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  • महाकाल परिसर के नागचंद्रेश्वर मंदिर में अचानक मची अफरातफरी, दो श्रद्धालु अस्पताल में भर्ती, स्थिति संभालने में जुटा प्रशासन

    महाकाल परिसर के नागचंद्रेश्वर मंदिर में अचानक मची अफरातफरी, दो श्रद्धालु अस्पताल में भर्ती, स्थिति संभालने में जुटा प्रशासन

    मध्य प्रदेश। के उज्जैन में महाकाल मंदिर परिसर स्थित नागचंद्रेश्वर मंदिर में सोमवार को श्रद्धालुओं के बीच अचानक भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। घटना के बाद मौके पर अफरातफरी का माहौल पैदा हो गया और कई श्रद्धालुओं के घायल होने की जानकारी सामने आई है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, लोगों के बीच फैली अफवाह को इस स्थिति की वजह बताया जा रहा है।

    घटना महाकाल परिसर में स्थित नागचंद्रेश्वर मंदिर में उस समय हुई, जब बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए मौजूद थे। अचानक कुछ लोगों के बीच अफवाह फैलने के बाद भीड़ में हलचल बढ़ गई। देखते ही देखते श्रद्धालुओं में आगे निकलने और सुरक्षित स्थान की ओर जाने की कोशिश शुरू हो गई, जिससे स्थिति बिगड़ गई।

    भगदड़ जैसी स्थिति बनने के दौरान कई श्रद्धालु गिर गए और उन्हें चोटें आईं। मौके पर मौजूद लोगों और सुरक्षाकर्मियों ने स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की। घटना की सूचना मिलते ही मंदिर प्रबंधन और प्रशासन भी सक्रिय हो गया तथा परिसर में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सतर्कता बढ़ाई गई।

    उज्जैन के पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा ने बताया कि महाकालेश्वर नागचंद्रेश्वर मंदिर में श्रद्धालुओं के बीच भगदड़ जैसी स्थिति बनने के बाद लोगों के घायल होने की खबर है। उन्होंने बताया कि दो लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस और प्रशासन की ओर से घटना से जुड़ी परिस्थितियों की जानकारी जुटाई जा रही है।

    प्रारंभिक तौर पर अफवाह को घटना की वजह माना जा रहा है, हालांकि स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होने के लिए प्रशासनिक स्तर पर जानकारी जुटाई जा रही है। भीड़ के बीच किसी भी तरह की अफवाह तेजी से फैलने पर ऐसी परिस्थितियां गंभीर रूप ले सकती हैं। इसी वजह से मंदिर परिसर में मौजूद श्रद्धालुओं को संयम बनाए रखने और सुरक्षा व्यवस्था के निर्देशों का पालन करने पर जोर दिया जा रहा है।

    घटना के बाद महाकाल परिसर में प्रशासन और मंदिर प्रबंधन ने सतर्कता बढ़ा दी है। भीड़ को नियंत्रित करने और श्रद्धालुओं की आवाजाही व्यवस्थित रखने के लिए सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। अधिकारियों की प्राथमिकता घायलों को आवश्यक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के साथ-साथ परिसर में सामान्य स्थिति बनाए रखना है।

    नागचंद्रेश्वर मंदिर उज्जैन के महाकाल परिसर का महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है। यहां श्रद्धालुओं की आवाजाही के दौरान भीड़ प्रबंधन बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। किसी भी अफवाह या अचानक पैदा हुई स्थिति को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन और सुरक्षा कर्मचारियों को लगातार निगरानी रखनी पड़ती है।

    फिलहाल घटना में घायल श्रद्धालुओं की स्थिति और घायलों की कुल संख्या को लेकर विस्तृत जानकारी की प्रतीक्षा है। प्रशासन की ओर से घटना के कारणों और पूरे घटनाक्रम को लेकर जानकारी जुटाई जा रही है। जैसे-जैसे आधिकारिक स्तर पर और तथ्य सामने आएंगे, घटना की तस्वीर और स्पष्ट हो सकेगी।

    इस घटना ने धार्मिक स्थलों पर भीड़ प्रबंधन और अफवाहों पर तत्काल नियंत्रण की आवश्यकता को एक बार फिर सामने ला दिया है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन की ओर से परिसर में निगरानी और व्यवस्था बनाए रखने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

