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  • भारत-स्पेन संबंधों को नई ऊंचाई देने स्पेन जाएंगे पबित्रा मार्गेरिटा, मैड्रिड में कई अहम बैठकों पर रहेंगी नजरें

    भारत-स्पेन संबंधों को नई ऊंचाई देने स्पेन जाएंगे पबित्रा मार्गेरिटा, मैड्रिड में कई अहम बैठकों पर रहेंगी नजरें

    नई दिल्ली ।विदेश एवं कपड़ा राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा 3 नवंबर से तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर स्पेन जाएंगे। इस दौरान वह 30वें इबेरो-अमेरिकन कॉन्फ्रेंस शिखर सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। भारत इस सम्मेलन में एसोसिएट ऑब्जर्वर यानी सहयोगी पर्यवेक्षक के रूप में भाग ले रहा है। इस यात्रा को दोनों देशों के बीच राजनयिक, सांस्कृतिक और आर्थिक संबंधों को आगे बढ़ाने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    स्पेन में आयोजित होने वाले इस सम्मेलन में लैटिन अमेरिका और यूरोप के कई देश हिस्सा लेते हैं। वर्तमान में इसके सदस्य देशों की संख्या 22 है। इनमें लैटिन अमेरिका के 19 देश और यूरोप के तीन देश स्पेन, पुर्तगाल तथा अंडोरा शामिल हैं। इसके अलावा सम्मेलन में 12 एसोसिएट ऑब्जर्वर और 20 कंसल्टेटिव ऑब्जर्वर भी जुड़े हुए हैं। भारत सहयोगी पर्यवेक्षक के रूप में इस मंच की गतिविधियों में भागीदारी कर रहा है।

    पबित्रा मार्गेरिटा की यात्रा के दौरान सम्मेलन के इतर विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों के साथ द्विपक्षीय बैठकों का कार्यक्रम भी प्रस्तावित है। इन मुलाकातों में आपसी सहयोग और साझा हितों से जुड़े विषयों पर चर्चा होगी। इसके अलावा राज्य मंत्री स्पेन की राजधानी मैड्रिड में रहने वाले भारतीय समुदाय के लोगों से भी मुलाकात करेंगे। इससे स्पेन में बसे भारतीय नागरिकों के साथ संपर्क और संवाद को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

    यह यात्रा भारत और स्पेन के बीच वर्ष 2026 के लिए घोषित संयुक्त पहल के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण है। दोनों देशों ने 2026 को संस्कृति, पर्यटन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी कृत्रिम बुद्धिमत्ता के संयुक्त वर्ष के रूप में मनाने का निर्णय लिया है। इस पहल के तहत दोनों देशों में विभिन्न कार्यक्रम और गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। राज्य मंत्री की यात्रा इन्हीं आयोजनों की कड़ी का हिस्सा होगी।

    भारत और स्पेन के बीच राजनयिक संबंध वर्ष 1956 में स्थापित हुए थे। वर्ष 2026 में दोनों देशों के संबंधों के 70 वर्ष पूरे हो रहे हैं। इस अवसर पर दोनों देशों ने सहयोग के नए क्षेत्रों को प्राथमिकता दी है। इसी वर्ष आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट में स्पेन के राष्ट्रपति पेड्रो सांचेज भी नई दिल्ली पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी।

    दोनों नेताओं के बीच हुई बातचीत में रक्षा, सुरक्षा, प्रौद्योगिकी और अन्य क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के उपायों पर चर्चा हुई थी। भारत और स्पेन के बीच रक्षा आधुनिकीकरण, एयरोस्पेस, नौसैनिक तकनीक और आतंकवाद विरोधी सहयोग जैसे क्षेत्रों में भी साझेदारी विकसित हो रही है।

    व्यापारिक मोर्चे पर स्पेन यूरोप में भारत का छठा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। वर्ष 2023 में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 9.9 अरब डॉलर दर्ज किया गया था। भारत में 250 से अधिक स्पेनिश कंपनियां सक्रिय रूप से कारोबार कर रही हैं। इन कंपनियों की मौजूदगी दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों के विस्तार को दर्शाती है।

    स्पेन में भारतीय समुदाय की संख्या लगभग 75 हजार बताई जाती है। दोनों देशों के बीच लोगों के स्तर पर संपर्क बढ़ाने के लिए भी कई प्रयास किए गए हैं। अगस्त 2024 में बार्सिलोना में भारत का नया महावाणिज्य दूतावास खोला गया था। इससे स्पेन में भारतीय नागरिकों को राजनयिक और अन्य आवश्यक सेवाएं उपलब्ध कराने में मदद मिल रही है।

    शिक्षा और संस्कृति के क्षेत्र में भी दोनों देशों के बीच सहयोग जारी है। स्पेन के वलाडोलिड विश्वविद्यालय में हिंदी और भारतीय अध्ययन से जुड़ी पीठ स्थापित है। इसके अलावा स्पेन के कई शहरों में हर साल अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। पबित्रा मार्गेरिटा की आगामी यात्रा के दौरान होने वाली बैठकों और सम्मेलन में भागीदारी से इन सांस्कृतिक, शैक्षणिक, व्यापारिक और तकनीकी संबंधों को आगे बढ़ाने के अवसर मिलेंगे।

  • Spain में भीषण रेल हादसा…. दो हाई-स्पीड ट्रेनों की भिड़ंत में 64 लोगों की मौत…. 80 घायल

    Spain में भीषण रेल हादसा…. दो हाई-स्पीड ट्रेनों की भिड़ंत में 64 लोगों की मौत…. 80 घायल


    मेड्रिड।
    स्पेन (Spain) के तोलेदो प्रांत (Toledo Province) में बुधवार को दो ट्रेन के बीच टक्कर हो जाने से कम से कम 64 लोगों की मौत हो गयी। इस घटना में कम से कम 80 लोग घायल हुए हैं और मृतकों की संख्या बढ़ सकती है, क्योंकि बचावकर्मी मलबे में जीवित बचे लोगों की तलाश जारी रखे हुए हैं। कैस्टिला ला मांचा (Castilla-La Mancha) क्षेत्र की प्रवक्ता एस्थर पाडिला ने सरकारी प्रसारक बताया कि एक ही दिशा में जा रही दो तेज रफ्तार ट्रेन हादसे का शिकार हुईं, एक ट्रेन दूसरी ट्रेन के पिछले हिस्से से टकरा गई, जिससे उसके दो डिब्बे पटरी से उतर गये। उन्होंने कहा कि हादसे के कारण का पता लगाया जा रहा है। प्रवक्ता ने कहा कि राजधानी मैड्रिड (Capital Madrid) से दक्षिणी-पश्चिमी शहर सेविले जा रही दोनों ट्रेन में सैकड़ों यात्री सवार थे।

