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  • अगस्त में घरेलू हवाई यातायात 6.34 प्रतिशत घटा, इंडिगो और स्पाइसजेट की हिस्सेदारी में आई कमी

    अगस्त में घरेलू हवाई यातायात 6.34 प्रतिशत घटा, इंडिगो और स्पाइसजेट की हिस्सेदारी में आई कमी

    नई दिल्ली ।भारत में घरेलू हवाई यात्री यातायात में अगस्त के दौरान सालाना आधार पर गिरावट दर्ज की गई। इस महीने घरेलू एयरलाइनों से यात्रा करने वाले यात्रियों की संख्या 6.34 प्रतिशत घटकर करीब 1.21 करोड़ रह गई। विमानन क्षेत्र से जुड़े आंकड़ों के अनुसार, इस दौरान प्रमुख एयरलाइनों की बाजार हिस्सेदारी में भी बदलाव देखने को मिला।

    अगस्त में इंडिगो घरेलू विमानन बाजार में सबसे बड़ी एयरलाइन बनी रही, हालांकि उसकी बाजार हिस्सेदारी जुलाई के मुकाबले कम हुई। जुलाई में इंडिगो की हिस्सेदारी 67.4 प्रतिशत थी, जो अगस्त में घटकर 65 प्रतिशत रह गई। इसके बावजूद कंपनी घरेलू हवाई यातायात में सबसे आगे रही।

    अगस्त के दौरान इंडिगो से 78.87 लाख यात्रियों ने हवाई सफर किया। घरेलू बाजार में उसकी हिस्सेदारी घटने के बावजूद यात्रियों की संख्या के लिहाज से वह अन्य प्रमुख एयरलाइनों से आगे रही।

    एयर इंडिया समूह की बाजार हिस्सेदारी में इस दौरान बढ़ोतरी दर्ज की गई। जुलाई में समूह की हिस्सेदारी 24 प्रतिशत थी, जो अगस्त में बढ़कर 26.7 प्रतिशत हो गई। अगस्त में एयर इंडिया समूह के विमानों से 32.32 लाख यात्रियों ने यात्रा की।

    अकासा एयर की बाजार हिस्सेदारी अगस्त में 5.5 प्रतिशत पर स्थिर रही। एयरलाइन ने इस महीने 6.68 लाख यात्रियों को यात्रा कराई। इस तरह बाजार हिस्सेदारी के मामले में अकासा एयर ने तीसरा स्थान बरकरार रखा।

    स्पाइसजेट के प्रदर्शन में अगस्त के दौरान गिरावट देखने को मिली। जुलाई में उसकी बाजार हिस्सेदारी 1.6 प्रतिशत थी, जो अगस्त में घटकर 1.2 प्रतिशत रह गई। एयरलाइन ने इस महीने करीब 1.40 लाख यात्रियों को यात्रा कराई।

    स्पाइसजेट को अगस्त में कई परिचालन संबंधी चुनौतियों का सामना करना पड़ा। इन परिस्थितियों का असर उसकी उड़ानों पर भी पड़ा और कई उड़ानों में देरी दर्ज की गई। बाजार हिस्सेदारी में कमी के बीच एयरलाइन के परिचालन प्रदर्शन पर भी निगरानी बनी रही।

    उड़ानों के समय पर संचालन के मामले में अगस्त के दौरान इंडिगो का प्रदर्शन प्रमुख एयरलाइनों में सबसे बेहतर रहा। एयरलाइन का ऑन-टाइम परफॉरमेंस 91 प्रतिशत दर्ज किया गया। इसके बाद अकासा एयर का प्रदर्शन 90.5 प्रतिशत रहा।

    एयर इंडिया समूह का ऑन-टाइम परफॉरमेंस अगस्त में 83.9 प्रतिशत रहा। वहीं, अलायंस एयर का प्रदर्शन 71.8 प्रतिशत दर्ज किया गया। इन आंकड़ों से अलग-अलग एयरलाइनों के समय पर उड़ान संचालन में अंतर का पता चलता है।

    स्पाइसजेट से जुड़ी परिचालन और वित्तीय स्थिति को लेकर भी निगरानी जारी है। केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने कहा कि विमानन नियामक डीजीसीए एयरलाइन की मौजूदा चुनौतियों के बीच उसके वित्तीय और परिचालन प्रदर्शन पर करीबी नजर रख रहा है।

