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  • मध्य प्रदेश में 12 IPS अधिकारियों के तबादले, पांच जिलों को मिले नए SP, पुलिस मुख्यालय और विशेष सशस्त्र बल में भी बदलाव

    मध्य प्रदेश में 12 IPS अधिकारियों के तबादले, पांच जिलों को मिले नए SP, पुलिस मुख्यालय और विशेष सशस्त्र बल में भी बदलाव

    मध्य प्रदेश : में पुलिस विभाग में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया गया है। राज्य सरकार ने 28 अक्टूबर की देर रात भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के 12 अधिकारियों के तबादला आदेश जारी किए। इस बदलाव में पांच जिलों के पुलिस अधीक्षकों की जिम्मेदारी बदली गई है। नर्मदापुरम, बैतूल, पन्ना, हरदा और अलीराजपुर को नए पुलिस अधीक्षक मिले हैं। इसके अलावा भोपाल पुलिस मुख्यालय, नगरीय पुलिस और विशेष सशस्त्र बल की विभिन्न इकाइयों में भी अधिकारियों की नई पदस्थापना की गई है।

    नर्मदापुरम जिले में दीपक कुमार शुक्ला को नया पुलिस अधीक्षक नियुक्त किया गया है। वह इससे पहले उज्जैन में विशेष सशस्त्र बल की 32वीं वाहिनी के सेनापति के रूप में कार्यरत थे। नर्मदापुरम के पूर्व पुलिस अधीक्षक साईंकृष्ण एस. थोठा को भोपाल स्थित पुलिस मुख्यालय में सहायक पुलिस महानिरीक्षक की जिम्मेदारी दी गई है। इस बदलाव के तहत जिले की पुलिस व्यवस्था की कमान नए अधिकारी को सौंपी गई है।

    बैतूल जिले में भी पुलिस अधीक्षक बदल दिया गया है। यहां अमित सक्सेना को नया एसपी नियुक्त किया गया है। वह इससे पहले भोपाल स्थित पुलिस मुख्यालय में सहायक पुलिस महानिरीक्षक के पद पर तैनात थे। बैतूल के पूर्व एसपी वीरेंद्र जैन को भोपाल नगरीय पुलिस में यातायात से संबंधित जिम्मेदारी दी गई है। उनकी नई नियुक्ति के तहत वह भोपाल में पुलिस उपायुक्त के रूप में यातायात व्यवस्था संभालेंगे।

    पन्ना जिले में सव्यसाची सराफ को नया पुलिस अधीक्षक बनाया गया है। वह इससे पहले इंदौर में साइबर पुलिस अधीक्षक के पद पर कार्यरत थे। पन्ना की पूर्व एसपी निवेदिता नायडू को सागर स्थित विशेष सशस्त्र बल की 10वीं वाहिनी का सेनापति नियुक्त किया गया है। इस बदलाव से पन्ना में जिला पुलिस का नेतृत्व नए अधिकारी के हाथों में आ गया है।

    हरदा जिले में अंकित जायसवाल को पुलिस अधीक्षक की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वह इससे पहले भोपाल रेल पुलिस में एसपी के पद पर तैनात थे। हरदा के पूर्व एसपी शशांक को पुलिस मुख्यालय भोपाल में सहायक पुलिस महानिरीक्षक नियुक्त किया गया है। वहीं, अलीराजपुर जिले में समर वर्मा को नया पुलिस अधीक्षक बनाया गया है। वह उज्जैन में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) के पुलिस अधीक्षक के रूप में कार्यरत थे। अलीराजपुर के पूर्व एसपी रघुवंश कुमार सिंह को भोपाल स्थित पुलिस मुख्यालय में उप पुलिस महानिरीक्षक (DIG) की जिम्मेदारी दी गई है।

    जिला पुलिस में बदलाव के साथ विशेष सशस्त्र बल की वाहिनियों में भी नई तैनाती की गई है। इंदौर में प्रथम वाहिनी के सेनापति अभिषेक आनंद को 15वीं वाहिनी का सेनापति बनाया गया है। उन्हें पुलिस प्रशिक्षण केंद्र (PTC), इंदौर के पुलिस अधीक्षक का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया है। इसी तरह श्रुतकीर्ति सोमवंशी को ग्वालियर में विशेष सशस्त्र बल की दूसरी वाहिनी का सेनापति नियुक्त किया गया है। उन्हें 14वीं वाहिनी की अतिरिक्त जिम्मेदारी भी दी गई है।

    इस प्रशासनिक बदलाव के तहत जिला पुलिस, पुलिस मुख्यालय और विशेष सशस्त्र बल में अधिकारियों की जिम्मेदारियों का पुनर्वितरण किया गया है। पांच जिलों में नए पुलिस अधीक्षकों की नियुक्ति के साथ कई अधिकारियों को मुख्यालय और अन्य इकाइयों में नई भूमिका मिली है। इन आदेशों के बाद संबंधित अधिकारियों को अपनी नई पदस्थापना के अनुसार जिम्मेदारी संभालनी होगी।

  • यूपी राज्यसभा चुनाव में सपा का तीसरा दांव, 10 सीटों पर मुकाबला रोचक; बीजेपी की आठवीं सीट और क्रॉस वोटिंग पर नजर

    यूपी राज्यसभा चुनाव में सपा का तीसरा दांव, 10 सीटों पर मुकाबला रोचक; बीजेपी की आठवीं सीट और क्रॉस वोटिंग पर नजर

