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  • अमेरिकी पहलवान को आखिरी पलों में दी मात, मनीषा भानवाला ने गोल्ड जीतकर दुनिया में लहराया तिरंगा

    अमेरिकी पहलवान को आखिरी पलों में दी मात, मनीषा भानवाला ने गोल्ड जीतकर दुनिया में लहराया तिरंगा


    नई दिल्ली। भारतीय कुश्ती के इतिहास में 30 अक्टूबर 2026 का दिन स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज हो गया। देश की महिला पहलवान मनीषा भानवाला ने वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप 2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए गोल्ड मेडल अपने नाम कर लिया। उन्होंने न केवल अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का गौरव बढ़ाया बल्कि ऐसी उपलब्धि हासिल की जिसका इंतजार भारतीय महिला कुश्ती को लंबे समय से था। मनीषा विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला पहलवान बन गई हैं। उनकी इस जीत की सबसे खास बात फाइनल मुकाबले में की गई जबरदस्त वापसी रही। एक समय मुकाबले में 0-6 से पिछड़ने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और आखिरकार अमेरिकी पहलवान को 8-6 से हराकर इतिहास रच दिया।

    वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप के महिला 59 किलोग्राम भार वर्ग के फाइनल में मनीषा भानवाला का सामना अमेरिका की एबिगेल नेटे से हुआ। मुकाबले की शुरुआत भारतीय पहलवान के लिए अच्छी नहीं रही। अमेरिकी खिलाड़ी ने आक्रामक खेल दिखाते हुए लगातार अंक हासिल किए और मनीषा को छह अंकों से पीछे कर दिया। स्कोर 0-6 होने के बाद मुकाबला एकतरफा दिखाई देने लगा था। लेकिन मनीषा ने दबाव में आने के बजाय अपनी रणनीति पर भरोसा बनाए रखा। उन्होंने धीरे धीरे वापसी शुरू की और लगातार अंक जुटाकर मुकाबले का रुख बदल दिया। भारतीय पहलवान के शानदार दांव और मजबूत इरादों के सामने अमेरिकी खिलाड़ी टिक नहीं सकीं। आखिरकार मनीषा ने 8-6 की बढ़त हासिल करते हुए स्वर्ण पदक पर कब्जा जमा लिया।

    इस जीत के साथ मनीषा ने भारतीय महिला कुश्ती के लिए एक नया इतिहास बना दिया। इससे पहले विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में भारत की ओर से पुरुष पहलवान सुशील कुमार ही स्वर्ण पदक जीतने में सफल रहे थे। सुशील कुमार ने साल 2010 में 66 किलोग्राम भार वर्ग में गोल्ड मेडल हासिल किया था। अब मनीषा भानवाला का नाम भी इस खास सूची में शामिल हो गया है। उनकी उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि उन्होंने दुनिया के शीर्ष पहलवानों के बीच अपनी प्रतिभा और संघर्ष का शानदार प्रदर्शन किया।

    मनीषा ने फाइनल तक पहुंचने के लिए भी कड़ी चुनौती का सामना किया। सेमीफाइनल मुकाबले में उन्होंने कजाकिस्तान की पहलवान अल्टिन शागायेवा को हराकर खिताबी मुकाबले में जगह बनाई थी। इसके बाद फाइनल में भी उन्होंने विपरीत परिस्थितियों से उबरकर जीत हासिल की। उनका यह प्रदर्शन बताता है कि बड़े मुकाबलों में आत्मविश्वास और आखिरी क्षण तक संघर्ष करने की क्षमता कितनी अहम होती है।

    इस चैंपियनशिप में भारतीय महिला पहलवानों का सामूहिक प्रदर्शन भी खास रहा। पहली बार एक ही विश्व चैंपियनशिप संस्करण में भारत की तीन महिला पहलवानों ने स्वर्ण पदक के मुकाबले तक जगह बनाई। मनीषा ने गोल्ड जीतकर देश का नाम रोशन किया जबकि नीलम सिरोही ने 50 किलोग्राम और काजल ढोचक ने 76 किलोग्राम वर्ग में फाइनल तक पहुंचकर रजत पदक हासिल किया। वहीं तनु शर्मा ने कांस्य पदक जीतकर भारत की पदक तालिका में योगदान दिया।

    मनीषा भानवाला की यह जीत केवल एक स्वर्ण पदक तक सीमित नहीं है बल्कि भारतीय महिला कुश्ती के लिए नई संभावनाओं का संकेत भी है। छह अंकों से पिछड़ने के बाद जिस तरह उन्होंने मुकाबला अपने पक्ष में किया उसने खेल प्रेमियों को रोमांचित कर दिया। उनकी ऐतिहासिक उपलब्धि आने वाली पीढ़ी की महिला पहलवानों के लिए प्रेरणा बनेगी।

  • एशियन गेम्स में भारत का शानदार प्रदर्शन, हॉकी में 44 साल बाद गोल्ड, सॉफ्ट टेनिस और MMA में भी पहली बार मेडल

    एशियन गेम्स में भारत का शानदार प्रदर्शन, हॉकी में 44 साल बाद गोल्ड, सॉफ्ट टेनिस और MMA में भी पहली बार मेडल


    नई दिल्ली। एशियन गेम्स 2026 भारत के लिए कई ऐतिहासिक उपलब्धियों के साथ यादगार बन गया। भारत ने इस प्रतियोगिता में कुल 21 गोल्ड समेत 85 मेडल अपने नाम किए। खेलों के इस बड़े मंच पर भारतीय खिलाड़ियों ने कई ऐसे मुकाम हासिल किए जो इससे पहले देश के नाम नहीं थे। महिला हॉकी में लंबे इंतजार के बाद गोल्ड मेडल मिला तो वहीं मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स और सॉफ्ट टेनिस जैसे खेलों में भी भारत ने पहली बार पदक जीतकर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई।