    मंत्री के अनुसार, डीजीसीए को एयरलाइन की परिचालन और वित्तीय स्थिति की समीक्षा करने की जिम्मेदारी दी गई है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि एयरलाइन की मौजूदा परिस्थितियों के बीच विमानन सुरक्षा से किसी तरह का समझौता न हो।

    अगस्त के आंकड़ों में जहां घरेलू हवाई यातायात में सालाना गिरावट सामने आई, वहीं एयरलाइनों की बाजार हिस्सेदारी में अलग-अलग बदलाव दर्ज हुए। इंडिगो अभी भी बाजार में सबसे आगे रही, जबकि एयर इंडिया समूह की हिस्सेदारी बढ़ी और स्पाइसजेट की हिस्सेदारी में कमी आई।

  • स्पाइसजेट को कोर्ट से बड़ा झटका, रियल एस्टेट निवेश में रिकॉर्ड 37% उछाल

    स्पाइसजेट को कोर्ट से बड़ा झटका, रियल एस्टेट निवेश में रिकॉर्ड 37% उछाल

    नई दिल्ली। देश के बिजनेस सेक्टर में एक ही दिन दो अलग-अलग तरह की खबरें सामने आई हैं, जिनमें एक तरफ विमानन क्षेत्र की कंपनी को कानूनी झटका लगा है, तो दूसरी तरफ रियल एस्टेट बाजार में निवेश में तेज वृद्धि दर्ज की गई है। यह दोनों घटनाएं भारतीय अर्थव्यवस्था के दो अलग-अलग रुझानों को दर्शाती हैं।

    विमानन क्षेत्र की प्रमुख कंपनी स्पाइसजेट और उसके प्रमोटर को अदालत से बड़ा झटका लगा है। कंपनी की ओर से दायर की गई एक पुनर्विचार याचिका को खारिज कर दिया गया है। इसके साथ ही अदालत ने कंपनी और उसके प्रमोटर पर जुर्माना भी लगाया है। इससे पहले दिए गए आदेश में कंपनी को एक बड़ी राशि जमा करने के निर्देश दिए गए थे, जिसे लेकर पुनर्विचार की मांग की गई थी, लेकिन अदालत ने इसे स्वीकार नहीं किया।

    कंपनी की ओर से यह दलील दी गई थी कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और आर्थिक दबावों के कारण उनकी वित्तीय स्थिति प्रभावित हुई है। साथ ही कुछ संपत्तियों को सुरक्षा के रूप में देने का प्रस्ताव भी रखा गया था, लेकिन अदालत ने इन तर्कों को पर्याप्त नहीं माना। इस फैसले के बाद कंपनी पर वित्तीय दबाव और बढ़ गया है।

    दूसरी ओर रियल एस्टेट सेक्टर से जुड़ी रिपोर्ट में सकारात्मक संकेत सामने आए हैं। आंकड़ों के अनुसार 2026 की पहली तिमाही में इस क्षेत्र में निवेश में 37 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है और कुल निवेश 1.7 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। यह बढ़ोतरी दर्शाती है कि निवेशकों का भरोसा इस क्षेत्र में लगातार मजबूत हो रहा है।

    रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि बड़ी संपत्तियों की खरीद-फरोख्त में उल्लेखनीय तेजी देखी गई है। निवेशक अब स्थिर और आय देने वाली संपत्तियों की ओर अधिक आकर्षित हो रहे हैं। खासकर वाणिज्यिक संपत्तियों में निवेश बढ़ने से बाजार में स्थिरता और विकास दोनों का संकेत मिल रहा है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत का रियल एस्टेट बाजार मजबूत स्थिति में बना हुआ है। घरेलू और विदेशी दोनों तरह के निवेशकों की रुचि बढ़ने से इस सेक्टर में आगे भी विस्तार की संभावना है। लगातार बढ़ता निवेश यह दिखाता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था में दीर्घकालिक भरोसा कायम है।

    कुल मिलाकर एक तरफ स्पाइसजेट को कानूनी और वित्तीय चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश की तेज रफ्तार अर्थव्यवस्था के सकारात्मक पक्ष को दर्शा रही है। दोनों घटनाएं मिलकर देश के कारोबारी माहौल की एक संतुलित तस्वीर पेश करती हैं, जिसमें चुनौतियां भी हैं और मजबूत अवसर भी लगातार बन रहे हैं।

  • फ्लाइट कैंसिलेशन से इंडिगो को झटका, नवंबर में घटा मार्केट शेयर; एअर इंडिया और स्पाइसजेट को फायदा

    फ्लाइट कैंसिलेशन से इंडिगो को झटका, नवंबर में घटा मार्केट शेयर; एअर इंडिया और स्पाइसजेट को फायदा


