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  • काशी में गरजे सीएम योगी: सनातन को मिटाने वाले खुद मिट गए, ॐ जाप और सोमनाथ महोत्सव में गूंजे नारे

    काशी में गरजे सीएम योगी: सनातन को मिटाने वाले खुद मिट गए, ॐ जाप और सोमनाथ महोत्सव में गूंजे नारे



    नई दिल्ली। काशी विश्वनाथ धाम में एक भव्य कार्यक्रम के दौरान उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सनातन संस्कृति और भारत की आध्यात्मिक विरासत को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि जिन्होंने सनातन को मिटाने का प्रयास किया, वे इतिहास में खुद मिट गए हैं। योगी ने मुहम्मद गौरी और औरंगजेब जैसे आक्रांताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे आक्रमणकारियों ने भारत की सांस्कृतिक पहचान को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की, लेकिन वे भारत की आत्मा को कभी नहीं तोड़ सके। उन्होंने कहा कि भारत की चेतना अजर-अमर है और सनातन परंपरा आज भी उतनी ही मजबूत है जितनी सदियों पहले थी।

    सीएम योगी ने कहा कि काशी विश्वनाथ धाम और सोमनाथ मंदिर भारत के गौरव और सांस्कृतिक पुनर्जागरण के प्रतीक हैं। उन्होंने बताया कि काशी में आज भव्य और दिव्य धाम का स्वरूप दिखाई दे रहा है, जो भारत की आस्था और संस्कृति का प्रतीक है। इसी तरह सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण भारत की आध्यात्मिक शक्ति का उदाहरण है। उन्होंने कहा कि दोनों मंदिर हमें यह संदेश देते हैं कि भले ही आक्रमण हों, लेकिन सनातन संस्कृति को कभी नष्ट नहीं किया जा सकता।

    इस अवसर पर राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में विधिवत दर्शन-पूजन किया और परिसर में ‘ॐ’ का जाप भी किया। कार्यक्रम के दौरान सोमनाथ मंदिर के 75 वर्ष पूरे होने पर आयोजित सोमनाथ अमृत महोत्सव का लाइव प्रसारण भी देखा गया। यह वही ऐतिहासिक मंदिर है जिसका 1951 में स्वतंत्र भारत में पुनः प्राण-प्रतिष्ठा हुई थी।

    कार्यक्रम में धार्मिक माहौल देखने को मिला। छात्र-छात्राओं ने शंखनाद और डमरू वादन किया, जिससे पूरा परिसर आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया। वहीं गुजरात से आई महिलाओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समर्थन में ‘वोट फॉर भाईसाहब’ के नारे लगाए, जिससे माहौल राजनीतिक रंग भी लेता नजर आया।

    सीएम ने अपने संबोधन में कहा कि आज भारत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में अपनी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को फिर से वैश्विक पहचान दिला रहा है। उन्होंने कहा कि पहले भारत अपनी परंपराओं पर उतना गर्व नहीं कर पाया, लेकिन अब देश अपनी जड़ों की ओर लौट रहा है और अपनी पहचान को मजबूती से स्थापित कर रहा है।

    उन्होंने यह भी कहा कि सोमनाथ मंदिर पर इतिहास में कई बार आक्रमण हुए और उसे नष्ट करने की कोशिश की गई, लेकिन हर बार वह फिर से अपने गौरव के साथ खड़ा हुआ। यही भारत की सबसे बड़ी ताकत है कि यहां विनाश अस्थायी है और सृजन हमेशा स्थायी रहता है।

    कार्यक्रम के अंत में सीएम ने कहा कि भारत के देवस्थल केवल पत्थर की इमारतें नहीं हैं, बल्कि वे हमारी आस्था, संस्कृति और चेतना के प्रतीक हैं। इन्हें कोई शक्ति मिटा नहीं सकती और यही सनातन की सबसे बड़ी विशेषता है।

    इस पूरे आयोजन ने काशी में धार्मिक और सांस्कृतिक माहौल को और भी भव्य बना दिया, जहां आस्था, इतिहास और आधुनिक भारत की सोच एक साथ दिखाई दी।

  • भारत की ताकत उसकी संस्कृति और संकल्प में है: सोमनाथ उदाहरण से पीयूष गोयल का संदेश

    भारत की ताकत उसकी संस्कृति और संकल्प में है: सोमनाथ उदाहरण से पीयूष गोयल का संदेश

    नई दिल्ली ।सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण और उसकी ऐतिहासिक यात्रा का उल्लेख करते हुए केंद्रीय मंत्री Piyush Goyal ने भारत की मजबूती, आत्मविश्वास और सांस्कृतिक चेतना को देश की सबसे बड़ी शक्ति बताया है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार सोमनाथ मंदिर ने बार-बार कठिन दौर और आक्रमणों के बावजूद खुद को पुनः स्थापित किया, उसी तरह भारत भी हर चुनौती के बाद और अधिक सशक्त होकर उभरा है।

