Tag: Starship

  • एलन मस्क की स्पेसएक्स ने रचा नया इतिहास, स्टारशिप पहली बार पृथ्वी की कक्षा में पहुंचा, 26 स्टारलिंक V3 सैटेलाइट भी तैनात

    एलन मस्क की स्पेसएक्स ने रचा नया इतिहास, स्टारशिप पहली बार पृथ्वी की कक्षा में पहुंचा, 26 स्टारलिंक V3 सैटेलाइट भी तैनात

    नई दिल्ली। एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स ने अंतरिक्ष अभियान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। विशाल अंतरिक्ष यान स्टारशिप पहली बार पृथ्वी की कक्षा में सफलतापूर्वक पहुंचा। इसके साथ ही मिशन के दौरान 26 अगली पीढ़ी के स्टारलिंक V3 सैटेलाइट भी कक्षा में तैनात किए गए। यह उपलब्धि पूरी तरह पुन: उपयोग योग्य प्रक्षेपण प्रणाली विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

    यह उड़ान 28 सितंबर को भारतीय समयानुसार शाम 6:16 बजे शुरू हुई। यह स्टारशिप का 14वां परीक्षण था। मिशन का उद्देश्य केवल अंतरिक्ष यान को कक्षा तक पहुंचाना नहीं था, बल्कि इसके विभिन्न सिस्टम और भविष्य की अंतरिक्ष गतिविधियों से जुड़ी तकनीकों का परीक्षण करना भी था।

    हालांकि उड़ान के दौरान एक तकनीकी चुनौती भी सामने आई। वाहन के छह रैप्टर वैक्यूम यानी आरवी इंजनों में से एक इंजन बंद हो गया। इससे मिशन के दौरान कुछ समय के लिए चुनौती की स्थिति बनी। इसके बावजूद बाकी इंजनों के प्रदर्शन और उनकी स्थिति का आकलन करने के बाद मिशन को जारी रखा गया और स्टारशिप कक्षा तक पहुंचने में सफल रहा।

    स्टारशिप को करीब 275 किलोमीटर की ऊंचाई पर उड़ान भरते हुए पृथ्वी के लगभग छह चक्कर लगाने के लिए तैयार किया गया था। मिशन की शुरुआती योजना करीब 10 घंटे की थी। इसके बाद अंतरिक्ष यान को नियंत्रित तरीके से पृथ्वी के वातावरण में दोबारा प्रवेश कर प्रशांत महासागर में चिली के पश्चिमी तट के पास स्प्लैशडाउन करना था।

    इस मिशन की सबसे अहम उपलब्धियों में 26 स्टारलिंक V3 सैटेलाइट की तैनाती भी शामिल रही। ये सैटेलाइट नई पीढ़ी के स्टारलिंक नेटवर्क का हिस्सा हैं। इन्हें अधिक डेटा क्षमता, ज्यादा पावर और बेहतर नेटवर्क क्षमता के लिए डिजाइन किया गया है। उपलब्ध मिशन विवरण के अनुसार प्रत्येक सैटेलाइट करीब 1 Tbps डाउनलिंक क्षमता जोड़ सकता है।

    स्टारशिप-सुपर हेवी की ऊंचाई करीब 124.4 मीटर यानी 407 फीट है। इसके दो प्रमुख हिस्से हैं—सुपर हेवी बूस्टर और स्टारशिप का ऊपरी चरण। दोनों को भविष्य में तेजी से दोबारा इस्तेमाल किए जाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।

    मिशन में सुपर हेवी बूस्टर की चढ़ाई, स्टेज सेपरेशन, बूस्टबैक बर्न और लैंडिंग बर्न भी महत्वपूर्ण परीक्षणों का हिस्सा थे। पिछले परीक्षणों में सामने आई समस्याओं को देखते हुए हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर में बदलाव किए गए थे।

    स्टारशिप के ऊपरी चरण ने ऑर्बिटल इंसर्शन मैनूवर के साथ 26 स्टारलिंक V3 सैटेलाइट तैनात किए। इसके बाद रैप्टर इंजन की मदद से डीऑर्बिट बर्न और नियंत्रित पुनः प्रवेश की प्रक्रिया पूरी करने की योजना थी। तीन स्टारलिंक V3 सैटेलाइटों में अतिरिक्त कैमरे भी लगाए गए, जिनका इस्तेमाल स्टारशिप की हीट शील्ड की तस्वीरें लेने के लिए किया जाना था।

    कक्षा में पहुंचने के बाद सैटेलाइट अपने एंटीना और सोलर एरे तैनात करेंगे। इसके बाद रेडियो फ्रीक्वेंसी और लेजर लिंक के जरिए ग्राउंड सिस्टम तथा मौजूदा नेटवर्क से संपर्क स्थापित किया जाएगा। ऑर्बिट में जरूरी जांच पूरी होने के बाद कुछ हफ्तों में इनके ग्राहकों को सेवा देने की उम्मीद है।

    स्टारशिप की यह उड़ान भविष्य में पृथ्वी की कक्षा से आगे चांद और मंगल तक इंसानों तथा कार्गो को पहुंचाने की क्षमता विकसित करने के लक्ष्य की दिशा में एक अहम परीक्षण है।

  • एलन मस्क की बड़ी कामयाबी स्टारशिप की सफल उड़ान से नासा के चंद्र मिशन और मंगल अभियान को मिली नई रफ्तार

