि से शुभ माना जाता है।

    जहां सूर्य ग्रहण दिखाई देगा वहां आंखों की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखना जरूरी होगा। सूर्य को बिना प्रमाणित सोलर व्यूइंग ग्लास या उचित फिल्टर के सीधे देखने से आंखों को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है। भारत में यह ग्रहण दिखाई नहीं देगा इसलिए यहां रहने वाले लोगों को इसे देखने के लिए किसी विशेष व्यवस्था की जरूरत नहीं होगी।

    ज्योतिषीय आकलन में कन्या तुला और कुंभ राशि के लिए ग्रहण को अपेक्षाकृत शुभ बताया जा रहा है जबकि कुछ अन्य राशियों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। हालांकि किसी व्यक्ति पर ग्रहण का प्रभाव उसकी जन्म कुंडली से जोड़कर देखा जाता है। इसलिए केवल राशि के आधार पर भय या चिंता करने के बजाय इसे एक खगोलीय घटना के रूप में समझना और धार्मिक मान्यताओं का पालन अपनी आस्था के अनुसार करना बेहतर है।

  • सावन शिवरात्रि के अगले दिन लगेगा साल का आखिरी सूर्य ग्रहण, रात 9:04 बजे शुरू होगा अद्भुत खगोलीय नजारा

    सावन शिवरात्रि के अगले दिन लगेगा साल का आखिरी सूर्य ग्रहण, रात 9:04 बजे शुरू होगा अद्भुत खगोलीय नजारा


    नई दिल्ली । साल 2026 का दूसरा और आखिरी सूर्य ग्रहण 12 अगस्त को लगने जा रहा है। यह पूर्ण सूर्य ग्रहण होगा और खगोलीय दृष्टि से बेहद खास माना जा रहा है। खास बात यह है कि यह सूर्य ग्रहण सावन शिवरात्रि के ठीक अगले दिन पड़ेगा। इसके साथ ही इसी दिन श्रावण मास की हरियाली अमावस्या भी रहेगी। ऐसे में धार्मिक और खगोलीय दोनों नजरिए से 12 अगस्त की तारीख महत्वपूर्ण हो गई है। हालांकि भारत में रहने वाले लोगों को इस ग्रहण का प्रत्यक्ष नजारा देखने को नहीं मिलेगा क्योंकि ग्रहण के समय भारत में रात होगी।

    भारतीय समय के अनुसार सूर्य ग्रहण 12 अगस्त की रात 9 बजकर 4 मिनट पर शुरू होगा और इसका समापन 13 अगस्त की देर रात 1 बजकर 27 मिनट पर होगा। ग्रहण अपने चरम यानी पीक पर रात करीब 11 बजकर 17 मिनट पर पहुंचेगा। चूंकि उस समय भारत के अधिकांश हिस्सों में रात होगी इसलिए यहां से सूर्य ग्रहण दिखाई नहीं देगा। खगोलीय गणना के अनुसार पूर्ण सूर्य ग्रहण का मुख्य नजारा उत्तरी गोलार्ध के कई क्षेत्रों में देखने को मिलेगा। ग्रीनलैंड आइसलैंड स्पेन रूस और अटलांटिक महासागर के कुछ हिस्सों में पूर्ण सूर्य ग्रहण का प्रभाव देखा जा सकेगा। इसके अलावा यूरोप के अधिकांश हिस्सों उत्तरी अमेरिका के कुछ क्षेत्रों और अफ्रीका के उत्तर पश्चिमी भागों में यह आंशिक सूर्य ग्रहण के रूप में नजर आएगा।

    अब सवाल यह है कि जब भारत में सूर्य ग्रहण दिखाई ही नहीं देगा तो क्या यहां सूतक काल भी माना जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सूर्य ग्रहण से करीब 12 घंटे पहले सूतक काल शुरू होता है लेकिन यह नियम सामान्य तौर पर उन्हीं स्थानों पर लागू माना जाता है जहां ग्रहण दिखाई देता है। चूंकि 12 अगस्त का सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा इसलिए भारत में इसका सूतक काल मान्य नहीं होगा। इसका मतलब यह है कि मंदिरों के कपाट बंद करने या धार्मिक और मांगलिक कार्य रोकने जैसी परंपराएं यहां लागू नहीं होंगी और सामान्य पूजा पाठ किया जा सकेगा।

