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  • राष्ट्रपति द्रौपदी तीन दिवसीय प्रवास पर पहुंचीं श्रीकृष्ण की नगरी, इस्कॉन-प्रेम मंदिर में किए दर्शन

    राष्ट्रपति द्रौपदी तीन दिवसीय प्रवास पर पहुंचीं श्रीकृष्ण की नगरी, इस्कॉन-प्रेम मंदिर में किए दर्शन


    मथुरा।
    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु गुरुवार की शाम तीन दिवसीय प्रवास पर श्रीकृष्ण की नगरी मथुरा पहुंचीं। यहां से सीधे वृंदावन गई, जहां उन्होंने इस्कॉन मंदिर में पूजा-अर्चना करते हुए ठाकुरजी के भव्य दर्शन किए तथा प्रेममंदिर के दर्शन किए। शुक्रवार की सुबह वह बांकेबिहारी जी महाराज के दर्शन पूजा-अर्चना के साथ अन्य कई कार्यक्रमों में भाग लेंगी। राष्ट्रपति की सुरक्षा को लेकर मथुरा पुलिस प्रशासन ने कड़े प्रबंध किए हैं।

    राष्ट्रपति द्रौपदी का गुरुवार शाम को मथुरा में सेना के छावनी परिसर में बने हेलीपैड पर उनका हेलीकॉप्टर उतरा। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, मंत्री गन्ना विकास एवं चीनी मिलें लक्ष्मी नारायण चौधरी, प्रभारी मंत्री/राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बेसिक शिक्षा विभाग संदीप सिंह, राज्यसभा सांसद तेजवीर सिंह ने बुके देकर उनकी अगवानी की। इस मौके पर मथुरा वृन्दावन नगर निगम के महापौर विनोद अग्रवाल, लेफ्टिनेंट जनरल वी हरिहरन, अपर पुलिस महानिदेशक आगरा अनुपम कुलश्रेष्ठ, मंडलायुक्त आगरा नगेन्द्र प्रताप, ग्रुप कैप्टन शिवम मनचंदा, जिलाधिकारी मथुरा चन्द्र प्रकाश सिंह तथा वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मथुरा श्लोक कुमार भी मौजूद थे। इसके बाद राष्ट्रपति का काफिला वृंदावन के लिए रवाना हो गया।

    राष्ट्रपति ने किए इस्कॉन मंदिर दर्शनः राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु एवं राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने वृंदावन स्थित इस्कॉन मंदिर (श्रीश्री कृष्ण बलराम मंदिर) के दर्शन किए। इस्कॉन मंदिर (श्री श्री कृष्ण बलराम मंदिर) में पंचगौड़ा दास, जनार्दन दास, विष्णुनाम दास, शुतकीर्ति दास, रवि लोचन दास एवं देवदत्त स्वामी ने भव्य स्वागत किया। इसके बाद राष्ट्रपति एवं राज्यपाल ने श्री अभयचरणारविंद भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद जी की समाधि स्थल के दर्शन किए तथा समाधि स्थल की परिक्रमा लगाई। परिक्रमा के बाद राष्ट्रपति मुर्मु एवं राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने श्रीश्री कृष्ण बलराम मंदिर/मुख्य मंदिर के दर्शन किए तथा विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। वैदिक मंत्रों के बीच राष्ट्रपति ने पूजन की सामग्री भगवान को अर्पण किया। पूरा मंदिर प्रांगण शुभ मंत्रों से गूंज उठा। यह नजारा देखने में बहुत ही अद्भुत रहा। उन्होंने मंदिर में हाथ जोड़कर प्रभु का स्मरण किया। राष्ट्रपति द्रौपदी एवं राज्यपाल आनंदीबेन ने मंदिर परिसर में बालिकाओं द्वारा किए जा रहे नृत्य(सांस्कृतिक कार्यक्रम) का अवलोकन किया तथा मंदिर में आयोजित कीर्तन को सुना। दर्शन कार्यक्रम में पंचगौड़ा दास, जनार्दन दास, विष्णुनाम दास, शुतकीर्ति दास, रवि लोचन दास, देवदत्त स्वामी, राधागोलोकानंद स्वामी, मुकुंदा दास, जादूनंदन दास, धर्मात्मा दास, पार्थ कृष्णा दास (गौ-सेवक) एवं गणपति दास उपस्थित रहे।

