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  • एलन मस्क की बड़ी कामयाबी स्टारशिप की सफल उड़ान से नासा के चंद्र मिशन और मंगल अभियान को मिली नई रफ्तार

    एलन मस्क की बड़ी कामयाबी स्टारशिप की सफल उड़ान से नासा के चंद्र मिशन और मंगल अभियान को मिली नई रफ्तार


    नई दिल्ली। स्पेसएक्स ने एक बार फिर अंतरिक्ष विज्ञान की दुनिया में बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए दुनिया के सबसे बड़े और सबसे शक्तिशाली रॉकेट स्टारशिप की 13वीं परीक्षण उड़ान को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। इस मिशन की सबसे खास बात यह रही कि पहली बार स्टारशिप के जरिए कंपनी ने अपने 20 सबसे उन्नत स्टारलिंक इंटरनेट उपग्रहों को अंतरिक्ष में सफलतापूर्वक तैनात किया। इस सफलता को केवल स्पेसएक्स ही नहीं बल्कि वैश्विक अंतरिक्ष उद्योग और नासा के भविष्य के चंद्र अभियानों के लिए भी बेहद अहम माना जा रहा है। अब यह मिशन इस बात का संकेत दे रहा है कि इंसानों को दोबारा चंद्रमा पर भेजने और भविष्य में मंगल ग्रह तक पहुंचाने का सपना तेजी से वास्तविकता के करीब पहुंच रहा है।

    करीब 407 फीट ऊंचे विशालकाय स्टारशिप रॉकेट ने टेक्सास स्थित स्पेसएक्स के स्टारबेस लॉन्च साइट से उड़ान भरी। इससे पहले इंजन में तकनीकी खराबी और खराब मौसम के कारण मिशन को दो बार स्थगित करना पड़ा था लेकिन इस बार मौसम और तकनीकी व्यवस्था दोनों ने साथ दिया और रॉकेट ने सफल उड़ान भरी। लॉन्च के शुरुआती चरण में सभी इंजन पूरी तरह सामान्य तरीके से संचालित हुए जिससे मिशन ने मजबूती के साथ अपनी शुरुआत की।

    हालांकि उड़ान के दौरान पहले चरण यानी बूस्टर की वापसी पूरी तरह योजना के मुताबिक नहीं हो सकी। वापसी के समय सभी इंजन दोबारा सक्रिय नहीं हो पाए जिसके कारण बूस्टर नियंत्रित लैंडिंग करने के बजाय मैक्सिको की खाड़ी में गिर गया। इसके बावजूद मिशन का मुख्य उद्देश्य पूरी तरह सफल रहा क्योंकि बूस्टर से अलग होने के बाद स्टारशिप निर्धारित ऊंचाई तक पहुंचा और लगभग 200 किलोमीटर की ऊंचाई पर एक के बाद एक सभी 20 अत्याधुनिक स्टारलिंक उपग्रहों को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में स्थापित कर दिया।

    करीब एक घंटे की उड़ान पूरी करने के बाद स्टारशिप भारतीय महासागर में सुरक्षित स्प्लैशडाउन करने में भी सफल रहा। खास बात यह रही कि पानी में उतरने के बाद अंतरिक्ष यान कुछ समय तक सतह पर तैरता रहा जिससे इंजीनियरों को कई महत्वपूर्ण तकनीकी जानकारियां जुटाने का अवसर मिला। इस सफलता के बाद स्पेसएक्स के वैज्ञानिकों और इंजीनियरों ने इसे कंपनी के लिए बड़ी तकनीकी उपलब्धि बताया।

    इस मिशन में भेजे गए नए स्टारलिंक उपग्रहों ने अंतरिक्ष में पहले से मौजूद उपग्रहों के साथ लेजर तकनीक के जरिए सफल संपर्क स्थापित किया। इससे भविष्य में इंटरनेट सेवा की गति और गुणवत्ता को और बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। वर्तमान में स्पेसएक्स के दस हजार से अधिक स्टारलिंक उपग्रह दुनिया के कई देशों में हाई स्पीड इंटरनेट सेवा उपलब्ध करा रहे हैं और यह दुनिया का सबसे बड़ा सैटेलाइट नेटवर्क बन चुका है।