    सबसे बड़ी उपलब्धियों में भारतीय महिला हॉकी टीम का प्रदर्शन रहा। सलीमा टेटे की कप्तानी में टीम ने शानदार खेल दिखाया और फाइनल में चीन को 1-0 से हराकर गोल्ड मेडल अपने नाम किया। इस जीत के साथ भारत ने महिला हॉकी में 44 साल का इंतजार खत्म कर दिया। भारतीय टीम ने इससे पहले 1982 में एशियन गेम्स में महिला हॉकी का गोल्ड जीता था। इसके बाद लंबे समय तक देश को इस सफलता का इंतजार करना पड़ा। 2026 में मिली यह जीत भारतीय हॉकी के लिए बेहद खास बन गई।

    मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स में भी भारत ने इतिहास रचा। सुचिका तारियाल ने महिलाओं के 60 किलोग्राम वर्ग में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर एशियन गेम्स में भारत को इस खेल का पहला पदक दिलाया। सुचिका ने प्रतियोगिता में दमदार प्रदर्शन किया। हालांकि सेमीफाइनल में हार के कारण वह फाइनल तक नहीं पहुंच सकीं लेकिन उनका ब्रॉन्ज मेडल भारत के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि बन गया।

    सॉफ्ट टेनिस में भी भारत ने पहली बार पदक जीता। इस खेल को एशियन गेम्स में शामिल किए जाने के बाद भारतीय खिलाड़ी जय मीणा ने पुरुष वर्ग में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर देश का नाम रोशन किया। इसी तरह रोइंग में सतनाम सिंह और सलमान खान की जोड़ी ने डबल स्कल्स में भारत को पहला मेडल दिलाया।

    स्क्वैश में अनाहत सिंह ने इतिहास रच दिया। वह एशियन गेम्स के स्क्वैश सिंगल्स फाइनल में पहुंचने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी बनीं। भले ही वह गोल्ड मेडल जीतने से चूक गईं लेकिन सिल्वर मेडल के साथ उन्होंने नया इतिहास बनाया। पोल वॉल्ट में बरनिका इलांगोवन ने भी ब्रॉन्ज मेडल जीतकर भारत को इस स्पर्धा में एशियन गेम्स का पहला पदक दिलाया।

    वेटलिफ्टिंग में मीराबाई चानू का इंतजार भी खत्म हुआ। उन्होंने एशियन गेम्स के इतिहास में अपना पहला मेडल जीता और सिल्वर अपने नाम किया। वहीं सावन बरवाल ने मैराथन में सिल्वर मेडल जीतकर 1982 के बाद भारत को इस स्पर्धा में पहला पदक दिलाया। इन उपलब्धियों ने साबित किया कि भारतीय खिलाड़ी अब पारंपरिक खेलों के साथ नए खेलों में भी लगातार अपनी पहचान मजबूत कर रहे हैं।

  • 16 साल का इंतजार हुआ खत्म धीरज बोम्मादेवरा ने शूट ऑफ में जापान को हराकर रचा भारतीय तीरंदाजी का इतिहास

    16 साल का इंतजार हुआ खत्म धीरज बोम्मादेवरा ने शूट ऑफ में जापान को हराकर रचा भारतीय तीरंदाजी का इतिहास


    नई दिल्ली। भारतीय तीरंदाजी के लिए रविवार का दिन ऐतिहासिक बन गया। भारत के स्टार रिकर्व तीरंदाज धीरज बोम्मादेवरा ने विश्व कप फाइनल में स्वर्ण पदक जीतकर ऐसा कारनामा कर दिखाया है जो इससे पहले कोई भारतीय पुरुष रिकर्व तीरंदाज नहीं कर सका था। धीरज ने जापान के नाकानिशी जुन्या को बेहद रोमांचक मुकाबले में शूट ऑफ के जरिए हराकर गोल्ड मेडल अपने नाम किया। उनकी इस शानदार जीत के साथ भारतीय पुरुष रिकर्व तीरंदाजी में 16 साल से चला आ रहा इंतजार भी खत्म हो गया।

    25 वर्षीय धीरज ने पूरे टूर्नामेंट में जबरदस्त प्रदर्शन किया। विश्व रैंकिंग में 10वें स्थान पर मौजूद सेना के इस जवान ने क्वार्टर फाइनल और सेमीफाइनल में अपनी सटीक निशानेबाजी का दम दिखाया। फाइनल में उनका सामना दुनिया के 20वें नंबर के जापानी तीरंदाज नाकानिशी जुन्या से हुआ। मुकाबला पांच सेट तक चला और दोनों खिलाड़ियों के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिली। पांच सेट के बाद स्कोर 5-5 से बराबर था। इसके बाद फैसला शूट ऑफ से हुआ जहां धीरज ने 10-9 के अंतर से जीत दर्ज करते हुए स्वर्ण पदक पर कब्जा जमा लिया।

    धीरज की यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि विश्व कप फाइनल में भारतीय पुरुष रिकर्व तीरंदाज के लिए इससे पहले स्वर्ण पदक का सपना अधूरा रहा था। भारत की ओर से जयंत तालुकदार ने 2010 में एडिनबर्ग में विश्व कप फाइनल में कांस्य पदक जीता था। इसके बाद लंबे समय तक भारतीय पुरुष रिकर्व तीरंदाज इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में स्वर्ण हासिल नहीं कर सके। अब धीरज ने उस सूखे को खत्म कर इतिहास अपने नाम कर लिया है।