  • लखीसराय मंदिर हादसे में आठ महिलाओं की मौत, दो ट्रेनों के आने और बिजली पोल गिरने के बाद बढ़ी अफरा-तफरी

    लखीसराय मंदिर हादसे में आठ महिलाओं की मौत, दो ट्रेनों के आने और बिजली पोल गिरने के बाद बढ़ी अफरा-तफरी

    नई दिल्ली । बिहार के लखीसराय जिले में सावन के तीसरे सोमवार को इंद्र दमनेश्वर महादेव मंदिर अशोक धाम में बड़ा हादसा हो गया। सोमवार सुबह मंदिर परिसर के आसपास अचानक अफरा-तफरी मचने के बाद भगदड़ की स्थिति पैदा हो गई। इस घटना में आठ महिला श्रद्धालुओं की मौत होने की पुष्टि प्रशासन की ओर से की गई है, जबकि नौ लोग गंभीर रूप से घायल बताए गए हैं।

    घटना के बाद शुरुआती स्तर पर यह जानकारी सामने आई कि बिजली के हाईटेंशन तार की चपेट में आने से श्रद्धालु प्रभावित हुए हैं। हालांकि, बाद में जिलाधिकारी शैलेंद्र कुमार और एडीएम नीरज कुमार ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि मौतों की मुख्य वजह करंट लगना नहीं, बल्कि भगदड़ थी। प्रशासन के अनुसार बिजली का पोल गिरने और उसके बाद करंट फैलने की अफवाह ने भीड़ में अचानक डर पैदा कर दिया।

    बताया गया कि हादसे के समय अशोक धाम मंदिर में सावन सोमवार के कारण बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे। इसी दौरान अशोक धाम हाल्ट के आसपास एक ही समय में दोनों दिशाओं से ट्रेनें पहुंचीं। ट्रेनों के आने के कारण वहां लोगों की आवाजाही और भीड़ का दबाव अचानक बढ़ गया। इसी बीच कुछ युवकों के भागने से अफरा-तफरी और तेज हो गई।

    इसी दौरान बिजली का एक पोल गिर गया। पोल गिरने के बाद लोगों के बीच यह बात फैल गई कि बिजली का तार गिर गया है और वहां करंट फैल गया है। प्रशासन के अनुसार उस समय बिजली आपूर्ति बंद थी और संबंधित तार कवर किया हुआ था। इसके बावजूद अफवाह तेजी से भीड़ में फैल गई और श्रद्धालुओं ने सुरक्षित स्थान की ओर भागना शुरू कर दिया।

    अचानक मची भगदड़ में कई लोग एक-दूसरे के ऊपर गिर गए। सबसे ज्यादा प्रभावित महिलाओं की कतार रही। भीड़ के दबाव में दबने से आठ महिला श्रद्धालुओं की जान चली गई। नौ अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। घटना के बाद मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्र में कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बना रहा।

    सूचना मिलते ही जिला प्रशासन और पुलिस की टीमें मौके पर पहुंचीं। स्थानीय लोगों की सहायता से राहत और बचाव कार्य शुरू किया गया। घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज जारी है। प्रशासन ने मृतकों और घायलों की पहचान तथा उनके परिजनों तक सूचना पहुंचाने की प्रक्रिया भी शुरू की।

    जिलाधिकारी ने बताया कि घटना की परिस्थितियों को लेकर विस्तृत जांच की जा रही है। जांच में भीड़ बढ़ने, ट्रेनों के एक साथ आने, बिजली के पोल गिरने और अफवाह फैलने सहित सभी पहलुओं को देखा जाएगा। प्रशासन यह भी पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि भीड़ नियंत्रण और प्रवेश व्यवस्था के दौरान किन परिस्थितियों में दबाव अचानक बढ़ा।

    अशोक धाम मंदिर सावन के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने वाला प्रमुख धार्मिक स्थल है। सावन सोमवार के अवसर पर यहां सामान्य दिनों की तुलना में काफी अधिक भीड़ जुटती है। ऐसे में हादसे ने धार्मिक आयोजनों के दौरान भीड़ प्रबंधन, सुरक्षित आवाजाही और अफवाहों पर तत्काल नियंत्रण की जरूरत को फिर सामने ला दिया है।

