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  • कमर दर्द सिर्फ मांसपेशियों का खिंचाव नहीं ये 4 गंभीर कारण भी हो सकते हैं जिम्मेदार

    नई दिल्ली: कमर दर्द आज के समय में एक आम समस्या बन चुका है लेकिन इसे हमेशा सिर्फ मांसपेशियों के खिंचाव तक सीमित मान लेना सही नहीं है। लंबे समय तक बैठने गलत पोस्चर और कम शारीरिक गतिविधि के कारण यह समस्या बढ़ जाती है। लेकिन जब दर्द लगातार बना रहे तो इसके पीछे कई गंभीर कारण भी हो सकते हैं जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

    विशेषज्ञों के अनुसार कमर दर्द का एक बड़ा कारण रीढ़ की हड्डियों के बीच मौजूद डिस्क में आने वाली समस्या हो सकती है। यह डिस्क कुशन की तरह काम करती है और जब यह उभर जाती है या खराब हो जाती है तो रीढ़ पर दबाव बढ़ता है जिससे तेज और लगातार दर्द होने लगता है। इसे नजरअंदाज करना आगे चलकर और गंभीर स्थिति पैदा कर सकता है।

    इसके अलावा रीढ़ की हड्डी में छोटे फ्रैक्चर भी कमर दर्द का कारण बन सकते हैं। इन फ्रैक्चर को कंप्रेशन फ्रैक्चर कहा जाता है जो हड्डियों को कमजोर और अस्थिर बना देते हैं। यह समस्या अक्सर ऑस्टियोपोरोसिस जैसी बीमारियों में देखने को मिलती है जहां हड्डियां इतनी कमजोर हो जाती हैं कि सामान्य गतिविधियों जैसे खांसने या झुकने पर भी फ्रैक्चर हो सकता है।

    एक और गंभीर कारण है स्पाइनल स्टेनोसिस। इस स्थिति में रीढ़ की हड्डी के अंदर की जगह संकरी हो जाती है जिससे नसों पर दबाव पड़ता है। इसके चलते मरीज को जलन वाला दर्द पैरों में कमजोरी ऐंठन और चलने-फिरने में परेशानी हो सकती है। कई बार यह समस्या इतनी बढ़ जाती है कि व्यक्ति को मूत्र संबंधी दिक्कतों का भी सामना करना पड़ सकता है।

    इसके अलावा अन्य कारणों में नसों का दबना चोट पुरानी सूजन या गलत जीवनशैली भी शामिल हो सकती है। लगातार एक ही जगह बैठना भारी वजन उठाना या गलत तरीके से झुकना भी कमर दर्द को बढ़ा सकता है। ऐसे में जरूरी है कि समय रहते सही जांच कराई जाए और समस्या की जड़ को समझा जाए।

    डॉक्टर्स की सलाह के अनुसार अगर कमर दर्द कुछ दिनों से ज्यादा बना रहे या इसके साथ सुन्नपन कमजोरी या तेज जलन महसूस हो तो तुरंत विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए। सही समय पर इलाज और सही लाइफस्टाइल अपनाकर इस समस्या से काफी हद तक राहत पाई जा सकती है।

    कमर दर्द को हल्के में लेना कई बार बड़ी समस्या का कारण बन सकता है इसलिए जरूरी है कि इसे नजरअंदाज न करें और समय रहते इसका सही समाधान करें।

