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  • मुख्यमंत्री विजय के बर्थडे सेलिब्रेशन की तस्वीर आई सामने, तृषा कृष्णन के भावुक संदेश ने अफवाहों के बाजार को किया शांत

    मुख्यमंत्री विजय के बर्थडे सेलिब्रेशन की तस्वीर आई सामने, तृषा कृष्णन के भावुक संदेश ने अफवाहों के बाजार को किया शांत

    नई दिल्ली । तमिल फिल्म उद्योग और राजनीति से जुड़े चर्चित चेहरों में शामिल विजय और अभिनेत्री तृषा कृष्णन एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इस बार चर्चा की वजह कोई नई फिल्म या राजनीतिक गतिविधि नहीं, बल्कि एक सोशल मीडिया पोस्ट है जिसने बीते कुछ दिनों से चल रही तमाम अटकलों को नया मोड़ दे दिया है। मुख्यमंत्री विजय के जन्मदिन के अवसर पर तृषा कृष्णन द्वारा साझा की गई एक तस्वीर और भावनात्मक संदेश ने सोशल मीडिया पर व्यापक चर्चा छेड़ दी है।

    दरअसल, विजय के जन्मदिन पर तृषा की ओर से शुरुआती घंटों में कोई सार्वजनिक शुभकामना संदेश सामने नहीं आया था। इसके बाद सोशल मीडिया पर कई तरह के कयास लगाए जाने लगे। कुछ लोगों ने दोनों के रिश्तों में दूरी आने की संभावना जताई, जबकि कई यूजर्स ने यह अनुमान लगाया कि शायद दोनों के बीच पहले जैसी नजदीकियां नहीं रहीं। इन चर्चाओं के बीच तृषा की ओर से साझा किया गया पोस्ट चर्चा का केंद्र बन गया।

    तस्वीर में विजय और तृषा एक साथ नजर आ रहे हैं। फोटो में विजय के सामने जन्मदिन के कई केक रखे हुए दिखाई देते हैं, जबकि तृषा उनकी ओर देखती हुई नजर आती हैं। तस्वीर का सहज और निजी अंदाज लोगों का ध्यान आकर्षित कर रहा है। इसके साथ साझा किए गए संदेश में तृषा ने विजय को जन्मदिन की शुभकामनाएं देते हुए उन्हें ऐसा व्यक्ति बताया जिसकी वजह से कई चीजें खास महसूस होती हैं। इस भावनात्मक संदेश को सोशल मीडिया पर तेजी से साझा किया गया और इसे दोनों के बीच अच्छे संबंधों का संकेत माना जाने लगा।

    पोस्ट सामने आने के बाद प्रशंसकों की प्रतिक्रियाएं भी बड़ी संख्या में देखने को मिलीं। कई लोगों ने कहा कि वे इसी पोस्ट का इंतजार कर रहे थे, जबकि कुछ ने इसे उन तमाम अफवाहों का जवाब बताया जो पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर चल रही थीं। प्रशंसकों का मानना है कि तस्वीर और संदेश ने रिश्तों को लेकर उठ रहे सवालों को काफी हद तक शांत कर दिया है।

    विजय और तृषा को लेकर लंबे समय से चर्चाएं होती रही हैं। दोनों ने कई सफल फिल्मों में साथ काम किया है और उनकी ऑनस्क्रीन केमिस्ट्री को दर्शकों ने हमेशा पसंद किया है। समय-समय पर दोनों की तस्वीरें और सार्वजनिक कार्यक्रमों में मौजूदगी भी सुर्खियां बटोरती रही है। हालांकि दोनों ने निजी संबंधों को लेकर कभी खुलकर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है।

    इधर, विजय के निजी जीवन को लेकर भी पिछले कुछ समय से चर्चाओं का दौर जारी है। उनकी पारिवारिक स्थिति और निजी रिश्तों को लेकर विभिन्न तरह की खबरें सामने आती रही हैं। हालांकि इनमें से अधिकांश बातों पर संबंधित पक्षों की ओर से कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। ऐसे में सोशल मीडिया पर सामने आने वाली तस्वीरें और पोस्ट ही लोगों के बीच चर्चा का प्रमुख आधार बन जाती हैं।

