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  • एशियन गेम्स में भारत का जोरदार प्रदर्शन शूटिंग में गोल्ड के बाद कबड्डी के दोनों फाइनल में एंट्री स्क्वैश में भी मेडल पक्का

    एशियन गेम्स में भारत का जोरदार प्रदर्शन शूटिंग में गोल्ड के बाद कबड्डी के दोनों फाइनल में एंट्री स्क्वैश में भी मेडल पक्का


    नई दिल्ली। एशियन गेम्स 2026 में भारत के लिए 25 सितंबर का दिन पदकों और शानदार मुकाबलों से भरा रहा। प्रतियोगिता के इस चरण में भारतीय खिलाड़ियों ने शूटिंग कबड्डी स्क्वैश हॉकी और बॉक्सिंग समेत कई खेलों में अपना दम दिखाया। दिन की शुरुआत ही शूटिंग में बड़ी उपलब्धि के साथ हुई जब कमलजीत और सुरुचि सिंह की जोड़ी ने 10 मीटर एयर पिस्टल मिक्स्ड टीम स्पर्धा में गोल्ड मेडल अपने नाम किया। भारतीय जोड़ी ने 484.6 अंक के एशियन गेम्स रिकॉर्ड के साथ स्वर्ण पदक जीता। यह भारत का शूटिंग में पहला गोल्ड और एशियन गेम्स में कुल दूसरा गोल्ड रहा।

    शूटिंग में भारत को एक और पदक मिला। पुरुषों की 50 मीटर राइफल 3 पोजीशन टीम स्पर्धा में ऐश्वर्य प्रताप सिंह तोमर रुद्रांक्ष पाटिल और नीरज कुमार की तिकड़ी ने सिल्वर मेडल जीता। हालांकि व्यक्तिगत स्पर्धा में ऐश्वर्य प्रताप सिंह तोमर फाइनल तक पहुंचे लेकिन वह पांचवें स्थान पर रहे जबकि नीरज कुमार आठवें स्थान पर रहे। इस तरह शूटिंग में भारत का प्रदर्शन कई पदकों के साथ जारी रहा।

    कबड्डी के मैदान से भी भारत के लिए बड़ी खबर सामने आई। भारतीय महिला टीम ने सेमीफाइनल में नेपाल को 48-24 से हराकर फाइनल में जगह बनाई। इसके बाद पुरुष टीम ने भी थाईलैंड के खिलाफ शानदार प्रदर्शन करते हुए 66-28 की जीत दर्ज की और फाइनल का टिकट हासिल कर लिया। इस तरह एशियन गेम्स में भारतीय महिला और पुरुष दोनों कबड्डी टीमें खिताबी मुकाबले में पहुंच गईं।

    स्क्वैश में भी भारत के खाते में पदक पक्के हुए। अभय सिंह ने पुरुष सिंगल्स के क्वार्टर फाइनल में जापान के रयुनोसुके त्सुकुए को 11-4 11-3 11-6 से हराकर सेमीफाइनल में जगह बनाई। महिला सिंगल्स में अनाहत सिंह ने हमवतन तन्वी खन्ना को 3-0 से हराकर अंतिम चार में प्रवेश किया। मिक्स्ड डबल्स में जोशना चिनप्पा और वेलवन सेंथिलकुमार की जोड़ी ने भी सेमीफाइनल में जगह बनाकर पदक सुनिश्चित किया।

    हॉकी में भी भारतीय महिला टीम ने जापान के खिलाफ 3-1 से जीत दर्ज की। भारत की ओर से लालरेमसियामी इशिका और नवनीत ने गोल किए। इस जीत के साथ भारतीय टीम ने सेमीफाइनल में जगह बनाई। वहीं बॉक्सिंग में सचिन सिवाच ने 60 किलोग्राम वर्ग में मोहम्मद अबू जाजेह को 4-1 से हराकर क्वार्टर फाइनल में प्रवेश किया और वह पदक से एक जीत दूर पहुंच गए।

    टेबल टेनिस में भारत को कुछ सफलता मिली तो कुछ मुकाबलों में निराशा भी हाथ लगी। दिव्या चितले और मनुष शाह की जोड़ी ने सेमीफाइनल में पहुंचकर पदक पक्का किया जबकि मानव ठक्कर का पुरुष सिंगल्स अभियान दूसरे दौर में हार के साथ खत्म हो गया। भारतीय तैराकों ने भी फाइनल में जगह बनाकर उम्मीदें कायम रखीं। साजन प्रकाश पुरुषों की 200 मीटर बटरफ्लाई के फाइनल में पहुंचे जबकि ऋषभ दास और उत्कर्ष पाटिल ने 200 मीटर बैकस्ट्रोक के फाइनल में जगह बनाई।

    25 सितंबर की शुरुआत भारत ने 17 पदकों के साथ की थी और शूटिंग के गोल्ड तथा सिल्वर के बाद पदक संख्या 19 तक पहुंच गई। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार भारत के खाते में अब 2 गोल्ड 8 सिल्वर और 9 ब्रॉन्ज हैं। एशियन गेम्स में भारतीय दल के लिए आगे भी एथलेटिक्स कबड्डी शूटिंग स्क्वैश बैडमिंटन और अन्य खेलों में मुकाबले जारी हैं।

