Tag: Sports News

  • गोल्डन बॉय की राह में चोट बनी रोड़ा! नीरज चोपड़ा एशियन गेम्स से बाहर, भारत की गोल्ड की उम्मीदों को लगा झटका

    गोल्डन बॉय की राह में चोट बनी रोड़ा! नीरज चोपड़ा एशियन गेम्स से बाहर, भारत की गोल्ड की उम्मीदों को लगा झटका


    नई दिल्ली । भारत के स्टार जैवलिन थ्रोअर और दो बार के ओलंपिक पदक विजेता नीरज चोपड़ा को लेकर खेल जगत से बेहद निराश करने वाली खबर सामने आई है। नीरज चोपड़ा चोट के कारण 2026 के बाकी बचे सीजन से बाहर हो गए हैं। इसका सीधा असर सितंबर में जापान के आइची नागोया में होने वाले एशियन गेम्स पर भी पड़ा है जहां नीरज अपने जैवलिन थ्रो के खिताब का बचाव करने उतरने वाले थे। नीरज की गैरमौजूदगी भारत के लिए बड़ा झटका मानी जा रही है क्योंकि वह देश के सबसे मजबूत पदक दावेदारों में शामिल थे और एशियन गेम्स में उनसे एक बार फिर शानदार प्रदर्शन की उम्मीद थी।

    नीरज ने खुद सोशल मीडिया के जरिए अपनी चोट की जानकारी फैन्स के साथ साझा की है। उन्होंने बताया कि लुसाने डायमंड लीग में 88.05 मीटर का सीजन बेस्ट थ्रो करने के बाद वह शानदार लय महसूस कर रहे थे। लंबे समय से जिस मोमेंटम की उन्हें तलाश थी वह उन्हें वापस मिलता नजर आ रहा था लेकिन इसी दौरान ट्रेनिंग में उनके टखने के लिगामेंट में टियर हो गया। चोट के बाद उन्होंने अपनी मेडिकल टीम और डॉक्टरों के साथ विस्तार से चर्चा की और इसके बाद इस सीजन के बाकी मुकाबलों से दूर रहने का फैसला किया।

    नीरज के लिए यह फैसला आसान नहीं रहा होगा क्योंकि चोट ऐसे समय पर आई जब उनका प्रदर्शन धीरे धीरे बेहतर होता दिखाई दे रहा था। ग्लासगो में हुए मुकाबले में उन्होंने पोडियम फिनिश हासिल किया था लेकिन श्रीलंका के रुमेश पथिरागे ने 89.75 मीटर का शानदार थ्रो करते हुए उनसे गोल्ड मेडल छीन लिया था। इसके बाद लुसाने डायमंड लीग में भी नीरज ने हिस्सा लिया और 88.05 मीटर का थ्रो उनके लिए सीजन का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन रहा। वह क्वालिफिकेशन की रेस में आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे थे लेकिन चोट ने उनके पूरे सीजन पर ब्रेक लगा दिया।

    एशियन गेम्स 2026 का आयोजन 19 सितंबर से 4 अक्टूबर तक जापान के आइची नागोया में होना है। नीरज के बाहर होने का सबसे बड़ा झटका यह है कि वह जैवलिन थ्रो में अपने पिछले खिताब का बचाव नहीं कर पाएंगे। उनके नाम की मौजूदगी ही भारत के लिए पदक की बड़ी उम्मीद मानी जाती थी। ऐसे में उनकी अनुपस्थिति से भारतीय एथलेटिक्स टीम पर अतिरिक्त दबाव बढ़ गया है।

    हालांकि नीरज ने इस मुश्किल वक्त में भी सकारात्मक रवैया दिखाया है। उनका कहना है कि चोट और मुश्किलें खेल के सफर का हिस्सा हैं और फिलहाल उनका पूरा ध्यान रिकवरी पर है। वह पूरी तरह फिट होकर पहले से ज्यादा मजबूती के साथ मैदान पर वापसी करना चाहते हैं। अब नीरज की गैरमौजूदगी में भारत की उम्मीदें रोहित यादव पर टिक गई हैं। रोहित ने हाल ही में भुवनेश्वर में 87.68 मीटर का व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ थ्रो करते हुए जीत दर्ज की थी। नीरज के बाहर होने के बाद रोहित एशियन गेम्स में भारत के प्रमुख जैवलिन पदक दावेदार के रूप में नजर आएंगे।

  • तीन पदकों के साथ भारत ने रचा शानदार अभियान, पूजा सिंह का हाई जंप फाइनल में नहीं चला जलवा

    तीन पदकों के साथ भारत ने रचा शानदार अभियान, पूजा सिंह का हाई जंप फाइनल में नहीं चला जलवा


    नई दिल्ली । यूजीन में आयोजित वर्ल्ड एथलेटिक्स अंडर-20 चैंपियनशिप में भारत का अभियान तीन पदकों के साथ समाप्त हुआ। भारतीय खिलाड़ियों ने प्रतियोगिता में दो सिल्वर और एक ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया। हालांकि नेशनल सीनियर रिकॉर्ड होल्डर पूजा सिंह से महिलाओं की हाई जंप स्पर्धा में बड़ी उम्मीदें थीं, लेकिन फाइनल में उनका प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा और उन्हें सातवें स्थान से संतोष करना पड़ा।