    स्पेन के रेल प्रणाली संचालक ‘एडीआईएफ’ ने बताया कि बुधवार की सुबह तोलेदो प्रांत में यह हादसा हुआ जिसके बाद मैड्रिड, स्यूदाद रियल और अंदालूसिया के बीच रेल सेवा रोक दी गई। स्पेन की स्वास्थ्य मंत्री मोनिका गार्सिया ने बताया कि आपातकालीन कर्मी सबसे अधिक क्षतिग्रस्त दो रेल डिब्बों से जीवित बचे लोगों और शवों को निकालने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि घायलों को क्षेत्र के विभिन्न अस्पतालों में भेजा जा रहा है।

    इस दुर्घटना में स्पेन की सरकारी कंपनी ‘रेनफे’ और निजी रेल कंपनी ‘इर्यो’ की ट्रेनें शामिल थीं। स्पेन की मीडिया की खबरों के अनुसार, ऐसा प्रतीत होता है कि ‘रेनफे’ की ट्रेन ने ‘इर्यो’ की ट्रेन को टक्कर मारी। पाडिला ने बताया कि ‘रेनफे’ की ट्रेन में 397 यात्री और ‘इर्यो’ की ट्रेन में 147 यात्री सवार थे। आपातकालीन सेवाओं, दमकलकर्मियों और पुलिस की मदद के लिए सेना की आपातकालीन ब्रिगेड को तैनात किया गया। एंबुलेंस और हेलीकॉप्टर सेवा घटनास्थल से घायलों को ले जाने में जुटे रहे, जबकि सुरक्षित बचे यात्रियों को बसों में बैठाकर वहां से ले जाया गया।

    उर्दा के मेयर मैनुअल गैलन ने बताया कि कई यात्री घायल हुए हैं। सिविल प्रोटेक्शन अधिकारियों ने उनके टाउन हॉल से संपर्क कर यात्रियों के इलाज के लिए एक स्पोर्ट्स पवेलियन तैयार करने को कहा है। स्थानीय प्रशासन घायलों को प्राथमिक उपचार देने और जरूरत पड़ने पर अस्पताल भेजने की तैयारी में जुटा है। वहीं, पास के एक और गांव लॉस येबेनेस के मेयर जेसुस पेरेज ने भी TVE से बात करते हुए कहा कि हादसा बहुत ही गंभीर है। उन्होंने बताया कि स्थानीय लोगों की मदद से बचाव कार्य जारी है।

    यह हादसा स्पेन के हाई-स्पीड रेल नेटवर्क के लिए झटका माना जा रहा है। गौरतलब है कि इसी साल जनवरी में दक्षिणी स्पेन में एक बड़ा हादसा हुआ था। उस समय एक ट्रेन पटरी से उतरी और सामने से आ रही दूसरी ट्रेन से टकरा गई, जिसमें 46 लोगों की मौत हो गई थी। वह हादसा 2013 के हादसे के बाद स्पेन में सबसे जानलेवा था। 2013 में एक ट्रेन हादसे में 80 लोगों की जान गई थी।

  • आसमान से शतरंज की बिसात जैसा दिखता है बार्सिलोना, 45 डिग्री कटे कोनों ने बनाया शहर को खास

    आसमान से शतरंज की बिसात जैसा दिखता है बार्सिलोना, 45 डिग्री कटे कोनों ने बनाया शहर को खास


    नई दिल्ली। दुनिया में कई शहर अपनी ऐतिहासिक इमारतों के लिए मशहूर हैं, लेकिन स्पेन का बार्सिलोना अपनी अनोखी शहरी बनावट के कारण आसमान से ही अलग नजर आता है। ऊपर से देखने पर यहां की सड़कें और इमारतें किसी विशाल चेसबोर्ड या कंप्यूटर चिप की तरह दिखाई देती हैं। शहर के अधिकांश ब्लॉक एक जैसे आकार के हैं और उनकी सड़कों का पैटर्न बेहद व्यवस्थित है। खास बात यह है कि इन ब्लॉकों के कोने 90 डिग्री के बजाय 45 डिग्री पर काटे गए हैं।

    इसी डिजाइन को ऑक्टोगोनल ब्लॉक कहा जाता है। इस अनोखी शहरी योजना का श्रेय इंजीनियर इल्डेफॉन्स सेर्डा को जाता है, जिन्होंने 1850 के दशक में इसका खाका तैयार किया था। उस दौर में कारों का इस्तेमाल भी शुरू नहीं हुआ था, लेकिन सेर्डा ने भविष्य में बढ़ने वाले यातायात को ध्यान में रखते हुए ऐसी योजना बनाई, जिसमें चौराहों पर पर्याप्त खुली जगह और वाहनों के लिए बेहतर दृश्यता मिल सके।

    ट्रैफिक के साथ हवा और रोशनी का भी रखा ध्यान
    45 डिग्री पर कटे कोनों ने चौराहों को अपेक्षाकृत खुला बनाया। इससे हवा के आवागमन में मदद मिली और वाहनों को मोड़ने के लिए बेहतर विजिबिलिटी मिली। यही डिजाइन आज बार्सिलोना की पहचान बन चुका है।

    हालांकि, 19वीं सदी के मध्य में बार्सिलोना की तस्वीर बिल्कुल अलग थी। शहर मध्यकालीन दीवारों के भीतर सीमित था और आबादी का घनत्व बेहद ज्यादा था। संकरी गलियों में धूप और हवा तक ठीक से नहीं पहुंचती थी। गंदगी, प्रदूषण और हैजा जैसी महामारियों ने हालात बेहद खराब कर दिए थे। उस समय आम लोगों की औसत उम्र घटकर करीब 30 से 35 साल रह गई थी।