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश में 10 राज्यसभा सीटों के लिए नामांकन का मंगलवार को आखिरी दिन है। दोपहर तीन बजे तक उम्मीदवार अपना नामांकन दाखिल कर सकते हैं। इसी वजह से राज्य में राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक हलचल तेज है। भारतीय जनता पार्टी ने आठ और समाजवादी पार्टी ने दो प्रत्याशियों को मैदान में उतारा है। सात सीटों पर बीजेपी की जीत संख्या बल के आधार पर लगभग तय मानी जा रही है, जबकि सपा के दो उम्मीदवारों के लिए भी स्थिति मजबूत है। हालांकि बीजेपी के आठवें उम्मीदवार और सपा के संभावित तीसरे उम्मीदवार के कारण चुनाव का गणित दिलचस्प हो गया है।

    सपा के तीसरे उम्मीदवार को लेकर पार्टी के भीतर लगातार चर्चा चल रही है। राज्यसभा उम्मीदवार रामगोपाल यादव से जब इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि अभी तीन बजे तक नामांकन का समय है और फिलहाल कुछ नहीं कहा जा सकता। उन्होंने कहा कि अगर पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव चाहेंगे तो तीसरा उम्मीदवार उतरेगा, नहीं तो नहीं उतरेगा। अखिलेश यादव मंगलवार को विपक्षी गठबंधन के विरोध मार्च में शामिल हुए। विपक्षी सांसद संसद भवन के मकर द्वार से निर्वाचन आयोग मुख्यालय की ओर मार्च कर रहे थे। ऐसे में नामांकन की समयसीमा खत्म होने तक यह स्पष्ट होना था कि सपा तीसरा प्रत्याशी उतारती है या नहीं।

    सपा के तीसरे उम्मीदवार के नामांकन को लेकर यह भी दावा किया गया कि पार्टी ने जरूरी 10 विधायकों के हस्ताक्षर बतौर प्रस्तावक जुटा लिए हैं। तीसरे उम्मीदवार के नामांकन की स्थिति में 16 अक्टूबर को मतदान होना है और मुकाबला अतिरिक्त वोटों पर निर्भर हो सकता है। सपा पहले ही अपने वरिष्ठ राष्ट्रीय महासचिव प्रो. रामगोपाल यादव और रिलायंस ग्रुप के सीईओ धनराज परिमल नथवानी को उम्मीदवार घोषित कर चुकी है। दोनों उम्मीदवार अखिलेश यादव की मौजूदगी में अपना नामांकन दाखिल कर चुके हैं। रामगोपाल यादव छठी बार राज्यसभा जाने की तैयारी में हैं।

    उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों पर मौजूदा सांसदों का कार्यकाल 25 नवंबर को समाप्त हो रहा है। विधानसभा में विधायकों की प्रभावी संख्या 397 बताई गई है। इस हिसाब से प्रत्येक उम्मीदवार को जीत के लिए कम से कम 37 मतों की जरूरत होगी। बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए के पास करीब 285 से 290 विधायक हैं। इस संख्या के आधार पर बीजेपी के सात उम्मीदवारों की जीत आसान मानी जा रही है, लेकिन आठवीं सीट के लिए उसे अतिरिक्त वोटों की जरूरत होगी। दूसरी ओर सपा के पास 101 विधायक बताए गए हैं, जिससे उसके दो उम्मीदवारों की जीत संभव है। तीसरे उम्मीदवार को जिताने के लिए सपा को अतिरिक्त विधायकों के समर्थन की जरूरत होगी।

    वोटों के इसी गणित के कारण क्रॉस वोटिंग को लेकर भी चर्चा है। बीजेपी के आठवें उम्मीदवार और सपा के संभावित तीसरे उम्मीदवार के लिए अतिरिक्त वोटों की आवश्यकता होगी। कांग्रेस के दो विधायक सपा के खाते में बताए गए हैं, लेकिन इसके बावजूद तीसरे उम्मीदवार के लिए अतिरिक्त समर्थन जुटाना जरूरी होगा। ऐसे में दोनों दलों के सामने अतिरिक्त वोट जुटाने की चुनौती होगी। अंतिम दिन नामांकन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि सपा तीसरा उम्मीदवार मैदान में उतारती है या नहीं। यदि तीसरा उम्मीदवार उतरता है तो 10 सीटों के लिए उम्मीदवारों की संख्या बढ़ जाएगी और 16 अक्टूबर को मतदान की स्थिति बनेगी।

    राज्यसभा चुनाव में तीसरे उम्मीदवार को लेकर सपा की रणनीति पर सभी की नजर बनी हुई है। पार्टी के पास दो सीटों के लिए पर्याप्त संख्या है, जबकि तीसरे उम्मीदवार के लिए उसे अतिरिक्त विधायकों का समर्थन चाहिए। बीजेपी ने आठ उम्मीदवार उतारकर आठवीं सीट के लिए भी दावा पेश किया है। ऐसे में नामांकन की अंतिम समयसीमा तक दोनों दलों की रणनीति और विधायकों के समर्थन का गणित महत्वपूर्ण बना हुआ है। मतदान की स्थिति बनने पर क्रॉस वोटिंग भी चुनाव के परिणाम को प्रभावित करने वाला अहम पहलू हो सकती है।

  • यूपी में सपा-कांग्रेस सीट बंटवारे पर पेच, दोनों दलों के बीच सीटों की संख्या को लेकर नहीं बन रही सहमति

    यूपी में सपा-कांग्रेस सीट बंटवारे पर पेच, दोनों दलों के बीच सीटों की संख्या को लेकर नहीं बन रही सहमति


    लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच सीट बंटवारे को लेकर बातचीत तेज हो गई है, लेकिन दोनों दलों के बीच सीटों की संख्या को लेकर अभी सहमति नहीं बन पाई है। कांग्रेस 100 से ज्यादा सीटों पर दावा कर रही है, जबकि सपा का जोर सीटों की संख्या के बजाय उम्मीदवार की मजबूती और संबंधित सीट पर जीत की संभावनाओं पर है। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक सपा करीब 60 से 70 सीटों के विकल्प पर विचार कर रही है, जबकि कांग्रेस करीब 105 सीटों की मांग कर रही है।

    2017 के फॉर्मूले को आधार बना रही कांग्रेस

    कांग्रेस की दलील है कि 2017 के विधानसभा चुनाव में सपा के साथ गठबंधन के तहत उसने 114 सीटों पर चुनाव लड़ा था। इसी आधार पर पार्टी इस बार भी 100 से अधिक सीटों की हिस्सेदारी चाह रही है। कांग्रेस की प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने भी जुलाई में गठबंधन में ‘बराबरी और सम्मान’ की बात कही थी।

    हालांकि, 2017 के मुकाबले मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियां अलग हैं। 2022 में सपा ने 111 सीटें जीती थीं, जबकि कांग्रेस सिर्फ दो सीटों पर सिमट गई थी। यही वजह है कि सीटों के बंटवारे में पिछली बार के आंकड़े के बजाय मौजूदा संगठन और उम्मीदवारों की स्थिति को भी महत्व दिया जा रहा है।

    सपा का फोकस ‘कितनी सीटें’ नहीं, ‘कौन जीत सकता है’

    अखिलेश यादव पहले ही कह चुके हैं कि गठबंधन में मुद्दा सीटों की संख्या नहीं, बल्कि जीतने की क्षमता है। सपा के भीतर सीटवार राजनीतिक स्थिति और संभावित उम्मीदवारों के आधार पर हिस्सेदारी तय करने की बात कही जा रही है।

    ताजा रिपोर्टों के मुताबिक कांग्रेस से उन सीटों पर संभावित उम्मीदवारों की जानकारी भी मांगी जा रही है, जिन पर वह दावा कर रही है। इसके बाद स्थानीय राजनीतिक समीकरण, संगठन की स्थिति और उम्मीदवार की जीत की संभावनाओं को ध्यान में रखकर सीटों पर फैसला किए जाने की बात सामने आई है।

    रायबरेली-अमेठी समेत कई सीटों पर खींचतान

    सीटों की कुल संख्या के अलावा कुछ खास विधानसभा क्षेत्रों को लेकर भी दोनों दलों के बीच मतभेद की खबरें हैं। रिपोर्टों में रायबरेली और अमेठी का नाम प्रमुखता से सामने आया है। अंतिम फॉर्मूला तय होने से पहले सीटवार दावों पर बातचीत जारी है।

    कांग्रेस ने 2024 के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश की छह सीटें जीती थीं, जबकि सपा ने 37 सीटों पर जीत दर्ज की थी। दोनों दलों ने मिलकर राज्य की 80 लोकसभा सीटों में 43 सीटें जीती थीं।

    2022 में अलग-अलग लड़े थे दोनों दल

    2022 के विधानसभा चुनाव में सपा और कांग्रेस अलग-अलग चुनाव मैदान में उतरे थे। सपा ने 111 सीटों पर जीत दर्ज की थी, जबकि कांग्रेस को सिर्फ दो सीटें मिली थीं। सपा के साथ तब राष्ट्रीय लोक दल और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी जैसे दल भी गठबंधन में थे। बाद में दोनों दल सपा से अलग हो गए।

    अब 2027 के चुनाव से पहले सपा और कांग्रेस फिर साथ आने की दिशा में बातचीत कर रहे हैं। ऐसे में दोनों दलों के सामने सीटों की संख्या के साथ-साथ यह सवाल भी है कि किन क्षेत्रों में किस पार्टी का संगठन और उम्मीदवार गठबंधन के लिए ज्यादा उपयोगी हो सकता है।

    राजभर-निषाद को लेकर भी सपा ने रुख स्पष्ट किया

    इसी बीच सुभासपा प्रमुख ओमप्रकाश राजभर और निषाद पार्टी के अध्यक्ष संजय निषाद को लेकर भी राजनीतिक अटकलें चलती रही हैं। दोनों नेता उत्तर प्रदेश की योगी सरकार में मंत्री हैं और उनके दल एनडीए का हिस्सा हैं।

    आपकी मूल कॉपी में सपा के एक रणनीतिकार के हवाले से दावा किया गया है कि पार्टी ने पदाधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को सुभासपा या निषाद पार्टी से गठजोड़ का प्रस्ताव लाने पर संगठनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी है। इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध रिपोर्टों से नहीं होती, इसलिए इसे सपा सूत्र/रणनीतिकार के दावे के रूप में ही प्रकाशित करना सुरक्षित होगा।

    फिलहाल सपा-कांग्रेस के बीच बातचीत का अंतिम नतीजा सामने नहीं आया है। सीटों की संख्या के साथ-साथ विधानसभा क्षेत्रवार दावों और संभावित उम्मीदवारों पर सहमति बनने के बाद ही गठबंधन का वास्तविक फॉर्मूला स्पष्ट होगा।

  • अखिलेश यादव की पार्टी 5 से 11 सितंबर तक चलाएगी पीडीए जागरुकता अभियान, शिक्षा और रोजगार के मुद्दे होंगे केंद्र में