    19 वर्षीय पूजा सिंह इस प्रतियोगिता में मजबूत दावेदार के तौर पर उतरी थीं। उन्होंने इसी साल की शुरुआत में 1.93 मीटर की छलांग लगाकर नेशनल सीनियर रिकॉर्ड बनाया था। इसके अलावा मई में एशियन अंडर-20 एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भी पूजा ने 1.93 मीटर की ऊंचाई पार करते हुए गोल्ड मेडल जीता था। शानदार फॉर्म के कारण उनसे वर्ल्ड अंडर-20 चैंपियनशिप में भी पदक की उम्मीद की जा रही थी।

    महिलाओं की हाई जंप फाइनल में पूजा सिंह ने 1.84 मीटर की ऊंचाई सफलतापूर्वक पार की। इसके बाद उन्होंने 1.87 मीटर की ऊंचाई पार करने की तीन कोशिशें कीं, लेकिन तीनों प्रयास असफल रहे। इस कारण उन्हें सातवें स्थान पर प्रतियोगिता से बाहर होना पड़ा। ऑस्ट्रेलिया की इजोबेल लुइसन-रो ने 1.92 मीटर की छलांग लगाकर गोल्ड मेडल अपने नाम किया। हंगरी की लिलियाना बाटोरी ने सिल्वर और स्पेन की एताना अलोंसो ने ब्रॉन्ज मेडल जीता।

    पूजा का इस सीजन में प्रदर्शन हालांकि बेहद प्रभावशाली रहा है। एशियन अंडर-20 चैंपियनशिप में रिकॉर्ड प्रदर्शन के साथ गोल्ड जीतने के अलावा वह सीनियर एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप की मौजूदा चैंपियन भी हैं। ऐसे में वर्ल्ड अंडर-20 चैंपियनशिप में पदक से चूकना उनके लिए निराशाजनक जरूर रहा, लेकिन उनका लगातार बेहतर प्रदर्शन भारतीय एथलेटिक्स के लिए सकारात्मक संकेत है।

    भारत की महिला 4×400 मीटर रिले टीम का प्रदर्शन भी फाइनल में उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा। भूमिका नेहते, तहुरा खातून, तनु चौधरी और थिया अरुमुगम की भारतीय टीम ने 3 मिनट 45.28 सेकंड का समय दर्ज किया और फाइनल में आखिरी स्थान पर रही। अमेरिका ने 3 मिनट 29.15 सेकंड के समय के साथ गोल्ड मेडल जीता। ऑस्ट्रेलिया को 3 मिनट 31.39 सेकंड के साथ सिल्वर और ग्रेट ब्रिटेन को 3 मिनट 32.08 सेकंड के साथ ब्रॉन्ज मेडल मिला।

    भारत के तीन पदकों में दो सिल्वर और एक ब्रॉन्ज शामिल रहे। आशीष यादव ने पुरुषों की जैवलिन थ्रो में सिल्वर मेडल जीतकर भारत के अभियान की शुरुआत की। इसके बाद बसंत कुमार मेघवाल ने पुरुषों की हाई जंप में सिल्वर मेडल अपने नाम किया। पुरुषों की लॉन्ग जंप में शाहनवाज खान ने ब्रॉन्ज मेडल जीतकर भारत की पदक संख्या तीन तक पहुंचाई।

    इस प्रदर्शन के साथ भारत ने वर्ल्ड एथलेटिक्स अंडर-20 चैंपियनशिप का समापन तीन पदकों के साथ किया। खास बात यह है कि भारत ने 2021 और 2022 के संस्करणों में जितने कुल पदक जीते थे, इस बार भी उतने ही पदक हासिल किए। पूजा सिंह भले ही अपने रिकॉर्ड प्रदर्शन को पदक में नहीं बदल सकीं, लेकिन युवा भारतीय एथलीटों का यह प्रदर्शन आने वाले वर्षों के लिए उम्मीद जगाता है।

  • टी20 क्रिकेट में बटलर का नया कीर्तिमान, वैभव सूर्यवंशी की जमकर तारीफ; बोले- कई रिकॉर्ड तोड़ेगा

    टी20 क्रिकेट में बटलर का नया कीर्तिमान, वैभव सूर्यवंशी की जमकर तारीफ; बोले- कई रिकॉर्ड तोड़ेगा


    नई दिल्ली। टी20 क्रिकेट में नया इतिहास रचने वाले इंग्लैंड के स्टार बल्लेबाज जोस बटलर ने भारतीय क्रिकेट के उभरते सितारे वैभव सूर्यवंशी को लेकर ऐसी भविष्यवाणी की है जिसने क्रिकेट जगत का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। क्रिकेट के सबसे छोटे प्रारूप में सर्वाधिक रन बनाने वाले बल्लेबाज बनने के बाद बटलर ने कहा कि भविष्य में यदि कोई खिलाड़ी उनका रिकॉर्ड तोड़ सकता है तो वह 15 वर्षीय भारतीय बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी हैं। बटलर का यह बयान युवा भारतीय खिलाड़ी की प्रतिभा और उसके उज्ज्वल भविष्य पर बड़ी मुहर माना जा रहा है।

    द हंड्रेड टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन करते हुए जोस बटलर ने टी20 क्रिकेट में सबसे ज्यादा रन बनाने का रिकॉर्ड अपने नाम किया। उन्होंने इस उपलब्धि के साथ कीरोन पोलार्ड को पीछे छोड़ दिया। इस ऐतिहासिक उपलब्धि के बाद स्टार स्पोर्ट्स से बातचीत में बटलर ने कहा कि सबसे ज्यादा टी20 रन बनाने वाला खिलाड़ी कहलाना उनके लिए बेहद खास एहसास है लेकिन उन्हें पूरा भरोसा है कि एक दिन यह रिकॉर्ड कोई और खिलाड़ी तोड़ेगा और संभवतः वह खिलाड़ी वैभव सूर्यवंशी होंगे।