    इसी स्थिति को देखते हुए शहर की पुरानी दीवारों को गिराने का फैसला लिया गया और नए बार्सिलोना की योजना बनाने की जिम्मेदारी इल्डेफॉन्स सेर्डा को मिली।

    हर वर्ग के लिए हवा, धूप और हरियाली का सपना
    सेर्डा केवल इंजीनियर नहीं, बल्कि समाजवादी विचारक भी थे। उनका मानना था कि शहर में रहने वाले अमीर और गरीब सभी लोगों को ताजी हवा, धूप और हरियाली का समान अधिकार मिलना चाहिए। इसी सोच के तहत उन्होंने शहर को समान आकार के ब्लॉक्स में बांटने की योजना बनाई।

    उनकी मूल योजना में हर ब्लॉक की केवल दो या तीन दिशाओं में इमारतें बनाने और बीच के हिस्से को सार्वजनिक बगीचे या पार्क के तौर पर खाली रखने का प्रस्ताव था। उनका उद्देश्य था कि घर की खिड़की खोलने पर लोगों को कंक्रीट के बजाय हरियाली दिखाई दे। हालांकि, बाद के वर्षों में व्यावसायिक गतिविधियों के बढ़ने के साथ इन आंतरिक हिस्सों में भी निर्माण होने लगा।

    सेर्डा ने दिया ढांचा, गौडी ने भरी कलात्मक जान
    बार्सिलोना की पहचान सिर्फ इसकी सड़कों और ब्लॉक्स से नहीं बनी। शहर की वास्तुकला को विशिष्ट बनाने में महान आर्किटेक्ट एंतोनी गौडी की भी बड़ी भूमिका रही। सेर्डा ने शहर को व्यवस्थित और गणितीय स्वरूप दिया, जबकि गौडी ने उसमें कला और प्रकृति का रंग भर दिया।

    गौडी कैटलन मॉडर्निज्म के प्रमुख वास्तुकार थे। वे प्रकृति से बेहद प्रभावित थे और उनकी इमारतों में इसका प्रभाव साफ दिखाई देता है। कासा बात्लो की छत ड्रैगन की रीढ़ जैसी नजर आती है, जबकि कासा मिला की बालकनियां समुद्र की लहरों का आभास देती हैं।

    वहीं, शहर के केंद्र में मौजूद सग्रादा फैमिलिया अपनी अनूठी वास्तुकला के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है। इसके अंदर के स्तंभ पेड़ों जैसी आकृति देते हैं, जिससे प्रकृति और आध्यात्म का अनोखा मेल दिखाई देता है।

    आज भी पुराने प्लान से तलाश रहा आधुनिक समाधान
    आज बार्सिलोना की आबादी करीब 16.5 लाख है, जबकि पूरे मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र में 55 लाख से ज्यादा लोग रहते हैं। हर साल एक करोड़ से अधिक पर्यटक यहां पहुंचते हैं। इतनी बड़ी आबादी और पर्यटकों के बीच प्रदूषण और ट्रैफिक शहर के लिए बड़ी चुनौती बन चुके हैं।

    इन समस्याओं से निपटने के लिए बार्सिलोना प्रशासन सेर्डा की मूल सोच को आधुनिक रूप देकर ‘सुपरब्लॉक्स’ की अवधारणा पर काम कर रहा है। इसमें कई ब्लॉक्स को मिलाकर एक बड़ा सुपरब्लॉक बनाया जाता है और अंदरूनी हिस्सों में वाहनों की आवाजाही सीमित की जाती है।

    गाड़ियों को मुख्य रूप से सुपरब्लॉक की बाहरी सड़कों तक सीमित रखा जाता है, जबकि अंदर पैदल यात्रियों, साइकिल चालकों और बच्चों के लिए जगह विकसित की जा रही है। पार्क और कम्युनिटी सेंटर भी बढ़ाए जा रहे हैं। इस मॉडल से शहर में NO2 प्रदूषण का स्तर 25 प्रतिशत तक कम होने का दावा किया गया है।

    पुरानी विरासत के साथ आधुनिकता का मेल
    बार्सिलोना की खासियत यह भी है कि यहां पुराना और नया साथ-साथ दिखाई देता है। ऐतिहासिक गॉथिक क्वार्टर की 14वीं सदी की संकरी गलियों को संरक्षित रखा गया है, वहीं आधुनिक वित्तीय क्षेत्र में टॉरे ग्लोरीज जैसी बुलेट के आकार की कांच की गगनचुंबी इमारतें शहर के आधुनिक स्वरूप को दर्शाती हैं।

    बार्सिलोना की शहरी योजना और वास्तुकला यह संदेश देती है कि शहर केवल इमारतों और सड़कों का समूह नहीं होता। उसकी डिजाइन में इंसानी जीवन, खुली हवा, रोशनी, हरियाली और मानसिक सुकून को भी जगह मिलनी चाहिए। शायद यही वजह है कि बार्सिलोना को जमीन से देखने पर जितना खूबसूरत अनुभव होता है, आसमान से देखने पर उसकी ज्यामितीय बनावट उतनी ही हैरान करती है।

  • स्यूटा सीमा पर अचानक बढ़ी प्रवासियों की भीड़ ने बढ़ाई यूरोप की चिंता, आर्थिक संकट और अफवाहों की भी चर्चा

    स्यूटा सीमा पर अचानक बढ़ी प्रवासियों की भीड़ ने बढ़ाई यूरोप की चिंता, आर्थिक संकट और अफवाहों की भी चर्चा

    नई दिल्ली । स्पेन के उत्तर अफ्रीका स्थित स्वायत्त क्षेत्र स्यूटा में बड़ी संख्या में प्रवासियों के एक साथ पहुंचने की घटना ने पूरे यूरोप का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। सीमावर्ती क्षेत्र में अचानक बढ़ी भीड़ के कारण सुरक्षा व्यवस्था पर दबाव बढ़ गया और प्रशासन को स्थिति नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती करनी पड़ी। इस घटनाक्रम ने एक बार फिर अवैध प्रवासन, सीमा प्रबंधन और मानवीय चुनौतियों को लेकर व्यापक चर्चा शुरू कर दी है।

