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  • राम मंदिर केस: घोटाले में लिप्त बैंककर्मी को बनाया चढ़ावे की रकम का गणना प्रभारी, बगैर जांच रखे कर्मचारी

    राम मंदिर केस: घोटाले में लिप्त बैंककर्मी को बनाया चढ़ावे की रकम का गणना प्रभारी, बगैर जांच रखे कर्मचारी


    लखनऊ।
    राम मंदिर चढ़ावा चोरी (Ram Mandir offerings theft) केस में जेल भेजे गए आरोपी सुभाष श्रीवास्तव (Subhash Srivastava) को लेकर एसआईटी की विस्तृत जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। सुभाष जब बैंक में था, तब उसे घोटाले के आरोप में बर्खास्त किया गया था। हालांकि बाद में वह कोर्ट से बहाली का आदेश लेकर आया था। ऐसे में सवाल उठता है कि ट्रस्ट ने बिना किसी जांच-पड़ताल के सुभाष को नौकरी पर रखा। वह भी सबसे संवेदनशील कार्य गणना का इंचार्ज बना दिया। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि ट्रस्ट ने किस कदर आंखें मूंदकर काम किया।

    मामले में अब तक कुल आठ आरोपी जेल भेजे गए हैं। इसमें गणना इंचार्ज सुभाष श्रीवास्तव भी शामिल है। गणना प्रक्रिया की देखरेख करने से लेकर नकदी आदि बैंक भिजवाने तक की जिम्मेदारी सुभाष की थी। जांच में सामने आया था कि उसकी मिलीभगत की वजह से आरोपी रकम पार करते रहे थे। वहीं, जब एसआईटी प्रकरण की विस्तृत जांच कर रही है, तो उसमें एक और चौंकाने वाला तथ्य उजागर हुआ। पता चला कि सुभाष सिंडिकेट बैंक में काम करता था। उसी दौरान गबन व घोटाले का एक मामला हुआ था। विभागीय जांच के बाद सुभाष श्रीवास्तव को बैंक से बर्खास्त कर दिया गया था। कार्रवाई के खिलाफ वह कोर्ट पहुंचा था, जहां से उसे बहाली का आदेश मिला था। बहाल होने के बाद उसने नौकरी ज्वाइन की थी। रिटायर होने के बाद वह राम मंदिर में काम करने लगा था।


    प्रमुखता से जांच में शामिल किया

    सूत्रों के अनुसार मंदिर में नौकरी पर लोगों को रखने की प्रक्रिया को एसआईटी ने बेहद अहम माना है। मनचाहे तरीके से तमाम कर्मचारियों को रखा गया था। इसी में सुभाष को भी रखने का मामला सामने आया है। सूत्रों का कहना है कि सुभाष ट्रस्ट के पदाधिकारियों के संपर्क में था। लिहाजा, जब वह रिटायर हुआ तो बिना जांच के उसे नौकरी पर रख लिया गया था। लोग बताते हैं, उसका दावा था कि वह सेवा करता है, इसलिए सैलरी नहीं लेता है। टिन्नू की शह पर सुभाष ही तय करता था कि गणना में किसकी ड्यूटी लगाई जाएगी।

  • मध्य प्रदेश में नया आदेश: मंत्री खुद लिखेंगे अपने स्टाफ की गोपनीय वार्षिक रिपोर्ट, सिर्फ 7 दिन में जमा करना अनिवार्य

    मध्य प्रदेश में नया आदेश: मंत्री खुद लिखेंगे अपने स्टाफ की गोपनीय वार्षिक रिपोर्ट, सिर्फ 7 दिन में जमा करना अनिवार्य


    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने मंत्रालयीन कर्मचारियों की वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट (सीआर) को लेकर अहम निर्देश जारी किए हैं। अब मंत्री स्थापना में पदस्थ कर्मचारियों की सीआर सीधे संबंधित मंत्री द्वारा लिखी जाएगी, जिससे उनके प्रदर्शन का मूल्यांकन सीधे जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा हो सके।

    इस आदेश के अनुसार 31 मार्च 2026 को समाप्त होने वाले वित्त वर्ष के लिए सीआर रिपोर्ट सिर्फ एक हफ्ते में तैयार कर जमा करनी होगी। यह रिपोर्ट 1 अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026 की अवधि को कवर करेगी।

    सीआर तैयार करने वाले कर्मचारी और प्रक्रिया:

    सहायक अनुभाग अधिकारी: रिपोर्ट अनुभाग अधिकारी लिखेंगे, अवर सचिव और उप सचिव जांच करेंगे, अपर सचिव अंतिम मंजूरी देंगे।

    सहायक ग्रेड-1: अनुभाग अधिकारी लिखेंगे, अवर सचिव और उप सचिव जांच करेंगे, अपर सचिव मंजूरी देंगे।

    सहायक ग्रेड-2, ग्रेड-3 और स्टेनोटायपिस्ट: अनुभाग अधिकारी लिखेंगे, अवर सचिव जांच करेंगे, उप सचिव फाइनल करेंगे।

    निज सहायक: जिन अधिकारी के साथ पदस्थ हैं, वही उनकी सीआर लिखेंगे और फाइनल मंजूरी देंगे।

    मंत्री स्थापना में पदस्थ कर्मचारी: संबंधित मंत्री खुद रिपोर्ट लिखेंगे और फाइनल मंजूरी भी देंगे।

    लक्ष्य और महत्व:
    इस नए आदेश का मकसद सीआर प्रक्रिया को पारदर्शी बनाना और मंत्रालयीन कर्मचारियों के प्रदर्शन और कार्यकुशलता का सीधे मूल्यांकन करना है। यह कदम मंत्री स्तर पर निगरानी बढ़ाने और कर्मचारियों की जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।