    ज्योतिषीय नजरिए से भी इस सूर्य ग्रहण को महत्वपूर्ण बताया जा रहा है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार ग्रहण के समय ग्रहों की विशेष स्थिति का प्रभाव अलग अलग राशियों पर पड़ सकता है। ज्योतिषियों के मुताबिक सिंह कुंभ मेष और मकर राशि के जातकों को वाणी निवेश और स्वास्थ्य से जुड़े मामलों में सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है। वहीं मिथुन तुला और धनु राशि के लिए यह समय करियर और आर्थिक मामलों में सकारात्मक बदलाव के संकेत देने वाला माना जा रहा है। हालांकि ज्योतिषीय प्रभाव धार्मिक मान्यताओं और ज्योतिषीय गणनाओं पर आधारित होते हैं और इन्हें वैज्ञानिक भविष्यवाणी नहीं माना जाता।

    ग्रहण के दौरान धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सूर्य मंत्र या महामृत्युंजय मंत्र का मानसिक जाप करना शुभ माना जाता है। हरियाली अमावस्या के संयोग को देखते हुए जरूरतमंद लोगों को अन्न वस्त्र तिल या धन का दान करने की परंपरा भी बताई गई है। इसके अलावा इस अवसर पर पौधारोपण करना भी शुभ माना जाता है। इस तरह 12 अगस्त का सूर्य ग्रहण खगोलीय घटना होने के साथ धार्मिक मान्यताओं और ज्योतिषीय चर्चाओं के कारण भी लोगों के बीच खास आकर्षण का केंद्र बना रहेगा।

  • सूर्य ग्रहण में क्यों बंद कर दिए जाते हैं मंदिरों के कपाट? जानिए पूजा और मूर्ति स्पर्श से जुड़ी मान्यता

    सूर्य ग्रहण में क्यों बंद कर दिए जाते हैं मंदिरों के कपाट? जानिए पूजा और मूर्ति स्पर्श से जुड़ी मान्यता


    नई दिल्ली। सूर्य ग्रहण को लेकर भारतीय सनातन परंपरा में कई तरह की धार्मिक मान्यताएं और नियम बताए गए हैं। इनमें सबसे प्रमुख नियमों में ग्रहण के दौरान मंदिरों के कपाट बंद रखना और देवी-देवताओं की मूर्तियों को स्पर्श न करना शामिल है। धार्मिक मान्यता के अनुसार ग्रहण का समय सामान्य दिनों से अलग माना जाता है और इस दौरान पूजा-पाठ से जुड़े कई कार्यों को रोक दिया जाता है। हालांकि इन नियमों का संबंध मुख्य रूप से धार्मिक परंपराओं और आस्था से है। वैज्ञानिक दृष्टि से ग्रहण एक खगोलीय घटना है जिसमें सूर्य चंद्रमा और पृथ्वी एक विशेष स्थिति में आ जाते हैं।

    वैदिक परंपरा में सूर्य ग्रहण को अमावस्या से जोड़कर देखा जाता है। ग्रहण के समय सूतक काल जैसी मान्यताओं का भी उल्लेख मिलता है। परंपरागत मान्यता के अनुसार ग्रहण से पहले मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं और देवी-देवताओं की मूर्तियों को ढक दिया जाता है। इसके पीछे यह विश्वास माना जाता है कि ग्रहण का समय धार्मिक अनुष्ठानों के लिए सामान्य समय से अलग होता है और इस दौरान मंदिरों की पवित्रता बनाए रखने के लिए विशेष सावधानियां बरती जानी चाहिए।