    नई दिल्ली।देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो के लिए नवंबर 2025 चुनौतियों से भरा रहा। लगातार फ्लाइट कैंसिलेशन और देरी के कारण कंपनी का घरेलू मार्केट शेयर घटकर 63.6% पर आ गया जो अक्टूबर में 65.6% था। इस गिरावट के चलते एयरलाइन उद्योग में प्रतिस्पर्धा और बढ़ गई है जबकि एअर इंडिया और स्पाइसजेट जैसी एयरलाइंस ने इस अवसर का लाभ उठाया।

    नागर विमानन महानिदेशालय DGCA द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, इंडिगो की मार्केट हिस्सेदारी में लगभग 2% की गिरावट दर्ज की गई। इस दौरान टाटा समूह की एअर इंडिया का संयुक्त मार्केट शेयर अक्टूबर के 25.7% से बढ़कर नवंबर में 26.7% पहुंच गया। वहीं, आर्थिक संकट से उबरने की कोशिश कर रही स्पाइसजेट की हिस्सेदारी 2.6% से बढ़कर 3.7% हो गई।नवंबर और दिसंबर की शुरुआत में इंडिगो को बड़े पैमाने पर ऑपरेशनल समस्याओं का सामना करना पड़ा। DGCA द्वारा पायलटों की ड्यूटी और आराम से जुड़े नए फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिट FDTL नियम लागू किए गए थे। इंडिगो इन नए नियमों के अनुसार समय पर अपने क्रू रोस्टर और संसाधनों का प्रबंधन नहीं कर सकी। इसका नतीजा यह हुआ कि नवंबर के अंतिम सप्ताह और दिसंबर के पहले हफ्ते में लगभग 5,000 उड़ानें या तो रद्द हुईं या तय समय से देरी से संचालित हुईं।

    लगातार उड़ान बाधित होने से यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा और एयरलाइन की विश्वसनीयता पर असर पड़ा। हालात बिगड़ने के बाद DGCA ने सख्त कदम उठाते हुए इंडिगो को अपने विंटर शेड्यूल में 10% कटौती करने का निर्देश दिया। इसके साथ ही जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट मंत्रालय को सौंप दी है जिसमें एयरलाइन की योजना और प्रबंधन से जुड़ी खामियों का उल्लेख होने की संभावना है।विशेषज्ञों का मानना है कि इंडिगो के पास मजबूत नेटवर्क और बेड़े की क्षमता है, लेकिन नियामकीय बदलावों के अनुरूप तेजी से ढलना अब उसकी प्राथमिक चुनौती होगी। लगातार फ्लाइट कैंसिलेशन और देरी से यात्रियों में असंतोष बढ़ा है। नवंबर में घरेलू उड़ानों में 1.53 करोड़ यात्रियों ने सफर किया जो पिछले साल की तुलना में करीब 7% अधिक था। इसी अवधि में कुल 1,196 शिकायतें दर्ज की गईं, जिनमें आधे से अधिक उड़ान में देरी और कैंसिलेशन से संबंधित थीं, जबकि बैगेज और रिफंड की शिकायतें भी प्रमुख रही।

    इंडिगो के लिए यह समय रणनीतिक दृष्टि से चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि बाजार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच ग्राहकों की संतुष्टि बनाए रखना बेहद महत्वपूर्ण है। दूसरी ओर, एअर इंडिया और स्पाइसजेट जैसी एयरलाइंस के लिए यह अवसर है कि वे अपनी सेवाओं को बेहतर करके मार्केट में स्थायी बढ़त हासिल कर सकें। एअर इंडिया ने पिछले महीनों में अपने बेड़े और मार्ग नेटवर्क का विस्तार किया है, जबकि स्पाइसजेट ने नए रूट और प्रतिस्पर्धी कीमतें पेश कर अपनी स्थिति मजबूत की है विश्लेषकों का कहना है कि इंडिगो को भविष्य में नियामक बदलावों और ऑपरेशनल चुनौतियों से निपटने के लिए नई रणनीति अपनानी होगी। यात्रियों का भरोसा और समय पर उड़ान संचालन कंपनी की दीर्घकालिक सफलता के लिए अहम होंगे। एयरलाइन उद्योग में यह संकेत देता है कि बड़े ऑपरेटरों को भी समय-समय पर अपने प्रबंधन और संसाधन प्रबंधन में सुधार करना होगा, ताकि मार्केट में उनका प्रभुत्व बरकरार रहे।