  • भारतीय स्क्वैश के लिए ऐतिहासिक दिन अनाहत सिंह ने जीता विश्व जूनियर खिताब टूटा मिस्र का 13 साल का दबदबा

    भारतीय स्क्वैश के लिए ऐतिहासिक दिन अनाहत सिंह ने जीता विश्व जूनियर खिताब टूटा मिस्र का 13 साल का दबदबा


    नई दिल्ली। भारतीय स्क्वैश को विश्व मंच पर एक नई पहचान दिलाते हुए 18 वर्षीय अनाहत सिंह ने ऐसा इतिहास रच दिया है जिसे लंबे समय तक याद रखा जाएगा। कनाडा के ओंटारियो में आयोजित वर्ल्ड जूनियर स्क्वैश चैंपियनशिप के महिला सिंगल्स का खिताब जीतकर अनाहत इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता की चैंपियन बनने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बन गई हैं। उनकी इस शानदार उपलब्धि पर पूरे देश में खुशी की लहर है और केंद्रीय युवा मामले एवं खेल मंत्री डॉ मनसुख मांडविया ने भी उन्हें विशेष बधाई देते हुए इसे भारतीय खेल इतिहास का गौरवपूर्ण पल बताया है।

    फाइनल मुकाबले में भारत की शीर्ष वरीयता प्राप्त खिलाड़ी और विश्व रैंकिंग में 20वें स्थान पर मौजूद अनाहत सिंह ने मिस्र की दूसरी वरीयता प्राप्त खिलाड़ी रुकैया सलेम को एकतरफा मुकाबले में 11-3 11-7 और 11-9 से हराकर खिताब अपने नाम किया। पूरे मैच के दौरान अनाहत ने शानदार तकनीक आत्मविश्वास और आक्रामक खेल का प्रदर्शन किया। उन्होंने शुरुआत से ही मुकाबले पर अपना नियंत्रण बनाए रखा और प्रतिद्वंद्वी खिलाड़ी को वापसी का कोई बड़ा मौका नहीं दिया।

    इस ऐतिहासिक जीत के बाद केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने सोशल मीडिया पर अनाहत की उपलब्धि की सराहना करते हुए लिखा कि इतिहास रच दिया गया है। उन्होंने कहा कि वर्ल्ड जूनियर स्क्वैश चैंपियनशिप जीतने वाली पहली भारतीय बनने पर अनाहत सिंह को हार्दिक बधाई। यह केवल उनकी व्यक्तिगत सफलता नहीं बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का क्षण है और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा भी है।

    अनाहत की इस जीत ने भारतीय स्क्वैश के कई वर्षों के इंतजार को भी समाप्त कर दिया। वर्ष 2005 में जोशना चिनप्पा के बाद पहली बार कोई भारतीय महिला खिलाड़ी इस प्रतियोगिता के फाइनल में पहुंची और अब 21 साल बाद भारत को इस प्रतियोगिता का चैंपियन भी मिला है। इसके साथ ही मिस्र के खिलाड़ियों का 13 वर्षों से चला आ रहा दबदबा भी समाप्त हो गया जो इस उपलब्धि को और भी खास बना देता है।

    स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया और स्क्वैश रैकेट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया ने भी अनाहत की इस सफलता को भारतीय स्क्वैश के लिए ऐतिहासिक मोड़ बताया है। अधिकारियों का मानना है कि 2028 ओलंपिक में स्क्वैश को शामिल किए जाने से पहले यह जीत भारतीय खिलाड़ियों के आत्मविश्वास को नई ऊंचाई देगी और देश में इस खेल की लोकप्रियता भी बढ़ाएगी।

    अनाहत सिंह ने फाइनल से पहले सेमीफाइनल में भी शानदार प्रदर्शन किया था। उन्होंने मिस्र की बारब सामेह को चार गेम तक चले मुकाबले में हराकर फाइनल में जगह बनाई थी। इसी जीत के साथ वह 21 वर्षों बाद विश्व जूनियर स्क्वैश चैंपियनशिप के फाइनल में पहुंचने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी भी बनी थीं। इसके बाद फाइनल में भी उन्होंने अपना शानदार फॉर्म बरकरार रखा और विश्व चैंपियन बनने का सपना साकार कर लिया।

    अनाहत की इस उपलब्धि का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि वह वर्ष 2010 में अमेरिका की अमांडा सोभी के बाद वर्ल्ड जूनियर स्क्वैश चैंपियनशिप जीतने वाली पहली गैर मिस्र खिलाड़ी भी बन गई हैं। उनकी यह सफलता भारतीय खेल जगत के लिए नई उम्मीद और नई प्रेरणा लेकर आई है। अब देश को उम्मीद है कि अनाहत आने वाले वर्षों में सीनियर स्तर पर भी भारत के लिए कई अंतरराष्ट्रीय खिताब जीतकर तिरंगे का मान बढ़ाएंगी।