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  • फीफा वर्ल्ड कप 2026: दक्षिण कोरिया की शानदार शुरुआत, चेकिया को 2-1 से हराकर दर्ज की दमदार जीत

    फीफा वर्ल्ड कप 2026: दक्षिण कोरिया की शानदार शुरुआत, चेकिया को 2-1 से हराकर दर्ज की दमदार जीत


    नई दिल्ली। फीफा वर्ल्ड कप 2026 में दक्षिण कोरिया ने अपने अभियान की शानदार शुरुआत करते हुए चेकिया को 2-1 से हराकर जीत दर्ज की। रोमांच से भरपूर इस मुकाबले में दक्षिण कोरिया ने दूसरे हाफ में एक गोल से पिछड़ने के बावजूद जबरदस्त वापसी की और अंततः मुकाबला अपने नाम कर लिया। इस जीत के साथ कोरियाई टीम ने टूर्नामेंट में अपने इरादे साफ कर दिए हैं।

    मैच की शुरुआत से ही दोनों टीमों ने आक्रामक रुख अपनाया। शुरुआती मिनटों में दक्षिण कोरिया ने गेंद पर बेहतर नियंत्रण रखते हुए चेकिया के डिफेंस पर लगातार दबाव बनाया। मैच के नौवें मिनट में कोरिया को फ्री किक के रूप में शानदार मौका मिला, लेकिन चेकिया के मजबूत रक्षापंक्ति ने उसे नाकाम कर दिया। इसके बाद 11वें मिनट में मिले कॉर्नर का भी दक्षिण कोरिया फायदा नहीं उठा सका।

    पहले हाफ में कोरिया ने कई हमले किए, लेकिन चेकिया का डिफेंस मजबूती से खड़ा रहा। दूसरी ओर चेकिया ने भी कुछ अच्छे मूव बनाए, हालांकि वह भी गोल करने में सफल नहीं हो सकी। दोनों टीमों के बीच कड़ा संघर्ष देखने को मिला और पहले 45 मिनट तक स्कोर 0-0 पर बराबरी पर रहा।

    दूसरे हाफ में चेकिया ने अधिक आक्रामक अंदाज में खेलना शुरू किया। इसका फायदा उसे 59वें मिनट में मिला जब लाडिसलाव क्रेजकी ने शानदार हेडर के जरिए गेंद को जाल में पहुंचाकर अपनी टीम को 1-0 की बढ़त दिला दी। इस गोल के बाद ऐसा लग रहा था कि मुकाबले का रुख चेकिया की ओर झुक सकता है, लेकिन दक्षिण कोरिया ने हार नहीं मानी।

    एक गोल से पीछे होने के बाद कोरियाई खिलाड़ियों ने अपनी गति और आक्रमण को और तेज किया। लगातार प्रयासों का परिणाम 67वें मिनट में मिला, जब हांग इन बियोम ने शानदार गोल दागकर स्कोर 1-1 से बराबर कर दिया। इस गोल ने दक्षिण कोरिया में नया जोश भर दिया और टीम ने जीत के लिए दबाव बनाए रखा।

    बराबरी का गोल मिलने के बाद दक्षिण कोरिया ने आक्रमण जारी रखा। मैच के 80वें मिनट में ओह हियोन ग्यू ने बेहतरीन फिनिशिंग का प्रदर्शन करते हुए टीम को 2-1 की बढ़त दिला दी। यह गोल मैच का निर्णायक क्षण साबित हुआ। इसके बाद चेकिया ने वापसी की भरपूर कोशिश की और कई हमले किए, लेकिन दक्षिण कोरिया के डिफेंस ने कोई गलती नहीं की।

    अंतिम मिनटों में मुकाबला बेहद रोमांचक रहा, लेकिन दक्षिण कोरिया ने संयम बनाए रखा और चेकिया को बराबरी का मौका नहीं दिया। निर्धारित समय समाप्त होने पर स्कोर 2-1 रहा और दक्षिण कोरिया ने फीफा वर्ल्ड कप 2026 में जीत के साथ अपने सफर की शुरुआत की। यह जीत टीम के आत्मविश्वास को बढ़ाने वाली साबित हो सकती है, जबकि चेकिया को अगले मुकाबलों में वापसी के लिए अधिक मजबूत प्रदर्शन करना होगा।