    प्रशासन की प्राथमिकता फिलहाल घायलों का उपचार और प्रभावित परिवारों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराना है। साथ ही घटना की उच्चस्तरीय जांच के जरिए यह स्पष्ट करने की कोशिश की जा रही है कि भगदड़ की स्थिति किस क्रम में बनी और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए किन व्यवस्थाओं को मजबूत करने की आवश्यकता है।

  • मैंने पुलिस पर भरोसा किया, आरोप मुझ पर लगा दिए', करूर हादसे पर मुख्यमंत्री विजय ने उठाए सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल

    मैंने पुलिस पर भरोसा किया, आरोप मुझ पर लगा दिए', करूर हादसे पर मुख्यमंत्री विजय ने उठाए सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल

    नई दिल्ली । तमिलनाडु के करूर में वर्ष 2025 में हुई भगदड़ की घटना को लेकर मुख्यमंत्री विजय ने बड़ा बयान देते हुए पुलिस प्रशासन की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि यदि कार्यक्रम के दौरान बढ़ती भीड़ की जानकारी समय रहते उन्हें दी गई होती तो स्थिति को संभाला जा सकता था और संभव है कि इस दुखद हादसे से बचाव हो जाता। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने पुलिस पर भरोसा किया, लेकिन बाद में पूरे घटनाक्रम का आरोप उन्हीं पर लगाया गया।

    करूर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री विजय ने हादसे में जान गंवाने वाले लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित की और पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इस दुर्घटना ने कई परिवारों से उनके बच्चे छीन लिए और यह क्षति ऐसी है जिसकी भरपाई कभी नहीं हो सकती। उनके अनुसार यह केवल एक प्रशासनिक विफलता नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए गहरा आघात है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार पीड़ित परिवारों के साथ पूरी मजबूती से खड़ी है और उन्हें हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था और भीड़ प्रबंधन से जुड़े सभी प्रोटोकॉल की समीक्षा की जाएगी। उन्होंने कहा कि जनसभाओं और बड़े आयोजनों में सुरक्षा व्यवस्था को और प्रभावी बनाने की दिशा में आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

    विजय ने अपने संबोधन में पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि दूसरे जिलों में पुलिस ने समय रहते भीड़ बढ़ने की सूचना देकर प्रशासन को सतर्क किया था, लेकिन करूर में ऐसा नहीं हुआ। उनके अनुसार कार्यक्रम स्थल तक पुलिस ही उन्हें लेकर गई और उन्होंने सुरक्षा एजेंसियों पर पूरा भरोसा किया। यदि समय रहते वास्तविक स्थिति से अवगत कराया गया होता तो हालात अलग हो सकते थे और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त इंतजाम किए जा सकते थे।

    मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर भी निशाना साधते हुए कहा कि इतने संवेदनशील मामले को राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का माध्यम नहीं बनाया जाना चाहिए। उनका कहना था कि किसी भी त्रासदी के बाद प्राथमिकता पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने और भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम सुनिश्चित करने की होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक दल इस घटना को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल करने का प्रयास कर रहे हैं।

    अपने संबोधन के दौरान विजय ने राज्य की प्रमुख राजनीतिक पार्टियों पर भी भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि पार्टी फंड के नाम पर अनियमितताएं की जा रही हैं और जनता के मुद्दों से ध्यान भटकाने का प्रयास हो रहा है। हालांकि उन्होंने कहा कि उनकी सरकार का ध्यान केवल प्रशासनिक जवाबदेही तय करने और जनता की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर केंद्रित रहेगा।

    करूर भगदड़ को लेकर राज्य में पहले से ही राजनीतिक बहस जारी है। मुख्यमंत्री के ताजा बयान के बाद इस मामले में पुलिस की भूमिका, सुरक्षा प्रबंधन और प्रशासनिक जिम्मेदारी को लेकर चर्चा और तेज होने की संभावना है। साथ ही उम्मीद की जा रही है कि जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद हादसे के कारणों और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही भी स्पष्ट हो सकेगी।

  • 'सुप्रीम कोर्ट राजनीतिक लड़ाई का मंच नहीं'-करूर मामले में डीएमके को झटका, मुख्यमंत्री विजय की यात्रा पर रोक लगाने से इनकार

    'सुप्रीम कोर्ट राजनीतिक लड़ाई का मंच नहीं'-करूर मामले में डीएमके को झटका, मुख्यमंत्री विजय की यात्रा पर रोक लगाने से इनकार