    बटलर ने मुस्कुराते हुए कहा कि यह सोचना बेहद रोमांचक है कि उन्होंने टी20 क्रिकेट में सबसे ज्यादा रन बनाए हैं लेकिन रिकॉर्ड हमेशा टूटने के लिए ही बनते हैं। उनके अनुसार वैभव सूर्यवंशी में इतनी क्षमता है कि वह भविष्य में इस उपलब्धि को अपने नाम कर सकते हैं। दुनिया के दिग्गज बल्लेबाज से मिली यह तारीफ युवा भारतीय बल्लेबाज के लिए किसी बड़े सम्मान से कम नहीं मानी जा रही।

    वैभव सूर्यवंशी ने पिछले एक वर्ष में अपनी आक्रामक बल्लेबाजी से क्रिकेट प्रेमियों और विशेषज्ञों को लगातार प्रभावित किया है। कम उम्र में ही उन्होंने अपनी विस्फोटक शैली से अलग पहचान बनाई है। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सबसे कम उम्र में पदार्पण करने वाले खिलाड़ियों में शामिल वैभव ने अपने शुरुआती मुकाबलों में ही शानदार प्रदर्शन कर यह साबित कर दिया कि उनमें बड़े मंच पर खेलने का आत्मविश्वास और क्षमता दोनों मौजूद हैं।

    हाल के मुकाबलों में वैभव ने तेज गति से रन बनाकर अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने जिम्बाब्वे के खिलाफ टी20 श्रृंखला में बेहद कम गेंदों में अर्धशतक जड़कर सबका ध्यान खींचा था। इसके अलावा एक अन्य मुकाबले में उन्होंने दमदार पारी खेलते हुए शानदार स्कोर बनाया और टीम की जीत में अहम योगदान दिया। उनकी बल्लेबाजी में आक्रामकता और आत्मविश्वास दोनों साफ दिखाई देते हैं।

    घरेलू टी20 लीग में भी वैभव का प्रदर्शन लगातार चर्चा का विषय बना रहा। पूरे टूर्नामेंट में उन्होंने शानदार बल्लेबाजी करते हुए सबसे ज्यादा रन बनाए और कई यादगार पारियां खेलीं। उनकी तेज रन बनाने की क्षमता और लंबे शॉट लगाने की कला ने उन्हें भारतीय क्रिकेट का नया सितारा बना दिया है।

    दूसरी ओर जोस बटलर भी इस समय शानदार फॉर्म में हैं। रिकॉर्ड बनाने वाले मुकाबले में उन्होंने केवल 20 गेंदों में 51 रन की तूफानी पारी खेली जिसमें दो चौके और छह शानदार छक्के शामिल रहे। इस पारी के साथ उन्होंने टी20 क्रिकेट में सर्वाधिक रन बनाने वाले बल्लेबाज का स्थान हासिल किया। बटलर के नाम अब 14833 टी20 रन दर्ज हैं जबकि कीरोन पोलार्ड 14803 रन के साथ दूसरे स्थान पर हैं। इस सूची में वेस्टइंडीज के दिग्गज क्रिस गेल तीसरे स्थान पर मौजूद हैं।

    बटलर की यह भविष्यवाणी भारतीय क्रिकेट प्रशंसकों के लिए उत्साह बढ़ाने वाली है। यदि वैभव सूर्यवंशी अपने प्रदर्शन में निरंतरता बनाए रखते हैं तो आने वाले वर्षों में वह न केवल भारतीय क्रिकेट बल्कि विश्व क्रिकेट के सबसे बड़े सितारों में अपनी जगह बना सकते हैं।

  • भारतीय जूनियर स्क्वैश टीमों का शानदार प्रदर्शन, पुरुष टीम ने बनाई प्री-क्वार्टर में जगह, महिला टीम ने जीत से किया आगाज

    भारतीय जूनियर स्क्वैश टीमों का शानदार प्रदर्शन, पुरुष टीम ने बनाई प्री-क्वार्टर में जगह, महिला टीम ने जीत से किया आगाज

    नई दिल्ली । कनाडा के ओंटारियो में आयोजित वर्ल्ड जूनियर स्क्वैश टीम चैंपियनशिप में भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए अपने अभियान की जोरदार शुरुआत की है। पुरुष और महिला दोनों टीमों ने अपने शुरुआती मुकाबलों में प्रभावशाली जीत दर्ज कर भारत की मजबूत दावेदारी पेश की। जहां भारतीय पुरुष टीम ग्रुप में शीर्ष स्थान हासिल करते हुए प्री-क्वार्टर फाइनल में पहुंच गई वहीं महिला टीम ने भी पहले ही मुकाबले में शानदार जीत दर्ज कर आत्मविश्वास से भरी शुरुआत की है।