    अखिलेश यादव की पार्टी 5 से 11 सितंबर तक चलाएगी पीडीए जागरुकता अभियान, शिक्षा और रोजगार के मुद्दे होंगे केंद्र में


    नई दिल्ली । 
    उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच समाजवादी पार्टी ने छात्र और युवा वर्ग के बीच अपनी राजनीतिक सक्रियता बढ़ाने की दिशा में अभियान शुरू करने का ऐलान किया है। शिक्षक दिवस के मौके पर पार्टी की छात्र सभा की ओर से 5 से 11 सितंबर तक छात्र, नौजवान एवं पीडीए जागरुकता अभियान चलाया जाएगा। इस अभियान का नाम पाठशाला पुकारे रखा गया है।

    समाजवादी पार्टी के अनुसार, अभियान के दौरान प्रदेश में बंद किए गए प्राथमिक, जूनियर और हाईस्कूलों के बाहर शिक्षक सम्मान कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। पार्टी का कहना है कि इन कार्यक्रमों के जरिए ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को उठाया जाएगा और स्थानीय लोगों को भी संवाद का हिस्सा बनाया जाएगा।

    अभियान के तहत विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में छात्र सम्मेलन तथा शिक्षक सम्मान समारोह भी आयोजित किए जाने हैं। बंद स्कूलों के परिसर के बाहर उपलब्ध स्थानों पर शिक्षक दिवस से जुड़े कार्यक्रम किए जाएंगे। इनमें स्थानीय पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के साथ ग्रामीणों की भागीदारी भी प्रस्तावित है।

    सपा छात्र सभा के कार्यक्रम को अलग अलग चरणों में आयोजित करने की योजना बनाई गई है। 7 सितंबर को पीडीए वृक्षारोपण और पर्चा वितरण का कार्यक्रम होगा। इसके बाद 8 सितंबर को विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में शिविर लगाकर छात्रों से संपर्क किया जाएगा।

    9 सितंबर को छात्रों से सुझाव लिए जाएंगे और उनकी समस्याओं को सुना जाएगा। इस दौरान उनसे संकल्प पत्र भी भरवाए जाने की योजना है। पार्टी का उद्देश्य छात्रों से सीधे संवाद स्थापित करके शिक्षा, रोजगार और अन्य संबंधित विषयों पर उनकी प्राथमिकताओं को समझना बताया गया है।

    10 सितंबर को छात्र छात्राओं और युवाओं की राजनीति में भूमिका को लेकर चर्चा की जाएगी। इसके बाद 11 सितंबर को मेधावी छात्रों और टॉपर्स के सम्मान के साथ अभियान का समापन किया जाएगा। पार्टी ने इस कार्यक्रम को छात्र और युवा वर्ग से जुड़ने के अपने प्रयास के तौर पर सामने रखा है।

    अभियान में शिक्षा और युवाओं से जुड़े कई मुद्दों को प्रमुखता दी गई है। इनमें पेपर लीक, समान पाठ्यक्रम, बढ़ती फीस, रोजगार, आरक्षण और उच्च शिक्षण संस्थानों में नियुक्तियों में कथित भ्रष्टाचार जैसे विषय शामिल हैं। पार्टी आरक्षण व्यवस्था में पारदर्शिता और रोस्टर प्रणाली को लेकर भी सवाल उठाने की तैयारी में है।

    इसके अलावा मुफ्त शिक्षा, छात्रों को डिजिटल उपकरण उपलब्ध कराने, पुस्तकालयों की व्यवस्था मजबूत करने तथा नए विश्वविद्यालय और महाविद्यालयों के निर्माण जैसे मुद्दों को भी अभियान में शामिल किया गया है। सपा का कहना है कि इन विषयों के माध्यम से छात्रों और युवाओं की वास्तविक समस्याओं को राजनीतिक विमर्श में प्रमुखता दी जाएगी।

    यह अभियान ऐसे समय में शुरू हो रहा है जब उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दल अपनी गतिविधियां तेज कर रहे हैं। समाजवादी पार्टी के लिए छात्र और युवा वर्ग महत्वपूर्ण राजनीतिक आधार माना जाता है। ऐसे में शिक्षा, रोजगार और आरक्षण जैसे मुद्दों के जरिए पार्टी इस वर्ग के साथ संपर्क बढ़ाने की कोशिश कर रही है।

    पाठशाला पुकारे अभियान के माध्यम से बंद सरकारी स्कूलों और ग्रामीण शिक्षा व्यवस्था का मुद्दा भी राजनीतिक बहस में लाने की तैयारी है। अभियान के दौरान सामने आने वाली छात्र समस्याओं और सुझावों को पार्टी किस तरह अपने आगामी राजनीतिक कार्यक्रम में शामिल करती है, इस पर भी नजर रहेगी।

  • मुरादाबाद सर्किट हाउस में नमाज पढ़ने के मामले में सपा विधायक के चाचा पर मुकदमा दर्ज, वीडियो वायरल

    मुरादाबाद सर्किट हाउस में नमाज पढ़ने के मामले में सपा विधायक के चाचा पर मुकदमा दर्ज, वीडियो वायरल

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में सर्किट हाउस परिसर में नमाज पढ़ने से जुड़े मामले में समाजवादी पार्टी के नेता मोहम्मद उस्मान के खिलाफ पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया है। मोहम्मद उस्मान बिलारी से सपा विधायक मोहम्मद फहीम के चाचा बताए जा रहे हैं और पार्टी में जिला उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी संभालते हैं। मामला सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो के सामने आने के बाद पुलिस तक पहुंचा।