    भगवान की मूर्ति को स्पर्श न करने की परंपरा भी इसी धार्मिक मान्यता से जुड़ी हुई है। हिंदू धर्म में मंदिर में स्थापित मूर्तियों को केवल पत्थर या धातु की प्रतिमा नहीं माना जाता बल्कि विधि-विधान से प्राण प्रतिष्ठित किए जाने के बाद उन्हें देवस्वरूप माना जाता है। इसलिए ग्रहण जैसे विशेष समय में मूर्ति को स्पर्श करने से बचने की परंपरा विकसित हुई। कई धार्मिक मान्यताओं में इस अवधि को आध्यात्मिक साधना और आत्मसंयम का समय भी माना गया है।

    सूतक काल को लेकर भी अलग-अलग धार्मिक परंपराओं में नियम मिलते हैं। इसमें भोजन करने से लेकर पूजा-पाठ और धार्मिक वस्तुओं के स्पर्श तक कई तरह के प्रतिबंध बताए जाते हैं। हालांकि इन नियमों का पालन क्षेत्र और परंपरा के अनुसार अलग-अलग हो सकता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि धार्मिक मान्यताओं को आस्था के संदर्भ में ही समझा जाना चाहिए।

    ग्रहण समाप्त होने के बाद मंदिर और घर की साफ-सफाई करने की परंपरा भी कई स्थानों पर देखने को मिलती है। मान्यता के अनुसार ग्रहण के बाद स्नान किया जाता है और इसके बाद देवी-देवताओं को स्नान कराकर पूजा-अर्चना की जाती है। कई परिवारों में मंदिर और पूजा स्थल पर गंगाजल का छिड़काव भी किया जाता है। इसके बाद भगवान की नियमित पूजा शुरू करने की परंपरा है। कुछ लोग इस अवसर पर जरूरतमंद लोगों को भोजन कपड़े या अन्य आवश्यक वस्तुओं का दान भी करते हैं।

    वर्ष 2026 के सूर्य ग्रहण को लेकर भी धार्मिक नियमों और मान्यताओं की चर्चा हो रही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार 12 अगस्त 2026 की रात से 13 अगस्त की सुबह तक ग्रहण की अवधि बताई गई है। लेकिन ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देने की स्थिति में यहां सूतक मानने को लेकर भी धार्मिक पंचांगों में अलग-अलग मत हो सकते हैं। इसलिए किसी विशेष धार्मिक नियम का पालन करने से पहले अपने क्षेत्र के पंचांग या संबंधित धार्मिक विद्वान की सलाह लेना उचित माना जाता है।

    कुल मिलाकर सूर्य ग्रहण में भगवान की मूर्ति को न छूने और मंदिर के कपाट बंद रखने की परंपरा धार्मिक आस्था और सदियों पुरानी मान्यताओं से जुड़ी हुई है। इन नियमों का उद्देश्य श्रद्धालुओं के लिए इस विशेष खगोलीय घटना को आध्यात्मिक अनुशासन और आत्मसंयम के अवसर के रूप में देखना भी रहा है। वहीं आधुनिक विज्ञान सूर्य ग्रहण को पूरी तरह एक खगोलीय घटना के रूप में समझता है। ऐसे में धार्मिक विश्वास और वैज्ञानिक तथ्य दोनों को उनके अपने संदर्भ में समझना जरूरी है।

  • दिन में ग्रहण और रात में जगमगाएगा आसमान, स्पेन के 10 आबादी वाले गांवों में दिखेगा अद्भुत खगोलीय नजारा

    दिन में ग्रहण और रात में जगमगाएगा आसमान, स्पेन के 10 आबादी वाले गांवों में दिखेगा अद्भुत खगोलीय नजारा


    नई दिल्ली।  12 अगस्त 2026 की शाम खगोल प्रेमियों के लिए बेहद खास होने वाली है। स्पेन के बुर्गोस प्रांत में स्थित छोटे से गांव अवेलानेसा दे मुन्यो में एक ऐसी दुर्लभ खगोलीय घटना देखने को मिलेगी जो लंबे समय तक लोगों की यादों में बनी रह सकती है। महज करीब 10 स्थायी निवासियों वाले इस गांव में सूर्य ग्रहण और पर्सीड्स उल्का वर्षा का अनोखा संयोग देखने के लिए दुनिया भर से लोगों के पहुंचने की उम्मीद है। सामान्य दिनों में शांत और लगभग अनजान रहने वाला यह गांव इस खास दिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खगोल प्रेमियों का ध्यान अपनी ओर खींचने वाला है।