    राजनीति और मनोरंजन जगत के संगम का प्रतीक बन चुके विजय के सार्वजनिक जीवन पर लोगों की लगातार नजर रहती है। वहीं तृषा कृष्णन भी दक्षिण भारतीय सिनेमा की सबसे लोकप्रिय अभिनेत्रियों में गिनी जाती हैं। ऐसे में दोनों से जुड़ी छोटी से छोटी गतिविधि भी सुर्खियां बन जाती है। विजय के जन्मदिन पर साझा की गई यह तस्वीर भी इसी वजह से चर्चा का विषय बनी हुई है और प्रशंसकों के बीच लगातार वायरल हो रही है।

  • TMC के 20वें सांसद के भी बगावत के चर्चे…. बागी गुट ने पार्टी सिंबल पर ठोका अपना दावा

    TMC के 20वें सांसद के भी बगावत के चर्चे…. बागी गुट ने पार्टी सिंबल पर ठोका अपना दावा


    कोलकाता।
    पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों (West Bengal Assembly elections) में तृणमूल कांग्रेस (Trinamool Congress- TMC) की करारी शिकस्त के बाद पार्टी के भीतर मची बगावत अब दिल्ली दरबार तक पहुंच गई है। टीएमसी के बागी गुट ने लोकसभा स्पीकर को एक पत्र भेजकर संसद में खुद को असली टीएमसी के रूप में मान्यता देने और पार्टी सिंबल पर अपना दावा ठोका है। इस चिट्ठी के सामने के बाद 20वें सांसद के बगावत की भी चर्चा तेज हो गई है।

    सूत्रों के मुताबिक, यह पत्र 18 मई का है जिस पर टीएमसी के 19 लोकसभा सांसदों के हस्ताक्षर हैं। दिलचस्प बात यह है कि पत्र में हस्ताक्षर करने वालों के सीरियल नंबर 1 से 20 तक हैं, लेकिन 13वें नंबर के आगे किसी का हस्ताक्षर नहीं है। इससे यह राजनीतिक कयास लगाए जा रहे हैं कि टीएमसी का कोई अन्य कद्दावर सांसद भी इस बागी गुट के संपर्क में है और सही समय पर सामने आ सकता है।

    बागी गुट की वरिष्ठ नेता और सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा, “हां, मैंने पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं और हमने इसे काफी समय पहले ही स्पीकर को भेज दिया था।” वहीं, सांसद जगदीश चंद्र बर्मा बसुनिया ने कहा कि इस पत्र से यह साफ हो जाता है कि लोकसभा में असली टीएमसी हम ही हैं।


    इन 19 सांसदों के हस्ताक्षर

    शुक्रवार को सामने आई चिट्ठी में जिन सांसदों के हस्ताक्षर हैं उनमें काकोली घोष दस्तीदार, शताब्दी रॉय, बापी हालदार, शर्मिला सरकार, प्रसून बंदोपाध्याय, जगदीश बर्मा बसुनिया, असित कुमार माल, अरूप चक्रवर्ती, रचना बनर्जी, सयानी घोष, खलीलुर रहमान, अबू ताहेर खान, यूसुफ पठान, मिताली बाग, माला रॉय, कालीपद सोरेन, दीपक अधिकारी (देव), जून मालिया और पार्थ भौमिक जैसे नाम शामिल हैं।


    बागी गुट के सामने क्या विकल्प

    लोकसभा में टीएमसी के कुल 28 सांसद हैं। इनमें ममता बनर्जी के भतीजे और डायमंड हार्बर से सांसद अभिषेक बनर्जी भी शामिल हैं, जो इस समय बागियों के मुख्य निशाने पर हैं। दलबदल विरोधी कानून से बचने के लिए बागी गुट के पास दो मुख्य रास्ते हैं। बागी गुट खुद को मूल पार्टी बताकर चुनाव आयोग (EC) के पास जा सकता है। इसके लिए उन्हें विधायी बहुमत साबित करना होगा। दलबदल कानून के तहत अयोग्य घोषित होने से बचने के लिए कम से कम दो-तिहाई सांसदों का साथ होना जरूरी है। 28 सांसदों का दो-तिहाई यानी 19 होता है। यही वजह है कि बागी गुट 19 सांसदों के साथ सुरक्षित होने का दावा कर रहा है।

    हाल ही में अप्रैल में आम आदमी पार्टी (AAP) के 10 राज्यसभा सांसदों ने इसी तरह दो-तिहाई बहुमत के साथ भाजपा में अपना विलय कर लिया था। यदि टीएमसी के ये 19 सांसद भी भाजपा या एनडीए में सीधे विलय करते हैं, तो उनकी सदस्यता बची रहेगी।

    टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने इस पर पलटवार करते हुए एक्स लिखा, “गद्दार टीएमसी सांसदों को कानून नहीं पता। 2003 के 91वें संविधान संशोधन ने पार्टी में विभाजन या अलग ब्लॉक के प्रावधान को खत्म कर दिया है। सांसदों की संख्या मायने नहीं रखती, मूल राजनीतिक दल के 2/3 हिस्से का किसी अन्य दल में विलय होना जरूरी है। इन सभी 19 गद्दारों को इस्तीफा देकर भाजपा के टिकट पर दोबारा चुनाव लड़ना चाहिए।”

    भाजपा इस पूरे घटनाक्रम पर पैनी नजर रखे हुए है, लेकिन वह फूंक-फूंक कर कदम बढ़ा रही है। राज्यसभा के नवनिर्वाचित सदस्य और भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ ने इसे टीएमसी का आंतरिक विस्फोट और उनके पापों का नतीजा बताया है। सूत्रों के अनुसार, बागी गुट की नेता काकोली घोष दस्तीदार ने इस हफ्ते दिल्ली में केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव से उनके आवास पर मुलाकात की थी। भाजपा के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने कहा, “हमने टीएमसी को नहीं तोड़ा, वे खुद एनडीए और राष्ट्रवादी विचारधारा का समर्थन करने के लिए हमारे पास आए हैं। अब यह उन्हें तय करना है कि वे एकनाथ शिंदे या अजीत पवार का रास्ता चुनते हैं या नहीं।”

    हालांकि, इस कूटनीतिक बढ़त के बीच बंगाल भाजपा के जमीनी कार्यकर्ताओं और स्थानीय नेताओं में थोड़ा असंतोष भी है। भाजपा का एक धड़ा इन टीएमसी बागियों को पार्टी में शामिल करने और भविष्य में एनडीए सरकार में कैबिनेट मंत्री पद दिए जाने की संभावना का खुलकर विरोध कर रहा है।


    केंद्र सरकार को क्या होगा फायदा?

    भले ही स्थानीय स्तर पर मतभेद हों, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर एनडीए के लिए यह बहुत बड़ी राहत होगी। लोकसभा में इन 19 सांसदों का समर्थन मिलने से मोदी सरकार को परिसीमन विधेयक और ‘एक देश, एक चुनाव’ जैसे बड़े और कड़े नीतिगत कानूनों को आसानी से पारित कराने में भारी मदद मिलेगी। वहीं राज्यसभा में भी टीएमसी के 3 सांसदों सुखेन्दु शेखर, सुष्मिता देव और प्रकाश बड़ाईक के इस्तीफे के बाद खाली हुई सीटों को भाजपा विधानसभा में बहुमत के दम पर आसानी से जीत लेगी।

  • जेन-Z पार्टी की अटकलें: AAP के राघव चड्ढा के इंस्टा पोस्ट से बढ़ी चर्चाएं

    जेन-Z पार्टी की अटकलें: AAP के राघव चड्ढा के इंस्टा पोस्ट से बढ़ी चर्चाएं

    नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी (AAP) में कथित मतभेदों के बीच राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा को लेकर नई राजनीतिक संभावनाओं की चर्चा तेज हो गई है। खासकर उनके इंस्टाग्राम पर साझा किए गए एक वीडियो और उस पर की गई टिप्पणी ने यह अटकलें पैदा कर दी हैं कि वह युवाओं, खासकर जेन-Z को केंद्र में रखकर नई पार्टी बनाने पर विचार कर सकते हैं।

    दरअसल, राज्यसभा में AAP के उपनेता पद से हटाए जाने के बाद चड्ढा ने तीन वीडियो जारी किए हैं। इन वीडियो में उन्होंने संकेत दिया कि वह इस बदलाव को सहज रूप से स्वीकार करने वाले नहीं हैं और सार्वजनिक मुद्दों को उठाते रहेंगे। इसी बीच इंस्टाग्राम पर साझा की गई एक रील ने राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है।

    इंस्टाग्राम रील से शुरू हुई चर्चा
    चड्ढा ने “Seedhathok” नाम के एक क्रिएटर की रील शेयर की, जिसमें समर्थक ने सुझाव दिया कि उन्हें युवाओं के लिए “Gen-Z” आधारित नई राजनीतिक पार्टी बनानी चाहिए। इस रील पर चड्ढा ने “दिलचस्प विचार” लिखकर प्रतिक्रिया दी। बस इसी टिप्पणी के बाद नई पार्टी को लेकर अटकलें तेज हो गईं।