    स्यूटा भौगोलिक रूप से अफ्रीका महाद्वीप में स्थित स्पेन का एक क्षेत्र है, जिसकी सीमा सीधे मोरक्को से लगती है। यही कारण है कि यह लंबे समय से यूरोप पहुंचने की कोशिश करने वाले प्रवासियों के लिए प्रमुख प्रवेश बिंदु माना जाता रहा है। समुद्र और भूमि दोनों मार्गों से यहां पहुंचना अपेक्षाकृत आसान होने के कारण समय-समय पर बड़ी संख्या में लोग इस रास्ते का उपयोग करने का प्रयास करते हैं।

    विश्लेषकों के अनुसार, इस बार अचानक बड़ी संख्या में लोगों के सीमा की ओर बढ़ने के पीछे कई कारण एक साथ सक्रिय रहे। इनमें कानूनी प्रक्रियाओं को लेकर फैली गलत जानकारियां भी शामिल हैं। बताया गया कि स्पेन की न्यायिक प्रक्रिया से जुड़ी कुछ खबरों को मानव तस्करी से जुड़े नेटवर्क ने गलत तरीके से प्रचारित किया। इसके बाद यह अफवाह फैल गई कि समुद्री मार्ग से स्पेन पहुंचने वाले लोगों को तुरंत वापस नहीं भेजा जाएगा। ऐसी सूचनाओं ने कई लोगों को जोखिम उठाकर सीमा पार करने के लिए प्रेरित किया।

    दूसरा महत्वपूर्ण कारण मोरक्को की आर्थिक परिस्थितियों को माना जा रहा है। बेरोजगारी, महंगाई और सीमित रोजगार अवसरों के चलते बड़ी संख्या में युवा बेहतर भविष्य की तलाश में विदेश जाने की कोशिश कर रहे हैं। कई प्रवासियों का मानना है कि यूरोप में उन्हें रोजगार, शिक्षा और बेहतर जीवन स्तर के अधिक अवसर मिल सकते हैं। यही उम्मीद उन्हें कठिन और जोखिम भरी यात्रा के लिए भी तैयार कर देती है।

    भौगोलिक स्थिति भी इस पूरी घटना में अहम भूमिका निभाती है। स्यूटा और मेलिला अफ्रीका में स्थित स्पेन के दो ऐसे क्षेत्र हैं, जहां से यूरोपीय संघ की सीमा तक पहुंच संभव है। इसी वजह से ये इलाके लंबे समय से अवैध प्रवासन के प्रमुख मार्ग माने जाते रहे हैं। कई प्रवासी समुद्र तैरकर, रबर ट्यूब या अन्य अस्थायी साधनों की मदद से स्यूटा के तट तक पहुंचने का प्रयास करते हैं। अचानक बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने से सीमा सुरक्षा एजेंसियों के सामने स्थिति को नियंत्रित करना चुनौतीपूर्ण हो गया।

    घटना के बाद स्पेन सरकार ने सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करते हुए अतिरिक्त बलों की तैनाती की और सीमा पर निगरानी बढ़ा दी। प्रशासन ने मानवीय सहायता के साथ-साथ आव्रजन नियमों के अनुसार कार्रवाई शुरू की। जिन लोगों के पास वैध दस्तावेज नहीं थे, उनके मामलों की कानूनी प्रक्रिया के तहत जांच की गई तथा कई प्रवासियों को वापस भेजने की कार्रवाई भी की गई। वहीं, अस्थायी शिविरों और राहत व्यवस्थाओं पर भी प्रशासन को अतिरिक्त संसाधन लगाने पड़े।

    इस घटनाक्रम ने पूरे यूरोप में सीमा सुरक्षा, मानव तस्करी और अवैध प्रवासन को लेकर नई बहस छेड़ दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल सीमा सुरक्षा कड़ी करने से समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं होगा। इसके लिए मानव तस्करी के नेटवर्क पर प्रभावी कार्रवाई, प्रवासन से जुड़े भ्रम फैलाने वाली अफवाहों पर रोक और मूल देशों में रोजगार एवं आर्थिक अवसरों को बढ़ाने जैसे दीर्घकालिक उपाय भी आवश्यक होंगे।

  • अवैध घुसपैठ से निपटने के लिए समुद्र में 1600 फीट की दीवार बनाएगा स्पेन

    अवैध घुसपैठ से निपटने के लिए समुद्र में 1600 फीट की दीवार बनाएगा स्पेन


    मैड्रिड।
    मोरक्को (Morocco) से घुस आए अवैध प्रवासियों (Illegal Immigrants) के चलते स्पेन (Spain) में काफी समस्या हुई है। अब स्पेन ने इससे निपटने के लिए नया तरीका इस्तेमाल करने का फैसला किया है। स्पेन (Spain) ने घोषणा की है कि वह अपने उत्तरी अफ़्रीकी क्षेत्र स्यूटा और पड़ोसी मोरक्को के बीच समुद्री सीमा (Maritime border.) पर 500 मीटर लंबा (1,600 फीट) बैरियर बनाएगा। एक रिपोर्ट के अनुसार, सेउटा के तटीय इलाके में ताराजल ब्रेकवॉटर के पास एक तैरता हुआ अवरोध लगाया गया था। गौरतलब है कि मोरक्को के साथ लगती स्पेन के सेउटा सीमा पर मरने वालों की संख्या बढ़कर 67 हो गई है। स्पेन सरकार ने शनिवार को यह जानकारी दी।


    ब्रेकवॉटर बैरियर को पार कर गए

    स्पेन सरकार ने कहाकि मृतकों में कुछ ऐसे लोग शामिल हैं जो डूब गए और कुछ ‘ब्रेकवॉटर बैरियर’ को पार करने की भगदड़ में मारे गए। स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज ने सेउटा की घटनाओं पर यूरोपीय संघ के कुछ नेताओं की प्रतिक्रिया की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहाकि स्पेन को यूरोपीय संघ के सीमा-रहित शेंगेन क्षेत्र से निलंबित करने की मांग पूर्वाग्रह, फर्जी खबरों, अज्ञानता या राजनीतिक स्वार्थ से प्रेरित है। शनिवार सुबह तैरकर सेउटा के ताराजल तट पर पहुंचे कुछ थके-हारे प्रवासियों को सैनिकों ने सीमा के पार वापस भेज दिया।