    उन्होंने अपने संदेश में कहा कि सोमनाथ केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि भारत की सभ्यतागत शक्ति और आत्मसम्मान का प्रतीक है। सदियों के संघर्ष और कई बार हुए हमलों के बाद भी इस मंदिर का अस्तित्व और उसकी पुनर्स्थापना यह दर्शाती है कि भारत की सांस्कृतिक जड़ें कितनी मजबूत हैं।

    Piyush Goyal ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण देश के लिए केवल धार्मिक महत्व की घटना नहीं थी, बल्कि यह एक नए भारत के आत्मविश्वास का प्रतीक भी बना। यह वह समय था जब देश अपनी सांस्कृतिक पहचान को फिर से स्थापित करने और अपनी विरासत पर गर्व करने की दिशा में आगे बढ़ रहा था।

    उन्होंने भारत की वर्तमान स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि आज देश तेजी से विकास की ओर अग्रसर है और दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में अपनी मजबूत पहचान बना रहा है। उनके अनुसार भारत की खासियत यह है कि यहां आधुनिकता और परंपरा दोनों साथ-साथ आगे बढ़ रहे हैं। एक ओर देश तकनीक, उद्योग और आर्थिक विकास में नई ऊंचाइयों को छू रहा है, वहीं दूसरी ओर अपनी सांस्कृतिक विरासत और मूल्यों को भी मजबूती से संजोए हुए है।

    उन्होंने यह भी कहा कि भारत का इतिहास संघर्षों से भरा रहा है, लेकिन हर कठिन परिस्थिति के बाद देश ने नई ऊर्जा के साथ वापसी की है। यही क्षमता भारत को दुनिया के अन्य देशों से अलग बनाती है। उनके अनुसार भारत की सभ्यता और संस्कृति ने हमेशा लोगों को जोड़ने और आगे बढ़ने की प्रेरणा दी है।

    अपने विचारों में उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आने वाले वर्षों में भारत अपने विकास के लक्ष्यों को हासिल करने के साथ-साथ अपनी सांस्कृतिक पहचान को भी और मजबूत करेगा। उन्होंने कहा कि देश का भविष्य केवल आर्थिक ताकत से नहीं, बल्कि उसके मूल्यों, विरासत और आत्मविश्वास से तय होगा।

    उन्होंने विश्वास जताया कि भारत आने वाले समय में एक विकसित और आत्मनिर्भर राष्ट्र के रूप में दुनिया के सामने और अधिक मजबूती से उभरेगा। साथ ही उन्होंने कहा कि देश की प्रगति का आधार उसकी सांस्कृतिक चेतना और ऐतिहासिक विरासत ही बनी रहेगी, जो हर पीढ़ी को आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।

  • सोमनाथ मंदिर में भव्य आयोजन: पीएम मोदी की विशेष पूजा, 75 वर्ष पूरे होने पर भावुक संदेश

    सोमनाथ मंदिर में भव्य आयोजन: पीएम मोदी की विशेष पूजा, 75 वर्ष पूरे होने पर भावुक संदेश

    नई दिल्ली ।
    गुजरात के गिर सोमनाथ जिले में स्थित ऐतिहासिक सोमनाथ मंदिर एक बार फिर आस्था और सांस्कृतिक भव्यता का केंद्र बन गया, जहां ‘सोमनाथ अमृत महोत्सव’ के अवसर पर भव्य आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री Narendra Modi की उपस्थिति ने आयोजन को विशेष महत्व प्रदान किया और पूरे वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।

    प्रधानमंत्री ने मंदिर परिसर में पहुंचकर विशेष पूजा-अर्चना में भाग लिया और इस पवित्र स्थल के प्रति अपनी गहरी श्रद्धा व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यहां आकर उन्हें एक दिव्य और भावनात्मक अनुभूति हुई है, जो शब्दों में व्यक्त करना कठिन है। उनके अनुसार सोमनाथ केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक पहचान और सभ्यता की निरंतरता का प्रतीक है।

    इस अवसर पर सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण के 75 वर्ष पूरे होने का उत्सव मनाया गया, जिसे एक ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है। प्रधानमंत्री ने इस मौके को भारत की आध्यात्मिक यात्रा का महत्वपूर्ण पड़ाव बताते हुए कहा कि यह स्थान सदियों से आस्था, विश्वास और शक्ति का केंद्र रहा है।

    कार्यक्रम के दौरान पूरे मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला। बड़ी संख्या में श्रद्धालु देश के विभिन्न हिस्सों से यहां पहुंचे और आयोजन का हिस्सा बने। मार्गों पर लोगों का उत्साह देखते ही बनता था, जहां पारंपरिक झांकियां, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और लोक नृत्य ने माहौल को और भी जीवंत बना दिया।