    समर्थक ने क्या कहा?
    रील में क्रिएटर रिहान ने कहा कि कई युवा चाहते हैं कि चड्ढा मौजूदा मतभेदों के बावजूद अपनी पार्टी बनाएं। उनका मानना है कि किसी दूसरी पार्टी में जाने की बजाय नई पार्टी बनाना उनके लिए बेहतर विकल्प हो सकता है, क्योंकि युवा वर्ग उन्हें व्यापक समर्थन दे सकता है।

    पद से हटाए जाने के बाद बढ़ी हलचल
    पिछले सप्ताह AAP ने चड्ढा को राज्यसभा में उपनेता पद से हटाकर उनकी जगह सांसद अशोक कुमार मित्तल को नियुक्त किया। यह फैसला कथित तौर पर चड्ढा और पार्टी संयोजक अरविंद केजरीवाल के बीच मतभेदों की खबरों के बीच लिया गया।

    ‘पिक्चर अभी बाकी है’ वाला संदेश
    AAP द्वारा लगाए गए आरोपों के जवाब में चड्ढा ने एक वीडियो साझा किया, जिसमें उन्होंने पंजाब से जुड़े मुद्दों—भूजल संकट, भगत सिंह से जुड़े संदर्भ और अन्य क्षेत्रीय विषय—उठाए। वीडियो को उन्होंने “छोटा सा ट्रेलर” बताते हुए कहा, “पिक्चर अभी बाकी है।”

    उन्होंने यह भी कहा कि पंजाब उनके लिए केवल राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि उनका घर और कर्तव्य है।

    फिलहाल, चड्ढा ने नई पार्टी बनाने की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है, लेकिन सोशल मीडिया संकेतों और हालिया घटनाक्रमों ने राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं को जरूर हवा दे दी है।

  • राघव चड्ढा ने सोशल मीडिया पर शेयर की खास रील, अब राजनीतिक भविष्य को लेकर लग रही ये नई अटकलें

    राघव चड्ढा ने सोशल मीडिया पर शेयर की खास रील, अब राजनीतिक भविष्य को लेकर लग रही ये नई अटकलें


    नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा और पार्टी के बीच चल रहे विवाद के बीच अब सबकी निगाहें उनके अगले कदम पर लगी हैं। हाल ही में चड्ढा ने सोशल मीडिया पर शेयर की गई एक रील ने उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर नई अटकलों को जन्म दिया है।

    सोशल मीडिया पर की रील शेयर


    चड्ढा ने अपने इंस्टाग्राम स्टोरी पर एक रील शेयर की जिसे seedhathok नाम के यूजर रिहान ने बनाया था। रील में सुझाव दिया गया कि चड्ढा को अपनी खुद की पार्टी बनानी चाहिए जिससे उन्हें व्यापक जनसमर्थन मिल सकता है। वीडियो में सीधे चड्ढा को संबोधित करते हुए कहा गया कि जेन-जी पार्टी या कोई अन्य उपयुक्त नाम से नई पार्टी शुरू करना युवाओं का समर्थन पाने का सही तरीका होगा।

    दूसरी पार्टी में शामिल होने का खतरा

    वीडियो में यह भी कहा गया कि अगर चड्ढा किसी अन्य पार्टी में शामिल होते हैं तो उन्हें वर्तमान समर्थन नहीं मिलेगा और जनता की नाराजगी का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि चड्ढा ने रील शेयर की लेकिन अभी तक उन्होंने आधिकारिक तौर पर कोई घोषणा नहीं की कि वे क्या कदम उठाएंगे।

    AAP ने उठाए कठोर कदम
    करीब एक हफ्ते पहले AAP ने चड्ढा को राज्यसभा में पार्टी के उपनेता पद से हटा दिया और उनकी जगह अशोक कुमार मित्तल को नियुक्त किया। इसके साथ ही उन्हें संसद में पार्टी के कोटे से बोलने की अनुमति भी नहीं मिली।

