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  • सोनम वांगचुक आज कर सकते हैं बड़ा ऐलान, गिरफ्तार CJP नेताओं के विरोध में उठाएंगे कदम

    सोनम वांगचुक आज कर सकते हैं बड़ा ऐलान, गिरफ्तार CJP नेताओं के विरोध में उठाएंगे कदम


    नई दिल्ली। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक आज कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेताओं अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका की गिरफ्तारी के विरोध में अगला कदम उठाने का ऐलान कर सकते हैं। उन्होंने सरकार से प्रदर्शनकारियों को रिहा करने और गिरफ्तारियों से जुड़े मामलों को सुलझाने के लिए 24 घंटे का समय दिया था। यह समयसीमा पूरी होने पर वांगचुक धरना, अनशन या पदयात्रा जैसे शांतिपूर्ण विरोध के विकल्पों पर विचार कर सकते हैं।

    वांगचुक ने दिल्ली में छात्र और युवा नेताओं, वकीलों, पत्रकारों तथा सांसदों को हिरासत में लिए जाने की निंदा की है। उनका कहना है कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन की अनुमति होनी चाहिए। उन्होंने सरकार से अपील की कि गिरफ्तारियों को वापस लेकर संबंधित मामलों का समाधान बातचीत के जरिए किया जाए।

    वांगचुक बोले- देश में अघोषित आपातकाल जैसे हालात

    सोनम वांगचुक ने कहा कि दिल्ली में छात्र नेताओं, युवा नेताओं, वकीलों, पत्रकारों और यहां तक कि सांसदों को भी हिरासत में लिया गया है। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन के दौरान शांति और एकता बनाए रखने की अपील करने के बाद उन्हें उम्मीद थी कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध की अनुमति दी जाएगी।

    वांगचुक ने आरोप लगाया कि देशभर में अघोषित आपातकाल जैसे हालात दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि दिन खत्म होने से पहले गिरफ्तारियों को समाप्त किया जाए और विवाद का समाधान निकाला जाए।

    उन्होंने चेतावनी दी कि यदि अगले 24 घंटे में गिरफ्तारियों को वापस नहीं लिया गया, तो उन्हें लेह या दिल्ली में शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने पर विचार करना पड़ेगा। इसके लिए धरना, अनशन या पदयात्रा जैसे विकल्प अपनाए जा सकते हैं। हालांकि, उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार बातचीत के जरिए ही मामले को सुलझा लेगी और उन्हें आंदोलन का अगला कदम उठाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

    7 हजार से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने का दावा

    दिल्ली में ‘जंतर-मंतर 2.0’ आंदोलन के दौरान पुलिस की भारी तैनाती और बैरिकेडिंग के बीच प्रदर्शन सीमित हो गया। समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, सात हजार से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। इनमें सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके और चार पूर्व मुख्यमंत्री भी शामिल बताए गए हैं।

    सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके, सह-संयोजक सौरव दास और राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका को दिल्ली पुलिस ने इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर विमान से ही हिरासत में ले लिया। जंतर-मंतर की ओर जा रहे आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल, तृणमूल कांग्रेस की ममता बनर्जी, माकपा नेता पिनराई विजयन और माणिक सरकार सहित कई विपक्षी नेताओं को भी हिरासत में लिए जाने की जानकारी सामने आई।

    इसके अलावा, ध्रुव राठी को गुरुग्राम स्थित उनके आवास से और आइसा अध्यक्ष नेहा बोरा को दिल्ली हाट से हिरासत में लिया गया।

    सीजेपी का ऐलान- मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे तक जारी रहेगा आंदोलन

    सीजेपी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तक आंदोलन जारी रखने का संकल्प जताया है। पार्टी ने रविवार सुबह 10 बजे जंतर-मंतर पर दोबारा प्रदर्शन करने की घोषणा की।

    प्रेस वार्ता में सीजेपी के राष्ट्रीय संगठन प्रभारी और आंदोलन की कमान संभाल रहे अजिंक्य शिंदे ने कहा कि दिल्ली पुलिस की कार्रवाई के बावजूद संगठन पीछे नहीं हटेगा। पार्टी ने अपने आंदोलन को जारी रखने की बात दोहराते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग की है।

    सुप्रीम कोर्ट में आज अवमानना याचिका पर सुनवाई

    इस मामले से जुड़ा एक कानूनी घटनाक्रम भी सामने आया है। सुप्रीम कोर्ट रविवार को उस याचिका पर सुनवाई करेगा, जिसमें आरोप लगाया गया है कि 10 अक्टूबर को मेट्रो और ट्रेनों की आवाजाही पर पूरी तरह रोक नहीं लगाने संबंधी अदालत के आदेश का उल्लंघन हुआ।