    इस आयोजन का एक खास आकर्षण वह दृश्य रहा जब आकाश में वायुसेना की एरोबेटिक टीम ने अपने शानदार प्रदर्शन से सभी का ध्यान खींचा। यह प्रस्तुति न केवल तकनीकी कौशल का प्रदर्शन थी, बल्कि आधुनिक भारत की क्षमताओं का प्रतीक भी बनी।

    प्रधानमंत्री के आगमन पर पूरे क्षेत्र में उत्साह का माहौल रहा। हजारों लोगों ने सड़कों के किनारे खड़े होकर उनका स्वागत किया और वातावरण जयघोषों से गूंज उठा। यह दृश्य इस बात का संकेत था कि यह आयोजन केवल धार्मिक नहीं, बल्कि जनभावनाओं से जुड़ा एक व्यापक उत्सव बन चुका है।

    सोमनाथ मंदिर का यह भव्य आयोजन भारत की सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक परंपराओं को एक बार फिर जीवंत रूप में प्रस्तुत करता है। यह अवसर न केवल श्रद्धा का प्रतीक रहा, बल्कि इसने देश की सभ्यतागत निरंतरता और सांस्कृतिक एकता को भी मजबूत संदेश दिया।

  • सोमनाथ मंदिर में अनोखा आध्यात्मिक क्षण, 75 वर्ष पूरे होने पर अमृतपर्व, पहली बार शिखर पर हुआ पवित्र जल से अभिषेक

    सोमनाथ मंदिर में अनोखा आध्यात्मिक क्षण, 75 वर्ष पूरे होने पर अमृतपर्व, पहली बार शिखर पर हुआ पवित्र जल से अभिषेक


    नई दिल्ली ।
    गुजरात के प्रभास पाटन में स्थित सोमनाथ मंदिर में एक ऐसा ऐतिहासिक और आध्यात्मिक आयोजन देखने को मिला, जिसने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। मंदिर के पुनर्निर्माण के 75 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में ‘अमृतपर्व’ का आयोजन किया गया, जो आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक गौरव का अनूठा संगम बन गया। इस अवसर पर मंदिर परिसर को विशेष रूप से सजाया गया और वातावरण पूरी तरह भक्तिमय ऊर्जा से भर गया।

    इस आयोजन की सबसे बड़ी और अनोखी विशेषता यह रही कि पहली बार मंदिर के भव्य शिखर का अभिषेक 11 पवित्र तीर्थों और नदियों के जल से किया गया। अब तक धार्मिक परंपराओं में मुख्य रूप से शिवलिंग या गर्भगृह का अभिषेक किया जाता रहा है, लेकिन इस बार परंपरा को एक नए स्वरूप में प्रस्तुत किया गया। गंगा, यमुना, नर्मदा, कावेरी सहित कई पवित्र जल स्रोतों से लाए गए जल को विधिविधान के साथ शिखर पर अर्पित किया गया, जिससे यह क्षण अत्यंत दुर्लभ और ऐतिहासिक बन गया।

    यह पूरा अनुष्ठान वैदिक मंत्रोच्चार के बीच संपन्न हुआ, जिसमें विद्वान ब्राह्मणों की टीम ने पूरी श्रद्धा और शुद्धता के साथ प्रक्रिया को आगे बढ़ाया। मंदिर के शिखर पर स्थित स्वर्ण कलशों का अभिषेक विशेष तकनीक और सावधानी के साथ किया गया ताकि धार्मिक मर्यादा और परंपरा दोनों का पूर्ण पालन हो सके। इस दिव्य दृश्य को देखने के लिए हजारों श्रद्धालु मंदिर परिसर में उपस्थित रहे और हर कोई इस ऐतिहासिक पल का साक्षी बनना चाहता था।

    सोमनाथ मंदिर का यह आयोजन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं था, बल्कि इसे भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक विरासत के गौरव के रूप में भी देखा गया। सरदार वल्लभभाई पटेल के संकल्प से पुनर्निर्मित इस मंदिर ने 75 वर्षों की गौरवशाली यात्रा पूरी की है और यह आयोजन उसी ऐतिहासिक यात्रा को सम्मान देने का प्रतीक बना। पूरे परिसर में विशेष पूजा-अर्चना और आरती का आयोजन किया गया, जिससे वातावरण और भी अधिक पवित्र और भावनात्मक हो गया।

    इस अवसर पर प्रशासनिक और धार्मिक स्तर पर भी विशेष व्यवस्थाएं की गईं। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए और पूरे क्षेत्र में निगरानी व्यवस्था को मजबूत रखा गया। मंदिर परिसर को आकर्षक रोशनी और सजावट से सजाया गया, जिससे इसकी भव्यता और भी बढ़ गई।