    धीरज की सफलता के पीछे सिर्फ उनकी प्रतिभा नहीं बल्कि परिवार का संघर्ष और त्याग भी छिपा है। करियर के शुरुआती दौर में परिवार की आर्थिक स्थिति बेहतर नहीं थी। साल 2017 में बेहतर प्रशिक्षण के लिए उन्हें महंगे विदेशी उपकरणों की जरूरत थी लेकिन पैसों की कमी बड़ी चुनौती बन गई। हालात यहां तक पहुंच गए कि धीरज की मां रेवती ने बेटे का सपना पूरा करने के लिए अपना मंगलसूत्र तक गिरवी रख दिया। इसी रकम से उनके लिए नया धनुष खरीदा गया।

    एक समय धीरज तीरंदाजी छोड़ने का मन भी बना चुके थे लेकिन परिवार के भरोसे ने उन्हें आगे बढ़ने की ताकत दी। उनके पिता श्रवण कुमार भी तीरंदाजी से जुड़े रहे और आंध्र प्रदेश के वरिष्ठ तीरंदाजी जजों में शामिल हैं। परिवार के इसी समर्थन और धीरज की मेहनत ने उन्हें आज दुनिया के शीर्ष तीरंदाजों में खड़ा कर दिया है।

    इस साल जून में तुर्किये के अंताल्या में विश्व कप स्टेज तीन में धीरज ने दो स्वर्ण पदक जीतकर अपनी शानदार फॉर्म का संकेत दिया था। अब विश्व कप फाइनल में गोल्ड जीतकर उन्होंने भारतीय तीरंदाजी के इतिहास में अपना नाम दर्ज करा लिया है। विश्व कप फाइनल में इससे पहले भारत के लिए डोला बनर्जी ने 2007 में महिला व्यक्तिगत वर्ग में स्वर्ण पदक जीता था। धीरज की जीत ने पुरुष वर्ग में भी भारत का झंडा सबसे ऊंचा कर दिया है।

  • गोल्डन बॉय की राह में चोट बनी रोड़ा! नीरज चोपड़ा एशियन गेम्स से बाहर, भारत की गोल्ड की उम्मीदों को लगा झटका

    गोल्डन बॉय की राह में चोट बनी रोड़ा! नीरज चोपड़ा एशियन गेम्स से बाहर, भारत की गोल्ड की उम्मीदों को लगा झटका


    नई दिल्ली । भारत के स्टार जैवलिन थ्रोअर और दो बार के ओलंपिक पदक विजेता नीरज चोपड़ा को लेकर खेल जगत से बेहद निराश करने वाली खबर सामने आई है। नीरज चोपड़ा चोट के कारण 2026 के बाकी बचे सीजन से बाहर हो गए हैं। इसका सीधा असर सितंबर में जापान के आइची नागोया में होने वाले एशियन गेम्स पर भी पड़ा है जहां नीरज अपने जैवलिन थ्रो के खिताब का बचाव करने उतरने वाले थे। नीरज की गैरमौजूदगी भारत के लिए बड़ा झटका मानी जा रही है क्योंकि वह देश के सबसे मजबूत पदक दावेदारों में शामिल थे और एशियन गेम्स में उनसे एक बार फिर शानदार प्रदर्शन की उम्मीद थी।

    नीरज ने खुद सोशल मीडिया के जरिए अपनी चोट की जानकारी फैन्स के साथ साझा की है। उन्होंने बताया कि लुसाने डायमंड लीग में 88.05 मीटर का सीजन बेस्ट थ्रो करने के बाद वह शानदार लय महसूस कर रहे थे। लंबे समय से जिस मोमेंटम की उन्हें तलाश थी वह उन्हें वापस मिलता नजर आ रहा था लेकिन इसी दौरान ट्रेनिंग में उनके टखने के लिगामेंट में टियर हो गया। चोट के बाद उन्होंने अपनी मेडिकल टीम और डॉक्टरों के साथ विस्तार से चर्चा की और इसके बाद इस सीजन के बाकी मुकाबलों से दूर रहने का फैसला किया।

    नीरज के लिए यह फैसला आसान नहीं रहा होगा क्योंकि चोट ऐसे समय पर आई जब उनका प्रदर्शन धीरे धीरे बेहतर होता दिखाई दे रहा था। ग्लासगो में हुए मुकाबले में उन्होंने पोडियम फिनिश हासिल किया था लेकिन श्रीलंका के रुमेश पथिरागे ने 89.75 मीटर का शानदार थ्रो करते हुए उनसे गोल्ड मेडल छीन लिया था। इसके बाद लुसाने डायमंड लीग में भी नीरज ने हिस्सा लिया और 88.05 मीटर का थ्रो उनके लिए सीजन का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन रहा। वह क्वालिफिकेशन की रेस में आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे थे लेकिन चोट ने उनके पूरे सीजन पर ब्रेक लगा दिया।

    एशियन गेम्स 2026 का आयोजन 19 सितंबर से 4 अक्टूबर तक जापान के आइची नागोया में होना है। नीरज के बाहर होने का सबसे बड़ा झटका यह है कि वह जैवलिन थ्रो में अपने पिछले खिताब का बचाव नहीं कर पाएंगे। उनके नाम की मौजूदगी ही भारत के लिए पदक की बड़ी उम्मीद मानी जाती थी। ऐसे में उनकी अनुपस्थिति से भारतीय एथलेटिक्स टीम पर अतिरिक्त दबाव बढ़ गया है।