    गृह मंत्रालय ने क्या कहा

    स्पेन के गृह मंत्रालय का कहना है कि उत्तरी अफ्रीका में स्पेन के इलाके में दाखिल होने वालों में ज्यादातर लोग पहले ही मोरक्को लौट चुके हैं। स्पेन के गृह मंत्री फर्नांडो ग्रांडे-मार्लास्का ने शनिवार को सेउटा में पत्रकारों से कहाकि हम कानून तोड़ने वालों के खिलाफ सख्ती से पेश आते हैं। जब यह सवाल पूछा गया कि दोनों तरफ कड़ी सुरक्षा के बावजूद इतनी बड़ी संख्या में लोग सीमा कैसे पार कर पाए और क्या मोरक्को से सेउटा को कोई खतरा है, तो मार्लास्का ने रबात में मौजूद सरकार का बचाव किया। उन्होंने कहाकि इन घटनाओं का स्पेन और मोरक्को को मिलकर जायजा लेने की जरूरत है। लेकिन पड़ोसी देशों के साथ सहयोग की वजह से ही स्पेन 24 घंटे में हालात को सामान्य कर पाया।


    इटनी ने शुरू की यात्रियों की जांच

    उधर, इटली ने स्पेन से आने वाले यात्रियों पर अस्थायी रूप से सीमा पर जांच शुरू कर दी है। फ्रांस ने भी अपनी सीमाओं पर नियंत्रण कड़ा कर दिया है। प्रधानमंत्री सांचेज ने यूरोपीय संघ के गृह मंत्रियों की आपातकालीन बैठक बुलाने का भी आह्वान किया है। करीब 84,000 की आबादी वाले सेउटा शहर पर इस अचानक आए दबाव के कारण स्पेन और पूरे यूरोप में राजनीतिक बहस छिड़ गई है। इटली ने हवाई और समुद्री मार्ग से स्पेन से आने वाले गैर-यूरोपीय संघ के नागरिकों की जांच शुरू कर दी है। इटली के विदेश मंत्री एंटोनियो ताजानी ने कहा कि यूरोपीय सीमाओं की सुरक्षा के लिए यह कदम आवश्यक था।

  • स्पेन ने जीता विश्व कप अब इनामी राशि से भी बनाया रिकॉर्ड चैंपियन को मिले 50 मिलियन डॉलर

    स्पेन ने जीता विश्व कप अब इनामी राशि से भी बनाया रिकॉर्ड चैंपियन को मिले 50 मिलियन डॉलर


    नई दिल्ली  । फीफा वर्ल्ड कप 2026 में ऐतिहासिक जीत दर्ज करने के बाद स्पेन सिर्फ ट्रॉफी का ही नहीं बल्कि रिकॉर्ड इनामी राशि का भी हकदार बन गया। फाइनल में अर्जेंटीना को 1-0 से हराकर दूसरी बार विश्व चैंपियन बनने वाली स्पेनिश टीम पर करोड़ों रुपए की बारिश हुई। फीफा ने चैंपियन टीम को 50 मिलियन डॉलर यानी भारतीय मुद्रा में करीब 480 करोड़ रुपए की पुरस्कार राशि प्रदान की। पिछले विश्व कप की तुलना में इस बार विजेता टीम की इनामी राशि में 8 मिलियन डॉलर की बढ़ोतरी की गई थी जिससे इस जीत का महत्व और भी बढ़ गया।

    फाइनल में हारने के बावजूद अर्जेंटीना भी खाली हाथ नहीं लौटा। उपविजेता टीम को 33 मिलियन डॉलर यानी लगभग 318 करोड़ रुपए की इनामी राशि मिली। वहीं तीसरे स्थान पर रहने वाली इंग्लैंड को 29 मिलियन डॉलर यानी करीब 279 करोड़ रुपए और चौथे स्थान पर रही फ्रांस को 27 मिलियन डॉलर यानी लगभग 260 करोड़ रुपए दिए गए। क्वार्टर फाइनल तक पहुंचने वाली प्रत्येक टीम को 19 मिलियन डॉलर जबकि प्री क्वार्टर फाइनल यानी राउंड ऑफ 16 में बाहर होने वाली टीमों को 15 मिलियन डॉलर की पुरस्कार राशि दी गई।

    फाइनल मुकाबला बेहद रोमांचक रहा। निर्धारित 90 मिनट तक दोनों टीमें कोई गोल नहीं कर सकीं और मुकाबला अतिरिक्त समय में पहुंच गया। मैच का फैसला 106वें मिनट में हुआ जब स्पेन के स्टार खिलाड़ी फेरान टोरेस ने शानदार गोल दागकर अपनी टीम को 1-0 की बढ़त दिलाई। यही गोल निर्णायक साबित हुआ और स्पेन ने 16 वर्षों बाद एक बार फिर विश्व कप ट्रॉफी अपने नाम कर ली। इससे पहले स्पेन ने वर्ष 2010 में पहली बार फुटबॉल विश्व कप का खिताब जीता था।

    पूरे टूर्नामेंट में स्पेन का प्रदर्शन संतुलित और अनुशासित रहा। टीम की मजबूत रक्षापंक्ति उसकी सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरी। स्पेन ने पूरे विश्व कप अभियान में केवल एक गोल खाया जो उसकी शानदार डिफेंसिव रणनीति का प्रमाण है। आक्रमण और रक्षा के बेहतरीन तालमेल ने टीम को लगातार जीत दिलाई और आखिरकार विश्व विजेता बना दिया।

    स्पेन की सफलता में मिडफील्डर रोड्री की भूमिका भी बेहद अहम रही। पूरे टूर्नामेंट में उनके शानदार प्रदर्शन के लिए उन्हें प्रतियोगिता का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी चुना गया और प्रतिष्ठित गोल्डन बॉल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। रोड्री ने अपनी सूझबूझ शानदार पासिंग और खेल पर नियंत्रण की क्षमता से स्पेन के अभियान को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।

    विश्व कप 2026 का समापन स्पेन की ऐतिहासिक जीत के साथ हुआ जिसने एक बार फिर साबित कर दिया कि मजबूत टीम वर्क अनुशासित खेल और प्रभावी रणनीति किसी भी बड़े टूर्नामेंट में सफलता की सबसे बड़ी कुंजी होती है।

  • फेरान टोरेस बने स्पेन के महानायक एक्स्ट्रा टाइम के गोल ने अर्जेंटीना से छीना विश्व कप का ताज 16 साल बाद फिर गूंजा स्पेन का परचम