    साथ ही मंदिर से जुड़ी कुछ नई सुविधाओं और विकास परियोजनाओं को भी इस अवसर पर आगे बढ़ाया गया, ताकि आने वाले समय में श्रद्धालुओं को बेहतर अनुभव मिल सके। यह पूरा आयोजन न केवल एक धार्मिक उत्सव रहा, बल्कि इसे भारत की सांस्कृतिक पहचान और आस्था के एक नए अध्याय के रूप में भी देखा जा रहा है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण बनेगा।

  • सोमनाथ दौरे पर अमित शाह, पूजा-अर्चना के साथ धार्मिक और सामाजिक पहलों की शुरुआत

    सोमनाथ दौरे पर अमित शाह, पूजा-अर्चना के साथ धार्मिक और सामाजिक पहलों की शुरुआत

    नई दिल्ली। गुजरात के गिर सोमनाथ जिले में स्थित प्रसिद्ध सोमनाथ धाम में एक विशेष धार्मिक अवसर देखने को मिला, जब देश के गृह मंत्री अमित शाह ने यहां पहुंचकर भगवान शिव के ज्योतिर्लिंग के दर्शन किए और विधिवत पूजा-अर्चना की। इस अवसर पर मंदिर परिसर में भक्ति और श्रद्धा का वातावरण बना रहा, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु भी उपस्थित रहे।

    मंदिर पहुंचने के बाद उन्होंने पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लिया। ध्वजा पूजा, तग पूजा और महापूजा जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से उन्होंने अपनी आस्था प्रकट की। इस दौरान एक विशेष भेंट भी अर्पित की गई, जो भारतीय परंपरा और ऐतिहासिक विरासत से प्रेरित थी। इस पूरे आयोजन ने मंदिर की प्राचीन परंपराओं को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया।

    पूजा के बाद मंदिर के शिखर पर ध्वज फहराने की परंपरा भी निभाई गई, जिसे अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दौरान मंदिर प्रशासन द्वारा उनका स्वागत किया गया और उन्हें स्मृति चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया गया। यह पूरा दृश्य श्रद्धालुओं के लिए भी आकर्षण का केंद्र बना रहा।

    इस अवसर पर एक विशेष धार्मिक आयोजन की शुरुआत भी की गई, जिसमें भक्तों को भाग लेने का अवसर मिलेगा। इस आयोजन के तहत भगवान शिव का अभिषेक पंचामृत, दूध और अन्य पवित्र सामग्री से किया जाएगा। साथ ही वैदिक मंत्रों के उच्चारण के बीच पूजा संपन्न होगी। इसमें गौ-पूजा, ब्राह्मण भोजन और अन्य पारंपरिक अनुष्ठान भी शामिल किए गए हैं, जिससे इसका धार्मिक महत्व और बढ़ जाता है।

    धार्मिक गतिविधियों के साथ-साथ सांस्कृतिक और ज्ञानवर्धक पहल भी इस मौके पर शुरू की गई। इसके तहत एक डिजिटल माध्यम के जरिए प्राचीन भारतीय ज्ञान और परंपराओं को लोगों तक पहुंचाने की योजना बनाई गई है। इस पहल का उद्देश्य नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ना और उन्हें भारतीय परंपरा के महत्व से अवगत कराना है।

    इसके अलावा, सामाजिक जिम्मेदारी को ध्यान में रखते हुए जरूरतमंद लोगों के लिए एक विशेष पहल भी की गई। स्वास्थ्य से जुड़ी इस पहल के अंतर्गत पोषण सामग्री का वितरण किया गया, जिससे जरूरतमंदों को सहायता मिल सके। यह कदम दर्शाता है कि धार्मिक आयोजनों के साथ-साथ समाज सेवा को भी समान प्राथमिकता दी जा रही है।

    इस पूरे कार्यक्रम के दौरान मंदिर परिसर में आस्था, संस्कृति और सेवा का अनूठा संगम देखने को मिला। यह दौरा केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं रहा, बल्कि इसमें समाज और संस्कृति के प्रति समर्पण का व्यापक संदेश भी निहित था, जिसे वहां मौजूद लोगों ने गहराई से अनुभव किया।

  • पीएम मोदी बोले- सोमनाथ को तोड़ने वाले इतिहास के पन्नों में सिमट गए, मंदिर और भारत आज भी अडिग

    पीएम मोदी बोले- सोमनाथ को तोड़ने वाले इतिहास के पन्नों में सिमट गए, मंदिर और भारत आज भी अडिग