    मिशन के दौरान वैज्ञानिकों ने स्टारशिप की हीट शील्ड का भी महत्वपूर्ण परीक्षण किया। कुछ उपग्रहों पर लगाए गए कैमरों ने पृथ्वी के वायुमंडल में दोबारा प्रवेश के दौरान हीट शील्ड की तस्वीरें भेजीं जबकि सेंसरों के जरिए अत्यधिक तापमान और दबाव से जुड़े आंकड़े जुटाए गए। इन जानकारियों का उपयोग भविष्य के मानव मिशनों को और अधिक सुरक्षित बनाने में किया जाएगा।

    यह मिशन नासा के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि आने वाले आर्टेमिस तृतीय अभियान में इसी स्टारशिप का उपयोग अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा की सतह तक पहुंचाने के लिए किया जाना है। दूसरी ओर एलन मस्क का सबसे बड़ा सपना स्टारशिप के जरिए इंसानों को मंगल ग्रह तक पहुंचाना और वहां भविष्य में मानव बस्ती बसाना है। ऐसे में स्टारशिप की यह सफल परीक्षण उड़ान अंतरिक्ष अन्वेषण के नए युग की दिशा में एक और मजबूत कदम मानी जा रही है।

  • SpaceX: लॉन्चिंग से 1 सेकंड पहले थमा मस्क की कंपनी का मिशन… पैड पर रुकी स्टारशिप की उड़ान

    SpaceX: लॉन्चिंग से 1 सेकंड पहले थमा मस्क की कंपनी का मिशन… पैड पर रुकी स्टारशिप की उड़ान


    वाशिंगटन।
    एलन मस्क (Elon Musk) की कंपनी स्पेसएक्स (SpaceX) की मेगा रॉकेट स्टारशिप (Mega Rocket Starship) गुरुवार को अपने 13वें परीक्षण मिशन के लिए उड़ान भरने से महज एक सेकंड पहले ही रुक गई। लॉन्च से ठीक पहले कुछ इंजनों के सही तरीके से चालू न होने के कारण सिस्टम ने स्वतः लॉन्च को निरस्त कर दिया। इसके बाद रॉकेट को लॉन्च पैड पर ही सुरक्षित रखा गया और ईंधन निकालने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई।


    आखिर लॉन्च से ठीक पहले क्या गड़बड़ी हुई?

    स्पेसएक्स ने बताया कि अब यह पता लगाया जाएगा कि आखिर तकनीकी खराबी कहां हुई, उसके बाद ही अगली लॉन्च की तारीख तय की जाएगी। 407 फीट (124 मीटर) ऊंची स्टारशिप 33 मुख्य इंजनों से लैस दुनिया की सबसे बड़ी और सबसे शक्तिशाली रॉकेट है। यह इसका 13वां परीक्षण मिशन था।


    इंजन स्टार्ट होने के बाद अचानक क्यों रुक गया मिशन?

    स्पेसएक्स के लाइव वेबकास्ट में देखा गया कि निर्धारित उड़ान से तीन सेकंड पहले इंजनों के प्रज्वलन (इग्निशन) की प्रक्रिया शुरू हुई। लॉन्च पैड के ऊपर उड़ रहे ड्रोन कैमरे में यह दृश्य साफ दिखाई दिया। हालांकि, जिन इंजनों ने काम करना शुरू किया था, वे अचानक बंद हो गए और रॉकेट लॉन्च पैड से बंधा ही रह गया। इसके तुरंत बाद लॉन्च टीम ने रॉकेट से ईंधन निकालने की प्रक्रिया शुरू कर दी।


    एलन मस्क ने अगली लॉन्च कोशिश को लेकर क्या कहा?

    एलन मस्क ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि उम्मीद है कि अगली लॉन्च कोशिश कुछ ही दिनों में की जाएगी।


    मिशन में क्या-क्या भेजा जाना था?