    अधिवक्ता शैलेंद्र मणि त्रिपाठी ने यह अवमानना याचिका दाखिल की है। इसमें संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू करने का अनुरोध किया गया है। अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर भी नजर रहेगी।

  • जंतर मंतर से संसद तक गूंजा आंदोलन, राहुल गांधी के प्रदर्शन के बाद सरकार ने वांगचुक से की मुलाकात

    जंतर मंतर से संसद तक गूंजा आंदोलन, राहुल गांधी के प्रदर्शन के बाद सरकार ने वांगचुक से की मुलाकात


    नई दिल्ली । जंतर मंतर पर चल रहे आंदोलन ने देश की राजनीति में नया मोड़ ला दिया है। लंबे समय तक आंदोलन को सीमित मानकर चल रही केंद्र सरकार ने अब अपना रुख बदलते हुए सक्रिय पहल शुरू कर दी है। राहुल गांधी के प्रधानमंत्री आवास के निकट धरने के बाद घटनाक्रम तेजी से बदला और सरकार ने न केवल अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक से संपर्क किया बल्कि आंदोलन में घायल छात्रों से मिलने के लिए केंद्रीय मंत्रियों को अस्पताल भी भेजा। इसके साथ ही संसद में इस मुद्दे पर चर्चा कराने की विपक्ष की मांग को भी सरकार ने स्वीकार कर लिया।

    नीट पेपर लीक और विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर शुरू हुआ आंदोलन शुरुआती दिनों में सीमित दायरे में दिखाई दे रहा था। जंतर मंतर पर कम संख्या में प्रदर्शनकारियों की मौजूदगी को देखते हुए माना जा रहा था कि यह आंदोलन ज्यादा प्रभाव नहीं डाल पाएगा। लेकिन जैसे जैसे छात्रों का समर्थन बढ़ा और संसद मार्च के बाद आंदोलन ने नया स्वरूप लिया वैसे वैसे राजनीतिक माहौल भी बदलने लगा।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राहुल गांधी के धरने ने इस आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दी। इसके बाद सरकार ने तेजी से अपनी रणनीति में बदलाव किया। कई दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक से मिलने केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह पहुंचे और उनसे अनशन समाप्त करने की अपील की। इससे पहले आंदोलन के प्रतिनिधियों को सरकार से मिलने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा था लेकिन बाद में परिस्थितियां तेजी से बदल गईं।

    सरकार ने संसद में इस पूरे मुद्दे पर चर्चा के लिए भी सहमति जताई। हालांकि विपक्ष ने इस पर नई शर्त रखते हुए कहा कि चर्चा तभी सार्थक होगी जब शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान अपने पद से इस्तीफा देंगे। इसके बाद इस मुद्दे पर सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।

    इस बीच सोनम वांगचुक ने सोशल मीडिया पर एक पत्र साझा करते हुए बताया कि विभिन्न राजनीतिक दलों के लगभग 65 सांसदों ने उन्हें पत्र लिखकर या व्यक्तिगत रूप से मिलकर अनशन समाप्त करने का आग्रह किया है। उन्होंने लिखा कि सभी ने उन्हें याद दिलाया है कि देश और शिक्षा के क्षेत्र में उनका योगदान अभी बाकी है। वांगचुक ने कहा कि वह भी जीना चाहते हैं और अपने छात्रों तथा शिक्षा से जुड़े कार्यों में जल्द लौटना चाहते हैं लेकिन आंदोलन के उद्देश्यों को लेकर उनकी प्रतिबद्धता बनी हुई है।

    विश्लेषकों का मानना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता को लेकर युवाओं में पहले से ही असंतोष था। यही कारण है कि आंदोलन धीरे धीरे व्यापक समर्थन हासिल करता गया और सरकार को अपनी रणनीति बदलने के लिए मजबूर होना पड़ा।

    फिलहाल सरकार और आंदोलनकारियों के बीच संवाद की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है लेकिन आंदोलन पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि संसद में होने वाली चर्चा और सरकार के अगले कदम इस पूरे विवाद का क्या समाधान निकालते हैं।

  • सरकार ने की सोनम वांगचुक से संवाद की पहल शुरू, मेदांता अस्पताल पहुंचे जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह

    सरकार ने की सोनम वांगचुक से संवाद की पहल शुरू, मेदांता अस्पताल पहुंचे जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह


    नई दिल्ली। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से बातचीत की दिशा में केंद्र सरकार ने पहल शुरू कर दी है। सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह ने गुरुग्राम स्थित मेदांता अस्पताल पहुंचकर वांगचुक से मुलाकात की। इस मुलाकात को सरकार और वांगचुक के बीच संभावित संवाद की शुरुआत के तौर पर देखा जा रहा है।

    हाईकोर्ट के आदेश पर मेदांता में कराया गया भर्ती
    दिल्ली हाईकोर्ट के निर्देश के बाद सोनम वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल से डिस्चार्ज कर आगे के उपचार के लिए गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया। अदालत ने उनकी स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में इलाज की आवश्यकता बताई थी।

    28 जून से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर
    सोनम वांगचुक कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में चल रहे आंदोलन के समर्थन में 28 जून से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं। उनकी प्रमुख मांगों में शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही तय करना, NEET सहित विभिन्न परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और अनियमितताओं की जांच तथा केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग शामिल है।

    पत्नी की याचिका पर मिला राहत का आदेश
    इससे पहले वांगचुक का इलाज दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में चल रहा था। उनकी पत्नी गीतांजलि आंग्मो ने अदालत से अनुरोध किया था कि बेहतर चिकित्सा सुविधा के लिए उन्हें मेदांता अस्पताल स्थानांतरित किया जाए। याचिका पर सुनवाई के बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने तत्काल उन्हें मेदांता भेजने का निर्देश दिया।

    डॉक्टरों ने जताई थी स्वास्थ्य को लेकर चिंता
    सुनवाई के दौरान एम्स और सफदरजंग अस्पताल के चिकित्सकों ने मेडिकल रिपोर्ट अदालत के समक्ष पेश की। डॉक्टरों ने बताया कि वांगचुक के शरीर में पोटेशियम का स्तर कम है और टीएलसी (TLC) रिपोर्ट को लेकर भी चिकित्सकीय चिंता बनी हुई है। इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने विशेषज्ञ निगरानी में इलाज को आवश्यक माना।

    सरकार ने नहीं जताई कोई आपत्ति
    सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि सोनम वांगचुक को मेदांता अस्पताल में भर्ती कराने पर केंद्र सरकार को कोई आपत्ति नहीं है। इसके बाद हाईकोर्ट ने उनके स्थानांतरण की अनुमति देते हुए बेहतर उपचार सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।

  • अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठे अभिजीत दीपके लेकिन माइग्रेन की परेशानी ने बढ़ाई मुश्किलें आंदोलन पर टिकी सबकी नजर

    अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठे अभिजीत दीपके लेकिन माइग्रेन की परेशानी ने बढ़ाई मुश्किलें आंदोलन पर टिकी सबकी नजर


    नई दिल्ली । सोनम वांगचुक को जंतर मंतर से हटाए जाने के बाद शुरू हुआ नया घटनाक्रम अब अभिजीत दीपके के अनिश्चितकालीन अनशन तक पहुंच गया है। कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा और आंदोलन के समर्थन का प्रतीक बताया है लेकिन इस फैसले के साथ ही उनके स्वास्थ्य को लेकर भी गंभीर सवाल उठने लगे हैं। सबसे बड़ी वजह यह है कि खुद दीपके पहले कई बार सार्वजनिक रूप से स्वीकार कर चुके हैं कि उन्हें माइग्रेन की समस्या है और लंबे समय तक खाली पेट रहने पर उनकी तबीयत बिगड़ सकती है।

    दरअसल पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया और विभिन्न मंचों पर यह सवाल लगातार उठ रहा था कि जब सोनम वांगचुक लंबे समय से अनशन पर बैठे हैं तब आंदोलन का नेतृत्व कर रहे अभिजीत दीपके खुद अनशन क्यों नहीं कर रहे। इस सवाल का जवाब देते हुए दीपके ने पहले कहा था कि आंदोलन की पूरी रणनीति और प्रबंधन की जिम्मेदारी उनके कंधों पर है इसलिए उनका सक्रिय रहना जरूरी है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया था कि सोनम वांगचुक ने स्वयं उन्हें अनशन पर बैठने से मना किया था ताकि आंदोलन का संचालन प्रभावित न हो।