    वायरल वीडियो में मोहम्मद उस्मान के सर्किट हाउस परिसर में सड़क पर नमाज पढ़ने का दावा किया जा रहा है। आरोप है कि इस दौरान सड़क पर वाहन खड़ा किया गया था, जिससे वहां से आने-जाने वाले लोगों को परेशानी हुई। वीडियो सामने आने के बाद मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चा शुरू हुई और पुलिस से कार्रवाई की मांग की गई।

    पुलिस के अनुसार, सर्किट हाउस के प्रभारी अवर अभियंता अनिल कुमार की ओर से दी गई शिकायत के आधार पर मझोला थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है। अधिकारियों ने बताया कि शिकायत में सामने आए तथ्यों के आधार पर कार्रवाई शुरू की गई है। पुलिस अब पूरे मामले की जांच कर रही है और वायरल वीडियो से जुड़े तथ्यों की भी पड़ताल की जा रही है।

    मुरादाबाद के पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, कुछ हिंदू संगठन के लोगों ने भी इस मामले में पुलिस अधिकारियों से मुलाकात कर कार्रवाई की मांग की थी। इसके बाद शिकायत और उपलब्ध जानकारी के आधार पर कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। पुलिस का कहना है कि मामले में जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    यह मामला उस समय सामने आया जब सर्किट हाउस में समाजवादी पार्टी के नेताओं की राजनीतिक गतिविधियां चल रही थीं। जानकारी के मुताबिक, विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष लाल बिहारी यादव गुरुवार को एमएलसी चुनाव से संबंधित कार्यक्रम के लिए सर्किट हाउस पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने सपा नेताओं के साथ चुनाव को लेकर बैठक भी की थी।

    बताया गया कि लाल बिहारी यादव शुक्रवार को सर्किट हाउस से रवाना हो गए थे। इसके बाद नमाज से जुड़ा वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित होने लगा। वीडियो वायरल होने के बाद मामले ने राजनीतिक और स्थानीय स्तर पर ध्यान खींचा। हालांकि वीडियो में दिखाई दे रही घटना के सभी पहलुओं की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

    पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि घटना किस समय हुई, उस दौरान वहां यातायात और आवाजाही की वास्तविक स्थिति क्या थी तथा वीडियो में दिखाई दे रहे व्यक्ति और घटनास्थल से जुड़े अन्य तथ्यों की पुष्टि कैसे होती है। जांच में शिकायत, वीडियो और मौके से संबंधित जानकारी को आधार बनाया जा रहा है।

    सर्किट हाउस सरकारी उपयोग का महत्वपूर्ण परिसर होता है, जहां अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और अन्य विशिष्ट लोगों की आवाजाही रहती है। ऐसे स्थान पर किसी गतिविधि से यातायात या आम लोगों की आवाजाही प्रभावित होने की शिकायत मिलने पर प्रशासन और पुलिस द्वारा संबंधित नियमों के तहत कार्रवाई की जाती है।

    मामले में पुलिस की ओर से मुकदमा दर्ज किए जाने के बाद अब जांच आगे बढ़ रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आवश्यक कानूनी कदम उठाए जाएंगे। वहीं सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो को लेकर भी लोगों से बिना पुष्टि के किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचने की अपील की जा सकती है, क्योंकि वीडियो के आधार पर घटना के पूरे संदर्भ का निर्धारण हमेशा संभव नहीं होता।

    फिलहाल मोहम्मद उस्मान के खिलाफ मझोला थाने में दर्ज मामले को लेकर पुलिस जांच कर रही है। शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि और घटना की परिस्थितियों को स्पष्ट करने के लिए पुलिस उपलब्ध साक्ष्यों की जांच में जुटी है।

  • यूपी चुनाव 2027 की पहली बड़ी घोषणा, अयोध्या सीट से पवन पांडे होंगे सपा के उम्मीदवार, अखिलेश का ऐलान

    यूपी चुनाव 2027 की पहली बड़ी घोषणा, अयोध्या सीट से पवन पांडे होंगे सपा के उम्मीदवार, अखिलेश का ऐलान

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज होती जा रही हैं। इसी बीच समाजवादी पार्टी ने अपनी पहली बड़ी चुनावी घोषणा करते हुए अयोध्या विधानसभा सीट से तेज नारायण पांडे उर्फ पवन पांडे को उम्मीदवार घोषित कर दिया है। पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान इस फैसले का ऐलान किया। इसके साथ ही स्पष्ट हो गया है कि समाजवादी पार्टी अयोध्या जैसी महत्वपूर्ण सीट पर एक बार फिर अनुभवी और पुराने चेहरे पर भरोसा जता रही है।

    उम्मीदवार की घोषणा ऐसे समय की गई है जब प्रदेश में चुनावी तैयारियां धीरे-धीरे गति पकड़ रही हैं। कार्यक्रम में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि उन्हें विश्वास है कि पवन पांडे जनता का भरोसा एक बार फिर जीतेंगे। उन्होंने कहा कि पवन पांडे का क्षेत्र से मजबूत जुड़ाव है और उन्होंने पहले भी यहां के लोगों का विश्वास हासिल किया है। पार्टी नेतृत्व को उम्मीद है कि उनका अनुभव आगामी चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

    तेज नारायण पांडे, जिन्हें राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र में पवन पांडे के नाम से जाना जाता है, लंबे समय से समाजवादी पार्टी से जुड़े हुए हैं। उनका राजनीतिक सफर छात्र राजनीति से शुरू हुआ था। उन्होंने युवाओं से जुड़े विभिन्न आंदोलनों में सक्रिय भूमिका निभाई और संगठन में लगातार जिम्मेदारियां निभाते हुए अपनी पहचान बनाई। छात्र जीवन से ही सक्रिय राजनीति में रहने के कारण उन्हें संगठनात्मक कार्यों का भी व्यापक अनुभव प्राप्त हुआ।