  • भारत–कोरिया रणनीतिक साझेदारी को नई मजबूती, राजनाथ सिंह की यात्रा से बढ़ा सहयोग का दायरा

    भारत–कोरिया रणनीतिक साझेदारी को नई मजबूती, राजनाथ सिंह की यात्रा से बढ़ा सहयोग का दायरा


    नई दिल्ली । भारत और दक्षिण कोरिया के बीच बढ़ते रणनीतिक संबंधों को नई दिशा देने के उद्देश्य से रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की हालिया दक्षिण कोरिया यात्रा को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस यात्रा के दौरान उन्होंने सियोल स्थित राष्ट्रीय समाधि स्थल पर पहुंचकर देश के वीर सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की, जिन्होंने राष्ट्र की सुरक्षा और सम्मान के लिए अपने प्राणों की आहुति दी। इस अवसर पर उनका संदेश केवल औपचारिकता तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें दोनों देशों के बीच साझा मूल्यों, आपसी सम्मान और वैश्विक शांति के प्रति गहरी प्रतिबद्धता भी झलकती दिखाई दी। उन्होंने कहा कि सैनिकों का साहस, त्याग और देशभक्ति आने वाली पीढ़ियों के लिए हमेशा प्रेरणास्रोत रहेगा और किसी भी राष्ट्र की सुरक्षा उसकी सेना के बलिदान पर ही आधारित होती है।

    इस महत्वपूर्ण दौरे के दौरान रक्षा मंत्री ने दक्षिण कोरिया के अपने समकक्ष के साथ व्यापक स्तर पर द्विपक्षीय वार्ता की योजना भी साझा की, जिसमें रक्षा सहयोग, सैन्य तकनीक, समुद्री सुरक्षा, और रक्षा उत्पादन जैसे क्षेत्रों में नए अवसरों की तलाश पर विशेष ध्यान दिया गया। दोनों देशों के बीच पिछले कुछ वर्षों में रक्षा संबंधों में उल्लेखनीय प्रगति देखी गई है और अब इसे एक अधिक संरचित और दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी में बदलने पर जोर दिया जा रहा है। बैठक में क्षेत्रीय स्थिरता और हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी विचारों का आदान-प्रदान किया जाना प्रस्तावित है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह यात्रा केवल औपचारिक नहीं बल्कि दूरगामी रणनीतिक महत्व रखती है।

    राजनाथ सिंह की यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियाँ तेजी से बदल रही हैं और देशों के बीच रक्षा सहयोग अधिक महत्वपूर्ण होता जा रहा है। भारत और दक्षिण कोरिया दोनों ही लोकतांत्रिक मूल्य, शांति और नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के पक्षधर माने जाते हैं, और यही समानता दोनों देशों को और अधिक करीब ला रही है। समुद्री सुरक्षा, तकनीकी सहयोग और रक्षा निर्माण के क्षेत्र में दोनों देशों की साझेदारी भविष्य में नई ऊंचाइयों को छू सकती है।

    सियोल स्थित राष्ट्रीय समाधि स्थल पर दी गई श्रद्धांजलि को एक प्रतीकात्मक लेकिन महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जो यह दर्शाता है कि भारत न केवल अपने ही सैनिकों के बलिदान का सम्मान करता है, बल्कि अन्य देशों के वीरों के प्रति भी समान सम्मान की भावना रखता है। यह दृष्टिकोण दोनों देशों के बीच मानवीय और सांस्कृतिक संबंधों को भी मजबूत करता है।

    इस यात्रा से यह संकेत मिलता है कि भारत और दक्षिण कोरिया अब केवल व्यापारिक या औपचारिक संबंधों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे एक व्यापक रणनीतिक साझेदारी की ओर बढ़ रहे हैं, जिसमें रक्षा, तकनीक और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण पहलू शामिल हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में यह साझेदारी एशिया-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता और सहयोग का एक मजबूत आधार बन सकती है।

  • नींद की कमी पर अनोखी पहल: सियोल में ‘पावर नैप कॉन्टेस्ट’, 80 साल के बुजुर्ग ने मारी बाजी

    नींद की कमी पर अनोखी पहल: सियोल में ‘पावर नैप कॉन्टेस्ट’, 80 साल के बुजुर्ग ने मारी बाजी