    हालांकि नीरज ने इस मुश्किल वक्त में भी सकारात्मक रवैया दिखाया है। उनका कहना है कि चोट और मुश्किलें खेल के सफर का हिस्सा हैं और फिलहाल उनका पूरा ध्यान रिकवरी पर है। वह पूरी तरह फिट होकर पहले से ज्यादा मजबूती के साथ मैदान पर वापसी करना चाहते हैं। अब नीरज की गैरमौजूदगी में भारत की उम्मीदें रोहित यादव पर टिक गई हैं। रोहित ने हाल ही में भुवनेश्वर में 87.68 मीटर का व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ थ्रो करते हुए जीत दर्ज की थी। नीरज के बाहर होने के बाद रोहित एशियन गेम्स में भारत के प्रमुख जैवलिन पदक दावेदार के रूप में नजर आएंगे।

  • तीन पदकों के साथ भारत ने रचा शानदार अभियान, पूजा सिंह का हाई जंप फाइनल में नहीं चला जलवा

    तीन पदकों के साथ भारत ने रचा शानदार अभियान, पूजा सिंह का हाई जंप फाइनल में नहीं चला जलवा


    नई दिल्ली । यूजीन में आयोजित वर्ल्ड एथलेटिक्स अंडर-20 चैंपियनशिप में भारत का अभियान तीन पदकों के साथ समाप्त हुआ। भारतीय खिलाड़ियों ने प्रतियोगिता में दो सिल्वर और एक ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया। हालांकि नेशनल सीनियर रिकॉर्ड होल्डर पूजा सिंह से महिलाओं की हाई जंप स्पर्धा में बड़ी उम्मीदें थीं, लेकिन फाइनल में उनका प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा और उन्हें सातवें स्थान से संतोष करना पड़ा।

    19 वर्षीय पूजा सिंह इस प्रतियोगिता में मजबूत दावेदार के तौर पर उतरी थीं। उन्होंने इसी साल की शुरुआत में 1.93 मीटर की छलांग लगाकर नेशनल सीनियर रिकॉर्ड बनाया था। इसके अलावा मई में एशियन अंडर-20 एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भी पूजा ने 1.93 मीटर की ऊंचाई पार करते हुए गोल्ड मेडल जीता था। शानदार फॉर्म के कारण उनसे वर्ल्ड अंडर-20 चैंपियनशिप में भी पदक की उम्मीद की जा रही थी।

    महिलाओं की हाई जंप फाइनल में पूजा सिंह ने 1.84 मीटर की ऊंचाई सफलतापूर्वक पार की। इसके बाद उन्होंने 1.87 मीटर की ऊंचाई पार करने की तीन कोशिशें कीं, लेकिन तीनों प्रयास असफल रहे। इस कारण उन्हें सातवें स्थान पर प्रतियोगिता से बाहर होना पड़ा। ऑस्ट्रेलिया की इजोबेल लुइसन-रो ने 1.92 मीटर की छलांग लगाकर गोल्ड मेडल अपने नाम किया। हंगरी की लिलियाना बाटोरी ने सिल्वर और स्पेन की एताना अलोंसो ने ब्रॉन्ज मेडल जीता।

    पूजा का इस सीजन में प्रदर्शन हालांकि बेहद प्रभावशाली रहा है। एशियन अंडर-20 चैंपियनशिप में रिकॉर्ड प्रदर्शन के साथ गोल्ड जीतने के अलावा वह सीनियर एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप की मौजूदा चैंपियन भी हैं। ऐसे में वर्ल्ड अंडर-20 चैंपियनशिप में पदक से चूकना उनके लिए निराशाजनक जरूर रहा, लेकिन उनका लगातार बेहतर प्रदर्शन भारतीय एथलेटिक्स के लिए सकारात्मक संकेत है।

    भारत की महिला 4×400 मीटर रिले टीम का प्रदर्शन भी फाइनल में उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा। भूमिका नेहते, तहुरा खातून, तनु चौधरी और थिया अरुमुगम की भारतीय टीम ने 3 मिनट 45.28 सेकंड का समय दर्ज किया और फाइनल में आखिरी स्थान पर रही। अमेरिका ने 3 मिनट 29.15 सेकंड के समय के साथ गोल्ड मेडल जीता। ऑस्ट्रेलिया को 3 मिनट 31.39 सेकंड के साथ सिल्वर और ग्रेट ब्रिटेन को 3 मिनट 32.08 सेकंड के साथ ब्रॉन्ज मेडल मिला।

    भारत के तीन पदकों में दो सिल्वर और एक ब्रॉन्ज शामिल रहे। आशीष यादव ने पुरुषों की जैवलिन थ्रो में सिल्वर मेडल जीतकर भारत के अभियान की शुरुआत की। इसके बाद बसंत कुमार मेघवाल ने पुरुषों की हाई जंप में सिल्वर मेडल अपने नाम किया। पुरुषों की लॉन्ग जंप में शाहनवाज खान ने ब्रॉन्ज मेडल जीतकर भारत की पदक संख्या तीन तक पहुंचाई।

    इस प्रदर्शन के साथ भारत ने वर्ल्ड एथलेटिक्स अंडर-20 चैंपियनशिप का समापन तीन पदकों के साथ किया। खास बात यह है कि भारत ने 2021 और 2022 के संस्करणों में जितने कुल पदक जीते थे, इस बार भी उतने ही पदक हासिल किए। पूजा सिंह भले ही अपने रिकॉर्ड प्रदर्शन को पदक में नहीं बदल सकीं, लेकिन युवा भारतीय एथलीटों का यह प्रदर्शन आने वाले वर्षों के लिए उम्मीद जगाता है।