    पवन पांडे पहली बार व्यापक चर्चा में वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव के दौरान आए, जब उन्होंने अयोध्या विधानसभा सीट से जीत दर्ज कर राज्य की राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई। विधायक रहने के दौरान उन्होंने क्षेत्र के विकास, सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। इसी राजनीतिक अनुभव और संगठन में सक्रिय भूमिका को देखते हुए पार्टी ने एक बार फिर उन्हें चुनावी मैदान में उतारने का निर्णय लिया है।

    अयोध्या विधानसभा सीट उत्तर प्रदेश की सबसे चर्चित और राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण सीटों में गिनी जाती है। ऐसे में इस सीट पर प्रत्याशी की घोषणा को चुनावी रणनीति के लिहाज से अहम माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शुरुआती चरण में उम्मीदवार घोषित कर समाजवादी पार्टी ने चुनावी तैयारियों का स्पष्ट संदेश दिया है और संगठन को समय रहते सक्रिय करने की कोशिश की है।

    पार्टी की इस घोषणा के बाद प्रदेश की राजनीति में चुनावी सरगर्मियां और तेज होने की संभावना है। आने वाले समय में अन्य प्रमुख दलों की ओर से भी उम्मीदवारों और चुनावी रणनीति को लेकर महत्वपूर्ण घोषणाएं की जा सकती हैं। फिलहाल समाजवादी पार्टी ने अयोध्या से पवन पांडे को उम्मीदवार बनाकर चुनावी अभियान की औपचारिक शुरुआत कर दी है। अब सभी की निगाहें इस बात पर रहेंगी कि अन्य राजनीतिक दल इस महत्वपूर्ण सीट पर किस चेहरे को मैदान में उतारते हैं और चुनावी मुकाबला किस दिशा में आगे बढ़ता है।

  • राम मंदिर चढ़ावा चोरी पर विधान परिषद में बवाल, सपा का हंगामा, केशव मौर्य ने किया पलटवार

    राम मंदिर चढ़ावा चोरी पर विधान परिषद में बवाल, सपा का हंगामा, केशव मौर्य ने किया पलटवार

    लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधान परिषद के मानसून सत्र के पहले दिन श्रीराम मंदिर के दानपात्र से कथित चढ़ावा चोरी के मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए। समाजवादी पार्टी ने नियम-105 के तहत कार्यस्थगन प्रस्ताव लाकर मामले पर चर्चा की मांग की। जैसे ही नेता सदन केशव प्रसाद मौर्य जवाब देने के लिए खड़े हुए, सपा सदस्य वेल में पहुंचकर नारेबाजी करने लगे। लगातार हंगामे के चलते सभापति ने सदन की कार्यवाही 15 मिनट के लिए स्थगित कर दी।

    कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर भी विपक्ष का विरोध जारी रहा। शोर-शराबे के बीच केशव प्रसाद मौर्य ने अपना पक्ष रखा। दोपहर 1:52 बजे सभापति ने कार्यस्थगन प्रस्ताव अस्वीकार करते हुए मामले को अग्रिम कार्रवाई के लिए सरकार को भेजने की घोषणा की। इसके बाद विपक्षी सदस्य अपनी सीटों पर लौटे और सदन की कार्यवाही सामान्य हो सकी।

    केशव मौर्य का विपक्ष पर पलटवार
    नेता सदन केशव प्रसाद मौर्य ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि जिन्होंने राम मंदिर निर्माण के लिए एक रुपये का भी योगदान नहीं दिया, वे अब चढ़ावे की चोरी पर राजनीति कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि बाबरी मस्जिद के नाम पर जुटाए गए चंदे का हिसाब भी सार्वजनिक होना चाहिए। उन्होंने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पर मंदिरों के प्रति नकारात्मक रवैया अपनाने का आरोप लगाया और कहा कि भविष्य में जनता इसका जवाब देगी।

    सपा ने लगाए भ्रष्टाचार के आरोप
    समाजवादी पार्टी ने अपने कार्यस्थगन प्रस्ताव में आरोप लगाया कि श्रीराम जन्मभूमि मंदिर ट्रस्ट के दानपात्र से हुई कथित चोरी वित्तीय अनियमितता और भ्रष्टाचार का गंभीर मामला है। विपक्ष का कहना था कि पुलिस की कार्रवाई पर्याप्त नहीं रही और केवल निचले स्तर के लोगों पर कार्रवाई की गई। विपक्ष के नेता लाल बिहारी यादव और सदस्य किरण पाल कश्यप ने कहा कि धार्मिक आस्था से जुड़ी दान सामग्री की चोरी गंभीर विषय है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रभावी कार्रवाई न होने से लोगों में नाराजगी है।

    अन्य मुद्दे भी उठे
    सदन में सदस्य राज बहादुर सिंह चंदेल ने शिक्षकों, कर्मचारियों और सेवानिवृत्त शिक्षकों को निशुल्क एवं कैशलेस चिकित्सा योजना में शामिल करने की मांग उठाई। इस पर नेता सदन ने कहा कि सरकार इस प्रस्ताव पर सकारात्मक विचार करेगी। राम मंदिर के चढ़ावे को लेकर हुए इस विवाद ने मानसून सत्र के पहले ही दिन सदन का माहौल गर्मा दिया और सत्ता पक्ष तथा विपक्ष के बीच तीखी राजनीतिक बयानबाजी देखने को मिली।

