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  • सोलर एनर्जी सेक्टर में बड़ा अपडेट: कंपनी को मिला ₹162 करोड़ का ऑर्डर, बाजार में बढ़ी दिलचस्पी

    सोलर एनर्जी सेक्टर में बड़ा अपडेट: कंपनी को मिला ₹162 करोड़ का ऑर्डर, बाजार में बढ़ी दिलचस्पी

    नई दिल्ली । सोलर एनर्जी सेक्टर में एक बार फिर बड़ी हलचल देखने को मिली है, जहां सोलर पंप निर्माण से जुड़ी एक कंपनी को महाराष्ट्र की सरकारी बिजली वितरण कंपनी से ₹162 करोड़ से अधिक का महत्वपूर्ण ऑर्डर प्राप्त हुआ है। यह ऑर्डर किसानों के लिए सोलर आधारित सिंचाई व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है और इसके बाद कंपनी के शेयर को लेकर बाजार में निवेशकों की दिलचस्पी तेजी से बढ़ गई है।

    यह ऑर्डर प्रधानमंत्री कुसुम योजना के अंतर्गत दिया गया है, जिसका उद्देश्य देश के ग्रामीण और कृषि क्षेत्रों में डीजल और पारंपरिक बिजली से चलने वाले पंपों को हटाकर सोलर एनर्जी आधारित पंपों को बढ़ावा देना है। इस परियोजना के तहत कंपनी को हजारों सोलर वाटर पंपों की आपूर्ति और स्थापना का कार्य सौंपा गया है, जिसमें विभिन्न क्षमता वाले पंप शामिल होंगे। यह पूरा प्रोजेक्ट केवल उपकरण आपूर्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें डिजाइनिंग, मैन्युफैक्चरिंग, ट्रांसपोर्ट, इंस्टॉलेशन, टेस्टिंग और कमीशनिंग जैसी सभी तकनीकी जिम्मेदारियां भी शामिल हैं।

    कंपनी को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि लगाए गए सभी सिस्टम्स पर पांच वर्षों तक वारंटी और मेंटेनेंस सुविधा उपलब्ध कराई जाए। इसके अलावा डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम के माध्यम से प्रत्येक पंप की निगरानी भी की जाएगी, जिससे तकनीकी खराबी और संचालन की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा सके।

    बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के बड़े सरकारी ऑर्डर किसी भी कंपनी के लिए रेवेन्यू ग्रोथ और बिजनेस स्थिरता के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। यही कारण है कि इस खबर के बाद संबंधित शेयर में निवेशकों की सक्रियता बढ़ी है। हालांकि बाजार में उतार-चढ़ाव की स्थिति बनी हुई है, लेकिन पिछले कुछ समय में इस स्टॉक ने मजबूत प्रदर्शन भी दिखाया है।

    कंपनी की एक और खास बात इसकी प्रमोटर होल्डिंग है, जो 75 प्रतिशत से अधिक है। यह संकेत देता है कि कंपनी के प्रमोटर्स अपने व्यवसाय को लेकर काफी आत्मविश्वास में हैं और लंबे समय तक इसकी ग्रोथ संभावनाओं को लेकर सकारात्मक दृष्टिकोण रखते हैं। इसके अलावा कंपनी के वित्तीय संकेतक जैसे रिटर्न ऑन इक्विटी और रिटर्न ऑन कैपिटल एम्प्लॉयड भी मजबूत स्थिति को दर्शाते हैं, जो निवेशकों के लिए एक महत्वपूर्ण फैक्टर माना जाता है।

    पिछले कुछ वर्षों में सोलर एनर्जी और ग्रीन एनर्जी सेक्टर में तेजी से विकास देखा गया है, जिसका मुख्य कारण सरकार की नीतियां और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने वाली योजनाएं हैं। इसी वजह से इस सेक्टर से जुड़ी कंपनियों के लिए आने वाले समय में बड़े अवसर पैदा होने की संभावना है। कृषि क्षेत्र में सोलर पंपों की मांग लगातार बढ़ रही है, जिससे इस तरह की कंपनियों के ऑर्डर बुक और बिजनेस ग्रोथ को मजबूती मिल रही है।

    हालांकि निवेशकों को यह ध्यान रखना जरूरी है कि मिडकैप और छोटे शेयरों में जोखिम और उतार-चढ़ाव अधिक होता है। इसलिए किसी भी निवेश निर्णय से पहले कंपनी के प्रदर्शन, ऑर्डर निष्पादन क्षमता और भविष्य की योजनाओं का सावधानीपूर्वक मूल्यांकन करना आवश्यक है। कुल मिलाकर यह ऑर्डर कंपनी के लिए एक सकारात्मक संकेत है, लेकिन इसका वास्तविक प्रभाव आने वाले तिमाही नतीजों और प्रोजेक्ट के सफल क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा।

