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  • मरीज के अटेंडर ने दीवार पर किया पेशाब, गुस्साए लोगों ने अस्पताल में घुसकर डॉक्टर-स्टाफ को पीटा

    मरीज के अटेंडर ने दीवार पर किया पेशाब, गुस्साए लोगों ने अस्पताल में घुसकर डॉक्टर-स्टाफ को पीटा


    ग्वालियर।
    मध्य प्रदेश के ग्वालियर के मुरार इलाके में दीवार पर पेशाब करने को लेकर शुरू हुआ विवाद अस्पताल में मारपीट और तोड़फोड़ तक पहुंच गया। आरोप है कि पड़ोसी के घर की दीवार पर पेशाब करने की घटना से नाराज चार लोगों ने श्री साईं मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल में घुसकर डॉक्टर और कर्मचारियों के साथ मारपीट की। आरोपियों ने अस्पताल के मुख्य गेट का शीशा भी तोड़ दिया। घटना अस्पताल में लगे सीसीटीवी कैमरों में कैद हो गई। डॉक्टर की शिकायत पर पुलिस ने चार लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    दीवार पर पेशाब करने से शुरू हुआ विवाद

    घटना 8 सितंबर की रात करीब 10:30 बजे की बताई जा रही है। पंचशील नगर निवासी डॉ. हिरदेश जाटव श्री साईं मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल के संचालक हैं। उनकी शिकायत के मुताबिक, घटना के समय वह और विनोद शर्मा अस्पताल में मौजूद थे। इसी दौरान अस्पताल में भर्ती एक मरीज का अटेंडर पड़ोस में रहने वाले दीपक किरार के मकान की दीवार पर पेशाब करके आया।

    इस बात से नाराज होकर दीपक किरार, बंटी किरार, कालू किरार और अन्नू किरार अस्पताल के बाहर पहुंच गए। आरोप है कि चारों ने वहां मौजूद स्टाफ के साथ गाली-गलौज शुरू कर दी। इसके बाद अस्पताल के मुख्य गेट का शीशा तोड़कर वे अंदर घुस आए और विवाद करने लगे।

    विरोध करने पर डॉक्टर और स्टाफ से मारपीट का आरोप

    डॉ. हिरदेश जाटव के अनुसार, जब उन्होंने और अस्पताल के कर्मचारियों ने आरोपियों को गाली-गलौज करने से रोका, तो वे कथित तौर पर जातिसूचक गालियां देने लगे। विरोध करने पर चारों ने डॉक्टर और स्टाफ के साथ मारपीट शुरू कर दी। घटना के दौरान अस्पताल में अफरा-तफरी मच गई।

    शिकायत के मुताबिक, मारपीट में अस्पताल कर्मचारी सुनील कुशवाह के सिर के पिछले हिस्से में चोट आई। विवेक अहिरवार की बाईं कलाई और पीठ पर चोट लगी, जबकि अभिषेक चौरसिया के बाएं कान के पीछे सिर में चोट आई। करन बाल्मीक की कमर में भी चोट लगने की बात कही गई है।

    घटना के दौरान मौके पर मौजूद ललित मोहन शुक्ला, सागर राजावत और आसपास के अन्य लोगों ने बीच-बचाव किया। इसके बाद स्थिति को संभाला जा सका। अस्पताल में हुई मारपीट और तोड़फोड़ की पूरी घटना सीसीटीवी कैमरों में रिकॉर्ड होने की बात कही गई है।

    चार आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज

    डॉ. हिरदेश जाटव की शिकायत पर मुरार थाना पुलिस ने दीपक किरार, बंटी किरार, कालू किरार और अन्नू किरार के खिलाफ मारपीट, गाली-गलौज, तोड़फोड़ तथा एससी-एसटी एक्ट सहित अन्य संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया है।

    पुलिस अब सीसीटीवी फुटेज के आधार पर घटना की जांच कर रही है। ग्वालियर के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एएसपी) जयराज कुबेर ने भी मामले को लेकर बयान दिया है। पुलिस के अनुसार, जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

  • एफिल टावर में महिला स्टाफ हटाने के विवाद में BAPS को क्लीन चिट, संचालन कंपनी के प्रमुख देंगे इस्तीफा

    एफिल टावर में महिला स्टाफ हटाने के विवाद में BAPS को क्लीन चिट, संचालन कंपनी के प्रमुख देंगे इस्तीफा