    नई दिल्ली । करूर भगदड़ मामले से जुड़े विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय को राहत देते हुए उनकी प्रस्तावित करूर यात्रा पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। अदालत ने इस मामले में दायर याचिका को खारिज करते हुए स्पष्ट कहा कि न्यायपालिका राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का मंच नहीं बन सकती और राजनीतिक दलों को अपने मतभेद लोकतांत्रिक प्रक्रिया के माध्यम से सुलझाने चाहिए।

    सुनवाई के दौरान अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि किसी मुख्यमंत्री की सार्वजनिक गतिविधियों या पीड़ित परिवारों से मिलने जैसे कार्यक्रमों में हस्तक्षेप करना न्यायालय का कार्यक्षेत्र नहीं है। पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि संबंधित मामले की प्राथमिकी में मुख्यमंत्री विजय का नाम आरोपी के रूप में दर्ज नहीं है, इसलिए केवल आशंकाओं के आधार पर उनकी यात्रा पर रोक लगाने का कोई आधार नहीं बनता।

    मुख्यमंत्री विजय करूर भगदड़ में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों से मुलाकात करने तथा प्रभावित परिवारों के लिए आर्थिक सहायता और अन्य राहत उपायों की घोषणा करने वाले हैं। इसी प्रस्तावित दौरे को लेकर आपत्ति जताते हुए याचिका दायर की गई थी। याचिकाकर्ता का तर्क था कि इस तरह की गतिविधियों से मामले की निष्पक्ष जांच प्रभावित हो सकती है।

    अदालत ने इस दलील पर असहमति जताते हुए कहा कि यदि किसी राजनीतिक दल को अपने प्रतिद्वंद्वी के बयानों या कार्यक्रमों पर आपत्ति है तो उसका जवाब राजनीतिक मंच पर दिया जाना चाहिए। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि राजनीतिक विवादों को अदालत में लाने की प्रवृत्ति उचित नहीं है और इससे न्यायिक प्रक्रिया का उद्देश्य प्रभावित हो सकता है।

    सुनवाई के दौरान न्यायालय ने यह भी उल्लेख किया कि करूर भगदड़ मामले की जांच पहले से ही स्वतंत्र एजेंसी के माध्यम से आगे बढ़ रही है। ऐसे में जांच प्रक्रिया को प्रभावित करने संबंधी किसी भी आरोप का मूल्यांकन तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर किया जाएगा, न कि राजनीतिक आशंकाओं के आधार पर। अदालत ने संकेत दिया कि जांच एजेंसियां अपने दायित्वों का निर्वहन स्वतंत्र रूप से करेंगी।

    इस मामले में पहले से जांच की निगरानी के लिए न्यायिक व्यवस्था लागू है, जिससे पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है। अदालत ने कहा कि जब जांच निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के अनुसार चल रही है, तब केवल राजनीतिक मतभेदों के आधार पर अतिरिक्त प्रतिबंध लगाने का कोई औचित्य नहीं बनता।

    सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी को राजनीतिक मामलों में न्यायिक संयम का महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है। अदालत ने दोहराया कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में राजनीतिक दलों के बीच मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन उनका समाधान न्यायालय के बजाय सार्वजनिक विमर्श और राजनीतिक प्रक्रिया के माध्यम से होना चाहिए। इस फैसले के बाद मुख्यमंत्री विजय का करूर दौरा निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार होने का रास्ता साफ हो गया है, जबकि करूर भगदड़ मामले की जांच अपनी निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत जारी रहेगी।

  • उज्जैन में रंग पंचमी के गेर में पटाखा फटने से 5 घायल, भगदड़ जैसी स्थिति

    उज्जैन में रंग पंचमी के गेर में पटाखा फटने से 5 घायल, भगदड़ जैसी स्थिति

    उज्जैन।  उज्जैन में रंग पंचमी के मौके पर आयोजित गेर के दौरान अचानक एक रंगीन पटाखा फट गया, जिससे अफरा-तफरी मच गई। धमाके के कारण कई लोग डर के मारे इधर-उधर भागे और कुछ महिलाएं जमीन पर गिर गईं, जिससे भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। हालांकि, आसपास के लोगों और आयोजकों ने समय रहते स्थिति पर काबू पा लिया।