    लॉन्च से पहले तक सब कुछ स्पेसएक्स के पक्ष में दिखाई दे रहा था। मौसम भी पूरी तरह अनुकूल था, लेकिन आंशिक इंजन इग्निशन के बाद मिशन रोकना पड़ा। इस उड़ान के दौरान स्पेसएक्स के 20 नए और सबसे उन्नत स्टारलिंक उपग्रह अंतरिक्ष में छोड़े जाने थे। लगभग एक घंटे की इस उड़ान में इन उपग्रहों को पहले से कक्षा में मौजूद स्टारलिंक उपग्रहों से संपर्क स्थापित करने के साथ-साथ स्टारशिप की हीट शील्ड की तस्वीरें भी लेनी थीं। इस मिशन में न तो पहले चरण के बूस्टर और न ही अंतरिक्ष यान को वापस लाने की योजना थी। दोनों को अंततः समुद्र में गिरना था।


    नासा के लिए स्टारशिप क्यों है बेहद अहम?

    नासा आने वाले वर्षों में अपने अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा पर उतारने के लिए स्टारशिप पर भरोसा कर रहा है। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी ने स्पेसएक्स और जेफ बेजोस की कंपनी ब्लू ओरिजिन को ऐसे लूनर लैंडर विकसित करने और उड़ाने का जिम्मा दिया है, जिनकी मदद से आधी सदी से अधिक समय बाद इंसानों की चंद्रमा पर वापसी कराई जाएगी।


    आर्टेमिस मिशन की तैयारी पर क्या पड़ेगा असर?

    दोनों कंपनियों को अगले वर्ष तक अपने-अपने लूनर लैंडर, स्टारशिप और ब्लू मून उड़ान के लिए तैयार रखने होंगे, ताकि हाल ही में घोषित आर्टेमिस-III मिशन के अंतरिक्ष यात्री पृथ्वी की कक्षा में अपने कैप्सूल की इन लैंडरों के साथ डॉकिंग का अभ्यास कर सकें। इसके बाद आर्टेमिस-IV मिशन, जिसकी योजना 2028 से पहले नहीं है, में इन्हीं लैंडरों में से किसी एक की मदद से दो अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र में उतारा जाएगा।

  • एमआईटी छोड़कर शुरू किया था स्टार्टअप, अब स्पेसएक्स अधिग्रहण के बाद अरबपतियों की सूची में चमके अमन सांगर

    एमआईटी छोड़कर शुरू किया था स्टार्टअप, अब स्पेसएक्स अधिग्रहण के बाद अरबपतियों की सूची में चमके अमन सांगर


    नई दिल्ली ।
    कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित तकनीकों के बढ़ते प्रभाव के बीच भारतीय मूल के युवा उद्यमी अमन सांगर वैश्विक कारोबारी जगत में चर्चा के केंद्र में आ गए हैं। एआई कोडिंग प्लेटफॉर्म कर्सर की मूल कंपनी एनीस्फीयर के स्पेसएक्स द्वारा 60 अरब डॉलर के शेयर खरीद समझौते की घोषणा के बाद 25 वर्षीय अमन सांगर की अनुमानित संपत्ति लगभग 5.5 अरब डॉलर तक पहुंच गई है। यह सौदा न केवल एआई उद्योग के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, बल्कि युवा उद्यमिता और तकनीकी नवाचार का भी एक बड़ा उदाहरण बनकर सामने आया है।

    अमन सांगर एनीस्फीयर के सह-संस्थापक और मुख्य परिचालन अधिकारी हैं। उन्होंने वर्ष 2022 में अपने तीन साथियों के साथ प्रतिष्ठित मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी की पढ़ाई बीच में छोड़कर स्टार्टअप की शुरुआत की थी। उस समय कंपनी का उद्देश्य इंजीनियरिंग क्षेत्र के लिए एआई आधारित समाधान तैयार करना था, लेकिन बाद में टीम ने अपनी रणनीति बदलते हुए सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट के लिए उन्नत एआई कोडिंग प्लेटफॉर्म विकसित करने पर ध्यान केंद्रित किया।