    पेरिस।
    एफिल टावर में महिला कर्मचारियों को हटाने से जुड़े विवाद में हिंदू संगठन बोचासनवासी अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था (BAPS) को जांच में क्लीन चिट मिल गई है। जांच में सामने आया है कि संगठन ने एफिल टावर प्रशासन से महिला कर्मचारियों को हटाने की कोई मांग नहीं की थी। पिछले महीने करीब 100 संतों के एफिल टावर दौरे के दौरान महिला कर्मचारियों को कुछ समय के लिए वहां से हटाए जाने के बाद विवाद खड़ा हुआ था। इसके विरोध में कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया था और एफिल टावर एक दिन के लिए बंद रहा था।

    जांच रिपोर्ट के मुताबिक BAPS प्रतिनिधिमंडल के पहुंचने से पहले ही महिला कर्मचारियों को कुछ देर के लिए अपने स्थान से हटने को कहा गया था। रिपोर्ट में कहा गया है कि आपसी सूचना के आदान-प्रदान के दौरान मूल संदेश का अर्थ बदल गया। कर्मचारियों को स्थायी रूप से स्थान छोड़ने के लिए नहीं कहा गया था, बल्कि कुछ मिनटों के लिए एक-दूसरे से अलग रहने को कहा गया था।

    संचालन कंपनी के प्रमुख पैट्रिक ब्रांको रुइवो छोड़ेंगे पद

    एफिल टावर का संचालन करने वाली कंपनी के प्रमुख पैट्रिक ब्रांको रुइवो इस साल के अंत में अपने पद से इस्तीफा देंगे। वह 2018 से एफिल टावर के महानिदेशक के रूप में जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।

    रुइवो के कार्यकाल में हुई आंतरिक जांच में इस दौरे के आयोजन में ‘परिचालन संबंधी खामियों और कमियों’ की बात सामने आई। कंपनी के बोर्ड ने कहा कि इन खामियों के कारण महिला कर्मचारियों को हटाया जाना ‘अस्वीकार्य’ था।

    क्या था पूरा विवाद?

    5 सितंबर को BAPS से जुड़े करीब 100 लोगों के प्रतिनिधिमंडल ने एफिल टावर का निजी दौरा किया था। आरोप था कि संगठन की ओर से दौरे के दौरान महिलाओं के साथ बातचीत सीमित रखने का अनुरोध किया गया था। इसके बाद महिला कर्मचारियों को उनके कार्यस्थल से हटाकर उनकी जगह पुरुष कर्मचारियों को तैनात किए जाने की बात सामने आई थी।

    घटना के बाद यूनियन प्रतिनिधि डायने दावोइन ने महिला कर्मचारियों के साथ इस तरह की घटना दोबारा न होने की मांग की थी। कर्मचारियों के प्रदर्शन के बाद पेरिस शहर के अधिकारियों ने भी मामले की जांच शुरू की।

    एफिल टावर की संचालन कंपनी के बोर्ड अध्यक्ष एरियल वेइल ने कहा कि यहां एक विशेष प्रोटोकॉल विभाग बनाया जाएगा। इसके अलावा लैंगिक समानता को बढ़ावा देने के लिए नए उपाय और प्रशिक्षण कार्यक्रम लागू किए जाएंगे।

    एफिल टावर का स्वामित्व पेरिस नगर प्रशासन के पास है। यहां हर साल करीब 70 लाख पर्यटक पहुंचते हैं।

    100 साल से अधिक पुरानी है BAPS

    BAPS की स्थापना गुजरात में 100 से अधिक वर्ष पहले हुई थी। यह एक सामाजिक-आध्यात्मिक हिंदू संस्था है। संगठन के साधु ब्रह्मचर्य के कड़े नियमों का पालन करते हैं और अनुयायियों से भी निर्धारित नैतिक नियमों का पालन करने की अपेक्षा की जाती है।

  • राम मंदिर केस: घोटाले में लिप्त बैंककर्मी को बनाया चढ़ावे की रकम का गणना प्रभारी, बगैर जांच रखे कर्मचारी

    राम मंदिर केस: घोटाले में लिप्त बैंककर्मी को बनाया चढ़ावे की रकम का गणना प्रभारी, बगैर जांच रखे कर्मचारी


    लखनऊ।
    राम मंदिर चढ़ावा चोरी (Ram Mandir offerings theft) केस में जेल भेजे गए आरोपी सुभाष श्रीवास्तव (Subhash Srivastava) को लेकर एसआईटी की विस्तृत जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। सुभाष जब बैंक में था, तब उसे घोटाले के आरोप में बर्खास्त किया गया था। हालांकि बाद में वह कोर्ट से बहाली का आदेश लेकर आया था। ऐसे में सवाल उठता है कि ट्रस्ट ने बिना किसी जांच-पड़ताल के सुभाष को नौकरी पर रखा। वह भी सबसे संवेदनशील कार्य गणना का इंचार्ज बना दिया। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि ट्रस्ट ने किस कदर आंखें मूंदकर काम किया।