    इस पूरे घटनाक्रम की सबसे खास बात सूर्य ग्रहण का समय है। 12 अगस्त को स्पेन में पूर्ण सूर्य ग्रहण सूर्यास्त के ठीक पहले दिखाई देगा। जब चंद्रमा सूर्य को पूरी तरह ढक लेगा तो कुछ समय के लिए दिन का उजाला अचानक कम होकर रात जैसा अंधेरा दिखाई देने लगेगा। इसके बाद ग्रहण समाप्त होने पर सूर्य की रोशनी वापस आएगी और कुछ ही देर बाद सूर्य सामान्य रूप से क्षितिज के नीचे चला जाएगा। इस कारण वहां मौजूद लोगों को एक ही शाम में दो अलग-अलग मौकों पर अंधेरा छाने का अनुभव हो सकता है। इसी प्रभाव को लोकप्रिय तौर पर डबल डार्कनेस कहा जा रहा है।

    यह खगोलीय रोमांच सूर्य ग्रहण तक सीमित नहीं रहेगा। रात होते ही आसमान में पर्सीड्स उल्का वर्षा का नजारा भी दिखाई दे सकता है। पर्सीड्स हर साल होने वाली प्रमुख उल्का वर्षाओं में शामिल है और अगस्त के दौरान इसकी गतिविधि अपने चरम के आसपास रहती है। जब अंतरिक्ष से आने वाले छोटे कण पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करते हैं तो घर्षण के कारण वे चमकदार लकीरों के रूप में दिखाई देते हैं। इन्हें आम बोलचाल में टूटते तारे कहा जाता है। एक ही दिन सूर्य ग्रहण और रात में उल्का वर्षा का नजारा इस आयोजन को और खास बना रहा है।

    अवेलानेसा दे मुन्यो की भौगोलिक स्थिति भी इसे इस घटना के लिए महत्वपूर्ण बनाती है। गांव के आसपास खुले गेहूं के खेत और पहाड़ी क्षेत्र हैं जहां पश्चिमी क्षितिज का विस्तृत दृश्य देखा जा सकता है। यहां शहरों जैसी तेज कृत्रिम रोशनी भी नहीं है। यही वजह है कि रात के समय आसमान में दिखाई देने वाले तारों और उल्काओं को देखने के लिए यह जगह अनुकूल मानी जा रही है।

    इस दुर्लभ नजारे ने स्थानीय लोगों में भी उत्साह पैदा कर दिया है। गांव छोड़कर वर्षों पहले शहरों में बस चुके कई पुराने निवासी भी इस खास अवसर पर वापस लौटने की तैयारी कर रहे हैं। स्थानीय स्तर पर पर्यटकों के लिए देखने की जगहों को लेकर तैयारियां की जा रही हैं। गांव में बड़े होटल और रेस्टोरेंट सीमित हैं लेकिन आसपास के कई ठहरने वाले स्थान पहले से ही बुक बताए जा रहे हैं। ऐसे में 12 अगस्त को यह छोटा सा गांव खगोल विज्ञान के प्रति उत्साही लोगों और पर्यटकों की बड़ी भीड़ का गवाह बन सकता है।

    यह आयोजन एक बार फिर दिखाता है कि ब्रह्मांड से जुड़ी घटनाएं किस तरह किसी छोटे और शांत स्थान को भी अचानक दुनिया के आकर्षण का केंद्र बना सकती हैं। सूर्य ग्रहण का अंधेरा और उसके बाद तारों से भरा आसमान इस गांव के लिए प्रकृति की ऐसी अनोखी प्रस्तुति बनने जा रहा है जिसे देखने के लिए लोग बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।