    तय कार्यक्रम के अनुसार 21 मार्च तक राष्ट्रपति तक ब्रज में प्रवास करेंगी। दो दिन वृंदावन में मंदिरों के दर्शन करेंगी। वह संत प्रेमानंद से आध्यात्मिक चर्चा करेंगी। 20 मार्च को वह वृंदावन के उड़िया बाबा आश्रम, नीव करौरी बाबा आश्रम, रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम, वात्सल्य ग्राम जाएंगी। रामकृष्ण मिशन चेरिटेबिल अस्पताल में कैंसर यूनिट का उद्घाटन करेंगी। 21 मार्च की सुबह आठ बजे गोवर्धन प्रस्थान करेंगी। सुबह 9 बजे दानघाटी मंदिर में पूजा अर्चरा करेंगी। इसके बाद गोल्फ कार्ट से परिक्रमा लगाएंगी। ब्रज की पावन धरती पर आध्यात्मिकता और गरिमा का अद्भुत दृश्य देखने को मिलेगा, जब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु श्रीकृष्ण की मनोमयी लीला से प्रकट मानसी गंगा में श्रद्धा अर्पित करेंगी। महज 10 मिनट का यह कार्यक्रम भले ही समय में सीमित हो, लेकिन इसकी धार्मिक महत्ता और सांस्कृतिक संदेश दूर तक गूंजेंगे।

    मुकुट मुखारविंद मंदिर के रिसीवर कपिल चतुर्वेदी के अनुसार, राष्ट्रपति के आगमन पर श्रीजी पीठाचार्य मनीष बाबा उन्हें सबसे पहले मानसी गंगा की पूजा अर्चना कराएंगे। इसके बाद वह मुकुट मुखारविंद मंदिर में विराजमान गिरिराजजी का दूध व रबड़ी से अभिषेक कर विधिवत पूजन करेंगी। पूरे कार्यक्रम को अत्यंत व्यवस्थित ढंग से 10 मिनट में संपन्न कराने की योजना बनाई गई है। भागवत किंकर गोपाल प्रसाद उपाध्याय बताते हैं कि भगवान श्रीकृष्ण ने गंगा को अपने मन से ब्रज में प्रकट किया, जिससे इसका नाम ‘मानसी गंगा’ पड़ा।


    राष्ट्रपति की सुरक्षा में आठ जिलों की फोर्स तैनात : एसएसपी

    इससे पहले बुधवार को वृंदावन से गोवर्धन तक प्रस्तावित राष्ट्रपति के दौरे को लेकर पूरे रूट पर फुल ड्रेस रिहर्सल किया गया। इसमें सुरक्षा, यातायात और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को बारीकी से परखा गया। रिहर्सल के दौरान काफिले में शामिल वाहनों ने निर्धारित मार्ग पर चलकर हर संभावित स्थिति का अभ्यास किया। सुबह से ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी रूट पर तैनात हो गए थे। काफिला वृंदावन से शुरू होकर गोवर्धन तक पहुंचा और इस दौरान मार्ग में आने वाले प्रमुख चौराहों, संकरे रास्तों और भीड़-भाड़ वाले क्षेत्रों का विशेष रूप से निरीक्षण किया गया। राष्ट्रपति के काफिले के लिए ‘जीरो ट्रैफिक’ व्यवस्था लागू करने की तैयारियां भी रिहर्सल के दौरान देखी गईं। इसके तहत काफिले के गुजरने के समय पूरे रूट को आम यातायात के लिए पूरी तरह खाली रखा जाएगा। इसके लिए वैकल्पिक मार्गों और डायवर्जन की योजना पर भी अभ्यास किया गया। रिहर्सल के चलते कई स्थानों पर ट्रैफिक डायवर्जन लागू किए गए। एसएसपी श्लोक कुमार ने बताया कि राष्ट्रपति के दौरे के मद्देनजर आठ जिलों की फोर्स तैनात की गयी है। कई स्थानों पर रूट डायवर्जन लागू रहेगा।