  • अखिलेश के CM बनने की कामना, 201 लीटर गंगाजल की कांवड़ लेकर पैदल निकले बॉबी यादव

    अखिलेश के CM बनने की कामना, 201 लीटर गंगाजल की कांवड़ लेकर पैदल निकले बॉबी यादव

    गाजियाबाद। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के मुख्यमंत्री बनने की मनोकामना को लेकर रेसलिंग खिलाड़ी बॉबी यादव हरिद्वार से 201 लीटर गंगाजल की कांवड़ लेकर पैदल यात्रा पर निकले हैं। शुक्रवार को वह अपने साथियों के साथ मुरादनगर पहुंचे, जहां कांवड़ियों ने स्थानीय थाने में विश्राम किया और उनका स्वागत किया गया।

    नोएडा के सर्फाबाद निवासी बॉबी यादव ने बताया कि उन्होंने एक जुलाई को अखिलेश यादव के जन्मदिन के अवसर पर हरिद्वार से गंगाजल उठाया था। उन्होंने विशेष संकल्प के साथ यह कांवड़ यात्रा शुरू की है और पैदल चलते हुए अपने गंतव्य की ओर बढ़ रहे हैं।

    साथियों के साथ जारी है यात्रा
    बॉबी यादव के साथ इस यात्रा में रिंकू, मोनू, हर्ष, राज, लविश समेत कई साथी भी शामिल हैं। यात्रा के दौरान यह दल विभिन्न स्थानों पर पड़ाव डालते हुए आगे बढ़ रहा है। रास्ते में स्थानीय लोगों और समर्थकों की ओर से उनका स्वागत और सत्कार भी किया जा रहा है।

    आस्था और संकल्प का प्रतीक
    बॉबी यादव का कहना है कि यह कांवड़ यात्रा उनकी धार्मिक आस्था और दृढ़ संकल्प का प्रतीक है। उनका विश्वास है कि भगवान शिव की कृपा से उनकी मनोकामना पूरी होगी और वे इसी भावना के साथ गंगाजल अर्पित करने की यात्रा पूरी कर रहे हैं।
  • यूपी चुनाव से पहले 'जयंती राजनीति' तेज, भाजपा-सपा महापुरुषों के जरिए साध रहीं जातीय समीकरण

    यूपी चुनाव से पहले 'जयंती राजनीति' तेज, भाजपा-सपा महापुरुषों के जरिए साध रहीं जातीय समीकरण

    मुरादाबाद। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में अभी समय है, लेकिन राजनीतिक दलों ने जातीय और सामाजिक समीकरणों को मजबूत करने की कवायद तेज कर दी है। भाजपा और समाजवादी पार्टी (सपा) अपने-अपने परंपरागत वोट बैंक को साधने के लिए संतों, समाज सुधारकों और महापुरुषों की जयंती व पुण्यतिथि पर बड़े पैमाने पर कार्यक्रम आयोजित कर रही हैं। इसके लिए दोनों दलों ने प्रदेशभर में लंबे अभियान और आयोजनों की रूपरेखा तैयार की है।

    भाजपा ने संत रविदास महाराज की जयंती को केंद्र में रखकर करीब सात महीने तक चलने वाला ‘समरसता संकल्प अभियान’ शुरू करने का फैसला किया है। वहीं, पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) रणनीति पर आगे बढ़ रही सपा बुधवार को पूरे प्रदेश में महाराजा दक्ष प्रजापति की जयंती पर जिला और महानगर स्तर पर कार्यक्रम आयोजित कर रही है।

    महापुरुषों के जरिए सामाजिक संदेश देने की तैयारी
    हाल के महीनों में डॉ. भीमराव आंबेडकर और लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर की जयंती पर भी सभी प्रमुख राजनीतिक दलों ने व्यापक स्तर पर आयोजन किए थे। अब भाजपा ने संत रविदास महाराज के जीवन और विचारों को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से 29 जुलाई (गुरु पूर्णिमा) से 20 फरवरी 2027 (संत रविदास जयंती) तक विशेष अभियान चलाने की घोषणा की है।

    इस अभियान के दौरान धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ जनसंपर्क गतिविधियों के माध्यम से समता, सामाजिक न्याय, सेवा और मानवता के संदेश का प्रचार किया जाएगा।

    सपा भी जयंती आयोजनों पर दे रही जोर
    समाजवादी पार्टी भी विभिन्न समाजों के महापुरुषों की जयंती और पुण्यतिथि पर कार्यक्रम आयोजित कर अपने सामाजिक आधार को मजबूत करने की कोशिश में जुटी है। इसी क्रम में गुरु पूर्णिमा के अवसर पर महाराजा दक्ष प्रजापति जयंती मनाई जा रही है। इसके बाद 5 अगस्त को पार्टी संस्थापक नेताओं में शामिल जनेश्वर मिश्र की जयंती पर भी परंपरागत कार्यक्रम होंगे।

    भाजपा करेगी पुजारियों का सम्मान
    गुरु पूर्णिमा के अवसर पर भाजपा महानगर इकाई शहर के सभी दस मंडलों में कार्यक्रम आयोजित करेगी। महानगर अध्यक्ष गिरीश भंडूला के अनुसार, इस दौरान शहर के 100 मंदिरों के पुजारियों का सम्मान किया जाएगा। इसके लिए पार्टी पदाधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।