    इसी रणनीतिक बदलाव ने कंपनी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। एनीस्फीयर द्वारा विकसित कर्सर प्लेटफॉर्म ने सॉफ्टवेयर डेवलपर्स के काम करने के तरीके को काफी हद तक बदल दिया। यह प्लेटफॉर्म पूरे कोडबेस का विश्लेषण कर जटिल समस्याओं के समाधान सुझाने और कोड तैयार करने में सक्षम माना जाता है। तकनीकी कंपनियों के बीच इसकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ी और देखते ही देखते यह वैश्विक स्तर पर एआई-संचालित कोडिंग समाधानों की अग्रणी सेवाओं में शामिल हो गया।

    न्यूयॉर्क में जन्मे अमन सांगर ने किशोरावस्था में ही प्रोग्रामिंग की दुनिया में कदम रख दिया था। बताया जाता है कि उन्होंने मात्र 14 वर्ष की आयु में कोडिंग सीखना शुरू कर दिया था। बाद में एमआईटी में कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई के दौरान उनकी मुलाकात माइकल ट्रुएल, सुलेह आसिफ और आर्विड लुनेमार्क से हुई। यही टीम आगे चलकर एनीस्फीयर की नींव बनी। कंपनी के विकास में अमन सांगर ने उत्पाद रणनीति, व्यवसाय विस्तार और डेवलपर समुदाय के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

    कंपनी की वित्तीय प्रगति भी बेहद तेज रही है। कुछ वर्षों के भीतर ही कर्सर ने वैश्विक तकनीकी उद्योग में मजबूत पहचान बना ली। बड़ी संख्या में डेवलपर्स और कॉरपोरेट संस्थानों ने इसे अपने सॉफ्टवेयर विकास कार्यों में अपनाया। वर्तमान में दुनिया भर की हजारों कंपनियों के लाखों डेवलपर्स इस प्लेटफॉर्म का उपयोग कर रहे हैं। इससे कंपनी की आय में भी लगातार वृद्धि दर्ज की गई, जिसने निवेशकों का विश्वास और मजबूत किया।

    स्पेसएक्स का यह अधिग्रहण एआई और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के बीच संभावित सहयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। माना जा रहा है कि इस सौदे के बाद उन्नत एआई मॉडल के विकास और बड़े पैमाने पर तकनीकी अनुसंधान को नई गति मिल सकती है। अधिग्रहण की घोषणा के बाद अमन सांगर ने भी भविष्य की संभावनाओं को लेकर उत्साह व्यक्त किया और अत्याधुनिक एआई मॉडलों के विकास पर काम करने की बात कही।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यह सौदा आने वाले वर्षों में एआई उद्योग की दिशा तय करने वाले प्रमुख घटनाक्रमों में शामिल हो सकता है। साथ ही, अमन सांगर की सफलता दुनिया भर के युवा उद्यमियों के लिए यह संदेश भी देती है कि नवाचार, तकनीकी दृष्टि और जोखिम लेने का साहस वैश्विक स्तर पर असाधारण उपलब्धियां दिला सकता है।

  • जिस सपने को दुनिया ने पागलपन कहा, उसी ने बनाया एलन मस्क को वैश्विक कारोबार का सबसे बड़ा नाम

    जिस सपने को दुनिया ने पागलपन कहा, उसी ने बनाया एलन मस्क को वैश्विक कारोबार का सबसे बड़ा नाम

    नई दिल्ली । आज अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी और नवाचार की दुनिया में एलन मस्क का नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं है, लेकिन उनकी सफलता की कहानी संघर्ष, जोखिम और असंभव लगने वाले सपनों से होकर गुजरी है। जिस विचार को कभी विशेषज्ञों और करीबी लोगों ने अव्यावहारिक और असफल होने वाला सपना बताया था, वही आज दुनिया की सबसे प्रभावशाली अंतरिक्ष कंपनियों में से एक का आधार बन चुका है।