    नई दिल्ली। दक्षिण कोरिया की राजधानी सियोल में एक अनोखा और दिलचस्प आयोजन देखने को मिला, जहां लोगों को सोने के लिए आमंत्रित किया गया। ‘पावर नैप कॉन्टेस्ट’ नाम की इस प्रतियोगिता का मकसद सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि देश में बढ़ती नींद की कमी की गंभीर समस्या की ओर ध्यान खींचना था। सियोल मेट्रोपॉलिटन गवर्नमेंट द्वारा आयोजित इस इवेंट में हजारों युवा हान नदी किनारे स्थित पार्क में पहुंचे और खुले आसमान के नीचे सुकून की नींद लेने की कोशिश की।

    तेज-रफ्तार जिंदगी और काम के भारी दबाव के लिए मशहूर दक्षिण कोरिया में युवाओं के बीच नींद की कमी एक बड़ी समस्या बन चुकी है। यही वजह है कि इस प्रतियोगिता में हिस्सा लेने के लिए प्रतिभागियों को थका हुआ और पेट भरकर आने की शर्त दी गई थी, ताकि वे गहरी नींद ले सकें। कई प्रतिभागी मजेदार वेशभूषा में पहुंचे। कोई ‘स्लीपिंग ब्यूटी’ बना तो कोई ‘स्लीपिंग प्रिंस’।

    प्रतियोगिता में शामिल 20 वर्षीय छात्र पार्क जून-सियोक पारंपरिक शाही पोशाक पहनकर आए और बताया कि पढ़ाई और पार्ट-टाइम जॉब के कारण उन्हें रोजाना सिर्फ 3-4 घंटे ही नींद मिल पाती है। वहीं, अनिद्रा से जूझ रही एक शिक्षिका कोआला की ड्रेस में नजर आईं, ताकि वह इस मौके पर सुकून से सो सकें।

    इस अनोखे मुकाबले में प्रतिभागियों की नींद की गुणवत्ता को मापने के लिए उनकी हार्ट रेट मॉनिटर की गई, जिससे पता चल सके कि कौन सबसे गहरी और शांत नींद ले रहा है। प्रतियोगिता की शुरुआत दोपहर में हुई और कुछ ही देर में पूरे पार्क में सन्नाटा छा गया, मानो शहर की भागदौड़ थम गई हो।

    सबसे दिलचस्प बात यह रही कि इस ‘नींद की जंग’ में 80 वर्षीय बुजुर्ग ने बाजी मार ली, जबकि दूसरे स्थान पर एक 37 वर्षीय ऑफिस वर्कर रहे, जो नाइट शिफ्ट और काम के दबाव से बेहद थके हुए थे।

    यह प्रतियोगिता सिर्फ एक इवेंट नहीं, बल्कि एक बड़ा संदेश है कि आधुनिक जीवनशैली में नींद की अनदेखी किस हद तक बढ़ चुकी है। OECD देशों में सबसे कम सोने वाले देशों में शामिल दक्षिण कोरिया अब इस समस्या को लेकर जागरूकता बढ़ाने की कोशिश कर रहा है और यह ‘पावर नैप कॉन्टेस्ट’ उसी दिशा में एक अनोखी पहल बनकर सामने आया है।

  • अमेरिका भारत पर फिर से टैरिफ लगाने की तैयारी में, 16 ट्रेडिंग पार्टनर्स की सेक्शन 301 जांच शुरू

    अमेरिका भारत पर फिर से टैरिफ लगाने की तैयारी में, 16 ट्रेडिंग पार्टनर्स की सेक्शन 301 जांच शुरू


    नई दिल्ली। अमेरिकी ट्रम्प प्रशासन ने भारत और चीन सहित 16 प्रमुख ट्रेडिंग पार्टनर्स के खिलाफ नई जांच शुरू कर दी है। यह कार्रवाई ‘सेक्शन 301’ के तहत की जा रही है, जो अमेरिकी ट्रेड एक्ट ऑफ 1974 का हिस्सा है और अमेरिका को उन देशों पर एकतरफा टैरिफ या प्रतिबंध लगाने की शक्ति देती है, जो अमेरिकी कंपनियों और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को नुकसान पहुंचा रहे हों।