    फेरान टोरेस बने स्पेन के महानायक एक्स्ट्रा टाइम के गोल ने अर्जेंटीना से छीना विश्व कप का ताज 16 साल बाद फिर गूंजा स्पेन का परचम


    नई दिल्ली। फीफा वर्ल्ड कप 2026 का फाइनल फुटबॉल इतिहास के सबसे रोमांचक मुकाबलों में शामिल हो गया जहां स्पेन ने मौजूदा चैंपियन अर्जेंटीना को 1-0 से हराकर दूसरी बार विश्व चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया। न्यूयॉर्क न्यू जर्सी स्टेडियम में खेले गए इस हाई वोल्टेज मुकाबले में दोनों टीमों ने जीत के लिए आखिरी सांस तक संघर्ष किया लेकिन आखिरकार एक्स्ट्रा टाइम में सब्स्टीट्यूट खिलाड़ी फेरान टोरेस ने वह गोल दाग दिया जिसने स्पेन को 16 साल बाद फिर दुनिया का सरताज बना दिया। इस जीत के साथ स्पेन ने 2010 की अपनी ऐतिहासिक सफलता को दोहराते हुए विश्व फुटबॉल में एक बार फिर अपनी बादशाहत साबित कर दी।

    फाइनल मुकाबले की शुरुआत से ही स्पेन ने शानदार खेल दिखाया और गेंद पर अपना नियंत्रण बनाए रखा। स्पेनिश खिलाड़ियों ने लगातार आक्रामक फुटबॉल खेलते हुए अर्जेंटीना के गोल पर कई हमले किए लेकिन गोलकीपर एमिलियानो मार्टिनेज बार बार दीवार बनकर सामने आए। उन्होंने कई बेहतरीन बचाव करते हुए अर्जेंटीना को लंबे समय तक मुकाबले में बनाए रखा। दूसरी ओर अर्जेंटीना की टीम अपने स्टार खिलाड़ियों के बावजूद स्पेन के मजबूत डिफेंस को भेदने में सफल नहीं हो सकी। कप्तान लियोनेल मेसी को स्पेनिश डिफेंडरों ने पूरे मुकाबले में खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया जिससे अर्जेंटीना का आक्रमण लगातार दबाव में रहा।

    निर्धारित 90 मिनट तक दोनों टीमों के बीच कोई गोल नहीं हो सका। मुकाबला जितना आगे बढ़ता गया उतना ही रोमांच और तनाव बढ़ता गया। स्टॉपेज टाइम में अर्जेंटीना को बड़ा झटका तब लगा जब मिडफील्डर एंजो फर्नांडीज को दूसरा येलो कार्ड मिलने के बाद मैदान छोड़ना पड़ा। इसके बाद अर्जेंटीना को एक्स्ट्रा टाइम में केवल 10 खिलाड़ियों के साथ खेलना पड़ा जिससे स्पेन को अतिरिक्त बढ़त मिल गई।

    एक्स्ट्रा टाइम के 106वें मिनट में वह पल आया जिसका इंतजार स्पेन के करोड़ों प्रशंसक कर रहे थे। निको विलियम्स के शानदार हेडर से मिली गेंद को फेरान टोरेस ने बेहतरीन तरीके से नियंत्रित किया और बाएं पैर से जोरदार शॉट लगाते हुए गेंद को गोलपोस्ट में पहुंचा दिया। अर्जेंटीना के गोलकीपर मार्टिनेज इस बार भी पूरी कोशिश के बावजूद गेंद को रोक नहीं सके। यही गोल मैच का फैसला साबित हुआ और पूरा स्टेडियम स्पेन के समर्थकों की खुशी से गूंज उठा।

    गोल करने के बाद भी स्पेन ने अपना आक्रमण जारी रखा और एक बार फिर गेंद को जाल में पहुंचाया लेकिन फाउल के कारण गोल को अमान्य घोषित कर दिया गया। इसके बावजूद स्पेनिश खिलाड़ियों ने संयम नहीं खोया और अंतिम सीटी बजने तक अर्जेंटीना को वापसी का कोई मौका नहीं दिया। दूसरी ओर अर्जेंटीना ने आखिरी क्षणों तक बराबरी की कोशिश की लेकिन स्पेन की मजबूत रक्षापंक्ति के सामने उसकी हर रणनीति विफल साबित हुई।

    पूरे टूर्नामेंट में स्पेन का प्रदर्शन शानदार रहा। टीम एक भी मुकाबला नहीं हारी और लगातार संतुलित आक्रमण तथा मजबूत रक्षात्मक खेल के दम पर फाइनल तक पहुंची। फाइनल में भी उसी आत्मविश्वास और अनुशासन का प्रदर्शन करते हुए स्पेन ने विश्व कप ट्रॉफी अपने नाम कर ली। वहीं 2022 की चैंपियन अर्जेंटीना लगातार दूसरी बार खिताब जीतने का सपना पूरा नहीं कर सकी। इस जीत के साथ स्पेन ने दुनिया को यह संदेश दिया कि उसकी नई पीढ़ी विश्व फुटबॉल पर लंबे समय तक राज करने का दम रखती है।

  • कर्नाटक में फीफा वर्ल्ड कप फाइनल का उत्साह, CM डी.के. शिवकुमार भी करेंगे लाइव स्क्रीनिंग में शिरकत

    कर्नाटक में फीफा वर्ल्ड कप फाइनल का उत्साह, CM डी.के. शिवकुमार भी करेंगे लाइव स्क्रीनिंग में शिरकत

     
    नई दिल्ली । फीफा विश्व कप 2026 के फाइनल मुकाबले को लेकर कर्नाटक में फुटबॉल प्रेमियों के बीच जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। राज्य सरकार ने बेंगलुरु में अर्जेंटीना और स्पेन के बीच खेले जाने वाले खिताबी मुकाबले की सार्वजनिक लाइव स्क्रीनिंग को मंजूरी दे दी है। खास बात यह है कि मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार भी इस आयोजन में शामिल होकर फुटबॉल प्रेमियों के साथ मैच का रोमांच साझा करेंगे।

