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  • नवरात्रि व्रत में खाने का स्वाद बढ़ाने के लिए इस्तेमाल करें ये 6 मसाले, जानें किन 5 मसालों से परहेज करना चाहिए

    नवरात्रि व्रत में खाने का स्वाद बढ़ाने के लिए इस्तेमाल करें ये 6 मसाले, जानें किन 5 मसालों से परहेज करना चाहिए

    नई दिल्ली । नवरात्रि के दौरान व्रत रखने वाले लोग फलाहार के साथ साबूदाने की खिचड़ी, आलू के पकवान और कुट्टू से बनी चीजें खाते हैं। व्रत के भोजन को स्वादिष्ट बनाने के लिए मसालों का चुनाव भी अहम होता है। रोजाना इस्तेमाल होने वाले कई मसालों की जगह व्रत में कुछ खास विकल्प अपनाए जाते हैं। जीरा, काली मिर्च और सेंधा नमक का इस्तेमाल कई घरों में किया जाता है, जबकि कुछ मसालों से परहेज रखा जाता है। हालांकि, व्रत में किन चीजों का इस्तेमाल करना है, यह परिवार की परंपरा और अपने व्रत के नियमों पर निर्भर करता है।

    व्रत के खाने में जीरे का इस्तेमाल कई घरों में किया जाता है। इसकी सौंधी खुशबू साबूदाने की खिचड़ी और उबले आलू जैसी साधारण डिश का स्वाद बढ़ा सकती है। भुने हुए जीरे का पाउडर दही या रायते में मिलाकर भी इस्तेमाल किया जा सकता है। इसी तरह, काली मिर्च को तीखापन लाने के विकल्प के तौर पर चुना जाता है। जिन लोग व्रत में लाल मिर्च पाउडर नहीं खाते, वे कुटी हुई काली मिर्च से आलू, खीरे के रायते और फ्रूट चाट का स्वाद बढ़ा सकते हैं।

    सेंधा नमक भी व्रत के भोजन में इस्तेमाल होने वाला प्रमुख विकल्प है। कई परिवार नवरात्रि के दौरान सामान्य नमक की जगह सेंधा नमक का इस्तेमाल करते हैं। हालांकि, नमक के इस्तेमाल को लेकर अपने व्रत के नियमों का ध्यान रखना जरूरी है। मीठे पकवानों में हरी इलायची का इस्तेमाल किया जा सकता है। खीर, दूध से बनी मिठाइयों और मखाने के मीठे पकवानों में इसकी सुगंध स्वाद को बेहतर बनाती है। दालचीनी भी कुछ व्यंजनों में इस्तेमाल की जाती है। इसे दूध में उबालकर या मीठे पकवानों में थोड़ी मात्रा में डाला जा सकता है, लेकिन व्रत में इसका इस्तेमाल घर की परंपरा के अनुसार ही किया जाता है।

    अजवाइन भी उन मसालों में शामिल है, जिनका इस्तेमाल कुछ घरों में व्रत के नमकीन पकवानों और स्नैक्स में किया जाता है। इसकी तेज खुशबू खाने का स्वाद बढ़ा सकती है। हालांकि, हर परिवार में व्रत के दौरान अजवाइन खाने की अनुमति नहीं होती। इसलिए किसी भी मसाले को इस्तेमाल करने से पहले अपने यहां अपनाए जाने वाले नियमों को ध्यान में रखना चाहिए।

    व्रत के दौरान कुछ मसालों से परहेज भी किया जाता है। इनमें हींग शामिल है, जिसका इस्तेमाल सामान्य दिनों में सब्जियों और दालों में तड़का लगाने के लिए होता है। नवरात्रि के व्रत में कई परिवार हींग नहीं खाते। पैकेट में मिलने वाली हींग में गेहूं का आटा या दूसरी सामग्री भी हो सकती है, इसलिए सामग्री की जानकारी रखना उपयोगी है। राई भी रोजाना के भोजन में तड़के और अचार के लिए इस्तेमाल होती है, लेकिन कई घरों में व्रत के दौरान इसे नहीं खाया जाता।

    मेथी दाना भी उन मसालों में शामिल है, जिनसे व्रत में कई परिवार दूरी रखते हैं। इसका स्वाद हल्का कड़वा होता है और इसे अचार, मसालों के मिश्रण तथा सब्जियों में इस्तेमाल किया जाता है। हल्दी को लेकर भी नियम अलग-अलग हैं। रोजाना के भोजन में इस्तेमाल होने वाली हल्दी कुछ परिवार नवरात्रि के व्रत वाले पकवानों में नहीं डालते। इसी तरह, लाल मिर्च पाउडर से भी कई लोग परहेज करते हैं और तीखापन लाने के लिए काली मिर्च चुनते हैं। हरी मिर्च के इस्तेमाल को लेकर भी परिवारों की परंपराएं अलग हो सकती हैं।