  • टी20 क्रिकेट में बटलर का नया कीर्तिमान, वैभव सूर्यवंशी की जमकर तारीफ; बोले- कई रिकॉर्ड तोड़ेगा

    टी20 क्रिकेट में बटलर का नया कीर्तिमान, वैभव सूर्यवंशी की जमकर तारीफ; बोले- कई रिकॉर्ड तोड़ेगा


    नई दिल्ली। टी20 क्रिकेट में नया इतिहास रचने वाले इंग्लैंड के स्टार बल्लेबाज जोस बटलर ने भारतीय क्रिकेट के उभरते सितारे वैभव सूर्यवंशी को लेकर ऐसी भविष्यवाणी की है जिसने क्रिकेट जगत का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। क्रिकेट के सबसे छोटे प्रारूप में सर्वाधिक रन बनाने वाले बल्लेबाज बनने के बाद बटलर ने कहा कि भविष्य में यदि कोई खिलाड़ी उनका रिकॉर्ड तोड़ सकता है तो वह 15 वर्षीय भारतीय बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी हैं। बटलर का यह बयान युवा भारतीय खिलाड़ी की प्रतिभा और उसके उज्ज्वल भविष्य पर बड़ी मुहर माना जा रहा है।

    द हंड्रेड टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन करते हुए जोस बटलर ने टी20 क्रिकेट में सबसे ज्यादा रन बनाने का रिकॉर्ड अपने नाम किया। उन्होंने इस उपलब्धि के साथ कीरोन पोलार्ड को पीछे छोड़ दिया। इस ऐतिहासिक उपलब्धि के बाद स्टार स्पोर्ट्स से बातचीत में बटलर ने कहा कि सबसे ज्यादा टी20 रन बनाने वाला खिलाड़ी कहलाना उनके लिए बेहद खास एहसास है लेकिन उन्हें पूरा भरोसा है कि एक दिन यह रिकॉर्ड कोई और खिलाड़ी तोड़ेगा और संभवतः वह खिलाड़ी वैभव सूर्यवंशी होंगे।

    बटलर ने मुस्कुराते हुए कहा कि यह सोचना बेहद रोमांचक है कि उन्होंने टी20 क्रिकेट में सबसे ज्यादा रन बनाए हैं लेकिन रिकॉर्ड हमेशा टूटने के लिए ही बनते हैं। उनके अनुसार वैभव सूर्यवंशी में इतनी क्षमता है कि वह भविष्य में इस उपलब्धि को अपने नाम कर सकते हैं। दुनिया के दिग्गज बल्लेबाज से मिली यह तारीफ युवा भारतीय बल्लेबाज के लिए किसी बड़े सम्मान से कम नहीं मानी जा रही।

    वैभव सूर्यवंशी ने पिछले एक वर्ष में अपनी आक्रामक बल्लेबाजी से क्रिकेट प्रेमियों और विशेषज्ञों को लगातार प्रभावित किया है। कम उम्र में ही उन्होंने अपनी विस्फोटक शैली से अलग पहचान बनाई है। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सबसे कम उम्र में पदार्पण करने वाले खिलाड़ियों में शामिल वैभव ने अपने शुरुआती मुकाबलों में ही शानदार प्रदर्शन कर यह साबित कर दिया कि उनमें बड़े मंच पर खेलने का आत्मविश्वास और क्षमता दोनों मौजूद हैं।

    हाल के मुकाबलों में वैभव ने तेज गति से रन बनाकर अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने जिम्बाब्वे के खिलाफ टी20 श्रृंखला में बेहद कम गेंदों में अर्धशतक जड़कर सबका ध्यान खींचा था। इसके अलावा एक अन्य मुकाबले में उन्होंने दमदार पारी खेलते हुए शानदार स्कोर बनाया और टीम की जीत में अहम योगदान दिया। उनकी बल्लेबाजी में आक्रामकता और आत्मविश्वास दोनों साफ दिखाई देते हैं।

    घरेलू टी20 लीग में भी वैभव का प्रदर्शन लगातार चर्चा का विषय बना रहा। पूरे टूर्नामेंट में उन्होंने शानदार बल्लेबाजी करते हुए सबसे ज्यादा रन बनाए और कई यादगार पारियां खेलीं। उनकी तेज रन बनाने की क्षमता और लंबे शॉट लगाने की कला ने उन्हें भारतीय क्रिकेट का नया सितारा बना दिया है।

    दूसरी ओर जोस बटलर भी इस समय शानदार फॉर्म में हैं। रिकॉर्ड बनाने वाले मुकाबले में उन्होंने केवल 20 गेंदों में 51 रन की तूफानी पारी खेली जिसमें दो चौके और छह शानदार छक्के शामिल रहे। इस पारी के साथ उन्होंने टी20 क्रिकेट में सर्वाधिक रन बनाने वाले बल्लेबाज का स्थान हासिल किया। बटलर के नाम अब 14833 टी20 रन दर्ज हैं जबकि कीरोन पोलार्ड 14803 रन के साथ दूसरे स्थान पर हैं। इस सूची में वेस्टइंडीज के दिग्गज क्रिस गेल तीसरे स्थान पर मौजूद हैं।

    बटलर की यह भविष्यवाणी भारतीय क्रिकेट प्रशंसकों के लिए उत्साह बढ़ाने वाली है। यदि वैभव सूर्यवंशी अपने प्रदर्शन में निरंतरता बनाए रखते हैं तो आने वाले वर्षों में वह न केवल भारतीय क्रिकेट बल्कि विश्व क्रिकेट के सबसे बड़े सितारों में अपनी जगह बना सकते हैं।