    इस कदम के पीछे पिछली घटनाओं का संदर्भ है। फरवरी में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति ट्रम्प द्वारा लगाए गए ग्लोबल टैरिफ को अवैध करार दिया था। इसके बाद ट्रम्प प्रशासन ने 150 दिनों के लिए 10% का अस्थायी टैरिफ लागू किया। अब नई जांच के माध्यम से प्रशासन यह सुनिश्चित करना चाहता है कि टैरिफ का दबाव जारी रहे और ट्रेडिंग पार्टनर्स को बातचीत की मेज पर लाया जा सके।

    यूएस ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव जेमिसन ग्रीर ने बताया कि यह जांच भारत, चीन, यूरोपीय संघ (EU), जापान, दक्षिण कोरिया, मैक्सिको, वियतनाम, ताइवान, थाईलैंड, मलेशिया, कंबोडिया, सिंगापुर, इंडोनेशिया, बांग्लादेश, स्विट्जरलैंड और नॉर्वे पर केंद्रित है। अगर जांच में इन देशों की नीतियां अनुचित व्यापार व्यवहार के तहत पाई गईं, तो उन पर भारी टैरिफ लगाया जा सकता है।

    जांच का मुख्य फोकस उन देशों पर है, जो जरूरत से अधिक उत्पादन कर अमेरिकी बाजार में सस्ते दाम पर माल बेचते हैं, जिससे अमेरिकी कंपनियों को नुकसान होता है। उदाहरण के तौर पर, यदि किसी देश में जूतों की फैक्ट्री सालाना 100 जूते बना सकती है, लेकिन घरेलू मांग केवल 20 जूते की है, तो शेष 80 जूते सस्ते दाम पर अमेरिका में भेज दिए जाते हैं। अमेरिका इसे मार्केट डंपिंग और अनुचित व्यापार व्यवहार मानता है।

    भारत के लिए यह चिंता का विषय है। 2024 में भारत का अमेरिका के साथ गुड्स ट्रेड सरप्लस 58,216 मिलियन डॉलर था, जो 2025 में घटकर 45,801 मिलियन डॉलर रह गया। इस कमी के बावजूद भारत इस जांच की सूची में शामिल है। यदि भारत की नीतियां ‘अनुचित’ पाई गईं, तो भारतीय सामानों पर भारी टैरिफ या प्रतिबंध लग सकते हैं।

    इसके अलावा, अमेरिका फोर्स्ड लेबर पर भी अलग जांच कर रहा है। इसका उद्देश्य है बंधुआ मजदूरी से बने सामानों के आयात पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाना। पहले ही उइगर फोर्स्ड लेबर प्रोटेक्शन एक्ट के तहत चीन के शिनजियांग क्षेत्र से आने वाले सोलर पैनल और अन्य सामानों पर कार्रवाई की जा चुकी है। अब यह कार्रवाई अन्य देशों पर भी लागू हो सकती है।

    जांच की टाइमलाइन भी निर्धारित कर दी गई है। 15 अप्रैल तक आम जनता और कंपनियों से सुझाव मांगे गए हैं, इसके बाद 5 मई के आसपास सार्वजनिक सुनवाई होगी। लक्ष्य है कि जुलाई में अस्थायी टैरिफ खत्म होने से पहले नए टैरिफ प्रस्ताव और जांच के नतीजे तैयार हो जाएं।

    जेमिसन ग्रीर ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति ट्रम्प टैरिफ लगाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका उद्देश्य अमेरिकी मैन्युफैक्चरिंग और रोजगार को बचाना है। साथ ही ट्रेडिंग पार्टनर्स को चेतावनी दी गई है कि वे मौजूदा व्यापार समझौतों का पालन करें, अन्यथा भारी टैक्स या प्रतिबंध झेलना पड़ेगा।

    विशेषज्ञों का कहना है कि इस जांच का असर टेक्सटाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, इंजीनियरिंग गुड्स और कृषि उत्पादों की कीमतों पर पड़ेगा। व्यवसायियों, निर्यातकों और आयातकों को अमेरिकी पॉलिसी पर लगातार नजर रखनी होगी, क्योंकि जुलाई के बाद अमेरिकी बाजार में कीमतों और टैरिफ में बड़े बदलाव संभव हैं।

    यह कदम व्यापार के वैश्विक परिदृश्य में भारत और अन्य देशों के लिए महत्वपूर्ण चेतावनी है। यदि व्यापारिक नीतियों में सुधार नहीं हुआ, तो अमेरिकी टैरिफ की मार व्यापार घाटे और निर्यातकों की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति पर गहरा असर डाल सकती है।