    इस तरह, नवरात्रि के व्रत में मसालों का चयन करते समय केवल स्वाद ही नहीं, बल्कि अपने घर में माने जाने वाले नियमों का ध्यान रखना भी जरूरी है। जीरा, काली मिर्च, सेंधा नमक, हरी इलायची, दालचीनी और अजवाइन का इस्तेमाल कुछ घरों में किया जाता है, जबकि हींग, राई, मेथी दाना, हल्दी और लाल मिर्च पाउडर से परहेज रखा जा सकता है। सभी मसालों के लिए एक जैसा नियम नहीं होता, इसलिए व्रत का भोजन तैयार करते समय पारिवारिक परंपरा के अनुसार फैसला करना चाहिए।

  • नवरात्र व्रत में क्या खाएं और किन चीजों से करें परहेज? फलाहार से लेकर मसालों तक, यहां देखें पूरी लिस्ट

    नवरात्र व्रत में क्या खाएं और किन चीजों से करें परहेज? फलाहार से लेकर मसालों तक, यहां देखें पूरी लिस्ट


    नई दिल्‍ली । शारदीय नवरात्र में मां दुर्गा की आराधना के साथ व्रत रखने की परंपरा है। इस दौरान कुछ श्रद्धालु नौ दिनों तक फलाहार करते हैं, तो कुछ पहले और अंतिम दिन उपवास रखते हैं। व्रत रखने वालों के लिए खानपान के कुछ पारंपरिक नियम भी बताए गए हैं, जिनमें अनाज, दालों, नमक और मसालों से जुड़े परहेज शामिल हैं। आइए जानते हैं कि नवरात्र के दौरान क्या खा सकते हैं और किन चीजों से बचने की परंपरा है।

    नवरात्र व्रत में क्या खा सकते हैं?

    नवरात्र के दौरान व्रत रखने वाले लोग अपनी परंपरा और व्रत के नियमों के अनुसार फल, दूध, मेवे और कुछ खास अनाजों से बने व्यंजन खा सकते हैं।

    1. कुट्टू, सिंघाड़े और राजगिरा का आटा

    व्रत में गेहूं के आटे की जगह कुट्टू, सिंघाड़े और राजगिरा के आटे का इस्तेमाल किया जाता है। इनसे पूरी, पराठे और अन्य फलाहारी व्यंजन बनाए जा सकते हैं।

    2. साबूदाना और समा के चावल

    साबूदाने की खिचड़ी, खीर और वड़े के अलावा समा के चावल से बनी खिचड़ी भी व्रत में खाई जाती है। इन्हें फलाहार के लोकप्रिय विकल्पों में गिना जाता है।

    3. व्रत में खाई जाने वाली सब्जियां

    कद्दू, लौकी, खीरा, आलू, अरबी, रतालू, गाजर और शकरकंद का सेवन किया जा सकता है। टमाटर और अदरक का इस्तेमाल भी कई घरों में व्रत के भोजन में किया जाता है।

    4. दूध और दूध से बने पदार्थ

    व्रत के दौरान दूध, दही, पनीर, मावा, छाछ, लस्सी, मक्खन और देसी घी का सेवन किया जा सकता है। इनका इस्तेमाल फलाहारी व्यंजन तैयार करने में भी होता है।

    5. मौसमी फल

    सेब, केला, अनार, पपीता और संतरा जैसे फल व्रत के लिए अच्छे विकल्प हैं। फल खाने से शरीर को ऊर्जा और जरूरी पोषक तत्व मिलते हैं।

    6. सूखे मेवे और मखाना

    किशमिश, बादाम, काजू, अखरोट, मखाना और मूंगफली को व्रत के भोजन में शामिल किया जा सकता है। इन्हें सीधे खाने के अलावा खीर और दूसरे फलाहारी व्यंजनों में भी इस्तेमाल किया जाता है।

    7. सेंधा नमक और चुनिंदा मसाले

    व्रत में सामान्य नमक की जगह सेंधा नमक का इस्तेमाल किया जाता है। काली मिर्च, जीरा, हरी मिर्च, हरा धनिया और छोटी इलायची जैसे मसाले कई परंपराओं में स्वीकार्य हैं।

    नवरात्र व्रत में किन चीजों से बचना चाहिए?