  • रोज़ाना करें पूर्ण भुजंगासन, मजबूत होगी रीढ़ और बदन दर्द से मिलेगी स्थायी राहत

    रोज़ाना करें पूर्ण भुजंगासन, मजबूत होगी रीढ़ और बदन दर्द से मिलेगी स्थायी राहत

    नई दिल्ली। बदलती जीवनशैली लंबे समय तक बैठकर काम करना और शारीरिक गतिविधियों की कमी आज बदन दर्द और रीढ़ से जुड़ी समस्याओं का बड़ा कारण बन चुकी है। ऐसे समय में योग न सिर्फ शारीरिक बल्कि मानसिक स्वास्थ्य को भी संतुलित रखने का प्रभावी माध्यम बनकर उभरा है। योग विशेषज्ञ रोज़ाना कुछ खास आसनों को दिनचर्या में शामिल करने की सलाह देते हैं जिनमें पूर्ण भुजंगासन का विशेष स्थान है।मोरारजी देसाई नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ योगा के अनुसार पूर्ण भुजंगासन भुजंगासन का उन्नत और गहन रूप है। यह आसन रीढ़ की हड्डी को मजबूती और लचीलापन देने के साथ-साथ पीठ कंधों और गर्दन की जकड़न को दूर करने में सहायक होता है। इसके नियमित अभ्यास से छाती खुलती है जिससे फेफड़ों की क्षमता बढ़ती है और सांस लेने में आसानी होती है।

    पूर्ण भुजंगासन कैसे करें
    योग विशेषज्ञों के अनुसार इस आसन का अभ्यास बेहद सावधानी और सही तकनीक के साथ करना चाहिए। इसे करने के लिए सबसे पहले पेट के बल ज़मीन पर लेट जाएं। दोनों हथेलियों को कंधों के पास रखें और पैर सीधे रखें। अब गहरी सांस लेते हुए धीरे-धीरे छाती गर्दन और सिर को ऊपर उठाएं। कोहनियों को थोड़ा मोड़ें और कंधों को पीछे की ओर खींचें। इसके बाद घुटनों को मोड़ते हुए पैरों के पंजे ऊपर उठाएं और सिर-गर्दन को पीछे की ओर तानें। कोशिश करें कि पैरों के पंजे सिर को छू सकें।इस मुद्रा में बिना किसी दबाव के जितनी देर आराम से रह सकें उतनी देर रुकें। फिर सांस छोड़ते हुए धीरे-धीरे वापस नीचे आएं और शवासन की स्थिति में लेटकर शरीर को पूरी तरह शिथिल करें। गहरी सांस लें और हृदय गति को सामान्य होने दें।

    पूर्ण भुजंगासन के प्रमुख फायदे

    नियमित रूप से पूर्ण भुजंगासन करने से रीढ़ की हड्डी मजबूत और लचीली बनती है। यह आसन पाचन तंत्र को बेहतर करता है और थायरॉइड ग्रंथि को सक्रिय करने में मदद करता है। इसके अलावा यह तनाव और चिंता को कम करने में सहायक माना जाता है। खासतौर पर जो लोग लंबे समय तक कुर्सी पर बैठकर काम करते हैं या जिन्हें कमर और पीठ दर्द की शिकायत रहती है उनके लिए यह आसन बेहद लाभकारी हो सकता है।

    कब न करें यह आसन

    हालांकि पूर्ण भुजंगासन बेहद लाभकारी है लेकिन कुछ स्थितियों में इससे बचना चाहिए। गर्भवती महिलाएं गंभीर पीठ दर्द से पीड़ित लोग उच्च रक्तचाप हर्निया या हाल ही में सर्जरी कराने वाले व्यक्तियों को यह आसन नहीं करना चाहिए।

    शुरुआत में रखें ये सावधानियां

    शुरुआती दिनों में इस आसन को धीरे-धीरे सीखना चाहिए और किसी योग विशेषज्ञ की देखरेख में अभ्यास करना सबसे बेहतर रहता है। विशेषज्ञों का कहना है कि योग में धैर्य और नियमितता सबसे अहम होती है। पूर्ण भुजंगासन जैसे उन्नत आसन शरीर की क्षमता बढ़ाते हैं लेकिन गलत तरीके से करने पर चोट का खतरा भी हो सकता है।नियमित अभ्यास सही तकनीक और सावधानी के साथ किया गया पूर्ण भुजंगासन न सिर्फ रीढ़ को मजबूत बनाता है बल्कि बदन दर्द से राहत दिलाकर जीवन को अधिक सक्रिय और ऊर्जावान बना सकता है।