    करीब दो दशक पहले जब एलन मस्क ने निजी क्षेत्र में अंतरिक्ष मिशन संचालित करने की कल्पना की थी, तब यह विचार अधिकांश लोगों को अवास्तविक लगता था। उस समय अंतरिक्ष कार्यक्रमों पर मुख्य रूप से सरकारों और राष्ट्रीय एजेंसियों का नियंत्रण था। ऐसे माहौल में किसी निजी कंपनी द्वारा रॉकेट बनाकर अंतरिक्ष तक पहुंचने की बात को गंभीरता से नहीं लिया जाता था।

    शुरुआती दौर में मस्क का लक्ष्य अंतरिक्ष अनुसंधान को नई दिशा देना था। सीमित संसाधनों और तकनीकी अनुभव की कमी के बावजूद उन्होंने कम लागत में समाधान तलाशने की कोशिश की। इसी प्रयास के तहत उन्होंने पुराने रॉकेट और मिसाइल तकनीक हासिल करने का प्रयास किया, लेकिन उन्हें अपेक्षित सफलता नहीं मिली। कई विशेषज्ञों ने भी इस योजना को अव्यावहारिक बताते हुए आगे बढ़ने से मना किया।

    हालांकि मस्क ने हार नहीं मानी। उन्होंने स्वयं रॉकेट विकसित करने का फैसला किया और स्पेसएक्स की नींव रखी। कंपनी के शुरुआती वर्षों में चुनौतियां लगातार सामने आती रहीं। पहले रॉकेट कार्यक्रमों के कई परीक्षण असफल रहे और कंपनी आर्थिक संकट के दौर से भी गुजरी। एक समय ऐसा भी आया जब कंपनी के पास केवल एक अंतिम प्रयास के लिए पर्याप्त संसाधन बचे थे।

    निर्णायक मोड़ तब आया जब लगातार असफलताओं के बाद एक महत्वपूर्ण रॉकेट मिशन सफल रहा। इस उपलब्धि ने न केवल कंपनी को नया जीवन दिया, बल्कि अंतरिक्ष उद्योग में उसकी विश्वसनीयता भी स्थापित कर दी। इसके बाद कंपनी को बड़े अनुबंध मिलने लगे और अंतरिक्ष परिवहन के क्षेत्र में उसकी भूमिका तेजी से बढ़ी।

    स्पेसएक्स ने पुनः उपयोग किए जा सकने वाले रॉकेट विकसित कर अंतरिक्ष अभियानों की लागत को काफी कम कर दिया। इस तकनीकी बदलाव ने वैश्विक अंतरिक्ष उद्योग में नई प्रतिस्पर्धा को जन्म दिया। दुनिया भर के अनेक उपग्रह प्रक्षेपण मिशनों में कंपनी की भागीदारी बढ़ती गई और उसने व्यावसायिक अंतरिक्ष सेवाओं के क्षेत्र में मजबूत स्थिति बना ली।

    बाद के वर्षों में कंपनी ने सैटेलाइट आधारित इंटरनेट सेवा की शुरुआत की, जिसने उसके कारोबारी मॉडल को और मजबूत बनाया। दूरदराज क्षेत्रों तक इंटरनेट पहुंचाने की इस पहल ने कंपनी के राजस्व स्रोतों का विस्तार किया और उसे वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाई।

    एलन मस्क का अंतिम लक्ष्य अब भी अंतरिक्ष अन्वेषण को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाना और भविष्य में मानव बस्तियों को पृथ्वी से बाहर स्थापित करना है। इसी दिशा में बड़े और अत्याधुनिक रॉकेटों का विकास जारी है। विशेषज्ञों का मानना है कि स्पेसएक्स ने अंतरिक्ष क्षेत्र में ऐसे अवसरों का मार्ग प्रशस्त किया है, जो आने वाले दशकों में वैश्विक अर्थव्यवस्था और तकनीकी विकास को नई दिशा दे सकते हैं।

    आज स्पेसएक्स की सफलता केवल एक कंपनी की उपलब्धि नहीं, बल्कि उस सोच का प्रतीक बन चुकी है जिसमें असंभव समझे जाने वाले विचार भी दृढ़ संकल्प, नवाचार और निरंतर प्रयास से वास्तविकता में बदले जा सकते हैं।