    व्रत के पारंपरिक नियमों के अनुसार कुछ खाद्य पदार्थों से परहेज किया जाता है। हालांकि, अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में इनके नियम कुछ भिन्न हो सकते हैं।

    1. गेहूं, चावल और अन्य सामान्य अनाज

    व्रत के दौरान गेहूं, सामान्य चावल, सूजी, मैदा, जई और बेसन से बने व्यंजन नहीं खाए जाते। इनके स्थान पर व्रत में मान्य आटे और समा के चावल का उपयोग किया जाता है।

    2. दालें और दालों से बने खाद्य पदार्थ

    चना, अरहर, मूंग, मसूर और अन्य दालों का सेवन पारंपरिक नवरात्र व्रत में नहीं किया जाता। बेसन से बनी चीजों से भी परहेज रखा जाता है।

    3. सामान्य नमक और कुछ मसाले

    व्रत में साधारण नमक की जगह सेंधा नमक इस्तेमाल करने की परंपरा है। कई परिवार हल्दी, लाल मिर्च पाउडर, गरम मसाला, धनिया पाउडर, हींग और राई का उपयोग भी नहीं करते।

    4. प्याज और लहसुन

    नवरात्र के दौरान सात्विक भोजन करने की परंपरा है। इसी वजह से प्याज और लहसुन से परहेज किया जाता है। कई श्रद्धालु पूरे नौ दिनों तक इनका सेवन नहीं करते।

    5. पैकेज्ड और प्रोसेस्ड फूड

    बाजार में मिलने वाले पैकेट वाले जूस, प्रोसेस्ड स्नैक्स और सॉस या केचप से परहेज करना उचित माना जाता है। पैकेट पर लिखी सामग्री जांचना जरूरी है, क्योंकि कुछ उत्पादों में ऐसे तत्व हो सकते हैं जो व्रत के नियमों के अनुकूल न हों।

    6. मांसाहार और शराब

    नवरात्र के दौरान पारंपरिक रूप से मांस, मछली, अंडे और शराब का सेवन नहीं किया जाता। श्रद्धालु इन दिनों सात्विक भोजन और संयमित दिनचर्या अपनाते हैं।

    व्रत रखते समय इन बातों का भी रखें ध्यान
    अपनी परंपरा और व्रत के संकल्प के अनुसार ही भोजन चुनें।
    लंबे समय तक भूखे रहने के बजाय व्रत में मान्य फल, दूध और अन्य खाद्य पदार्थ उचित मात्रा में लें।
    पर्याप्त पानी पिएं, विशेषकर तब जब आप निर्जला व्रत नहीं रख रहे हों।
    मधुमेह या अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे लोग लंबे उपवास से पहले डॉक्टर की सलाह लें।

    डिस्क्लेमर: यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं और प्रचलित परंपराओं पर आधारित है। अलग-अलग क्षेत्रों, समुदायों और परिवारों में व्रत के नियम भिन्न हो सकते हैं। इसे सामान्य धार्मिक जानकारी के रूप में लें।

  • तेज गर्मी से बचने का आसान तरीका, ये मसाले शरीर को रखते हैं अंदर से ठंडा और हल्का..

    तेज गर्मी से बचने का आसान तरीका, ये मसाले शरीर को रखते हैं अंदर से ठंडा और हल्का..

    नई दिल्ली । जैसे-जैसे गर्मी अपने चरम पर पहुंच रही है, वैसे-वैसे इसका असर लोगों के शरीर पर भी साफ दिखाई देने लगा है। तेज धूप, गर्म हवाएं और बढ़ता तापमान शरीर को तेजी से थका रहा है। इस मौसम में अक्सर लोग कमजोरी, सिरदर्द, चक्कर और पेट से जुड़ी समस्याओं का सामना करते हैं। ऐसे हालात में केवल पानी पीना ही पर्याप्त नहीं माना जाता, बल्कि खानपान में ऐसे प्राकृतिक तत्वों को शामिल करना जरूरी हो जाता है जो शरीर को अंदर से ठंडक प्रदान कर सकें।

    आयुर्वेद और पारंपरिक घरेलू नुस्खों में कुछ ऐसे मसालों का जिक्र मिलता है जो गर्मियों में शरीर को संतुलित रखने में मदद करते हैं। ये मसाले न केवल पाचन को सुधारते हैं बल्कि शरीर के तापमान को भी नियंत्रित रखते हैं।

    इनमें सौंफ सबसे प्रमुख मानी जाती है। यह शरीर में ठंडक बनाए रखने में मदद करती है और पेट की गर्मी को कम करने का काम करती है। गर्मी के मौसम में इसका सेवन शरीर को हल्का और तरोताजा महसूस कराता है, साथ ही पाचन तंत्र को भी शांत रखता है।