    इस हादसे में पांच लोग घायल हुए, जिनमें कुछ लोग नीचे गिरने और पटाखे के धमाके के कारण चोटिल हुए। घायलों को तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुंचाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद सभी को सुरक्षित घर भेज दिया गया। अधिकारियों ने बताया कि कोई गंभीर चोट या जानमाल का नुकसान नहीं हुआ।

    स्थानीय प्रशासन और आयोजकों ने कहा कि गेर के दौरान सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम किए गए थे, लेकिन भीड़ और अचानक हुए धमाके के कारण यह छोटा हादसा हुआ। पुलिस ने आगे से पर्व और उत्सव के दौरान और अधिक सतर्कता बरतने की हिदायत दी है।

    स्थानीय प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि भीड़ वाले क्षेत्रों में सावधानी बरतें, बच्चों और बुजुर्गों पर नजर रखें और आतिशबाजी या रंगीन पटाखों के दौरान नियमों का पालन करें। अधिकारियों ने कहा कि सुरक्षा उपायों के कारण बड़े हादसे से बचाव संभव हो सका।

    गेर और रंग पंचमी के अवसर पर उज्जैन में उत्सव का माहौल बना रहा, लेकिन यह घटना लोगों को सतर्क रहने की चेतावनी भी दे गई। प्रशासन और आयोजकों ने भविष्य में ऐसे आयोजनों में सुरक्षा और आपातकालीन इंतजाम और मजबूत करने का भरोसा दिया।

  • नवग्रह शक्तिपीठ कलश यात्रा में भगदड़, एक महिला की मौत; आयोजन में लापरवाही का आरोप

    नवग्रह शक्तिपीठ कलश यात्रा में भगदड़, एक महिला की मौत; आयोजन में लापरवाही का आरोप


    ग्वालियरडबरा । ग्वालियर के डबरा शहर में नवग्रह शक्तिपीठ प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव की शुरुआत कलश यात्रा के साथ हुई, लेकिन यह भव्य आयोजन एक दुखद हादसे में बदल गया। स्टेडियम ग्राउंड से शुरू हुई कलश यात्रा शहर के प्रमुख मार्गों से गुजर रही थी, जिसमें हजारों महिलाएं एक ही रंग की साड़ियों में शामिल थीं। भीड़भाड़ और उत्साह के बीच अचानक एक संकरे मार्ग या चौराहे पर भारी भीड़ जमा हो गई, जिससे अफरा-तफरी मच गई और भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। इस दौरान महिलाओं के बीच धक्का-मुक्की हुई और कई गिर पड़ीं।

    हादसे में एक महिला की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि करीब 5 महिलाएं घायल हो गईं। घायलों को तुरंत सिविल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज जारी है। कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रण में लिया। प्रशासन ने भी जांच शुरू कर दी है।

    मृतक महिला के परिजन मौके पर पहुंचकर आयोजकों और पुलिस प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा किया। उन्होंने कहा कि सुरक्षा व्यवस्था पर्याप्त नहीं थी और भीड़ नियंत्रण के उपाय न के बराबर थे। साथ ही आपातकालीन सुविधाओं की कमी और आयोजन स्थल पर समुचित व्यवस्था न होने का आरोप भी लगाया।

    यह आयोजन पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा के नेतृत्व में आयोजक समिति द्वारा किया जा रहा है। 10 से 20 फरवरी तक चलने वाले इस 11 दिवसीय महोत्सव में धीरेंद्र शास्त्री (बागेश्वर धाम), प्रदीप मिश्रा और कुमार विश्वास जैसे संत-कवि शामिल होंगे। आयोजक समिति ने घटना पर दुख जताया है और मृतक के परिवार को सहायता देने की बात कही है।

    कलेक्टर रुचिका चौहान और एसपी धर्मवीर सिंह यादव पहले ही आयोजन की तैयारियों का जायजा ले चुके थे, लेकिन आज की घटना ने सुरक्षा इंतजामों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासन ने मामले की जांच के साथ-साथ भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा व्यवस्था को और सख्त करने के निर्देश दिए हैं।इस दुखद घटना ने महोत्सव की शुरुआत को ही झकझोर दिया है और लोगों के बीच सुरक्षा के प्रति चिंता बढ़ा दी है।