    कर्नाटक राज्य फुटबॉल संघ ने बताया कि युवा सशक्तिकरण एवं खेल विभाग के सहयोग से कोरमंगला स्थित एनजीवी इनडोर स्टेडियम में सोमवार तड़के 12:30 बजे से लाइव स्क्रीनिंग का आयोजन किया जाएगा। इसमें बड़ी संख्या में फुटबॉल प्रशंसक, खिलाड़ी, खेल अधिकारी, गणमान्य नागरिक और आम लोग मौजूद रहेंगे।

    मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने कहा कि युवाओं और फुटबॉल प्रेमियों की लगातार मांग को देखते हुए सरकार ने सार्वजनिक स्क्रीनिंग की अनुमति दी है। उन्होंने लोगों से अपील की कि मैच का आनंद पूरी शालीनता और जिम्मेदारी के साथ लें। किसी भी स्थिति में कानून-व्यवस्था प्रभावित नहीं होनी चाहिए।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि पूरे शहर में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। प्रमुख स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं और पुलिस पूरी तरह सतर्क रहेगी। उन्होंने कहा कि जीत और हार खेल का हिस्सा है, इसलिए किसी भी परिणाम के बाद संयम बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है।

    सरकार की ओर से बेंगलुरु पुलिस ने भी विशेष व्यवस्था की है। विश्व कप फाइनल को देखते हुए शहर के कई रेस्टोरेंट और फूड आउटलेट्स को देर रात 3:30 बजे तक भोजन सेवा जारी रखने की अनुमति दी गई है, ताकि मैच देखने पहुंचे लोगों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

    इस बार का विश्व कप फाइनल बेहद रोमांचक माना जा रहा है। गत चैंपियन अर्जेंटीना लगातार दूसरी बार फाइनल खेल रही है और अपने चौथे विश्व कप खिताब की तलाश में है। वहीं 2010 की विश्व चैंपियन स्पेन 16 साल बाद फाइनल में पहुंची है और दूसरी बार ट्रॉफी जीतने के इरादे से मैदान में उतरेगी। दुनिया भर के फुटबॉल प्रेमियों की नजर एक बार फिर अर्जेंटीना के कप्तान लियोनेल मेसी और स्पेन की युवा टीम के प्रदर्शन पर टिकी रहेगी।

    कर्नाटक सरकार की पहल से यह साफ है कि राज्य में फुटबॉल की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है। सार्वजनिक स्क्रीनिंग के जरिए हजारों प्रशंसक एक साथ विश्व फुटबॉल के सबसे बड़े मुकाबले का रोमांच महसूस कर सकेंगे।

  • फीफा वर्ल्ड कप 2026 में फ्रांस सबसे मजबूत दावेदार ओलिवर कान बोले संतुलित टीम ही बनाएगी चैंपियन

    फीफा वर्ल्ड कप 2026 में फ्रांस सबसे मजबूत दावेदार ओलिवर कान बोले संतुलित टीम ही बनाएगी चैंपियन


    नई दिल्ली । फीफा वर्ल्ड कप 2026 अपने निर्णायक दौर में पहुंच चुका है और सेमीफाइनल मुकाबलों से पहले फुटबॉल जगत की निगाहें चारों दावेदार टीमों पर टिकी हुई हैं। इसी बीच जर्मनी के महान गोलकीपर ओलिवर कान ने टूर्नामेंट को लेकर बड़ी भविष्यवाणी करते हुए फ्रांस को विश्व चैंपियन बनने का सबसे प्रबल दावेदार बताया है। कान का मानना है कि फ्रांस के पास संतुलित टीम गहराई से भरा स्क्वॉड और हर परिस्थिति में मुकाबला जीतने की क्षमता है जो उसे बाकी टीमों से थोड़ा आगे खड़ा करती है।

    फ्रांस का मुकाबला 15 जुलाई को डलास स्टेडियम में स्पेन से होने वाले पहले सेमीफाइनल में होगा। यह मुकाबला टूर्नामेंट के सबसे बड़े और रोमांचक मुकाबलों में गिना जा रहा है। विश्व कप के नॉकआउट चरण में दोनों टीमें दूसरी बार आमने सामने होंगी। इससे पहले वर्ष 2006 के राउंड ऑफ 16 में फ्रांस ने स्पेन को 3 1 से हराकर बाहर का रास्ता दिखाया था। अब एक बार फिर दोनों यूरोपीय दिग्गज विश्व कप के फाइनल का टिकट हासिल करने के लिए आमने सामने होंगे।

    ओलिवर कान ने कहा कि यदि अब तक के प्रदर्शन के आधार पर किसी एक टीम को चुनना हो तो उनकी पहली पसंद फ्रांस होगी। उनके अनुसार फ्रांस की सबसे बड़ी ताकत उसका संतुलन है। टीम के पास मजबूत डिफेंस रचनात्मक मिडफील्ड और तेज आक्रमण करने वाले खिलाड़ी मौजूद हैं। इसके साथ ही बेंच स्ट्रेंथ भी बेहद मजबूत है जिससे किसी भी समय मैच का रुख बदला जा सकता है। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि सेमीफाइनल में पहुंची चारों टीमें खिताब जीतने की पूरी क्षमता रखती हैं और उनके बीच बहुत कम अंतर है।

    कान के अनुसार स्पेन और फ्रांस के बीच होने वाला मुकाबला रणनीति और धैर्य की सबसे बड़ी परीक्षा होगा। स्पेन अपनी तेज पासिंग और गेंद पर नियंत्रण रखने वाली शैली के लिए जाना जाता है जबकि फ्रांस की सबसे बड़ी ताकत उसका तेज पलटवार है। ऐसे में जो टीम मिडफील्ड पर नियंत्रण बनाए रखेगी और विपक्षी टीम की रणनीति को सफल नहीं होने देगी वही फाइनल का टिकट हासिल कर सकती है।

    उन्होंने कहा कि स्पेन के लिए फ्रांस की मजबूत रक्षापंक्ति को तोड़ना आसान नहीं होगा। स्पेन को लगातार धैर्य के साथ आक्रमण करना होगा तेज पासिंग करनी होगी और मैदान के अहम हिस्सों में अतिरिक्त खिलाड़ियों की मौजूदगी बनाए रखनी होगी। साथ ही उसे अपने डिफेंस को भी मजबूत रखना होगा क्योंकि फ्रांस दुनिया की सबसे खतरनाक काउंटर अटैक करने वाली टीमों में शामिल है और छोटी सी गलती भी मैच का परिणाम बदल सकती है।

