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  • नीट परीक्षा की साख पर सवाल: 5 मेडिकल छात्र समेत 24 आरोपी पकड़े गए, 30 लाख में होता था सौदा

    नीट परीक्षा की साख पर सवाल: 5 मेडिकल छात्र समेत 24 आरोपी पकड़े गए, 30 लाख में होता था सौदा


    नई दिल्ली ।देश की सबसे प्रतिष्ठित मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET UG एक बार फिर विवादों के घेरे में आ गई है। बिहार के लखीसराय में आयोजित री-एग्जाम के दौरान एक बड़े सॉल्वर गैंग का पर्दाफाश हुआ है। पुलिस ने इस मामले में 24 लोगों को गिरफ्तार किया है जिनमें 5 मेडिकल छात्र और बायोमेट्रिक सत्यापन से जुड़ी कंपनी के 14 कर्मचारी शामिल हैं। इस खुलासे ने परीक्षा की पारदर्शिता और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    जानकारी के अनुसार आरोपियों ने असली अभ्यर्थियों की जगह सॉल्वर्स को परीक्षा में बैठाने की सुनियोजित साजिश रची थी। इसके लिए परीक्षा केंद्रों पर मौजूद बायोमेट्रिक सत्यापन व्यवस्था में ही सेंध लगाई गई। जांच में सामने आया है कि फर्जी परीक्षार्थियों को प्रवेश दिलाने के लिए बायोमेट्रिक सिस्टम से जुड़े कुछ कर्मचारियों की कथित मिलीभगत भी थी।

    पुलिस के मुताबिक लखीसराय के तीन अलग-अलग परीक्षा केंद्रों से कुल सात सॉल्वर पकड़े गए। इनके अलावा बायोमेट्रिक कंपनी के 14 कर्मचारी और अन्य संदिग्धों को भी हिरासत में लिया गया। शुरुआती जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि असली उम्मीदवारों की जगह परीक्षा दिलाने के लिए 30 लाख रुपए तक का सौदा किया जाता था। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह नेटवर्क कितने बड़े स्तर पर काम कर रहा था।

    पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब हाजीपुर निवासी और पीएमसीएच के छात्र मयंक कश्यप की गतिविधियां संदिग्ध पाई गईं। जांच में पता चला कि वह कथित तौर पर बायोमेट्रिक कंपनी के कर्मचारी के रूप में परीक्षा केंद्र में प्रवेश कर गया था। इसके बाद पुलिस ने जांच का दायरा बढ़ाया और एक-एक कर पूरे नेटवर्क की परतें खुलने लगीं।

    जांच एजेंसियों के अनुसार पावापुरी मेडिकल कॉलेज राजगीर का छात्र रविशंकर इस नेटवर्क के संचालन में अहम भूमिका निभा रहा था। वहीं इस पूरे रैकेट का कथित मास्टरमाइंड अर्पित राज बताया जा रहा है जो गया मेडिकल कॉलेज का छात्र है। चौंकाने वाली बात यह है कि अर्पित राज का नाम वर्ष 2024 के चर्चित NEET पेपर लीक मामले में भी सामने आ चुका है। इससे यह आशंका और मजबूत हो गई है कि परीक्षा माफिया लगातार नए तरीकों से सिस्टम को चुनौती देने की कोशिश कर रहे हैं।

    पुलिस और अन्य जांच एजेंसियां अब इस नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही हैं। अधिकारियों को आशंका है कि यह गिरोह केवल बिहार तक सीमित नहीं है बल्कि इसके तार कई अन्य राज्यों से भी जुड़े हो सकते हैं। गिरफ्तार आरोपियों के मोबाइल फोन, डिजिटल रिकॉर्ड और वित्तीय लेनदेन की भी जांच की जा रही है ताकि पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश किया जा सके।