  • 12 अगस्त 2026 को लगेगा साल का आखिरी सूर्य ग्रहण, भारत में दिखेगा या नहीं जानिए असर

    12 अगस्त 2026 को लगेगा साल का आखिरी सूर्य ग्रहण, भारत में दिखेगा या नहीं जानिए असर


    नई दिल्ली ।खगोल विज्ञान में रुचि रखने वालों के लिए साल 2026 एक खास खगोलीय घटना लेकर आ रहा है। 12 अगस्त 2026 को साल का आखिरी पूर्ण सूर्य ग्रहण लगने जा रहा है जिसे दुनिया के कई हिस्सों में देखा जा सकेगा। यह एक ऐसी स्थिति होती है जब चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच आ जाता है और सूर्य की रोशनी को पूरी तरह या आंशिक रूप से ढक लेता है। इस दौरान कुछ समय के लिए दिन में अंधकार जैसा माहौल बन जाता है और आकाश में एक अद्भुत दृश्य दिखाई देता है।

    पूर्ण सूर्य ग्रहण में चंद्रमा सूर्य को पूरी तरह ढक लेता है जिससे सूर्य के चारों ओर चमकती हुई एक रिंग जैसी संरचना नजर आती है जिसे कोरोना कहा जाता है। यह दृश्य बेहद आकर्षक और दुर्लभ माना जाता है जिसे देखने के लिए वैज्ञानिक और आम लोग दोनों ही उत्साहित रहते हैं।

    इस बार का सूर्य ग्रहण मुख्य रूप से यूरोप के कुछ हिस्सों जैसे स्पेन ग्रीनलैंड आइसलैंड और आर्कटिक क्षेत्र में दिखाई देगा। हालांकि भारत में यह ग्रहण किसी भी हिस्से में दिखाई नहीं देगा। इसलिए भारतीय उपमहाद्वीप में इसे प्रत्यक्ष रूप से देखने का अवसर नहीं मिलेगा।

    भारत में इस सूर्य ग्रहण का कोई प्रभाव नहीं माना जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जो ग्रहण किसी क्षेत्र में दिखाई नहीं देता उसका सूतक काल भी लागू नहीं होता। ऐसे में भारत में लोग अपने दैनिक कार्य पूजा-पाठ और सामान्य दिनचर्या बिना किसी प्रतिबंध के जारी रख सकते हैं।

    वैज्ञानिक दृष्टिकोण से सूर्य ग्रहण को देखने के दौरान सावधानी बरतना बेहद जरूरी होता है। विशेषज्ञों के अनुसार इसे सीधे आंखों से देखना खतरनाक हो सकता है क्योंकि सूर्य की तीव्र किरणें आंखों को नुकसान पहुंचा सकती हैं। इसे देखने के लिए विशेष सोलर फिल्टर वाले चश्मों का उपयोग करना चाहिए या फिर सुरक्षित प्रोजेक्शन तकनीक का सहारा लेना चाहिए।

    साधारण चश्मे या बिना सुरक्षा उपकरण के इसे देखना जोखिम भरा हो सकता है। इस प्रकार 12 अगस्त 2026 का सूर्य ग्रहण जहां दुनिया के कुछ हिस्सों में एक यादगार खगोलीय दृश्य प्रस्तुत करेगा वहीं भारत में इसका कोई प्रत्यक्ष प्रभाव नहीं होगा।

  • महाशिवरात्रि के बाद साल का पहला सूर्य ग्रहण, तीन राशियों के लिए सावधानी का संकेत

    महाशिवरात्रि के बाद साल का पहला सूर्य ग्रहण, तीन राशियों के लिए सावधानी का संकेत


    नई दिल्ली। फरवरी का महीना धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से हमेशा खास माना जाता है। इस दौरान कई व्रत, त्योहार और पूजा-अनुष्ठान होते हैं, जो लोगों के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और आस्था का संचार करते हैं। इस बार भी महाशिवरात्रि के तुरंत बाद साल का पहला सूर्य ग्रहण पड़ने जा रहा है, जिसने लोगों की उत्सुकता को और बढ़ा दिया है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार ग्रहण का समय केवल खगोलीय घटना ही नहीं, बल्कि जीवन पर प्रभाव डालने वाला महत्वपूर्ण काल भी माना जाता है।