    कान ने यह भी कहा कि बड़े मुकाबलों का फैसला अक्सर छोटे छोटे पलों से होता है। केवल लगातार दबाव बनाना ही काफी नहीं होता बल्कि सही समय पर समझदारी से प्रेसिंग करना और मिडफील्ड में नियंत्रण बनाए रखना सबसे महत्वपूर्ण होता है। जो टीम विपक्षी को खुलकर खेलने का मौका नहीं देगी उसके जीतने की संभावना अधिक होगी।

    अपने लंबे गोलकीपिंग अनुभव को साझा करते हुए ओलिवर कान ने आधुनिक फुटबॉल में गोलकीपर की बदलती भूमिका पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आज का गोलकीपर केवल गोल बचाने वाला खिलाड़ी नहीं रह गया है बल्कि वह टीम के आक्रमण की शुरुआत करने वाला पहला खिलाड़ी और अंतिम रक्षक दोनों की भूमिका निभाता है। गोलकीपर का एक सही फैसला मैच जितवा सकता है जबकि एक छोटी सी गलती पूरी टीम की मेहनत पर पानी फेर सकती है।

    उन्होंने कहा कि विश्व कप जैसे बड़े टूर्नामेंट में वही टीमें सफल होती हैं जो दबाव के बीच भी शांत रहती हैं अपने गेम प्लान पर कायम रहती हैं और भावनाओं के बजाय सही समय पर सही फैसले लेती हैं। यही विशेषताएं फ्रांस की टीम में साफ दिखाई देती हैं और यही वजह है कि वह इस बार विश्व कप ट्रॉफी जीतने की सबसे मजबूत दावेदार नजर आती है।

  • स्पेन ने 16 साल बाद रचा इतिहास, बेल्जियम को 2-1 से हराकर फीफा वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में एंट्री

    स्पेन ने 16 साल बाद रचा इतिहास, बेल्जियम को 2-1 से हराकर फीफा वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में एंट्री


    नई दिल्ली। फीफा वर्ल्ड कप 2026 के क्वार्टर फाइनल में स्पेन ने शानदार प्रदर्शन करते हुए बेल्जियम को 2-1 से हराकर 16 साल बाद विश्व कप के सेमीफाइनल में जगह बना ली। रोमांच से भरपूर इस मुकाबले का फैसला अंतिम मिनटों में हुआ, जब सब्स्टीट्यूट खिलाड़ी मिकेल मेरिनो ने निर्णायक गोल कर स्पेन को ऐतिहासिक जीत दिलाई। अब सेमीफाइनल में स्पेन की भिड़ंत पिछले विश्व कप की फाइनलिस्ट फ्रांस से होगी।

    लॉस एंजिल्स में खेले गए मुकाबले की शुरुआत से ही स्पेन ने आक्रामक रवैया अपनाया और बेल्जियम के डिफेंस पर लगातार दबाव बनाए रखा। गेंद पर बेहतर नियंत्रण और तेज पासिंग के दम पर स्पेन ने कई मौके बनाए। आखिरकार 30वें मिनट में उसकी मेहनत रंग लाई। लैमिन यामल के शानदार मूव के बाद पेड्रो पोरो ने बॉक्स में सटीक लो क्रॉस दिया। गोलकीपर थिबॉट कोर्टुआ ने डैनी ओल्मो का पहला प्रयास रोक लिया, लेकिन रिबाउंड पर फैबियन रुइज ने गेंद को गोल में पहुंचाकर स्पेन को 1-0 की बढ़त दिला दी।

    हालांकि बेल्जियम ने भी शानदार वापसी की। 41वें मिनट में टिमोथी कास्टेग्ने के बेहतरीन क्रॉस पर चार्ल्स डी केटेलेयर ने दमदार हेडर लगाकर स्कोर 1-1 से बराबर कर दिया। इस गोल के साथ स्पेन के गोलकीपर उनाई साइमन की लगातार छह क्लीन शीट का सिलसिला भी समाप्त हो गया। साथ ही विश्व कप में बिना गोल खाए उनके लगातार 650 मिनट खेलने का रिकॉर्ड भी टूट गया।

    दूसरे हाफ में दोनों टीमों ने कई हमले किए, लेकिन गोल नहीं हो सका। मैच के 71वें मिनट में बेल्जियम को बड़ा झटका तब लगा, जब अनुभवी गोलकीपर थिबॉट कोर्टुआ चोट के कारण मैदान छोड़ने को मजबूर हो गए। उनकी जगह युवा गोलकीपर सेने लैमेंस को उतारा गया। कोर्टुआ का यह विश्व कप में 21वां मुकाबला था और वह टूर्नामेंट के इतिहास में सबसे ज्यादा मैच खेलने वाले गोलकीपरों की सूची में दूसरे स्थान पर पहुंच गए।

    जब मुकाबला अतिरिक्त समय की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा था, तभी स्पेन के कोच ने 86वें मिनट में मिकेल मेरिनो को मैदान पर उतारा। महज दो मिनट बाद ही मेरिनो ने अपनी मौजूदगी का असर दिखा दिया। पाउ क्यूबार्सी के दूर से लगाए गए शॉट को बेल्जियम के नए गोलकीपर ठीक से नियंत्रित नहीं कर सके। गेंद उनके हाथों से छिटक गई और मेरिनो ने मौके का पूरा फायदा उठाते हुए गेंद को गोल में पहुंचा दिया। यही गोल स्पेन की जीत का कारण बना।

    यह लगातार दूसरा मुकाबला रहा, जिसमें मिकेल मेरिनो ने सब्स्टीट्यूट के तौर पर उतरकर स्पेन के लिए निर्णायक गोल किया। इससे पहले उन्होंने प्री-क्वार्टर फाइनल में पुर्तगाल के खिलाफ भी अंतिम समय में विजयी गोल दागकर टीम को जीत दिलाई थी।

    इस जीत के साथ स्पेन ने 2010 के बाद पहली बार फीफा वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में जगह बनाई है। टीम का आत्मविश्वास सातवें आसमान पर है और अब उसकी नजर फ्रांस को हराकर फाइनल का टिकट हासिल करने पर होगी।