    धनिया के बीज भी शरीर को राहत देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यह शरीर में गर्मी और सूजन को कम करने में मदद करते हैं और पाचन क्रिया को बेहतर बनाते हैं। गर्मी के कारण होने वाली पेट की समस्याओं में यह काफी लाभकारी माना जाता है।

    इलायची का उपयोग भी गर्मियों में काफी फायदेमंद माना जाता है। यह शरीर को हल्का महसूस कराने के साथ-साथ गैस, एसिडिटी और पेट की जलन जैसी समस्याओं से राहत दिलाने में मदद करती है। इसका सेवन शरीर में ताजगी बनाए रखने में सहायक होता है।

    पुदीना को तो लंबे समय से प्राकृतिक ठंडक का स्रोत माना जाता रहा है। इसमें मौजूद तत्व शरीर को ठंडा रखने के साथ-साथ पाचन सुधारने में भी मदद करते हैं। गर्मियों में होने वाली पेट की समस्याओं में यह काफी असरदार साबित होता है और शरीर को तुरंत राहत देता है।

    अमचूर भी इस सूची में शामिल एक महत्वपूर्ण मसाला है। यह पाचन को सक्रिय करने में मदद करता है और शरीर में ताजगी बनाए रखता है। इसके प्राकृतिक गुण गर्मी के असर को कम करने और भूख को संतुलित करने में सहायक होते हैं।

    अगर गर्मियों में खानपान में इन प्राकृतिक मसालों को शामिल किया जाए तो शरीर को अंदर से ठंडक मिल सकती है और कई सामान्य स्वास्थ्य समस्याओं से बचाव संभव है। यह सरल उपाय बिना किसी दवा के शरीर को स्वस्थ और ऊर्जावान बनाए रखने में मदद कर सकता है।

  • स्वाद और सेहत का अद्भुत मिलाजुला: रसोई के इस मसाले से पाएं दोनों का बेहतरीन संगम

    स्वाद और सेहत का अद्भुत मिलाजुला: रसोई के इस मसाले से पाएं दोनों का बेहतरीन संगम


    नई दिल्ली । आयुर्वेद बताता है कि भारतीय रसोई घर में ऐसे कई मसाले हैं जिनके सेवन से कई शारीरिक और मानसिक समस्याओं को मात दी जा सकती है। ऐसे ही एक मसाले का नाम जायफल है जो न केवल व्यंजनों में स्वाद और खुशबू जोड़ता है बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी बेहद फायदेमंद है।रसोई घर में रखा जायफल स्वाद बढ़ाने में कारगर है। औषधीय गुणों से भरपूर जायफल के बारे में आयुर्वेद विस्तार से जानकारी देता है। इसे दाल करी सब्जियां और मिठाइयों में भी इस्तेमाल किया जाता है।
    इसकी अनोखी सुगंध और हल्की मिठास किसी भी डिश को चार चांद लगा देती है।भारतीय व्यंजनों में जायफल का इस्तेमाल सदियों से होता आ रहा है। इसे अक्सर धनिया हल्दी मिर्च और अन्य मसालों के साथ मिलाकर इस्तेमाल किया जाता है जो डिश को ताजगी और मसालेदार स्वाद देता है। गरम मसाला में भी जायफल शामिल होता है। मिठाइयों जैसे हलवा खीर या लड्डू में इसका पाउडर डालने से स्वाद दोगुना हो जाता है।

    विशेषज्ञों के अनुसार जायफल सिर्फ स्वाद बढ़ाने वाला नहीं बल्कि सेहत का साथी भी है। जायफल का सबसे बड़ा फायदा नींद की समस्या में है। यह प्राकृतिक रूप से मानसिक शांति प्रदान करता है और अनिद्रा से राहत दिलाता है। रात को दूध में थोड़ा सा पीसा जायफल मिलाकर पीने से अच्छी नींद आती है। इसके अलावा जायफल पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है। यह गैस अपच पेट फूलना और कब्ज जैसी आम समस्याओं से छुटकारा दिलाता है।

    जायफल में मौजूद तत्व पाचन एंजाइम्स को सक्रिय करते हैं जिससे भोजन आसानी से पचता है। आयुर्वेदाचार्य बताते हैं कि सीमित मात्रा में जायफल का सेवन शरीर के लिए लाभकारी है। यह एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होता है जो इम्यूनिटी बढ़ाता है और सूजन कम करता है। हालांकि ज्यादा मात्रा में जायफल हानिकारक हो सकता है इसलिए रोजाना थोड़ी मात्रा ही इस्तेमाल करें। गर्भवती महिलाएं या कोई दवा ले रहे लोग डॉक्टर से सलाह लें।