    पार्टी के आरोपों की लंबी सूची

    AAP ने चड्ढा पर कई आरोप लगाए हैं:- बीजेपी के प्रति नरम रुख: पार्टी का कहना है कि चड्ढा ने संसद में पार्टी का समय हवाई अड्डों पर समोसे की कीमत जैसे मामूली मुद्दों के लिए इस्तेमाल किया।
    मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग: चड्ढा ने महाभियोग प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करने से इनकार किया।
    अतिशी के सवाल: AAP नेता अतिशी ने चड्ढा से पूछा कि वे पीएम नरेंद्र मोदी या लोकतंत्र पर हो रहे सवालों पर बोलने में क्यों डरते हैं।
    केजरीवाल की गिरफ्तारी पर गैरमौजूदगी: ED द्वारा अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी के दौरान चड्ढा की अनुपस्थिति पर भी सवाल उठाए गए।

    चड्ढा का जवाब और किताब के जरिए संदेश

    चड्ढा ने इन आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि पार्टी उन्हें चुप कर रही है। उन्होंने बताया कि संसद में जब भी उन्हें बोलने का मौका मिलता है वे जनता के मुद्दों को उठाते हैं। साथ ही सोमवार को उन्होंने अमेरिकी लेखक रॉबर्ट ग्रीन की किताब The 48 Laws of Power पढ़ते हुए अपनी एक तस्वीर साझा की। उन्होंने लिखा किसी ने मुझे इस हफ्ते एक किताब गिफ्ट की मैंने चैप्टर 1 पलटा नेवर आउटशाइन द मास्टर’। कुछ किताबें उसी समय पर आती हैं जब उन्हें आना होता है।

  • टेक्सास की वालेरो रिफाइनरी में जोरदार धमाका, आग से मचा हड़कंप; ईरान कनेक्शन की अटकलों पर सस्पेंस

    टेक्सास की वालेरो रिफाइनरी में जोरदार धमाका, आग से मचा हड़कंप; ईरान कनेक्शन की अटकलों पर सस्पेंस

    वाशिंगटन। अमेरिका की टेक्सास स्थित वालेरो रिफाइनरी (Valero Energy) में जोरदार धमाके से हड़कंप मच गया। टेक्सास में स्थित इस रिफाइनरी में हुआ विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि आसपास की जमीन तक हिल गई और कई घरों की खिड़कियां टूटने की खबर है। घटना का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें धमाके के बाद रिफाइनरी से घना काला धुआं उठता दिखाई दे रहा है।

    जानकारी के मुताबिक यह विस्फोट 23 मार्च को स्थानीय समयानुसार शाम 7 बजकर 22 मिनट पर हुआ। धमाके के बाद परिसर में आग लग गई, जिसे बुझाने के लिए दमकल की टीमें मौके पर जुटी हुई हैं। Port Arthur फायर डिपार्टमेंट के एक अधिकारी ने बताया कि विस्फोट के कारणों की जांच की जा रही है और स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास जारी है।

    स्थानीय लोगों का कहना है कि धमाका इतना तेज था कि उनके घर हिल गए। विस्फोट के बाद क्षेत्र में काला धुआं फैल गया, जिससे प्रशासन ने एहतियातन आसपास के इलाकों को खाली कराया और लोगों को घरों के अंदर रहने की सलाह दी है। फिलहाल किसी के घायल होने की सूचना नहीं है। अधिकारियों की टीम यह भी जांच कर रही है कि आग के कारण हवा में कोई जहरीला पदार्थ तो नहीं फैला।

    बड़ी रिफाइनरियों में शामिल

    वालेरो की पोर्ट आर्थर रिफाइनरी अमेरिकी गल्फ कोस्ट से करीब 90 मील दूर स्थित है और यहां लगभग 770 कर्मचारी काम करते हैं। रोजाना करीब 4.35 लाख बैरल गैसोलीन, डीजल और जेट ईंधन का उत्पादन यहां किया जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि आग के कारण संचालन प्रभावित हो सकता है, जिससे क्षेत्रीय फ्यूल सप्लाई पर असर पड़ने की संभावना है।

    प्रारंभिक अनुमान के मुताबिक हीटिंग यूनिट में विस्फोट आग की वजह हो सकता है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इस बीच सोशल मीडिया पर यह अटकलें भी लगाई जा रही हैं कि घटना का संबंध Iran से हो सकता है, लेकिन अब तक ऐसा कोई सबूत सामने नहीं आया है। अधिकारियों ने कहा है कि जांच पूरी होने के बाद ही कारण स्पष्ट होगा।