    सूर्य ग्रहण को लेकर लोगों के मन में हमेशा कई तरह के सवाल रहते हैं, क्या इसका असर जीवन पर पड़ेगा, क्या सावधानी रखनी चाहिए और किन राशियों पर इसका प्रभाव ज्यादा होगा। ज्योतिष विशेषज्ञों का कहना है कि इस बार का सूर्य ग्रहण कुछ राशियों के लिए थोड़ा चुनौतीपूर्ण समय लेकर आ सकता है, इसलिए उन्हें विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी जा रही है।

    ज्योतिषीय गणना के अनुसार साल 2026 का पहला सूर्य ग्रहण 17 फरवरी को फाल्गुन अमावस्या के दिन लगेगा। भारतीय समय के मुताबिक यह ग्रहण शाम 5 बजकर 31 मिनट पर शुरू होकर लगभग रात 7 बजकर 57 मिनट तक रहेगा। हालांकि यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। जब ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देता, तो उसका सूतक काल मान्य नहीं माना जाता। इसका मतलब है कि मंदिरों के कपाट बंद करने या पूजा-पाठ रोकने जैसी परंपराएं लागू नहीं होंगी।

    फिर भी ज्योतिषीय दृष्टि से ग्रहों की स्थिति का प्रभाव राशियों पर देखा जाता है। इस बार सूर्य ग्रहण शनि की राशि कुंभ में लग रहा है और इसी राशि में बुध और शुक्र की मौजूदगी भी बताई जा रही है। यही कारण है कि इसे सामान्य ग्रहण की तुलना में थोड़ा अधिक प्रभावशाली माना जा रहा है।

    ज्योतिष में सूर्य ग्रहण को एक महत्वपूर्ण खगोलीय घटना माना जाता है। इस दौरान सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी एक सीध में आ जाते हैं, जिससे कुछ समय के लिए सूर्य का प्रकाश ढक जाता है। मान्यता है कि इस समय ग्रहों की ऊर्जा का प्रभाव मन, आत्मविश्वास और निर्णय क्षमता पर पड़ सकता है। कई लोगों को इस दौरान मानसिक अस्थिरता, उलझन या थकान का अनुभव हो सकता है, इसलिए इस समय शांत रहकर सोच-समझकर निर्णय लेने की सलाह दी जाती है।

    इस बार सभी 12 राशियों पर ग्रहण का अलग-अलग प्रभाव पड़ सकता है, लेकिन कर्क, सिंह और कुंभ राशि के जातकों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत बताई जा रही है।

    कर्क राशि के लोगों के लिए यह समय मानसिक रूप से थोड़ा चुनौतीपूर्ण हो सकता है। छोटी-छोटी बातों को लेकर तनाव और बेचैनी बढ़ सकती है। निर्णय लेने में दुविधा की स्थिति बन सकती है। स्वास्थ्य के मामले में भी सतर्क रहने की जरूरत है, क्योंकि कोई पुरानी बीमारी दोबारा परेशान कर सकती है। खानपान और दिनचर्या का विशेष ध्यान रखना जरूरी होगा। वाहन चलाते समय भी सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है।

    सिंह राशि वालों के लिए यह ग्रहण करियर और आर्थिक मामलों में सोच-समझकर कदम उठाने का संकेत दे रहा है। इस समय जल्दबाजी में लिया गया फैसला आगे चलकर परेशानी का कारण बन सकता है। व्यापार या निवेश से जुड़े लोगों को नई डील या बड़ा निवेश फिलहाल टाल देना बेहतर रहेगा। कार्यक्षेत्र में भी संयम और धैर्य बनाए रखना जरूरी होगा, ताकि अनावश्यक विवाद से बचा जा सके।