  • स्पेसएक्स की ऐतिहासिक एंट्री, पहले ही दिन शेयरों में जोरदार उछाल; मार्केट वैल्यू ने बनाया नया रिकॉर्ड

    स्पेसएक्स की ऐतिहासिक एंट्री, पहले ही दिन शेयरों में जोरदार उछाल; मार्केट वैल्यू ने बनाया नया रिकॉर्ड

    नई दिल्ली । एलन मस्क की अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी कंपनी स्पेसएक्स ने शेयर बाजार में ऐतिहासिक शुरुआत करते हुए निवेशकों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है। लंबे समय से प्रतीक्षित सार्वजनिक निर्गम के बाद कंपनी के शेयरों में पहले ही कारोबारी दिन जोरदार तेजी देखने को मिली, जिससे यह वर्ष की सबसे चर्चित बाजार घटनाओं में शामिल हो गई।

    लिस्टिंग के बाद कंपनी के शेयरों ने मजबूत प्रदर्शन किया और शुरुआती निवेशकों को उल्लेखनीय लाभ मिला। कारोबार के अंत तक शेयर अपने निर्गम मूल्य से काफी ऊपर बंद हुए। इस तेजी के परिणामस्वरूप कंपनी का कुल बाजार मूल्य रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया और वह दुनिया की सबसे मूल्यवान सार्वजनिक कंपनियों की सूची में शामिल हो गई।

    स्पेसएक्स के सार्वजनिक निर्गम को निवेशकों से जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली। संस्थागत और खुदरा दोनों वर्गों के निवेशकों ने इसमें बड़ी रुचि दिखाई। उपलब्ध शेयरों की तुलना में कई गुना अधिक आवेदन प्राप्त हुए, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि निवेशकों के बीच कंपनी को लेकर उत्साह काफी मजबूत है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि स्पेसएक्स की लोकप्रियता का प्रमुख कारण उसका तेजी से विस्तार करता अंतरिक्ष कारोबार, सैटेलाइट सेवाएं और उन्नत तकनीकी परियोजनाएं हैं। हाल के वर्षों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता और भविष्य की तकनीकों को लेकर निवेशकों की बढ़ती रुचि ने भी कंपनी के प्रति सकारात्मक माहौल तैयार किया है।

    कंपनी की बाजार में मजबूत शुरुआत का लाभ उसके संस्थापक एलन मस्क को भी मिला। कंपनी में उनकी बड़ी हिस्सेदारी के कारण उनकी कुल संपत्ति में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। इस घटनाक्रम ने वैश्विक कारोबारी जगत में उनकी स्थिति को और मजबूत किया है।

    हालांकि कुछ बाजार विश्लेषकों ने कंपनी के ऊंचे मूल्यांकन को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी है। उनका मानना है कि कंपनी के वर्तमान वित्तीय प्रदर्शन और बाजार मूल्य के बीच बड़ा अंतर दिखाई देता है। ऐसे में भविष्य में निवेशकों की अपेक्षाओं पर खरा उतरना कंपनी के लिए महत्वपूर्ण चुनौती हो सकता है।

    इसके बावजूद बाजार की शुरुआती प्रतिक्रिया यह संकेत देती है कि निवेशक स्पेसएक्स को केवल एक अंतरिक्ष कंपनी के रूप में नहीं, बल्कि भविष्य की तकनीक, नवाचार और वैश्विक कनेक्टिविटी के बड़े अवसरों के रूप में देख रहे हैं। यही कारण है कि कंपनी ने अपने पहले ही दिन शेयर बाजार में मजबूत पहचान बनाते हुए एक नया रिकॉर्ड स्थापित किया है।

  • समंदर में उतरा दुनिया का सबसे बड़ा रॉकेट, स्टारशिप टेस्ट के बाद स्पेसएक्स और नासा में जश्न का माहौल

    समंदर में उतरा दुनिया का सबसे बड़ा रॉकेट, स्टारशिप टेस्ट के बाद स्पेसएक्स और नासा में जश्न का माहौल