  • एमपी बजट 2026‑27: 8वीं तक टेट्रा पैक दूध फ्री, 15,000 शिक्षक भर्ती, लाड़ली बहनों के लिए 23,882 करोड़ का बड़ा प्रावधान

    एमपी बजट 2026‑27: 8वीं तक टेट्रा पैक दूध फ्री, 15,000 शिक्षक भर्ती, लाड़ली बहनों के लिए 23,882 करोड़ का बड़ा प्रावधान


    भोपाल । मध्य प्रदेश विधानसभा में बुधवार को वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने वित्तीय वर्ष 2026‑27 का बजट ₹4,38,317 करोड़ के प्रावधान के साथ पेश किया, जिसे सरकार गरीब, महिला, युवा, किसान और इंफ्रास्ट्रक्चर पर केंद्रित बताया। इस बजट में कोई नया टैक्स नहीं लगाया गया है और शिक्षा, महिला सशक्तिकरण व पोषण जैसे कई बड़े लाभार्थी कदम उठाए गए हैं।

    सबसे बड़ा ऐलान लाड़ली बहना योजना के लिए ₹23,882 करोड़ के भारी प्रावधान का रहा, जिससे महिलाओं को मिलने वाली आर्थिक सहायता जारी रहेगी। योजना के तहत लगभग 1.25 करोड़ महिलाएं प्रतिमाह ₹1,500 की राशि पा रही हैं और सरकार ने इसे प्राथमिकता देने की बात कही।

    शिक्षा क्षेत्र में भी बड़ा कदम उठाया गया है। सरकार ने घोषणा की कि 8वीं कक्षा तक के सभी बच्चों को सरकारी स्कूलों में टेट्रा पैक दूध मुफ्त मिलेगा, जिससे बच्चों के पोषण स्तर में सुधार होगा और स्कूल उपस्थिति भी बढ़ेगी। इसके साथ ही 15,000 नए शिक्षकों की भर्ती की घोषणा कर शिक्षा तंत्र को और मजबूत किए जाने का लक्ष्य रखा गया।

    बजट में 5,700 वर्किंग वुमन हॉस्टल बनाये जाने का प्रावधान किया गया है, जिससे कामकाजी महिलाओं को बेहतर आवास सुविधाएं मिल सकें, और पंचायत एवं ग्रामीण विकास के लिए लगभग ₹40,062 करोड़ आवंटित किया गया है, जो ग्रामीण क्षेत्रों के विकास व बुनियादी ढांचे के विस्तार की दिशा में कदम है।

    सरकार ने किसानों के लिए भी बड़े ऐलान किए। बजट में 1 लाख किसानों को सोलर पंप उपलब्ध कराने की घोषणा की गई है, जिससे विद्युत लागत बचाने और सिंचाई क्षमताओं का विस्तार करने में मदद मिलेगी। इसके अलावा जी‑राम‑जी योजना और पीएम जनमन योजना के लिए भी करोड़ों रुपये का प्रावधान किया गया है।

    वित्त मंत्री ने बजट भाषण में कहा कि यह बजट “PM के सपनों को साकार करने वाला बजट” और हर नारी को न्याय देने वाला है, जिससे प्रदेश को युवा, रोजगार और महिला सशक्तिकरण की नई दिशा मिलेगी। उन्होंने यह भी बताया कि यह पहला “रोलिंग बजट” है, जिसमें अगले तीन वित्तीय वर्षों के लिए योजनाएं शामिल की गई हैं।

    बजट पेश करते समय विधानसभा में विपक्ष के कुछ विधायकों ने विधायक निधि नहीं बढ़ाये जाने पर हंगामा भी किया। कांग्रेस विधायकों ने कर्ज बढ़ने की चिंता जताते हुए खाली डिब्बे और गुल्लक लेकर विरोध प्रदर्शन किया और बजट पर सवाल उठाये।

    कुल मिलाकर, मध्य प्रदेश का यह बजट शिक्षा, पोषण, महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण विकास पर बड़ी योजनाओं के साथ अर्थव्यवस्था तथा सामाजिक कल्याण को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वाकांक्षी रूपरेखा पेश करता है।

  • MP: सौगातें लेकर आएगा कृषक कल्याण वर्ष…. हर किसान के पास होगा सोलर पंप

    MP: सौगातें लेकर आएगा कृषक कल्याण वर्ष…. हर किसान के पास होगा सोलर पंप


    भोपाल।
    कृषक कल्याण वर्ष (Farmers’ Welfare Year) किसानों के लिए कई सौगातें लेकर आएगा. सौर ऊर्जा (Solar energy) से संचालित सिंचाई पंपों से न केवल किसान दिन में ही खेतों में सिंचाई कर पाएंगे अपितु इससे बचने वाली बिजली से प्रदेश ऊर्जा में सरप्लस हो जाएगा. हर किसान के पास सोलर पंप होगा.किसान सौर ऊर्जा से खेती करेंगे।