  • भारतीय जूनियर स्क्वैश टीमों का शानदार प्रदर्शन, पुरुष टीम ने बनाई प्री-क्वार्टर में जगह, महिला टीम ने जीत से किया आगाज

    भारतीय जूनियर स्क्वैश टीमों का शानदार प्रदर्शन, पुरुष टीम ने बनाई प्री-क्वार्टर में जगह, महिला टीम ने जीत से किया आगाज

    नई दिल्ली । कनाडा के ओंटारियो में आयोजित वर्ल्ड जूनियर स्क्वैश टीम चैंपियनशिप में भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए अपने अभियान की जोरदार शुरुआत की है। पुरुष और महिला दोनों टीमों ने अपने शुरुआती मुकाबलों में प्रभावशाली जीत दर्ज कर भारत की मजबूत दावेदारी पेश की। जहां भारतीय पुरुष टीम ग्रुप में शीर्ष स्थान हासिल करते हुए प्री-क्वार्टर फाइनल में पहुंच गई वहीं महिला टीम ने भी पहले ही मुकाबले में शानदार जीत दर्ज कर आत्मविश्वास से भरी शुरुआत की है।

    पांचवीं वरीयता प्राप्त भारतीय पुरुष टीम ने ग्रुप चरण में अपना पहला मुकाबला नीदरलैंड के खिलाफ खेला। गुरवीर सिंह युशा नफीस और आर्यवीर दीवान की तिकड़ी ने बेहतरीन खेल का प्रदर्शन करते हुए अपने सभी मुकाबले जीते और नीदरलैंड को 3-0 से करारी शिकस्त दी। भारतीय खिलाड़ियों ने पूरे मैच के दौरान आक्रामक खेल दिखाया और विरोधी खिलाड़ियों को वापसी का कोई मौका नहीं दिया।

    ग्रुप चरण के दूसरे मुकाबले में भारत का सामना ब्राजील से हुआ। इस मैच में गुरवीर सिंह को आराम देते हुए पूरव रांभिया को टीम में शामिल किया गया। पूरव युशा नफीस और आर्यवीर दीवान ने शानदार तालमेल के साथ खेलते हुए ब्राजील के खिलाड़ियों को भी 3-0 से हराया। लगातार दूसरी एकतरफा जीत के साथ भारतीय पुरुष टीम ने ग्रुप में शीर्ष स्थान हासिल किया और प्री-क्वार्टर फाइनल में जगह सुनिश्चित कर ली। टीम का आत्मविश्वास और प्रदर्शन यह संकेत दे रहा है कि वह इस बार खिताब की मजबूत दावेदारों में शामिल है।

    महिला वर्ग में भी भारत ने विजयी शुरुआत की। पांचवीं वरीयता प्राप्त भारतीय महिला टीम ने चीनी ताइपे के खिलाफ एकतरफा मुकाबला खेलते हुए 3-0 से जीत दर्ज की। सान्वी कलंकी अनिका दुबे और रुद्र सिंह ने शानदार प्रदर्शन करते हुए अपनी प्रतिद्वंद्वी खिलाड़ियों को कोई मौका नहीं दिया। अब भारतीय महिला टीम का अगला मुकाबला मलेशिया से होगा जहां जीत दर्ज कर वह नॉकआउट चरण की ओर मजबूत कदम बढ़ाना चाहेगी।

    भारतीय महिला टीम की स्टार खिलाड़ी अनाहत सिंह को शुरुआती मुकाबले में आराम दिया गया। अनाहत ने एक दिन पहले ही विश्व जूनियर व्यक्तिगत स्क्वैश खिताब जीतकर इतिहास रचा था। टीम प्रबंधन ने उन्हें पर्याप्त आराम देने का फैसला किया ताकि आगामी महत्वपूर्ण मुकाबलों में वह पूरी ऊर्जा के साथ कोर्ट पर उतर सकें।

    टूर्नामेंट में अन्य प्रमुख टीमों ने भी शानदार शुरुआत की है। मेजबान कनाडा की महिला टीम ने नाइजीरिया को हराकर अपने अभियान का आगाज किया जबकि जापान की पुरुष टीम ने कनाडा को मात दी। वहीं गत चैंपियन मिस्र ने भी अपने खिताब बचाने की मजबूत दावेदारी पेश करते हुए महिला वर्ग में ब्राजील और पुरुष वर्ग में नीदरलैंड तथा न्यूजीलैंड को हराकर जीत दर्ज की।

    भारतीय टीमों के इस दमदार प्रदर्शन से देश के खेल प्रेमियों की उम्मीदें बढ़ गई हैं। अब सभी की नजरें आगामी मुकाबलों पर हैं जहां भारत दोनों वर्गों में पदक और खिताब की चुनौती पेश करने के इरादे से उतरेगा।

  • सपना हुआ सच, भारत की पहली जूनियर स्क्वैश वर्ल्ड चैंपियन बनीं अनाहत सिंह, बोलीं यह खिताब मेरी जिंदगी का सबसे बड़ा पल

    सपना हुआ सच, भारत की पहली जूनियर स्क्वैश वर्ल्ड चैंपियन बनीं अनाहत सिंह, बोलीं यह खिताब मेरी जिंदगी का सबसे बड़ा पल


