Tag: SP

  • उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक दलों का दलित वोट पर विशेष फोकस।

    उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक दलों का दलित वोट पर विशेष फोकस।


    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक दलों ने दलित वोट बैंक को साधने के लिए पूरी तैयारी शुरू कर दी है। सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी, समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और कांग्रेस सभी अपने-अपने स्तर पर दलित वर्ग में अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति बना रहे हैं। अंबेडकर जयंती के मौके पर यह प्रतिस्पर्धा और भी स्पष्ट रूप से देखने को मिल रही है।

    भाजपा ने पिछले लोकसभा चुनाव में अपेक्षित सफलता न मिलने के बाद से ही दलित वोटों को सहेजने की कवायद शुरू कर दी थी। संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह ने इस दिशा में सक्रिय भूमिका निभाई। उन्होंने दलित पेशेवरों के बीच जाकर उनकी समस्याओं और अपेक्षाओं को समझने का प्रयास किया, कई संगोष्ठियों का आयोजन किया और 45 जिलों में सरकारी योजनाओं की जानकारी साझा की।

    इसी प्रक्रिया के तहत सरकार ने अंबेडकर मूर्ति विकास योजना की शुरुआत की है, जिसके अंतर्गत बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर के साथ-साथ संत रविदास, कबीर, ज्योतिबा फुले और महर्षि वाल्मीकि जैसी महान विभूतियों की मूर्तियों का सौंदर्यीकरण और संरक्षण किया जाएगा। आगामी 14 अप्रैल को हर विधानसभा क्षेत्र में इस योजना को लेकर विशेष कार्यक्रम आयोजित होंगे, जिसमें स्थानीय जनप्रतिनिधि जनता को जानकारी देंगे। भाजपा का कहना है कि उसकी सरकार ने दलित उत्थान के लिए लगातार काम किया है, जबकि सपा सरकारों में दलितों का उत्पीड़न हुआ।

    समाजवादी पार्टी ने लोकसभा चुनाव में मिले उत्साह को आधार बनाकर दलित वर्ग पर विशेष ध्यान देना शुरू किया है। पार्टी ने बसपा से आए नेताओं की मदद से दलित समाज में पैठ बनाने का काम तेज कर दिया है। कांशीराम जयंती और अंबेडकर जयंती मनाने की परंपरा को सपा ने फिर से शुरू किया है। पार्टी का कहना है कि भाजपा की दलित नीति केवल चुनावी प्रतीकात्मक राजनीति है और वास्तविक लाभ नहीं पहुंचाती।

    कांग्रेस भी उत्तर प्रदेश में दलित वोटों को साधने के लिए प्रयासरत है। पार्टी ने पूर्व लोकसभा स्पीकर मीरा कुमार को बुलाया और कई कार्यक्रम आयोजित किए। कांग्रेस का दावा है कि उसने सरकारों के दौरान दलितों के लिए प्रभावी योजनाएं और कानून बनाए हैं, जबकि भाजपा केवल चुनावी हथकंडे अपनाती है।

    बहुजन समाज पार्टी अपने पारंपरिक जाटव वोट बैंक को मजबूत बनाए रखने पर ध्यान केंद्रित कर रही है। पार्टी लगातार प्रमोशन, आरक्षण और गेस्ट हाउस कांड जैसे मुद्दों को उठाकर सपा को आगाह कर रही है। मायावती दलित राजनीति में प्रमुख चेहरा मानी जाती हैं और ब्राह्मण-दलित समीकरण को साधने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन बदलते राजनीतिक परिदृश्य चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश, अवध और पूर्वांचल क्षेत्रों में दलित वोट कई सीटों पर जीत और हार तय करने वाला है। इसी कारण सभी दल इस वर्ग पर विशेष ध्यान दे रहे हैं। 2027 का विधानसभा चुनाव उत्तर प्रदेश में दलित वोट बैंक के इर्द-गिर्द घूमता दिखाई दे रहा है, और यह चुनावी रणनीतियों के केंद्र में है।

  • माओवादी संगठन को बड़ा झटका ‘पूना मार्गेम’ अभियान से प्रभावित होकर 26 नक्सलियों ने किया सरेंडर, 64 लाख था इनाम

    माओवादी संगठन को बड़ा झटका ‘पूना मार्गेम’ अभियान से प्रभावित होकर 26 नक्सलियों ने किया सरेंडर, 64 लाख था इनाम


    सुकमा । छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित सुकमा जिले में चलाए जा रहे पूना मार्गेम पुनर्वास से पुनर्जीवन अभियान के तहत सुरक्षा बलों को एक बड़ी सफलता प्राप्त हुई है। इस अभियान के तहत 26 माओवादी जिनमें 07 महिला कैडर भी शामिल हैं ने आत्मसमर्पण किया है। इस आत्मसमर्पण को माओवादी नेटवर्क के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है क्योंकि ये माओवादी लंबे समय से विभिन्न नक्सली गतिविधियों में सक्रिय रहे थे। इन माओवादियों पर कुल ₹64 लाख का इनाम घोषित था।

    आत्मसमर्पण करने वालों की पहचान और उनका योगदान

    आत्मसमर्पण करने वाले माओवादी पीएलजीए बटालियन दक्षिण बस्तर माड़ डिवीजन और आंध्र-ओडिशा बॉर्डर क्षेत्र में सक्रिय रहे थे। इनमें से कुछ माओवादी सुकमा माड़ क्षेत्र और ओडिशा की सीमाओं पर हुई कई बड़ी नक्सली घटनाओं में शामिल रहे हैं। आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों में विभिन्न रैंक के लोग शामिल हैं जैसे CYPCM – 01,DVCM – 01, PPCM – 03,ACM – 03 पार्टी सदस्य 18 यह माओवादी आत्मसमर्पण अभियान न केवल उनके व्यक्तिगत जीवन में बदलाव ला रहा है बल्कि यह माओवादी संगठन के खिलाफ सुरक्षा बलों की एक बड़ी रणनीतिक सफलता भी है।

    पूना मार्गेम अभियान का उद्देश्य

    पूना मार्गेम अभियान का मुख्य उद्देश्य भटके हुए युवाओं को हिंसा का रास्ता छोड़कर शांति सम्मानजनक और समाज में स्वीकार्य जीवन की ओर लौटने का अवसर देना है। इस अभियान के तहत आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों को छत्तीसगढ़ सरकार की पुनर्वास नीति के तहत विशेष लाभ मिलेंगे जिसमें आर्थिक सहायता सुरक्षा आवास शिक्षा और रोजगार जैसी सुविधाएं शामिल हैं।

    एसपी की अपील
    सुकमा पुलिस अधीक्षक किरण चह्वाण ने शेष माओवादियों से अपील करते हुए कहा हिंसा का रास्ता छोड़ें शांति और विकास का मार्ग अपनाएं। सरकार आत्मसमर्पण करने वालों के पुनर्वास और सुरक्षित भविष्य के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने नक्सलियों से अपील की कि वे सरकार द्वारा प्रदान किए जा रहे इस अवसर का लाभ उठाएं और समाज में अपना स्थान बनाएं।

    नक्सलवाद के खिलाफ एक और कदम

    पूना मार्गेम अभियान को नक्सलवाद के खिलाफ छत्तीसगढ़ सरकार का एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इस अभियान ने न केवल सुरक्षा बलों के लिए महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की है बल्कि यह नक्सलियों के भीतर यह संदेश भी भेज रहा है कि अगर वे हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटते हैं तो उनके लिए बेहतर भविष्य की संभावना है।