    प्रदेश में 52 हजार किसानों के खेत में सोलर पंप स्थापित करने की योजना प्रारंभ की गई है। सोलर पंप स्थापित हो जाने से अब प्रदेश का किसान अन्नदाता के साथ ऊर्जादाता भी बनेगा। अब प्रदेश के किसान सूरज से खेती करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव (Chief Minister Dr. Mohan Yadav) की इस अभिनव पहल के तहत 34 हजार 600 इकाइयों को लेटर ऑफ अवार्ड जारी कर 33 हजार कार्यदेश जारी किए जा चुके हैं। किसान के खेत में सोलर पम्प स्थापित होने से अब उन्हें विद्युत प्रदाय पर बिजली बिल का भुगतान नहीं करना पड़ेगा। सोलर पम्प से उत्पादित अतिरिक्त ऊर्जा को किसान सरकार को बेच कर अतिरिक्त आय भी अर्जित कर सकेंगे। नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग द्वारा लगातार किसानों को सोलर प्रोजेक्ट लगाने के लिए विभिन्न योजनाओं में लाभ प्रदान कर सक्षम बनाया जा रहा है।


    प्रदेश की सिंचाई क्षमता 100 लाख हैक्टयर तक बढ़ाएंगे

    किसान कल्याण वर्ष में प्रदेश में सिंचाई का रकबा बढ़ाने पर विशेष जोर रहेगा. विभिन्न सिंचाई परियोजना और सिंचाई की आधुनिकतम तकनीकी के प्रयोग से सिंचाई का रकबा अधिक से अधिक बढ़ाने का प्रयास रहेगा. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का संकल्प है प्रदेश में सिंचाई क्षमता को आगामी वर्षों में 100 लाख हेक्टेयर तक बढ़ाना.

    प्रदेश में गत दो वर्ष में 7.31 लाख हैक्टयर क्षेत्र में नई सिंचाई क्षमता विकसित हुई है। प्रदेश की सिंचाई क्षमता में वर्ष 2026 तक 8.44 लाख हैक्टयर की वृद्धि होगी। प्रदेश की सिंचाई परियोजनाओं की समीक्षा प्रधानमंत्री गतिशक्ति पोर्टल का प्रयोग कर की जाएगी। पार्वती-काली-सिंध और चम्बल अंतर्राज्यीय लिंक परियोजना, केन-बेतवा अंतर्राज्यीय लिंक परियोजना की स्वीकृति केंद्र सरकार के सहयोग से राज्य की महत्वपूर्ण उपलब्धि है. महाराष्ट्र राज्य के साथ क्रियान्वित होने वाली मेगा तापी भूजल भरण परियोजना विश्व की अनूठी परियोजना है. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राज्य में भी विभिन्न नदियों को जोड़ने के लिए नदी जोड़ो परियोजना के क्रियान्वयन के निर्देश दिए हैं।

    राज्य में नदी जोड़ो परियोजना अंतर्गत उज्जैन जिले में कान्ह-गंभीर, मंदसौर, नीमच और उज्जैन में कालीसिंध-चंबल, सतना जिले में केन और मंदाकिनी, सिवनी एवं छिंदवाड़ा जिले में शक्कर पेंच और दूधी तामिया, रायसेन जिले में जामनेर नेवन और नेवन-बीना नदियों का सर्वेक्षण किया गया है। इस सभी के क्रियान्वयन से कुल 5 लाख 97 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की जा सकेगी। इनकी अनुमानित लागत 9870 करोड़ रुपए होगी। सात जिलों के हजारों किसान इन योजनाओं से लाभान्वित होंगे। राज्य की नदियों में बाढ़, जल प्रबंधन, जल के समुचित उपयोग नदी कछारों में पर्याप्त जल की उपलब्धता सुनिश्चित किए जाने के उद्देश्य से राज्य की नदियों को आपस में जोड़ने के लिए तकनीकी दल का गठन भी गया।

    भोपाल की झील की प्राचीन तकनीक का अध्ययन कर इस तर्ज पर कम लागत में सुरक्षित जलाशय एवं बांध निर्माण की अवधारणा पर भी कार्य किया जा रहा है. राज्य में जल संसाधन और नर्मदा घाटी विकास विभाग द्वारा सिंचाई सुविधाओं के विस्तार का कार्य निरंतर किया जा रहा है।

    सिंहस्थ- 2028 में दुनिया भर से उज्जैन में आने वाले श्रद्धालुओं को शिप्रा के शुद्ध जल में स्नान कराने के लिए निरंतर कार्य किए जा रहे हैं. सेवरखेड़ी-सिलारखेड़ी परियोजना उज्जैन निर्माणाधीन है, जिसकी लागत 614.53 करोड़ रुपए है। इसी तरह कान्ह डायवर्सन क्लोज डक्ट परियोजना उज्जैन की लागत 919.94 करोड़ है। सिंहस्थ: 2028 में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए घाट निर्माण एवं संबद्ध कार्य भी किए जा रहे हैं, जिनकी लागत 778.91 करोड़ है।