    पांचवीं वरीयता प्राप्त भारतीय पुरुष टीम ने ग्रुप चरण में अपना पहला मुकाबला नीदरलैंड के खिलाफ खेला। गुरवीर सिंह युशा नफीस और आर्यवीर दीवान की तिकड़ी ने बेहतरीन खेल का प्रदर्शन करते हुए अपने सभी मुकाबले जीते और नीदरलैंड को 3-0 से करारी शिकस्त दी। भारतीय खिलाड़ियों ने पूरे मैच के दौरान आक्रामक खेल दिखाया और विरोधी खिलाड़ियों को वापसी का कोई मौका नहीं दिया।

    ग्रुप चरण के दूसरे मुकाबले में भारत का सामना ब्राजील से हुआ। इस मैच में गुरवीर सिंह को आराम देते हुए पूरव रांभिया को टीम में शामिल किया गया। पूरव युशा नफीस और आर्यवीर दीवान ने शानदार तालमेल के साथ खेलते हुए ब्राजील के खिलाड़ियों को भी 3-0 से हराया। लगातार दूसरी एकतरफा जीत के साथ भारतीय पुरुष टीम ने ग्रुप में शीर्ष स्थान हासिल किया और प्री-क्वार्टर फाइनल में जगह सुनिश्चित कर ली। टीम का आत्मविश्वास और प्रदर्शन यह संकेत दे रहा है कि वह इस बार खिताब की मजबूत दावेदारों में शामिल है।

    महिला वर्ग में भी भारत ने विजयी शुरुआत की। पांचवीं वरीयता प्राप्त भारतीय महिला टीम ने चीनी ताइपे के खिलाफ एकतरफा मुकाबला खेलते हुए 3-0 से जीत दर्ज की। सान्वी कलंकी अनिका दुबे और रुद्र सिंह ने शानदार प्रदर्शन करते हुए अपनी प्रतिद्वंद्वी खिलाड़ियों को कोई मौका नहीं दिया। अब भारतीय महिला टीम का अगला मुकाबला मलेशिया से होगा जहां जीत दर्ज कर वह नॉकआउट चरण की ओर मजबूत कदम बढ़ाना चाहेगी।

    भारतीय महिला टीम की स्टार खिलाड़ी अनाहत सिंह को शुरुआती मुकाबले में आराम दिया गया। अनाहत ने एक दिन पहले ही विश्व जूनियर व्यक्तिगत स्क्वैश खिताब जीतकर इतिहास रचा था। टीम प्रबंधन ने उन्हें पर्याप्त आराम देने का फैसला किया ताकि आगामी महत्वपूर्ण मुकाबलों में वह पूरी ऊर्जा के साथ कोर्ट पर उतर सकें।

    टूर्नामेंट में अन्य प्रमुख टीमों ने भी शानदार शुरुआत की है। मेजबान कनाडा की महिला टीम ने नाइजीरिया को हराकर अपने अभियान का आगाज किया जबकि जापान की पुरुष टीम ने कनाडा को मात दी। वहीं गत चैंपियन मिस्र ने भी अपने खिताब बचाने की मजबूत दावेदारी पेश करते हुए महिला वर्ग में ब्राजील और पुरुष वर्ग में नीदरलैंड तथा न्यूजीलैंड को हराकर जीत दर्ज की।

    भारतीय टीमों के इस दमदार प्रदर्शन से देश के खेल प्रेमियों की उम्मीदें बढ़ गई हैं। अब सभी की नजरें आगामी मुकाबलों पर हैं जहां भारत दोनों वर्गों में पदक और खिताब की चुनौती पेश करने के इरादे से उतरेगा।

  • सपना हुआ सच, भारत की पहली जूनियर स्क्वैश वर्ल्ड चैंपियन बनीं अनाहत सिंह, बोलीं यह खिताब मेरी जिंदगी का सबसे बड़ा पल

    सपना हुआ सच, भारत की पहली जूनियर स्क्वैश वर्ल्ड चैंपियन बनीं अनाहत सिंह, बोलीं यह खिताब मेरी जिंदगी का सबसे बड़ा पल


    नई दिल्ली । मभारत की युवा स्क्वैश खिलाड़ी अनाहत सिंह ने वर्ल्ड जूनियर स्क्वैश चैंपियनशिप का खिताब जीतकर इतिहास रच दिया है। इस उपलब्धि के साथ वह यह प्रतिष्ठित खिताब जीतने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बन गई हैं। कनाडा के ओंटारियो में मिली इस ऐतिहासिक जीत के बाद अनाहत की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। भावुक अंदाज में उन्होंने कहा कि उन्हें अब भी यकीन नहीं हो रहा कि उनका सपना सच हो चुका है और उन्हें ऐसा महसूस हो रहा है जैसे वह अब भी किसी सपने में हों।

    18 वर्षीय अनाहत सिंह के लिए यह जीत इसलिए भी बेहद खास रही क्योंकि जूनियर वर्ग में यह उनका आखिरी वर्ष था। पिछले चार वर्षों से वह इस प्रतियोगिता में लगातार क्वार्टर फाइनल और सेमीफाइनल तक पहुंचने के बावजूद खिताब से दूर रह जाती थीं। कई बार निराशा हाथ लगने के बाद उन्होंने मजाक में इस टूर्नामेंट को अपने लिए श्राप तक बता दिया था लेकिन इस बार उन्होंने अपनी मेहनत और आत्मविश्वास के दम पर सारी बाधाएं तोड़ दीं।