  • एक भारत-श्रेष्ठ भारत का प्रतिबिंब है राष्ट्रीय बालरंग : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    एक भारत-श्रेष्ठ भारत का प्रतिबिंब है राष्ट्रीय बालरंग : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि भोपाल में प्रतिवर्ष होने वाला राष्ट्रीय बालरंग प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ के उद्देश्य को बेहतर तरीके से पूरा कर रहा है। भोपाल का एकता का प्रतिबिंब बन गया है। इस तरह के कार्यक्रम बच्चों में एक-दूसरे के राज्य की संस्कृति को समझने की जिज्ञासा पैदा करते हैं और बच्चों में देश की संस्कृति के प्रति लगाव बढ़ता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शुक्रवार की शाम भोपाल के राष्ट्रीय इंदिरा गांधी मानव संग्रहालय में राष्ट्रीय बालरंग समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने लोक नृत्य पर केन्द्रित प्रतियोगिता के विजेता राज्यों के बच्चों को ट्राफी भेंट की।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश की धरती पर लगभग 5 हजार वर्ष पहले भगवान
     आए। उनकी चौसठ कलाओं के ज्ञान से बच्चों को भारतीय प्राचीन कला को जानने का अवसर मिलेगा। मध्यप्रदेश के लिए गौरव की बात है कि भगवान श्रीकृष्ण की शिक्षा स्थली सांदीपनि आश्रम उज्जैन में है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राष्ट्रीय बालरंग से यह परिसर मिनी भारत का रूप बन जाता है। यह आयोजन हमें अपने देश की सांस्कृतिक विरासत पर गर्व करने का मौका देता है। प्रत्येक राज्य की अपनी नृत्य शैली है, जो बालरंग के मंच पर सामने आयी है। लोक नृत्य आंचलिक संस्कृति की झलक प्रस्तुत करते हैं। विभिन्न राज्यों के बच्चे जब एक स्थल पर एकत्र होते हैं तो वे एक-दूसरे के राज्य के बारे में जानने का प्रयास करते हैं। इस तरह के भाव बच्चों में जिज्ञासा को बढ़ाने का काम करते हैं। उन्होंने कार्यक्रम में शिक्षकों से आग्रह किया कि वे बच्चों को भारत की विविधता के बारे में अधिक से अधिक जानकारी दें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने श्रेष्ठ आयोजन के लिए स्कूल शिक्षा विभाग को बधाई दी।

    स्कूल शिक्षा मंत्री श्री उदय प्रताप सिंह ने देश के विभिन्न राज्यों से आए बच्चों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि शायद ही दुनिया में भारत जैसा देश हो, जिसमें इतने प्रकार की संस्कृतियां आपसी मेल के साथ देखने को मिलती हैं। उन्होंने कहा कि भारत में हर 50 से 75 किलोमीटर में संस्कृति का बदलाव देखने को मिलता है। स्कूल शिक्षा मंत्री ने कहा कि कश्मीर देश के मुकुट के समान है। उन्होंने मध्यप्रदेश की मालवा, बुंदेलखंड, बघेली संस्कृति का भी उल्लेख किया। मंत्री श्री सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का बच्चों के प्रति विशेष लगाव देखने को मिलता है। मुख्यमंत्री अपनी व्यस्तता के बावजूद स्कूल शिक्षा विभाग के कार्यक्रमों में निरंतर शामिल होते हैं।

    राष्ट्रीय बालरंग के विजेता

    भोपाल में हुए राष्ट्रीय बालरंग में प्रथम पुरस्कार झारखंड के छऊ लोकनृत्य को मिला। यह नृत्य झारखंड का राजकीय नृत्य है, जिसमें विशिष्ट मुखोटों का अद्भुत समन्वय देखने को मिलता है। द्वितीय पुरस्कार हरियाणा के घूमर लोकनृत्य को मिला। इस नृत्य में सामाजिक जीवन, प्रेम, तीज-त्यौहार और लोक कथाओं की झलक देखने को मिलती है। तृतीय पुरस्कार असम के बिहू लोकनृत्य को मिला। यह नृत्य असम की जीवंत आत्मा है और वहां पर यह नृत्य बसंत ऋतु के आगमन पर प्रमुखता के साथ किया जाता है। सांत्वना पुरस्कार मध्यप्रदेश के अहीर नृत्य, हिमाचल प्रदेश के नाटी लोकनृत्य और तीसरा सांत्वना पुरस्कार चंडीगढ़ के भांगड़ा, लुड्डी और झूमर नृत्य को मिला।

    राष्ट्रीय बालरंग समारोह में अनेक लोक नृत्यों और गीतों के माध्यम से भारत की संस्कृति के अनेक रंग, मंच पर दिखे और शानदार कला की अभिव्यक्त हुई। कुल 14 राज्य आंध्रप्रदेश, असम, बिहार, छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, झारखण्ड, कर्नाटक, पंजाब, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश एवं 5 केन्द्र शासित प्रदेश पुडुचेरी, दिल्ली, जम्मू कश्मीर, चण्डीगढ़ एवं लक्षदीप के 400 से अधिक शालेय विद्यार्थियों ने अपने राज्यों के नृत्य की प्रस्तुति दी।

    कार्यक्रम में राष्ट्रीय मानव संग्रहालय के निदेशक श्री अमिताभ पांडे, अध्यक्ष नगर निगम भोपाल श्री किशन सूर्यवंशी, आयुक्त लोक शिक्षण श्रीमती शिल्पा गुप्ता और बड़ी संख्या में कलाप्रेमी एवं स्कूली बच्चे उपस्थित थे।