  • दक्षिण कोरिया के इस द्वीप पर जाने वालों सावधान! भारतीय दूतावास ने क्यों जारी की ट्रैवल एडवायजरी

    दक्षिण कोरिया के इस द्वीप पर जाने वालों सावधान! भारतीय दूतावास ने क्यों जारी की ट्रैवल एडवायजरी

    नई दिल्‍ली। अधिकारियों के अनुसार, यात्रियों को यह साबित करने में सक्षम होना चाहिए कि उनके पास पूरे प्रवास के दौरान खर्च उठाने के लिए पर्याप्त धन है। इमिग्रेशन जांच के दौरान पूछे गए सवालों का शांत और सुसंगत तरीके से जवाब देना भी जरूरी बताया गया है।

    दक्षिण कोरिया का राजधानी सियोल स्थित भारतीय दूतावास ने मंगलवार को भारतीय नागरिकों के लिए एक अहम एडवायजरी जारी करते हुए दक्षिण कोरिया के जेजू द्वीप की यात्रा के दौरान विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है।

    यह चेतावनी कंटेंट क्रिएटर सचिन अवस्थी को हाल ही में हिरासत में लिए जाने की घटना के बाद जारी की गई है, जिसने यात्रियों के बीच चिंता बढ़ा दी है। दूतावास ने अपने बयान में कहा कि समय-समय पर भारतीय यात्रियों को जेजू द्वीप पर प्रवेश से इनकार या वापस भेजे जाने की घटनाएं सामने आती रहती हैं, खासकर वीज़ा-फ्री सुविधा के तहत यात्रा करने वालों के साथ।

    एडवायजरी में स्पष्ट किया गया है कि जेजू का वीज़ा-मुक्त प्रवेश केवल अल्पकालिक पर्यटन के लिए मान्य है और अंतिम निर्णय वहां के इमिग्रेशन अधिकारियों के हाथ में होता है। यानी, वीज़ा-फ्री सुविधा होने के बावजूद प्रवेश की गारंटी नहीं होती। यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे सभी आवश्यक दस्तावेज अपने साथ रखें, जिनमें कन्फर्म रिटर्न टिकट, पूरे प्रवास की होटल बुकिंग, दिन-वार यात्रा योजना, पर्याप्त वित्तीय संसाधनों का प्रमाण, कम से कम छह महीने का वैध पासपोर्ट, ट्रैवल इंश्योरेंस और ठहरने के स्थान की संपर्क जानकारी शामिल हैं।
    वित्तीय तैयारी पर विशेष जोर

    दूतावास ने यह भी चेतावनी दी कि यदि यात्री अपनी यात्रा योजना स्पष्ट रूप से नहीं बता पाते, तो उन्हें प्रवेश से रोका जा सकता है। एडवायजरी में वित्तीय तैयारी पर भी विशेष जोर दिया गया है। अधिकारियों के अनुसार, यात्रियों को यह साबित करने में सक्षम होना चाहिए कि उनके पास पूरे प्रवास के दौरान खर्च उठाने के लिए पर्याप्त धन है।

    इमिग्रेशन जांच के दौरान पूछे गए सवालों का शांत और सुसंगत तरीके से जवाब देना भी जरूरी बताया गया है।
    जेजू वीजा-फ्री योजना का हिस्सा नहीं

    दूतावास ने यह भी स्पष्ट किया कि जेजू वीज़ा-फ्री योजना के तहत मुख्य भूमि दक्षिण कोरिया की यात्रा की अनुमति नहीं है। यदि कोई यात्री बिना वीज़ा के वहां जाने की कोशिश करता है या निर्धारित अवधि से अधिक समय तक रुकता है, तो उस पर भविष्य में यात्रा प्रतिबंध लगाया जा सकता है। प्रवेश से इनकार की स्थिति में यात्रियों को अगले उपलब्ध विमान से वापस भेज दिया जाता है और तब तक उन्हें अस्थायी हिरासत केंद्र में रखा जा सकता है।