    खिताब जीतने के बाद अनाहत ने कहा कि पिछले कई वर्षों से वह इस टूर्नामेंट में आगे बढ़ने के बावजूद अंतिम सफलता हासिल नहीं कर पाई थीं। उन्हें पता था कि जूनियर करियर में यह उनका आखिरी मौका है इसलिए उन्होंने खुद पर किसी तरह का दबाव नहीं बनने दिया। उनका लक्ष्य सिर्फ अपना स्वाभाविक खेल खेलना और फाइनल के हर पल का आनंद लेना था। यही सोच उन्हें विश्व चैंपियन बनाने में सबसे बड़ी ताकत साबित हुई।

    अनाहत ने फाइनल मुकाबले में मिस्र की दूसरी वरीयता प्राप्त खिलाड़ी रुकैया सलेम को सीधे गेमों में 11-3 11-7 और 11-9 से हराकर खिताब अपने नाम किया। पूरे टूर्नामेंट में उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए एक भी मौके पर अपने आत्मविश्वास को कमजोर नहीं पड़ने दिया। इससे पहले उन्होंने सेमीफाइनल में भी दमदार जीत दर्ज कर 21 साल बाद वर्ल्ड जूनियर स्क्वैश चैंपियनशिप के फाइनल में पहुंचने वाली पहली भारतीय बनने का गौरव हासिल किया था।

    स्क्वैश रैकेट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के महासचिव साइरस पोंचा ने अनाहत की इस उपलब्धि को भारतीय स्क्वैश के इतिहास का स्वर्णिम क्षण बताया। उन्होंने कहा कि अनाहत में विश्व स्तर पर लंबे समय तक देश का नाम रोशन करने की क्षमता है। उनके अनुसार भारतीय स्क्वैश के लिए व्यक्तिगत वर्ग में विश्व चैंपियन तैयार करने का सपना अब आखिरकार पूरा हो गया है।

    अनाहत सिंह की यह ऐतिहासिक जीत भारतीय स्क्वैश के लिए नई उम्मीद लेकर आई है। वर्ष 2028 के ओलंपिक में स्क्वैश के शामिल होने से पहले यह उपलब्धि देश के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। युवा खिलाड़ियों के लिए अनाहत का सफर इस बात का उदाहरण है कि लगातार असफलताओं के बावजूद अगर हौसला और मेहनत कायम रहे तो सपने जरूर सच होते हैं।

  • भारतीय स्क्वैश के लिए ऐतिहासिक दिन अनाहत सिंह ने जीता विश्व जूनियर खिताब टूटा मिस्र का 13 साल का दबदबा

    भारतीय स्क्वैश के लिए ऐतिहासिक दिन अनाहत सिंह ने जीता विश्व जूनियर खिताब टूटा मिस्र का 13 साल का दबदबा


    नई दिल्ली। भारतीय स्क्वैश को विश्व मंच पर एक नई पहचान दिलाते हुए 18 वर्षीय अनाहत सिंह ने ऐसा इतिहास रच दिया है जिसे लंबे समय तक याद रखा जाएगा। कनाडा के ओंटारियो में आयोजित वर्ल्ड जूनियर स्क्वैश चैंपियनशिप के महिला सिंगल्स का खिताब जीतकर अनाहत इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता की चैंपियन बनने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बन गई हैं। उनकी इस शानदार उपलब्धि पर पूरे देश में खुशी की लहर है और केंद्रीय युवा मामले एवं खेल मंत्री डॉ मनसुख मांडविया ने भी उन्हें विशेष बधाई देते हुए इसे भारतीय खेल इतिहास का गौरवपूर्ण पल बताया है।

    फाइनल मुकाबले में भारत की शीर्ष वरीयता प्राप्त खिलाड़ी और विश्व रैंकिंग में 20वें स्थान पर मौजूद अनाहत सिंह ने मिस्र की दूसरी वरीयता प्राप्त खिलाड़ी रुकैया सलेम को एकतरफा मुकाबले में 11-3 11-7 और 11-9 से हराकर खिताब अपने नाम किया। पूरे मैच के दौरान अनाहत ने शानदार तकनीक आत्मविश्वास और आक्रामक खेल का प्रदर्शन किया। उन्होंने शुरुआत से ही मुकाबले पर अपना नियंत्रण बनाए रखा और प्रतिद्वंद्वी खिलाड़ी को वापसी का कोई बड़ा मौका नहीं दिया।

    इस ऐतिहासिक जीत के बाद केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने सोशल मीडिया पर अनाहत की उपलब्धि की सराहना करते हुए लिखा कि इतिहास रच दिया गया है। उन्होंने कहा कि वर्ल्ड जूनियर स्क्वैश चैंपियनशिप जीतने वाली पहली भारतीय बनने पर अनाहत सिंह को हार्दिक बधाई। यह केवल उनकी व्यक्तिगत सफलता नहीं बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का क्षण है और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा भी है।

    अनाहत की इस जीत ने भारतीय स्क्वैश के कई वर्षों के इंतजार को भी समाप्त कर दिया। वर्ष 2005 में जोशना चिनप्पा के बाद पहली बार कोई भारतीय महिला खिलाड़ी इस प्रतियोगिता के फाइनल में पहुंची और अब 21 साल बाद भारत को इस प्रतियोगिता का चैंपियन भी मिला है। इसके साथ ही मिस्र के खिलाड़ियों का 13 वर्षों से चला आ रहा दबदबा भी समाप्त हो गया जो इस उपलब्धि को और भी खास बना देता है।