    एलन मस्क की बड़ी कामयाबी स्टारशिप की सफल उड़ान से नासा के चंद्र मिशन और मंगल अभियान को मिली नई रफ्तार


    नई दिल्ली। स्पेसएक्स ने एक बार फिर अंतरिक्ष विज्ञान की दुनिया में बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए दुनिया के सबसे बड़े और सबसे शक्तिशाली रॉकेट स्टारशिप की 13वीं परीक्षण उड़ान को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। इस मिशन की सबसे खास बात यह रही कि पहली बार स्टारशिप के जरिए कंपनी ने अपने 20 सबसे उन्नत स्टारलिंक इंटरनेट उपग्रहों को अंतरिक्ष में सफलतापूर्वक तैनात किया। इस सफलता को केवल स्पेसएक्स ही नहीं बल्कि वैश्विक अंतरिक्ष उद्योग और नासा के भविष्य के चंद्र अभियानों के लिए भी बेहद अहम माना जा रहा है। अब यह मिशन इस बात का संकेत दे रहा है कि इंसानों को दोबारा चंद्रमा पर भेजने और भविष्य में मंगल ग्रह तक पहुंचाने का सपना तेजी से वास्तविकता के करीब पहुंच रहा है।

    करीब 407 फीट ऊंचे विशालकाय स्टारशिप रॉकेट ने टेक्सास स्थित स्पेसएक्स के स्टारबेस लॉन्च साइट से उड़ान भरी। इससे पहले इंजन में तकनीकी खराबी और खराब मौसम के कारण मिशन को दो बार स्थगित करना पड़ा था लेकिन इस बार मौसम और तकनीकी व्यवस्था दोनों ने साथ दिया और रॉकेट ने सफल उड़ान भरी। लॉन्च के शुरुआती चरण में सभी इंजन पूरी तरह सामान्य तरीके से संचालित हुए जिससे मिशन ने मजबूती के साथ अपनी शुरुआत की।

    हालांकि उड़ान के दौरान पहले चरण यानी बूस्टर की वापसी पूरी तरह योजना के मुताबिक नहीं हो सकी। वापसी के समय सभी इंजन दोबारा सक्रिय नहीं हो पाए जिसके कारण बूस्टर नियंत्रित लैंडिंग करने के बजाय मैक्सिको की खाड़ी में गिर गया। इसके बावजूद मिशन का मुख्य उद्देश्य पूरी तरह सफल रहा क्योंकि बूस्टर से अलग होने के बाद स्टारशिप निर्धारित ऊंचाई तक पहुंचा और लगभग 200 किलोमीटर की ऊंचाई पर एक के बाद एक सभी 20 अत्याधुनिक स्टारलिंक उपग्रहों को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में स्थापित कर दिया।

    करीब एक घंटे की उड़ान पूरी करने के बाद स्टारशिप भारतीय महासागर में सुरक्षित स्प्लैशडाउन करने में भी सफल रहा। खास बात यह रही कि पानी में उतरने के बाद अंतरिक्ष यान कुछ समय तक सतह पर तैरता रहा जिससे इंजीनियरों को कई महत्वपूर्ण तकनीकी जानकारियां जुटाने का अवसर मिला। इस सफलता के बाद स्पेसएक्स के वैज्ञानिकों और इंजीनियरों ने इसे कंपनी के लिए बड़ी तकनीकी उपलब्धि बताया।

    इस मिशन में भेजे गए नए स्टारलिंक उपग्रहों ने अंतरिक्ष में पहले से मौजूद उपग्रहों के साथ लेजर तकनीक के जरिए सफल संपर्क स्थापित किया। इससे भविष्य में इंटरनेट सेवा की गति और गुणवत्ता को और बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। वर्तमान में स्पेसएक्स के दस हजार से अधिक स्टारलिंक उपग्रह दुनिया के कई देशों में हाई स्पीड इंटरनेट सेवा उपलब्ध करा रहे हैं और यह दुनिया का सबसे बड़ा सैटेलाइट नेटवर्क बन चुका है।

    मिशन के दौरान वैज्ञानिकों ने स्टारशिप की हीट शील्ड का भी महत्वपूर्ण परीक्षण किया। कुछ उपग्रहों पर लगाए गए कैमरों ने पृथ्वी के वायुमंडल में दोबारा प्रवेश के दौरान हीट शील्ड की तस्वीरें भेजीं जबकि सेंसरों के जरिए अत्यधिक तापमान और दबाव से जुड़े आंकड़े जुटाए गए। इन जानकारियों का उपयोग भविष्य के मानव मिशनों को और अधिक सुरक्षित बनाने में किया जाएगा।

    यह मिशन नासा के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि आने वाले आर्टेमिस तृतीय अभियान में इसी स्टारशिप का उपयोग अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा की सतह तक पहुंचाने के लिए किया जाना है। दूसरी ओर एलन मस्क का सबसे बड़ा सपना स्टारशिप के जरिए इंसानों को मंगल ग्रह तक पहुंचाना और वहां भविष्य में मानव बस्ती बसाना है। ऐसे में स्टारशिप की यह सफल परीक्षण उड़ान अंतरिक्ष अन्वेषण के नए युग की दिशा में एक और मजबूत कदम मानी जा रही है।