    सचिन अवस्थी को 38 घंटे हिरासत में रखा गया

    यह एडवायजरी उस घटना के बाद आई है, जिसमें सचिन अवस्थी और उनकी पत्नी को जेजू पहुंचने पर करीब 38 घंटे तक हिरासत में रखा गया और अंततः उन्हें महंगा वापसी टिकट लेकर लौटना पड़ा। अवस्थी ने इस अनुभव को साझा करते हुए कहा कि इमिग्रेशन का निर्णय उनका अधिकार है, लेकिन उनके साथ अपराधियों जैसा व्यवहार नहीं किया जाना चाहिए था। बता दें कि जेजू द्वीप दक्षिण कोरिया का एक विशेष स्वायत्त प्रांत है, जहां विदेशी पर्यटकों के लिए सीमित वीज़ा-फ्री प्रवेश की व्यवस्था है। हालांकि, इस सुविधा का लाभ उठाने के लिए यात्रियों को सीधे किसी विदेशी देश से जेजू पहुंचना आवश्यक होता है; मुख्य भूमि दक्षिण कोरिया के रास्ते जाने पर वीज़ा अनिवार्य है।

  • अमेरिकी सेना ने समुद्र में गिरे सैन्य उपकरणों को सफलतापूर्वक निकाला, चीन की नजरों से बची तकनीक

    अमेरिकी सेना ने समुद्र में गिरे सैन्य उपकरणों को सफलतापूर्वक निकाला, चीन की नजरों से बची तकनीक


    नई दिल्‍ली । अमेरिका ने एशिया के दो बेहद संवेदनशील इलाकों में समुद्र में गिरे अपने अत्याधुनिक सैन्य उपकरणों को सफलतापूर्वक बाहर निकाल लिया है। दक्षिण कोरिया के पश्चिमी समुद्र तट के पास क्रैश हुआ MQ-9 रीपर ड्रोन और साउथ चाइना सागर से एफ-18 फाइटर जेट और एमएच-60 हेलीकॉप्टर को रिकवर किया गया। ये ऑपरेशन अमेरिका की सुरक्षा और तकनीकी श्रेष्ठता के लिहाज से बेहद अहम माने जा रहे हैं।

    1. MQ-9 रीपर ड्रोन – सियोल के पास क्रैश
    कब हुआ था: 24 नवंबर

    कहां गिरा: सियोल से करीब 180 किलोमीटर दक्षिण में, माल्डो-री द्वीप के पास पीले सागर में

    ऑपरेशन: अमेरिकी वायुसेना और दक्षिण कोरियाई नौसेना ने करीब 20 दिनों में ड्रोन का पूरा मलबा निकाल लिया

    उद्देश्य: निगरानी और हमले के लिए तैनात, उत्तर कोरिया की गतिविधियों और पीले सागर में चीन की मौजूदगी पर नजर रखने के लिए

    महत्व: ड्रोन की तकनीक सुरक्षित रखना और इसे दुश्मन के हाथों न पड़ने देना

    2. फाइटर जेट और हेलीकॉप्टर – साउथ चाइना सागर
    कब गिरे: अक्टूबर में USS निमिट्ज एयरक्राफ्ट कैरियर से उड़ान भरते वक्त

    कौन से उपकरण: एफ-18 फाइटर जेट और एमएच-60 हेलीकॉप्टर

    गहराई: करीब 400 फीट

    रिकवरी की तारीख: 5 दिसंबर

    महत्व: चीन जैसे देशों के हाथ लगने पर सैन्य तकनीक का नुकसान होने से बचाना

    सुरक्षा: उपकरण अब इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के सुरक्षित सैन्य ठिकाने पर भेजे गए हैं

    रणनीतिक महत्व
    साउथ चाइना सागर को लेकर चीन और कई दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के बीच विवाद लंबा है। चीन लगभग पूरे समुद्री क्षेत्र पर दावा करता है, जबकि अमेरिका इसे अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग मानता है और अपनी सैन्य मौजूदगी बनाए रखता है। समुद्र में गिरे अमेरिकी सैन्य उपकरणों की रिकवरी को रणनीतिक सुरक्षा कदम के रूप में देखा जा रहा है।

    अमेरिका ने समय रहते समुद्र में गिरे अपने महत्वपूर्ण सैन्य उपकरणों को सुरक्षित निकालकर अपनी तकनीक और सुरक्षा सुनिश्चित की। इस ऑपरेशन से यह भी जाहिर होता है कि आधुनिक युद्ध में तकनीक और सुरक्षा का महत्व कितनी तेजी से बढ़ता जा रहा है।