    पांच महीनों में सपा के कई आयोजन
    मार्च से जुलाई के बीच सपा ने विभिन्न महापुरुषों की जयंती और पुण्यतिथि पर करीब 11 कार्यक्रम आयोजित किए। इनमें कांशीराम, सम्राट अशोक, महर्षि कश्यप, महाराजा निषादराज गुहा, महात्मा ज्योतिराव फुले, डॉ. भीमराव आंबेडकर, अहिल्याबाई होल्कर, महारानी दुर्गावती, छत्रपति साहूजी महाराज, बाबा लक्खी शाह बंजारा और फूलन देवी से जुड़े आयोजन शामिल रहे।

    भाजपा के प्रमुख आयोजन
    भाजपा ने भी इस वर्ष नेताजी सुभाष चंद्र बोस, डॉ. भीमराव आंबेडकर, अहिल्याबाई होल्कर और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी सहित कई महापुरुषों की जयंती और स्मृति कार्यक्रमों का आयोजन किया। आंबेडकर जयंती के अवसर पर दीपोत्सव, प्रतिमा स्वच्छता अभियान और सम्मान कार्यक्रम भी आयोजित किए गए।

    कार्यकर्ताओं से जुड़ाव पर भी जोर
    चुनावी तैयारियों के बीच जनप्रतिनिधि और पार्टी पदाधिकारी संगठन के कार्यकर्ताओं से व्यक्तिगत स्तर पर जुड़ाव बढ़ाने की भी कोशिश कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर कार्यकर्ताओं के जन्मदिन और वैवाहिक वर्षगांठ की शुभकामनाओं के साथ-साथ उनके कार्यक्रमों में व्यक्तिगत उपस्थिति दर्ज कराकर संगठनात्मक संबंध मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

  • गाजीपुर घटना पर ओपी राजभर का अखिलेश यादव पर हमला, पुजारी और बच्चे पर हमले को लेकर साधे तीखे सवाल

    गाजीपुर घटना पर ओपी राजभर का अखिलेश यादव पर हमला, पुजारी और बच्चे पर हमले को लेकर साधे तीखे सवाल

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के गाजीपुर में मंदिर के पुजारी और उनके चार वर्षीय बेटे पर कथित हमले की घटना को लेकर राज्य की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री ओपी राजभर ने इस मामले को लेकर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी सार्वजनिक मंचों पर सामाजिक सम्मान की बात करती है, जबकि उसके कार्यकर्ताओं पर हिंसा और गुंडागर्दी के आरोप लगते रहे हैं। उनके बयान के बाद यह मामला राजनीतिक बहस का विषय बन गया है।

    ओपी राजभर ने कहा कि गाजीपुर में बाबा गंगेश्वरनाथ मंदिर के पुजारी और उनके मासूम बेटे के साथ हुई कथित मारपीट अत्यंत गंभीर घटना है। उन्होंने दावा किया कि हमले में पुजारी को बुरी तरह पीटा गया और उनके चार वर्षीय बेटे को भी चोट पहुंचाई गई। राजभर ने इस घटना की निंदा करते हुए कहा कि किसी भी प्रकार की हिंसा लोकतांत्रिक व्यवस्था और सामाजिक सौहार्द के लिए उचित नहीं मानी जा सकती।

    उन्होंने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव को संबोधित करते हुए कहा कि उन्हें अपने कार्यकर्ताओं को कानून का सम्मान करने और हिंसक गतिविधियों से दूर रहने की सलाह देनी चाहिए। राजभर ने आरोप लगाया कि यदि ऐसी घटनाएं लगातार होती रहीं तो जनता का भरोसा विपक्ष पर और कमजोर होगा। उन्होंने यह भी कहा कि लोकतंत्र में मजबूत विपक्ष आवश्यक होता है, लेकिन इसके लिए राजनीतिक दलों को अनुशासन और जिम्मेदारी का परिचय देना चाहिए।

    अपने बयान में राजभर ने समाजवादी पार्टी पर दोहरे राजनीतिक रवैये का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि एक ओर पार्टी विभिन्न समुदायों के सम्मान की बात करती है, वहीं दूसरी ओर विरोधियों का आरोप है कि जमीनी स्तर पर हिंसा की घटनाएं सामने आती रहती हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी राजनीतिक दल को अपने समर्थकों और कार्यकर्ताओं के आचरण की जिम्मेदारी लेनी चाहिए तथा कानून के दायरे में रहकर राजनीति करनी चाहिए।

    गाजीपुर की इस घटना के बाद प्रदेश की राजनीति में बयानबाजी और तेज होने की संभावना है। हालांकि, इस मामले में लगाए गए राजनीतिक आरोपों पर समाजवादी पार्टी की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे मामलों में अंतिम निष्कर्ष जांच एजेंसियों की रिपोर्ट और पुलिस की कार्रवाई के आधार पर ही स्पष्ट हो सकेगा।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उत्तर प्रदेश में आगामी चुनावों को देखते हुए कानून-व्यवस्था, अपराध और सामाजिक मुद्दों पर राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर लगातार तेज हो रहा है। ऐसे समय में किसी भी घटना को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं स्वाभाविक रूप से चर्चा का केंद्र बन जाती हैं। गाजीपुर की इस घटना ने भी प्रदेश की राजनीति में नई बहस को जन्म दिया है। अब इस मामले में पुलिस जांच, प्रशासनिक कार्रवाई और संबंधित पक्षों की आधिकारिक प्रतिक्रिया पर सभी की नजर रहेगी। वहीं सभी दलों की ओर से कानून का पालन, सामाजिक सौहार्द बनाए रखने और दोषियों के खिलाफ निष्पक्ष कार्रवाई की मांग भी लगातार उठाई जा रही है।