    गुजरात। गुजरात के सोमनाथ मंदिर पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को ऐतिहासिक और प्रेरक संदेश दिया। उन्होंने कहा कि लगभग 1000 साल पहले जब आक्रमणकारियों ने सोमनाथ मंदिर को तोड़ने की कोशिश की थी, तब उन्हें लगा कि उन्होंने हिंदुस्तान की शक्ति को खत्म कर दिया, लेकिन आज वही मंदिर खड़ा है और उसकी ध्वजा गर्व से फहरा रही है। पीएम मोदी ने चेतावनी दी कि दुर्भाग्य से आज भी देश में ऐसी ताकतें मौजूद हैं, जो मंदिरों के पुनर्निर्माण और देश की एकता का विरोध करती हैं।
    मोदी ने याद दिलाया कि जब स्वतंत्रता के बाद सरदार पटेल ने सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण की शपथ ली, तब भी उन्हें रोकने की कोशिश हुई। 1951 में मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद के मंदिर में शामिल होने पर आपत्ति जताई थी। मोदी ने कहा कि देशवासियों को आज भी ऐसी ताकतों से सतर्क और एकजुट रहने की आवश्यकता है, जो देश को बांटने में लगी हैं।

    पीएम मोदी ने मंदिर में लगभग 30 मिनट तक पूजा-अर्चना की। उन्होंने शिवलिंग पर जल चढ़ाया, पंचामृत से अभिषेक किया और फूल अर्पित किए। इसके बाद उन्होंने कहा कि 1026 में पहले आक्रमण के बाद गजनवी ने सोमनाथ का वजूद मिटाने की कोशिश की थी, लेकिन मंदिर फिर से पुनर्निर्मित हुआ।

    इसके बाद खिलजी ने मंदिर को फिर तोड़ा, लेकिन जूनागढ़ के राजाओं ने इसे पुनः खड़ा किया। मोदी ने स्पष्ट किया कि न तो सोमनाथ नष्ट हुआ और न ही भारत।

    पीएम ने कहा कि आज जब सोमनाथ मंदिर के आक्रमण की 1000वीं वर्षगांठ और इसके पुनर्निर्माण के 75 साल पूरे हो रहे हैं, तो यह हमें हमारे गौरवशाली इतिहास और आस्था की शक्ति की याद दिलाता है। उन्होंने कहा कि यहां 72 घंटे तक अनवरत ओमकार और मंत्रोच्चार चलता रहा और इस हजार साल की गाथा को शब्दों में बयां करना मुश्किल है। यह केवल समय और अनुभव ही संकलित कर सकता है।

    सद्भावना ग्राउंड में आयोजित रैली को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि यह अद्भुत समय और वातावरण है। समुद्र की लहरें, सूर्य की किरणें, मंत्रों की गूंज और भक्तों की उपस्थिति इस दिव्य उत्सव को और भव्य बना रही है। मोदी ने कहा कि यह उनका सौभाग्य है कि उन्हें सोमनाथ स्वाभिमान पर्व में सेवा का अवसर मिला।

    उन्होंने देशवासियों को भरोसा दिलाया कि भारत अपने गौरव को नई बुलंदियों तक ले जाएगा और गरीबी, सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों के खिलाफ लगातार लड़ाई जारी रखेगा।

    पीएम मोदी ने कहा कि जिस देश के पास अपनी विरासत होती है, वह उस पर गर्व करता है। लेकिन स्वतंत्रता के बाद गुलामी की मानसिकता वाले लोगों ने उस विरासत को भूलने की कोशिश की। सोमनाथ मंदिर ने यह साबित कर दिया कि आस्था, साहस और विश्वास किसी भी आघात के सामने टिक सकते हैं।

    सोमनाथ में पूजा-अर्चना और रैली के बाद पीएम मोदी ने रोड शो भी किया और लोगों को संबोधित किया। इस अवसर पर उन्होंने एकजुटता, स्वाभिमान और देशभक्ति का संदेश दोहराया।

  • सोमनाथ मंदिर: 1000 साल पहले तोड़ा गया, फिर पुनर्निर्माण से स्थापित हुआ भारतीय गौरव का प्रतीक

    सोमनाथ मंदिर: 1000 साल पहले तोड़ा गया, फिर पुनर्निर्माण से स्थापित हुआ भारतीय गौरव का प्रतीक


    गुजरात । मैं सोमनाथ हूं, वो मंदिर जहां भगवान शिव के दर्शन से पूरा संसार शिवमय हो जाता है। आज का दिन मेरे लिए ऐतिहासिक महत्व रखता है, क्योंकि ठीक 1000 साल पहले आज के दिन ही मुझे पहली बार तोड़ा गया था। यह वह दिन था जब मुस्लिम आक्रांता महमूद गजनवी ने इस पवित्र स्थल पर हमला किया और मुझसे जुड़ी हर उस चीज को लूटा, जो मेरे गौरव का प्रतीक था। रक्त रंजित मुझसे जुड़े हर टुकड़े को लूटने के बाद, मुझे नष्ट कर दिया गया। इसके बाद के शताब्दियों में कई मुस्लिम शासकों ने मुझे बार-बार लूटा और हर बार मेरी संरचना को तोड़ा, लेकिन भारत के स्वतंत्रता संग्राम के बाद, मुझे पुनर्निर्मित किया गया और फिर से जगमगाया।