    नई दिल्ली । अंतरिक्ष तकनीक की दुनिया में एक बार फिर इतिहास रचते हुए Elon Musk की कंपनी SpaceX ने अपने महत्वाकांक्षी स्टारशिप V3 रॉकेट का सफल परीक्षण कर लिया है। दुनिया के सबसे बड़े और अत्याधुनिक रॉकेट सिस्टम माने जा रहे स्टारशिप के इस नए संस्करण ने अंतरिक्ष मिशनों की दिशा में एक और बड़ा कदम बढ़ाया है। हालांकि परीक्षण के दौरान इंजन से जुड़ी तकनीकी समस्या सामने आई, लेकिन इसके बावजूद रॉकेट हिंद महासागर में सफलतापूर्वक उतरा, जिसे बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

    स्टारशिप V3 का यह परीक्षण स्पेसएक्स के लिए बेहद अहम था क्योंकि यह इस सीरीज की नई पीढ़ी का पहला टेस्ट था। भारतीय समयानुसार सुबह लॉन्च किए गए इस रॉकेट ने उड़ान के दौरान कई महत्वपूर्ण तकनीकी चरण सफलतापूर्वक पूरे किए। मिशन के बाद अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA ने भी इस उपलब्धि की जमकर सराहना की और इसे भविष्य के चंद्रमा और मंगल मिशनों के लिए बेहद महत्वपूर्ण बताया।

    स्टारशिप सिस्टम में ऊपरी हिस्से को स्पेसक्राफ्ट और निचले हिस्से को सुपर हेवी बूस्टर कहा जाता है। दोनों को मिलाकर “स्टारशिप” नाम दिया गया है। इसकी कुल ऊंचाई लगभग 403 फीट बताई जा रही है, जो इसे दुनिया का सबसे बड़ा और सबसे शक्तिशाली रॉकेट सिस्टम बनाती है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह पूरी तरह रीयूजेबल यानी दोबारा इस्तेमाल किया जा सकने वाला सिस्टम है, जिससे अंतरिक्ष मिशनों की लागत को काफी कम किया जा सकता है।

    नासा पहले ही घोषणा कर चुका है कि भविष्य के आर्टेमिस मिशन में स्टारशिप को ह्यूमन लैंडिंग सिस्टम के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा। इसी तकनीक के जरिए अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा की सतह तक पहुंचाने की तैयारी की जा रही है। लंबे समय से इंसानों को दोबारा चांद पर भेजने की योजना पर काम कर रही नासा के लिए यह टेस्ट नई उम्मीद लेकर आया है।

    हालांकि मिशन के अंतिम चरण में रॉकेट समुद्र में उतरने के बाद तेज धमाके के साथ फट गया, लेकिन वैज्ञानिकों के मुताबिक परीक्षण का मुख्य उद्देश्य सफलतापूर्वक पूरा हो गया। अंतरिक्ष विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के परीक्षण भविष्य में मानव मिशनों को सुरक्षित और अधिक प्रभावी बनाने में अहम भूमिका निभाएंगे।

    नासा अधिकारियों ने कहा कि स्टारशिप की टेस्टिंग के दौरान हॉट स्टेजिंग, ऑर्बिटल ऑपरेशन और बूस्टर प्रदर्शन जैसे कई महत्वपूर्ण लक्ष्य पूरे हुए हैं। एजेंसी का मानना है कि अगर यह तकनीक पूरी तरह सफल होती है तो आने वाले वर्षों में यही सिस्टम इंसानों को मंगल ग्रह तक पहुंचाने का आधार बन सकता है।

    इस उपलब्धि के बाद अंतरिक्ष जगत में उत्साह का माहौल है। विशेषज्ञों का कहना है कि स्टारशिप की सफलता केवल अमेरिका ही नहीं बल्कि पूरी मानव सभ्यता के अंतरिक्ष भविष्य के लिए एक बड़ा संकेत है। आने वाले समय में यह तकनीक अंतरिक्ष यात्रा को पहले से कहीं ज्यादा आसान और सस्ता बना सकती है।