    इसके अलावा अभिजीत दीपके ने अपनी व्यक्तिगत स्वास्थ्य समस्या का भी खुलासा किया था। उन्होंने बताया था कि उन्हें माइग्रेन की शिकायत है और यदि समय पर भोजन नहीं मिलता तो तेज सिरदर्द शुरू हो जाता है। उन्होंने यह भी कहा था कि परिवार के लोग हमेशा उन्हें समय पर खाना खाने की सलाह देते हैं क्योंकि अधिक देर तक भूखे रहने से उनकी परेशानी बढ़ जाती है। चिकित्सकीय दृष्टि से भी माइग्रेन के मरीजों के लिए लंबे समय तक खाली पेट रहना जोखिम भरा माना जाता है क्योंकि इससे सिरदर्द का तीव्र दौरा पड़ सकता है और शारीरिक कमजोरी भी बढ़ सकती है।

    ऐसे में अब जब अभिजीत दीपके ने खुद अनिश्चितकालीन अनशन शुरू कर दिया है तो उनके सामने दोहरी चुनौती खड़ी हो गई है। एक तरफ उन्हें अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखना होगा तो दूसरी ओर आंदोलन की पूरी जिम्मेदारी भी निभानी होगी। किसी भी बड़े आंदोलन में नेतृत्व की भूमिका केवल मंच तक सीमित नहीं होती बल्कि रणनीति बनाना कार्यकर्ताओं का मनोबल बनाए रखना प्रशासन के साथ संवाद करना और हर स्थिति पर नजर रखना भी उतना ही जरूरी होता है। यह सब कार्य लगातार ऊर्जा और मानसिक एकाग्रता की मांग करते हैं।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि अनशन लंबा खिंचता है तो अभिजीत दीपके के स्वास्थ्य पर इसका असर पड़ सकता है। ऐसी स्थिति में आंदोलन की गति और नेतृत्व दोनों प्रभावित होने की आशंका रहेगी। दूसरी ओर उनके समर्थक इसे लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए उठाया गया साहसिक कदम बता रहे हैं और आंदोलन को आगे बढ़ाने की बात कह रहे हैं।

    फिलहाल सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि अभिजीत दीपके अपनी स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों के बावजूद इस अनिश्चितकालीन अनशन को कितने समय तक जारी रख पाते हैं। आने वाले दिनों में उनका स्वास्थ्य और आंदोलन दोनों ही चर्चा का प्रमुख विषय बने रह सकते हैं।

    English Tags:
    Abhijeet Deepke, Sonam Wangchuk, Hunger Strike, Migraine, Protest Movement

  • सोनम वांगचुक पर NSA हटाया गया, 170 दिन बाद जोधपुर जेल से रिहाई; लेह हिंसा के बाद हुई थी गिरफ्तारी

    सोनम वांगचुक पर NSA हटाया गया, 170 दिन बाद जोधपुर जेल से रिहाई; लेह हिंसा के बाद हुई थी गिरफ्तारी



    नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने शनिवार को लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता और इंजीनियर सोनम वांगचुक पर लगी नेशनल सिक्युरिटी एक्ट (NSA) को तुरंत प्रभाव से हटा दिया। गृह मंत्रालय के अनुसार, वांगचुक ने हिरासत की अवधि का लगभग आधा हिस्सा पूरा किया है। अब वे जोधपुर जेल से रिहा होंगे।

    लद्दाख प्रशासन ने 24 सितंबर 2025 को हुए लेह हिंसा के बाद वांगचुक को 26 सितंबर को NSA के तहत हिरासत में लिया था। हिंसा में चार लोगों की मौत हुई और 150 से अधिक घायल हुए थे। सरकार का आरोप था कि वांगचुक ने इन प्रदर्शनों को भड़काया। NSA के तहत ऐसे व्यक्तियों को हिरासत में रखा जा सकता है, जो देश की सुरक्षा या सार्वजनिक व्यवस्था के लिए खतरा माने जाएँ। अधिकतम हिरासत अवधि 12 महीने तक होती है।

    सोनम वांगचुक उस समय लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग कर रहे थे और इस मुद्दे पर आंदोलन कर रहे थे। उनके नेतृत्व में हुए प्रदर्शनों के दो दिन बाद ही उन्हें हिरासत में लिया गया था।

    जोधपुर जेल में 170 दिन तक बंद रहने के बाद अब वांगचुक की रिहाई से उनके समर्थकों में राहत का माहौल है। अधिकारियों ने बताया कि रिहाई के बाद उनके लद्दाख लौटने और क्षेत्र में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर निगरानी रखी जाएगी।

    विशेषज्ञों का मानना है कि NSA हटाए जाने से वांगचुक के राजनीतिक और सामाजिक कार्यों पर कानूनी प्रतिबंध कम होंगे, और यह लद्दाख में केंद्र और स्थानीय प्रशासन के बीच संतुलन बनाए रखने का भी एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।