    स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया और स्क्वैश रैकेट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया ने भी अनाहत की इस सफलता को भारतीय स्क्वैश के लिए ऐतिहासिक मोड़ बताया है। अधिकारियों का मानना है कि 2028 ओलंपिक में स्क्वैश को शामिल किए जाने से पहले यह जीत भारतीय खिलाड़ियों के आत्मविश्वास को नई ऊंचाई देगी और देश में इस खेल की लोकप्रियता भी बढ़ाएगी।

    अनाहत सिंह ने फाइनल से पहले सेमीफाइनल में भी शानदार प्रदर्शन किया था। उन्होंने मिस्र की बारब सामेह को चार गेम तक चले मुकाबले में हराकर फाइनल में जगह बनाई थी। इसी जीत के साथ वह 21 वर्षों बाद विश्व जूनियर स्क्वैश चैंपियनशिप के फाइनल में पहुंचने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी भी बनी थीं। इसके बाद फाइनल में भी उन्होंने अपना शानदार फॉर्म बरकरार रखा और विश्व चैंपियन बनने का सपना साकार कर लिया।

    अनाहत की इस उपलब्धि का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि वह वर्ष 2010 में अमेरिका की अमांडा सोभी के बाद वर्ल्ड जूनियर स्क्वैश चैंपियनशिप जीतने वाली पहली गैर मिस्र खिलाड़ी भी बन गई हैं। उनकी यह सफलता भारतीय खेल जगत के लिए नई उम्मीद और नई प्रेरणा लेकर आई है। अब देश को उम्मीद है कि अनाहत आने वाले वर्षों में सीनियर स्तर पर भी भारत के लिए कई अंतरराष्ट्रीय खिताब जीतकर तिरंगे का मान बढ़ाएंगी।

  • LIVE मैच में रियान पराग पर विवाद, सिगरेट वाले वीडियो से मचा बवाल

    LIVE मैच में रियान पराग पर विवाद, सिगरेट वाले वीडियो से मचा बवाल


    नई दिल्ली | आईपीएल 2026 के बीच एक नया विवाद सामने आया है, जिसने क्रिकेट जगत में हलचल मचा दी है। रियान पराग का एक कथित वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वह लाइव मैच के दौरान सिगरेट के छल्ले उड़ाते नजर आ रहे हैं। इस वीडियो के सामने आने के बाद फैंस और क्रिकेट प्रेमियों में नाराजगी देखी जा रही है।

    हालांकि, इस वीडियो की प्रामाणिकता को लेकर अब तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इसके बावजूद यह मुद्दा चर्चा का विषय बन चुका है। कई लोग इसे खेल भावना के खिलाफ और “शर्मनाक हरकत” बता रहे हैं, जबकि कुछ का कहना है कि वीडियो एडिटेड भी हो सकता है।

    भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) की ओर से फिलहाल इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। लेकिन अगर वीडियो सही पाया जाता है, तो बोर्ड के आचार संहिता के तहत कार्रवाई संभव मानी जा रही है।

    आईपीएल जैसे बड़े मंच पर खिलाड़ियों से अनुशासन और पेशेवर व्यवहार की उम्मीद की जाती है। ऐसे में किसी भी तरह की विवादित गतिविधि लीग की छवि को प्रभावित कर सकती है। बीसीसीआई आमतौर पर खिलाड़ियों के आचरण को लेकर सख्त रुख अपनाता है और पहले भी कई मामलों में जुर्माना या निलंबन जैसी कार्रवाई की जा चुकी है।

    रियान पराग, जो राजस्थान रॉयल्स के अहम खिलाड़ी हैं, इस सीजन में अपने प्रदर्शन को लेकर भी चर्चा में रहे हैं। ऐसे में यह विवाद उनके लिए मुश्किलें खड़ी कर सकता है।

    फिलहाल सभी की नजरें बीसीसीआई के अगले कदम पर टिकी हैं। अगर जांच में वीडियो सही पाया जाता है, तो पराग को सजा का सामना करना पड़ सकता है। वहीं अगर यह फर्जी साबित होता है, तो मामला यहीं खत्म हो जाएगा।

    कुल मिलाकर, यह विवाद आईपीएल 2026 के बीच एक नया मोड़ लेकर आया है, जहां खेल के साथ-साथ खिलाड़ियों के आचरण पर भी सवाल उठ रहे हैं।

  • चोट के बावजूद खेल रहे हैं Virat Kohli, फिटनेस को लेकर बड़ा खुलासा

    चोट के बावजूद खेल रहे हैं Virat Kohli, फिटनेस को लेकर बड़ा खुलासा

     
    नई दिल्ली। आईपीएल 2026 के रोमांचक मुकाबले में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) ने लखनऊ सुपर जायंट्स (LSG) को 5 विकेट से हराकर एक और जीत अपने नाम की। 147 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए RCB ने 29 गेंद शेष रहते 149 रन बनाकर आसान जीत दर्ज की। इस जीत में सबसे अहम भूमिका विराट कोहली की रही, जिन्होंने 34 गेंदों पर 49 रन बनाए और टीम को मजबूत शुरुआत दी। उनकी इस पारी में 6 चौके और 1 छक्का शामिल रहा। कोहली ने देवदत्त पडिक्कल के साथ दूसरे विकेट के लिए 57 रनों की साझेदारी कर जीत की नींव रखी।