    सोमनाथ का ऐतिहासिक महत्व

    सोमनाथ मंदिर को भगवान शिव का पहला ज्योतिर्लिंग माना जाता है। शास्त्रों में इसे सबसे पहले स्थान पर रखा गया है, सौराष्ट्रे सोमनाथं च इस मंदिर का निर्माण चंद्रदेव ने स्वयं सोने से किया था फिर सूर्यदेव ने चांदी से और बाद में भगवान श्रीकृष्ण ने लकड़ी से इसे सुंदर रूप दिया। सोलंकी राजपूत शासकों ने इस मंदिर को पत्थर से भव्य रूप प्रदान किया जो इसे आज के रूप में देख सकते हैं। सोमनाथ मंदिर की किवदंती चंद्रदेव के साथ जुड़ी हुई है जो भगवान शिव की तपस्या करने के लिए यहां आए थे। यही कारण है कि यह मंदिर चंद्र से जुड़ा एकमात्र शिव तीर्थ माना जाता है।

    महमूद गजनवी द्वारा हमले

    सोमनाथ मंदिर की सबसे दुखद घटना 1025 ईस्वी की है, जब महमूद गजनवी ने इस मंदिर पर हमला किया और इसे लूटकर नष्ट कर दिया। गजनवी ने मंदिर के चंदन द्वार को लूटकर अफगानिस्तान के गजनी में मस्जिद में स्थापित कर दिया था। कई बार लूटने और तोड़ने के बावजूद मंदिर का आंतरिक गर्भगृह हमेशा शांति से बना रहा। स्वतंत्रता के बाद 1951 में तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने सोमनाथ का दौरा किया और गजनवी द्वारा लूटे गए चंदन द्वार को वापस लाकर मंदिर में स्थापित किया।

    मंदिर की अद्भुत वास्तुकला

    सोमनाथ मंदिर को चालुक्य शैली में बनाया गया है, और इसका शिखर 155 फीट ऊंचा है। मंदिर में सोने का कलश और विशाल मंडपम हैं जो इसे और भी भव्य बनाते हैं। बाणस्तंभ जो एक दिशासूचक स्तंभ है इसे मंदिर परिसर में देखा जा सकता है। इस स्तंभ पर समुद्र की दिशा में बने तीर का निशान भी स्पष्ट रूप से दिखता है। इस पर संस्कृत में लिखा है, आसमुद्रांत दक्षिण ध्रुव पर्यंत, अबाधित ज्योर्तिमार्ग यानी यहां से दक्षिण ध्रुव तक कोई भूमि नहीं है।

    समुद्र और शिव की कृपा

    सोमनाथ मंदिर अरब सागर के किनारे स्थित है, लेकिन एक अद्भुत बात यह है कि समुद्र की लहरें कभी भी मंदिर के गर्भगृह तक नहीं पहुंच पाई हैं। स्थानीय पंडितों के अनुसार यह भगवान शिव की कृपा का प्रतीक है। माना जाता है कि समुद्र महादेव की मर्यादा को कभी नहीं लांघता जिससे मंदिर सुरक्षित रहता है।

  • पीएम मोदी का ब्लॉग 1000 साल बाद भी अडिग खड़ा है सोमनाथ विध्वंस नहीं पुनरुत्थान की गाथा

    पीएम मोदी का ब्लॉग 1000 साल बाद भी अडिग खड़ा है सोमनाथ विध्वंस नहीं पुनरुत्थान की गाथा


    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने ब्लॉग में सोमनाथ मंदिर के इतिहास को याद करते हुए इसे भारत की आस्था संस्कृति और संघर्ष का प्रतीक बताया। 1026 में गजनी के महमूद द्वारा सोमनाथ पर किया गया आक्रमण जिसने मंदिर को ध्वस्त कर दिया था आज से एक हजार साल पहले हुआ था। इस आक्रमण का उद्देश्य केवल मंदिर को नष्ट करना नहीं था बल्कि भारतीय सभ्यता और संस्कृति को भी नष्ट करना था। हालांकि इस आक्रमण के बावजूद आज भी सोमनाथ मंदिर पूरे गर्व और गौरव के साथ खड़ा है और यह भारत की अडिग आस्था और संघर्ष का प्रतीक बन चुका है।प्रधानमंत्री मोदी ने अपने ब्लॉग में लिखा सोमनाथ शब्द सुनते ही हमारे मन और हृदय में गर्व और आस्था की भावना भर जाती है। यह मंदिर भारत के आत्मगौरव का शाश्वत प्रतीक है जो न केवल एक धार्मिक स्थल है बल्कि भारतीय सभ्यता और संस्कृति की अमिट छाप भी छोड़ता है।