    कुंभ राशि में ही यह सूर्य ग्रहण लग रहा है, इसलिए इसका प्रभाव इस राशि के जातकों पर ज्यादा देखा जा सकता है। बुध और शुक्र की मौजूदगी के कारण मन में भ्रम और असमंजस की स्थिति बन सकती है। आर्थिक मामलों में भी सावधानी जरूरी है, क्योंकि गलत निवेश या जल्दबाजी में किया गया लेन-देन नुकसान दे सकता है। मानसिक थकान और तनाव महसूस हो सकता है, ऐसे में योग, ध्यान और परिवार के साथ समय बिताना फायदेमंद साबित हो सकता है।

  • शनि की राशि में साल का पहला सूर्य ग्रहण: 17 फरवरी को मचेगी खगोलीय हलचल; इन 3 राशियों पर टूटेगा मुसीबतों का पहाड़!

    शनि की राशि में साल का पहला सूर्य ग्रहण: 17 फरवरी को मचेगी खगोलीय हलचल; इन 3 राशियों पर टूटेगा मुसीबतों का पहाड़!


    नई दिल्ली। साल 2026 का पहला सूर्य ग्रहण 17 फरवरी को फाल्गुन अमावस्या के दिन लगने जा रहा है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसारयह ग्रहण शनि की स्वामित्व वाली राशि कुंभ में लगेगा। शनि और सूर्य के बीच शत्रुता का भाव होने के कारणशनि की राशि में सूर्य का पीड़ित होना कई जातकों के लिए मानसिकआर्थिक और शारीरिक कष्ट का कारण बन सकता है।

    ग्रहण का समय और दृश्यता
    भारतीय समयानुसारयह ग्रहण शाम 5:31 बजे शुरू होगा और रात 7:57 बजे समाप्त होगा। हालांकियह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगाजिसके कारण यहाँ सूतक काल के नियम प्रभावी नहीं होंगे। लेकिन ज्योतिषीय गणना के अनुसारभले ही ग्रहण दिखाई न देइसका ग्रहों के गोचर पर प्रभाव सभी राशियों पर पड़ता है।

    इन 3 राशियों को रहना होगा सावधान

    कुंभ राशि चूंकि ग्रहण इसी राशि में लग रहा हैइसलिए सबसे अधिक प्रभाव कुंभ जातकों पर ही पड़ेगा।सावधानी: मानसिक तनाव बढ़ सकता है और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां घेर सकती हैं। बनते हुए काम बिगड़ सकते हैंइसलिए किसी भी बड़े निवेश या निर्णय से अभी बचें। सिंह राशि सूर्य सिंह राशि का स्वामी है। अपने स्वामी ग्रह का शत्रु राशि कुंभ में ग्रहण ग्रस्त होना सिंह राशि वालों के लिए शुभ नहीं है।

    सावधानी: वैवाहिक जीवन में तनाव और साझेदारी के कामों में नुकसान हो सकता है। कार्यक्षेत्र में गुप्त शत्रु आपको नुकसान पहुँचाने की कोशिश कर सकते हैं। वाणी पर नियंत्रण रखें। वृश्चिक राशि वृश्चिक राशि के जातकों के लिए यह ग्रहण पारिवारिक सुख में कमी ला सकता है। सावधानी: माता के स्वास्थ्य को लेकर चिंता हो सकती है। संपत्ति या वाहन से जुड़े विवादों में फंसने के योग बन रहे हैं। आर्थिक लेन-देन में सावधानी बरतेंअन्यथा धन हानि निश्चित है।

    उपाय: कैसे बचें अशुभ प्रभाव से?

    ज्योतिषाचार्यों के अनुसारग्रहण के अशुभ प्रभाव को कम करने के लिए ग्रहण काल के दौरान और बाद में ये कार्य करने चाहिए: दान: ग्रहण के बाद काले तिलगुड़ या सात अनाज का दान करें। जाप: ‘ओम सूर्याय नम: और शनि मंत्र ‘ओम शं शनैश्चराय नम:का जाप करें। शुद्धिकरण: ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान कर घर में गंगाजल का छिड़काव करें।