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  • उत्तर प्रदेश में सौर क्रांति, पीएम सूर्य घर योजना से घर-घर पहुंची स्वच्छ ऊर्जा..

    उत्तर प्रदेश में सौर क्रांति, पीएम सूर्य घर योजना से घर-घर पहुंची स्वच्छ ऊर्जा..


    नई दिल्ली: पिछले नौ वर्षों में उत्तर प्रदेश ने सौर ऊर्जा के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति करते हुए खुद को देश के अग्रणी हरित ऊर्जा राज्यों में शामिल कर लिया है वर्ष 2017 से पहले जहां राज्य की सौर क्षमता लगभग 400 मेगावाट तक सीमित थी वहीं आज यह बढ़कर 5000 मेगावाट से अधिक हो चुकी है यह बदलाव राज्य की मजबूत नीतियों बड़े निवेश और जनभागीदारी का परिणाम है

    इस बदलाव में PM Surya Ghar Muft Bijli Yojana ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है इस योजना के तहत सरकार ने लोगों को अपने घरों की छतों पर सोलर पैनल लगाने के लिए प्रोत्साहित किया है जिससे आम नागरिक भी स्वच्छ ऊर्जा के इस अभियान का हिस्सा बन सके हैं

    रूफटॉप सोलर कार्यक्रम की सफलता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि राज्य में 4 लाख से अधिक सोलर संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं इससे न केवल बिजली की लागत कम हुई है बल्कि लोगों को हर महीने हजारों रुपये की बचत भी हो रही है साथ ही नेट मीटरिंग के जरिए अतिरिक्त बिजली बेचकर आम लोग अतिरिक्त आय भी अर्जित कर रहे हैं

    वर्ष 2017 के बाद लागू की गई सौर ऊर्जा नीतियों ने इस क्षेत्र को नई दिशा दी है उत्तर प्रदेश सौर ऊर्जा नीति 2017 और 2022 के तहत बड़े सोलर पार्क और ग्राउंड माउंटेड प्रोजेक्ट्स को बढ़ावा दिया गया जिससे राज्य में निवेश भी बढ़ा और क्षमता में तेजी से वृद्धि हुई

    सरकार ने सौर ऊर्जा के विस्तार के लिए महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किए हैं जिसमें 22000 मेगावाट सौर क्षमता हासिल करने का लक्ष्य शामिल है इसके लिए सरकारी भवनों का सौरकरण बड़े प्रोजेक्ट्स और नई तकनीकों पर जोर दिया जा रहा है

    इसके साथ ही ग्रीन हाइड्रोजन जैसे उभरते क्षेत्रों में भी उत्तर प्रदेश ने कदम बढ़ाए हैं गोरखपुर और रामपुर में पायलट प्रोजेक्ट्स स्थापित किए जा रहे हैं जो भविष्य में स्वच्छ ऊर्जा के नए विकल्प प्रदान करेंगे यह पहल राज्य को ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में मजबूत बनाती है

    सौर ऊर्जा के विस्तार से पर्यावरण पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ा है कार्बन उत्सर्जन में कमी आई है और स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा मिला है इसके साथ ही हजारों युवाओं को रोजगार के नए अवसर भी प्राप्त हुए हैं खासकर सोलर इंस्टॉलेशन और मेंटेनेंस के क्षेत्र में

    घरेलू स्तर पर भी सौर ऊर्जा ने लोगों की जीवनशैली को बदल दिया है अब सौर ऊर्जा का उपयोग केवल लाइट और पंखे तक सीमित नहीं है बल्कि इंडक्शन कुकटॉप इलेक्ट्रिक वाहन और अन्य उपकरणों के संचालन में भी इसका उपयोग बढ़ रहा है इससे पारंपरिक ईंधनों पर निर्भरता कम हो रही है

     उत्तर प्रदेश की यह प्रगति दर्शाती है कि सही नीतियों और योजनाओं के माध्यम से स्वच्छ ऊर्जा को व्यापक स्तर पर अपनाया जा सकता है और यह राज्य को ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लक्ष्य की ओर आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है
  • सोलर ऊर्जा में बड़ी छलांग, पीएम सूर्य घर योजना के तहत 25 लाख से अधिक छतों पर सोलर सिस्टम

    सोलर ऊर्जा में बड़ी छलांग, पीएम सूर्य घर योजना के तहत 25 लाख से अधिक छतों पर सोलर सिस्टम


    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना ने देशभर में जबरदस्त रफ्तार पकड़ ली है। सरकार ने मंगलवार को संसद को बताया कि 5 मार्च 2026 तक कुल 25,02,217 घरों में रूफटॉप सोलर सिस्टम स्थापित किए जा चुके हैं। योजना के तहत वित्त वर्ष 2025-26 में अब तक 14,585.29 करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके हैं, जबकि 2024-25 में इस पर 7,822.92 करोड़ रुपए खर्च हुए थे।

    ऊर्जा एवं नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री श्रीपद येसो नाइक ने राज्यसभा में बताया कि योजना के लिए राष्ट्रीय पोर्टल पर अब तक 63,26,125 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 25 लाख से अधिक घरों में सोलर सिस्टम स्थापित किए गए हैं। यह योजना 2024 में शुरू की गई थी और यह डिमांड-ड्रिवन योजना है। इसके तहत देश के सभी घरेलू उपभोक्ता, जिनके पास स्थानीय डिस्कॉम से बिजली कनेक्शन है, राष्ट्रीय पोर्टल के माध्यम से आवेदन कर अपनी छत पर सोलर सिस्टम लगवा सकते हैं।

    सौर ऊर्जा उत्पादन और पर्यावरणीय लाभ
    सरकार का अनुमान है कि अगर एक करोड़ घरों में रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाए जाएँ, तो इससे लगभग 1000 अरब यूनिट नवीकरणीय बिजली का उत्पादन संभव होगा। इसके साथ ही इन सिस्टम के 25 साल के जीवनकाल में लगभग 720 मिलियन टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी लाई जा सकती है। इस पहल से ऊर्जा सुरक्षा के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा।

    2025 के अंत तक योजना को लागू करने में गुजरात, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, केरल और राजस्थान सबसे आगे रहे हैं। ये राज्य सौर ऊर्जा के उत्पादन और घरों में सोलर सिस्टम के विस्तार में शीर्ष पर हैं।

    नॉन-फॉसिल फ्यूल और ग्रीन हाइड्रोजन में भारत की प्रगति
    मंत्री ने बताया कि 31 दिसंबर 2025 तक देश में गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित बिजली उत्पादन क्षमता 266.78 गीगावाट तक पहुंच चुकी है। इसमें 258 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा शामिल है, जिसमें 135.81 गीगावाट सौर ऊर्जा, 54.51 गीगावाट पवन ऊर्जा, 11.61 गीगावाट जैव ऊर्जा, 5.16 गीगावाट लघु जल विद्युत और 50.91 गीगावाट वृहद जल विद्युत शामिल हैं। इसके अतिरिक्त 8.78 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता भी शामिल है।

    सरकार ने नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन (NGHM) को भी लागू किया है। इसका उद्देश्य भारत को ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन, उपयोग और निर्यात का वैश्विक केंद्र बनाना है। यह मिशन देश में स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में एक बड़ा कदम है और भविष्य में हरित ऊर्जा समाधान के लिए भारत की स्थिति को मजबूत करेगा।