    सोमनाथ का ऐतिहासिक महत्व

    गुजरात के प्रभास पाटन में स्थित सोमनाथ भारत के द्वादश ज्योतिर्लिंगों में पहला स्थान रखता है। शास्त्रों के अनुसार सोमनाथ के दर्शन से व्यक्ति अपने पापों से मुक्त हो जाता है और उसे आत्मिक शांति की प्राप्ति होती है। यह मंदिर न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि इसके ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व ने इसे कई बार विदेशी आक्रमणों का निशाना बना दिया। विशेष रूप से 1026 में महमूद गजनवी द्वारा किया गया आक्रमण इस मंदिर के इतिहास का एक काला अध्याय था जिसने सोमनाथ को ध्वस्त कर दिया था।

    आक्रमण के बावजूद पुनर्निर्माण

    प्रधानमंत्री मोदी ने लिखा कि 1026 में सोमनाथ पर आक्रमण के बाद भी मंदिर का पुनर्निर्माण लगातार होता रहा। 1951 में सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण हुआ और इस मंदिर का वर्तमान स्वरूप 11 मई 1951 को श्रद्धालुओं के लिए खोला गया था। यह घटना भारतीय आस्था और संस्कृति की विजयी गाथा बन गई। प्रधानमंत्री मोदी ने इस अवसर पर तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद की उपस्थिति में हुए इस पुनर्निर्माण समारोह का उल्लेख किया और बताया कि सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण भारतीय स्वाभिमान और आस्था की एक शक्तिशाली मिसाल है।

    सरदार पटेल का योगदान

    प्रधानमंत्री मोदी ने सोमनाथ के पुनर्निर्माण में सरदार वल्लभभाई पटेल के योगदान को भी याद किया। 1947 में दीवाली के समय सरदार पटेल ने सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण के लिए दृढ़ संकल्प लिया था। यह उनका सपना था कि इस पवित्र मंदिर को फिर से खड़ा किया जाए और श्रद्धालु यहां पूजा-अर्चना कर सकें। उनका यह प्रयास भारतीय इतिहास का एक अहम हिस्सा बन चुका है।

    सोमनाथ की प्रेरणा

    पीएम मोदी ने अपने ब्लॉग में कहा कि सोमनाथ का पुनर्निर्माण हमें यह सिखाता है कि भारत कभी नहीं हारता। उन्होंने यह भी बताया कि सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण केवल एक शारीरिक संरचना का पुनर्निर्माण नहीं था बल्कि यह भारतीय सभ्यता के पुनरुत्थान का प्रतीक था। उन्होंने कहा सोमनाथ हमें यह संदेश देता है कि आस्था में शक्ति होती है जबकि घृणा और कट्टरता में विनाश की ताकत।

    भविष्य के लिए संदेश

    प्रधानमंत्री मोदी ने अंत में कहा कि अगर एक खंडित मंदिर को पुनर्निर्मित किया जा सकता है तो भारत भी अपने प्राचीन गौरव को पुनः प्राप्त कर सकता है। उन्होंने इस प्रेरणा के साथ नए संकल्प के साथ एक विकसित भारत के निर्माण की बात की। मोदी ने यह भी कहा कि सोमनाथ आज भी हमारे विश्वास और आस्था का सबसे मजबूत आधार है जो हमें आगे बढ़ने और सफलता की ओर प्रेरित करता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण की गाथा को याद करते हुए यह स्पष्ट किया कि यह मंदिर केवल धार्मिक स्थल नहीं है बल्कि यह भारतीय संस्कृतिस्वाभिमान और संघर्ष का प्रतीक है। 1026 के आक्रमण के बाद आज तक सोमनाथ ने हमें यह सिखाया है कि हमारी आस्था को न तो नष्ट किया जा सकता है और न ही इसे झुका जा सकता है। यही संदेश भारत को दुनिया भर में हर कठिनाई से निपटने की प्रेरणा देता है।

  • प्रधानमंत्री मोदी ने सोमनाथ मंदिर की गाथा को याद करते हुए कहा- यह भारतीय सभ्यता और साहस का प्रतीक है

    प्रधानमंत्री मोदी ने सोमनाथ मंदिर की गाथा को याद करते हुए कहा- यह भारतीय सभ्यता और साहस का प्रतीक है


    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज सोमनाथ मंदिर के विध्वंस और पुनर्निर्माण की गाथा को याद किया और इसे भारतीय सभ्यता की अमर चेतना का प्रतीक बताया। यह वही मंदिर है जिस पर आज से ठीक एक हजार वर्ष पहले यानी 1026 में गजनी के महमूद ने पहला भीषण आक्रमण किया था। प्रधानमंत्री मोदी ने सोमनाथ मंदिर के ऐतिहासिक महत्व पर विस्तार से बात करते हुए इसे भारत की आस्था और स्वाभिमान का प्रतीक बताया।

