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  • नवरात्र में मां दुर्गा को अर्पित करें यह लाल फल, मिलेगा सुख समृद्धि और सेहत का आशीर्वाद

    नवरात्र में मां दुर्गा को अर्पित करें यह लाल फल, मिलेगा सुख समृद्धि और सेहत का आशीर्वाद


    नई दिल्ली। चैत्र नवरात्र का पावन पर्व शुरू होते ही पूरे देश में भक्ति और आस्था का माहौल बन जाता है इस दौरान भक्त मां दुर्गा की आराधना में विभिन्न प्रकार के फल फूल और प्रसाद अर्पित करते हैं लेकिन धार्मिक मान्यताओं के अनुसार एक ऐसा विशेष फल है जो भगवती को अत्यंत प्रिय माना जाता है और वह है अनार जिसे दादिमा भी कहा जाता है

    मान्यता है कि मां दुर्गा को लाल रंग अत्यधिक प्रिय है और अनार के लाल दाने शक्ति ऊर्जा और सकारात्मकता का प्रतीक होते हैं यही कारण है कि नवरात्र के दौरान अनार चढ़ाने की परंपरा बेहद शुभ मानी जाती है शास्त्रों में भी इसका उल्लेख मिलता है कि सभी फलों में अनार देवी को विशेष प्रिय है और इसे अर्पित करने से सुख समृद्धि संतान सुख और कर्ज मुक्ति का आशीर्वाद प्राप्त होता है

    धार्मिक दृष्टि से अनार को अखंड और पवित्र फल माना गया है जैसे नारियल को श्रीफल कहा जाता है उसी तरह अनार भी पूजा में विशेष स्थान रखता है इसकी लालिमा मां दुर्गा के शक्ति स्वरूप से जुड़ी मानी जाती है और इसे अर्पित करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और परिवार में सौभाग्य बढ़ता है

    नवरात्र के दौरान कई श्रद्धालु विशेष रूप से आर्थिक समृद्धि और जीवन की परेशानियों से मुक्ति के लिए अनार चढ़ाते हैं ऐसा माना जाता है कि यह फल न केवल देवी को प्रसन्न करता है बल्कि भक्तों के जीवन में संतुलन और शांति भी लाता है

    धार्मिक महत्व के साथ-साथ अनार स्वास्थ्य के लिए भी किसी वरदान से कम नहीं है आयुर्वेद में इसे बेहद गुणकारी फल बताया गया है यह रक्त को शुद्ध करता है और शरीर में खून की कमी यानी एनीमिया को दूर करने में मदद करता है इसके नियमित सेवन से पाचन तंत्र मजबूत होता है और हृदय को भी लाभ मिलता है

    अनार में विटामिन सी एंटीऑक्सीडेंट फाइबर और पोटैशियम जैसे पोषक तत्व भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं गर्मियों में यह शरीर को ठंडक देता है और त्वचा को स्वस्थ बनाए रखने में भी सहायक होता है अनार का जूस पीने से थकान दूर होती है और शरीर में नई ऊर्जा का संचार होता है

    इस तरह अनार एक ऐसा फल है जो न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी अत्यंत लाभकारी है नवरात्र के इस पावन अवसर पर मां दुर्गा को अनार अर्पित करना जीवन में सुख समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की कामना का सुंदर माध्यम बन सकता है
  • मार्च 2026 में 'रवि' और 'सोम' प्रदोष व्रत का अद्भुत संयोग: महादेव की कृपा पाने के लिए नोट कर लें शुभ मुहूर्त और तिथि

    मार्च 2026 में 'रवि' और 'सोम' प्रदोष व्रत का अद्भुत संयोग: महादेव की कृपा पाने के लिए नोट कर लें शुभ मुहूर्त और तिथि


    नई दिल्ली ।हिंदू धर्म में भगवान शिव की आराधना के लिए प्रदोष व्रत को सर्वोत्तम माना गया है। पौराणिक मान्यताओं और शिव पुराण के अनुसार, त्रयोदशी तिथि के दिन प्रदोष काल में महादेव स्वयं शिवलिंग में साक्षात विराजमान होते हैं। मार्च 2026 का महीना शिव भक्तों के लिए विशेष होने वाला है, क्योंकि इस महीने में दो अत्यंत फलदायी प्रदोष व्रत पड़ रहे हैं। पहला व्रत जहाँ रविवार को होने के कारण “रवि प्रदोष” कहलाएगा, वहीं दूसरा व्रत सोमवार को होने की वजह से “सोम प्रदोष” के नाम से जाना जाएगा। शास्त्रों में इन दोनों ही वारों पर पड़ने वाले प्रदोष व्रत का विशेष महत्व बताया गया है, जो साधक को आरोग्य और मानसिक शांति प्रदान करते हैं।

    मार्च महीने के पहले प्रदोष व्रत की शुरुआत फाल्गुन शुक्ल त्रयोदशी तिथि से हो रही है। पंचांग के अनुसार, यह तिथि 28 फरवरी की रात 08 बजकर 43 मिनट पर शुरू होगी और अगले दिन 1 मार्च, रविवार को रात 09 बजकर 11 मिनट पर समाप्त होगी। चूंकि प्रदोष व्रत की पूजा शाम के समय यानी प्रदोष काल में की जाती है, इसलिए 1 मार्च को “रवि प्रदोष व्रत” रखा जाएगा। इस दिन महादेव की पूजा के लिए शाम 06 बजकर 21 मिनट से लेकर 07 बजकर 09 मिनट तक का समय सबसे शुभ रहेगा। रविवार को प्रदोष व्रत रखने से सूर्य देव का भी आशीर्वाद प्राप्त होता है, जिससे व्यक्ति को मान-सम्मान और उत्तम स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है।

    वहीं, मार्च का दूसरा प्रदोष व्रत चैत्र कृष्ण त्रयोदशी को पड़ेगा। इसकी तिथि 16 मार्च 2026 को सुबह 09:40 बजे प्रारंभ होकर 17 मार्च की सुबह 09:23 बजे तक रहेगी। प्रदोष काल की गणना के अनुसार, यह व्रत 16 मार्च को रखा जाएगा। सोमवार का दिन होने के कारण यह “सोम प्रदोष” कहलाएगा, जिसे शिवजी का सबसे प्रिय दिन माना जाता है। इस दिन पूजा का मुहूर्त शाम 06:30 बजे से रात 08:54 बजे तक रहेगा। सोम प्रदोष का व्रत करने से वैवाहिक जीवन के कष्ट दूर होते हैं और चंद्रमा की शुभता बढ़ती है।

    प्रदोष व्रत केवल एक उपवास नहीं, बल्कि आध्यात्मिक उत्थान का मार्ग है। मान्यता है कि जो भक्त इस दिन निराहार रहकर शिवलिंग पर जल, दूध और विशेष रूप से “बेलपत्र” अर्पित करते हैं, उनके जीवन से दरिद्रता और दुखों का नाश होता है। यह व्रत क्रोध, लोभ और मोह जैसे विकारों से मुक्ति दिलाकर मन में सकारात्मकता का संचार करता है। यदि आप भी महादेव की असीम अनुकंपा प्राप्त करना चाहते हैं और अपने घर में सुख-शांति की कामना रखते हैं, तो मार्च के इन दो विशेष तिथियों को अपनी डायरी में जरूर नोट कर लें।