    नई दिल्ली । मभारत की युवा स्क्वैश खिलाड़ी अनाहत सिंह ने वर्ल्ड जूनियर स्क्वैश चैंपियनशिप का खिताब जीतकर इतिहास रच दिया है। इस उपलब्धि के साथ वह यह प्रतिष्ठित खिताब जीतने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बन गई हैं। कनाडा के ओंटारियो में मिली इस ऐतिहासिक जीत के बाद अनाहत की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। भावुक अंदाज में उन्होंने कहा कि उन्हें अब भी यकीन नहीं हो रहा कि उनका सपना सच हो चुका है और उन्हें ऐसा महसूस हो रहा है जैसे वह अब भी किसी सपने में हों।

    18 वर्षीय अनाहत सिंह के लिए यह जीत इसलिए भी बेहद खास रही क्योंकि जूनियर वर्ग में यह उनका आखिरी वर्ष था। पिछले चार वर्षों से वह इस प्रतियोगिता में लगातार क्वार्टर फाइनल और सेमीफाइनल तक पहुंचने के बावजूद खिताब से दूर रह जाती थीं। कई बार निराशा हाथ लगने के बाद उन्होंने मजाक में इस टूर्नामेंट को अपने लिए श्राप तक बता दिया था लेकिन इस बार उन्होंने अपनी मेहनत और आत्मविश्वास के दम पर सारी बाधाएं तोड़ दीं।

    खिताब जीतने के बाद अनाहत ने कहा कि पिछले कई वर्षों से वह इस टूर्नामेंट में आगे बढ़ने के बावजूद अंतिम सफलता हासिल नहीं कर पाई थीं। उन्हें पता था कि जूनियर करियर में यह उनका आखिरी मौका है इसलिए उन्होंने खुद पर किसी तरह का दबाव नहीं बनने दिया। उनका लक्ष्य सिर्फ अपना स्वाभाविक खेल खेलना और फाइनल के हर पल का आनंद लेना था। यही सोच उन्हें विश्व चैंपियन बनाने में सबसे बड़ी ताकत साबित हुई।

    अनाहत ने फाइनल मुकाबले में मिस्र की दूसरी वरीयता प्राप्त खिलाड़ी रुकैया सलेम को सीधे गेमों में 11-3 11-7 और 11-9 से हराकर खिताब अपने नाम किया। पूरे टूर्नामेंट में उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए एक भी मौके पर अपने आत्मविश्वास को कमजोर नहीं पड़ने दिया। इससे पहले उन्होंने सेमीफाइनल में भी दमदार जीत दर्ज कर 21 साल बाद वर्ल्ड जूनियर स्क्वैश चैंपियनशिप के फाइनल में पहुंचने वाली पहली भारतीय बनने का गौरव हासिल किया था।

    स्क्वैश रैकेट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के महासचिव साइरस पोंचा ने अनाहत की इस उपलब्धि को भारतीय स्क्वैश के इतिहास का स्वर्णिम क्षण बताया। उन्होंने कहा कि अनाहत में विश्व स्तर पर लंबे समय तक देश का नाम रोशन करने की क्षमता है। उनके अनुसार भारतीय स्क्वैश के लिए व्यक्तिगत वर्ग में विश्व चैंपियन तैयार करने का सपना अब आखिरकार पूरा हो गया है।

    अनाहत सिंह की यह ऐतिहासिक जीत भारतीय स्क्वैश के लिए नई उम्मीद लेकर आई है। वर्ष 2028 के ओलंपिक में स्क्वैश के शामिल होने से पहले यह उपलब्धि देश के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। युवा खिलाड़ियों के लिए अनाहत का सफर इस बात का उदाहरण है कि लगातार असफलताओं के बावजूद अगर हौसला और मेहनत कायम रहे तो सपने जरूर सच होते हैं।

  • भारतीय स्क्वैश के लिए ऐतिहासिक दिन अनाहत सिंह ने जीता विश्व जूनियर खिताब टूटा मिस्र का 13 साल का दबदबा

    भारतीय स्क्वैश के लिए ऐतिहासिक दिन अनाहत सिंह ने जीता विश्व जूनियर खिताब टूटा मिस्र का 13 साल का दबदबा


    नई दिल्ली। भारतीय स्क्वैश को विश्व मंच पर एक नई पहचान दिलाते हुए 18 वर्षीय अनाहत सिंह ने ऐसा इतिहास रच दिया है जिसे लंबे समय तक याद रखा जाएगा। कनाडा के ओंटारियो में आयोजित वर्ल्ड जूनियर स्क्वैश चैंपियनशिप के महिला सिंगल्स का खिताब जीतकर अनाहत इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता की चैंपियन बनने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बन गई हैं। उनकी इस शानदार उपलब्धि पर पूरे देश में खुशी की लहर है और केंद्रीय युवा मामले एवं खेल मंत्री डॉ मनसुख मांडविया ने भी उन्हें विशेष बधाई देते हुए इसे भारतीय खेल इतिहास का गौरवपूर्ण पल बताया है।

    फाइनल मुकाबले में भारत की शीर्ष वरीयता प्राप्त खिलाड़ी और विश्व रैंकिंग में 20वें स्थान पर मौजूद अनाहत सिंह ने मिस्र की दूसरी वरीयता प्राप्त खिलाड़ी रुकैया सलेम को एकतरफा मुकाबले में 11-3 11-7 और 11-9 से हराकर खिताब अपने नाम किया। पूरे मैच के दौरान अनाहत ने शानदार तकनीक आत्मविश्वास और आक्रामक खेल का प्रदर्शन किया। उन्होंने शुरुआत से ही मुकाबले पर अपना नियंत्रण बनाए रखा और प्रतिद्वंद्वी खिलाड़ी को वापसी का कोई बड़ा मौका नहीं दिया।