    सोमनाथ मंदिर का महत्व

    सोमनाथ मंदिर गुजरात के प्रभास पाटन में स्थित एक अत्यधिक महत्वपूर्ण तीर्थस्थल है और यह द्वादश ज्योतिर्लिंगों में प्रमुख स्थान रखता है। शास्त्रों के अनुसार इस मंदिर के दर्शन से पापों से मुक्ति और आत्मिक शांति की प्राप्ति होती है। इसी आध्यात्मिक और सामाजिक महत्व के कारण यह मंदिर कई बार विदेशी आक्रमणों का लक्ष्य बन चुका है लेकिन इसके बावजूद यह सदैव अपने स्थान पर अडिग खड़ा रहा।

    प्रधानमंत्री मोदी ने अपने ब्लॉग में लिखा कि “जय सोमनाथ! 2026 में हम उस पवित्र स्थल के पहले आक्रमण के 1000 वर्ष पूरे होने का स्मरण कर रहे हैं। बार-बार हुए हमलों के बावजूद हमारा सोमनाथ मंदिर आज भी अडिग खड़ा है। यह मंदिर भारत माता की उन करोड़ों वीर संतानों के स्वाभिमान और अदम्य साहस की गाथा है जिनके लिए अपनी संस्कृति और सभ्यता सर्वोपरि रही।”

    गजनी के महमूद द्वारा आक्रमण

    जनवरी 1026 में गजनी के महमूद ने सोमनाथ मंदिर पर आक्रमण किया था जिसका उद्देश्य केवल मंदिर को तोड़ना नहीं था बल्कि भारतीय आस्था और संस्कृति को नष्ट करना था। यह आक्रमण भारतीय इतिहास का एक अत्यधिक कष्टकारी क्षण था लेकिन इसके बावजूद सोमनाथ के प्रति भारतीयों की आस्था और विश्वास कभी कम नहीं हुआ।

    सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण के बाद से यह भारतीय सभ्यता और सांस्कृतिक आत्मा का प्रतीक बन गया। प्रधानमंत्री मोदी ने इस महत्वपूर्ण क्षण को याद करते हुए कहा कि यह गाथा केवल मंदिर के विध्वंस की नहीं बल्कि संघर्ष बलिदान और पुनर्निर्माण की कहानी है। यह मंदिर आज भी दुनिया को यह संदेश देता है कि आस्था को न तो समाप्त किया जा सकता है और न ही उसे झुकाया जा सकता है।

    सोमनाथ का पुनर्निर्माण और वर्तमान स्थिति

    प्रधानमंत्री मोदी ने इस बात पर भी जोर दिया कि सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण भारतीयों की न केवल आस्था बल्कि उनकी संकल्पशक्ति को भी दर्शाता है। उन्होंने कहा कि यदि एक खंडित मंदिर फिर से खड़ा हो सकता है तो भारत भी अपने प्राचीन गौरव के साथ पुनः दुनिया को मार्ग दिखा सकता है।

    आध्यात्मिक और सांस्कृतिक संदेश

    प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी कहा कि सोमनाथ की यह कहानी केवल भारत के इतिहास से जुड़ी नहीं है बल्कि यह भारत के पुनर्निर्माण और सामर्थ्य की भी गाथा है। वह मानते हैं कि आज के समय में जब भारत पुनः अपनी सांस्कृतिक पहचान को लेकर गर्व महसूस करता है सोमनाथ मंदिर से हमें यह प्रेरणा मिलती है कि अपनी आस्था और संस्कृति के साथ आगे बढ़ना कितना महत्वपूर्ण है।

    सोमनाथ के द्वारा दिया गया संदेश
    आज भी सोमनाथ मंदिर लाखों श्रद्धालुओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है। यह न केवल धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि यह भारतीय समाज के अदम्य साहस संघर्ष और पुनर्निर्माण की जीवंत मिसाल भी प्रस्तुत करता है। पीएम मोदी ने अपनी ब्लॉग पोस्ट में इस तथ्य का उल्लेख किया कि सोमनाथ का पुनर्निर्माण भारत के अदम्य साहस आत्मविश्वास और संस्कृति के प्रति आस्थाओं की महत्ता को दर्शाता है।

    प्रधानमंत्री मोदी ने सोमनाथ मंदिर के महत्व को एक नए दृष्टिकोण से पेश किया जो केवल आस्था का केंद्र नहीं है बल्कि यह भारत की ताकत सामर्थ्य और संघर्ष की भी गाथा है। मोदी ने यह संदेश दिया कि जैसे सोमनाथ का पुनर्निर्माण हुआ वैसे ही भारत अपनी गौरवशाली संस्कृति और सभ्यता के साथ पुनः उठ सकता है और दुनिया को मार्ग दिखा सकता है।