    घुटने की चोट से जूझ रहे हैं विराट कोहली

    मैच के बाद विराट कोहली ने बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि उनका घुटना अभी पूरी तरह ठीक नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि पिछले एक सप्ताह से वह घुटने में दर्द और सूजन की समस्या से परेशान हैं। कोहली ने माना कि वह इस मैच में भी 100 प्रतिशत फिट नहीं थे, लेकिन टीम के लिए मैदान पर उतरना जरूरी था। उन्होंने कहा कि पिछले मुकाबले की तुलना में स्थिति बेहतर है, लेकिन अभी पूरी तरह फिट होने में समय लगेगा।

    ‘मैं अभी पूरी तरह फिट नहीं हूं’ – कोहली

    कोहली ने मैच के बाद बातचीत में बताया कि पिछले चार-पांच दिनों से उनका स्वास्थ्य भी ठीक नहीं रहा। उन्होंने कहा कि उनकी कोशिश थी कि पावरप्ले में ही मैच का रुख बदल दिया जाए। हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि वह मैच को और बेहतर तरीके से खत्म कर सकते थे। इसके बावजूद उन्होंने अपनी बल्लेबाजी और जज्बे पर संतोष जताया।

    पिच और रणनीति पर भी रखी राय

    विराट कोहली ने पिच को लेकर कहा कि सतह पर ज्यादा घास नहीं थी और यह अपेक्षाकृत धीमी थी। गर्म मौसम के कारण पिच का व्यवहार अलग था, जिससे बल्लेबाजी चुनौतीपूर्ण हो गई थी। उन्होंने बताया कि उनकी रणनीति शुरुआती ओवरों में ही विपक्षी टीम पर दबाव बनाने की थी, ताकि लक्ष्य आसान हो सके।

    RCB की गेंदबाजी ने भी दिखाया दम

    इस मुकाबले में RCB की जीत में गेंदबाजों का भी अहम योगदान रहा। रसिख सलाम ने 4 विकेट और भुवनेश्वर कुमार ने 3 विकेट लेकर LSG की बल्लेबाजी को झकझोर दिया। LSG की पूरी टीम 146 रन पर सिमट गई। कृणाल पंड्या ने भी 2 विकेट हासिल किए। बेहतरीन गेंदबाजी के कारण RCB को आसान लक्ष्य मिला।

    LSG के कार्यवाहक कप्तान ने मानी कमजोरी

    LSG के कप्तान निकोलस पूरन ने हार के बाद स्वीकार किया कि उनकी टीम इस सीजन में लगातार अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पा रही है। उन्होंने कहा कि 175 रन का स्कोर प्रतिस्पर्धी होता, लेकिन बल्लेबाज अच्छा प्रदर्शन नहीं कर सके। पूरन ने माना कि टी20 क्रिकेट में निरंतरता मुश्किल होती है, लेकिन टीम प्रयास कर रही है।

    यह मुकाबला RCB की शानदार जीत के साथ-साथ विराट कोहली की फिटनेस को लेकर चिंता भी छोड़ गया है। घुटने की चोट के बावजूद उनका प्रदर्शन टीम के लिए बेहद अहम साबित हुआ, लेकिन आने वाले मैचों में उनकी उपलब्धता और फिटनेस RCB के अभियान के लिए निर्णायक साबित हो सकती है।

  • हरमनप्रीत कौर का बड़ा बयान: इस साल टीम इंडिया ने जीतीं सभी ट्रॉफियां

    हरमनप्रीत कौर का बड़ा बयान: इस साल टीम इंडिया ने जीतीं सभी ट्रॉफियां


    नई दिल्ली। भारत को बतौर कप्तान वनडे वर्ल्ड कप 2025 का खिताब जिताने वाली कप्तान हरमनप्रीत कौर ने महिला क्रिकेट की पहचान और लोकप्रियता में आए बदलाव को जीना ‘एक शानदार एहसास’ बताया है। कप्तान और उनकी टीम को पता था कि देश में बदलाव तभी आएगा, जब उनके नाम कोई बड़ी ट्रॉफी होगी। इसके साथ ही उन्होंने टीम इंडिया की सफलता का श्रेय भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) को दिया है।

    भारत ने साल 2026 में हुए दोनों आईसीसी इवेंट्स अपने नाम किए हैं। कौर ने सभी फॉर्मेट में भारत के दबदबे का श्रेय भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) को देते हुए कहा, “इस साल, हमने अब तक सभी ट्रॉफियां जीती हैं। यह दिखाता है कि बीसीसीआई क्रिकेट के सभी फॉर्मेट को हर स्टेज पर बेहतर बनाने के लिए कितनी मेहनत कर रहा है। मुझे लगता है कि उनकी मेहनत रंग ला रही है। हमारी सभी टीमों ने अच्छा प्रदर्शन किया है और सभी टीमों ने आईसीसी टाइटल जीते हैं।”

    बुधवार को नई दिल्ली के द्वारका के ओमेक्स स्टेडियम में हरमनप्रीत कौर के सम्मान में स्टैंड का नामकरण हुआ। इस दौरान हरमनप्रीत ने ‘आईएएनएस’ से कहा, “जाहिर है, मुझे बहुत अच्छा लग रहा है। हम सभी जानते थे कि जब वर्ल्ड कप जीतेंगे, तो चीजें बदल जाएंगी। इसलिए, उस बदलाव को महसूस करना और उस बदलाव को जीने का मौका मिलना एक शानदार एहसास है।”