    मामले में अब तक कुल आठ आरोपी जेल भेजे गए हैं। इसमें गणना इंचार्ज सुभाष श्रीवास्तव भी शामिल है। गणना प्रक्रिया की देखरेख करने से लेकर नकदी आदि बैंक भिजवाने तक की जिम्मेदारी सुभाष की थी। जांच में सामने आया था कि उसकी मिलीभगत की वजह से आरोपी रकम पार करते रहे थे। वहीं, जब एसआईटी प्रकरण की विस्तृत जांच कर रही है, तो उसमें एक और चौंकाने वाला तथ्य उजागर हुआ। पता चला कि सुभाष सिंडिकेट बैंक में काम करता था। उसी दौरान गबन व घोटाले का एक मामला हुआ था। विभागीय जांच के बाद सुभाष श्रीवास्तव को बैंक से बर्खास्त कर दिया गया था। कार्रवाई के खिलाफ वह कोर्ट पहुंचा था, जहां से उसे बहाली का आदेश मिला था। बहाल होने के बाद उसने नौकरी ज्वाइन की थी। रिटायर होने के बाद वह राम मंदिर में काम करने लगा था।


    प्रमुखता से जांच में शामिल किया

    सूत्रों के अनुसार मंदिर में नौकरी पर लोगों को रखने की प्रक्रिया को एसआईटी ने बेहद अहम माना है। मनचाहे तरीके से तमाम कर्मचारियों को रखा गया था। इसी में सुभाष को भी रखने का मामला सामने आया है। सूत्रों का कहना है कि सुभाष ट्रस्ट के पदाधिकारियों के संपर्क में था। लिहाजा, जब वह रिटायर हुआ तो बिना जांच के उसे नौकरी पर रख लिया गया था। लोग बताते हैं, उसका दावा था कि वह सेवा करता है, इसलिए सैलरी नहीं लेता है। टिन्नू की शह पर सुभाष ही तय करता था कि गणना में किसकी ड्यूटी लगाई जाएगी।

  • मध्य प्रदेश में नया आदेश: मंत्री खुद लिखेंगे अपने स्टाफ की गोपनीय वार्षिक रिपोर्ट, सिर्फ 7 दिन में जमा करना अनिवार्य

    मध्य प्रदेश में नया आदेश: मंत्री खुद लिखेंगे अपने स्टाफ की गोपनीय वार्षिक रिपोर्ट, सिर्फ 7 दिन में जमा करना अनिवार्य


    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने मंत्रालयीन कर्मचारियों की वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट (सीआर) को लेकर अहम निर्देश जारी किए हैं। अब मंत्री स्थापना में पदस्थ कर्मचारियों की सीआर सीधे संबंधित मंत्री द्वारा लिखी जाएगी, जिससे उनके प्रदर्शन का मूल्यांकन सीधे जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा हो सके।

    इस आदेश के अनुसार 31 मार्च 2026 को समाप्त होने वाले वित्त वर्ष के लिए सीआर रिपोर्ट सिर्फ एक हफ्ते में तैयार कर जमा करनी होगी। यह रिपोर्ट 1 अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026 की अवधि को कवर करेगी।

    सीआर तैयार करने वाले कर्मचारी और प्रक्रिया:

    सहायक अनुभाग अधिकारी: रिपोर्ट अनुभाग अधिकारी लिखेंगे, अवर सचिव और उप सचिव जांच करेंगे, अपर सचिव अंतिम मंजूरी देंगे।

    सहायक ग्रेड-1: अनुभाग अधिकारी लिखेंगे, अवर सचिव और उप सचिव जांच करेंगे, अपर सचिव मंजूरी देंगे।

    सहायक ग्रेड-2, ग्रेड-3 और स्टेनोटायपिस्ट: अनुभाग अधिकारी लिखेंगे, अवर सचिव जांच करेंगे, उप सचिव फाइनल करेंगे।

    निज सहायक: जिन अधिकारी के साथ पदस्थ हैं, वही उनकी सीआर लिखेंगे और फाइनल मंजूरी देंगे।

    मंत्री स्थापना में पदस्थ कर्मचारी: संबंधित मंत्री खुद रिपोर्ट लिखेंगे और फाइनल मंजूरी भी देंगे।

    लक्ष्य और महत्व:
    इस नए आदेश का मकसद सीआर प्रक्रिया को पारदर्शी बनाना और मंत्रालयीन कर्मचारियों के प्रदर्शन और कार्यकुशलता का सीधे मूल्यांकन करना है। यह कदम मंत्री स्तर पर निगरानी बढ़ाने और कर्मचारियों की जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।