    NEET जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा में बार-बार सामने आ रहे फर्जीवाड़े के मामलों ने छात्रों और अभिभावकों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। लाखों छात्र वर्षों की मेहनत और तैयारी के बाद परीक्षा में शामिल होते हैं। ऐसे में सॉल्वर गैंग और पेपर लीक जैसी घटनाएं न केवल परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचाती हैं बल्कि ईमानदारी से तैयारी करने वाले विद्यार्थियों के भविष्य पर भी सवाल खड़े करती हैं। अब सभी की नजर जांच एजेंसियों की कार्रवाई और उन कदमों पर टिकी है जो भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए उठाए जाएंगे।

  • ₹3000 में ‘सॉल्वर’ बनी BTech छात्रा: JEE पास युवती दूसरे की जगह देती पकड़ी गई, उज्जैन में एग्जाम रैकेट का खुलासा

    ₹3000 में ‘सॉल्वर’ बनी BTech छात्रा: JEE पास युवती दूसरे की जगह देती पकड़ी गई, उज्जैन में एग्जाम रैकेट का खुलासा


    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के उज्जैन में परीक्षा प्रणाली को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय में बीकॉम परीक्षा के दौरान एक युवती को ‘सॉल्वर’ बनकर दूसरे छात्र की जगह परीक्षा देते हुए पकड़ा गया। चौंकाने वाली बात यह है कि आरोपी खुद JEE जैसी कठिन परीक्षा पास कर चुकी है और बीटेक की छात्रा है।

    जानकारी के मुताबिक, यह पूरा मामला 4 मई को सामने आया, जब सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय के वाघ देवी भवन में बीकॉम छठे सेमेस्टर की परीक्षा चल रही थी। इसी दौरान एनएसयूआई नेता तरुण परिहार की शिकायत पर जांच की गई। जांच में सपना भदौरिया की जगह इंदौर निवासी युवती परीक्षा देती हुई मिली।

    पहले पूछताछ में युवती ने खुद को प्रिशा साहू बताया, लेकिन सख्ती करने पर उसने अपनी असली पहचान विशाखा माहेश्वरी बताई। वह उज्जैन के गवर्नमेंट इंजीनियरिंग कॉलेज में बीटेक की पढ़ाई कर रही है और अगले ही दिन उसका खुद का पेपर भी था।

    पूछताछ में सामने आया कि विशाखा अपनी एक दोस्त की बहन की जगह परीक्षा देने आई थी। इसके लिए उसे ₹3000 दिए गए थे। पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि यह रकम दो किस्तों में दी गई—पहले ₹1000 और बाद में ₹2000।

    इस पूरे मामले में एक और चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है। असली परीक्षार्थी सपना भदौरिया ने विशाखा को भरोसा दिलाया था कि वह पहले भी तीन बार इसी तरह दूसरों से परीक्षा दिलवा चुकी है और कभी पकड़ी नहीं गई। इसी भरोसे में आकर विशाखा ने यह जोखिम उठाया।

    मामले की जानकारी मिलते ही कुलगुरु अर्पण भारद्वाज मौके पर पहुंचे और तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। वहीं माधव नगर पुलिस ने विशाखा माहेश्वरी, सपना भदौरिया और ऋषभ नामक युवक के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर लिया है।

    पुलिस अब इस पूरे एग्जाम सॉल्वर रैकेट की गहराई से जांच कर रही है। आशंका जताई जा रही है कि इसमें एक संगठित गिरोह शामिल हो सकता है, जो पैसे लेकर छात्रों की जगह परीक्षाएं दिलवाता है।

    यह घटना न सिर्फ परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा पर सवाल खड़े करती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि कैसे पढ़े-लिखे छात्र भी लालच में आकर गलत रास्ता चुन रहे हैं।

    कुल मिलाकर, उज्जैन का यह मामला शिक्षा व्यवस्था के लिए एक गंभीर चेतावनी है। अगर समय रहते ऐसे रैकेट्स पर लगाम नहीं लगाई गई, तो यह समस्या और भी गहरी हो सकती है।