    ओमेक्स स्टेट स्टेडियम के नॉर्थ पवेलियन सेक्शन में 1,500 से ज्यादा सीटों वाले हिस्से का नाम ‘हरमनप्रीत कौर स्टैंड’ रखने का मकसद अधिक से अधिक महिला दर्शकों को मैच देखने के लिए प्रोत्साहित करना है। यह देश का पहला खास ‘पिंक स्टैंड’ भी होगा, जो 2027 के आखिर में स्टेडियम खुलने पर पूरी तरह से तैयार हो जाएगा।

    भारतीय कप्तान ने कहा, “मुझे लगता है कि यह एक बहुत बड़ी उपलब्धि है। दुनिया में इस तरह का विचार लाना भी अपने आप में एक बहुत बड़ी बात है। आजकल हम लड़कियों के खेल-कूद में हिस्सा लेने के बारे में तो खूब बातें करते हैं, लेकिन हमने कभी यह नहीं सोचा कि जो लोग मैच देखने आते हैं, उनके लिए चीजें कैसी होनी चाहिए। इसलिए, उन्हें भी ध्यान में रखना और उन्हें भी उतनी ही अहमियत देना बहुत जरूरी है। मुझे लगता है कि लड़कियों को इस स्टैंड में आकर अपनी पसंदीदा टीम का हौसला बढ़ाते देखना बहुत शानदार होगा। यह एक बहुत अच्छी पहल है।”

    दाएं हाथ की बल्लेबाज ने महिला क्रिकेट के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने के महत्व पर भी जोर दिया, जिसमें स्टेडियम, रेजिडेंशियल अकादमियां और ट्रेनिंग की सुविधाएं शामिल हैं, ताकि अगली पीढ़ी की महिला क्रिकेटर्स के लिए रास्ता आसान हो सके।

    उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि यह उनके लिए बहुत अच्छा होगा, क्योंकि उन्हें वे मुश्किल दिन नहीं देखने पड़ेंगे। हमसे पहले हमारे सीनियर्स ने वे दिन देखे थे और हमने भी थोड़े-बहुत देखे थे। तो, अब मुझे लगता है कि ओमेक्स जैसे लोग, वे सच में इस बात का ध्यान रख रहे हैं, ताकि बच्चों के लिए एक अच्छा स्टेडियम बन सके।

  • चूड़ियां सिंदूर के साथ मैदान में उतरीं महिलाएं, नरसिंहपुर का सिंदूर कप बना सशक्तिकरण की मिसाल

    चूड़ियां सिंदूर के साथ मैदान में उतरीं महिलाएं, नरसिंहपुर का सिंदूर कप बना सशक्तिकरण की मिसाल


    नरसिंहपुर। मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले में खेल और महिला सशक्तिकरण का एक अनोखा संगम देखने को मिला जब स्टेडियम ग्राउंड में गृहणियों और कामकाजी महिलाओं ने क्रिकेट के मैदान पर अपने जज्बे का शानदार प्रदर्शन किया। हाथों में चूड़ियां माथे पर सिंदूर और दिल में जीत का जुनून लिए इन महिलाओं ने सिंदूर कप के जरिए यह साबित कर दिया कि प्रतिभा किसी दायरे की मोहताज नहीं होती।

    भारतीय महिला क्रिकेट टीम की महिला क्रिकेट वर्ल्ड कप में शानदार सफलता से प्रेरित होकर आयोजित इस टूर्नामेंट ने जिले में नई ऊर्जा भर दी। आमतौर पर घर परिवार की जिम्मेदारियों में व्यस्त रहने वाली महिलाओं ने जब बल्ला और गेंद थामी तो मैदान पर चौके छक्कों की बारिश होने लगी और दर्शक भी आश्चर्यचकित रह गए।

    स्टेडियम मैदान पर आयोजित सिंदूर कप में जिले की छह विवाहित महिला टीमों ने हिस्सा लिया। इस प्रतियोगिता की खास बात यह रही कि इसमें विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ी महिलाएं शामिल हुईं। एक ओर महिला पुलिसकर्मियों की टीम थी तो दूसरी ओर शिक्षिकाएं और सामाजिक क्षेत्र से जुड़ी महिलाएं मैदान में उतरीं। सभी टीमों ने पूरे जोश और खेल भावना के साथ मुकाबला किया।

    दो दिनों तक चले इस रोमांचक टूर्नामेंट का फाइनल मुकाबला पुलिस इलेवन और शिक्षा विभाग की टीम के बीच खेला गया। मैच के दौरान कभी शिक्षिकाओं की बल्लेबाजी हावी नजर आई तो कभी महिला पुलिसकर्मियों की सटीक गेंदबाजी ने मुकाबले को रोमांचक बना दिया। अंततः कड़े संघर्ष के बाद पुलिस इलेवन टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए सिंदूर कप की ट्रॉफी अपने नाम कर ली।

    इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को घर की चारदीवारी से बाहर निकालकर खेल स्वास्थ्य और आत्मविश्वास से जोड़ना था। टूर्नामेंट के दौरान महिलाओं का उत्साह देखते ही बन रहा था। वे पूरे जोश के साथ खेलते हुए अपने बचपन के दिनों को फिर से जीती नजर आईं।

    सिंदूर कप न केवल एक खेल प्रतियोगिता रहा बल्कि यह महिलाओं के आत्मबल सामूहिकता और सामाजिक भागीदारी का भी प्रतीक बनकर उभरा। इस आयोजन ने यह संदेश दिया कि अगर अवसर मिले तो महिलाएं हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा सकती हैं।