    इस ऐतिहासिक जीत के बाद केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने सोशल मीडिया पर अनाहत की उपलब्धि की सराहना करते हुए लिखा कि इतिहास रच दिया गया है। उन्होंने कहा कि वर्ल्ड जूनियर स्क्वैश चैंपियनशिप जीतने वाली पहली भारतीय बनने पर अनाहत सिंह को हार्दिक बधाई। यह केवल उनकी व्यक्तिगत सफलता नहीं बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का क्षण है और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा भी है।

    अनाहत की इस जीत ने भारतीय स्क्वैश के कई वर्षों के इंतजार को भी समाप्त कर दिया। वर्ष 2005 में जोशना चिनप्पा के बाद पहली बार कोई भारतीय महिला खिलाड़ी इस प्रतियोगिता के फाइनल में पहुंची और अब 21 साल बाद भारत को इस प्रतियोगिता का चैंपियन भी मिला है। इसके साथ ही मिस्र के खिलाड़ियों का 13 वर्षों से चला आ रहा दबदबा भी समाप्त हो गया जो इस उपलब्धि को और भी खास बना देता है।

    स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया और स्क्वैश रैकेट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया ने भी अनाहत की इस सफलता को भारतीय स्क्वैश के लिए ऐतिहासिक मोड़ बताया है। अधिकारियों का मानना है कि 2028 ओलंपिक में स्क्वैश को शामिल किए जाने से पहले यह जीत भारतीय खिलाड़ियों के आत्मविश्वास को नई ऊंचाई देगी और देश में इस खेल की लोकप्रियता भी बढ़ाएगी।

    अनाहत सिंह ने फाइनल से पहले सेमीफाइनल में भी शानदार प्रदर्शन किया था। उन्होंने मिस्र की बारब सामेह को चार गेम तक चले मुकाबले में हराकर फाइनल में जगह बनाई थी। इसी जीत के साथ वह 21 वर्षों बाद विश्व जूनियर स्क्वैश चैंपियनशिप के फाइनल में पहुंचने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी भी बनी थीं। इसके बाद फाइनल में भी उन्होंने अपना शानदार फॉर्म बरकरार रखा और विश्व चैंपियन बनने का सपना साकार कर लिया।

    अनाहत की इस उपलब्धि का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि वह वर्ष 2010 में अमेरिका की अमांडा सोभी के बाद वर्ल्ड जूनियर स्क्वैश चैंपियनशिप जीतने वाली पहली गैर मिस्र खिलाड़ी भी बन गई हैं। उनकी यह सफलता भारतीय खेल जगत के लिए नई उम्मीद और नई प्रेरणा लेकर आई है। अब देश को उम्मीद है कि अनाहत आने वाले वर्षों में सीनियर स्तर पर भी भारत के लिए कई अंतरराष्ट्रीय खिताब जीतकर तिरंगे का मान बढ़ाएंगी।

  • LIVE मैच में रियान पराग पर विवाद, सिगरेट वाले वीडियो से मचा बवाल

    LIVE मैच में रियान पराग पर विवाद, सिगरेट वाले वीडियो से मचा बवाल


    नई दिल्ली | आईपीएल 2026 के बीच एक नया विवाद सामने आया है, जिसने क्रिकेट जगत में हलचल मचा दी है। रियान पराग का एक कथित वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वह लाइव मैच के दौरान सिगरेट के छल्ले उड़ाते नजर आ रहे हैं। इस वीडियो के सामने आने के बाद फैंस और क्रिकेट प्रेमियों में नाराजगी देखी जा रही है।

    हालांकि, इस वीडियो की प्रामाणिकता को लेकर अब तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इसके बावजूद यह मुद्दा चर्चा का विषय बन चुका है। कई लोग इसे खेल भावना के खिलाफ और “शर्मनाक हरकत” बता रहे हैं, जबकि कुछ का कहना है कि वीडियो एडिटेड भी हो सकता है।

    भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) की ओर से फिलहाल इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। लेकिन अगर वीडियो सही पाया जाता है, तो बोर्ड के आचार संहिता के तहत कार्रवाई संभव मानी जा रही है।

    आईपीएल जैसे बड़े मंच पर खिलाड़ियों से अनुशासन और पेशेवर व्यवहार की उम्मीद की जाती है। ऐसे में किसी भी तरह की विवादित गतिविधि लीग की छवि को प्रभावित कर सकती है। बीसीसीआई आमतौर पर खिलाड़ियों के आचरण को लेकर सख्त रुख अपनाता है और पहले भी कई मामलों में जुर्माना या निलंबन जैसी कार्रवाई की जा चुकी है।

    रियान पराग, जो राजस्थान रॉयल्स के अहम खिलाड़ी हैं, इस सीजन में अपने प्रदर्शन को लेकर भी चर्चा में रहे हैं। ऐसे में यह विवाद उनके लिए मुश्किलें खड़ी कर सकता है।

    फिलहाल सभी की नजरें बीसीसीआई के अगले कदम पर टिकी हैं। अगर जांच में वीडियो सही पाया जाता है, तो पराग को सजा का सामना करना पड़ सकता है। वहीं अगर यह फर्जी साबित होता है, तो मामला यहीं खत्म हो जाएगा।

    कुल मिलाकर, यह विवाद आईपीएल 2026 के बीच एक नया मोड़ लेकर आया है, जहां खेल के साथ-साथ खिलाड़ियों के आचरण पर भी सवाल उठ रहे हैं।